शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

मीडिया में जाने को बेताब है पाकिस्तानी युवा







पाकिस्तानी युवा वर्ग में इलेक्ट्रानिक मीडिया में कॅरियर बनाने का क्रेज है। पत्रकारिता एवं जनसंचार वहां लोकप्रिय कॅरियर का विकल्प है, परंतु इसमें ज्यादातर शहरी तथा मध्यम वर्ग के ही युवक शामिल हो रहे हैं।
ये जानकारी पाकिस्तान के सांस्कृतिक दल -तहरीक -ए -निसवां के साथ आई महिला पत्रकार उजमा मजहर ने दी। वे बुधवार को एमडीयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों से वैचारिक आदान -प्रदान कर रहीं थी।
दिस फोर्ट नाइट इन पाकिस्तान पत्रिका की संपादिका उजमा मजहर ने पाकिस्तान में मीडिया परिदृश्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने वहां कार्यरत मीडिया कर्मियों की चुनौतियों तथा अवसरों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि महिला पत्रकारों के लिए ज्यादा अवसर सॉफ्ट क्षेत्र की पत्रकारिता में है।
संवाद कार्यक्रम में पाकिस्तानी सांस्कृतिक दल की अध्यक्ष शीमा किरमानी ने भारत-पाकिस्तान के साझे विरासत तथा सांस्कृतिक मूल्यों की चर्चा की। उन्होंने आपसी संबंध मजबूत करने के लिए शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर दिया। इस दल में शामिल निदेशक अनवर जाफरी ने बातचीत में भारत-पाकिस्तान के साहित्यिक समानताओं बारे चर्चा की। पाकिस्तानी दल में शामिल रंगकर्मी हफीज ने पाकिस्तान में थिएटर तथा टीवी क्षेत्र के परिदृश्य को सांझा किया।
इस संवाद कार्यक्रम का समन्वयन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर तथा जनसंपर्क निदेशक सुनित मुखर्जी ने किया। उन्होंने बताया कि इस संवाद कार्यक्रम से आपसी समझ विकसित हुई तथा भारतीय उप-महाद्वीप की साझी संस्कृति बारे विद्यार्थियों को पता चला।
विभागाध्यक्ष पत्रकारिता डॉ. सरोजनी नांदल, वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. हरीश कुमार, प्राध्यापक डॉ. देवव्रत, शोधार्थी प्रीति एवं अपर्णा ,छात्रा कुसुम, छात्र मनीष मेहरा, सोनू, रोहित दलाल, कुलदीप एवं बिजेन्द्र तथा जनसंपर्क कर्मी नवीन कुमार ने इस आपसी संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। प्रो. हरीश कुमार तथा डॉ. सरोजनी ने भारतीय मीडिया परिदृश्य बारे पाकिस्तानी दल को बताया। इस अवसर पर एमडीयू की सेवानिृवत्त प्रोफेसर डॉ. निलिमा दहिया, शिक्षाविद डॉ. रमणीक मोहन, डॉ. सुधीर शर्मा, महावीर शर्मा, रंगकर्मी रघुवेंद्र मलिक व नरेश प्रेरणा मौजूद रहे।

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