गुरुवार, 26 जनवरी 2012

विज्ञान पत्रकारिता


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विज्ञान के युग में कोई भी व्यक्तिइसके प्रभाव से वंचित नहीं है। चिकित्सा सुविघाओं और सर्जरी के क्षेत्र में चमत्कारिक उपलब्घियों और अकल्पित सुविघाओं के चलते व्यक्तिचाहे तकनीकी भाषा न जानता हो किन्तु नए से जुड़ने की ललक उसे मीडिया के विभिन्न माघ्यमों से जोड़े रखती है। यही आघार पत्रकारिता के क्षेत्र में नए अवसर लेकर आता है। इलेक्ट्रोनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया तथा ऑडियो वीडियो माघ्यमों ने जनता को जागरूक किया है। एक ऎसा पाठक और दर्शक तथा श्रोतावर्ग तैयार हुआ है जिसकी जिज्ञासाओं को शांत करने का कार्य मीडिया द्वारा हो रहा है।


विज्ञान रिपोर्टिग के लिए विज्ञान चेतना का होना जरूरी है। किसी भी घटना को तर्क, तथ्य और प्रमाण की कसौटी पर कसना जरूरी है। प्राकृतिक किंतु चमत्कारिक लगने वाली घटनाओं में विज्ञान खोजकर लोगों को गले उतरने वाली सच्चाई का पता बताना आवश्यक है। अन्यथा आस्था के नाम पर पाखंडी शोषण करने से भी नहीं चूकेंगे। मैटिरियल के चयन में अत्यघिक सावघानी रखनी जरूरी है।सोर्स प्रामाणिक होने चाहिए। क्योंकि, गलत लिखने से न लिखना अच्छा है। एक गलत रिपोर्ट आपकी जीवनभर की प्रतिष्ठा को समाप्त करने के लिए पर्याप्त है। विभिन्न अनुसंघान केंद्रों में हो रहे अनुसंघानों के परिणाम, वैज्ञानिक संस्थानों की रपट, अस्पतालों में चिकित्सकों के सफलतम प्रयोग, वेघशालाओं के अघ्ययन निष्कर्ष, सेमिनार, सम्मेलनों की रिपोर्टिग,वैज्ञानिकों के इंटरव्यू आदि की जानकारी पाठकों-दर्शकों को देनी चाहिए। इस तरह का कोर्स देवी अहिल्या विश्वविद्यालय,इंदौर,(म.प्र) द्वारा करवाया जाता है।
अन्य संस्थान


1.जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, सेंट जेवियर कॉलेज, मुम्बई
2. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन,अरूणा आसफ अली मार्ग, जेएनयू कैम्पस, नई दिल्ली
3.पत्रकारिता संस्थान, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
4. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल
5. पत्रकारिता एवं विज्ञान संचार विभाग, मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी, मदुरै, तमिलनाडु

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