मंगलवार, 31 मार्च 2020

संकटमोचक तेरे कितने नाम? 😐😉😊😕😀




हनुमान् के कई अर्थ हैं-(१) पराशर संहिता के अनुसार उनके मनुष्य रूप में ९ अवतार हुये थे।
(२) आध्यात्मिक अर्थ तैत्तिरीय उपनिषद् में दिया है-दोनों हनु के बीच का भाग ज्ञान और कर्म की ५-५ इन्द्रियों का मिलन विन्दु है। जो इन १० इन्द्रियों का उभयात्मक मन द्वारा समन्वय करता है, वह हनुमान् है।
(३) ब्रह्म रूप में गायत्री मन्त्र के ३ पादों के अनुसार ३ रूप हैं-स्रष्टा रूप में यथापूर्वं अकल्पयत् = पहले जैसी सृष्टि करने वाला वृषाकपि है। मूल तत्त्व के समुद्र से से विन्दु रूपों (द्रप्सः -ब्रह्माण्ड, तारा, ग्रह, -सभी विन्दु हैं) में वर्षा करता है वह वृषा है। पहले जैसा करता है अतः कपि है। अतः मनुष्य का अनुकरण कार्ने वाले पशु को भी कपि कहते हैं। तेज का स्रोत विष्णु है, उसका अनुभव शिव है और तेज के स्तर में अन्तर के कारण गति मारुति = हनुमान् है। वर्गीकृत ज्ञान ब्रह्मा है या वेद आधारित है। चेतना विष्णु है, गुरु शिव है। उसकी शिक्षा के कारण जो उन्नति होती है वह मनोजव हनुमान् है।
(४) हनु = ज्ञान-कर्म की सीमा। ब्रह्माण्ड की सीमा पर ४९वां मरुत् है। ब्रह्माण्ड केन्द्र से सीमा तक गति क्षेत्रों का वर्गीकरण मरुतों के रूप में है। अन्तिम मरुत् की सीमा हनुमान् है। इसी प्रकार सूर्य (विष्णु) के रथ या चक्र की सीमा हनुमान् है। ब्रह्माण्ड विष्णु के परम-पद के रूप में महाविष्णु है। दोनों हनुमान् द्वारा सीमा बद्ध हैं, अतः मनुष्य (कपि) रूप में भी हनुमान् के हृदय में प्रभु राम का वास है।
(५) २ प्रकार की सीमाओं को हरि कहते हैं-पिण्ड या मूर्त्ति की सीमा ऋक् है,उसकी महिमा साम है-ऋक्-सामे वै हरी (शतपथ ब्राह्मण ४/४/३/६)। पृथ्वी सतह पर हमारी सीमा क्षितिज है। उसमें २ प्रकार के हरि हैं-वास्तविक भूखण्ड जहां तक दृष्टि जाती है, ऋक् है। वह रेखा जहां राशिचक्र से मिलती है वह साम हरि है। इन दोनों का योजन शतपथ ब्राह्मण के काण्ड ४ अध्याय ४ के तीसरे ब्राह्मण में बता या है अतः इसको हारियोजन ग्रह कहते हैं। हारियोजन से होराइजन हुआ है।
(६) हारियोजन या पूर्व क्षितिज रेखा पर जब सूर्य आता है, उसे बाल सूर्य कहते हैं। मध्याह्न का युवक और सायं का वृद्ध है। इसी प्रकार गायत्री के रूप हैं। जब सूर्य का उदय दीखता है, उस समय वास्तव में उसका कुछ भाग क्षितिज रेखा के नीचे रहता है और वायुमण्डल में प्रकाश के वलन के कारण दीखने लगता है। सूर्य सिद्धान्त में सूर्य का व्यास ६५०० योजन कहा है, यह भ-योजन = २७ भू-योजन = प्रायः २१४ किमी. है। इसे सूर्य व्यास १३,९२,००० किमी. से तुलना कर देख सकते हैं। वलन के कारण जब पूरा सूर्य बिम्ब उदित दीखता है तो इसका २००० योजन भाग (प्रायः ४,२८,००० किमी.) हारियोजन द्वारा ग्रस्त रहता है। इसी को कहा है-बाल समय रवि भक्षि लियो ...)। इसके कारण ३ लोकों पृथ्वी का क्षितिज, सौरमण्डल की सीमा तथा ब्रह्माण्ड की सीमा पर अन्धकार रहता है। यहां युग सहस्र का अर्थ युग्म-सहस्र = २००० योजन है जिसकी इकाई २१४ कि.मी. है।
तैत्तिरीय उपनिषद् शीक्षा वल्ली, अनुवाक् ३-अथाध्यात्मम्। अधरा हनुः पूर्वरूपं, उत्तरा हनुरुत्तर रूपम्। वाक् सन्धिः, जिह्वा सन्धानम्। इत्यध्यात्मम्।
अथ हारियोजनं गृह्णाति । छन्दांसि वै हारियोजनश्चन्दांस्येवैतत्संतर्पयति तस्माद्धारियोजनं गृह्णाति (शतपथ ब्राह्मण, ४/४/३/२) एवा ते हारियोजना सुवृक्ति ऋक् १/६१/१६, अथर्व २०/३५/१६)
तद् यत् कम्पायमानो रेतो वर्षति तस्माद् वृषाकपिः, तद् वृषाकपेः वृषाकपित्वम्। (गोपथ ब्राह्मण उत्तर ६/१२)आदित्यो वै वृषाकपिः। ( गोपथ ब्राह्मण उत्तर ६/१०)स्तोको वै द्रप्सः। (गोपथ ब्राह्मण उत्तर २/१२)

हनुमान की जन्म तिथि-
पंचांग में हनुमान जयन्ती की कई तिथियों दी गई हैं पर उनका स्रोत मैंने कहीं नहीं देखा है। पंचांग निर्माताओं के अपने अपने आधार होंगे।  पराशर संहिता, पटल 6 में यह तिथि दी गई है-
तस्मिन् केसरिणो भार्या कपिसाध्वी वरांगना।
अंजना पुत्रमिच्छन्ति महाबलपराक्रमम्।।29।।
वैशाखे मासि कृष्णायां दशमी मन्द संयुता।
पूर्व प्रोष्ठपदा युक्ता कथा वैधृति संयुता।।36।।
तस्यां मध्याह्न वेलायां जनयामास वै सुतम्।
महाबलं महासत्त्वं विष्णुभक्ति परायणम्।।37।।
इसके अनुसार हनुमान जी का जन्म वैशाख मास कृष्ण दशमी तिथि शनिवार (मन्द = शनि) युक्त पूर्व प्रोष्ठपदा (पूर्व भाद्रपद) वैधृति योग में मध्याह्न काल में हुआ।
बाल समय रवि भक्षि लियो तब तीनहु लोक भयो अन्धियारो।
= यदि इसका अर्थ है कि हनुमान जी के जन्म दिन सूर्य ग्रहण हुआ था तो उनका जन्म अमावस्या को ही हो सकता है। दिन के समय ही सूर्य ग्रहण उस स्थान पर दृश्य होगा।
युग सहस्त्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
= सूर्य युग सहस्त्र या 2000 योजन पर नहीं है। तुलसीदास जी ने सूर्य सिद्धांत पढ़ा था जिसमें सूर्य का व्यास 6500 योजन (13,92,000 किमी) दिया है।
इन दोनों को मिला कर अर्थ-
सूर्य की दैनिक गति हमको पूर्व क्षितिज से पश्चिमी क्षितिज तक दीखती है। इसमें सूर्योदय को बाल्यकाल, मध्याह्न में युवा तथा सायंकाल को वृद्धावस्था कहते हैं। सूर्य के अंश रूप गायत्री की इसी प्रकार प्रार्थना होती है।
पूर्व तथा पश्चिमी क्षितिज पृथ्वी सतह पर दृश्य आकाश के दो हनु हैं। इन दो हनु के बीच सूर्य की दैनिक गति का पूरा जीवन समाहित है।
जब हमको सूर्य उदय होते दीखता है तब वह वास्तव में क्षितिज से नीचे होता है, पर वायुमंडल में किरण के आवर्तन से मुड़ने के कारण पहले ही दीखने लगता है। इसको सूर्य सिद्धांत में वलन कहा गया है। सूर्य का व्यास सूर्य सिद्धांत में 6500 योजन है जहाँ योजन का मान प्रायः 214 किमी है। जब व्यास का 2000 योजन क्षितिज के नीचे रहता है तभी पूरा सूर्य बिम्ब दीखने लगता है। यही युग (युग्म) सहस्त्र योजन पर भानु है जिसको क्षितिज रूपी हनु निगल जाता है।

युग सहस्र योजन पल भानु,  लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
युग = युग्म = 2। युग सहस्र योजन = 2000 योजन। सूर्य सिद्धान्त में सूर्य का व्यास 6500 योजन कहा गया है। यहां 1 योजन = 27 × भू योजन। पृथ्वी का व्यास 1600 योजन कहा गया है जो प्रायः 12800 कि.मी. है। अतः भू-योजन = प्रायः 8 कि.मी.।पृथ्वी से चन्द्र तक की दूरी इस माप में है। सूर्य और अन्य ग्रहों की दूरी भ-योजन में है। अन्य ग्रह तारा जैसे दीखते हैं,  अतः उनको तारा-ग्रह कहते हैं। भ = नक्षत्र जो 27 हैं। अतः भ = 27 और भ-योजन = 27 × भू योजन। सूर्य उदय से थोड़ा पहले जब वह क्षितिज के 2000 योजन अर्थात् व्यास का प्रायः 1/3 भाग नीचे होता है तभी दीखने लगता है। इसका कारण प्रकाश किरण का वलन कहा गया है और इसकी माप सूर्य सिद्धान्त में दी गयी है। बल = शक्ति। बल द्वारा ही गति की दिशा बदलती है (न्यूटन का गति का दूसरा नियम),  अतः मुड़ने को वलन या बलन कहते हैं, जैसे पद लचक कमर बल खाये। हनु = ओठ। 2 ओठ के बीच मुंह में सबका ग्रास होता है। पृथ्वी की सतह पर से दीखता पूरा आकाश 2 क्षितिज = हनु के बीच में है, अर्थात् हनुमान द्वारा निगला हुआ है। जब सूर्य क्षितिज से 2000 योजन नीचे अर्थात् हनुमान द्वारा ग्रस्त होता है तभी दीखने लगता है।
 मनुष्य शरीर में ओठों का मध्य 5 ज्ञानेन्द्रिय और 5 कर्मेन्द्रिय का सन्धि स्थान है। ज्ञान और कर्म दोनों का मन द्वारा समन्वय (मनोजव) करने वाला हनुमान है (तैत्तिरीय उपनिषद्, शीक्षा वल्ली)।
पृथ्वी के भीतर 3 क्षेत्र हैं। उसके बाहर के क्षेत्र क्रमशः 2-2 गुणा बड़े हैं (बृहदारण्यक उपनिषद,  अध्याय 3)।33 क्षेत्र तक सौर मण्डल है। प्रत्येक क्षेत्र का प्राण 1-1 देवता है। इन 33 देवताओं के चिह्न क से ह तक के अक्षर हैं। चिह्न रूप में देवों का नगर होने के कारण इस लिपि को देवनागरी कहते हैं। ब्रह्माण्ड की सीमा 49 क्षेत्रों तक है, जिनकी गति या प्राण 49 मरुत् हैं। उनकी सीमा के बाद का क्षेत्र उसकी सन्तान हनुमान है। यहां ब्रह्माण्ड या आकाश गंगा के 2 छोर 2 हनु हैं। उनके भीतर सभी सूर्य जैसे तारा हैं (ऋग्वेद 1/22/20)।
पिता का युग समाप्त होने पर पुत्र का युग आरम्भ होता है। अतः प्रभाव क्षेत्र की सीमा को पुत्र कहते हैं। ठोस ग्रहों में पृथ्वी सबसे बड़ी है। ठोस ग्रहों की सीमा पर मंगल है अतः उसे पृथ्वी का पुत्र (भौम) कहा गया है। जिन ग्रहों के आकर्षण का पृथ्वी पर प्रभाव पड़ता है उनकी सीमा पर शनि है। अतः शनि सूर्य का पुत्र सौरि है। जैसे चन्द्र पृथ्वी की कक्षा में है,  उसी प्रकार सूर्य के सबसे निकट बुध को चन्द का पुत्र कहते हैं। एक आधुनिक सिद्धान्त के अनुसार बुध पहले पृथ्वी की कक्षा में चन्द्रमा के बाहरी क्षेत्र में था। अतः चन्द्र का पुत्र था। धीरे धीरे दूर खिसकने के कारण यह पृथ्वी के आकर्षण क्षेत्र से बाहर निकल गया। शुक्र सूर्य के निकट होने के कारण उसकी कक्षा में नहीं आ पाया और सूर्य का ग्रह बन गया।
[31/03, 09:40] +91 99109 39227: राशन तो 8,10  दिनों का सब ने कोशिश की ही है घर मे रखने की , ग्रोसरी स्टोर्स भी खुले हैं , सामान देर सवेर मिल ही जायेगा , क्योंकि भगवान की दया से हम सब इतने सम्पन तो हैं ही ,

पर एक प्रार्थना है के plz अगर आप रोज़ 2 सब्जी बनाते हैं तो अब 1 बनाइये ,
दाल हो सके तो थोड़ी पतली रखिये , कोशिश कीजिये चावल का एक दाना भी व्यर्थ ना हो , जितना ज़रूरत है उतना पकायें और अगर फिर भी बच जाए तो पहले उस बचे हुए खाने को खाये और ईश्वर को धन्यवाद दें के कम से कम मिल तो  रहा है....

सीमित खाइये , संयमित खाइये ......

हिन्दू धर्म तथा देशहित के लिए महाराणा प्रताप को घास की रोटियां तक खानी पडी लेकिन वे चट्टान की भांति दुश्मन के सामने अडे रहे।

घर पर हैं तो हर घण्टे ये मत पूछिए सुनो , कुछ खाने को है क्या 🙈  समय से खाइये , कम खाइये 🙏

क्योंकि माना आपके पास पैसा है आप खरीद सकते हैं , आप 6 महीने तक का राशन स्टोर कर सकते हैं पर देश के पास संसाधन सीमित हैं .....

ऐसा ना हो हम सब कुछ अपने घरों में इकट्ठा कर लें और कुछ  लोगो को और ज्यादा मुश्किल हो जाये

 अपने बारे में सोचिये पर दूसरों के बारे में भी सोचिये  🙏

परीक्षा का समय है उम्मीद है के हम सब अच्छे मार्क्स के साथ इस परीक्षा में उत्तीण होंगे 🙏

महामारी / लेखक के नाम का उल्लेख नहीं है।






^महामारी^
~~~~~~
एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे
उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा तुम्हारी राजधानी के
बीचो बीच जो पुराना सूखा कुंआ है अगर
अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक
घर से एक – एक बाल्टी दूध उस कुएं में
डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और
लोगों का मरना बन्द हो जायेगा।
राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह
घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है । अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे अगर मै अकेली एक
बाल्टी "पानी" डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ
भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुयी थी। राजा ने जब कुंए
के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है।
दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी।
राजा समझ गया कि इसी कारण से
महामारी दूर नहीं हुई और लोग
अभी भी मर रहे हैं।
दरअसल ऐसा इसलिये हुआ
क्योंकि जो विचार उस बुढ़िया के मन में
आया था वही विचार पूरे राज्य के
लोगों के मन में आ गया और किसी ने
भी कुंए में दूध नहीं डाला।
मित्रों , जैसा इस कहानी में हुआ
वैसा ही हमारे जीवन में
भी होता है। जब
भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे
लोगों को मिल कर करना होता है
तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह
सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और
हमारी इसी सोच की वजह से
स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं।
अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जायें तो पूरे देश में भी ऐसा बदलाव ला सकते हैं जिसकी आज हमें ज़रूरत है।
             
            ।।  🙏🙏।। 

सोमवार, 30 मार्च 2020

सुंदर सम्मोहक सरस भावोद्गगार






प्रस्तुति - कृति /सृष्टि /दृष्टि /अम्मी और मेहर

😷🧴😷🧴🧴



*रेस चाहे गाड़ियों की हो या ज़िंदगी की  ,  जीतते वही लोग हैं जो सही वक़्त पे गियर बदलते  है    ••*
                👉🏻    *शायद*     👈🏻


🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷

*👌

पुराने लोग भावुक थे,*
*तब वो संबंध को संभालते थे।*

*बाद मे लोग प्रॅक्टिकल हो गये*
*तब वो संबंध का फायदा उठाने लग गए।*

*अब तो लोग प्रोफेशनल हो गए*
*फायदा अगर है तो ही संबंध बनाते है*
          ..🌹सुप्रभात 🌹


🙏🏼🌺🙏🏼🌺🙏🏼🌺🙏🏼🌺🙏🏼


*जिन्दगीं को देखने का*
              *सबका*
*अपना अपना नजरिया होता है*

*कुछ  लोग  भावना  में  ही*
*दिल की बात कह देते है,*
              *और...*
   *कुछ  लोग  गीता  पर  हाथ*
   *रख कर भी सच नहीं बोलते*

* Good Morning *


*वक्त नाजुक है ,*
*संभल कर रहिये ,*
*ये युद्ध थोड़ा अलग है ,*
*अलग थलग रहकर लड़िये।*

*दुश्मन इतना सूक्ष्म है ,*
*जो दिखाई भी नहीं देता ,*
*हराने का अचूक अस्त्र ,*
*हर जगह साफ़ सफाई रखिये।*

*संकट भारी है ,*
*लेकिन गुजर जायेगा ,*
*संयम और धैर्य से ही ,*
*इस दुश्मन को हराया जायेगा।*

*खुद बचेंगे ,*
*दूसरे खुदबखुद बचेंगे ,*
*इस लड़ाई में अब ,*
*यत्र सर्वत्र सबका सहयोग चाहिये


😊


आत्मप्रेम
कोई मामूली बात नहीं है।
आत्मप्रेम जीवन में
बड़े सौभाग्य से घटित होता है।
आत्मप्रतिरोध,अहंकार है।
सर्वत्र आत्मप्रतिरोध की शिक्षा है।
इसलिए आत्मप्रेम करने और
इसके लिए प्रोत्साहित करनेवाले को,
अपना परम हितैषी समझना चाहिए।
आत्म प्रेम, प्रेम का सर्वोपरि रुप है।
यही भेद रहित सर्वव्यापी प्रेम है।
पूरी तरह से इसमें डूब जाइये।
आत्मा का आनंद स्वयँ प्रकट हो जायेगा,
ढूंढना नहीं पड़ेगा।
ऐसा आदमी जहाँ भी होगा
आनंद ही बिखेरेगा
हरि ओम

🙏


 🍃🌾🌾

        *30 March 2020*
    *🍁 आज की प्रेरणा 🍁*

दूसरों के द्वारा यदि आप अपना आदर चाहते हैं तो पहले दूसरों का आदर करें।

👉 *आज से हम* सभी का आदर करें...

🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

*#वज़न तो सिर्फ हमारी*
*इच्छाओं का है,*
*बाकी #ज़िन्दगी तो बिल्कुल*
*#हल्की फुल्की ही है*

*#जय जिनेन्द्र*👍🙏🏻
[30/03, 09:15] anami sharan: *

🙏🏻🙏🏻सुबह का प्यारभरा वंदन🙏🏻🙏🏻*



*वो कागज की दौलत ही क्या*
           *जो पानी से गल जाये और*
             *आग से जल जाये*

         *दौलत तो दुआओ की होती हैं*
            *न पानी से गलती हैं*
              *न आग से जलती हैं...*                                                                                                   
         *आनंद लूट ले बन्दे,*
           *प्रभु की बन्दगी का।*
             *ना जाने कब छूट जाये,*
               *साथ जिन्दगी का।।*
 
*"ईश्वर से मेरी एक ही प्रार्थना है..*
*"महंगी घड़ी" सबको दे देना* !
         *लेकिन.....*
*"मुश्किल घड़ी" किसी को न  देना*

       *🌹🌹सुप्रभात🌹🌹*

*🌺🌺आपका दिन मंगलमय हो🌺🌺*




_*रिश्तों*_
_*को जोड़े रखने के लिए...*_

_*कभी*_
_*अंधा,*_
_*कभी गुंगा,*_
_*और कभी बहरा होना पड़ता है...*



मौजूदा हालात पर कुछ कहने की कोशिश...
*उनके माथे पे बोझ और पांव में छाले है*
*हां वही लोग जो मेहनत से कमाने वाले है*

*कहां जाएंगे,क्या खाएंगे,क्या होगा*
*हाल सारा अब तो क़िस्मत के हवाले है*

*हालात से मजबूर पेशे से मजदूर*
*भूख और ग़रीबी ने पोसे और पाले है*

*रोटी की अहमियत क्या ख़ाक समझेंगें*
*जिनके पास ज़रूरत से ज़्यादा निवाले है*

*कान ना बहरे हो जाएं कहीं सुनकर*
*चाहे जिधर देखो बस दर्द है नाले है*

*चाल चली जाती हैं सोच समझ कर*,
*भीख के सिक्के भी वक़्त आने पे उछाले है*

*उनको अपना हक़ है क्यूं नहीं हासिल*,
*क्या हुआ?क्यूं ज़ुबां पे सबकी अब ताले है*
@अपर्णा


 💐*

*अभ्यास हमें बलवान बनाता है* ,
    *दुःख हमें इंसान बनाता है*,
  *हार हमें विनम्रता सिखाती है*,
              *जीत हमारे*
     *व्यक्तित्व को निखारती है*,
                  *लेकिन*
         *सिर्फ़ विश्वास ही है*,
                  *जो हमें*
    *आगे बढने की प्रेरणा देता है*.
              *इसलिए हमेशा*
  *अपने लोगों पर अपने आप पर*
         *और अपने ईश्वर पर*
      *विश्वास रखना चाहिए*

*🙏🏻शुभ प्रभात् 🙏🏻*


*आपका आज का दिन शुभ हो*



ना इलाज है ना दवाई है,*

*ए इश्क तेरे टक्कर की बला आई है...*
[31/03, 11:03] anami sharan: *शहरों का यूं विरान होना भी*,
*क्या गजब कर गया*
*सदियों से तन्हा पड़े घरों को*,
*जैसे आबाद कर गया*।।

🙏🙏🙏🙏🙏



*✍️छाछ में मक्खन हो तो कोई बाधा नहीं,लेकिन मक्खन में छाछ नहीं होनी चाहिए!*

 *कोयले में हीरा आ जाये तो कोई बाधा नहीं,लेकिन हीरा लेते हुए कोयला नहीं आना चाहिए!*

*जहर में मिलावट हो तो कोई बाधा नहीं,लेकिन मीठाई में जहर की मिलावट नहीं होनी चाहिये!*

*पानी में नाव हो तो कोई बाधा नहीं,लेकिन नाव में पानी नहीं होना चाहिये!*

*इसी तरह*
*संसार में रहते हुए प्रभु की याद आती है तो कोई बाधा नहीं,* *परंतु*
*प्रभु भक्ति में संसार की याद नहीं आनी चाहिए..!!*
            🌻🌻🌻🌻🌻🌻
*✍️विचारों को वश में रखिये*
    *"वो तुम्हारें शब्द बनेंगे"*
*शब्दों को वश में रखिये*
    *"वो तुम्हारें कर्म बनेंगे"*
*कर्मों को वश में रखिये*
    *"वो तुम्हारी आदत बनेंगे"*
*आदतों को वश में रखिये*
    *"वो तुम्हारा चरित्र बनेगा"*
*चरित्र को वश में रखिये*
  *"वो तुम्हारा भाग्य बनेंगे..!!*
  *🙏🏿🙏🏾🙏🏼जय जय श्री राधे*🙏🏽🙏🏻🙏




*🙏🏻🙏🏻सुबह का प्यारभरा वंदन🙏🏻🙏🏻*

*कोई तराज़ू नहीं होता*
 *रिश्तों का वज़न तोलने के लिए..*
 *परवाह बताती है, कि*
 *ख्याल का पलड़ा कितना भारी है ||*

      *रब ने सभी को*
*धनुष के आकार के होंठ दिये है......*
   *मगर इनसे शब्दों के बाण*
           *ऐसे  छोड़िये..*
*जो सामने वाले के दिल को छू जाये*
   *ना की दिल को छेद जाये*

*पहाड़ो पर बैठ कर तप करना सरल है...*
*लेकिन परिवार मे सबके बीच रहकर धीरज बनाये रखना कठिन है...*
*और यही तप है।*

*"अपनों में रहे, अपने मे नही"।*

        *🌹🌹सुप्रभात🌹🌹*

*🌺🌺आपका दिन मंगलमय हो🌺🌺*

*🌷🌷घर रहे और स्वस्थ रहे🌷🌷*


राधास्वामी
राधास्वामी
राधास्वामी
।।।।।।।।।





प्रधानमंत्री के नाम एक पत्र



प्रस्तुति - अशोक प्रियदर्शी

मार्च 30, 2020

सेवा में
माननीय नरेंद्र मोदी जी
प्रधानमंत्री
भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली

विषय : इस संवेदनशील समय में छोटे, मझोले और स्वतंत्र पत्रकारों की आर्थिक स्थिति के संदर्भ में

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी,
विनम्र निवेदन है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए आपके द्वारा उठाये जा रहे क़दम सराहनीय हैं।
इन परिस्थितियों में माननीय भारत सरकार द्वारा लॉकडाउन अभियान का पूरा देश पालन कर रहा है। ऐसे में सहयोग की भावना से देश और देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना से लड़ाई में डॉक्टरों, चिकित्साकर्मियों, पुलिस, प्रशासन के साथ ही मीडियाकर्मी भी कंधे-से-कंधा मिलाकर चल रहे हैं और कोरोना से बचाव के तरीक़े तथा संक्रमण की जानकारियाँ लोगों तक पहुँचाने का कार्य सफलतापूर्वक कर रहे हैं। इस समय न्यूज़ चैनल और बड़े समाचार पत्रों के पत्रकारों और इस पेशे से जुड़े अन्य कर्मियों को इतनी तकलीफ़ और परेशानी नहीं है, जितनी कि छोटे, मझोले और स्वतंत्र पत्रकारों को है। हमेशा तंगहाली में गुज़र करने वाले यह लोग आज आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी अपने कर्तव्यपालन में जुटे हुए हैं।
कहने का मतलब यह है कि लोगों को सचेत करने वाले छोटे और मझोले समाचार पत्रों एवं मीडिया संस्थानों के मालिक इस विकट परिस्थिति में अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ दिखाई पड़ रहे हैं। स्वतंत्र पत्रकारों को इस समय और भी मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा इस डिजिटल युग में सोशल मीडिया और वेबसाइट पर समाचार उपलब्ध कराने कराने वाले श्रमजीवी पत्रकारों की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब है। अतः 'दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन' (डीजीए) जो कि नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इंडिया) से सम्बद्ध संस्था है, आपसे अनुरोध करते हुए यह अपील करती है कि छोटे मीडिया संस्थानों, पत्रकारों और स्वतंत्र पत्रकारों की आर्थिक स्थिति के विषय में विचार करें। इससे न केवल इस क्षेत्र में लगे मीडियाकर्मियों को राहत मिलेगी, बल्कि उनको और उनके परिवार को भी आर्थिक सहायता मिल पायेगी।
धन्यवाद
पंडित प्रेम बरेलवी

अपना भारत देश / दिनेश श्रीवास्तव



दोहा-छंद

           "अपना भारत देश"
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सभी स्वस्थ सानंद हों,ईश हरे त्रय ताप।
विकट समय है देश का,मिटे सभी संताप।-१

कभी अँधेरा था कहाँ,इतना बड़ा महान।
रोक सका है आज तक,होता रहा विहान।।-२

संचित भारत देश में,पुन्य प्रसून अगाध।
भष्म सभी होंगे यहाँ, इनसे शीघ्र निदाध।।३


ऋषि मुनियों की भूमि है,अति पवित्र यह देश।
इसके कण कण में भरा,जिजीविषा संदेश।।-४

धैर्य धरा धरती यहाँ,रत्नों की है खान।
पूरित करती है सदा,खान पान अनुपान।।-५

गंगा जल से है जहाँ, बनता अमृत योग।
रोग शोक शीतल करे,करता सदा निरोग।-६

देता हो जिस देश को,सूरज  दिव्य प्रकाश।
निश्चित ही होगा यहाँ, कृमि अणुओं का नाश।।-७

पवन जहाँ इस देश को,देता मलय समीर।
आशंका निर्मूल है,होगा स्वस्थ शरीर।।-८

पत्ता पत्ता है जहाँ, औषधि का भंडार।
देने को आतुर सदा,वृक्ष हमे उपहार।।-९

ऐसे भारत देश में,होगा शीघ्र विनाश।
यहाँ गले में आज जो,फँसा 'कोरोना' फाँस।।-१०

कुछ दिन की ही बात है,घर मे रहो 'दिनेश'।
शीघ्र स्वस्थ हो जाएगा,अपना भारत देश।।-११

                     दिनेश श्रीवास्तव

                     २९ मार्च २०२०
                         7.०० सायं

रविवार, 29 मार्च 2020

मोहकता से भरपूर प्रेरणादायी उक्तियां



 प्रस्तुति - कुसुम सहगल

 ✍✍ *

"पैर" को लगने वाली* *"चोट"......*
  *"संभल" कर चलना* *सिखाती है....,,*
        *....... और........*
  *"मन" को लगने वाली* *"चोट".....*,
 *"समझदारी" से जीना* *सिखाती है....!!!*
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                     *🙏सुप्रभातम् 🙏*


*सादगी सर्वोत्तम सुन्दरता है,*
*क्षमा अतुलनीय बल है,*
*नम्रता सर्वश्रेष्ठ गुण  है*
            *एवं*
*मैत्री सर्वोत्कृष्ट संबंध है ।*


     *🙏सुप्रभात🙏*

रिश्ते बरकरार रखने की
सिर्फ एक ही शर्त  है

भावना देखें, संभावना नहीं।*।


💐💐 *सुप्रभात* 💐💐


*इंसान नहीं बोलता,*
*उसके दिन बोलते हैं..*

*जब दिन नहीं बोलते तो,*
*इंसान लाख बोले,*
*उसकी कोई नहीं सुनता!!*

       *🙏सुप्रभात🙏*

*उम्र थका नही सकती,*
             *ठोकरे गिरा नही सकती.!*

           *अगर जितने की जिद हो तो,*
    *"परिस्थितियाँ" भी हरा नही सकती.!*
Good morng 🌹

*
आप अकेले बोल तो सकते है;*
                   *परन्तु...*
       *बातचीत नहीं कर सकते ।*
  *आप अकेले आनन्दित हो सकते है*
                    *परन्तु...*
       *उत्सव नहीं मना सकते।*
   *आप अकेले मुस्करा तो सकते है*
                    *परन्तु...*
      *हर्षोल्लास नहीं मना सकते.*
           *हम सब एक दूसरे*
           *के बिना कुछ नहीं हैं;*
    *यही रिश्तों की खूबसूरती है...*


      🌹 *सुप्रभात* 🌹


*सलाह के सौ शब्दो से ज्यादा*
          *अनुभव की एक ठोकर*

                   *इंसान को*
         *बहुत मजबूत बनाती है*

                  *सुप्रभात*


जैसै हैं वैसे ही रहिये
क्योंकि मूल प्रति की कीमत
छाया प्रति से अधिक होती है

*सुप्रभात*💐💐

 😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴


*रेस चाहे गाड़ियों की हो या ज़िंदगी की  ,  जीतते वही लोग हैं जो सही वक़्त पे गियर बदलते  है    ••*
                👉🏻    *शायद*     👈🏻


🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷🧴😷


🙏🏼🌺🙏🏼🌺🙏🏼🌺🙏🏼🌺🙏🏼


*जिन्दगीं को देखने का*
              *सबका*
*अपना अपना नजरिया होता है*

*कुछ  लोग  भावना  में  ही*
*दिल की बात कह देते है,*
              *और...*
   *कुछ  लोग  गीता  पर  हाथ*
   *रख कर भी सच नहीं बोलते*

* Good Morning *


पुराने लोग भावुक थे,*
*तब वो संबंध को संभालते थे।*

*बाद मे लोग प्रॅक्टिकल हो गये*
*तब वो संबंध का फायदा उठाने लग गए।*

*अब तो लोग प्रोफेशनल हो गए*
*फायदा अगर है तो ही संबंध बनाते है*

          ..🌹सुप्रभात 🌹

राधास्वामी
राधास्वामी


।।।



।।।।।।








।।।।। 

Good Morning




प्रस्तुति - अभिषेक कुमार

[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

The more you “Leave”…
The more you “Live”…

A single logic to stop getting hurt is
By believing that nothing is mine…!!!

🌹Have a happy day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

A truly rich man is one whose children run into his arms when his arms are empty…..
Don’t worry what the Child will become tomorrow……
He is already someone today…
Enjoy those precious, priceless moments in the now with your child…..

🌹Have a lovely weekend🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Never discourage anyone who makes progress, no matter how slow.

🌹Enjoy your weekend with family and friends🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Sometimes the issue isn’t that your problems are so big, it’s that you see yourself as being so small.

🌹Have a great day ahead🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹GOOD MORNING🌹

YOUR MOTHER IS THE ONLY PERSON IN THE WORLD WHO DOESN’T HAVE TIME TO PRAY FOR HERSELF BECAUSE SHE’S ALWAYS BUSY PRAYING FOR YOU.

🌹HAPPY MOTHER'S DAY🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

You will never understand the damage you did to someone until the same thing is done to you.

🌹Have a blessed day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Not everything will go as you expect in your life. This is why you need to drop expectations and go with the flow of life.

🌹Have a splendid day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Remember that people will always question the good things they hear about you, and believe the bad ones without a second thought.

🌹Have a beautiful day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Nobody can make the whole world Happy. Learn to keep our own self Happy and remain Happy under all circumstances in life.
The key to being Happy is a non-insisting mind, non-complaining mind and a pure mind.

🌹Have a Beautiful morning🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Not everyone is meant to be in your future. Some people are just passing through to teach you lessons in life.

🌹Have a great day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Happiness doesn’t follow the laws of Mathematics. When you start dividing happiness among others, it actually multiplies.

🌹Enjoy Sunday with family n friends🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Things will happen. You can't stop them from happening, but you can control your reaction from making things worse.
React Positively. Live Happily.

🌹Have a Happy Day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Don’t look for someone who will solve all your problems.

Look for someone who won’t let you to face them alone.

🌹Have a happy day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

The size of your problems is nothing compared with your ability to solve them. Don’t overestimate your problems and underestimate yourself.

🌹Have a splendid day🌹
[29/03, 23:31] अभिषेक औरंगाबाद: 🌹Good Morning🌹

Every situation in life is temporary. So, when life is good, make sure you enjoy and receive it fully. And when life is not so good, remember that it will not last forever and better days are on the way…

🌹Have a nice weekend🌹

कोरोनाः या लाक डाउन संकट??




संपूर्ण लाक डाउन संकट के लिए जिम्मेदार कौन?
_________________________________________

विकास वर्मा


अचानक सबकुछ ला‌‌कडाउन के बाद देशभर में मच रहे अफ़रा-तफ़री और संकट के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? करोना महामारी के संभावित खतरों से बचने के लिए क्या सबकुछ लाक डाउन और तुरंत आनन-फानन में लाक डाउन ही एकमात्र, तात्कालिक और सबसे सही विकल्प था या इससे बेहतर कोई और विकल्प या रास्ता हो सकता था? दिल्ली समेत देश भर के तमाम महानगरों और नगरों से लाखों की संख्या में जब गरीब, मजदूर और मेहनतकशों की भीड़ गरीब और बीमारू राज्यों यूपी, बिहार और झारखंड की तरफ सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा भूखे- प्यासे और पैदल ही चले आ रहे हैं तो ये सवाल उठना लाज़िम है। क्या सचमुच सरकार (प्रधानमंत्री मोदी) के पास और कोई विकल्प नहीं बचे थे? क्या सचमुच 130 करोड़ आबादी को करोना (COVID-19) संक्रमण के संभावित खतरों से बचाने और करोना को हराने के लिए संपूर्ण लाकडाउन करने का फैसला फ़ौरी तौर पर लेना जरूरी था, चाहे आम जनता और देश को इसकी कोई भी क़ीमत चुकानी पड़े? इसका जवाब है शायद नहीं।
मेरे ख्याल से प्रधानमंत्री मोदी के पास देश को करोना संकट के संभावित संक्रमण और महामारी के खतरों से बचाने/ निपटने के लिए संपूर्ण लाक डाउन करने से पहले कई विकल्प थे। और अगर उन विकल्पों पर काम किया जाता तो शायद संपूर्ण लाक डाउन की नौबत भी नहीं आती। भारत में करोना या COVID-19 संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को आया था। इससे पहले यह चीन जहां से यह बीमारी दुनिया भर में इंपोर्ट हुई है वहां के बुहान शहर में महामारी का रूप ले चुका था। भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को इस बीमारी की भयावहता और देश में इसके संक्रमण फैलने के संभावित खतरों के बारे में भली-भांति पता (इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स और WHO की ओर से जारी एडवाइजरीज़ से ) था। यानी प्रधानमंत्री मोदी के पास पूरा फरवरी महीना और मार्च का पौने महीना यानी करीब 50 दिन का वक्त इस बीमारी के खतरों से देश की 130 करोड़ आबादी को बचाने के लिए था। इतने समय में सरकार चाहती तो बहुत कुछ कर सकती थी। लेकिन सरकार तबतक सोई रही, जबतक खतरा सिर से ऊपर बहने की स्थिति में नहीं आ गई यानी जब दुनियाभर के एक्सपर्ट्स ये कहने लगे कि भारत करोना वायरस की महामारी का एपिक सेंटर बनने वाला है। अलबत्ता समय रहते ना तो संक्रमण से बचाव के स्तर पर और ना ही देश में स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी के स्तर पर मोदी सरकार ने कुछ किया। एक्सपर्ट्स की मानें तो करोना वायरस का संक्रमण भारत में खुद ही नहीं पनपा है, बल्कि यह चीन और चीन के रास्ते दूसरे मूल्कों से होते हुए भारत की सरजमीं पर पहुंचा है। लिहाजा मोदी सरकार के पास पूरा वक्त था कि वह विदेशों से इस बीमारी/ संक्रमण को लेकर आने वाले पीड़ित लोगों के प्रवेश पर पहले ही पूरी कड़ाई के साथ रोक लगा देती। मसलन, जनवरी/ फरवरी में ही भारत आ रहे लोगों के वीज़ा को रद्द कर दिया जाता या रेस्टिक्ट किया जाता यानी उनकी पूर्ण स्वास्थ्य जांच के बाद ही उन्हें भारत आ रहे विमानों में प्रवेश दिया जाता। विदेश आने-जाने वालों को एडवाइजरी जारी कर दिया जाता कि वह दूसरे देशों की यात्रा नहीं करें और जो देश लौटना चाहते हैं वे जल्द से जल्द भारत वापस लौट आएं। बल्कि फरवरी के अंतिम हफ्ते और मार्च के शुरूआत में ही जब चीन समेत कई देशों में कोरोना के संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला गए थे तो भारत की सरजमीं पर किसी भी देश से किसी शख्स की एंट्री पूरी तरह रोक दी जाती। ऐसा होता तो हम इस महामारी के संभावित खतरों से शायद देश को बचा लेते वह भी बिना संपूर्ण लाकडाउन किए। लेकिन हुआ ठीक इसके उल्टा। इंटरनेशनल फ्लाइट्स 25 मार्च तक भारत में संक्रमित लोगों को लेकर आती रही, तब भी जब देशभर में संपूर्ण लाक डाउन हो चुका था। हाय-तौबा मचने पर इंटरनेशनल फ्लाइट्स रोकी गई है।
कल्पना कीजिए कि अगर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स और बंदरगाहों को समय रहते पूरी तरह बंद करके हम कोरोना महामारी के खतरों से देश को बिना लाकडाउन किए बचा लेते तो शायद यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी उपलब्धि होती। और फिर भी मान लें कि लाक डाउन करने की नौबत आ ही जाती तो क्या इसे चरणबद्ध रूप में नहीं किया जा सकता था? क्या देशवासियों को पहले ही इसके लिए आगाह नहीं किया जा सकता था? अपने घर-परिवार को छोड़कर हजारों किलोमीटर दूर मेहनत मज़दूरी कर रहे लाखों लोगों को उन्हें अपने घर-परिवार लौटने का मौका नहीं दिया जा सकता था? क्या सरकार रेलवे स्टेशनों पर लोगों की पूरी स्क्रीनिंग (स्वास्थ्य जांच) कर उन्हें विशेष ट्रेनें चलाकर गांव नहीं भेज सकती थी? क्या सरकारों को इस अफ़रा-तफ़री का अंदाजा नहीं था? मेरे ख्याल से सरकार के पास तमाम विकल्प और रास्ते भी थे और शायद अंदाजा भी।
 लेकिन लगता है कि मोदी सरकार के पास इस संकट से निपटने की ना तो दूरदृष्टी थी और ना ही कोई रोड मैप। बस जो करना है एक झटके में कर देना है, भले ही उसका परिणाम जो हो। 130 करोड़ जनता और देश को इसकी जो क़ीमत चुकानी पड़े। नोटबंदी की तरह देशबंदी कर दी गई। बिना सोचे-विचारे और समझे। अरे साहब, आपकी अक्ल अगर चरने चली गई थी तो कम से कम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की नकल ही कर लेते, जहां सिंध को छोड़कर अन्य किसी प्रांत में लाक डाउन नहीं किया गया है। अच्छा पाकिस्तान तो हमारा दुश्मन है, इसलिए उसकी नकल हम कैसे कर सकते हैं। अरे साहब,  पाकिस्तान को छोड़िए हम जापान की तो नकल कर ही सकते थे, जहां अभी तक लाक डाउन नहीं किया गया है। क्या जापान में लोगों के जान की कीमत नहीं है? जापान दुनिया का ऐसा देश है जहां हर मौत के लिए सरकार को जवाब देना पड़ता है। लेकिन जापान ने इस महामारी से निपटने के लिए ना सिर्फ खुद को पूरी तरह तैयार कर रखा है, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए लाक डाउन जैसे बेहद सख्त और आत्मघाती कदम उठाने से खुद को अभी तक बचा रखा है। साथ ही देश के नागरिकों को किसी भी संभावित हालात के लिए तैयार रहने का संकेत देकर उन्हें तैयार रहने का मौका दिया है ना कि भारत की तरह जहां रातों-रात लाक डाउन का फरमान सुना कर 130 करोड़ की आबादी को संभलने तक का मौका नहीं दिया गया। क्या एक लोकतांत्रिक देश में इतना कठोर फैसला इस तरह से लिया जाता है? क्या इतनी विविधताओं से भरे देश में जहां करोड़ों लोग दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं, वहां उनके और उनके बच्चों के जीवन को इस तरह लाक डाउन कर दिया जाएगा? देश की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर देने वाला और करोड़ों लोगों को बेरोजगार कर देने वाला फैसला क्या इस तरह लिया जाता है? साहब, सोचिए जरा। आप देश को करोना की महामारी से बचाने के चक्कर में कहीं लाखों लोगों के सामने भूखे पेट भरने की नौबत तो नहीं ला दिए हैं? साहब, माना कि आपको कारपोरेट, शहरी उच्च वर्ग और मध्यम वर्ग की ज्यादा चिंता है। उन्हें जानमाल की हानी नहीं हो आपकी सरकार को इसकी ज्यादा चिंता है, मगर जब कभी भी आप कोई बड़ा फैसला ले रहे होते हैं मसलन नोटबंदी, देशबंदी तो इस समय महानगरों की सड़कों से देश के गांवों की तरफ सड़कों पर चल रहे लाखों गरीब मजदूर देशवासियों के चेहरे की ओर भी तो एक बार ही सही, देख तो लिया होता। इन गरीब- मजदूर लोगों ने भी तो आपको वोट दिया था। इन्हें गरीब होने की सजा तो नहीं दीजिए। आप लौकडाउन कीजिए। सारी सोसाइटियों के गेट बंद कर दीजिए। अमीर और मध्यम वर्ग के लोग इंटरनेट पर वर्क फ्राम होम करेंगे और जरूरी सामान आनलाईन मंगवा लेंगे।
 मगर जिन लाखों लोगों के पास आज भी कोई मुकम्मल घर नहीं है, जो रोज़ दिहाड़ी पर मज़दूरी करते हैं, खाते हैं और खुले आसमान के नीचे ही सोकर गुजारा करते हैं वो कैसे जीएंगे? और अब तो आप भी देख लिए होंगे साहब यह देश ग़रीबों, मज़दूरों और विस्थापितों का है। करोड़ों लोग रोजी-रोटी और रोजगार के लिए अपना गांव-घर छोड़ हजारों- हजार किलोमीटर दूर दूसरे प्रदेशों में रहते हैं। और अगर आपके "मास्टर स्ट्रोक" टाइप राष्ट्र के नाम संदेश से अजनबी शहर में अचानक करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छिन जाए और भविष्य पर संकट के बादल मंडरने लगे तो उसके पास अपना गांव लौटने के सिवा कोई और विकल्प है क्या?
कुछ कीजिए साहेब। ऐसे देश नहीं चल सकता है। नहीं तो आपके फरमान को, लाक डाउन को, कर्फ्यू को लाखों गरीब मजदूर ऐसे ही तोड़ देंगे। आप डंडे के दम पर अपने अदूरदर्शी फैसले और नाकामियों को नहीं छिपा सकते। अभी भी वक्त है किसी फैसले को लेने से पहले पूरा होम वर्क कीजिए। फिलहाल जो लोग देशभर में जहां-तहां फंसे हुए हैं उन्हें जांचकर उनके घर तक ट्रेन, प्लेन, बस जैसे हो उन्हें उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाइए। खाना और पानी दीजिए।

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

How to d Deal with the lockout




Crises Management

How to deal with the Lockout

1. Stop getting frustrated and accept  that it is the need of the hour.
2. Have a briefing Session with your family and explain them that we are not on holiday but We are fighting an important battle against a pandemic,  We Can win only by being united.
3. Conduct a micro level audit of your Kitchen and stocks. Actually take a note and pen and write down. (Please do not be proud of your memory power).
4. Plan the menu for first 2 to 4 days by utilising those long stored items and perishable items.
5. Have a fair estimation of stocks like rice, wheat, oil, sugar, grains etc and plan the menu with simple items. We can definitely enjoy those 4 or 5 course meals later once we pass through this tough time.
6. A wise eater is who limit the food intake to 80%. There should remain nothing as left over. Prepare a sufficient and minimum quantity. As the physical activities are curtailed, so the food intake also to be proportionated.
7. Take Stock of medicines needed for elders and family.
8. FMCGs like Soap, Paste, hair oil, dishwash have to be rationed. Cut the soap bar into half.
9. Prepare a shopping list of only essentials. Those Wall hangings, Nail polishes, New towels, and bedsheets can be bought when normalcy returns.
10. Buy essentials based on sensible estimate. Do not stock it to Iast till Deepavali.
11. Make sure that everyone at home including you spend enough time at sunlight and doing sufficient physical exercise during the course of the day.
12. Dont do that adventurous yogasana by watching Youtube. Physical injury is the last thing you need at this time of crises.
13. When you venture out for Grocery and Pharmacy, Knock the next door and enquire if they need something. By which you will reduce the crowd at shop.
14. Avoid cash transactions. But if Currency is unavoidable put it in a separate pouch and wash your hands immediately after returning from the store.
15.Have faith in your Goverment. If you really runout of supplies, some helpline number will popup. Believe your Government. Do not heed to the negative propoganda in Social Media.
16. Drink plenty of water, Read books, talk more with family (unless you are busy with work from home schedule), Play games which keeps everybody talking and active, rather than getting glued to TV or internet.
17. Obviously when maid is not there share all the house hold work.
18. Set aside a time for Family Prayer. Thank Almighty for keeping us safe. Pray for those who work at outside 24x7, so that we live peacefully in our home. Pray for those who got stranded and suffering from hunger. Pray for them so that Almighty may feed them as He feeds the birds of the sky without fail.
19. Stay happy and send motivating messages to others. Unless it is absolutely necessary do not send pictures and Videos through Whats app and Face Book. Internet is getting overloaded. Keep it simple. Cheers.

कोरोनाः कथा अनुसंधान / भविष्य के लिए




*दृश्य 1 :*
पर्दा खुलता है : चीन बीमार हो जाता है, एक "संकट" में प्रवेश करता है और अपने व्यापार को पंगु बना देता है। पर्दा बंद हो जाता है।
उन
* SCENE II। *
पर्दा खुलता है : चीनी मुद्रा का अवमूल्यन होता है। वे कुछ नहीं करते। पर्दा बंद हो जाता है।

* SCENE III। "
पर्दा खुलता है :: यूरोप और अमरीका की कंपनियों के व्यापार में कमी के कारण  इन कंपनियों के  शेयरों के भाव गिर जाते हैं उनके मूल्य के 40% तक, जो चीन में स्थित हैं। चीन कुछ नहीं करता है।

* SCENE IV। *
पर्दा खुलता है :: दुनिया बीमार है, चीन यूरोप और अमेरिका की कंपनियों के शेयर 30% से भी कम  कीमत पर खरीद लेता है। जब दुनिया में इस बीमारी के कारण सारे व्यापार धंधे बंद पड़ जाते है, पर्दा बंद हो जाता है।

* SCENE V. *
पर्दा खुलता है: चीन ने इस बीमारी को नियंत्रित कर लिया है और अब वह  यूरोप और अमेरिका में कंपनियों का मालिक है।  क्युकी यहां व्यापार धंधे ध्वस्त हो चुके हैं और वह यह तय करता है कि ये कंपनियां चीन में रहें और $ 20,000 बिलियन कमाएं। पर्दा बंद हो जाता है। नाटक इसे कहा जाता है?

 * स्कैन VI: *
 * शह और मात! *

 * फिर से देखना लेकिन सच है *

कल और आज के बीच दो वीडियो जारी हुए हैं, जिनसे मुझे कुछ संदेह हुआ,  कोई जरूरी नहीं, हो सकता है यह सिर्फ मेरी अटकल हो। पर मुझे विश्वास है कि कोरोनो वायरस को जानबूझकर स्वयं चीन द्वारा फैलाया गया था। वो पहले से ही तैयार थे।
 इस नाटक के शुरू होने के तीन हफ्ते में ही उन्होंने 12,000 बिस्तर वाले अस्पताल पहले से ही बनवा लिए केसे? क्या वास्तव में  उन्होंने इनका निर्माण दो सप्ताह में किया? हो ही नहीं सकता। वो  उनका निर्माण पहले से ही कर चुके थे। क्युंकी ये सब एक योजना का हिस्सा था।
कल उन्होंने घोषणा की कि उन्होंने महामारी को रोक दिया है। वे जश्न मनाते हुए वीडियो में दिखाई देते हैं, वे घोषणा करते हैं कि उनके पास एक टीका भी है। सभी आनुवंशिक जानकारी के बिना वे इसे इतनी जल्दी कैसे बना सकते हैं? पर यदि आप खुद ही इस नाटक के निर्माता हों तो यह बिल्कुल मुश्किल भी नहीं है।
 और आज मैंने सिर्फ एक वीडियो देखा जो बताता है कि कैसे जिन पिंग जो की दुनिया के  शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति है, उसने पूरी दुनिया को बगैर किसी युद्ध के घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। कोरोना वायरस के कारण, चीन में पश्चिमी देशों की कंपनियों का कारोबार नाटकीय रूप से गिर गया। जब दुनिया भर के स्टॉक एक्सचेंजों में इन कंपनियों के शेयर के भाव गिर गए तो उन्हें चीनियों द्वारा खरीद लिया गया। अब चीन, अमेरिका और यूरोप में इन्हीं एक्सचेंजों और अपनी पूंजी द्वारा यह डिसाइड करेगा कि बाज़ार का रुख कैसा होगा, औेर कीमतों को निर्धारित करने में सक्षम होगा। पश्चिम को अपनी जरूरत की हर चीज बेचने के लिए।
क्या गजब की योजना ?

हा इसमें  संयोग से कुछ बूढ़े मर गए? कम उम्र के लोग भी मारे गए पर ना तो चीन को इसकी परवाह है और ना ही कोई  बड़ी समस्या। वो इनके परिजनों को थोड़े समय मुआवजे के रूप में पेंशन दे देगा , पर इसके एवज में उसने कितनी बड़ी लूट की है। अभी पश्चिम आर्थिक रूप से पराजित है, संकट में और बीमारी से स्तब्ध। बिना कुछ जाने कि यह सब एक योजना का हिस्सा है और बहुत ही सोच समझ कर बनाई गई परफेक्ट योजना ।
अब चीन 1.18 ट्रिलियन होल्डिंग वाले जापान के बाद अमेरिकी खजाने के सबसे बड़े मालिक है।
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अब देखिए इस नाटक के दूसरे किरदारों का रोल
कैसे रूस और उत्तर कोरिया में करोना नामक घातक बीमारी के केस इतने कम हैं या नहीं हैं जबकि वो तो चीन के सहयोगी हैं उनकी आपस में आवाजाही भी ज्यादा है। फिर भी क्युं उनके यहां करोना ने वैसा विकराल रूप नहीं दिखाया जैसा कि अन्य अमेरिकी और यूरोपीय देशों में देखने को मिला।
क्या इसलिए कि वे चीन के कट्टर सहयोगी हैं ?

दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका / दक्षिण कोरिया / यूनाइटेड किंगडम / फ्रांस / इटली / स्पेन और एशिया गंभीर रूप से प्रभावित हैं

कैसे वुहान अचानक घातक वायरस से मुक्त हुआ ?

चीन का कहना है कि उसके द्वारा उठाए गए कठोर उपाय के कारण वुहान करोना मुक्त हो गया। कैसे वो कौन से उपाय थे, चीन ने उनका खुलासा नहीं किया। चलिए हम इसको इस तरह से देखते हैं कि वुहान ही क्यों जो वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। वो वायरस चीन के दूसरे हिस्सों में क्यूं नहीं फैला ? बीजिंग जो कि चीन की राजधानी थी वहां इसका कोई भी असर देखने को क्यूं नहीं मिला? क्या एक भी संक्रमित बीजिंग तक नहीं पहुंचा ? जबकि पूरी दुनिया में संक्रमण फैल चुका है। या फिर इस नाटक को सिर्फ वुहान के लिए रचा गया था? क्या एक भी संक्रमित व्यक्ति ने नवम्बर से लेकर जनवरी तक वुहान  से चीन के अन्य हिस्सों में यात्रा नहीं की? जबकि इसके उलट ये संक्रमित  दुनिया के लगभग हर कोने में पहुंच गए। वो भी अच्छी खासी तादाद में, कैसे? क्यू ?
बीजिंग में करोना से एक व्यक्ति नहीं मारा गया? और सिर्फ वुहान में हजारों..

यह विचार करना और  दिलचस्प है ., कि अब कैसे चीन ने इस पर काबू पा लिया? उन्होंने इसका क्या इलाज किया और फिर अब उसे व्यापार के लिए खोल भी दिया। आखिर कैसे? जबकि दुनिया भर के डाक्टर इसका इलाज ढूंढ रहे हैं तो चीनियों ने कैसे ये चमत्कार कर लिया?

खैर ..

करोना को हमें व्यापार युद्ध में यूएसए द्वारा चीन की बांह मोड़ने की पृष्ठभूमि में देखना चाहिए...

अमेरिका और उपर्युक्त सभी देश आर्थिक रूप से तबाह हैं...

जल्द ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था चीन की योजना के अनुसार ढह जाएगी।

चीन जानता है कि वह अमेरिका को सैन्य रूप से नहीं हरा सकता क्योंकि अमेरीका वर्तमान में दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश है।

तो उसने यहां वायरस का उपयोग किया ... जो कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और रक्षा क्षमताओं को पंगु बना दे।

मुझे यकीन है कि नैन्सी पेलोसी(जो कि अमेरिकी विपक्षी दल की नेता है)  को भी इसमें एक हिस्सा मिला होगा .... ट्रम्प को पछाड़ने के लिए ...।
 राष्ट्रपति ट्रम्प हमेशा से यह बताते रहे हैं कि कैसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था सभी मोर्चों पर सुधार कर रही थी और नौकरियां संयुक्त राज्य अमेरिका में वापस आ रही थीं।

AMERICA GREAT AGAIN बनाने की उनकी दृष्टि को नष्ट करने का एकमात्र तरीका एक ECONOMIC HAVOC है।

नैन्सी पेलोसी महाभियोग के माध्यम से ट्रम्प को नीचे लाने में असमर्थ थी ..... इसलिए क्यू ना चीन के साथ मिलकर एक वायरस जारी करके ट्रम्प को नष्ट कर दिया जाए ।

वुहान की महामारी एक सोची समझी साजिश थी।

आप ही सोचिए महामारी के चरम पर .... चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ... उन प्रभावी क्षेत्रों का दौरा करने के लिए जाते वक़्त  बस एक साधारण आरएम 1 फेसमास्क पहने हुए थे जबकि इटली में इस महामारी का इलाज कर रहे डाक्टर पूरी तरह कवर होने और सावधानी बरतने के बाद भी संक्रमित हो रहे हैं।

राष्ट्रपति के रूप में उन्हें सिर से पैर तक ढंका जाना चाहिए था ... लेकिन ऐसा नहीं था, क्यों?  क्या इसीलिए की इस महामारी से होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से बचने के लिए उन्होंने पहले से ही कोई टीका लगा रखा था ? इसका मतलब है कि इस महामारी का इलाज पहले ही ढूंढ लिया गया था, बाद में इस वायरस को फैलाया गया है।
शायद यह सब चीन की योजना थी, अब  ECONOMIC COLLAPSE के कगार पर बैठे देशों से अधिकतर शेयर स्टॉक खरीदने के बाद विश्व अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने  की ..... बाद में चीन यह घोषणा करेगा कि उनके मेडिकल शोधकर्ताओं ने वायरस को नष्ट करने का इलाज ढूंढ लिया है और इस तरह इस नाटक की समाप्ति की घोषणा हो जाएगी और बिना किसी युद्ध के चीन ने अपना साम्राज्य पूरी दुनिया में फैला दिया। अब वह अपने देश में बैठे बैठे ही किसी भी देश की अर्थवयवस्था को हिला सकता है। जैसा की अभी भारत ने मलेशिया के साथ किया था। जब मलेशिया के राष्ट्रपति ने धारा 370 के खिलाफ बयान दिए थे, उसके बाद भारत ने वहां के बाजार को हिलाकर रख दिया। ऐसा ही अब चीन भी अपने सभी पश्चिमी गठबंधनों के साथ मिलकर विश्व के अलग अलग  देशों की अर्थव्यवस्था के साथ करेगा, और ये देश बहुत जल्द ही अपने नए मास्टर ..... चीन के गुलाम हो जाएंगे। भविष्य का युद्ध हथियारों से नहीं व्यापार से शेयर स्टॉक से लड़ा जाएगा और चीन ने इस विश्व युद्ध की शुरुआत कर दी है। आपको हमें और देश को समझना होगा कि इस तरह के युद्ध में हमारी रणनीति क्या हो?
-साभार*दृश्य 1 :*
पर्दा खुलता है : चीन बीमार हो जाता है, एक "संकट" में प्रवेश करता है और अपने व्यापार को पंगु बना देता है। पर्दा बंद हो जाता है।
उन
* SCENE II। *
पर्दा खुलता है : चीनी मुद्रा का अवमूल्यन होता है। वे कुछ नहीं करते। पर्दा बंद हो जाता है।

* SCENE III। "
पर्दा खुलता है :: यूरोप और अमरीका की कंपनियों के व्यापार में कमी के कारण इन कंपनियों के शेयरों के भाव गिर जाते हैं उनके मूल्य के 40% तक, जो चीन में स्थित हैं। चीन कुछ नहीं करता है।

* SCENE IV। *
पर्दा खुलता है :: दुनिया बीमार है, चीन यूरोप और अमेरिका की कंपनियों के शेयर 30% से भी कम कीमत पर खरीद लेता है। जब दुनिया में इस बीमारी के कारण सारे व्यापार धंधे बंद पड़ जाते है, पर्दा बंद हो जाता है।

* SCENE V. *
पर्दा खुलता है: चीन ने इस बीमारी को नियंत्रित कर लिया है और अब वह यूरोप और अमेरिका में कंपनियों का मालिक है। क्युकी यहां व्यापार धंधे ध्वस्त हो चुके हैं और वह यह तय करता है कि ये कंपनियां चीन में रहें और $ 20,000 बिलियन कमाएं। पर्दा बंद हो जाता है। नाटक इसे कहा जाता है?

 * स्कैन VI: *
 * शह और मात! *

 * फिर से देखना लेकिन सच है *

कल और आज के बीच दो वीडियो जारी हुए हैं, जिनसे मुझे कुछ संदेह हुआ, कोई जरूरी नहीं, हो सकता है यह सिर्फ मेरी अटकल हो। पर मुझे विश्वास है कि कोरोनो वायरस को जानबूझकर स्वयं चीन द्वारा फैलाया गया था। वो पहले से ही तैयार थे।
 इस नाटक के शुरू होने के तीन हफ्ते में ही उन्होंने 12,000 बिस्तर वाले अस्पताल पहले से ही बनवा लिए केसे? क्या वास्तव में उन्होंने इनका निर्माण दो सप्ताह में किया? हो ही नहीं सकता। वो उनका निर्माण पहले से ही कर चुके थे। क्युंकी ये सब एक योजना का हिस्सा था।
कल उन्होंने घोषणा की कि उन्होंने महामारी को रोक दिया है। वे जश्न मनाते हुए वीडियो में दिखाई देते हैं, वे घोषणा करते हैं कि उनके पास एक टीका भी है। सभी आनुवंशिक जानकारी के बिना वे इसे इतनी जल्दी कैसे बना सकते हैं? पर यदि आप खुद ही इस नाटक के निर्माता हों तो यह बिल्कुल मुश्किल भी नहीं है।
 और आज मैंने सिर्फ एक वीडियो देखा जो बताता है कि कैसे जिन पिंग जो की दुनिया के शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति है, उसने पूरी दुनिया को बगैर किसी युद्ध के घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। कोरोना वायरस के कारण, चीन में पश्चिमी देशों की कंपनियों का कारोबार नाटकीय रूप से गिर गया। जब दुनिया भर के स्टॉक एक्सचेंजों में इन कंपनियों के शेयर के भाव गिर गए तो उन्हें चीनियों द्वारा खरीद लिया गया। अब चीन, अमेरिका और यूरोप में इन्हीं एक्सचेंजों और अपनी पूंजी द्वारा यह डिसाइड करेगा कि बाज़ार का रुख कैसा होगा, औेर कीमतों को निर्धारित करने में सक्षम होगा। पश्चिम को अपनी जरूरत की हर चीज बेचने के लिए।
क्या गजब की योजना ?

हा इसमें संयोग से कुछ बूढ़े मर गए? कम उम्र के लोग भी मारे गए पर ना तो चीन को इसकी परवाह है और ना ही कोई बड़ी समस्या। वो इनके परिजनों को थोड़े समय मुआवजे के रूप में पेंशन दे देगा , पर इसके एवज में उसने कितनी बड़ी लूट की है। अभी पश्चिम आर्थिक रूप से पराजित है, संकट में और बीमारी से स्तब्ध। बिना कुछ जाने कि यह सब एक योजना का हिस्सा है और बहुत ही सोच समझ कर बनाई गई परफेक्ट योजना ।
अब चीन 1.18 ट्रिलियन होल्डिंग वाले जापान के बाद अमेरिकी खजाने के सबसे बड़े मालिक है।
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अब देखिए इस नाटक के दूसरे किरदारों का रोल
कैसे रूस और उत्तर कोरिया में करोना नामक घातक बीमारी के केस इतने कम हैं या नहीं हैं जबकि वो तो चीन के सहयोगी हैं उनकी आपस में आवाजाही भी ज्यादा है। फिर भी क्युं उनके यहां करोना ने वैसा विकराल रूप नहीं दिखाया जैसा कि अन्य अमेरिकी और यूरोपीय देशों में देखने को मिला।
क्या इसलिए कि वे चीन के कट्टर सहयोगी हैं ?

दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका / दक्षिण कोरिया / यूनाइटेड किंगडम / फ्रांस / इटली / स्पेन और एशिया गंभीर रूप से प्रभावित हैं

कैसे वुहान अचानक घातक वायरस से मुक्त हुआ ?

चीन का कहना है कि उसके द्वारा उठाए गए कठोर उपाय के कारण वुहान करोना मुक्त हो गया। कैसे वो कौन से उपाय थे, चीन ने उनका खुलासा नहीं किया। चलिए हम इसको इस तरह से देखते हैं कि वुहान ही क्यों जो वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। वो वायरस चीन के दूसरे हिस्सों में क्यूं नहीं फैला ? बीजिंग जो कि चीन की राजधानी थी वहां इसका कोई भी असर देखने को क्यूं नहीं मिला? क्या एक भी संक्रमित बीजिंग तक नहीं पहुंचा ? जबकि पूरी दुनिया में संक्रमण फैल चुका है। या फिर इस नाटक को सिर्फ वुहान के लिए रचा गया था? क्या एक भी संक्रमित व्यक्ति ने नवम्बर से लेकर जनवरी तक वुहान से चीन के अन्य हिस्सों में यात्रा नहीं की? जबकि इसके उलट ये संक्रमित दुनिया के लगभग हर कोने में पहुंच गए। वो भी अच्छी खासी तादाद में, कैसे? क्यू ?
बीजिंग में करोना से एक व्यक्ति नहीं मारा गया? और सिर्फ वुहान में हजारों..

यह विचार करना और दिलचस्प है ., कि अब कैसे चीन ने इस पर काबू पा लिया? उन्होंने इसका क्या इलाज किया और फिर अब उसे व्यापार के लिए खोल भी दिया। आखिर कैसे? जबकि दुनिया भर के डाक्टर इसका इलाज ढूंढ रहे हैं तो चीनियों ने कैसे ये चमत्कार कर लिया?

खैर ..

करोना को हमें व्यापार युद्ध में यूएसए द्वारा चीन की बांह मोड़ने की पृष्ठभूमि में देखना चाहिए...

अमेरिका और उपर्युक्त सभी देश आर्थिक रूप से तबाह हैं...

जल्द ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था चीन की योजना के अनुसार ढह जाएगी।

चीन जानता है कि वह अमेरिका को सैन्य रूप से नहीं हरा सकता क्योंकि अमेरीका वर्तमान में दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश है।

तो उसने यहां वायरस का उपयोग किया ... जो कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और रक्षा क्षमताओं को पंगु बना दे।

मुझे यकीन है कि नैन्सी पेलोसी(जो कि अमेरिकी विपक्षी दल की नेता है) को भी इसमें एक हिस्सा मिला होगा .... ट्रम्प को पछाड़ने के लिए ...।
 राष्ट्रपति ट्रम्प हमेशा से यह बताते रहे हैं कि कैसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था सभी मोर्चों पर सुधार कर रही थी और नौकरियां संयुक्त राज्य अमेरिका में वापस आ रही थीं।

AMERICA GREAT AGAIN बनाने की उनकी दृष्टि को नष्ट करने का एकमात्र तरीका एक ECONOMIC HAVOC है।

नैन्सी पेलोसी महाभियोग के माध्यम से ट्रम्प को नीचे लाने में असमर्थ थी ..... इसलिए क्यू ना चीन के साथ मिलकर एक वायरस जारी करके ट्रम्प को नष्ट कर दिया जाए ।

वुहान की महामारी एक सोची समझी साजिश थी।

आप ही सोचिए महामारी के चरम पर .... चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ... उन प्रभावी क्षेत्रों का दौरा करने के लिए जाते वक़्त बस एक साधारण आरएम 1 फेसमास्क पहने हुए थे जबकि इटली में इस महामारी का इलाज कर रहे डाक्टर पूरी तरह कवर होने और सावधानी बरतने के बाद भी संक्रमित हो रहे हैं।

राष्ट्रपति के रूप में उन्हें सिर से पैर तक ढंका जाना चाहिए था ... लेकिन ऐसा नहीं था, क्यों? क्या इसीलिए की इस महामारी से होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से बचने के लिए उन्होंने पहले से ही कोई टीका लगा रखा था ? इसका मतलब है कि इस महामारी का इलाज पहले ही ढूंढ लिया गया था, बाद में इस वायरस को फैलाया गया है।
शायद यह सब चीन की योजना थी, अब ECONOMIC COLLAPSE के कगार पर बैठे देशों से अधिकतर शेयर स्टॉक खरीदने के बाद विश्व अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने की ..... बाद में चीन यह घोषणा करेगा कि उनके मेडिकल शोधकर्ताओं ने वायरस को नष्ट करने का इलाज ढूंढ लिया है और इस तरह इस नाटक की समाप्ति की घोषणा हो जाएगी और बिना किसी युद्ध के चीन ने अपना साम्राज्य पूरी दुनिया में फैला दिया। अब वह अपने देश में बैठे बैठे ही किसी भी देश की अर्थवयवस्था को हिला सकता है। जैसा की अभी भारत ने मलेशिया के साथ किया था। जब मलेशिया के राष्ट्रपति ने धारा 370 के खिलाफ बयान दिए थे, उसके बाद भारत ने वहां के बाजार को हिलाकर रख दिया। ऐसा ही अब चीन भी अपने सभी पश्चिमी गठबंधनों के साथ मिलकर विश्व के अलग अलग देशों की अर्थव्यवस्था के साथ करेगा, और ये देश बहुत जल्द ही अपने नए मास्टर ..... चीन के गुलाम हो जाएंगे। भविष्य का युद्ध हथियारों से नहीं व्यापार से शेयर स्टॉक से लड़ा जाएगा और चीन ने इस विश्व युद्ध की शुरुआत कर दी है। आपको हमें और देश को समझना होगा कि इस तरह के युद्ध में हमारी रणनीति क्या हो?
-साभार

सावधान सजग सतर्क और एकांतवास




प्रस्तुति - डा.  सुधीर तोमर


पुरानी कहावत है "Rome was not built in a day",
पर अब नयी आ गयी है  'But it collapsed in a week", ...

तो भैया कर ली तरक्की!! जीत लिए देश!! कर ली औध्योगिक क्रांति!! कमा लिए पेट्रो डॉलर!! बना लिए मॉल्टी नेशनल कारपोरेशन!! कर लिया जिहाद!! बन गए सुपर पावर या अब भी कुछ बाकीं है ?

एक सूक्षम से परजीवी ने आपको घुटनों पर ला दिया ? न एटम बम काम आ रहे न पेट्रो रिफाइनारी ? आपका सारा विकास एक छोटे से जीवाणु से सामना नहीं कर पा रहा ?? क्या हुआ?? निकल गयी हेकड़ी ?? बस इतना ही कमाया था इतने वर्षों में कि एक छोटे से जीव ने घरों में कैद कर दिया ???

मध्य युग में पूरे यूरोप पर राज करने वाला रोम ( इटली ) नष्ट होने के कगार पर आ गया , मध्य पूर्व को अपने कदमों से रौंदने वाला ओस्मानिया साम्राज्य ( ईरान , टर्की ) अब घुटनों पर हैं , जिनके साम्राज्य का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था , उस ब्रिटिश साम्राज्य के वारिश बर्मिंघम पैलेस में कैद हैं , जो स्वयं को आधुनिक युग की सबसे बड़ी शक्ति समझते थे , उस रूस के बॉर्डर सील हैं , जिनके एक इशारे पर दुनिया के नक़्शे बदल जाते हैं , जो पूरी दुनिया के अघोषित चौधरी हैं , उस अमेरिका में लॉक डाउन हैं और जो आने वाले समय में सबको निगल जाना चाहते थे , वो चीन , आज मुँह छिपाता फिर रहा है और सबकी गालियां खा रहा है।

और ये सब आशा भरी नज़रों से देख रहे हैं हमारे सबसे पुराने सनातनी नायक की तरफ , उस भारत की ओर जिसका सदियों अपमान करते रहे , रौंदते रहे , लूटते रहे

और ये सब किया है एक  छोटे से जीव ने जो दिखाई भी नहीं देता, मतलब ये कि एक मामूली से जीव ने आपको आपकी औकात बता दी।
वैसे बता दूँ , ये कोरोना अंत नहीं, आरम्भ है , एक नए युद्ध की , एक ऐसा युद्ध जिसमें आपके हारने की सम्भावना पूरी है।

जैसे जैसे ग्लोवल वार्मिंग बढ़ेगा , ग्लेशियरो के बर्फ पिघलेंगे और आज़ाद होंगे लाखों वर्षों से बर्फ की चादर में कैद दानवीय विषाणु जिनका न आपको परिचय है और न लड़ने की कोई तैयारी!! ये कोरोना तो झांकी है , चेतावनी है , उस आने वाली विपदा की , जिसे आपने जन्म दिया है।

मेनचेस्टर की औध्योगिक क्रांति और हारवर्ड की इकोनॉमिक्स संसार को अंत के मुहाने पे ले आयी ।।।बधाई ।

और जानते हैं, इस आपदा से लड़ने का तरीका कहाँ छुपा है ??

तक्षशिला के खंडहरो में , नालंदा की राख में , शारदा पीठ के अवशेषों में , मार्तण्डय के पत्थरों में ।।

 सूक्षम एवं परजीवियों से मनुष्य का युद्ध नया नहीं है। ये तो सृष्टि के आरम्भ से अनवरत चल रहा है और सदैव चलता रहेगा। इससे लड़ने के लिए के लिए हमने हर हथियार खोज भी लिया था , मगर आपके अहंकार, आपके लालच , स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने की हठ धर्मिता ने सब नष्ट कर दिया ।

क्या चाहिए था आपको???? स्वर्ण एवं रत्नो के भंडार ?
यूँ ही मांग लेते। राजा बलि के वंशज और कर्ण के अनुयायी आपको यूँ ही दान में दे देते ।
सांसारिक वैभव को त्यागकर आंतरिक शांति की खोज करने वाले समाज के लिए वे सब यूँ भी मूल्यहीन हीं थे , ले जाते ।

मगर आपने ये क्या किया?? विश्व वंधुत्वा की बात करने वाले समाज को नष्ट कर दिया ?
जिसका मन आया वही अश्वों पर सवार होकर चला आया , रौंदने, लूटने , मारने , जीव में शिव को देखने वाले समाज को नष्ट करने।

कोई विश्व विजेता बनने के लिए तक्षशिला को तोड़ कर चला गया, कोई सोने की चमक में अँधा होकर सोमनाथ लूट कर ले गया , तो कोई किसी आसमानी किताब को ऊँचा दिखाने के लिए नालंदा की किताबों को जला गया , किसी ने उन्माद को जिताने के लिए शारदा पीठ टुकड़े टुकड़े कर दिया , तो किसी ने अपने झंडे को ऊंचा दिखाने के लिए विश्व कल्याण का केंद्र बने गुरुकुल परंपरा को ही नष्ट कर दिया ।

और आज करुण निगाहों से देख रहे हैं उसी पराजित, अपमानित , पद दलित , भारत भूमि की ओर , जिसने अभी अभी अपने घावों को भरके अंगड़ाई लेना आरम्भ किया है ।

किन्तु , हम फिर भी निराश नहीं करेंगे , फिर से माँ भारती का आँचल आपको इस संकट की घड़ी में छाँव देगा , श्रीराम के वंशज इस दानव से भी लड़ लेंगे , ऋषि दधीचि के पुत्र अपने शरीर का अस्थि मज्जा देकर भी आपको बचाएंगे ।

किन्तु...

किन्तु, मार्ग उन्हीं नष्ट हुए हवन कुंडो से निकलेगा , जिन्हें कभी आपने अपने पैरों की ठोकर से तोड़ा था ।
आपको उसी नीम और पीपल की छाँव में आना होगा , जिसके लिए आपने हमारा उपहास किया था ।
आपको उसी गाय की महिमा को स्वीकार करना होगा , जिसे आपने अपने स्वाद का कारण बना लिया ।
उन्ही मंदिरो में जाके घंटा नाद करना होगा जिनको कभी आपने तोड़ा था,
उन्ही वेदों को पढ़ना होगा , जिन्हें कभी अट्टहास करते हुए नष्ट किया था,
उसी चन्दन तुलसी को मष्तक पर धारण करना होगा , जिसके लिए कभी हमारे मष्तक धड़ से अलग किये गए थे ।

ये प्रकृति का न्याय है और आपको स्वीकारना होगा।

फिर कहता हूँ इस दुनिया को अगर जीना है , तो सोमनाथ में सर झुकाने आना ही होगा , तक्षशिला के खंडहरों से माफ़ी मांगनी ही होगी , नालंदा की ख़ाक छाननी ही होगी ।

सर्वे भवन्तु सुखिनः , सर्वे सन्तु निरामया ,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मां कश्चिद् दुःख भाग भवेत् ...🙏🙏🙏🕉🕉🕉

गुरुवार, 26 मार्च 2020

महाकवि वाट्स एप्प के आयुर्वेदिक दोहे




❄ *आयुर्वेद दोहे*❄

💧💧💧💧💧💧💧💧💧

पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!

*धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!*
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!

*ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!*
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!

*प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!*
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!

*ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!*
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!

*भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!*
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!

*प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!*
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!

*प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!*
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!

*भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!*
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!

*घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!*
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!

*अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!*
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!

*रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!*
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!

*सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!*
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुजीत!!

*देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!*
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^

*दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!*
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!

*सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!*
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!

*भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!*
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!

*अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!*
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!

*पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!*
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!

*अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!*
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!

*फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!*
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!

*चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!*
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!

*रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!*
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!

*भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!*
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!

*लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!*
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!

*चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !*
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!

*सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!*
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!

*सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!*
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!

*हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!*
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!

*अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!*
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!

*तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!*
मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग।

*कृपया इस जानकारी को जरूर आगे बढ़ाएं*

💦💦💦💦💦💦💦💦💦

मंगलवार, 24 मार्च 2020

कोरोना कुण्डलियां / दिनेश श्रीवास्तव




कोरोना महामारी तथा तद्जनित प्रभाव पर आधारित कुछ कुण्डलिया -

                    चिकित्सा-सेवक
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                        ( १)

मानव सेवा में लगे,करते हो तुम काम।
तुमको करता हूँ यहाँ,शत शत बार प्रणाम।।
शत शत बार प्रणाम,चिकित्सा सेवा करते।
अहर्निशं तैयार,हमेशा ही तुम रहते।।
कहता सत्य दिनेश,सभी खाते हैं मेवा।
 तुम करते हो वीर,हमेशा मानव सेवा।।

                           (२)

करना होगा अब हमें,उनका भी सम्मान।
इस विपदा के काल मे,लगे हुए जी जान।।
लगे हुए जी जान,हमेशा तत्पर रहते।
करें चिकित्सा कर्म,नहीं हैं फिर वे डरते।।
झोली उनकी आज,प्यार से भरना होगा।
मान और सम्मान,हमेशा करना होगा।।

                    (३)

करते सेवा रात दिन, सभी चिकित्सक नर्स।
बजा तालियाँ दीजिए,उनको भी कुछ हर्ष।।
उनको भी कुछ हर्ष,दीजिए!वह मुस्काएँ।
पाकर कुछ सम्मान,आज हर्षित हो जाएँ।।
कहता सत्य दिनेश,सभी के दुख को हरते।
बने ईश-अवतार,हमारी सेवा करते।।


           मजदूर/गरीब
           -----------------
                       (४)

कोरोना ने विश्व को,किया आज है त्रस्त।
विपदा भारी आ पड़ी,अब गरीब हैं पस्त।
अब गरीब हैं पस्त, उन्हें अब कौन बचाए।
मजदूरी है बंद, कहाँ से भोजन पाए।।
कहता सत्य दिनेश,भाग्य में उनके रोना।
सबसे दुखी गरीब,बनाया है कोरोना।।

                       (५)

आती विपदा जब कभी,पहले पड़ती मार।
उस गरीब के पेट पर,जाता है वह हार।।
जाता है वह हार, टूटकर सदा बिखरता।
उसका जाता फूट, भाग्य,फिर नहीं सँवरता।।
होता दुखी दिनेश,देखकर फटती छाती।
मजदूरों के भाग्य,सदा विपदा ही आती।।

             जागरूकता/हिदायत
             --------------------------
                              (६)

शिक्षा देकर आज फिर,जागृत करें समाज।
विपदा के इस काल मे,यही जरूरत आज।।
यही जरूरत आज,करें मत लापरवाही।
कुछ दिन की है बात,बंद हो आवाजाही।।
करता विनय दिनेश,माँगता है वह भिक्षा।
सुधरें खुद भी आप,और को भी दे शिक्षा।।

                       (७)

यही हिदायत आपको,घर में रहकर आप।
बैठ वहीं पर कीजिए, माँ गायत्री जाप।।
माँ गायत्री जाप,सुखद जीवन बीतेगा।
आया जो संताप,मनुज इसको जीतेगा।।
मानो मेरी बात,करो मत कहीं शिकायत।
घर मे रहना आप,आपको यही हिदायत।।

                     ( 8)

तोड़ दीजिए चेन को,हो जाएँगे मुक्त।
घातक है जो वायरस,हो जाएगा सुस्त।।
हो जाएगा सुस्त,तभी फैलाव रुकेगा।
जाएगा ये हार, और फिर यहाँ झुकेगा।।
कोई आये पास,हाथ को जोड़ लीजिए।
यही वायरस चेन,इसे अब तोड़ दीजिए।।

                   (९)

कोरोना ने विश्व का,छीन लिया है शांति।
चेहरे सबके मलिन हैं,मुख पर दिखती क्लांति।
मुख पर दिखती क्लांति,और मुरझाया लगता।
मानव से ही दूर,आज मानव है भगता।।
करता विनय दिनेश, धैर्यता कभी न खोना।
मन मे रखना आस,नष्ट होगा कोरोना।।

                      ( १०)

सहयोगी बन कीजिए, सबका ही सहयोग।
विपदा के इस काल ने,सबसे सुंदर योग।।
सबसे सुंदर योग, अभी बाहर मत निकालें।
सरकारी अनुदेश, सभी का पालन कर लें।
करता विनय दिनेश,यहाँ पर जो हैं रोगी।
विपदा के इस काल,बने उनके सहयोगी।।


                     दिनेश श्रीवास्तव

                    ग़ाज़ियाबाद

सोमवार, 23 मार्च 2020

शहीदों की चिताओं पर...../ विवेक शुक्ल



भगत सिंह की चिता को देखने वाला कौन??

विवेक शुक्ल

  आपको शायद ही कोई शख्स मिला हो जिसने भगत सिंह की चिता को जलते हुए देखा हो। आखिर 24 मार्च,1931 को गुजरे हुए अब एक लंबा अरसा हो रहा है। उन्हें उनके दोनों साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ 23 मार्च, 1931 को फांसी पर लटका दिया गया था लाहौर में। उसके बाद उनका 24 मार्च,1931 को अंतिम संस्कार किया गया रात के वक्त। भगत सिंह की चिता को सतलज नदी के करीब जलते हुए देखा था पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने। वे तब 12-13 साल के थे।
गुजराल साहब अपने माता-पिता और कुछ पड़ोसियों के साथ लाहौर से बसों में भगत सिंह की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए गए थे। उनके साथ स्वाधीनता सेनानी सत्यावती भी थीं। वो पूर्व उप राष्ट्रपति कृष्णकांत की मां थीं। तब आज की तरह न तो खबरिया चैनल थे और न ही ट्वीटर। ले- देकर अखबारों से लोग अपनी खबरों की प्यास बुझाते थे। पर,  जनता को मालूम चल गया था कि गोरी ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह को उनके साथियों के साथ फांसी पर लटका दिया है और उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया है।
 “भगत सिंह तब तक देश के नायक बन चुके थे। देश चाहता था कि उन्हें फांसी न हो।” ये बातें साल 2006 में गुजराल साहब ने इस नाचीज लेखक को अपने 6, जनपथ स्थित बंगले में एक बातचीत के दौरान बताई थीं। गुजराल साहब ने बताया था कि  भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी पर लटकाए जाने के चलते पंजाब समेत सारे देश में गुस्सा था। अवाम गोरी सरकार से सख्त खफा था।

 “ मेरे पिता  श्री अवतार नारायण गुजराल को मालूम चला कि भगत सिंह को फांसीपर लटकाने के बाद उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है, तो वे अंत्येष्टि स्थल पर जाने के लिए तैयार होने लगे। तब हमारे तक हमारे कई पड़ोसी भी  उनके साथ अंत्येष्टि स्थल पर जाने के लिए आग्रह करने लगे। मैं हालांकि तब बहुत छोटा था, तो भी पिता जी मुझे भगत सिंह की अंत्येष्टि में ले जाने के लिए तैयार थे। मैं भी उनके साथ गया बस में बैठकर। बस से अंत्येष्टि स्थल में पहुंचने में करीब पौना घंटा लगा था। मेरा छोटा भाई सतीश ( चित्रकार सतीश गुजराल) घर में ही रहा। हम जब वहां पर पहुंचे तो पहले से ही काफी लोग उधर पहुंच चुके थे। भगत सिंह की चिता जल रही थी। हालांकि वो कमजोर पड़ गई थी। दिन था 25 मार्च,1931।” गुजराल साहब उस मंजर को याद करते हुए भावुक होने लगे थे। उनकी आंखें नम हो रही थीं।
गुजराल साहब को याद था कि किस तरह से सैकड़ों लोग चिता के पास बिलख-बिलख कर रो रहे थे।
“ भगत सिंह, राज गुरु और सुखदेव के शवों को गोरी सरकार ने उनके परिवारों को नहीं सौपा था। उनका पोस्ट मार्टम करवाने से पहले ही अपने आप स्तर पर अंत्येष्टि कर दी।”
तो देश में लग जाएगी आग
दरअसल सरकार को भय था कि उनके शव उनके परिवारों को सौंपे तो देश में आग लग जाएगी। उनका यह भी कहना था कि इन तीनों शहीदों को फांसी पर लटकाने के बाद इनके शवों पर सांर्डस के परिवार वालों ने गोलियां भी मारी थीं। यानी सरकार ने बर्बरता की सारी हदों को लांघा था। उसके कई दिनों तक गुजराल साहब के घर में चूल्हा नहीं जला था। सारे देश में मातम पसर गया था। किसी को खाना खाने की सुध नहीं थी।
 कब भगत सिंह ने हैट में खिंचवाई फोटो
शहीद भगत सिंह की हैट में फोटो को सारे देश ने देखा है। उस हैट में भगत सिंह ने फोटो दिल्ली के कश्मीरी  गेट के रामनाथ फोटो स्टुडियों में खिंचवाई थी। तब उनके साथ बटुकेश्वर दत्त ने भी हैट में फोटो खिंचवाया था। यह बात 4 अप्रैल, 1929 की है। इन दोनों क्रांतिकारियों ने    चार दिनों के बाद यानी 8 अप्रैल को केंद्रीय असेंबली में बम फेंका था। बम फेंकने के बाद उन्होंने गिरफ़्तारी दी और उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चला। इससे पहले भगत सिंह का कोई हैट में फोटो नहीं मिलता। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के साथ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपबल्किन आर्मी ( एचएसआरए) के सदस्य जयदेव कपूर भी रामनाथ फोटो स्टुडियो गए थे। कहते हैं कि कपूर ने ही उस हमले की सारी योजना की रणनीति बनाई थी।  भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की हैट में फोटो लेने वाला रामनाथ फोटो स्टुडियो  कश्मीरी गेट में सेंट जेम्स चर्च के पास ठीक वहां पर होता था। भगत सिंह केजीवन पर लंबे समय से शोध कर रहे वरिष्ठ लेखक राजशेखर व्यास ने रामनाथ फोटो स्टुडियो से दोनों क्रांतिकारियों की 1980 में फोटो खरीदी थी। रामनाथ स्टुडियो के बाहर ही  भगत सिंह की बड़ी सी फोटो लगी हुई थी। बहरहाल, बम फेंकने की घटना के बाद रामनाथ फोटो स्टुडियों पर भी पुलिस बार-बार पूछताछ के लिए आने लगी थी। जयदेव कपूर ने उपर्युक्त फोटो और नेगेटिव बाद में रामनाथ फोटो स्टुडियो  में जाकर लिए थे।

हरिभूमि मेें पब्लिश लेख


कोरोना से डरना बहुत जरूरी है




कोरोना वायरस के मामले...

*USA*
 पहला हफ्ता - 2
 द्वितीय हफ्ता - 105
 तृतीय हफ्ता - 613

 *France*
 प्रथम हफ्ता - 12
 द्वितीय हफ्ता - 191
 तृतीय हफ्ता - 653
 चतुर्थ हफ्ता - 4499

 *Iran*
 प्रथम हफ्ता - 2
 द्वितीय हफ्ता - 43
 तृतीय हफ्ता - 245
 चतुर्थ हफ्ता - 4747
 पांचवा हफ्ता - 12729

 *Italy*
 प्रथम हफ्ता - 3
 द्वितीय हफ्ता - 152
 तृतीय हफ्ता - 1036
 चतुर्थ हफ्ता - 6362
 पांचवा हफ्ता - 21157

 *Spain*
 प्रथम हफ्ता - 8
 तृतीय हफ्ता - 674
 चतुर्थ हफ्ता - 6043

 *India*
 प्रथम हफ्ता - 3
 द्वितीय हफ्ता - 24
 तृतीय हफ्ता - 105

साथियो, अगले दो सप्ताह भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यदि हम पर्याप्त सावधानी बरतते हैं और श्रृंखला को तोड़ते हैं तो हम कोरोना वायरस का प्रकोप खत्म कर सकते हैं, वरना हमारे साथ में एक बड़ी समस्या है विशेष रूप से बुजुर्ग आबादी के लिए !
अब तक सब ठीक है।  कोरोना वायरस को रोकने के लिए भारत ने अपनी लड़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया है।
अब हम स्टेज 3 में हैं, जिसमें वायरस सामाजिक संपर्कों और सामाजिक समारोहों में फैलता है।
यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है और पुष्टि किए गए मामलों की संख्या प्रतिदिन तेजी से फैलती है जैसे कि फरवरी के अंतिम सप्ताह और मार्च के दूसरे सप्ताह के बीच इटली में हुआ था।  300 से 10,000 तक।  यदि भारत अगले 3 से 4 हफ्तों तक इस चरण का प्रबंधन करने में सक्षम नहीं होता है, तो संक्रमित हजारों में नहीं बल्कि लाखों में हो सकते हैं। यह अगले एक महीने के लिए महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अधिकांश कार्यक्रम और सार्वजनिक समारोहों को 15 अप्रैल तक बंद कर दिया गया है। सिर्फ इसी वजह से स्कूल बंद हैं, अनिवार्य यात्रा और हॉलिडे बग से बचें। अगले साल छुट्टियां भी आएंगी, इसलिए बच्चों को लेकर कोरोना के साथ अपनी किस्मत ना आज़माएं।
विवाह समारोह, जन्मदिन की पार्टी आदि फिर भी आती रहेंगी, लेकिन ये सोच कर की मुझे कहीं कुछ नहीं होने वाला अपने, अपनों व सामान्य जन के साथ खिलवाड़ ना करें,
पूरी सावधानी बरतें, मेडिकल हिस्ट्री ऑफ इंडिया में अगले 30 दिन सबसे महत्वपूर्ण होंगे।  किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए घर पर और बाहर रहते समय सभी सावधानी बरतें।
एहतियात बरतें,  घबराऐं नहीं !

*अगले एक महीने तक सावधान रहने के साथ दूसरों को शिक्षित करके एक जिम्मेदार नागरिक बनें !*

सता की चौथी पारी / मनोज कुमार




चुनौतियों को संभावना में बदलने का नाम है शिवराज

-मनोज कुमार

कुलजमा 15 महीने के अंतराल में शिवराजसिंह चौहान की मुख्यमंत्री के रूप वापसी मध्यप्रदेश की राजनीति में ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा जाना चाहिए. नए मध्यप्रदेश के गठन के बाद से अब तक मुख्यमंत्री के रूप में जिन नाम को हम जानते हैं, उनमें से कोई ऐसा नहीं है कि लगातार 13 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे होंं और बहुत छोटे अंतराल में वापस मुख्यमंत्री बनकर सत्ता में वापसी हुई हो. अपनों और परायों को मुरीद बना लेना शिवराज सिंह चौहान के व्यक्तित्व की खासियत है तो राजनीतिक कौशल का लोहा भी वे मनवाते रहे हैं. एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में वे चाणक्य बनकर नहीं बल्कि एक सौम्य राजनेता के रूप में अपनी वापसी की है. एक जननेता और जननायक के रूप में उनकी छवि बेमिसाल है क्योंकि वे सहज हैं, सरल हैं और आम और खास दोनों के लिए सर्वदा उपलब्ध रहने वाले राजनेताओं में हैं. 13 वर्षों के अपने लम्बे कार्यकाल में ऐसे कई अवसर आए जब वे मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि कभी घर-परिवार के मुखिया बनकर तो कभी भाई और मामा बनकर. मामा शिवराजसिंह की जब एक बार फिर वापसी हुई है तो प्रदेश की जनता की उम्मीदें और बढ़ गई है. यह उम्मीदें शिवराज सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण है लेकिन सच यही है कि चुनौतियों को संभावना में बदलने का नाम ही शिवराजसिंह चौहान है.

शिवराजसिंह चौहान को आप किस रूप में देखते हैं? यह सवाल आपसे पूछा जाए तो स्वाभाविक रूप से जवाब होगा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में लेकिन इससे आगे आपसे पूछा जाए कि एक आम आदमी के रूप में क्यों नहीं तो जवाब देने में थोड़ा वक्त लग सकता है. इस सवाल का जवाब देने में वक्त लगना स्वाभाविक है क्योंकि जिस कालखंड में हम जी रहे हैं अथवा पिछला समय हमने जो गुजारा है, उसमें व्यक्ति को उसके गुणों से नहीं बल्कि उसके पद और पद की हैसियत से पहचाना है. स्वाभाविक है कि शिवराजसिंह चौहान की पहचान एक मुख्यमंत्री के रूप में है और इतिहास के पन्नों में भी उन्हें इसी पहचान के साथ दर्ज किया जाएगा लेकिन सच तो यह है कि अपना सा लगने वाला यह मुख्यमंत्री हमारे बीच का, आज भी अपना सा ही है. शिवराजसिंह के चेहरे पर तेज है तो कामयाबी का लेकिन मुख्यमंत्री होने का गरूर पहले भी नहीं रहा और आज भी नहीं होगा. चेहरे पर राजनेता की छाप नहीं. सत्ता के शीर्ष पर बैठने की उनकी कभी शर्त नहीं रही बल्कि उनका संकल्प रहा है प्रदेश की बेहतरी का. वे राजनीति में आने से पहले भी आम आदमी की आवाज उठाने में कभी पीछे नहीं रहे. वे किसी विचारधारा के प्रवर्तक हो सकते हैं लेकिन वे संवेदनशील इंसान है. एक ऐसा इंसान जो अन्याय को लेकर तड़प उठता है और यह सोचे बिना कि परिणाम क्या होगा, अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने निकल पड़ता है. बहुतेरों को यह ज्ञात नहीं होगा कि शिवराजसिंह चौहान किसी समय मजदूरों को कम मजदूरी मिलने के मुद्दे पर अपने ही परिवार के खिलाफ खड़े हो गए थे. शिवराजसिंह चौहान का यह तेवर परिवार को अंचभा में डालने वाला था. मामूली सजा भी मिली लेकिन उन्होंने आगाज कर दिया था कि वे आम आदमी के हक के लिए आवाज उठाते रहेंगे. ऐसा भी नहीं है कि शिवराजसिंह चौहान में कुछ कमियां ना हो लेकिन जो खूबियां उनके व्यक्तित्व में है, वह उन कमियों को बौना कर देती है.

कुछ पुराने दिनों को याद कर लेना भी इस अवसर पर सामयिक हो जाता है. ज्ञात रहे कि बीते 13 सालों में शिवराजसिंह चौहान के कांधे पर हाथ रखकर सैकड़ों लोग यह कहते मिल जाते थे कि शिवराज हमारे साथ पढ़े हैं. ‘शिवराज हमारे साथ पढ़े हैं’, इसमें अपनापन तो था ही लेकिन एक भाव यह भी कि देखो हमारे साथ पढ़ा विद्यार्थी, हमारा दोस्त शिवराजसिंह आज मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री है. थोड़े से लोग इस बात पर गर्व करते हैं कि ‘हम शिवराजसिंह के साथ पढ़े हैं’ं और थोड़े से लोग होंगे जो कहते मिल जाएंगे-‘शिवराजसिंह और हम साथ पढ़े हैं.’ शिवराजसिंह के साथ सहपाठी होने की यह गर्वानुभूति सालों गुजर जाने के बाद हो रही है तो इसलिए कि शिवराजसिंह चौहान जब भोपाल के अपने स्कूल ‘मॉडल स्कूल’ में जाते हैं तो मुख्यमंत्री बनकर नहीं, स्कूल के एक पुराने विद्यार्थी की तरह. शिक्षकों का चरण स्पर्श करना नहीं भूले. सहपाठियों को नाम से याद रखना और उन्हें संबोधित करना उनकी सादगी की एक झलक है.

1956 में जब नए मध्यप्रदेश का गठन हुआ और समय-समय पर मुख्यमंत्री बदलते रहे. हर मुख्यमंत्री की अपनी शैली थी. काम करने से लेकर जीवन जीने तक. लगभग सभी मुख्यमंत्री कुछ अलग दिखना चाहते थे या लोगों ने उन्हें वैसा प्रस्तुत करने की कोशिश की लेकिन 2005 में मुख्यमंत्री के इस परम्परागत चेहरे के विपरीत सादगी भरा एक चेहरा नुमाया हुआ था शिवराजसिंह चौहान का. संसद से विधानसभा और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद भी उन्होंने अपने लिए कोई बनावट नहीं की. उनकी बुनावट इतनी मोहक थी कि कभी पांव पांव वाले भइया के नाम से मशहूर शिवराजसिंह मामा के नाम से मशहूर हो गए. ऐसा नहीं है कि शिवराजसिंह चौहान पहले मुख्यमंत्री हों जिन्हें विशेषण दिया गया बल्कि लगभग हर मुख्यमंत्री को उनकी कार्यशैली और उनके तेवर के अनुरूप विशेषण मिलता रहा है. कोई राजा-महाराजा कहलाए तो किसी को संवेदनशील होने का विशेषण दिया गया. संत और साध्वी के रूप में मध्यप्रदेश की सत्ता सम्हालने वाले भी थे लेकिन लगातार सत्ता के शिखर पर बैठे शिवराजसिंह चौहान की सादगी चर्चा में रही. एक बार जब वे सत्ता के शीर्ष पर बैठ रहे हैं तो इस बार भी उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और अपनों के लिए जुझारूपन एक कारण होगा.

शिवराजसिंह चौहान की सादगी भारतीय राजनीति में उन्हें अलग तरह से रखती है. ‘आम’ से ‘खास’ बनने में उनकी कोई रूचि नहीं रही सो वे जैसा थे, वैसा ही बना रहना चाहते हैं. लगभग हर जगह वे अपनी चिरपरिचित मुस्कान के साथ पायजामा-कुरता में मिलेंगे. जब वे अवकाश पर होते हैं तो निहायत एक आदमी की तरह टीशर्ट और फुलपेंट में दिख जाते हैं. यह उनका प्रिय लिबास है. तामझाम और शोशेबाजी के इस आधुनिक दौर में शिवराजसिंह की यह सादगी उन्हें औरों से अलग, बिलकुल अलग बनाती है. शिवराजसिंह की सादगी का आलम यह है कि वे गांव-देहात के दौरे के समय धूल भरी सडक़ में अपने लोगों के साथ बैठने में कोई हिचक नहीं करते हैं.

इस अवसर पर एक घटना का उल्लेख करना लाजिमी हो जाता है. विदिशा में जब वे सडक़ निर्माण का औचक निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं और बताते हैं कि वे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान हैं तो मजदूर उन्हें पहचानने से इंकार कर देते हैंं. इस वाकये से शिवराजसिंह के चेहरे पर गुस्से का भाव नहीं आता है बल्कि वे हंसी में लेते हैं. साथ चल रहे अफसरों को कहते हैं चलो, भई यहां शिवराज को कोई पहचानता नहीं. क्या यह संभव है कि एक मुख्यमंत्री को उसकी जनता पहचानने से इंकार करे और वह निर्विकार भाव से लौट आए? यह सादगी शिवराजसिंह में मिल सकती है. उनके इन्हीं अनुभवों ने उन्हें आम आदमी से जोडऩे के लिए कई तरह के जतन करने का उपाय भी बताया. इन्हीं में से एक मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली विभिन्न वर्गों की पंचायत रही है. कभी मुख्यमंत्री आवास आम आदमी के लिए तिलस्म सा था. बाहर से लोग अंदाज लगाया करते थे कि अंदर क्या क्या होगा लेकिन जब आम आदमी को मुख्यमंत्री आवास से बुलावा आया तो यह तिलस्म टूट गया था.

शिवराजसिंह की सादगी के यह उद्धरण वह हैं जिसकी गवाही पूरा मध्यप्रदेश दे रहा है. हां, यह बात भी तय है कि जब आप शिवराजसिंह चौहान को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में जांचते हैं, परखते हैं तो एक राजनेता के रूप में कुछ कमियां आप को दिख सकती हैं. कुछ फैसले सबके मन के नहीं होते हैं और इस बिना पर आप उन्हें घेरे में ले सकते हैं लेकिन एक आदमी से जब आप सवाल करेंगे तो उनका जवाब होगा कि अपना अपना सा लगने वाला यह शिवराज हमारा मुख्यमंत्री है और हमें ऐसा ही मुख्यमंत्री चाहिए. शिवराजसिंह चौहान चौथी दफा मध्यप्रदेश के सिंहासन पर विराजमान हो रहे हैं तो वह सारे मिथक टूट जाते हैं कि भाजपा हाइकमान उनकेे नाम पर सहमत नहीं है. या ऐसे ही तमाम तरह के तर्क-कुर्तक धराशायी हो जाते हैं. उन पर यह आरोप भी सहजता से कई तरह के आरोप लगाया जा सकता है लेकिन सारे आरोप बेमानी हो जाते हैं क्योंकि जो जनता से दूर है, वह सिंहासन से दूर है. 

रविवार, 22 मार्च 2020

दिनेश श्रीवास्तव की 10 कविताएं




 दिनेश श्रीवास्तव:


दोहें
               "धैर्य"   

दस लक्षण हैं धर्म के, प्रथम धैर्य का नाम।
 धैर्य सदा धारण करें, ज्यों पुरुषोत्तम राम।।-१

सदा धैर्य को धारिए, कभी न बनें अधीर,
 सुख-दुख में समदर्शिता, रखते केवल वीर।।-२

धीर- वीर-गंभीर जो,कर जाते हैं काम।
उनका ही होता सदा,यहाँ जगत में नाम।।-३

  जीवन का पहिया चले, धूरी धैर्य सशक्त।
 धैर्य बिना जीवन कहाँ, मानव रहे अशक्त।।-४

राम कृष्ण या बुद्ध हों, महावीर सम वीर।
विपदा का जब काल था, बने न कभी अधीर।।-५

जीवन में रखिए सदा,धैर्य धीरता आप।
 संजीवन बूटी यही, मिटे सभी संताप।।-६

विपदा आयी है बड़ी, निकल रही है आह।
 धैर्य अगर टूटा यहाँ,होगा विश्व तबाह।।-७

विपदा के इस काल में, मानव है जब तंग।
 धीर पुरुष बन जीतिए, 'कोरोना' से  जंग।।-८

संयम,साहस,धीरता,शुचिता संव्यवहार।
'कोरोना' के रोग पर,इनसे करें प्रहार।।-९

 धैर्यशीलता मनुज का, सद्गुण एक महान।
 होती विपदा काल में, इस गुण की पहचान।।-१०

तालाबंदी हो गया,प्रतिष्ठान सब बंद।
धीरज रख कर मानिए,सरकारी प्रतिबंध।।-११

धीरज का आया यही,यहाँ परीक्षण काल।
सरकारी अनुदेश पर,उठे न कभी सवाल।।-१२

अक्षरशः पालन करें,कुछ दिन की है बात।
बाद अँधेरी रात के,आता सुखद प्रभात।।-१३

धारित करती धारिणी, धरा जगत का भार।
 धरती की यह धीरता, उपकृत है संसार।।-१४

धीरज के इस काल में,पड़े न साहस मंद।
कलम सदा चलती रहे,घर दरवाजे बंद।।

'कोरोना'से मुक्त हो,स्वछ रहे परिवेश।
धैर्य न टूटे आपका,विनती करे 'दिनेश'।।-१६

                    दिनेश श्रीवास्तव

                    ग़ाज़ियाबाद


कैरोना वायरस-कारण और निदान

----------------------------------------------

एक 'कॅरोना' वायरस,जग को किया तबाह।
निकल रही सबकी यहाँ, देखो कैसी आह।।-1

विश्वतंत्र व्याकुल हुआ,मरे हजारों लोग।
आपातित इस काल को,विश्व रहा है भोग।।-2

खान-पान आचरण ही,इसका कारण आज।
रक्ष-भक्ष की जिंदगी,दूषित आज समाज।।-3

योग-साधना छोड़कर,दुराचरण है व्याप्त।
काया कलुषित हो गई, मानस शक्ति समाप्त ।।-4

स्वसन तंत्र का संक्रमण,करता विकट प्रहार।
शीघ्र काल-कवलित करे,करता है संहार।।-5

ये विषाणु का रोग है,करता शीघ्र विनास।
रोगी से दूरी बने,रहें न उसके पास।।-6

हाथ मिलाना छोड़कर, कर को जोरि प्रणाम।
ये विषाणु, इसका सदा,शीघ्र फैलना काम।।-7

हो बुखार खाँसी कभी,सर्दी और ज़ुकाम।
हल्के में मत लीजिए,लक्षण यही तमाम।।-8

भोजन नहीं गरिष्ठ हो,हल्का हो व्यायाम।
रहें चिकित्सक पास में,करिए फिर विश्राम।।-9

तुलसी का सेवन करें,श्याम-मिर्च के साथ।
पत्ता डाल गिलोय का,ग्रहण करें नित क्वाथ।।-10

करें विटामिन  'सी'  सदा,अक्सर हम उपयोग।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़े,लगे न कोई रोग।।-11

रहना अपने देश मे,अनुनय करे 'दिनेश'।
प्यारा अपना देश है,जाना नहीं विदेश।।-12

आएँ अगर चपेट में,रखिये धीरज आप।
वैद्य दवा के साथ ही,महा मृत्युंजय जाप।।-13

                     दिनेश श्रीवास्तव
                      गाज़ियाबाद



दिनेश श्रीवास्तव: गीतिका
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                चिंता चिता समान
                ----------------------

चिंता ज्वाला बन करे, नित प्रति दग्ध शरीर।
चिंता चिता समान है,अति उपजाए पीर।।

पंथी करता क्यों यहाँ, पथ की चिंता आज।
मिलता उसको है यहाँ, लिखी गई तकदीर।।

क्या लेकर आए यहाँ, जाओगे सब छोड़।
फिर तुम किसकी चाह में,होते यहाँ अधीर।।

नश्वर जीवन है यहाँ, पुनर्जन्म है सत्य।
चिंतित हैं फिर किस लिए,राजा,रंक, फ़क़ीर।।

जीवन मे किसको मिला,सब कुछ यहाँ जहान।
गया सिकंदर लौट कर,खाली हाथ शरीर।।

चिंतित हो चिंतन करे,मानव प्रज्ञाहीन।
चिंता में व्याकुल यहाँ, पीटे व्यर्थ लकीर।।

कर्मशील बनकर रहो,चिंतामुक्त 'दिनेश'।
सत्य यही सब कह गए, गीता,कृष्ण,कबीर।।


         



दिनेश श्रीवास्तव: बाल-कविता
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बापू ने जो राह दिखाई,
साफ सफाई करना भाई।
रोग व्याधियाँ दूर रहेंगी,
मोदी ने भी अलख जगाई।।

नए नए ये रोग निराले,
सुने नहीं थे,देखे भाले।
इसके कारण विश्व काँपता,
'कोरोना' को कौन सम्हाले।।

"स्वच्छमेव जयते" का नारा,
नारा यही हमारा प्यारा।
इससे सारे रोग भगेंगे,
यही हमारा बने सहारा।।

'कोरोना' को दूर भगाएँ,
साफ सफाई को अपनाएँ।
बापू के संदेश जगत को,
एक बार फिर से समझाएँ।।

सभी प्रश्न का एक है उत्तर,
धोना होगा हाथ निरंतर।
गर्म गर्म पानी को पीना,
इसका यह अचूक है मंतर।।

कभी न इससे है घबराना,
भीड़ भाड में कहीं न जाना।
दूर दूर से हाथ जोड़ना,
नहीं किसी को गले लगाना।।

नीबू और संतरा खाना,
मिले आँवला उसे चबाना।
लेकर शस्त्र विटामिन 'सी' का,
'कोरोना' को आज हराना।।

               

 
दिनेश श्रीवास्तव: दोहे-

            "कोरोना से बचाव"

हाथ मिलाना छोड़कर, कर को जोरि प्रणाम।
यही हमारी सभ्यता,सुबह मिलें या शाम।।-१

प्रियजन भगिनी या सुता,गले न मिलिए आप।
दूर रहें सब प्रेमिका,छोड़ प्रेम का ताप।।-२

प्रक्षालन हो हाथ का,साबुन से भरपूर।
प्रियजन को भी कीजिये,धोने को मजबूर।।-३

करें विटामिन 'सी'सदा,भोजन में उपयोग।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़े,लगे न कोई  रोग।।-४

भीड़ भाड़ लगता जहाँ,वहाँ न जाएँ आप।
मिल सकता है आप को,कोरोना संताप।।-५

काली मिर्च गिलोय का,तुलसी अदरक साथ।
सेंधा नमक मिलाइए, बना पीजिए क्वाथ।।-६

सेवन प्रतिदिन कीजिए,नीबू एक निचोड़।
और आंवला स्वरस भी,काम करे बेजोड़।।-७

अपनी शक्ति बढ़ाइए, फिर प्रहार पुरजोर।
कोरोना भी हारकर,भगे मचाते शोर।।-८

अक्ष भक्ष को छोड़कर,भोजन शाकाहार।
करें निरंतर आप फिर,रोगों का संहार।।-९

बहुत जरूरी हो अगर, बाहर निकलें आप।
मास्क लगाकर निकलिए,करते शिव का जाप।।-१०

                      दिनेश श्रीवास्तव



 गीत
                --------

अक्ष भक्ष की धारणा,करते हैं व्यभिचार।
यही राक्षसी वृत्तियाँ,छोड़ो मेरे यार।।

मानव करता जा रहा,अपने को ही अंत।
कथनी करनी भेद से,नहीं अछूता संत।।
ढोंग प्रदर्शन को सदा,रहता है तैयार।
यही राक्षसी-----------------------।।

कुदरत के कानून को,तोड़ रहे सब लोग।
तरह तरह की व्याधियाँ,भोग रहे सब लोग।।
कुदरत भी तैयार है,करने को प्रतिकार।
यही राक्षसी--------------------।।

निष्कंटक जीवन बने,व्यर्थ मचे क्यों शोर।
मुड़कर फिर से देखिए,इस प्रकृति की ओर।।
दोहन इसका रोकिए,बने न ये लाचार।
यही राक्षसी---------------------।।

कोरोना का रोग भी,फैला है जो आज।
लगता कुदरत ही यहाँ, हमसे है नाराज।।
नष्ट भ्रष्ट हमने किया,कुदरत का शृंगार।।
यही राक्षसी--------------------।।

                         
दिनेश श्रीवास्तव: दोहे

                  "धैर्य"   

दस लक्षण हैं धर्म के, प्रथम धैर्य का नाम।
 धैर्य सदा धारण करें, ज्यों पुरुषोत्तम राम।।-१

सदा धैर्य को धारिए, कभी न बनें अधीर,
 सुख-दुख में समदर्शिता, रखते केवल वीर।।-२

धीर- वीर-गंभीर जो,कर जाते हैं काम।
उनका ही होता सदा,यहाँ जगत में नाम।।-३

  जीवन का पहिया चले, धूरी धैर्य सशक्त।
 धैर्य बिना जीवन कहाँ, मानव रहे अशक्त।।-४

राम कृष्ण या बुद्ध हों, महावीर सम वीर।
विपदा का जब काल था, बने न कभी अधीर।।-५

जीवन में रखिए सदा,धैर्य धीरता आप।
 संजीवन बूटी यही, मिटे सभी संताप।।-६

विपदा है आई बड़ी, निकल रही है आह।
 धैर्य अगर टूटा यहाँ,होगा विश्व तबाह।।-७

विपदा के इस काल में, मानव है जब तंग।
 धीर पुरुष बन जीतिए, 'कोरोना' से  जंग।।-८

 धैर्यशीलता मनुज का, सद्गुण एक महान।
 होती विपदा काल में, इस गुण की पहचान।।-९

धारित करती धारिणी, धरा जगत का भार।
 धरती की यह धीरता, उपकृत है संसार।।-१०

                 


दिनेश श्रीवास्तव: अपील
              -----------

सुन सारे!कहाँ से आवत हवे रे घूम के?
जब मना बा त का जरूरत बा एने वोने घुमला के।बुझात नइखे का।पूरा देश परेशान बा आ तोहार मटरगस्ती चालू बा।
सुन ले सुमेरवा!कान खोल के-
थेथरई मत कर न त टास्क फोर्स पकड़ लेई तब का करबे?घरवे में बैठला के काम बा।

आपो सभे कान खोल के सुन लेयीं और गाँठ बाँध लेयीं-

लबर लबर कर के समान  नहीं खरीदिये।दुकान भागल नहीं जा रहा है।

बढ़िया से हाथ गोड धो के बिस्तर पर पड़े रहिए।हाथ त कई बार सबुनाइये।मन घबराए त बी बी सी लंदन घरहि में बैठ के सुन लीजिए नाहीं त घरवे में जोगीरा गाईये।बहरा जायके कौनो काम नइखे।

घर के लईकन आ बुढ़ऊ क हाथ पैर बांध के घरहि में रखिये।

भोरे खरिहान जाना है त अकेलही जाईये।

खयिनी अकेलहिं ठोकिये और अकेलही खाइये।केहुसे न त माँगिये और न दीजिए।

कोरोना भुतहा रोग नहीं है।केहू ओझा सोखा के पास मत जाइए।

बुखार खाँसी सर्दी ज़ुकाम पहिलहुँ होखे।घबराए के नइखे।हँ कई दिन से होखे त डॉक्टर बाबू के पास जरूर जाईये।

बाकी भगवान पर भरोसा रखिये।कुछु ना होई।

हाँ, मोदी क कहना मान के एक दिन 22 के घरहि में अपने को बंद कर लीजिए।

            🙏

               
दिनेश श्रीवास्तव:

 " जनता कर्फ्यू"

जनता कर्फ्यू का करें,अभिनंदन सब लोग।
दूर भगेगा जानिए,कोरोना का रोग।।
कोरोना का रोग,बैठकर घर में रहिए।
कुछ दिन का ये कष्ट,इसे हँसकर अब सहिए।।
करता विनय दिनेश, धर्म है सबका बनता।
मोदी जी की बात,सभी अब माने जनता।।

                       दिनेश श्रीवास्तव:

वायरस-चेन
                ---------------


तोड़ दीजिए चेन को,हो जाएँगे मुक्त।
घातक है जो वायरस,हो जाएगा सुस्त।
हो जाएगा सुस्त,यहाँ फैलाव रुकेगा।
जाएगा ये हार,और फिर यहाँ झुकेगा।।
कोई आये पास,हाथ को जोड़ लीजिए।
यही वायरस चेन, इसे अब तोड़ दीजिए।।

                      दिनेश श्रीवास्तव:

 गीतिका-

              सफल रहे अभियान
             --------------------------

जहाँ नहीं कुछ हाथ में,ईश्वर का हो ध्यान।
वही शक्ति देगा हमे,और बचेगा प्रान।।

अभी शेष है देश में,तरह तरह के शस्त्र।
अभी कृष्ण का चक्र है,अभी राम का बान।।

विश्व जगत व्याकुल हुआ,वैज्ञानिक सब फेल।
सभी धार्मिक जगत का,व्यर्थ हुआ सब ज्ञान।।

संत पुरोहित थक गए,मुल्ले सभी फ़क़ीर।
आज चिकित्सा जगत का,करना है सम्मान।।

अहर्निशं सेवामहे, लगे चिकित्सक नर्स।
बजे तालियाँ आज फिर,उनका ही हो गान।।

छोड़ छाड़ सब आज फिर,लेकर चम्मच-थाल।
उनको भी दे दीजिए,थोड़ी सी मुस्कान।।

अँधियारा तो क्षणिक है,पुनःउजाली रात।
खंडित करना है यहाँ, अँधियारे का मान।।

टूटेगा अब आज यह,महासंक्रमण चेन।
जन जन का होगा यहाँ,निश्चित ही कल्यान।।

हारेगा यह एक दिन, मन में है विश्वास।
कोरोना का बाप भी,'मोदी' का फरमान।।

संकट की यह बात है,और संक्रमण- काल।
करता विनय 'दिनेश'है,सफल रहे अभियान।।

                दिनेश श्रीवास्तव
               २२ मार्च २०२०



                 ६.४५ प्रातः

शनिवार, 21 मार्च 2020

दिनेश श्रीवास्तव की कविता



" जनता कर्फ्यू"


जनता कर्फ्यू का करें,अभिनंदन सब लोग।
दूर भगेगा जानिए,कोरोना का रोग।।
कोरोना का रोग,बैठकर घर में रहिए।
कुछ दिन का ये कष्ट,इसे हँसकर अब सहिए।।
करता विनय दिनेश, धर्म है सबका बनता।
मोदी जी की बात,सभी अब माने जनता।।

                      दिनेश श्रीवास्तव

कोरोना से बचाव का अपील / दिनेश श्रीवास्तव




अपील / दिनेश श्रीवास्तव
              -----------

सुन सारे!कहाँ से आवत हवे रे घूम के?
जब मना बा त का जरूरत बा एने वोने घुमला के।बुझात नइखे का।पूरा देश परेशान बा आ तोहार मटरगस्ती चालू बा।।


सुन ले सुमेरवा!कान खोल के-
थेथरई मत कर न त टास्क फोर्स पकड़ लेई तब का करबे?घरवे में बैठला के काम बा।



पो सभे कान खोल के सुन लेयीं और गाँठ बाँध लेयीं-


लबर लबर कर के समान  नहीं खरीदिये।दुकान भागल नहीं जा रहा है।

बढ़िया से हाथ गोड धो के बिस्तर पर पड़े रहिए।हाथ त कई बार सबुनाइये।मन घबराए त बी बी सी लंदन घरहि में बैठ के सुन लीजिए नाहीं त घरवे में जोगीरा गाईये।बहरा जायके कौनो काम नइखे।


घर के लईकन आ बुढ़ऊ क हाथ पैर बांध के घरहि में रखिये।

भोरे खरिहान जाना है त अकेलही जाईये।

खयिनी अकेलहिं ठोकिये और अकेलही खाइये।केहुसे न त माँगिये और न दीजिए।

कोरोना भुतहा रोग नहीं है।केहू ओझा सोखा के पास मत जाइए।

बुखार खाँसी सर्दी ज़ुकाम पहिलहुँ होखे।घबराए के नइखे।हँ कई दिन से होखे त डॉक्टर बाबू के पास जरूर जाईये।

बाकी भगवान पर भरोसा रखिये।कुछु ना होई।


हाँ, मोदी क कहना मान के एक दिन 22 के घरहि में अपने को बंद कर लीजिए।

         
 🙏

             
 दिनेश श्रीवास्तव






शुक्रवार, 20 मार्च 2020

धैर्य / दिनेश श्रीवास्तव



दोहे

                  "धैर्य"   

दस लक्षण हैं धर्म के, प्रथम धैर्य का नाम।
 धैर्य सदा धारण करें, ज्यों पुरुषोत्तम राम।।-१

सदा धैर्य को धारिए, कभी न बनें अधीर,
 सुख-दुख में समदर्शिता, रखते केवल वीर।।-२

धीर- वीर-गंभीर जो,कर जाते हैं काम।
उनका ही होता सदा,यहाँ जगत में नाम।।-३

  जीवन का पहिया चले, धूरी धैर्य सशक्त।
 धैर्य बिना जीवन कहाँ, मानव रहे अशक्त।।-४

राम कृष्ण या बुद्ध हों, महावीर सम वीर।
विपदा का जब काल था, बने न कभी अधीर।।-५

जीवन में रखिए सदा,धैर्य धीरता आप।
 संजीवन बूटी यही, मिटे सभी संताप।।-६

विपदा है आई बड़ी, निकल रही है आह।
 धैर्य अगर टूटा यहाँ,होगा विश्व तबाह।।-७

विपदा के इस काल में, मानव है जब तंग।
 धीर पुरुष बन जीतिए, 'कोरोना' से  जंग।।-८

 धैर्यशीलता मनुज का, सद्गुण एक महान।
 होती विपदा काल में, इस गुण की पहचान।।-९

धारित करती धारिणी, धरा जगत का भार।
 धरती की यह धीरता, उपकृत है संसार।।-१०

                    दिनेश श्रीवास्तव

Very useful words





*Useful information*
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1. *PAN*
Permanent Account Number.

2. *PDF*
Portable Document format.

3. *SIM*
Subscriber Identity Module.

4. *ATM*
Automated Teller Machine.

5. *IFSC*
Indian Financial System Code.

6. *FSSAI(Fssai)*
Food Safety & Standards
Authority of India.

7. *Wi-Fi*
Wireless Fidelity.

8. *GOOGLE*
Global Organization Of
Oriented Group
Language Of Earth.

9. *YAHOO*
Yet Another Hierarchical
Officious Oracle.

10. *WINDOW*
Wide Interactive Network
Development for
Office work Solution.

11. *COMPUTER*
Common
Oriented Machine.
Particularly United
and used under Technical
and Educational Research.

12. *VIRUS*
Vital Information
Resources Under Siege.

13. *UMTS*
Universal
Mobile Telecommunicati ons
System.

14. *AMOLED*
Active-Matrix Organic Light-
Emitting diode.

15. *OLED*
Organic
Light-Emitting diode.

16. *IMEI*
International Mobile
Equipment Identity.

17. *ESN*
Electronic
Serial Number.

18. *UPS*
Uninterruptible
Power Supply.

19. *HDMI*
High-Definition
Multimedia Interface.

20. *VPN*
Virtual Private Network.

21. *APN*
Access Point Name.

22. *LED*
Light Emitting Diode.

23. *DLNA*
Digital
Living Network Alliance.

24. *RAM*
Random Access Memory.

25. *ROM*
Read only memory.

26. *VGA*
Video Graphics Array.

27. *QVGA*
Quarter Video
Graphics Array.

28. *WVGA*
Wide video Graphics Array.

29. *WXGA*
Widescreen Extended
Graphics Array.

30. *USB*
Universal Serial Bus.

31. *WLAN*
Wireless
Local Area Network.

32. *PPI*
Pixels Per Inch.

33. *LCD*
Liquid Crystal Display.

34. *HSDPA*
High Speed Down link
Aacket Access.

35. *HSUPA*
High-Speed Uplink
Packet Access.

36. *HSPA*
High Speed
Packet Access.

37. *GPRS*
General Packet
Radio Service.

38. *EDGE*
Enhanced Data Rates
for Globa Evolution.

39. *NFC*
Near
Field Communication.

40. *OTG*
On-The-Go.

41. *S-LCD*
Super Liquid
Crystal Display.

42. *O.S*
Operating System.

43. *SNS*
Social Network Service.

44. *H.S*
HOTSPOT.

45. *P.O.I*
Point Of Interest.

46. *GPS*
Global
Positioning System.

47. *DVD*
Digital Video Disk.

48. *DTP*
Desk Top Publishing.

49. *DNSE*
Digital
Natural Sound Engine.

50. *OVI*
Ohio Video Intranet.

51. *CDMA*
Code Division
Multiple Access.

52. *WCDMA*
Wide-band Code
Division Multiple Access.

53. *GSM*
Global System
for Mobile Communications.

54. *DIVX*
Digital Internet
Video Access.

55. *APK*
Authenticated
Public Key.

56. *J2ME*
Java 2
Micro Edition.

57. *SIS*
Installation Source.

58. *DELL*
Digital Electronic
Link Library.

59. *ACER*
Acquisition
Collaboration
Experimentation Reflection.

60. *RSS*
Really
Simple Syndication.

61. *TFT*
Thin Film Transistor.

62. *AMR*
Adaptive
Multi-Rate.

63. *MPEG*
Moving Pictures
Experts Group.

64. *IVRS*
Interactive
Voice Response System.

65. *HP*
Hewlett Packard.


*Do we know actual full form*
*of some words???*

66. *NEWS PAPER =*
North East West South
Past and Present
Events Report.

67. *CHESS =*
Chariot,
Horse,
Elephant,
Soldiers.

68. *COLD =*
Chronic,
Obstructive,
Lung,
Disease.

69. *JOKE =*
Joy of Kids
Entertainment.

70. *AIM =*
Ambition in Mind

71. *DATE =*
Day and Time Evolution.

72. *EAT =*
Energy and Taste.

73. *TEA =*
Taste and Energy
Admitted.

74. *PEN =*
Power Enriched in Nib.

75. *SMILE =*
Sweet Memories
in Lips Expression.

76. *ETC. =*
End of
Thinking Capacity.

77. *OK =*
Objection Killed.

78. *Or =*
Orl Korec
(Greek Word)

79. *Bye =*♥
Be with You Everytime.

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