गुरुवार, 26 जनवरी 2012

मीडिया जुनून है तो यह आपका भविष्य है / मीडिया के आकर्षण

बृहस्पतिवार, 10 जून 2010



एक दौर था, जब बच्चे सबसे पहले रोजगार के रूप में सिविल सेवाओं को चुनते थे, फिर उनकी पसंद होती थी बैंक की नौकरी और उसके बाद अन्य सेवाएं। किंतु आज मीडिया के आकर्षण से कोई नहीं बचा है। मीडिया जहां एक ओर जनता की सशक्त आवाज बन कर उभरा है, वहीं वह युवाओं की पहली पसंद भी बनता जा रहा है। ऐसा नहीं कि मीडिया के प्रति यह आकर्षण केवल शहरी क्षेत्रों में ही है, दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी इसके प्रति आकर्षित होकर मीडिया में आते हैं। मीडिया केवल खबरों से ही नहीं जुड़ा है। मीडिया अपने आप में एक व्यापक शब्द है, जिसमें समाचार, मनोरंजन, ज्ञान, सब कुछ शामिल है। आज आप कोई भी समाचार पत्र ले लें तो इसमें आप अलग-अलग सप्लीमेंट पाएंगे और हर सप्लीमेंट में अलग-अलग विषयों पर सामग्री होती है। आज भी यही कहा जाता है कि यदि आगे बढ़ना है तो अखबार पढ़ो। अखबार मतलब खबरों का पिटारा। आज अखबार का कलेवर कुछ ऐसा है कि इसमें जीवन से जुड़े हर पहलू को समेट लिया जाता है।

अब दूसरी ओर है टेलीविजन और इंटरनेट। टेलीविजन पर समाचार पढ़े जाते हैं, उनका विश्लेषण किया जाता है, मंथन किया जाता है। एक्सपर्ट अपनी अपनी राय देते हैं और इसमें भी ज्ञान और मनोरंजन दिखाया जाता है। कमोबेश कम्प्यूटर पर भी इंटरनेट के माध्यम से आप ई-पेपर पढ़ सकते हैं, समाचार पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं। यानी मीडिया में रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, बस आपको अपना विषय चुनना है, अपना क्षेत्र पसंद करना है।


प्रिंट मीडिया


पत्रकारिता एक शौक भी है और रोजगार भी। यदि आप में वह जुनून है कि आप इस चुनौतीपूर्ण व्यवसाय को अपना सकें तो ही इस क्षेत्र में आना चाहिए। यहां भी आपके पास अनेक प्रकार के अवसर मौजूद हैं। बहुत से विकल्प हैं। समाचार पत्र में संपादन के दो भाग महत्त्वपूर्ण हैं- एक है रिपोर्टिग और दूसरा है संपादन। रिपोर्टिग का जिम्मा रिपोर्टरों पर होता है और उन खबरों को सही और आकर्षित बना कर कम शब्दों में प्रस्तुत करना संपादक का काम होता है। आमतौर पर एक समाचार पत्र में प्रधान संपादक, संपादक, सहायक संपादक, समाचार संपादक, मुख्य उपसंपादक, वरिष्ठ उपसंपादक और उपसंपादक होते हैं। आप एक रिपोर्टर के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। किंतु यहां यह जरूरी है कि आप रिपोर्टर के लिए शैक्षणिक योग्यता तो पूरी करते ही हों, साथ ही साथ आप उस विषय पर पूरी कमांड भी रखते हों। रिपोर्टर के भिन्न-भिन्न विषय होते हैं या यूं कह सकते हैं कि वह अपने विषय का एक्सपर्ट होता है। वैसे तो समाचार पत्र में सबसे महत्त्वपूर्ण और आवश्यक बीट राजनीति होती है, किंतु इसके अलावा भी आप अपनी रुचि के अनुसार फैशन, खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, कानून से जुड़ी बीट भी ले सकते हैं। इसके अलावा यदि आप में समाचार को कार्टून के जरिए व्यक्त करने की कला है तो पत्रों में कार्टूनिस्ट के रूप में भी कार्य किया जा सकता है। मुख्यधारा से हट कर यदि हम बात करें तो भी कम्प्यूटर ऑपरेटर, डिजाइनर, प्रूफ रीडर, पेज सेटर के रूप में भी कार्य किया जा सकता है।


प्रेस विधि की जानकारी


एक पत्रकार के रूप में या फिर पत्रकारिता के पेशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति के लिए यह जरूरी है कि वह प्रेस विधि की जानकारी रखे। चूंकि पत्रकारिता में भी आचार संहिता है और इसका प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, दोनों द्वारा पालन करना जरूरी है, अत: इसके लिए प्रेस विधि की जानकारी होनी चाहिए। इसमें विशेषत: कॉपीराइट एक्ट, ऑफिशियल सीक्रेसी एक्ट, इंडियन प्रेस काउंसिल आदि शामिल हैं। इसके लिए आज न सिर्फ बाजार में बहुत सी पुस्तकें हैं, बल्कि आप इंटरनेट का प्रयोग कर भी अपने ज्ञान का विस्तार कर सकते हैं। इससे आप किसी भी अनजानी समस्या का सामना करने से बच सकते हैं।


छ: ककारों का ज्ञान


चूंकि अधिकतर लोग मीडिया की मुख्य धारा में ही शामिल होना चाहते हैं और आज युवाओं की रुचि टेलीविजन पर आने की है, इसलिए छ: ककारों यानी क्या, कहां, कब, कौन, क्यों और कैसे का ज्ञान होना और उनका सही इस्तेमाल करना आना चाहिए, ताकि वह अपने लेखन यानी स्क्रिप्टिंग में, वाचन में, रिपोर्टिग में, पैकेज में इनका उपयोग कर समाचार अथवा अपनी रिपोर्ट को और अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक बना सके।


सत्यनिष्ठा और ईमानदारी


मीडिया जनता की आवाज होता है और मीडिया को हर भ्रष्टाचार से मुक्त रहना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि इसमें काम करने वाले लोग वेतन से अधिक नैतिक मूल्यों पर बल दें और ईमानदारी से कार्य करें। इसके अलावा निष्पक्षता भी बहुत जरूरी है। मीडिया से जुड़े हर व्यक्ति को पूर्ण रूप से निष्पक्ष रहना चाहिए।


टीवी होस्ट


जब-जब आप सच का सामना, आप की अदालत, बूगी वूगी, इंडियन आइडल जैसे रियलिटी शो देखते होंगे तो एक बार मन में यह बात आती होगी कि काश हम भी टीवी होस्ट होते तो हमें भी ऐसे ही कार्यक्रम प्रस्तुत करने का मौका मिलता। कार्यक्रम के होस्ट को धन और यश, दोनों मिलता है और वह एकदम ही प्रसिद्घि पा लेता है। टीवी होस्ट के लिए एक आकर्षक व्यक्तित्व होना चाहिए और एंकरिंग करने वाले व्यक्ति की भाषा पर पकड़ बहुत अच्छी होनी चाहिए। उच्चारण और मॉडय़ूलेशन भी बेहतरीन होना चाहिए।


इस क्षेत्र में आने के लिए अपेक्षित गुण-


भाषा


टीवी होस्ट को जिस भी कार्यक्रम को प्रस्तुत करना है, उसे उससे संबंधित तकनीकी शब्दों का ज्ञान भी होना चाहिए। उसकी भाषा चैनल और कार्यक्रम का सुखद संयोजन करती प्रतीत होनी चाहिए। ऐसा न हो कि कार्यक्रम बच्चों का है और आप इतने भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग करें, जो बच्चों की समझ से बाहर हों। ऐसे में कार्यक्रम का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। यहां होस्ट को अपना पांडित्य दिखाने की आवश्यकता नहीं होती। इसी प्रकार यदि वह कोई स्वास्थ्य से जुड़ा कार्यक्रम कर रहा है तो उसे चाहिए कि वह उस कार्यक्रम के तकनीकी पक्षों को समझे और उसी प्रकार के शब्दों का प्रयोग करे।


कैमरा फोबिया न होना


एक सफल प्रस्तोता के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह कैमरा फ्रैंडली रहे और कैमरे का उसे भय न हो। बहुत से लोग, जो इस काम को आसान समझते हैं, वे कैमरे के आगे बदहवास हो जाते हैं, आवाज लड़खड़ा जाती है और शरीर में कंपन पैदा हो जाता है। इसे कैमरा फोबिया कहते हैं। जाहिर सी बात है कि कैमरा ही हमारा दर्शक होता है। जब होस्ट कैमरे में आत्मविश्वास के साथ देखता है तो वह दर्शकों से आमने-सामने बात कर रहा होता है। टीवी होस्ट के लिए यह भी जरूरी है कि उसे यह ज्ञान होना चाहिए कि वह टीवी पर दिखाई कैसा देगा, उसकी भाव-भंगिमाएं कैसी दिखती होंगी। किंतु यह ध्यान देना चाहिए कि अति आत्मविश्वास भी घातक हो सकता है। टीवी होस्ट को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह दर्शकों पर हावी होने की कोशिश न करे, इसलिए इसके लिए यदि ऑन कैमरा ट्रेनिंग प्राप्त की जाए तो बेहतर होगा, ताकि आपको कैमरे के साथ बोलने की आदत हो जाए।


उच्चारण एवं मॉडय़ूलेशन


यहां यह भी देखने की बात है कि टीवी होस्ट का उच्चारण कैसा है। उसका शब्द ज्ञान कैसा है? और बोलने में मॉडय़ूलेशन और स्पष्टता कितनी है। कार्यक्रम की जीवंतता के लिए होस्ट को अपनी शैली लाइव रखनी पड़ती है और उसे थ्रो के साथ एक अच्छे स्तर पर बोलना होता है। हिन्दी के साथ-साथ होस्ट को अंग्रेजी और उर्दू भाषा का ज्ञान भी होना चाहिए, ताकि वह उन शब्दों का सही और स्पष्ट उच्चारण कर सके।


आपका चेहरा और व्यक्तित्व


बहुत से ऐसे लोग हैं, जो अपने व्यक्तित्व को लेकर आशंकित रहते हैं। यहां यह महत्त्वपूर्ण है कि एक अच्छे टीवी होस्ट के लिए एक फोटोजनिक फेस तो चाहिए, किंतु बहुत ज्यादा सुंदर चेहरे की आवश्यकता नहीं है। जरूरत होती है तो एक बुद्घिमान और फोटोजनिक चेहरे वाले व्यक्ति की, जो उस कार्यक्रम के विषय के अनुरूप हो।


भूगोल और संस्कृति की जानकारी


वैसे तो भूगोल और संस्कृति की जानकारी का होना हर जागरूक व्यक्ति के लिए जरूरी है, किंतु एक टीवी होस्ट के लिए इसकी जानकारी आवश्यक है। हालांकि यह जानकारी इंटरनेट पर मौजूद है, किंतु फिर भी यदि आप मीडिया के किसी भी क्षेत्र से जुड़े हैं तो आपको भारतीय परिवेश, भूगोल और संस्कृति, धरोहर और परंपरा का ज्ञान होना चाहिए। यह सब कहीं न कहीं काम अवश्य आता है, चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया।


समाचार बोध


एक अच्छे पत्रकार में मनोवैज्ञानिक, वकील, कुशल लेखक, वक्ता और गुप्तचर के गुणों का समावेश होना चाहिए। तभी वह एक घटना में समाचार का बोध कर उसे जनता के समक्ष ला पाता है। इसके अतिरिक्त उसे दूरदर्शी भी होना चाहिए, तभी वह यह समझ पाएगा कि किस खबर का लोगों, समाज और देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा।


कम्प्यूटर और सॉफ्टवेयर का ज्ञान


आज आप कम्प्यूटर के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। जीवन के हर स्तर पर कंप्यूटर का प्रयोग होता है और यही कारण है कि मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। आप मीडिया में तभी सफल हो सकते हैं, यदि आप कम्प्यूटर जानते हैं। कम्प्यूटर के साथ-साथ यदि आप वहां प्रयोग होने वाले सॉफ्टवेयर में भी पारंगत हों तो और भी अच्छा होता है। आज बहुत-सी जगहों पर क्वार्क सॉक्टवेयर का प्रयोग किया जा रहा है, जो पेज मेकिंग के लिए प्रयोग में लाया जाता है। तो कम्पयूटर का कार्यसाधक ज्ञान जरूरी है। इसके अलावा इन्ट्रो, टाइटल, बैनर, क्रॉस लाइन, ड्रॉपलाइन, ब्लॉक, डिस्पले, लेट न्यूज, डमी, डबलैट, क्लासीफाइड, कॉलम जैसे तकनीकी शब्दों का ज्ञान भी होना चाहिए।


याददाश्त


कई बार होस्ट को बहुत से कार्यक्रमों में टैली प्रॉम्प्टर नहीं मिल पाता और उसको अपनी स्क्रिप्ट मुंह-जुबानी बोलनी पड़ती है। इसके लिए यदि आपकी तैयारी अच्छी नहीं होगी और आपकी याददाश्त कमजोर होगी तो कार्यक्रम तैयार करने में वक्त लगेगा और लाइव कार्यक्रम आप बिलकुल भी हैंडल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा झिझकने से, घबराने से, फंबल करने या कोई लाइन जंप करने या भूल जाने से बार-बार टेक करने की नौबत आएगी और कार्यक्रम के प्रोडयूसर पर आपका प्रभाव अच्छा नहीं पड़ेगा।


ज्ञान और वाकपटुता


चूंकि समाचार वाचक का कार्य खबरों से जुड़ा है और उसे न सिर्फ खबरें पढ़नी होती हैं, बल्कि वह खबरों का विश्लेषण भी करता है, खबरों का मंथन करता है। इसके लिए यह जरूरी है कि आपका ज्ञान और अनुभव अच्छा हो, ताकि आप किसी भी घटना से जुड़ी अन्य बातें भी दर्शकों के सामने ला सकें और समाचार या कार्यक्रम को और भी रोचक बना सकें।


प्रेजेंस ऑफ माइंड


यदि आपकी रुचि टीवी होस्ट बनने की है तो इसके लिए आपका कौशल, समसामयिक ज्ञान और प्रेजेंस ऑफ माइंड बहुत अच्छा होना चाहिए, ताकि आम तकनीकी खराबियों, विपरीत स्थितियों और अचानक हुए किसी घटनाक्रम से न घबरा कर उसे सहज ढंग से लें और शो खराब न हो।


टीवी न्यूज एंकर


टेलीविजन पत्रकारिता के दौर में आज टीवी न्यूज एंकर की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण हो गई है। जाहिर है कि इसमें धन और शोहरत बहुत है, पर है यह काम चुनौती भरा। आजकल बहुत से चैनल केवल टीवी न्यूज एंकर को प्राथमिकता नहीं देते। इसके लिए आपको बहु-प्रतिभाशाली और सर्वकार्यकुशल होना पड़ेगा, ताकि आप चैनल की आवश्यकता के अनुसार कार्य कर सकें। अब यह चैनल का काम है कि वह आपको समाचार के लिए रखे, रिपोर्टिग के लिए रखे, मौसम का हाल बताने के लिए रखे या किसी का इंटरव्यू करवाए। तो इस तरह आप केवल एक ही कार्य न कर यदि टेलीविजन पत्रकारिता की हर विधा में कुशल हों तो आपके रोजगार के अवसर बढ़ जाते हैं।


ये सभी गुण ऐसे हैं, जो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े सभी लोगों में होने चाहिए।


मीडिया के प्रमुख संस्थान


भारतीय जनसंचार संस्थान
कोर्स : पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन जर्नलिज्म
अवधि : एक वर्ष
फीस : 34 हजार रुपये
सीटें : 53,
वेबसाइट : www.iimc.nic.in


मीडिया के अन्य प्रमुख संस्थान


बीए ऑनर्स जर्नलिज्म, दिल्ली विश्वविद्यालय
वेबसाइट : www.du.ac.in


एजेके मास कम्युनिकेशन मीडिया सेंटर


जामिया मिल्लिया इस्लामिया
वेबसाइट : www.ajkmcrc.org


मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय
वेबसाइट : www.mirandahouse.ac.in


एडिट वर्क्स स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन
वेबसाइट : www.editworksindia.com


एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन
वेबसाइट : www.nraismc.com


एनएएम इंस्टीटय़ूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज
वेबसाइट : www.namedu.net


मीडिया के कोचिंग संस्थान


मीडिया में एमबीए या इंजीयिरिंग की तरह के ऐसे कोचिंग स्थान नहीं हैं, जहां मीडिया से संबंधित प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती हो। पर ऐसे अनेक प्राइवेट संस्थान हैं, जो अपने स्तर पर मीडिया से जुड़े कोर्स करवाते हैं। यहां से आप मीडिया या जर्नलिज्म से संबंधित प्रारंभिक जानकारी हासिल कर सकते हैं।


स्कॉलरशिप


मान्यता प्राप्त संस्थानों में हालांकि इस क्षेत्र के लिए स्कॉलरशिप का प्रावधान नहीं है, किंतु नियमों के अनुसार कुछ सीटें आरक्षित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ निजी संस्थान अपने स्तर पर फीस में कुछ प्रतिशत की छूट देते हैं। कुछ संस्थान स्पॉन्सर्ड उम्मीदवारों के लिए अपने यहां कुछ सीटें ऑफर करते हैं।


एजुकेशन लोन


हालांकि अभी इन कोर्सेज की फीस इतनी अधिक नहीं है कि इसके लिए एजुकेशन लोन लेना पड़े, फिर भी आज लगभग सभी बैंक यह सुविधा प्रदान करते हैं। कुछ संस्थानों का तो बैंकों के साथ समझौता होता है तो वे बैंक कोर्स के लिए लोन देते हैं। इसके लिए आपको बैंक की सभी शर्तों का पालन करना होता है और संबंधित संस्थान से भी इसके लिए आवेदन पत्र सत्यापित कर उसके साथ आवश्यक सूचनाएं लगानी होती है।


नौकरी के अवसर


विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में।
समाचार पत्रों में।
इंटरनेट पर ।
समाचार चैनलों में।
विभिन्न एजेंसियों में।
विभिन्न प्रोडक्शन हाउसेज में।


वेतन


आय की दृष्टि से यह एक मिला-जुला क्षेत्र है। इस क्षेत्र में अच्छी आय इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपने करियर की शुरुआत कैसे संस्थान से की है। आप सही संस्थान में अच्छी आय के साथ-साथ शोहरत भी प्राप्त कर सकते हैं। प्रिंट मीडिया में आय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मुकाबले कम है, किंतु फिर भी यदि आप प्रिंट मीडिया में आना चाहते हैं तो आपको प्रारंभ में 10 हजार रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक मिल सकते हैं। अनुभव के साथ-साथ आपका पैकेज भी बढ़ता जाता है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आपको प्रारंभ में लगभग 25 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक वेतन मिल सकता है। इसके अलावा विभिन्न प्रोडक्शन हाउस अपने कार्यक्रमों को होस्ट करने के लिए भी बहुत अच्छे पैकेज देते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें