रविवार, 28 अगस्त 2016

Google विज्ञापनों के बारे में



Google विज्ञापनों की मदद से संपूर्ण वेब पर अपने व्यवसाय का विज्ञापन करें (AdWords) या Google विज्ञापनों के ज़रिये अपनी वेबसाइट से पैसे कमाएं (AdSense). AdWords या AdSense आज़माएं
क्या कभी वेब ब्राउज़ करते समय, किसी ऐप्लिकेशन का उपयोग करते समय या कोई वीडियो देखते समय आपका ध्यान "Google द्वारा विज्ञापन," "प्रायोजित लिंक" या विज्ञापन संबंधी विकल्प आइकन AdChoices icon पर गया है? आपको इस तरह के विज्ञापन दिखाने के लिए, विज्ञापनदाता Google AdWords या Google के DoubleClick विज्ञापन प्लैटफ़ॉर्म का उपयोग कर सकते हैं. विज़िट की गई साइटों और ऐप्लिकेशन के प्रकारों के आधार पर विज्ञापन देखने के अतिरिक्त, आप अपनी रुचियों तथा कई अन्य चीज़ों के आधार पर भी विज्ञापन देख सकते हैं.

इस लेख में शामिल हैं


Google का प्रदर्शन नेटवर्क, विज्ञापन दिखाने के लिए Google के साथ भागीदारी करने वाली 2 मिलियन से भी अधिक वेबसाइटों, वीडियो और ऐप्लिकेशन का संग्रह है.

आपको विज्ञापन दिखाने के लिए Google क्या करता है

हम निम्नलिखित सहित कई कारकों के आधार पर आपको विज्ञापन दिखा सकते हैं:
  • आपके द्वारा देखी जाने वाली वेबसाइटें और आपके डिवाइस में मौजूद मोबाइल ऐप्लिकेशन
  • अपने ब्राउज़र पर मौजूद कुकी और आपके Google खाते की सेटिंग
  • आपके द्वारा विज़िट की गई वे वेबसाइटें और ऐप्लिकेशन, जो Google के साथ विज्ञापन करने वाले व्यवसायों से संबंधित हैं
  • किसी अन्य डिवाइस पर आपकी गतिविधि
  • Google के विज्ञापनों या विज्ञापन सेवाओं के साथ हुए पिछले इंटरैक्शन
  • आपकी Google खाता गतिविधि और जानकारी
आपको वैयक्तिकृत विज्ञापन दिखाते समय, हम कुकी या मिलती-जुलती प्रौद्योगिकी के किसी पहचानकर्ता को जाति, धर्म, यौन रुझान या स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील श्रेणियों से संबद्ध नहीं करेंगे.

आप देखे जाने वाले विज्ञापन कैसे प्रबंधित कर सकते हैं

आप टूल और नियंत्रण की सहायता से उस जानकारी को प्रबंधित कर सकते हैं, जिसका उपयोग करके Google आपको विज्ञापन दिखाता है. नीचे Google और अन्य संगठनों द्वारा विकसित कुछ ऐसे टूल, नियंत्रण और संसाधन दिए गए हैं, जिनकी सहायता से आप वह जानकारी प्रबंधित कर सकते हैं, जिसका उपयोग करके Google आपको विज्ञापन दिखाता है.
टूल, नियंत्रण और संसाधन यह क्या है
विज्ञापन की सेटिंग मेरा खाता में स्थित अपनी विज्ञापन की सेटिंग में, आप उस जानकारी के बारे में जान सकते हैं, जिसका उपयोग Google विज्ञापनों को वैयक्तिकृत बनाने के लिए करता है, जिसमें विज्ञापन वैयक्तिकरण को पूरी तरह से बंद करने का विकल्प भी शामिल है.
मेरा खाता विज्ञापन की सेटिंग के अतिरिक्त, मेरा खाता आपको उन सेटिंग और टूल का त्वरित एक्सेस प्रदान करता है, जिनकी सहायता से आप अपने डेटा की सुरक्षा कर सकते हैं, अपनी गोपनीयता को सुरक्षित रख सकते हैं और यह निर्णय ले सकते हैं कि आपकी जानकारी आपके द्वारा देखे जाने वाले विज्ञापनों सहित Google सेवाओं को आपके लिए अधिक कारगर कैसे बना सकती है.
गोपनीयता नीति Google की विश्वव्यापी गोपनीयता नीति.

विज्ञापन उद्योग कार्यक्रम भागीदारी

Google ऑनलाइन विज्ञापन के लिए उद्योग के गोपनीयता मानक विकसित करने वाले विज्ञापन संबंधी विकल्प नामक आइकन जैसे समूहों का एक भागीदार सदस्य है.
समूह स्थान
Australian Digital Advertising Alliance ऑस्ट्रेलिया
Digital Advertising Alliance (DAA) संयुक्त राज्य
Digital Advertising Alliance of Canada कनाडा
European Digital Advertising Alliance यूरोप
Network Advertising Initiative संयुक्त राज्य

 

अभी-अभी देखी गई वेबसाइट या विज्ञापन के बारे में फ़ीडबैक दें

शनिवार, 27 अगस्त 2016

मूंगफली से टीबी का उपचार संभव








मूंगफली से टीबी का इलाज


प्रस्तुति-  दीपाली पाराशर
मूंगफली से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ता है
मूंगफली से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ता है

अनुसंधानों में पाया गया है कि मूंगफली में पाए जाने वाला एक रसायन तपेदिक यानि टीबी के इलाज में कारगर साबित हो सकता है.

टीबी अब भी सर्वाधिक जानलेवा रोगों में से एक है. हर साल दुनिया भर में 20 लाख से ज़्यादा लोग टीबी का शिकार बनते हैं.

हालाँकि टीबी पैदा करने वाले जीवाणु के संपर्क में आने पर भी अधिकांश लोगों में संक्रमण के संकेत नहीं दिखते.

आर्जिनाइन की अतिरिक्त ख़ुराक से इलाज ज़्यादा असरदार साबित हो सकता है क्योंकि यह रसायन शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता को मज़बूत करता है
डॉ. थॉमस शॉन
यानि इससे यह ज़ाहिर होता है कि शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली टीबी के जीवाणुओं का बख़ूबी मुक़ाबला करती है.

समझा जाता है कि शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली को एकजुट करने में नाइट्रिक ऑक्साइड नामक रसायन की अहम भूमिका होती है.

और वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी रसायन की कमी के कारण लोग टीबी का शिकार बनते हैं.

यानि सिद्धांत रूप में देखें तो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ा कर लोगों को टीबी से बचाया जा सकता है.

शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बढ़ाने का एक तरीक़ा है आर्जिनाइन नामक तत्व के कैप्सुल का सेवन. आर्जिनाइन एमीनो एसिड का एक प्रकार है जो मानव शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को अंजाम देता है.

और मूंगफली में आर्जिनाइन की अच्छी ख़ासी मात्रा पाई जाती है.

परीक्षण

स्वीडन के लिंकोपिन विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों ने इथियोपिया में टीबी के 120 रोगियों पर इस सिद्धांत का परीक्षण किया.

रोगियों को चार सप्ताह तक अन्य दवाओं के साथ आर्जिनाइन वाले कैप्सुल या उससे मिलते जुलते कैप्सुल दिए गए.

जिन्हें आर्जिनाइन की ख़ुराक दी गई उन पर उपचार का ज़्यादा असर दिखाई दिया.

तेज़ खांसी जैसे लक्षणों में जल्दी सुधार देखा गया. इसी तरह थूक की जाँच में टीबी के जीवाणुओं के स्तर में कमी देखी गई.

इस परीक्षण के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि आर्जिनाइन थेरेपी की मदद से टीबी के इलाज के समय में कमी लाई जा सकती है.

मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ. थॉमस शॉन ने बीबीसी को बताया, "इस बात पर ग़ौर किया जाना चाहिए कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चार एंटीबायोटिक दवाओं की ख़ुराक के ज़रिए टीबी के इलाज की अनुशंसा कर रखी है, वह अब भी महत्वपूर्ण है."

उन्होंने कहा, "आर्जिनाइन की अतिरिक्त ख़ुराक से इलाज ज़्यादा असरदार साबित हो सकता है क्योंकि यह रसायन शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता को मज़बूत करता है."

विशेषज्ञों ने कहा है कि जहाँ आर्जेनाइन दवा के रूप में आसानी से या सस्ते में उपलब्ध नहीं हो वहाँ मूंगफली से इसका काम लिया जा सकता है.

डॉ. शॉन ने कहा, "मूंगफली में वसा जैसे अन्य पौष्टिक तत्व भी होते हैं, जोकि रोगियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं."

अनुसंधान की रिपोर्ट यूरोपियन रेसपाइरैटरी जर्नल में छपी है.

अन्य ख़बरें
28 फरवरी, 2003
हृदय रोग और अर्थव्यवस्था
10 फरवरी, 2003
पोलियो की चुनौती बरक़रार
04 फरवरी, 2003
यह पानी है या ज़हर?
इंटरनेट लिंक्स
टीबी अलर्ट
स्टॉपटीबी
बीबीसी अन्य वेब साइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है
कुछ और पढ़िए
एड्स पर वेटिकन विवाद में
चीन अंतरिक्ष में यात्री भेजेगा
इच्छाशक्ति की जीत
हँसी-खुशी का उल्टा असर
बोतल बंद पानी कितना सुरक्षित
चर्बी वाले भोजन से ख़तरा?
बिगफ़ुट है या नहीं?




बुधवार, 24 अगस्त 2016

संस्कृत ही जीवन है




 

 

कर्नाटक स्थित मत्तूरु गाँव

कर्नाटक स्थित मत्तूरु गाँव एक ऐसा गाँव है जहां का बच्चा बच्चा संस्कृत में बात करता है फिर चाहे वह हिंदू हों या मुसलमान ! इस गांव में रहने वाले सभी लोग संस्कृत में ही बात करते हैं ! तुंग नदी के किनारे बसा ये गांव बेंगलुरु से ३०० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ! इस गांव में संस्कृत प्राचीनकाल से ही बोली जाती है ! हालांकि बाद में यहां के लोग भी कन्नड़ भाषा बोलने लगे थे, लेकिन ३३ साल पहले पेजावर मठ के स्वामी ने इसे संस्कृत भाषी गांव बनाने का आह्वान किया ! जिसके बाद गाँव के लोग संस्कृत में ही वार्तालाप करने लगे !
boy
1981-82 तक इस गाँव में राज्य की कन्नड़ भाषा ही बोली जाती थी ! कई लोग तमिल भी बोलते थे, क्योंकि पड़ोसी तमिलनाडु राज्य से बहुत सारे मज़दूर क़रीब 100 साल पहले यहाँ काम के सिलसिले में आकर बस गए थे ! मत्तूरु गांव में ५०० से ज्यादा परिवार रहते हैं, जिनकी संख्या तकरीबन ३५०० के आसपास है ! गांव के कई संस्कृतभाषी युवा आईटी इंजीनियर हैं ! यह युवा बड़ी बड़ी कंपनियों में कार्यरत हैं ! कुछ सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो कुछ बड़े शिक्षा संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं ! विदेशों से भी कई लोग संस्कृत सीखने के लिए इस गांव में आते हैं !

एक विलक्ष्ण व्यक्तित्व / डा. सुब्रह्मण्यम् स्वामी



डा. सुब्रह्मण्यम् स्वामी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से


जन्म 15 सितम्बर 1939 (आयु 76 वर्ष)
मायलपुर, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
राजनैतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी (2013 से अब तक)
अन्य राजनैतिक
सहबद्धताएं
जनता पार्टी (1990 से 2013 तक)
जीवन संगी रोक्साना स्वामी
संतान सुहासिनी हैदर, गीतांजलि स्वामी
विद्या अर्जन दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, हार्वर्ड विश्वविद्यालय
पेशा अर्थशास्त्री
प्रोफेसर
लेखक
राजनीतिक
धर्म हिन्दू
वेबसाइट janataparty.org
डॉ॰ सुब्रह्मण्यम् स्वामी (जन्म: 15 सितम्बर 1939 चेन्नई, तमिलनाडु, भारत) जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वे सांसद के अतिरिक्त 1990-91 में वाणिज्य, विधि एवं न्याय मन्त्री और बाद में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी रहे। 1994-96 के दौरान विश्व व्यापार संगठन के श्रमिक मानकों के निर्धारण में उन्होंने प्रभावी भूमिका निभायी।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने साइमन कुजनैट्स और पॉल सैमुअल्सन के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर शोध कार्य किया और फिर पॉल सैमुअल्सन के साथ संयुक्त लेखक के रूप में इण्डैक्स नम्बर थ्यौरी का एकदम नवीन और पथ प्रदर्शक अध्ययन प्रस्तुत किया।
वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विजिटिंग फैकल्टी मैम्बर भी रहे हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने आदर्शों के लिए निर्भीक होकर संघर्ष किया है। भारत में आपातकाल के दौरान संघर्ष, तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर यात्री मार्ग खुलवाने में उनके प्रयास, भारत-चीन सम्बन्धों में सुधार, भारत द्वारा इजरायल की राजनैतिक स्वीकारोक्ति, आर्थिक सुधार और हिन्दू पुनरुस्थान आदि अनेक उल्लेखनीय कार्य उन्होंने किये हैं।
स्वामी ने स्वेच्छा से राष्ट्रहित को सर्वोपरि समझते हुए अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर दिया।[1][2] अब वे एकनिष्ठ होकर नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमन्त्री बनाने के लिये पूरे देश में प्रचार किया और भारी बहुमत से जीत हासिल किया और भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, फिर नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद पुनः Z+ श्रेणी की सुरक्षा दे दिया गया। आजकल नेशनल हेराल्ड केस और अयोध्या राम मंदिर को लेकर चर्चा मे है।

अनुक्रम

आरम्भिक जीवन

सुब्रमनियन स्वामी का जन्म १९३९ में म्य्लापोरे, चेन्नई, भारत में हुआ। उनके पिता का नाम सीताराम सुब्रमनियन था और वो मदुरै, तमिलनाडु से थे। उनके पिता सुरु में भारतीय सांख्यिकी सेवा में अधिकारी थे और बाद में केंद्रीय सांख्यिकी संस्थान के निदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुए।
डॉ स्वामी ने हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित में अपनी स्नातक ऑनर्स डिग्री अर्जित किया। उन्होंने भारतीय सांख्यिकी संस्थान में सांख्यिकी में अपनी मास्टर्स डिग्री के लिए अध्ययन किया। इसके बाद वो पूर्ण रॉकफेलर छात्रवृत्ति पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए चले गए। उन्हें १९६५ में अर्थशास्त्र में पी.एच.डी प्राप्त हुई। उनके शोध सलाहकार नोबेल पुरस्कार विजेता साइमन कुज्नेट्स थे।

शैक्षणिक जीवन

Harvard University
1964 में, स्वामी हार्वर्ड में अर्थशास्त्र के संकाय में शामिल हो गए और उसके बाद से वह अर्थशास्त्र विभाग में पढ़ाने लगे। जुलाई 1966 में वो एक सहायक प्रोफेसर बन गए और 1969 में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए।
वह जब एसोसिएट प्रोफेसर थे तो उन्हें अमर्त्य सेन द्वारा दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में चीनी अध्ययन पर एक प्राध्यापक के पद के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। जब वो दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स पहुचे तो उनकी नियुक्ति को उनके भारत के लिए परमाणु क्षमता के समर्थन और उसके बाजार के अनुकूल दृष्टिकोण के कारण रद्द कर दिया गया।
इसके बाद, वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में जुड़े। वहा वो 1969 से 1991 तक गणितीय अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में रहे। 1970 के दशक में इंदिरा गाँधी के कारन उन्हें प्रोफेसर के पद से हटा दिया गया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायलय द्वारा कानूनी तौर पर 1990 के दशक में उन्हें पुन बहाल किया गया। १९९१ में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से उन्होंने कैबिनेट मंत्री बनने के लिए इस्तीफा दे दिया। 1977 से 1980 तक वो आईआईटी, दिल्ली के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में रहे और १९८० से १९८२ तक वो आईआईटीयो के परिषद में रहे।
2011 तक उन्होंने हार्वर्ड में गर्मियों के सत्र में अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम को पढ़ाया। दिसंबर 2011 में एक विवादास्पद लेख के कारन हार्वर्ड के कला और विज्ञान के संकाय के संकाय परिषद ने उनके पाठ्यक्रम को हटा दिया। जून २०१२ को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने स्वामी को मैकलीन, वर्जीनिया में एक रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया। ओबामा ने २०१२ में अपने पुनर्निर्वाचन के बाद स्वामी को अपने सपथ ग्रहण समारोह में भी आमंत्रित किया।

राजनीतिक जीवन

आरंभिक राजनीतिक जीवन

चित्र:Dr Subramanian Swamy with Morarji Desai.jpg
सुब्रह्मण्यम स्वामी मोरार्जी देसाई के साथ
डॉ स्वामी जा राजनितिक जीवन अराजनैतिक आंदोलन के साथ सुरु हुआ। यह आन्दोलन एक गैरराजनीतिक आन्दोलन के रूप में सुरु हुआ जिसने आगे चलकर जनता पार्टी की नीव डाली। डॉ स्वामी द्वारा रखे गए उदारवादी आर्थिक नीतियों की तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी बहुत बरी विरोधी थी और बाद में इंदिरा गाँधी के कारन डॉ स्वामी को आईआईटी से बर्खास्त कर दिया गया और इस घट्न के बाद से डॉ स्वामी के राजनीतक जीवन की सुरुआत हुई। डॉ स्वामी इंदिरा गांधी के विरोधी पार्टी जनसंघ के तरफ से राज्यसभा के सदस्य बने।
1974 और 1999 के बीच डॉ स्वामी 5 बार संसद सदस्य के रूप में चुने गए। उन्होंन 1974 और 1999 के बीच उत्तर पूर्व मुंबई, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का संसद में प्रतिनिधित्व किया। डॉ स्वामी जयप्रकाश नारायण के साथ जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक है और 1990 के बाद से इसके अध्यक्ष हैं।

आपातकाल

डॉ स्वामी के नौकरशाहों के बीच काफी संपर्क थे। इसलिए उन्हें पहले ही आपातकाल के विषय में पता चल गया था। २५ जून १९७५ के दिन डॉ स्वामी जयप्रकाश नारायण के साथ रत्रिभोजन कर रहे थे तो उन्होंने जे पी को कहा की कुछ बड़ा आने वाला है तो जे पी ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया, उन्होंने कहा की इंदिरा गाँधी ऐसी मुर्खता नहीं करेगी। दुसरे दिन सुबह 4.30 बजे उन्हें एक गुमनाम कॉल आया जिसमे उन्हें पुलिस ने अप्रत्यक्ष रूप से बताया की वो डॉ स्वामी को पकरने वाले है। इसके बाद डॉ स्वामी ६ महीनो के लिए भूमिगत हो गए।
उस समय जयप्रकाश नारायण ने डॉ स्वामी को सूचना भेजी की तुम अमेरिका जाओ। क्योकि उन्होंने डॉ स्वामी को हार्वर्ड में देखा था। जे पी ने कहा की अमेरिका में जाकर भारत के आपातकाल के बारे में लोगो को जागरूक करो। उसके बाद डॉ स्वामी अमेरिका में जाकर हार्वर्ड में प्रोफेसर बन गए और हार्वर्ड के मंच का उपयोग करके आपातकाल अमेरिका के २३ राज्यों में भारतीयों को जागरूक करना सुरु किया।

संसद मे घुसकर भाषण देना

डॉ स्वामी ने आपातकाल के समय सोचा की लोगो में आपातकाल के खिलाफ हिम्मत जगाने के लिए वो एक दिन के लिए संसद में घुसेंगे और २ मिनट का भाषण देकर पुनः भूमिगत हो जायेगे। इस कार्य को करके वो यह सिद्ध करना चाहते थे कि पूरा देश इंदिरा गाँधी के नियंत्रण में नहीं है। उस समय डॉ स्वामी के ने नाम से वारंट जारी हो चूका था। लेकिन फिर भी वो १० अगस्त १९७६ के दिन संसद में गए और यह देश विदेश के पत्रकारों के सामने यह कहकर निकल गए की भारत में प्रजातंत्र मर चूका है। उसके बाद डॉ स्वामी नेपाल के मार्ग से वापस अमेरिका चल गए। इस घटना से लोगों को एक नया बल और वे आपातकाल के समय एक नायक बन गए।

भारत के कानून और वाणिज्य मंत्री

1990 और 1991 के दौरान स्वामी योजना आयोग के सदस्य और भारत और वाणिज्य मंत्री रहे। इस अवधि के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल के दौरान भारत में आर्थिक सुधारों के लिए खाका बनाया। जो बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव के नेतृत्व में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 1991 लागू किया गया। डॉ स्वामी ने अपनी पुस्तक में बताया है की मनमोहन सिंह ने इस बात को स्वीकार भी किया है।
1994 और 1996 के बीच, वह पीवी नरसिंह राव सरकार के कार्यकाल के दौरान "श्रम मानकों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर आयोग के अध्यक्ष" (एक कैबिनेट मंत्री के पद के समकक्ष) के पद पर रहे।

२००४ का लोकसभा चुनाव

२००४ के लोकसभा चुनावो में जनता पार्टी ने अपने कई उम्मीदवार उतारे। लेकिन एक भी उम्मीदवार की जीत नहीं हुई। बाद में स्वामी ने बताया की कई चुनाव बुथो में उनकी पार्टी को जीरो वोट मिले है। इस चुनाव के बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में वोटिंग मशीन में गड़बड़ी के मामले को लेकर मुकदमा दायर किया। स्वामी ने दावा किया की वोटिंग मशीन में गड़बड़ी के कारन उनकी पार्टी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई।

२००९ का लोकसभा चुनाव

चित्र:Dr Subramanian Swamy meets Narendra Modi.jpg
सुब्रह्मण्यम स्वामी नरेन्द्र मोदी के साथ (११ मार्च २०११)
२००९ के लोकसभा चुनावो में स्वामी ने जनता पार्टी की तरफ से एक भी उम्मीदवार चुनावो में नहीं उतारा। स्वामी ने कहा की २००९ के चुनावो में कांग्रेस बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में गड़बड़ी करके चुनाव जीतने वाली है इसलिए चुनाव लड़ने का कोई फायदा नहीं है। २०१३ के अंत में उन्हें वोटिंग मशीन में गड़बड़ी के मामले में सर्वोच्च न्यायलय में जीत हासिल हुई। सर्वोच्च न्यायलय ने निर्णय दिया की वोटिंग मशीन में रसीद प्रिंट की जाएगी जिसे वल्लेट बॉक्स में दल जायेगा। अगर चुनाव में गड़बड़ी की आशंका होगी तो बैलेट बॉक्स में गिनती की जाएगी।

जनता पार्टी का NDA से जुड़ना

डॉ स्वामी 2G घोटाले में कांग्रेस के खिलाफ अपने प्रदशन के लिए सुर्खियों में रहे। डॉ स्वामी जनता पार्टी को NDA का हिस्सा बनाना चाहते थे। अन्ततः ११ मार्च २०१२ को जनता दल को NDA का घटक दल बना लिया गया। जनता दल के जुड़ने से NDA के घटक दलों की शंख्या बढकर ६ हो गई।

२०१२ का गुजरात विधानसभा चुनाव

२०१२ के गुजरात के विधान सभा चुनावो के लिए सुब्रमनियन स्वामी ने अक्टूबर २०१२ से ३ महीने के लिए नरेंदर मोदी के समथन में चुनावी प्रचार किया। उन्होंने कहा की वर्त्तमान बीजेपी पार्टी में नरेन्द्र मोदी प्रधान मंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा योग्य है। स्वामी ने कहा की गुजरात में सबसे न्यूनतम भ्रस्ताचार है। चुँव में नरेंदर मोदी की जीत हुई लेकिन स्वामी का दावा है की मोदी और भी ज्यादा सीटे जीतते अगर कांग्रेस सरकार वोटिंग मशीन में गड़बड़ी नहीं करती। स्वामी ने दावा किया की अगर गुजरात में EVM का बिलकुल प्रयोग नहीं होता तो BJP और 35 सीटे और जीतती।

२०१४ का लोकसभा चुनाव

सुब्रह्मण्यन स्वामी ने २०१४ के चुनावो के लिए बहुत पहले से ही प्रचार अभियान आरंभ कर दिया। चुनाव को दृष्टि में रखते हुए उन्होंने पूरे देश में आम सभाए कीं। इस दौरान उन्होंने २ बार नरेंद्र मोदी से जाकर भेंट की। चुनावी सभाओ में उन्होंने NDA के मुद्दों से जनता को अवगत कराया। जून २०१३ में वो अमेरिका के दौरे पर गए एवं अमेरिका के कई राज्यों में सभाएं कीं। उन्होंने कहा कि कश्मीर-समस्या का हल सबसे महत्वपूर्ण तो है ही साथ में बांग्लादेशी घुसपैठ को रोकना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।

कार्य

  • भारत से सोशलिज्म को हटाना
  • LTTE को भारत से भागना
  • कैलाश मानसरोवर के द्वार भारत के लिए खुलवाना
  • काले धन के विरोध में अभियान

अदालती सक्रियता

  • 2जी घोटाला
  • वोटिंग मशीन में गड़बड़ी
  • ऐयरसेल मैकसिस घोटाला
  • निर्भया दिल्ली गैंग रेप केस
  • हेलीकाप्टर घोटाला
  • नेशनल हेराल्ड घोटाला
  • हाशिमपुरा नरसंहार
  • राम सेतु को टूटने से बचाना
  • अयोध्या राम मंदिर
  • इतालियन नौसैनिक मुद्दा
  • धर्मांतरण पर रोक
  • ताजमहल शिवमंदिर है की जांच
  • भारतीय मीडिया के विदेशी मालिको पर प्रतिबंध
  • मंदिरों पर सरकार के अतिक्रमण का विरोध
  • सोनिया गाँधी के नकली जन्म स्थान, तिथि का मुद्दा
  • सोनिया गाँधी के भारतीय नागरिक न होने का मुद्दा
  • सोनिया गाँधी के गलत शैक्षिनिक जानकारी देने का मामला
  • जयललिता के भ्रस्ताचार के विरुद्ध केस
  • संत आसारामबापू केस

विदेश नीति

पाकिस्तान

डॉ स्वामी का कहना है की पाकिस्तान को भारत में कश्मीर के मामले में दखल नहीं देना चाहिए। वो पाकिस्तान द्वारा चलाये जा रहे आतंकवादी गतिविधियों को बंद करना चाहिए। सुदर्शन न्यूज़ के साथ मार्च २०१३ में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा है की पाकिस्तान पर जल्द ही तालिबान कब्ज़ा करने वाला है और उसके बाद भारत और तालिबान शासित पाकिस्तान के बीच के युद्ध को रोक पाना बहुत ही मुस्किल होगा। डॉ स्वामी पाकिस्तान को पाकिस्तान शाशित कश्मीर का भाग भारत को वापस करना चाहिए। अगर पाकिस्तान पाकिस्तान शाशित कश्मीर में चल रहे ५४ आतंकवादी कैंपो को बंद नहीं करता है तो भारत को इन कैम्पों को नस्ट करना चाहिए।

चीन

डॉ स्वामी ने कहा की चीन और भारत परोशी देश है और दोनों देश के सम्बन्ध कम से कम 3000 सालो से है। जब डॉ सुब्रमनियन स्वामी मोरारजी सरकार में थे तो उन्होंने चीन से कहा की कैलाश मानसरोवर का रास्ता खोले। उस समय भारत से कैलाश मानसरोवर जाने का रास्ता चीन ने बंद कर रखा था। 3 सालो तक चीन के साथ बात करने के बाद और अन्तत: चीन ने कहा की ठीक है रास्ता खोल देंगे अगर डॉ स्वामी खुद कैलाश मानसरोवर जाये। उसके अप्रैल १९८१ में डॉ स्वामी पहले कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले भारतीय बने और उसके बाद चीन ने कैलास मानसरोवर भारत के लिए खोला।

इजराइल

अपने भाषणों और लेखों में डॉ॰ स्वामी ने इसराइल के लिए अपनी प्रशंसा व्यक्त की है और एक शत्रुतापूर्ण अरब वातावरण में जीवित रहने की क्षमता के लिए अपने प्रतिकार क्षमता श्रेय दिया है। उन्होंने कहा कि इजराइल के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना में अग्रणी प्रयास किए थे। 1982 में, डॉ॰ स्वामी इजराइल जाने वाले पहले भारतीय राजनितज्ञ बने और वो वहा यित्ज्हक राबिन और मेनाचेम बिगिन जैसे कई महत्वपूर्ण इजराइली नेताओ से मिले। इसराइल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने में उनके प्रयासों का फल तब मिला जब भारत ने 1992 में इसराइल में अपना दूतावास खोलने का निर्णय लिया।

बंगलादेश

डॉ स्वामी का कहना है की बंगलादेश के कुल जनसंख्या का करीब एक तिहाई भाग भारत में अवैध रूप से घुस चूका है। इसलिए बंगलादेश या तो इन सभी अवैध रूप से घुसे हुए अपने नागरिको को वापस बुलाये या अपने देश का एक तिहाई भाग भारत को दे दे। ऐसा होने से भारत का अपने पश्चिमी भागो पर ज्यादा अच्छा नियंत्रण हो सकेगा।

श्रीलंका

डॉ स्वामी का कहना है की श्रीलंका के जो सिनला है वो भी भारत के बिहार, उड़ीसा जैसे राज्यों से श्रीलंका गए थे। उनका कहना है की भारत के रस्त्राहित में आज भारत को श्रीलंका से अच्छे सम्बन्ध बनाने चाहिए। भारत को श्रीलंका में जो २५% तमिल है उनके स्वायत्ता के लिए प्रयास करने चाहिए। उनका कहना है की जो द्रविड़ा आन्दोलन के लोग है वो भारत से अलग होना चाहते है इसलिए उनकी बातो पर भारत को ध्यान नहीं देना चाहिए।

विचार

  • २००२ के गुजरात दंगे
  • नाक्सलवाद का हल
  • द्रविदा आन्दोलन
  • आर्यन द्रविड़ियन सिद्धांत
  • कश्मीर की समस्या का हल
  • बांग्लादेशी घुसपैठियों के संशय का हल
  • भ्रस्ताचार की समस्या का हल
  • श्री लंका की समस्या का हल
  • इंडियन प्रीमियर लीग
  • आईपीएल श्रीनिवासन का मामला
  • जाति व्यवस्था
  • विराट हिंदुस्तानी
  • मुस्लिम आरक्छन
  • भीमराव आंबेडकर
  • मोरारजी देसाई
  • जयप्रकाश नारायण
  • राजीव मल्होत्रा
  • नरेंदर मोदी
  • बाबा रामदेव
  • तपन घोष
  • शाहरुख़ खान
  • संजय दत्त
  • जवाहरलाल नेहरु
  • राहुल गाँधी
  • सोनिया गाँधी
  • इंदिरा गाँधी
  • करूणानिधि

परिवार और व्यक्तिगत जीवन

सुब्रह्मण्यम् स्वामी ने रोक्सना नाम की एक पारसी महिला से जून 1966 में विवाह किया। रोक्सना से उनकी पहली भेंट हार्वर्ड में हुई थी। रोक्सना स्वामी भी गणित में पीएच०डी० हैं तथा आजकल भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वकील हैं।[3] उनकी दो बेटियाँ है, एक गीतांजलि स्वामी जिसने एम०आई०टी० विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजय शर्मा से शादी की है और दूसरी सुहासिनी हैदर जो सीएनएन आईबीएन में सम्पादक है।

किताबें, शोधपत्र और पत्रिकायें

सुब्रह्मण्यम् स्वामी ने कई किताबें व शोधपत्र लिखे और पत्रिकाओं का सम्पादन किया। नीचे उनकी सूची दी हुई है।

किताबें

  • 1952-70 के बीच चीन और भारत में आर्थिक विकास (प्रकाशक: शिकागो विश्वविद्यालय प्रेस, ISBN 978-0-226-78315-4)
  • भारत में भ्रष्टाचार और निगमित प्रशासन: सत्यम, स्पेक्ट्रम और सुंदरम बीएनपी पारिबा (प्रकाशक: हर आनंद प्रकाशन, ISBN 978-81-241-1486-5)
  • भारत में आतंकवाद: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा (प्रकाशक: हर आनंद प्रकाशन, ISBN 978-81-241-1344-8)
  • के लिए शक्ति संतुलन की एक रणनीति 1952-70 चीन और भारत में
  • भारतीय आर्थिक नियोजन;: एक वैकल्पिक दृष्टिकोण (प्रकाशक: बार्न्स एंड नोबल, ISBN 978-0-389-04202-0)
  • राष्ट्रीय पुनर्जागरण के लिए एक एजेंडा (प्रकाशक: दक्षिण एशिया पुस्तक, ISBN 978-81-85674-21-6)
  • एक नए भारत का निर्माण भारत के श्रम मानकों और विश्व व्यापार संगठन के फ्रेमवर्क (प्रकाशक: कोणार्क पब्लिशर्स, ISBN 978-81-220-0585-1)
  • भारत के आर्थिक प्रदर्शन और सुधारों: नई सहस्राब्दी के लिए एक परिप्रेक्ष्य (प्रकाशक: कोणार्क पब्लिशर्स, ISBN 978-81-220-0594-3)
  • राजीव गांधी की हत्या: अनुत्तरित प्रश्न और आशातीत प्रश्न (प्रकाशक: कोणार्क पब्लिशर्स, ISBN 978-81-220-0591-2)
  • भारत की चीन परिप्रेक्ष्य (प्रकाशक: कोणार्क पब्लिशर्स, ISBN 978-81-220-0606-3)
  • चीन और भारत में वित्तीय वास्तुकला और आर्थिक विकास (प्रकाशक: कोणार्क पब्लिशर्स, ISBN 978-81-220-0718-3)
  • जापान में व्यापार और उद्योग: भारतीय उद्यमियों और व्यवसायियों (प्रकाशक: प्रेंटिस हॉल ऑफ इंडिया, ISBN 978-81-203-0785-8) के लिए एक गाइड
  • संकट में श्रीलंका: भारत का विकल्प (प्रकाशक: हर आनंद प्रकाशन, ISBN 978-81-241-1260-1)
  • शिव के डोमेन में 22 साल के बाद कैलाश और मानसरोवर (प्रकाशक: अलायड प्रकाशक) घेराबंदी के तहत हिन्दुओं (प्रकाशक: हर आनंद प्रकाशन, ISBN 978-81-241-1207-6)
  • राम सेतु: राष्ट्रीय एकता की प्रतीक (प्रकाशक: हर आनंद प्रकाशन, ISBN 978-81-241-1418-6)
  • 2जी स्पेक्ट्रम स्कैम (प्रकाशक: हर आनन्द पब्लिकेशंस, ISBN 978-81-241-1638-8)
  • इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन:अनकांस्टीट्यूशनल एण्ड टेम्परेबुल (प्रकाशक: विजन बुक्स, ISBN 978-81-7094-798-1)

सन्दर्भ



  • "Subramanian Swamy's Janta Party merges with BJP". The Indian Express. 11 अगस्त 2013.

  • "The RSS Game Plan". द हिन्दू. 22 फ़रवरी 2000.

    1. "The well-regarded Supreme Court advocate on her husband : SUNIT ARORA INTERVIEWS ROXNA SWAMY". Outlook (magazine). अभिगमन तिथि: 2012-01-03.

    बाहरी कड़ियाँ

    रामोजी फिल्म सिटी / दुनिया का सबसे बड़ा स्टूडियों


    मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से


    रामोजी फिल्म नगरी का प्रवेशद्वार

    रामोजी फिल्म सिटी (तेलुगू:రామోజీ ఫిలిం సిటీ) दुनिया का सबसे बङा फिल्म स्टूडियो परिसर माना जाता है। यह भारत के राज्य आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद से २५ किलो मीटर दूर नल्गोंडा मार्ग मे स्थित है। यह स्टूडियो 2000 एकड़(8.2वर्ग किलोमीटर) से भी अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस स्टूडियो में ५० शूटिंग फ्लोर है। इस स्टूडियो का शुरुवात १९९६ में हुआ था। यहाँ एक साथ १५ से २५ फिल्मों की सकती है। आरएफसी में फिल्म की प्री-प्रोडक्शन से पोस्ट प्रोडक्शन तक की तमाम सुविधाएं एक जगह मौजूद हैं यानी फिल्म का आइडिया लेकर आइये और फिल्म कैन करके जाइये.फिल्म-निर्माण के अलावा रामोजी फिल्म सिटी एक प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र भी है, जहां हरसाल दस लाख से भी ज्यादा लोग आते हैं। आरएफसी को मानव-निर्मित आश्चर्य की श्रेणी में भी रखा जा सकता है।

    अनुक्रम

    इतिहास

    दक्षिण के मशहूर फिल्म निर्माता और मीडिया बैरॉन रामोजी राव ने सन 1996 में रामोजी फिल्म सिटी की स्थापना की। रामोजी ग्रुप की ईकाई उषा किरण मूबीज लिमिटेड हिंदी, मलयालम, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मराठी और बांग्ला में अस्सी से भी ज्यादा फिल्में बना चुकीहै। उषा किरण मूवीज लिमिटेड ने भारतीय फिल्माकारों की फिल्मी कल्पना के मुताबिक इस फिल्म सिटी का निर्माण किया।

    स्टूडियो की विशेषता

    रामोजी फिल्म सिटी पूर्व-निर्माण, निर्माण और पश्च-निर्माण की तमाम सुविधाएं मुहैया कराती है। इसमें 500 से ज्यादा सेट लोकेशन हैं। सैंकड़ों उद्यान, पचास के करीब स्टूडियो फ्लोर, अधिकृत सेट्स, डिजिटल फिल्म निर्माण की सुविधाएं, आउटडोर लोकेशन, उच्च-तकनीक के लैस प्रयोगशालाएं, तकनीकी सहायता सभी मौजूद है। फिल्म की आधारभूत संरचना में कॉस्ट्यूम डिजाइन लोकेशन, मैक-अप, सेट-निर्माण, तैयार साज-सज्जा, कैमरा, फिल्म निर्माण उपकरण, ऑडियो प्रोडक्शन, डिजीटल पोस्ट प्रोडक्शन और फिल्म प्रोसेसिंग की व्यवस्था भी शामिल हैं। रामोजी फिल्म सिटी में एक साथ बीस विदेशी फिल्म और चालीस देशी फिल्में बनाई जा सकती हैं। रामोजी फिल्म सिटी में न सिर्फ देशी, बल्कि विदेशी फिल्म निर्माता भी आते हैं।

    पर्यटन

    रामोजी फिल्मनगरी में मैसूर के वृन्दावन उद्यान की प्रतिकृति
    फिल्म सिटी में हर साल करीब दस लाख पर्यटक आते हैं। फिल्म स्टूडियों इन पर्यटकों के लिए खास आकर्षण होते हैं। इससे फिल्म सिटी को अरबों की आमदनी होती है। पर्यटकों के लिए विशेष प्रकार का खुला कोच होता है। फिल्म सिटी के प्रवेशद्वार पर एक तीन-सितारा होटल तारा और पंच सितारा होटल सितारा फिल्म स्टूडियो की सुंदरता में चार चांद लगाती है। ये होटल पर्यटकों और फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को आरामदेह ठहराव देता है। होटल के एक ओर हवा महल है जहां से फिल्म सिटी का विहंगम स्वरूप देखा जा सकता है। फिल्म सिटी नवविवाहित जोड़ों के लिए हनीमून पैकेज भी देती है। जापानी गार्डन, ईटीवी प्लेनेट, ताल, कृत्रिम जलप्रपात, हवाई अड्डा, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, चर्च, मस्जिद, मंदिर, शॉपिंग कॉपलेक्स, खूबसूरत इमारतें, देहाती दुनिया, स्लम, राजपथ आदि इस फिल्म सिटी के दर्शनीय स्थल हैं। फिल्म सिटी के कोच पर पर्यटन गाइड भी होता है। यहां के कुछ सेट प्राचीन राजा-महाराजाओं के किलों की याद दिलाते हैं तो कुछ देश में बॉलीवुड का दर्शन कराते हैं। इन खूबसूरत सेटों का निर्माण किया है-बिद्युतकेश पांडा ने.

    कैसे पहुंचें

    हैदराबाद आंध्र प्रदेश की राजधानी है एवं भारत के सभी बडे शहरों एवं कई वैश्विक नगरों से वायु मार्ग द्वारा सीधे जुडा है। भारतीय रेल की सेवाओं द्वारा रेलमार्ग से एवं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल की सरकारी एवं गैर सरकारी बस सेवा द्वारा स्थल मार्ग द्वारा आप हैदराबाद पहुंच सकते हैं। रामोजी फिल्म सिटी विजयवाड़ा मार्ग (एनएच-09) पर हैदराबाद के करीब पच्चीस किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

    इन्हें भी देखें

    बाहरी कड़ियाँ