मंगलवार, 31 जनवरी 2012

कम्युनिटी रेडियो / कैसे करें कम्युनिटी रेडियो की शुरुआत ?


भारत सरकार ने पहले पहल तो केवल IIT और IIM जैसे उच्च संस्थानों को कम्युनिटी रेडियो शुरू करने की अनुमति दी थी। लेकिन जब उसे यह समझाया गया कि सामुदायिक रेडियो का उद्देश्य इन संस्थानों की सब सुविधा भोगने वाली और भविष्य में तगड़ी रकम कमाने वाली जनसंख्या का मनोरंजन करना नही बल्कि जानकारी और अभिव्यक्ति के अभाव में मूलभूत सुविधाओं से दूर जन-सामान्य की आवाज़ को प्रसारित करना है; तब सरकारी महकमा कुछ हिला डुला और कम्युनिटी रेडियो के लिए पॉलिसी में बदलाव किया गए। अब गैर सरकारी नॉन-प्रोफिट संस्थाओं को भी कम्युनिटी रेडियो शुरू करने की अनुमति मिल गई है। इसके अलावा कृषी विज्ञान केन्द्र, रेगिस्तेरेड रजिस्टरर्ड ट्रस्ट, सोसाइटी,  कृषी विश्विद्यालय और शिक्षण संसथान कम्युनिटी रेडियो का लाईसेन्स पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। ट्रस्ट और सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन कम से कम तीन साल पुराना होना चाहिए।
आवेदन के लिए अयोग्य-
१) कोई व्यक्ति
२) राजनीतिक पार्टियाँ या उनके कोई विंग (स्टुडेंट यूनियन, ट्रेड यूनियन आदि )
३) प्रोफिट कमाने के लिए काम कर रही संस्थाएं
४) केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित संस्थाएं
हर साल सूचना और प्रसारण मंत्रालय विज्ञापनों के जरिये आवेदन आमत्रित करता है। आवेदकों को आवेदन के साथ २५०० रुपये जमा करने होंगे। विश्विद्यालयों, मानद विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी शिक्षण संस्थानों को  सीधे ही एक फ्रीक्वेंसी आवंटित कर दी जायेगी।  और लैटर ऑफ़ इंटेंट दे दिया जाएगा।
अन्य आवेदकों और निजी शिक्षण संस्थानों को गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद और संचार एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय के WPC  विंग से फ्रीक्वेंसी आवंटित होने के बाद ही लैटर ऑफ़ इंटेंट मिल सकेगा। पहले आवेदन सूचना प्रसारण मंत्रालय के पास जाएगा जो एक माह की भीतर या तो आवेदक को आवेदन की खामियों के बारे में सूचित करेगा या अन्य मंत्रालयों के पास भेज देगा। दूसरे मंत्रालयों को स्वीकृति देने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है, इस समय में स्वीकृति न मिलने पर सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति के पास मामला जाएगा।
एक फ्रीक्वेंसी के लिए एक से अधिक आवेदक होने की स्थिति में आवेदक का चयन उस समुदाय के लिए किए गए काम, समुदाय में उनकी स्थिति, कमिटमेंट और समुदाय के लिए संस्था कितने समय से कार्यरत है यह सब देखकर किया जाएगा। लैटर ऑफ़ इंटेंट मिलने के एक महीने के भीतर संस्थाओं को सूचना प्रसारण मंत्रालय के WPC विंग , संचार भवन , नई दिल्ली में फ्रीक्वेंसी आवंटन और  SACFA स्वीकृति के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए एक प्रारूप निर्धारित है।
SACFA स्वीकृति मिलने के लिए ६ महीने की समय सीमा निर्धारित है।  जिसके न मिलने पर यह मामला सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति के पास जाएगा।  SACFA  स्वीकृति मिलने के बाद आवेदक को बैंक गारंटी के तौर पर २५००० रुपये जमा कराने होंगे। इसके बाद आवेदक को ग्रांट ऑफ़ permission अग्रीमेंट (GOPA) पर हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया जाएगा।
GOPA मिलने के बाद उसे सूचना प्रसारण मंत्रालय के WPC विंग से वायरलेस ऑपरेटिंग लाईसेन्स के लिए जाना होगा। सूचना प्रसारण मंत्रालय के WPC विंग से यह लाईसेन्स मिल जाने के बाद ही कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चलने की अनुमति होगी। लाईसेन्स मिलने के तीन महीने के भीतर स्टेशन बना लेना होगा और इसकी जानकारी सुचना प्रसारण मंत्रालय को देनी होगी। तीन महीने में स्टेशन न बना पाने की अवस्था में लाईसेन्स निरस्त हो जाएगा और बैंक गारंटी जब्त कर ली जायेगी।
GOPA  पाँच साल के लिए मिलेगा और यह अहस्तांतरणीय होगा।  आवेदक को स्पेक्ट्रम उपभोग की फीस WPC विंग में जमा करनी होगी। यदि लाईसेन्स मिलने के तीन महीने के भीतर प्रसारण नही शुरू होता है या तीन महीने से ज्यादा के लिए प्रसारण रुक जाता है तो स्वीकृति निरस्त कर दी जायेगी और उस फ्रीक्वेंसी को अगले योग्य आवेदक को आवंटित कर दिया जाएगा।
एक आवेदक या संस्था एक से अधिक जगहों पर कम्युनिटी रेडियो स्टेशन चलाने की अनुमति नही पा सकती।
ट्रांसमीटर-
कम्युनिटी रेडियो ५-१० कम की सीमावधि में ही सुने जा सकेंगे। इसके लिए १०० वाट का ट्रांसमीटर उपयुक्त होगा  जबकि विशेष परिथितियों में २५० वाट का ट्रांसमीटर लगाने की अनुमति भी दी जा सकती है। एंटिना की अधिकतम ऊँचाई भूतल से ३० मीटर हो सकती है। न्यूनतम ऊँचाई १५ मीटर होनी चाहिए।
विश्वविद्यालय, मानद विश्वविद्यालय और अन्य शिक्षण संस्थानों को अपने मुख्य कैम्पस में ही ट्रांसमीटर और एंटिना लगना होगा।
फंड और अन्य आय श्रोत-
आवेदक केवल उन संस्थाओं से फंड ले सकते हैं जो बहुपक्षीय कार्यों के लिए फंड देती हो (मुख्यतः  UNESCO, UNDP या  AMARC कम्युनिटी रेडियो के लिए फंड देती हैं।) विदेशों से फंड लेने की इच्छुक संस्थाओं को FCRA, 1976 स्वीकृति लेनी होगी।
केन्द्र तथा राज्य सरकार और जनहित के लिए प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों के अलावा किसी भी तरह के प्रायोजित कार्यक्रम प्रसारित नही किए जा सकते हैं। स्थानीय विज्ञापनों और  अन्नौंसमेंट्स एनाउंसमेंट के लिए एक घंटे में ५ मिनट की समय सीमा तय की गई है। विज्ञापनों से होनी वाली आय का उपयोग स्टेशन के दिन प्रति दिन के खर्चों के  लिए किया जा सकेगा।
कम्युनिटी रेडियो का लाईसेन्स पाने के लिए एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सूचना प्रसारण मंत्रालय की वेब साईट (http://mib.nic.in/CRS/CRBGUIDELINES041206.pdf) पर आवेदन करने की पूरी जानकारी उपलब्ध है । अपने प्रश्नों के लिए बेझिझक संपर्क करिए।
*संपर्क : ashish.tiss@gmail.com , *मोबाइल : 09324001977
(लेखक टाटा इंस्टीटयूट ऑफ सोशल साइंस , मुंबई में अध्यनरत हैं.)

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