मंगलवार, 31 जनवरी 2012

लंदन में संपन्न हुआ हिंदी पत्रकारिता सम्मेलन





लंदन स्थित ‘ नेहरू केंद्र’ में पिछले दोनों ‘यू के में हिंदी पत्रकारिता’ विषयक पर एक सम्मेलन संपन्न हुआ। इसमें पद्मेश गुप्त, नरेश भारतीय , शिखा वार्ष्णेय, विजय राणा, कैलाश बुधवार और रवि शर्मा जैसे वरिष्ठ पत्रकारों के साथ-साथ दिव्या माथुर , आनंद कुमार , अताशे , यावर अब्बास, तेजेंद्र शर्मा समेत उच्चायोग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और हिंदी प्रेमी मौजूद थे।


समारोह के प्रथम भाग का प्रारंभ पद्मेश गुप्त के संचालन और आनंद कुमार की अध्यक्षता में हुआ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सबसे पहले शिखा वार्ष्णेय ने “यू के में हिंदी वेब पत्रकारिता “पर अपने विचार रखे। उन्होंने अभिव्यक्ति, नेटवर्क ६, प्रवक्ता, और हिंद-युग्म पोर्टलों के उदाहरण देकर कहा कि वेब पत्रकारिता ने हिंदी को विश्वव्यापी रूप देने में सहायता की है। साथ ही दुनिया भर में एक सफल वैचारिक क्रांति की नीव रखी है। नरेश भारतीय के विचार जनार्दन अग्रवाल द्वारा रखे गए, जहाँ उन्होंने यू.के. की प्रथम हिंदी पत्रिका “चेतक” के जन्म से विकास की कहानी को अपने संघर्ष के अनुभवों को सबके साथ बांटा।


इसके बाद पद्मेश गुप्त ने पुरवाई में अपने सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए पत्रिका की रूपरेखा और प्रकाशन के बारे में बताया। कार्यक्रम के प्रथम भाग का समापन अध्यक्ष आनंद कुमार ने अपने विचारों से किया। उन्होंने कहा कि यू.के. में हिंदी पत्रकारिता के विकास के लिए उनकी तरफ से हर संभव मदद की जाएगी और जो पत्रिकाएं साधनों के अभाव में प्रकाशित नहीं हो पा रही हैं, उनके पुनः प्रकाशन के लिए वे हर संभव सहायता देने को तैयार हैं।


द्वितीय सत्र का संचालन तेजेंद्र शर्मा ने यावर अब्बास की अध्यक्षता में किया। इस सत्र में सबसे पहले विजय राणा ने बीबीसी रेडियो की हिंदी की कार्यप्रणाली का ब्यौरा देते हुए अपने बीबीसी कार्यकाल की यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने बताया किस तरह बीबीसी का मुख्य अजेंडा पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग था| फिर कैलाश बुधवार जी अपने कार्यकाल के दौरान बीबीसी हिंदी के अपने अनेक खट्टे-मीठे अनुभव बहुत रोचकता के साथ साझा करते हुए कहा कि प्रसारक को एक सुधारक होने का भ्रम नहीं होना चाहिए। वह सिर्फ समाज का प्रतिबिम्ब जनता के आगे रखता है। वहीँ रवि शर्मा ने सन राईस रेडियो के सफ़र और कार्यप्रणाली का ब्यौरा अपने चुटीले अंदाज में दिया। उन्होंने कहा कि किस तरह उनका उद्देश्य मात्र कार्यक्रम की दिलचस्पी बनाये रखने में और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उसे पहुँचाने में होता है |


अंत में यावर अब्बास ने अपने अध्यक्षीय कथन में बताया कि किस प्रकार उर्दू के शब्दों के अर्थ का गलत इस्तेमाल होते हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू हिन्दुस्तान की ही ज़बान है और उसे सही रूप में प्रयोग किया जाना चहिये। समारोह में वेब पत्रिकाओं की विश्वसनीयता और मौलिकता पर भी चर्चा की गई। इस तरह एक दिन का सफल पत्रकार सम्मेलन का समापन हुआ। ज्ञात हो कि यह सम्मेलन यू.के. हिंदी समिति के गठन के २० वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विगत कई सप्ताह से चल रहा था जो हिंदी कहानी, कविता, पत्रकारिता एवं युवा हिंदी शिक्षण आदि विषयों पर आधारित था। उल्लेखनीय है कि हिंदी भाषा के विकास और प्रसार के लिए समय-समय पर इस तरह के सम्मेलन और समारोह आयोजित किये जाते हैं, जिसमें यू.के. के वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार ही नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को भी हर संभव मौका दिया जाता है। विदेशी धरती पर अपनी भाषा और संस्कृति को जीवित रखने का और उसे अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने का संचालकों का ये प्रयास निश्चित ही प्रशंसनीय है।
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