शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

भारत में साइबर कानून


Wednesday, January 05, 2011



सूचना प्रौद्योगिकी के कारण कानून के हर क्षेत्र में मुश्किले आयीं। इस बार चर्चा का विषय है कि उनको दूर करने के लिये, अपने देश में किस प्रकार के और किस क्षेत्र में कानून बनाये गये।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।
हमारी संसद जहां यह कानून बनाये गये चित्र विकिपीडिया से
इस नयी तकनीक के कारण पैदा हुई मुशकलों का हल निकालने के लिये सबसे पहले अपने देश में कानून में बदलाव, बौद्धिक सम्पदा अधिकार के क्षेत्र में किया गया। 


कॉपीराइट अधिनियम को १९९४ एवं १९९९ में संशोधित कर, इस तकनीक के द्वारा लायी गयी और मुश्किलों को दूर किया गया।


२००२ में, पेटेंट अधिनियम में भी संशोधन किया गया। इस बारे में आप यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं। 


२००४ में एक अध्यादेश के द्वारा, पेटेंट अधिनियम में किये गये संशोधन को स्पष्ट करने का प्रयत्न किया गया। लेकिन जब यह अध्यादेश, २००५ में अधिनियम के रूप में लाया गया तब इस स्पष्टीकरण को अधिनियम में नहीं जोड़ा गया। इसका अर्थ यह हुआ कि पेटेंट अधिनियम में, २००२ में किया गया संशोधन ही लागू है।

इस क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण अधिनियम २००० में, सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) (आईटी अधिनियम) के नाम से बनाया गया। इस नियम के अन्तर्गत चार अधिनियमों में भी संशोधन कया गया। यह चार हैं

  1. The Indian Penal Code, 1860;
  2. The Indian Evidence Act, 1872;
  3. The Bankers’ Book Evidence Act, 1891;
  4. The Reserve Bank of India Act, 1934.


इस समय तीन तकनीकियां - इंटरनेट, टेलीफ़ोन, और टेलीविजन आपस में मिलते जा रहे हैं। वह समय दूर नहीं है जब तीनो मिल जायेगें। इस तकनीकियों के फायदों का ठीक प्रकार से लाभ उठाने के लिए, एक अधिनियम बनाने की बात सोची गयी। इस का नाम Communication of Convergence Bill है। यह बिल संसद समिति के सामने भेज दिया गया था। समिति ने,  हर क्षेत्र के लोगों से अलग अलग  बात करने के बाद  यह पाया कि इसको बनाने के बारे में विरोधाभास है।
  • एक विचारधारा के लोग यह कहते थे कि सरकार को यह अधिनियम नहीं बनाना चाहिए;
  • दूसरी विचारधारा के लोगों का कहना था कि इसे बनाना चाहिए।
इन दोनों विचारधाराओं को बताते हुए, समिति ने अपनी रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में लिखे विरोधाभास के कारण, यह बिल अभी भी अधिनियम के रूप में नहीं बन पाया।

कम्यूनिकेशन कंर्वजन बिल अधिनियम के रूप में तो नहीं बन पाया। लेकिन इसमें बहुत सारे ऎसे प्राविधान थे जो कि वास्तव में बेहतरीन थे। 



सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में २००८ में संशोधन किया गया और कम्यूनिकेशन कंर्वजेन्स बिल के कई प्रावधानों को,  संशोधन के द्वारा इसमे सम्मिलित कर लिया गया है। हांलाकि इस संशोधन के बाद भी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सारी कमियां दूर नहीं हुई है। बहुत कुछ करना बाकी है। देखिय वह कब तक हो पाता है।
 

साइबर कानून का किस तरह से उल्लंघन हो सकता है इसकी चर्चा अगली बार।


तू डाल डाल, मैं पात पात
भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।। नाई, महिला है।। मिस्टर व्हाई - यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत - क्या कोई संबन्ध है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।। भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं।। ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो।। साइबर या कंप्यूटर कानून क्या होता है। भारत में साइबर कानून।।

 




About this post in Hindi-Roman and English  suchna prdyogiki ke karan her chhetra mein mushkilen aa rhee hain. is chitthi mein , inko door karne ke liye banaye kanoonon kee charchaa hai. yeh chitthi {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.


Information Technology has caused problems in every field. This post narrates  the laws  made in our country to remove them. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. 


सांकेतिक शब्द
। Cyberlaw, Computer law, Internet law, Legal aspects of computing
Hindi, पॉडकास्ट, podcast,
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