गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

अबतक हाथ से लिखा जाता है यह अखबार





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एक ऐसा अखबार जो हाथों से लिखा जाता है
ऋषि राउते / June 02, 2011


चेन्नई का 'दी मुसलमान' हाथ से लिखा हुआ उर्दू अखबार है। इसे जब आप देखेंगे तो यह बेहद दुर्लभ चीज लगेगी जिसे देखकर आप बरबस आकर्षित हो सकते हैं। यह बेहद पुराना उर्दू अखबार है और शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा अखबार है जो अब तक हाथों से लिखा जा रहा है। देश में मैन्युअल टाइपराइटर की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी गोदरेज ऐंड बॉयसी ने हाल में ही यह घोषणा की है कि वह ऐसे टाइपराइटर का निर्माण अब बंद करेगी जिसकी वजह से दुनिया भर की मीडिया इसकी ओर आकर्षित हुई। ठीक वैसे ही 'दी मुसलमान' में वर्ष 2007 से ही मीडिया की दिलचस्पी दिख रही है।


यह दौर इस अखबार के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अखबार उद्योग का कंप्यूटरीकरण होने और नेतृत्व में बदलाव आने के बावजूद यह अखबार नहीं बदला है। 26 अप्रैल 2008 में इसके मालिक और संपादक सैयद फजलुल्लाह का निधन होने के बाद इस अखबार की कमान उनके बेटों के हाथों में आई। उनके सबसे छोटे बेटे सैयद अरिफुल्लाह अब यह अखबार चलाते हैं। उनका अखबार अब भी हाथों से ही लिखा जाता है और इसे चेन्नई के त्रिपलीकेल में वल्लाजाह मस्जिद के पास 800 वर्गफुट वाले दफ्तर में प्रकाशित किया जाता है। हर रोज इसकी 21,000 प्रतियों की बिक्री होती है लेकिन अब तक इस अखबार की कमाई बेहद कम है।


अरिफुल्लाह फोन पर धीमी आवाज में बताते हैं, 'पिछले 3 सालों में इसमें काफी संतुलन है।' उनके अखबार की निरंतरता बरकरार रहने की वजह यह है कि इसके कुछ कर्मचारी इससे पूरी लगन के साथ जुड़े हुए हैं जिनमें 3 कातिब या पेन से सुंदर अक्षरों में लिखने वाले लेखक, खुर्शीद बेगम, शबाना बेगम और रहमान हुसैन शामिल हैं जो काफी अरसे से इस अखबार के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे समर्पित कर्मचारियों के अलावा इसे पाठकों का भी पूरा सहयोग मिलता है। अरिफुल्लाह कहते हैं, 'लेकिन यह थोड़ा मुश्किल है क्योंकि चेन्नई में उर्दू एक सामान्य भाषा नहीं है।' लेकिन एक अच्छी बात यह है कि उर्दू पाठकों के बीच इसका एकाधिकार है।


लेकिन उर्दू अखबार ही क्यों? यह फैसला अरिफुल्लाह के दादाजी सैयद अजमातुल्लाह ने किया था जब उन्होंने इस अखबार की स्थापना वर्ष 1927 में की थी। अरिफुल्लाह का कहना है, 'दक्षिण में मुसलमानों की आवाज का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई भी नहीं था।' वर्ष 1927 में इस अखबार का शुभारंभ उस साल के कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी ने किया था। इसके कई सालों बाद प्रधानमंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि दी मुसलमान अपने हिंदू रिपोर्टरों के साथ और दी हिंदू अपने मुसलमान रिपोर्टरों के साथ देश में धर्मनिरपेक्षता की बेहतर तस्वीर दर्शाता है। दी मुसलमान के चीफ रिपोर्टर हिंदू हैं। दी मुसलमान का काम बेहद साधारण है लेकिन इसमें काफी मेहनत लगती है। एक बड़े ब्रॉडशीट को मोड़कर 4 पन्ने बनाए जाते हैं। पहले पेज पर स्थानीय और राष्टï्रीय खबरें होती हैं। दूसरे पन्ने पर अंतरराष्टï्रीय खबरें और संपादकीय होता है। तीसरे पन्ने पर कुरान के उद्घरण, हदीस के अलावा खेल की खबरें होती हैं।


अरिफुल्लाह का कहना है, 'आखिरी पन्ने पर सब कुछ होता है और इसमें स्थानीय खबरों पर पूरा जोर दिया जाता है। इसमें स्थानीय कारोबारियों से विज्ञापन भी मिलते हैं, मसलन ये विज्ञापन किसी प्रदर्शनी, सर्कस, नए उत्पाद और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विज्ञापन भी होते हैं।'


विभिन्न शहरों के अंशकालिक संवाददाताओं की ओर से खबरें आती हैं। पहले ये खबरें फैक्स से आती थीं अब ये खबरें ईमेल से आती हैं।

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