गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

नैतिक पतन करती हैं सोशल साइट्स



फेसबुक, ट्विटर और बेबो जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स जहां दूसरों से जुड़ने का मौका देती हैं वहीं इससे बच्चों के नैतिक विकास पर बुरा असर पड़ रहा है। इनके जरिए बच्चे गॉसिप करने और दूसरों को अपमानित करने के प्रति उत्साहित हो रहे हैं। ब्रिटेन के समरसेट स्थित टानटन स्कूल के प्रमुख जॉन न्यूटन की मानें तो फेसबुक, ट्विटर और बेबो जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स बच्चों के नैतिक विकास के लिए खतरा बन रही हैं क्योंकि इनके जरिए बच्चे अपशब्द बोलना और दूसरों को अपमानित करना सीख रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चे इन साइट्स के जरिए वैसे तो कई अच्छी बातें और सूचनाएं साझा कर सकते हैं, लेकिन वे इसका इस्तेमाल फूहड़ बातें और तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने में कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे बच्चों को अपने बड़ों के मार्गदर्शन की जरूरत है ताकि वे गॉसिप और तथ्यों में फर्क कर सकें। शोधकर्ता न्यूटन कहते हैं कि किसी चीज की कम जानकारी होना खतरनाक होता है। नई पीढ़ी के ज्यादातर बच्चे इन साइट्स के जरिए सीखने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते बल्कि वे महज कम्प्यूटर की स्क्रीन देख रहे होते हैं और वे उस चीज की तलाश करते हैं जो उनके जायके के अनुरूप होता है। मौजूदा समय में दुनियाभर में 50 करोड़ से ज्यादा लोग फेसबुक का इस्तेमाल अपने दोस्तों के सम्पर्क में बने रहने के लिए कर रहे हैं। वे यहां अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं और अपनी गतिविधियों के बारे में लगातार सूचना भी देते रहते हैं। ट्विटर के जरिए भी लगभग 14.5 करोड़ लोग आपस में जुड़े हुए हैं। न्यूटन की चिंता यह है कि इन साइट्स के जरिए बच्चों के नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है क्योंकि उन्हें अच्छे बुरे की उतनी समझ नहीं होती।





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