शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

मदरसों में पत्रकारिता की पढ़ाई

मदरसों में पत्रकारिता की पढ़ाई

11 10:15:35 AM IST
Last Updated : 20 Apr 2011 10:15:35 AM IST










उर्दू पत्रकार
मदरसा (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने प्रशिक्षित उर्दू पत्रकारों की कमी दूर करने के लिये कोर्स शुरू किया है.




उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने प्रशिक्षित उर्दू पत्रकारों की कमी दूर करने के लिये कोर्स शुरू किया है.


प्रशिक्षित उर्दू पत्रकारों की 'कमी" को दूर करने और पत्रकार के लिये जरूरी क्षमताओं को विकसित करने के लिये उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने 'उर्दू सहाफत' में एक खास प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया है.
     
बोर्ड के रजिस्ट्रार जावेद असलम ने बताया, "पत्रकारिता में प्रशिक्षित लोगों की कमी को दूर करने और उर्दू को हिन्दी और अंग्रेजी की तरह जनसंचार का माध्यम बनाने के लिये हम मदरसे से पढ़कर निकलने वाले आलिम (12वीं) और कामिल (स्नातक) छात्रों को उर्दू पत्रकारिता का प्रशिक्षण दे रहे हैं."
     
उन्होंने कहा कि एक साल के इस डिप्लोमा पाठ्यक्रम में कोई भी छात्र दाखिला ले सकता है लेकिन अब तक अधिकतर छात्र मदरसे से ही आते हैं.
     
उन्होंने कहा. ''इस कोर्स के प्रति प्रशिक्षणार्थियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है और पहले बैच में अब तक 110 लोगों ने इसमें दाखिला लिया है. इनमें से ज्यादातर प्रशिक्षु मदरसों से आए हैं."
     
असलम ने कहा कि उर्दू पत्रिकाओं और अखबारों में छपने वाली ज्यादातर सामग्री हिन्दी और अंग्रेजी में लिखे गए लेखों और खबरों का अनुवाद होता है. यह उर्दू पत्रकारिता में प्रशिक्षित लोगों की कमी की तरफ भी इशारा करता है.
     
इस कोर्स की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जहां हिन्दी और अंग्रेजी पत्रकारिता ने खासी प्रगति कर विश्व स्तर पर एक दर्जा हासिल किया है वहीं उर्दू पत्रकारों को पर्याप्त अहमियत नहीं दी जाती है.


असलम ने कहा कि उर्दू की पढ़ाई कर रहे छात्रों को इस भाषा की पत्रकारिता का प्रशिक्षण देना जरूरी है ताकि उर्दू सहाफत फले-फूले और युवाओं के लिये रोजगार के अवसर भी तैयार हों.
    
यह कोर्स करने के बाद रोजगार की सम्भावनाओं के बारे में पूछे जाने पर असलम ने कहा कि यह प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रशिक्षुओं को आसानी से उर्दू अखबारों या पत्रिकाओं में नौकरी मिल सकती है. इसके अलावा वह विज्ञान एजेंसियों के लिये अनुवादक के तौर पर भी काम कर सकेंगे.
    
असलम ने कहा कि अनेक उर्दू चैनलों में ऐसे प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत है जो पत्रकारिता के आधारभूत नियम-कायदों को समझते हैं.

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