बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

भोजपुरी भाषा / भारत डिस्कवरी प्रस्तुति






मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
भोजपुरी भाषाई परिवार के स्तर पर एक आर्य भाषा है और मुख्य रुप से पश्चिम बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी झारखण्ड के क्षेत्र में बोली जाती है। आधिकारिक और व्यवहारिक रूप से भोजपुरी हिन्दी की एक उपभाषा याबोली है। भोजपुरी अपने शब्दावली के लिये मुख्यतः संस्कृत एवं हिन्दी पर निर्भर है कुछ शब्द इसने उर्दू से भी ग्रहण किये हैं। भोजपुरी जानने-समझने वालों का विस्तार विश्व के सभी महाद्वीपों पर है जिसका कारण ब्रिटिश राज के दौरान उत्तर भारत से अंग्रेजों द्वारा ले जाये गये मजदूर हैं जिनके वंशज अब जहाँ उनके पूर्वज गये थे वहीं बस गये हैं। इनमे सूरिनामगुयानात्रिनिदाद और टोबैगोफिजी आदि देश प्रमुख है। भारत के जनगणना आंकड़ों के अनुसार भारत मे लगभग 3.3 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं। पूरे विश्व मे भोजपुरी जानने वालों की संख्या लगभग 5 करोड़ है।

अनुक्रम

  [छुपाएँ

[संपादित करें]भौगोलिक वर्गीकरण

डॉ0 ग्रियर्सन ने भारतीय भाषाओं को अंतरंग ओर बहिरंग इन दो श्रेणियों में विभक्त किया है जिसमें बहिरंग के अंतर्गत उन्होंने तीन प्रधान शाखाएँ स्वीकार की हैं -
(1.) उत्तर पश्चिमी शाखा
(2) दक्षिणी शाखा और
(3) पूर्वी शाखा।
इस अंतिम शाखा के अंतर्गत उड़ियाअसमीबँग्ला और पुरबिया भाषाओं की गणना की जाती है। पुरबिया भाषाओं मेंमैथिलीमगही और भोजपुरी - ये तीन बोलियाँ मानी जाती हैं। क्षेत्रविस्तार और भाषाभाषियों की संख्या के आधार पर भोजपुरी अपनी बहनों मैथिली और मगही में सबसे बड़ी है।

[संपादित करें]नामकरण

भोजपुरी भाषा का नामकरण बिहार राज्य के आरा (शाहाबाद) जिले में स्थित भोजपुर नामक गाँव के नाम पर हुआ है। पूर्ववर्ती आरा जिले के बक्सर सब-डिविजन (अब बक्सर अलग जिला है) में भोजपुर नाम का एक बड़ा परगना है जिसमें "नवका भोजपुर" और "पुरनका भोजपुर" दो गाँव हैं। मध्य काल में इस स्थान को मध्य प्रदेश के उज्जैन से आए भोजवंशी परमार राजाओं ने बसाया था। उन्होंने अपनी इस राजधानी को अपने पूर्वज राजा भोज के नाम पर भोजपुर रखा था। इसी कारण इसके पास बोली जाने वाली भाषा का नाम "भोजपुरी" पड़ गया।
भोजपुरी भाषा का इतिहास 7 वीं सदी से शुरू होता है - 1000 से अधिक साल पुरानी! गुरु गोरख नाथ 1100 वर्ष में गोरख बानी लिखा था. संत कबीर दास (1297) का जन्म भोजपुरी दिवस के रूप में भारत में स्वीकार किया गया है और विश्व भोजपुरी दिवस के रूप में मनाया जाता है .

[संपादित करें]क्षेत्रविस्तार

भोजपुरी भाषा प्रधानतया उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों ओर बिहार राज्य के पश्चिमी जिलों में बोली जाती है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थ नगर जिलों के निवासियों ओर बिहार राज्य के शाहाबाद, सारन, चंपारन जिलों में रहनेवाली जनता की मातृभाषा भोजपुरी है1 इसके अतिरिक्त कलकत्ता नगर में, बंगाल के "चटकलों" में असम राज्य के चाय बगानों में और बंबई के अंधेरी और जोगेश्वरी नामक स्थानों में लाखों की संख्या में, भोजपुरी लोग निवास करते हैं। इतना ही नहीं, मारिशस, फिजी, ट्रिनीडाड, केनिया, नैरोबी, ब्रिटिश गाइना, दक्षिण अफ्रीका, बर्मा (टांगू जिला) आदि देशों में काफी बड़ी संख्या में भोजपुरी लोग पाए जाते हैं।
  • मुख्यरुप से भोजपुरी बोले जाने वाले जिले-
बिहारउत्तर प्रदेशनेपालझारखंड
सारण जिलाबलिया जिलारौतहट जिलापलामु जिला
सिवान जिलावाराणसी जिलाबारा जिलागढ़वा जिला
गोपालगंज जिलागोरखपुर जिलाबिरगञ्जपर्सा जिला
पुर्वी चम्पारण जिलामहाराजगंज जिलाचितवन जिला
पश्चिम चम्पारण जिलागाजीपुर जिलानवलपरासी जिला
वैशाली जिलामिर्जापुर जिलारुपनदेही जिला
भोजपुर जिलामऊ जिलाकपिलवस्तु जिला
रोहतास जिलाइलाहाबाद जिला
बक्सर जिलाजौनपुर जिला
भभुआ जिलाप्रतापगंज जिला
सुल्तानपुर जिला
फैजाबाद जिला
बस्ती जिला
गोंडा जिला
बहराईच जिला
सिद्धार्थ नगर

[संपादित करें]भोजपुरी भाषा की प्रधान बोलियाँ

(1) आदर्श भोजपुरी,
(2) पश्चिमी भोजपुरी और
(३) अन्य दो उपबोलियाँ (सब डाइलेक्ट्स) "मघेसी" तथा "थारु" के नाम से प्रसिद्ध हैं।

[संपादित करें]आदर्श भोजपुरी

जिसे डॉ0 ग्रियर्सन ने स्टैंडर्ड भोजपुरी कहा है वह प्रधानतया बिहार राज्य के आरा जिला और उत्तर प्रदेश के बलिया,गाजीपुर जिले के पूर्वी भाग और घाघरा (सरयू) एवं गंडक के दोआब में बोली जाती है। यह एक लंबें भूभाग में फैली हुई है। इसमें अनेक स्थानीय विशेताएँ पाई जाती है। जहाँ शाहाबादबलिया और गाजीपुर आदि दक्षिणी जिलों में "ड़" का प्रयोग किया जाता है वहाँ उत्तरी जिलों में "ट" का प्रयोग होता है। इस प्रकार उत्तरी आदर्श भोजपुरी में जहां "बाटे" का प्रयोग किया जाता है वहाँ दक्षिणी आदर्श भोजपुरी में "बाड़े" प्रयुक्त होता है। गोरखपुर की भोजपुरी में "मोहन घर में बाटें" कहते परंतु बलिया में "मोहन घर में बाड़ें" बोला जाता है।
पूर्वी गोरखपुर की भाषा को 'गोरखपुरी' कहा जाता है परंतु पश्चिमी गोरखपुर और बस्ती जिले की भाषा को "सरवरिया" नाम दिया गया है। "सरवरिया" शब्द "सरुआर" से निकला हुआ है जो "सरयूपार" का अपभ्रंश रूप है। "सरवरिया" और गोरखपुरी के शब्दों - विशेषत: संज्ञा शब्दों- के प्रयोग में भिन्नता पाई जाती है।
बलिया (उत्तर प्रदेश) और सारन (बिहार) इन दोनों जिलों में 'आदर्श भोजपुरी' बोली जाती है। परंतु कुछ शब्दों के उच्चारण में थोड़ा अंतर है। सारन के लोग "ड" का उच्चारण "र" करते हैं। जहाँ बलिया निवासी "घोड़ागाड़ी आवत बा" कहता है, वहाँ छपरा या सारन का निवासी "घोरा गारी आवत बा" बोलता है। आदर्श भोजपुरी का नितांत निखरा रूप बलिया और आरा जिले में बोला जाता है।

[संपादित करें]पश्चिमी भोजपुरी

जौनपुरआजमगढ़बनारसगाजीपुर के पश्चिमी भाग और मिर्जापुर में बोली जाती है। आदर्श भोजपुरी और पश्चिमी भोजपुरी में बहुत अधिक अंतर है। पश्चिमी भोजपुरी में आदर सूचक के लिये "तुँह" का प्रयोग दीख पड़ता है परंतु आदर्श भोजपुरी में इसके लिये "रउरा" प्रयुक्त होता है। संप्रदान कारक का परसर्ग (प्रत्यय) इन दोनों बोलियों में भिन्न भिन्न पाया जाता है। आदर्श भोजपुरी में संप्रदान कारक का प्रत्यय "लागि" है परंतु वाराणसी की पश्चिमी भोजपुरी में इसके लिये "बदे" या "वास्ते" का प्रयोग होता है। उदाहरणार्थ :
पश्चिमी भोजपुरी -
हम खरमिटाव कइली हा रहिला चबाय के।
भेंवल धरल बा दूध में खाजा तोरे बदे।।
जानीला आजकल में झनाझन चली रजा।
लाठी, लोहाँगी, खंजर और बिछुआ तोरे बदे।। (तेग अली-बदमाश दपर्ण)

[संपादित करें]मधेसी

मधेसी शब्द संस्कृत के "मध्य प्रदेश" से निकला है जिसका अर्थ है बीच का देश। चूँकि यह बोली तिरहुत की मैथिली बोली और गोरखपुर की भोजपुरी के बीचवाले स्थानों में बोली जाती है, अत: इसका नाम मधेसी (अर्थात वह बोली जो इन दोनो के बीच में बोली जाये) पड़ गया है। यह बोली चंपारण जिले में बोली जाती और प्राय: "कैथी" लिपि में लिखी जाती है।
"थारू" लोग नेपाल की तराई में रहते हैं। ये बहराइच से चंपारण जिले तक पाए जाते हैं और भोजपुरी बोलते हैं। यह विशेष उल्लेखनीय बात है कि गोंडा और बहराइच जिले के थारू लोग भोजपुरी बोलते हैं जबकि वहाँ की भाषा पूर्वी हिंदी (अवधी) है। हॉग्सन ने इस भाषा के उपर प्रचुर प्रकाश डाला है।

[संपादित करें]भोजपुरी जन एवं साहित्य

भोजपुरी बहुत ही सुंदर, सरस, तथा मधुर भाषा है। भोजपुरी भाषाभाषियों की संख्या भारत की समृद्ध भाषाओं- बँगला, गुजराती और मराठी आदि बोलनेवालों से कम नहीं है। इन दृष्टियों से इस भाषा का महत्व बहुत अधिक है और इसका भविष्य उज्जवल तथा गौरवशाली प्रतीत होता है।
भोजपुरी भाषा में निबद्ध साहित्य यद्यपि अभी प्रचुर परिमाण में नहीं है तथापि अनेक सरस कवि और अधिकारी लेखक इसके भंडार को भरने में संलग्न हैं। भोजपुरिया-भोजपुरी प्रदेश के निवासी लोगों को अपनी भाषा से बड़ा प्रेम है। अनेक पत्रपत्रिकाएँ तथा ग्रंथ इसमें प्रकाशित हो रहे हैं तथा भोजपुरी सांस्कृतिक सम्मेलनवाराणसी इसके प्रचार में संलग्न है। विश्व भोजपुरी सम्मेलन समय-समय पर आंदोलनात्म, रचनात्मक और बैद्धिक तीन स्तरों पर भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के विकास में निरंतर जुटा हुआ है। विश्व भोजपुरी सम्मेलन से ग्रंथ के साथ-साथ त्रैमासिक 'समकालीन भोजपुरी साहित्य' पत्रिका का प्रकाशन हो रहे हैं। विश्व भोजपुरी सम्मेलन, भारत ही नहीं ग्लोबल स्तर पर भी भोजपुरी भाषा और साहित्य को सहेजने और इसके प्रचार-प्रसार में लगा हुआ है। देवरिया (यूपी), दिल्ली, मुंबई, कोलकता, पोर्ट लुईस(मारीशस), सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और अमेरिका में इसकी शाखाएं खोली जा चुकी हैं।

[संपादित करें]संस्कृत से ही निकली भोजपुरी

आचार्य हवलदार त्रिपाठी "सह्मदय" लम्बे समय तक अन्वेषण कार्य करके इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि भोजपुरी संस्कृतसे ही निकली है। उनके कोश-ग्रंथ ('व्युत्पत्ति मूलक भोजपुरी की धातु और क्रियाएं') में मात्र 761 धातुओं की खोज उन्होंने की है, जिनका विस्तार "ढ़" वर्ण तक हुआ है। इस प्रबंध के अध्ययन से ज्ञात होता है कि 761 पदों की मूल धातु की वैज्ञानिक निर्माण प्रक्रिया में पाणिनि सूत्र का अक्षरश: अनुपालन हुआ है।
इस कोश-ग्रंथ में वर्णित विषय पर एक नजर डालने से भोजपुरी तथा संस्कृत भाषा के मध्य समानता स्पष्ट परिलक्षित होती है। वस्तुत: भोजपुरी-भाषा संस्कृत-भाषा के अति निकट और संस्कृत की ही भांति वैज्ञानिक भाषा है। भोजपुरी-भाषा के धातुओं और क्रियाओं का वाक्य-प्रयोग विषय को और अधिक स्पष्ट कर देता है। प्रामाणिकता हेतु संस्कृत व्याकरण को भी साथ-साथ प्रस्तुत कर दिया गया है। इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि इसमें भोजपुरी-भाषा के धातुओं और क्रियाओं की व्युत्पत्ति को स्रोत संस्कृत-भाषा एवं उसके मानक व्याकरण से लिया गया है।

[संपादित करें]वाह्य सूत्र






भोजपुरी भाषा
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
लेख  (प्रतीक्षित)
विषय सूची
·         नामकरण
·         इतिहास
भोजपुरी भाषाई परिवार के स्तर पर एक आर्य भाषा है और मुख्य रूप से पश्चिम बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरीझारखण्ड के क्षेत्र में बोली जाती है। भोजपुरी हिन्दी की एक उपभाषा या बोली है। भोजपुरी अपने शब्दावली के लिये मुख्यतः संस्कृत एवं हिन्दी पर निर्भर है कुछ शब्द इसने उर्दू से भी ग्रहण किये हैं। भोजपुरी जानने-समझने वालों का विस्तार विश्व के सभी महाद्वीपों पर है जिसका कारण ब्रिटिश राज के दौरान उत्तर भारत से अंग्रेज़ों द्वारा ले जाये गये मजदूर हैं जिनके वंशज अब जहाँ उनके पूर्वज गये थे वहीं बस गये हैं। इनमे सूरिनाम, गुयाना, ट्रिनिदाद, फीजी और टोबैगो आदि देश प्रमुख है। भारत के जनगणना आँकडो़ के अनुसार भारतमें लगभग 3.3 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं। पूरे विश्व में भोजपुरी जानने वालों की संख्या लगभग 5 करोड़ है।
भौगोलिक वर्गीकरण
डॉ. ग्रियर्सन ने भारतीय भाषाओं को अंतरंग ओर बहिरंग इन दो श्रेणियों में विभक्त किया है जिसमें बहिरंग के अंतर्गत उन्होंने तीन प्रधान शाखाएँ स्वीकार की हैं -
§  उत्तर पश्चिमी शाखा
§  दक्षिणी शाखा और
§  पूर्वी शाखा।
इस अंतिम शाखा के अंतर्गत उड़िया, असमी, बांग्ला और बिहारी भाषाओं की गणना की जाती है। बिहारी भाषाओं में मैथिली, मगही और भोजपुरी - ये तीन बोलियाँ मानी जाती हैं। क्षेत्रविस्तार और भाषाभाषियों की संख्या के आधार पर भोजपुरी अपनी बहनों मैथिली और मगही में सबसे बड़ी है। भोजपुरी हिन्दी की एक उपभाषा या बोली नहीं है।
नामकरण
भोजपुरी भाषा का नामकरण बिहार राज्य के आरा (शाहाबाद) ज़िले में स्थित भोजपुर नामक गाँव के नाम पर हुआ है। पूर्ववर्ती आरा ज़िले के बक्सर सब-डिविजन (अब बक्सर अलग ज़िला है) में भोजपुर नाम का एक बड़ा परगना है जिसमें 'नवका भोजपुर' और 'पुरनका भोजपुर' दो गाँव हैं। मध्य काल में इस स्थान को मध्य प्रदेश के उज्जैन से आए भोजवंशी परमार राजाओं ने बसाया था। उन्होंने अपनी इस राजधानी को अपने पूर्वज राजा भोज के नाम पर भोजपुर रखा था। इसी कारण इसके पास बोली जाने वाली भाषा का नाम भोजपुरी पड़ गया।
इतिहास
भोजपुरी भाषा का इतिहास 7 वीं सदी से शुरू होता है - 1000 से अधिक साल पुरानी! गुरु गोरख नाथ ने 1100 वर्ष में गोरख बानी लिखी थी। संत कबीर दास (1297) का जन्म भोजपुरी दिवस के रूप में भारत में स्वीकार किया गया है और विश्व भोजपुरी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
भोजपुरी भाषा की प्रधान बोलियाँ
§  आदर्श भोजपुरी,
§  पश्चिमी भोजपुरी और
§  अन्य दो उपबोलियाँ (सब डाइलेक्ट्स) 'मघेसी' तथा 'थारु' के नाम से प्रसिद्ध हैं।

पन्ने की प्रगति अवस्था
संबंधित लेख
भाषा
उड़िया · उर्दू · अंग्रेज़ी · अरबी · अवधी · असमिया · कन्नड़ · कश्मीरी · कोंकणी ·गुजराती · डोगरी · भोजपुरी · तमिल · तेलुगु · पंजाबी · पहलवी · पालि · फ़ारसी ·नेपाली · बांग्ला · बिहारी · ब्रजभाषा · बोडो · मणिपुरी · मराठी · मलयालम ·मैथिली · राजस्थानी · संस्कृत · संथाली · सिंधी · सिंहली · शौरसेनी · हिन्दी ·प्राकृत · अपभ्रंश · कुरुख भाषा · आरमाईक · मॉरिशसी हिन्दी · फिजी हिन्दी ·नेपाली हिन्दी · सूरीनामी हिन्दी · हॉलैंडी हिन्दी · त्रिनिदादी हिन्दी · गुयानी हिन्दी· दक्षिण अफ़्रीक़ी हिन्दी · ताजुज़्बेकी हिन्दी · कलकतिया हिन्दी · शिलांगी हिन्दी ·मुम्बईया हिन्दी · दक्खिनी हिन्दी · खासी · तुळु · मागधी
बोली

भारतकोश के कुछ लेख

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें