गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

संचार माध्यमों द्वारा सूचनाओं का प्रसार या उसमें रुकावट

रविवार, 29 मई 2011 पीडीएफ़ मुद्रण ई-मेल

lHerbert Marshal Mcluhan ने war and peace in the global village नाम की एक पुस्तक लिखी है जो वर्ष १९६८ में प्रकाशित हुई और "global village" शब्द इसी किताब से लिया गया है। इस किताब में एक नया दृष्टिकोण था। जापानी मूल के कैनेडियन नागरिक Mcluhan दर्शनशास्त्री एवं प्रसिद्ध समाजशास्त्री हैं। वे कहते हैं "नये संचार माध्यमों द्वारा अब दुनिया इतनी छोटी हो गई है मानो वह एक गांव हो गई है। इस दृष्टिकोण का आधार यह था कि आज के समाज अधिकांशतः संचार माध्यमों के अस्तित्व से प्रभावित हैं अतः संचार माध्यम न केवल अपने संदेशों से अलग नहीं हैं बल्कि वे अपने संदेशों से भी महत्वपूर्ण हैं और उन पर उनका ध्यान योग्य प्रभाव है।
मानव समाज के परिवर्तन के भी तीन चरण हैं जो इस प्रकार हैं। पहला मौखिक संपर्क काल, कुटुम्ब व क़बायली जीवन/ दूसरा लेखन और छाप संपर्क काल तथा तीसरा इलेक्ट्रॉनिक संपर्क काल या global village है।
अलबत्ता संपर्क विशेषज्ञों ने नये संचार माध्यमों में विस्तार से global village की परिभाषा को परिवर्तित कर दिया और उसके स्थान पर वे to globalize का प्रयोग करने लगे हैं तथा जानकारी एवं संपर्क की तकनीक को उसका साधन कहते हैं।
हर उस उपकरण व संसाधन को सूचना व संपर्क तकनीक कहा जाता है जिसके माध्यम से संदेशों का उत्पादन होता है, उन्हें सुरक्षित एवं उनका भंडारण किया जाता है, information processing और उन्हें प्रकाशित व प्रसारित किया जाता है। मनुष्यों द्वारा इन नई उपलब्धियों व नित नई खोजों से तकनीक व संपर्क का दायरा विस्तृत होता गया। आज इस तकनीक में सबसे महत्वपूर्ण कम्प्यूटर और सेटेलाइट जैसे दूर से संपर्क बनाने वाले साधन हैं। कहा जाता है कि स्वतंत्र रूप से सूचना व जानकारी देने में सेटेलाइट सीधा प्रभाव रखता है। क्या यह बात वास्तव में सच है या यह कि सेटेलाइट के माध्यम से भी जो जानकारी दी जाती है उसमें भी हेरा-फेरी कर दी जाती है?
पहले के वर्षों में जब लोगों के एक गुट के हित व विचार दूसरे गुट से मेल नहीं खाते थे तो उनके मध्य युद्ध हो जाना साधारण सी बात पर थी परंतु आज के संसार में, कि जब दूसरों पर चढ़ाई सीमित हो गई है और यहां तक कि सैनिक शक्तियां भी स्वयं को विश्व में शांति का पक्षधर बताती हैं, ये शक्तियां दूसरे देशों पर आक्रमण करने के समय न चाहते हुए भी कुछ सीमाओं व बातों को ध्यान में रखने पर बाध्य हैं और वर्तमान समय में दूसरे देशों पर वर्चस्व जमाने के लिए की जाने वाली अधिकांश कार्यवाहियां आधुनिकतम तकनीक के माध्यम से होती हैं। आज हम ऐसे विश्व में रह रहे हैं जो समाचारों एवं नई जानकारियों के लिए प्यासा है और जो देश अपने नागरिकों के लिए सूचनाओं, जानकारियों एवं समाचारों तक पहुंच को सरल व शीघ्र बनाये वह दूसरे देशों से आगे हो जायेगा। यदि हम इन परिस्थितियों को देशों के मध्य प्रतिस्पर्धा के परिप्रेक्ष्य में देखें तो"नये काल के डिजीटल युद्ध" के संदर्भ में बहुत से राजनीतिक विशेषज्ञों के इस दावे तथा दृष्टिकोण का इंकार नहीं किया जा सकता कि हम डिजीटल युद्ध के काल में हैं। आज देश और वर्चस्ववादी शक्तियां सूचनाओं की अधिक मात्रा एवं उनके स्थानांतरण से लाभ उठाकर अपनी भौगोलिक सीमा के बाहर अपने लक्ष्यों व हितों को साध रही हैं। इसी उद्देश्य से वर्चस्ववादी शक्तियां विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े संचार माध्यमों का गठन करके अपने साम्राज्यवादी विचारों एवं जानकारियों को स्थानांतरित कर रही हैं और दिन-प्रतिदिन उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। अब पूरे विश्वास से कहा जा सकता है कि साम्राज्यवादी शक्तियों की सुरक्षा एवं उनमें विस्तार आज के डिजीटल विश्व में संचार माध्यमों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियों पर निर्भर है।
वर्तमान समय में अधिकांश संचार माध्यमों को न केवल संपर्क पुल बल्कि वर्तमान समय की मानवता के आभासों, इरादों और विचारों पर नियंत्रण करने का साधन समझा जाता है। साम्राज्यवादी संचार माध्यम, जो आधुनिकतम तकनीक से लैस हैं, राष्ट्रों और स्वतंत्र सरकारों के विरुद्ध वर्चस्ववादी शक्तियों की मनोवैज्ञानिक कार्यवाहियों को लागू व व्यवहारिक करने के उपकरण हैं। दूसरी ओर ये संचार माध्यम पूरे विश्व में युवाओं को दिशा-निर्देशित करने, उन्हें कमज़ोर करने और उन पर नियंत्रण करने के साधन हैं।
i
वियतनाम, बालकान, अफ़ग़ानिस्तान और फार्स खाड़ी के दो युद्धों में अमेरिका के क्रिया- कलापों और इसी प्रकार ईरान की इस्लामी क्रांति के विरुद्ध उसकी मनोवैज्ञानिक एवं प्रचारिक गतिविधियों तथा वर्तमान समय में अरब देशों में होने वाले जनांदोलनों पर ध्यान दिया जाये तो उनमें हमें ऐसे बहुत से बिन्दु दिखाई पड़ेंगे जो इसी दृष्टिकोण की पुष्टि करते हैं। वास्तविकता यह है कि पश्चिमी संचार माध्यमों के युद्ध के कमांडर प्रचारिक विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय संचार माध्यमों के ज़िम्मेदार हैं और लेखक, पत्रकार, विश्लेषक, प्रोडयूसर तथा कैमरामैन इस युद्ध के सिपाही हैं। रेडियो, टेलीवीज़न, इंटरनेट, सेटेलाइट, कैमरे, कागज़, कलम, प्रेस, प्रचार व प्रसार माध्यम इस युद्ध के हथियार हैं। इन संचार माध्यमों के संबोधकों को भी अपनी व्यक्तिगत विशेषताओं के साथ कम या अधिक इनके प्रचार का सामना है। इस प्रकार संचार माध्यम, जो एक समय में समाचारों तक सबकी पहुंच को सरल बनाने के लिए अस्तित्व में आये थे, स्वयं स्वतंत्र ढंग से समाचारों एवं सूचनाओं की पहुंच की दिशा में बाधा बन गये हैं तथा सही व वास्तविक समाचारों की प्राप्ति कठिन हो गई है।
विश्व के संचार माध्यम आज जनमत को नियंत्रित करने एवं उसके मार्ग दर्शन में अभूतपूर्व भूमिका निभा रहे हैं। आज हम जो चीज़ें प्रायः पश्चिमी संचार माध्यमों में देख रहे हैं वे अवास्तविक होती हैं जो अधिकांशतः वास्तविक दुनिया से पूर्णतः भिन्न होती हैं। अमेरिका जैसे देश में संचार माध्यम बड़ी-२ आर्थिक कम्पनियों के प्रभाव व नियंत्रण में हैं तथा समाचारों के स्थानांतरण और उनके विश्लेषण में वे सत्ताधारी पक्ष की आइडियालोजी को प्रतिबिंम्बित करते हैं। साथ ही ये संचार माध्यम अपने संबोधकों के मस्तिष्क में यह विचार उत्पन्न करने का प्रयास करते हैं कि वे स्वतंत्र ढंग से समाचार देते हैं तथा साथ ही वे समाचार देने एवं उनके विश्लेषण में संतुलन का ध्यान रखते हैं।
जो चीज़ समाचार के रूप में हम अधिकांश पश्चिमी संचार माध्यमों में देखते या सुनते हैं उनमें से अधिकांश चुनी हुई एवं उद्देश्यपूर्ण होती हैं और ये संचार माध्यम किसी घटना के परिणामों व कारणों की समीक्षा विशेष दृष्टिकोण के आधार पर करते हैं। हम ऐसे कम ही समाचार देखते हैं जो सूक्ष्म और तथ्यपरक हों तथा उनकी बुनियाद ठोस चीज़ों पर हो। इससे भी कटु बात यह है कि हालिया कुछ दशकों में पश्चिमी संचार माध्यमों के प्रचार और दिन- प्रतिदिन सूचना व संपर्क तकनीक में विस्तार के बाद इन संचार माध्यमों के संबोधकों में निर्णय एवं विश्लेषण करने की शक्ति में कमी हो गयी है। यह विषय इस बात का कारण बना है कि साधारण से साधारण झूठ भी पश्चिमी संचार माध्यमों में तथ्यपरक और दर्शकों एवं उनके श्रोताओं के लिए स्वीकार्य विषय में परिवर्तित हो गये हैं।
सूचनाओं व जानकारियों के क्षेत्र में कोई क़ानून न होने के बारे में यूनिस्को की एक तथ्यपरक रिपोर्ट में इस प्रकार आया है" कुछ विषयों के बारे में जानकारियों की भरमार और कुछ के मार्गों का बंद होना, विश्व में जानकारियों व सूचनाओं के फैलने और पहुंचने के मार्ग की रुकावटों में से एक है। इसी प्रकार सूचनाओं व जानकारियों के प्रकाशन में किसी क़ानून का न होना और भाषाई रुकावट एक ओर तथा दूसरी ओर सूचनाओं को सुरक्षित रखने की व्यवस्था से पुरानी एवं अनावश्यक जानकारियों को मिटाने में हमारी अक्षमता से हमें ख़तरनाक व चिंताजनक स्थिति का सामना है। पूरे विश्वास से कहा जा सकता है कि देशों के मध्य जानकारियों व सूचनाओं के विभाजन का संतुलन समाप्त हो गया है। इस आधार पर यदि हम पश्चिमी स्रोतों एवं अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेज़ों को भी देखें तो सूचनाओं व जानकारियों के मध्य अंतर्राष्ट्रीय क़ानून समाप्त हो गया है। क्योंकि संचार माध्यमों के प्रभाव के संदर्भ में अध्ययन व शोध के जो स्रोत हैं उन पर भी पश्चिमी देशों का अधिकार व प्रभाव है परंतु आशाजनक बात यह है कि धीरे-२ कुछ विकासशील देशों में स्वतंत्रता प्रेम की लहर के उठने के बाद सूचनाओं के बस एक ओर से बहाव की अवांछित स्थिति और इन विकासशील देशों तथा पश्चिमी देशों के मध्य दिन-प्रतिदिन बढ़ती दूरी पर आपत्ति जताई गई है। विश्व स्तर पर सूचनाओं की एक संतुलित प्रक्रिया उत्पन्न करने की आवश्यकता विशेषकर प्रगतिशील देशों में नई बात है और यह हालिया दशकों में टीकाकारों के मध्य चर्चा का विषय रही है। स्वतंत्र व स्वाधीन देशों ने विश्व में संचार माध्यमों की अन्यायपूर्ण स्थिति से मुक्ति पाने के लिए, जिसे समाचारिक साम्राज्यवाद का नाम देते हैं, सूचनाओं को स्थानांतरित करने और सामूहिक संचार माध्यमों में विस्तार पर ध्यान दिया है। इस परिप्रेक्ष्य में स्वतंत्र संचार माध्यम अस्तित्व में आ रहे हैं और लोगों का प्रयास यह है कि स्वतंत्र इंटरनेट के माध्यम से वे सही समाचारों को प्राप्त करें। इस प्रकार नई विश्व व्यवस्था या समाचारिक साम्राज्य के साथ कि जिसकी सूचना एवं संपर्क के क्षेत्र में ध्यानयोग्य भूमिका रही है, दूसरी वर्ग भी है जिसका मानना है कि जानकारियों व समाचारों को समान रूप से सब तक पहुंचना चाहिये। निश्चित रूप से लोगों की जानकारी एवं पूरे विश्व में जनआंदोलनों से इस चीज़ में वृद्धि होगी और सूचनाओं व जानकारियों पर एकाधिकार का अंत हो जायेगा। (MAQ)
अंतिम अद्यतन ( रविवार, 29 मई 2011 18:35 )
 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें