मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

वाटर पोर्टल (हिन्दी)

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आदिवासी क्षेत्रों के विशेषाधिकार समाप्त करने की साजिश

Author: 
भारत डोगरा
Source: 
सर्वोदय प्रेस सर्विस, फरवरी 2012
लंबे इंतजार के बाद राजस्थान में पेसा कानून को लेकर बनाए गए नियम जब सार्वजनिक हुए तो यह बात सामने आई कि इनके माध्यम से आदिवासी समुदाय की स्वायत्ता को समाप्त करने का प्रयत्न किया गया है। आवश्यकता इस बात की है कि राज्य सरकार की इस कार्यवाही का विरोध किया जाए और इस बात के प्रयास किए जाए कि देशभर में आदिवासी समुदाय के लिए अनुकूल नियम बने। इस कानून की मूल भावना को बनाए रखा जाए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार को शीघ्र ही पेसा कानून के नियमों का जरूरी सुधार करना चाहिए। अन्य राज्य सरकारों को भी चाहिए कि वे उचित व न्यायसंगत नियम बनाकर पेसा कानून को उसकी मूल भावना के अनुकूल लागू करें।

कहीं ‘काली’ साबित न हों हरित अदालतें

Source: 
स्वदेश, 09 मई 2011
जीएम बीजों और कीटनाशकों के फसलों पर छिड़काव से भी बड़ी मात्रा में इनसे जुड़े लोगों की आजीविका को हानि और खेतों को क्षति पहुंच रही है। दुनिया के पर्यावरणविदों और कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जीएम बीजों से उत्पादित फसलों को आहार बनाने से मानव समुदायों में विकलागंता और कैंसर के लक्षण सामने आ रहे हैं। खेतों को बंजर बना देने वाले खरपतवार खेत व नदी नालों का वजूद खत्म करने पर उतारू हो गए हैं। बाजार में पहुंच बनाकर मोंसेंटो जीएम बीज कंपनी ने 28 देशों के खेतों को बेकाबू हो जाने वाले खरपतवारों में बदल दिया हैं। यही नहीं, जीएम बीज जैव विविधता को भी खत्म करने का कारण बन रहे हैं।
इस खबर के स्रोत का लिंक: 
http://swadesh.in

निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर

Source: 
मंथन अध्ययन केन्द्र

एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय



हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था।


एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक संसाधन लगे हैं जिनमें 50 करोड़ अंशपूजी, 25 करोड़ कर्ज, 50 करोड़ कर्ज भुगतान की गारंटी, 71 करोड़ वाटर शार्टेज फंड शामिल है। परियोजना को वित्तीय दृष्टि से सक्षम बनाने के लिए तमिलनाडु सरकार ने ज्यादातर जोखिम जैसे नदी में पानी की कमी

राजस्थान राज्य जल नीति 2010

वेब/संगठन: 
daily news network in
राजस्थान की जल नीति को 15 फरवरी 2010 को कैबिनेट सब-कमेटी ने प्रदेश की पहली जल नीति के रूप में मंजूरी दे दी है।


राज्य जल नीति के उद्देश्य हैं: सस्टेनेबल आधार पर नदी बेसिन और उप बेसिन को इकाई के रूप में लेते हुए जल संसाधनों की योजना, विकास और प्रबंधन को एकीकृत और बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाना, और सतही और उपसतही जल के लिये एकात्मक दृष्टिकोण अपनाना। नीति में पानी की पहली प्राथमिकता पेयजल,

पेयजल और स्वच्छता नीति का मसौदा

बिहार सरकार 22 मार्च 2010 को विश्व जल दिवस के अवसर पर पेयजल और स्वच्छता नीति की घोषणा करेगी। लोक स्वास्थ्य और अभियांत्रिकी मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि बिहार सरकार बहुत तेजी से जल और स्वच्छता के बारे में एक मुकम्मल नीति बनाना चाहती है। इस मसौदे पर काम चल रहा है।


मसौदा के बारे में श्री चौबे ने स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार की नीति में पीने के पानी को शीर्ष प्राथमिकता होगी। सरकार दोहरी जल आपूर्ति पर भी काम कर रही है। ताकि जल को साफ किया जा सके। सरकार जिला स्तर और राज्य स्तर पर निगरानी समितियाँ भी बनायेगी जो सतही पानी, जमीनी पानी और वर्षा जल के अधिकतम के समूचित उपयोग पर नियंत्रण रखेंगी। बिहार सरकार एक भूजल विनियामक प्राधिकरण भी स्थापित करेगी जो भूजल संरक्षण और उपयोग पर नियंत्रण रखेगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की धज्जी

वाराणसी। रोज सुबह आठ ट्रैक्टर टालियां मिट्टी लेकर डाफी-लंका मार्ग से पहुंचती हैं शुक्रेश्वर तालाब। शुक्रेश्वर तालाब एक ऐतिहासिक तालाब है, जो कि धीरे –धीरे पट रहा है।


कुडों-तालाबों के संरक्षण को लेकर नगर निगम संजीदगी का शुक्रेश्वर तालाब ताजा नमूना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों की भी धज्जी उड़ाई जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए। जिसका काम होगा कि जिले की सभी जल निकायों को चिन्हित करे और उसके संरक्षण के लिए योजनाएं बनवाए।

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