बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

द संडे इंड़ियन भोजपुरी





कभर स्टोरी

गर्व से कहीं हम भोजपुरिया हईं

ओंकारेश्वर पांडेय
भोजपुरी के संघर्ष खतम नइखे भइल. अब भोजपुरी भासा, संस्कृति, भेसभूसा, रहन-सहन, खान-पान, संगीत, सिनेमा, साहित्य आ शख्सियत के लोहा माने लागल बाड़े लोग, भोजपुरी दिन प दिन निखरत बिया. टीएसआई लेके आइल बा कुछ अइसन आयाम जेकरा प भोजपुरिया समाज करेला गुमान. बता रहल बाड़न ओंकारेश्वर पांडेय...

मिठास से भरल भोजपुरी भासा

डॉ कृष्णा बिहारी मिश्रा
भोजपुरी शब्द सुनते ही सबसे पहिले हमरा दिमाग में माई के चेहरा आवेला, काहे कि ई बोली हम सबसे पहिले अपना अम्मा के मुंह से सुनले आ सिखले रहीं. ओकरा बाद हमरा गांव, घर के आंगन इयाद आवेला, जहवां रह के हमनी के भोजपुरी के समझ आइल, ओकरा के जनलीं अउर ओकर आदी भइलीं.

बाबू जगजीवन राम की छत्रछाया में बढ़ल भोजपुरी

अरूनेश नीरन
जगजीवन राम के आदर से बाबूजी कहल जाला. स्वतंत्रता-संग्राम आ स्वतंत्रता के बाद देश के प्रति उनकर समर्पण आ निष्ठा बेमिसाल बा. उनकर पूरा जिनगी राजनीतिक-सामाजिक सक्रियता आ विशिष्ट उपलब्धि से भरल बा. भाषा के वैभव जगजीवन राम में मिलत रहल बा. भोजपुरी आ हिन्दी के विकास खातिर ऊ अथक प्रयाल कइलन.

जिनका प बा भोजपुरियन के गुमान

द संडे इंडियन भोजपुरी के तमाम बुद्धिजीवी, साहित्यकार, कलाकार आ दोसर क्षेत्रन के लोगन से बात कर के ई 51 के सूची बनवले बा, जेकरा प भोजपुरिया समाज के गर्व बा. एहमें पुरखा पुरनिया से लेके जीवित लोग बाड़े, घटना बा, स्थान बा, सुर बा, सिनेमा बा, संस्कार बा आ विचार बा.

संपादक के नाम पाठक के पाती

जेल, जेले बा कि ना

आमुख कथा 'जेले बा जिनगी' लेखन के बहुते बढिय़ा कड़ी बा. ई हमनी के कानून व्यवस्था के कमजोर कडिय़न के सुर्खी में ले आवत बा.

मगजमारी

तीन धुरी प टिकल दुनिया

प्रसून एस. मजूमदार
नब्बे के दशक के शीत युद्ध के समाप्ति के बाद दुनिया एगो बड़ बदलाव के दौर से गुजरल बा. आजु विश्व खाली पूंजीवादी अउर साम्यवादी धड़ में विभाजित नइखे बलुक दूनो छोर प खड़ा देश कइगो दोसर बड़ बदलाव देखले बाड़े. एहमें कवनो शक नइखे कि आजु विश्व शीत युद्ध के दौर से भी जादा हिस्सा में विभाजित लउकत बा.

संपादकीय

चापलूसन के तानाशाही

अरिंदम चौधरी, सम्पादक, द संडे इंडियन
रामलीला मैदान में आजु के जलियावाला बाग, सरकार के दानवी रवैया, विपक्ष कमजोर रीढ़ अउर भारत के प्रति मीडिया के पाखंड के दर्शन करावत बा

खबर खंगार के

परीक्षण के नाम प जात बा जान

शोध अउर अनुसंधान खातिर पसंदीदा जगह के तौर प भारत के उद्भव हमनी के आलसी अउर बीमार नीति निर्माता खातिर खतरा के घंटी बजा दीहले बा. नैदानिक परीक्षण लोगन के जिनगी लील रहल बा अउर परिजन लोग के उचित मुआवजा ले नइखे मिल पावत.

जहवां मिलेलन पद से हटल नेता

श्रेय अग्रवाल
सऊदी अरब के रॉयल किंगडम, जहवां इस्लाम के दुगो पवित्र तीर्थ स्थित बा अउर उपनिवेशवाद के सम्राट रहल, महामहिम महारानी के ग्रेट ब्रिटेन में कम से कम एक बात त समान बा.

खबर खास

छूटल बंदूक, धराइल कलम

प्रशांत शरण
'शिक्षा होखे सबका खातिर' के महामंत्र से प्रेरणा लेके 40 साल के रामेश्वर गोप झारखंड के एगो उपेक्षित कोना में रह के कई हजार गरीब आदिवासी लइकन अउर वयस्कन के निरक्षरता के अन्हार से बाहर निकललें.

देश-दशा

उभरत 'शूरवीर,अमित-युद्धवीर

अनिल द्विवेदी
एह उदाहरण से अंदाजा लगावल जा सकत बा कि ई दूगो राजनेता केतना चर्चित बाडऩ अउर केतना जनाधार रखत बाड़े? बाकिर एकरा ठीक उलट, तीन दशक तक राजनैतिक दुश्मनी पलले दिलीप सिंह जूदेव अउर अजीत जोगी के दोसर पीढ़ी राजनीति में आ त गइल बा बाकिर उनकर राह अतना आसान नइखे, जतना लउकत बा.

जिनगी के ढंग

पैदा करे से पहिले

पछला हफ्ता, हम रउरा से वादा कइले रही कि एह कमअक्ल हत्यारा के दिमाग के भीतर का चल रहल बा अउर एगो अइसन आदमी के विषय में भी बताइब, जवन कि हमरा हिसाब से एह विषय के सबसे बेहतर तरीकासे समझेलें.

इंटरव्यू

'पूर्वी भारत में शिक्षा के 'गढ़' मानल जाला झारखंड'

प्रशांत शरण
झारखंड के शिक्षा मंत्री बैजनाथ राम प्रदेश में जल्दिए शैक्षणिक सुविधा बेहतर होखे के उमेद जतावेले. प्रशांत शरण के साथे उनकर भइल बातचीत के प्रमुख अंश.

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