रविवार, 10 जुलाई 2011

सपने इंसान को ज़िंदा रखते हैं




सपने कभी नहीं मरने चाहिए, क्योंकि सपने ही इंसान को ज़िंदा रखते हैं. हम लोग ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं, जब देश में अच्छे भविष्य की कोई संभावना नज़र नहीं आ रही है. यह उद्‌गार प्रख्यात साहित्कार डॉ. नामवर सिंह ने एम आर मोरारका फाउंडेशन और प्रज्ञा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में बीते 19 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन में आयोजित एक समारोह में प्रख्यात उद्यमी एवं समाजसेवी महावीर प्रसाद आर मोरारका की पुस्तक समाजवाद: एक अध्ययन का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि हर तऱफ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है. ऐसे में यह किताब हमें रोशनी की एक किरण दिखाती है. यह किताब वर्ष 1962 में लिखी गई थी, लेकिन इसका लोकार्पण कई दशकों बाद अब किया जा रहा है और कमल मोरारका जी ने कुछ सोचकर ही यह फैसला किया होगा. इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं. समारोह की अध्यक्षता डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने की और मुख्य अतिथि शरद यादव थे. मुख्य वक्ता के तौर पर राहुल देव और अरविंद मोहन भी मौजूद थे.
24 वर्ष की आयु में ही उन्होंने ई डी सैस्सन मिल की बागडोर अंग्ऱेजों के हाथों से ले ली, जो उस समय भारत की सबसे बड़ी कप़डा मिल थी. उन्होंने अपना समस्त जीवन विविध प्रकार के उद्यमों को विकसित और स्थापित करने में लगा दिया, जैसे चीनी, कपड़ा और अभियांत्रिकी आदि. इंदौर में वह हुकुमचंद मिल्स के चेयरमैन रहे और 1961 में उन्होंने प्रबंधन में मज़दूरों की भागीदारी के लिए एक योजना बनाई, जिसका शुभारंभ पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था.
इस अवसर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संयोजक शरद यादव ने कहा कि भारत में समाजवाद का रास्ता खेतों से होकर निकलता है. अगर देश में समाजवाद को मज़बूत करना है तो इसके लिए सभी खेतों को पर्याप्त सिंचाई जल मुहैया कराना होगा. खेतों को पानी मिलने पर ही संपन्नता आएगी और किसान खुशहाल होंगे. डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने कहा कि समाजवाद: एक अध्ययन के लेखक महावीर प्रसाद आर मोरारका ने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को बहुत ही सरल शब्दों में प्रस्तुत किया, जिससे एक आम आदमी भी इसे आसानी से समझ सकता है. उन्होंने कहा कि कमाल की बात यह है कि समाजवाद जैसे विषय पर एक मारवाड़ी सेठ ने यह किताब लिखी है. हैरानी इस बात की है कि उन्होंने यह किताब उस समय लिखी थी, जब हिंदी में मार्क्स की प्रख्यात किताब दास कैपिटल का अनुवाद भी नहीं हुआ था. इसके अलावा इस किताब में महावीर प्रसाद जी ने कई अंग्रेज़ी लेखकों की किताबों का हवाला भी दिया है.
समारोह में सबसे पहले वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने पुस्तक का संक्षिप्त परिचय दिया. उन्होंने कहा कि लेखक ने किसानों और मज़दूरों कीपीड़ा को समझा और अपने जीवन में जो कुछ भी अनुभव किया, उसे उन्होंने इस पुस्तक के ज़रिये सबके सामने रखा.समारोह को राहुल देव और अरविंद मोहन ने भी संबोधित किया और इस किताब की सराहना की. मंच संचालन चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय ने किया. समारोह में अनेक गणमान्य लोगों ने शिरकत की. ग़ौरतलब है कि महावीर प्रसाद आर मोरारका का जन्म जुलाई, 1919 में झुंझुनू ज़िले के नवलगढ़ में एक सामान्य व्यापारी परिवार में हुआ था. यह क्षेत्र राजस्थान के शेखावाटी में आता है. उनका परिवार 1930 के दशक में मुंबई में बस गया. उनकी औपचारिक शिक्षा बहुत ही कम रही और 15 साल की कम आयु में ही वह पारिवारिक व्यापार से जुड़ गए. स्वाध्याय और कड़ी मेहनत से वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी बने और अपने दम पर अंग्रेज़ी साहित्य, संस्कृत के धार्मिक ग्रंथों और व्यापार से जु़डे आर्थिक क़ानून में महारथ हासिल की. इस तरह उन्होंने अर्थशास्त्र, विज्ञान, समाजशास्त्र, धर्मशास्त्र और खगोल शास्त्र में विद्वता प्राप्त की. 24 वर्ष की आयु में ही उन्होंने ई डी सैस्सन मिल की बागडोर अंग्ऱेजों के हाथों से ले ली, जो उस समय भारत की सबसे बड़ी कप़डा मिल थी. उन्होंने अपना समस्त जीवन विविध प्रकार के उद्यमों को विकसित और स्थापित करने में लगा दिया, जैसे चीनी, कपड़ा और अभियांत्रिकी आदि. इंदौर में वह हुकुमचंद मिल्स के चेयरमैन रहे और 1961 में उन्होंने प्रबंधन में मज़दूरों की भागीदारी के लिए एक योजना बनाई, जिसका शुभारंभ पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था. समाजवाद: एक अध्ययन जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की किताब इंटेलिजेंट वोमंस गाइड टू सोशलिज्म का रूपांतरण है और इसे तभी छपवाया गया, जब जय प्रकाश नारायण ने इस किताब की प्रस्तावना लिखना स्वीकार किया. यह किताब 1962 में छपी.

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