शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

क्या हमारी मीडिया भटक गयी है ?


देश और समाज के हालात से अवगत कराने का कार्य मीडिया का है ! लेकिन क्या हमारी मीडिया इस कार्य को निष्ठा के साथ अंजाम दे रही है ? आम जनता की बहुत अपेक्षाएं जुडी होती हैं मीडिया के साथ , वो उसकी तरफ सहायता पाने की दृष्टि से देखती है. अपनी आवाज को ऊंचा करना चाहती है मीडिया की मदद से! और देश तथा परिवेश का पारदर्शिता से दिखाया गया आइना देखना चाहती है!

क्या हमारी मीडिया नकारात्मक हो गयी है ?

देश में बहुत कुछ सकारात्मक भी हो रहा है ! लेकिन हमारी मीडिया कहीं न कहीं चूक रही है विकास एवं तरक्की के कार्यों को दिखाने में ! बिना किसी पूर्वाग्रह के दोनों पक्षों को उजागर करना चाहिए. फैले भ्रष्टाचार और बुराइयों से अवगत कराते जहाँ हमें सचेत करती है तो वहीँ अच्छे एवं विकास कार्यों को दिखाकर कुछ स्फूर्ति एवं ताजगी भी देनी चाहिए! शिक्षा स्वास्थ्य एवं तकनीक में हो रहे विकास को भी दिखाना चाहिए! निरंतर नकारात्मक ही दिखा दिखा कर दिमाग तथा हमारी सोच को भी निराशा से भर देती है! यदि कहीं आतंकवाद है , तो कहीं सरकार के इस दिशा में सद्प्रयास भी दिखाने चाहिए! यदि भ्रष्टाचार है , तो आम जनता द्वारा उसके खिलाफ लड़ी और लोकपाल बिल जैसे सार्थक प्रयासों को भी जन जन तक पहुँचाना मीडिया का ही कर्तव्य है !


क्या मीडिया जनता की आवाज़ बन पाती है ?

आज हमारे देश में सही नेतृत्व की कमी है ! एक ऐसा नेता जो देश को प्रगति और विकास की दिशा में ले जा सके ! अपनी जनता के मन में आत्मविश्वास और स्फूर्ति दे सके ! ऐसी दशा में जब राजनीतिज्ञों से हटकर कोई अन्ना अथवा रामदेव जैसा व्यक्ति आगे आता है राष्ट्र -हित में तो समूचा देश उसके साथ हो जाता है इस उम्मीद में की अब शायद मुश्किलों से निजात मिलेगी ! यहाँ पर मीडिया का भी दायित्व है वे इन नेतृत्वों के अच्छे और सशक्त पक्षों को सामने रखें , राष्ट्र विकास में सहयोग दें और आम जनता की आवाज़ बनें !


क्या मीडिया युवा वर्ग को भ्रमित कर रही है ?

आजकल विभिन्न चैनलों पर जो हिंसा, अभद्रता , अश्लीलता परोसी जा रही है , वह युवा पीढ़ी को क्या दिशा दे रही है भला ? कुछ नहीं तो , कुछ अच्छे संस्कार देने वाले शैक्षणिक सीरियल , discussions अथवा debates दिखाई जातीं ! निरर्थक प्रोग्राम्स को दिखाने के बजाये विद्वानों द्वारा सार्थक चर्चाएँ प्रस्तुत की जा सकती हैं ! निरंतर ह्रास क्यूँ ? पहले किरण बेदी जी की अदालत आती थी तो अब राखी सावंत की अभद्रता , चैनल की शोभा बनी हुयी है ! कहीं पति-पत्नी का अनावश्यक विवाद ही हर चैनल पर दिखाया जाएगा ! देश और व्यक्तित्व का विकास करने वाले दृश्यों और घटनाओं की प्रस्तुति होनी चाहिए जिससे युवा वर्ग कुछ प्रेरणा ले सके और motivate हो सके !


क्या मीडिया जजमेंटल हो रही है ?

मीडिया का काम है जनता को पारदर्शिता के साथ सत्य से अवगत कराना न की अपने विचारों को उन पर थोपना ! जब मीडिया "बाबा का पाखण्ड" अथवा "बाबा की बाजीगरी " जैसे वक्तव्यों का प्रयोग करती है तब वह निष्पक्ष नहीं रह पाती , जजमेंटल हो जाती है और व्यक्ति विशेष को काले रंग में पेंट करने का अनुचित प्रयास करती है . मीडिया का धर्म है , सत्य को बिना मिलावट के प्रस्तुत करे और पाखंड आदि की विवेचना को पाठक और जनता के लिए अपने-अपने विवेक के अनुसार करने के लिए छोड़ दे ! मीडिया को पक्षपात और पूर्वाग्रहों से रहित होना चाहिए !


मीडिया रामदेव बाबा से तो द्वेष रखती है लेकिन राहुल बाबा और नित्यानंद बाबा के खिलाफ ज्यादा कुछ नहीं कहती ! राहुल बाबा जो देश के भावी प्रधानमन्त्री की तरह देखे जा रहे हैं , उनका कहना है की " आतंकवादी हमले बहुत से देश में होते हैं , इन्हें रोकना मुमकिन नहीं " ....तो राहुल बाबा जब इतने असमर्थ हैं तो इन्हें राजनीति में रहने की क्या ज़रुरत है! मीडिया इस बचकाना और गैरजिम्मेदाराना वक्तव्य को नहीं उछालती ! आखिर क्यूँ ?


क्या हमारी मीडिया किसी प्रकार से मजबूर है ?



यदि हम मीडिया पर दया दृष्टि रख कर सोचें तो एक बात विचारणीय है की कहीं हमारी किसी प्रकार के दबाव में तो कार्य नहीं कर रही . आखिर सत्ता रूढ़ शक्तियां इतनी ताकतवर हैं की उनके खिलाफ सच को सामने लाने से पहले ही मीडिया को खरीद लिया जाता हो , अथवा धमकी दी जाती हो . यदि यह सच है तो विकल्प क्या मीडिया की इमानदारी बनाये रखने के लिए.!


क्या हमारी मीडिया का व्यवसायीकरण तो नहीं हो रहा ?

आज विभिन्न बड़े बड़े अखबार मालिकों की Townships हर शहर में बन रही हैं , जिनके अति-महगें आवास नेताओं ने खरीद रखे हैं ! आज पत्रकारिता एक पारदर्शी आइना बनने के बजाये एक बिल्डर की तरह आवास-विकास योजना से संलग्न नज़र आ रही है !

आज हर चैनल और पत्रकारिता अपना TRP बढाने के लिए उसे sensational करने पर लगी हुयी है ! अपने वक्तव्यों एवं प्रस्तुतियों के प्रति जिम्मेदार नहीं रह जा रही है ! बड़े बड़े नेताओं के संपर्क में रहते हुए अपने मुख्य उद्देश्य से भटक रही है और लालच उन पर हावी हो रही है ! ए राजा केस में , नीरा राडिया आदि प्रकरण इसी और इशारा करते हैं !

मुझे लगता है मीडिया को निष्पक्ष , इमानदार और जिम्मेदार रहना चाहिए अपने कर्म के प्रति !


Zeal

1 टिप्पणी: