गुरुवार, 7 जुलाई 2011

हम लोग डिजिटल लाइफस्टाइल की तरफ बढ़ रहे हैं




"भारत की पीआर इंडस्ट्री दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले कहीं भी पीछे नहीं है। यहां तक कि तमाम विकसित देशों में इतना प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नहीं है जितना भारत में है। इसके अलावा हमारे यहां के क्षेत्रीय मीडिया को समझना और उनका बेहतर इस्तेमाल भी काफी चुनौतीपूर्ण है।"
शोभा वासुदेवन कैनन में पिछले आठ वर्षों से हैं और पीआर, ब्रांड व एडवरटाइजिंग में उनका 12 वर्षों का अनुभव है। कैनन की एडवरटाइजिंग और पब्लिक रिलेशन की जिम्मेदारी उन्हीं के मजबूत कंधों पर है।
कैनन को भारत में एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने में वासुदेवन की बहुत बड़ी भूमिका है। आईटी क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है और उन्होंने इस रफ्तार के साथ पूरा तालमेल बैठाया हुआ है। इस गलाकाट प्रतियोगिता के दौर में वह कैनन को एक मजबूत ब्रैंड के रूप में स्थापित करने में बेहद सफल रही हैं। आम लोगों तक कैनन के अच्छी क्वॉलिटी के बढ़िया प्रोडक्ट कैसे पहुंचें, इस मकसद को उन्होंने अपनी मार्केटिंग रणनीतियों और प्रभावशाली कम्युनिकेशन के जरिए पूरा किया। इससे भारत में कैनन की एक बहुत पॉजिटिव छवि उभर कर आई है। दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में कैनन को पहुंचाने के लिए उन्होंने समय-समय पर अपनी तरह के खास अभियान छेड़े। कैनन के हर डिवीजन के लिए उस शहर पर आधारित प्रोजेक्ट बनाए गए और कैनन उन तमाम क्षेत्रीय बाजारों में पहुंचने में कामयाब रहा, जहां उसका शुरू से फोकस रहा है।     
बिजनेस टुडे के एक सर्वे के मुताबिक वासुदेवन ने हार्डवेयर कैटिगरी में कैनन को नंबर 1 बनाने में बड़ी भूमिका अदा की है। उन्हें दो बार कैनन इंडिया प्रेसीडेंट अवॉर्ड मिला। पहला अवॉर्ड आमची मुंबई के नाम से 2007 में शुरु किए गए एडवरटाइजिंग अभियान के लिए तथा दूसरा अवॉर्ड 2009 में लेजर प्रिंटर्स के लिए दिया गया।
कैनन से पहले वह स्पोर्टस कन्वरजेंस ग्रुप में थीं। भारत में यह पहली ऐसी स्पोर्ट्स प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और कंसलटेंसी कंपनी थी जो स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी कंटेंट और ईवेंट के क्षेत्र में आनलाइन और आफलाइन कन्वरजेंस मुहैया कराती है। वहां पर उनकी जिम्मेदारी न सिर्फ कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और पीआर की थी बल्कि सौरव गांगुली, मुथैया मुरलीधरन, नवजोत सिंह सिद्धू और चेतन शर्मा जैसे नामी खिलाड़ियों को मैनेज करना भी थी। इसके अलावा उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी मार्केटिंग और मैनेजमेंट कंपनी इंटरनैशनल मैनेजमेंट ग्रुप (आईएमजी) में भी काम किया है। 

एक्सचेंज4मीडिया की पल्लवी गूढ़ा कश्यप से बातचीत में शोभा वासुदेवन ने विस्तार से कैनन की भारत में कम्युनिकेशन रणनीति और देश में पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र में हो रहे नए बदलाव के बार में जानकारी दी।
आने वाले वर्षों में आपने कैनन को आगे बढ़ाने की क्या रूपरेखा बनाई है?
कैनन की कॉरपोरेट फिलासफी है क्योसीई, जिसका मतलब है साथ रहना और सभी की भलाई के लिए काम करना। कैनन में हम इसे तरह परिभाषित करते हैं – ‘हर आदमी, चाहे वह किसी भी धर्म, देश, संस्कृति या भाषा का है, आपस में मिलजुल कर रहे और बेहतर भविष्य के लिए काम करे।‘ ग्लोबल कंपनियों को तो न सिर्फ अपने कस्टमर और समुदायों के साथ बेहतर संबंध बनाने चाहिएं, बल्कि जिस देश में वह अपना कारोबार चला रही हैं, उस देश के साथ और वहां के एनवायरनमेंट के साथ भी बढ़िया तालमेल बैठाना चाहिए। उन्हें वहां की सोसायटी पर अपने कारोबार से पड़ने वाले प्रभाव की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ेगी। इसी वजह से कैनन ने डिजिटल इमेजिंग इंडस्ट्री में अपने आप को एक ऐसी लीडिंग कंपनी के रूप में ढालने का लक्ष्य रखा, जिसकी बुनियाद में अत्याधुनिक तकनीक, क्रांतिकारी मार्केटिंग अभियान और दीर्घकालीन बढ़त है। कैनन इंडिया भारत में एक ऐसी कंपनी बनना चाहती है जिसकी लोग कद्र करें। वह कैनन से जुड़े लोगों से अपना संबंध जोड़ने में गौरव महसूस कर सकें।  
अगर हम कैनन की रणनीति की बात करें तो वह तेजी से विकसित हो रहे बी और सी श्रेणी वाले शहरों में अपने तमाम प्रॉडक्ट की बदौलत बाजार में अपना अग्रणी स्थान बनाना चाहेगी। ग्राहकों को टेक्नोलॉजी का अनुभव देने के लिए हम लोग कैनन आन व्हील और कैप्चर मुंबई जैसे शहर-आधारित कार्यक्रम भी चलाएंगे।
कृपया, कैनन की खास योजना के बारे में बताएं?
हम पब्लिक तक पहुंचने के लिए अपनी रफ्तार बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। इस साल का फोकस है ग्राहकों को कैनन के प्रोडक्ट्स का शानदार अनुभव कराना और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाना। उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर ही हमने कैनन आन व्हील्स और माई एक्सेस माई स्टाइल कैंपेन लॉन्च किया है।
कैनन आन व्हील्स – कैनन इमेज मोबाइल एक्सप्रेस - ग्राहकों को सिर्फ मैट्रो शहरों में ही नहीं जोड़ेगा बल्कि दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों के उपभोक्ताओं को भी जोड़ेगा। इस योजना को कामयाब बनाने के लिए कैनन आन व्हील्स के काफिले में चार वैनों को शामिल किया गया है। ये वैनें अलग-अलग शहरों में जाएंगी और कैनन इमेज फेस्ट के नाम से एक एक्सपो भी लगाएंगी। इससे उपभोक्ताओं को एक अलग ही तरह का अनुभव होगा। इन वैनों को 50 शहरों में भेजने और 5 लाख ग्राहकों तक पहुंचाने की योजना है।
कैनन इंडिया बहुत जल्द अपना टीवी कमर्शियल माई एक्सेस माई स्टाइल भी लॉन्च करने वाला है। यह पूरी तौर पर युवाओं पर केंद्रित होगा और इसे मार्च 2010 से प्रदर्शित किया जाएगा। कैनन करीब 500 आउटलेट एक्सेस कॉर्नर के नाम से खोलेगा, इनमें से 150 तो मुंबई में ही होंगे। कैनन अपने चैनल पार्टनरों को भी इस ढंग से तैयार करेगा कि वे हमारे ग्राहकों से अच्छी तरह तालमेल बैठा सकें। 
इसके अलावा हम कई सरकारी ई-गर्वनैंस परियोजनाओं पर भी फोकस करेंगे। इन प्रोजेक्ट्स के लिए डिजिटल कैमरे, प्रोजेक्टर, स्कैनर्स, प्रिंटर और कॉपियर वगैरह चाहिए होते हैं।
कैनन की ग्रोथ किस तरह की रही है?
हमने पिछले साल से अपना अभियान तेज किया है और बहुत अच्छे ढंग से आगे बढ़ रहे हैं। पिछले साल का रेवेन्यू कुल मिलाकर 840 करोड़ रुपये रहा जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 28 फीसदी बढ़त लिए हुए है। छह प्रोडक्ट्स की कैटिगरी में हम नंबर 1 हैं, जिनमें लेजर प्रिंटर्स, डी-एसएलआर वगैरह हैं। कैनन इंडिया का 2010 का टारगेट हैं 1,100 करोड़ रुपये का रेवेन्यू।
पीआर के क्षेत्र में आप किस तरह के ट्रेंड की उम्मीद कर रही हैं ?  आप अपने बिजनेस का भविष्य किस तरह देख रही हैं?
मैने खुद जो ट्रेंड देखा है और नोटिस किया है वह यह है कि लोग सोशल मीडिया में दिलचस्पी ले रहे हैं। ट्विटर और फेसबुक तो आग की तरह फैल गए हैं और आम लोगों से लेकर कंपनियां तक इन्हें अपनी बात कहने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। हाल के दिनों में ब्लॉगिंग में भी लोगों ने काफी दिलचस्पी ली और यह बढ़ती ही जा रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि हम लोग डिजिटल लाइफस्टाइल की तरफ बढ़ रहे हैं और खुद को टेक्नोलॉजी से पूरी तरह लैस करना चाहते हैं।
www.canon.co.in पर भी एक ब्लॉग है, जहां फोटोग्राफी से लेकर भविष्य के ट्रेंड पर बात होती है। कैनन की वेबसाइट, कैनन एज के भी 10,000 हजार कस्टमर हैं जो कैमरा एंगल के ट्रिक और टिप्स से लेकर हर विषय पर चर्चा करते हैं। इसके अलावा हम लोग अपने भावी कस्टमरों से नया संबंध बनाने और उन तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन साथ ही इसके जरिए हम अपने मौजूदा कस्टमरों और पार्टनरों से भी जुड़े रहेंगे। इस नए माध्यम से हम अपने ग्राहकों को और भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और हम भी उन्हें ताजा घटनाक्रम, नए प्रोडक्ट के बारे में बताते रहेंगे।हमारी वेबसाइट
कुछ और बड़े मुद्दों पर बात करते हैं, आज आप पीआर इंडस्ट्री को किस मुकाम पर खड़ा पाती हैं?
किसी भी कंपनी के अच्छे काम और उसकी रेपुटेशन को असरदार ढंग से पहुंचाने के लिए पब्लिक रिलेशन की बड़ी अहम भूमिका है। क्योंकि किसी पर भी प्रभाव छोड़ने का अपना एक विज्ञान है जो इसमें प्रमुख भूमिका निभाता है। पीआर से कॉरपोरेट रेपुटेशन लंबे समय तक बनी रहती है। अगर हम 2010 या उससे भी आगे की बात करें तो परंपरागत तरीके से प्रेस रिलेशन बनाए रखने का जमाना गया। अगर अब आपको लंबे समय तक अपनी कॉरपोरेट रेपुटेशन को बनाए और बचाए रखना है तो पीआर की जरूरत पड़ेगी।
अब जब हर ब्रांड की नजर कस्टमरों के पर्स में अपना हिस्सा तलाशने पर है तो ऐसे में भारतीय युवाओं की खरीदने की क्षमता नई खोजों और प्रयोगों को करने में बड़ी भूमिका अदा करेगी। आने वाले सालों में इस यंगिस्तान की ग्रोथ तो लगातार होती रहेगी। सूचना और प्रभावशाली सूत्र भी नए मीडिया और इंटरनेट से हर हालत में जुड़ेंगे। क्योंकि जेनरेशन नेक्स्ट से अगर आपको कोई सूचना या प्राडक्ट के बारे में बात करनी है तो यही माध्यम इस्तेमाल होगा। 3जी नेटवर्क और नोटबुक के बढ़ते चलन की वजह से कंपनियों को अपनी बात पहुंचाने के लिए नए तरीके गढ़ने पड़ेंगे। वर्चुअल मीडिया यानी आनलाइन न्यूजलेटर्स, मैगजीन, व्यक्तिगत ब्लॉग, पोडकॉस्ट, कम्युनिटी रेडियो के अलावा अन्य सोशल मीडिया माध्यमों जैसे फेसबुक, आरकुट, फ्लिकर वगैरह के बारे में अच्छी तरह से जानना आज के पब्लिक रिलेशन प्रोफेशनलों के लिए बहुत जरूरी है।
और अंत में सरकार के साथ भी तालमेल बढ़ता जाएगा, क्योंकि जैसे-जैसे जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ेगी तो पब्लिक अफेयर्स विशेषज्ञों की जरूरत पड़ेगी। सरकार की भूमिका एक रेफरी की हो जाएगी और तीसरा अंपायर इस देश को बनाने में अपनी भूमिका अदा करेगा।
आपके मुताबिक भारत और बाकी दुनियामें आपको पीआर कैसा दिखता है, पीआर फील्ड में क्या नए डेवलेपमेंट चल रहे हैं और इसमें भविष्य की चुनौतियां क्या हैं?
मेरे मुताबिक भारत की पीआर इंडस्ट्री दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले कहीं भी पीछे नहीं है। यहां तक कि तमाम विकसित देशों में इतना प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नहीं है जितना भारत में है। इसके अलावा हमारे यहां के क्षेत्रीय मीडिया को समझना और उनका बेहतर इस्तेमाल भी काफी चुनौतीपूर्ण है।
पीआर इंडस्ट्री ने अपने आप को मजबूत किया है और यहां तक पहुंचने में इसने लंबा सफर तय किया है। अब हम देख रहे हैं कि तमाम ग्लोबल एजेंसियां अपना बिजनेस भारत में सेट कर रही हैं। यहां अपने आप में इस बात की एक मिसाल है कि भारत एक महत्वपूर्ण बाजार है और सभी कंपनियों के लिए पीआर की भूमिका बड़ी अहम है। हालांकि हम लोग वैश्वविक रूप से जुड़े हुए हैं लेकिन इसके बावजूद खबरों में लोकल का जो महत्व है वह कम नहीं हुआ है। अगर आपको हर मार्केट में पहुंचना है तो अपना संदेश पहुंचाने के लिए इसे अच्छी तरह समझना होगा।
आप पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशन को किस तरह अलग मानती हैं ?
जिस तरह पत्रकारिता और पीआर साथ-साथ चलते हैं, ठीक उसी तरह पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशन भी साथ-साथ चलते हैं। दोनों का मकसद सही लोगों तक सही समय पर सही संदेश लेकर पहुंचना है। किसी भी संस्थान के लिए कॉरपोरेट कम्युनिकेशन उसका आंतरिक और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसका मकसद सिर्फ बाहर के मीडिया से ही तालमेल बैठाना नहीं है बल्कि अपने कर्मचारियों को भी समय-समय पर ताजा स्थिति से अवगत कराते रहना है। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन के जरिए हम लोग सिर्फ एक कंपनी पर फोकस करते हैं और उनके लिए तमाम गहन कार्य करते हैं। इसके जरिए ब्रांड इमेजिंग, संदेश देना और सफल ब्रैंड के पीछे की कहानी बताना भी करना होता है। 
पब्लिक रिलेशन के जरिए हम पब्लिक और मीडिया को बताते हैं कि यह कंपनी किस तरह से काम करती है। इससे मीडिया तक अपनी बात पहुंचाने के अलावा कस्टमरों तक भी संदेश पहुंचाया जाता है। पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशन की भूमिका एक दूसरे से जुड़ी हुई है। 
कैनन के भावी कम्युनिकेशन प्लान के बारे में बताएं?
कैनन का मकसद है लोगों को खुश करना, उनकी यादों को क्लिक करना और उनके चेहरों पर मुस्कान लाना। हमारे कम्युनिकेशन प्लान में इसी फिलासफी को आगे बढ़ाना शामिल है। अपने शानदार प्रचार अभियान के जरिए हम कस्टमरों को नए प्रोडक्ट, ताजा आफर और अपनी कंपनी की सेहत के बारे में बताते हैं। यह सारी प्रक्रिया गहरी खोज और समय पर प्रेस रिलीज जारी करने से जुड़ी हुई है। हम अपने प्रोडक्ट की एडवांस टेक्नॉलजी से भी अवगत कराते हैं। इससे कैनन की मजबूत और नियंत्रित इमेज बनाने में मदद मिलती है।
कैनन की कम्युनिकेशन रणनीति तय करने से पहले आप किन बातों का ध्यान रखती हैं?
हम सबसे बड़ी बात जो ध्यान में रखते हैं कि हमारे कंपनी की रेपुटेशन बनी रहे इसका जो मकसद है वह पूरा हो। प्लान को तैयार करने व लागू करने से पहले हम लोग तमाम तरह की रिसर्च करते हैं। हम लोग मीडिया के जरिए अपनी कंपनी की स्टोरी बताने के धंधे में हैं। हम वह स्टोरी सुनाते हैं या उन पर फोकस करते हैं जो हमारे पार्टनर के लिए भी उपयोगी हो। हमारी रणनीति इमेजिंग कम्युनिकेशन प्रोडक्ट, कंज्यूमर सिस्टम प्रोडक्ट और बिजनेस इमेजिंग सिस्टम पर निर्भर करती है।

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