सोमवार, 11 जुलाई 2011

मगही के कबीर / हमारे मामा गौहर साहब

या खुदा ये कौन सा दौर है आया हुआ
देखकर अखबार मेरा दिल है घबराया हुआ

अखबारों के बदलते नेचर पर आज से करीब 25 साल पहले ये गजल लिखने वाला शायर विनोद कुमार गौहर कोई जाना पहचाना नाम नहीं है। मगर मगही के कबीर के रूप में चर्चित गौहर साहब पहले बिहार और विभाजन के बाद झारखंड के डालटेनगंज पलामू में रहते थे। देश स्तर पर भले ही वे नामी नहीं थे, मगर अपने पूरे इलाके में गीत संगीत शायरी कविता और मंच मुशायरा के जान थे। आज सुबह सात बजे इनकी लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई। इनकी उम्र 70 साल की थी। गुमनामी में रहकर भी दर्जनों लोगो को रेडियो, टीवी, मंच और सिनेमा में गायन और संगीत में मांजने वाले इस कलाकार और जिंदादिल शायर को अपने तमाम मित्रों के साथ नमन और तहे दिल से श्रद्धाजंलि अर्पित करता हूं।
तुम याद बहुत आ रहे हो मामा । चाहकर भी नहीं मिल पायाऔर ना अब कभी मिल पाउंगा। आपने कई बार चाहत जाहिर की मिलने की , मगर क्या करे मामा शहरी ना होते हुए भी ज्यादा शहरी जो हो गया हूं। ङर आदमी की कद्र जाने के बाद ही होती है। शायद यही नियति है। माफ करना मामा  आप बड़े दिल वाले हंसमुख रहे हैमेरी इस खता को भी पहले की गई तमाम गलतियों की तरह ही माफ करेंगे। अब पप्पू सोनू मानू से जाकर मिलना तो होगा,मगर गीत संगीत शायरी और कविता की धुन से लबरेज आपके घर में व्याप्त सन्नाटा से कैसे दो चार हो पाउंगा मामा। मगही के कबीर आप सचमुच कबीर की तरह ही सबों के साथ रहते हुए भी सबसे र्निलिप्तसबसे अलहदा रहे।आपको बार बार हर बार नमन। राधास्वामी 




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