गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

नया भारतीय साल

 🚩 *31 दिसंबर को केवल अंग्रेजी कैलेंडर बदलेगा, हमारा नव-वर्ष नहीं होगा* 🚩



आईये हम सभ भारतीय नव-वर्ष के बारे में जानें :


13 अप्रैल 2021 (प्रथम नवरात्रे) से भारतीय नववर्ष एवं विक्रम शक संवत्सर 2078 आरंभ होगा ! इसे हिन्दू नववर्ष भी कहा जाता है। इसके आरंभ के साथ ही नवरात्र भी प्रारंभ हो जाते हैं, बसंत ऋतु के आगमन का संकेत मिलने लगता है और वातावरण खुशनुमा एहसास कराता है। हिन्दू नववर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। ब्रह्मा पुराण के अनुसार सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन हुआ था। ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना प्रारम्भ करने के दिन से ही नव वर्ष का आरम्भ होना माना जाता है। इसी दिन से ही काल गणना का प्रारंभ हुआ था। सतयुग का प्रारंभ भी इसी दिन से माना जाता है।


इस नववर्ष से अोर भी कई अधिक ऐतिहासिक संदर्भ जुडे हुए हैं : जैसे:--


* मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी का राज्याभिषेक दिवस।


* शक्ति की आराधना हेतु नवरात्र आरम्भ।


* महर्षी दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज की स्थापना।


* राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।


* देव भगवान झूलेलाल जी का जन्म दिवस।


* धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक आदि।


लेकिन बडे दुख: का विषय है कि आज नई पीढी भारतीय/हिंदू नववर्ष से एकदम अनभिज्ञ है, वह अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक पहली जनवरी को नया साल बडे ही जोशो-खरोश के साथ मनाती है, मगर भारतीय/हिंदू नव-वर्ष पर उनका ध्यान ही नहीं रहता है। आज आवश्यकता है तो इस बात की कि भारतीय/हिंदू नववर्ष का प्रचार-प्रसार ज्यादा से ज्यादा किया जाए ताकि नई पीढी का ध्यान इस ओर खींचा जा सके।


तो आइए हम जोर-शोर से अंग्रेजी केलेण्डर के मुताबिक 1 जनवरी को नया साल मनाने की जगह जोश व उमंग के साथ नव संवत्सर को नये साल का शुभारंभ कर भारतीय संस्कृति को अपनायें और पश्चमी संस्कृति का विरोध करें !

संस्कृति सबकी एक चिरंतन खून रगो मे हिन्दू है ।।

विराट सागर समाज अपना हम सब इसके बिन्दु है ।।।

वंदेमातरम् भारत माता की जय हो सत्य सनातन धर्म की जय हो ।


⛳ ⛳जय श्री राम

नया साल नया अंदाज


 🥳 *Different way to wish 'Happy New Year'* 🥳 *अलग तरीके से new year Wish करें |* 

🥂 🥂 🍻🍸 🍫🎂🍻


💁‍♂️ *Have a splendid new year .* 

👉🏾 *आपका नया शानदार हो|* 


💁‍♀️ *नया साल आपके लिए मंगलमय हो |* 

👉🏾 *Have a prosperous new year .* 


🥰 *Have a joyous new year .* 

👉🏾 *आपका नया साल आनंदमय हो |* 


🤷‍♀️ *Have a exceptional new year .* 

👉🏾 *आपका नया साल हट कर  जाये | ( अलग )* 


💁‍♂️ *Be happy this year.* 

👉🏾 *इस साल तुम खुश रहो|* 


🤷‍♀️ *Have a wonderful new year.* 

👉🏾 *आपका नया साल शानदार ( कमाल) हो |* 


💁‍♂️ *Have a good fortune in coming year .* 

👉🏾 *आने वाला साल में आपका भाग्य अच्छा हो |* 


💁‍♀️ *आने वाले साल में आपके सारे सपने पूरे हो |* 

👉🏾 *May all dreams comes true in the year to come.* 


💁‍♀️ *आपका नया साल खुशियों से भरा हो |* 

👉🏾 *Have a new year filled with happiness.* 


💁‍♂️ *New year greetings.*

👉🏾 *नए साल के शुभकामनाएं |* 


🤷‍♀️ *आपको और आपके परिवार को नये साल की ढेर सारी शुभकामनाएं |* 

👉🏾 *New year greetings to you and yours family .* 


🤷‍♀️ *Have a new year filled with positivity.* 

👉🏾 *आपका नया साल सकारात्मकता से भरा हुआ हो |* 


💁‍♂️ *i wish you happiness this year .* 

👉🏾

 

💁‍♂️ *मैं आपको इस साल खुशहाल जीवन की शुभकामनाएं देता हूं।* 

👉🏾 *i wish you happy life this year .* 


🥳🥳🥳🥳🥳🥳🥳

 ✍🏼 Lawkush Sharma 

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बुधवार, 30 दिसंबर 2020

शंकर स्मृति समारोह एवं व्याख्यानमाला

   शंकर स्मृति समारोह एवं व्याख्यानमाला का आयोजन


 इस बार वेबिनार के तौर पर हुआ, जिसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री श्री मनीश सिसोदिया, अशोका यूनिवर्सिटी के संस्थापक डा0 प्रमथ राज सिन्हा, राजगीर बोध विहार सोसाइटी की सचिव डा0 महाश्वेता महारथी तथा इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स्ड साइंसेज के प्रोफेसर बलराम सिंह ने शिक्षा, संस्कृति एवं संस्कार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यहां प्रस्तुत है समारोह का प्रारंभ, जिसमें स्वागत, संगलाचरण, इस बीच दिवंगत हिन्दी विभूतियों के प्रति श्रद्धा सुमन और स्व0 शंकर दयाल सिंह के बाल्यकाल की घटना पर आधारित फिल्म सम्मिलित है। आगे की दो कड़ियों में मुख्य उद्बोधन तथा व्याख्यान दिए जाएंगे। यह रिकार्डिंग खास तौर से उन सबों के लिए जो किसी कारण से जीवन्त समारोह में नहीं शामिल हो सके थे।

 https://youtu.be/dQY8फिजस



शंकर स्मृति समारोह एवं व्याख्यानमाला का आयोजन इस बार वेबिनार के तौर पर हुआ, जिसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री श्री मनीश सिसोदिया, अशोका यूनिवर्सिटी के संस्थापक डा0 प्रमथ राज सिन्हा, राजगीर बोध विहार सोसाइटी की सचिव डा0 महाश्वेता महारथी तथा इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स्ड साइंसेज, डरमॉथ, अमेरिका के प्रोफेसर बलराम सिंह ने शिक्षा, संस्कृति एवं संस्कार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यहां प्रस्तुत है समारोह का दूसरा भाग, जिसमें शिक्षा, संस्कृति एवं संस्कार पर समारोह में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया का उद्बोधन सम्मिलित है। समारोह में खास तौर पर रंजीत सिंह दिसाले को याद किया गया, जिन्हेोंने 7 करोड़ रुपये के ग्लोबल टीचर्स अवार्ड  प्राप्त कर भारत को गौरव दिलाया और फिर उसमें से आधी राशि अपने साथी प्रतियोगियों में बांट कर त्याग की भारतीय संस्कृति से दुनिया का परिचय कराया। अगली और अंतिम कड़ी में व्याख्यान दिए जाएंगे। यह रिकार्डिंग खास तौर से उन सबों के लिए जो किसी कारण से जीवन्त समारोह में नहीं शामिल हो सके 


शंकर स्मृति समारोह एवं व्याख्यानमाला का आयोजन इस बार वेबिनार के तौर पर हुआ, जिसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री श्री मनीश सिसोदिया, अशोका यूनिवर्सिटी के संस्थापक डा0 प्रमथ राज सिन्हा, राजगीर बोध विहार सोसाइटी की सचिव डा0 महाश्वेता महारथी तथा इंस्टीट्यूट ऑफ एडवान्स्ड साइंसेज, डरमॉथ, अमेरिका के प्रोफेसर बलराम सिंह ने शिक्षा, संस्कृति एवं संस्कार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यहां प्रस्तुत है समारोह का तीसरा भाग, जिसमें डा0 प्रमथ सिन्हा, डा0 महाश्वेता महारथी तथा डा0 बलराम सिंह के विचार सम्मिलित हैं, जो विषय को सार्थकता प्रदान करते हैं।

https://youtu.be/WI4-cep_T-c


सनातन धर्म

 ऐसी जानकारी व्हाट्सएप पर बार-बार नहीं आती, और आगे भेजें, ताकि लोगों को सनातन धर्म की जानकारी हो  सके आपका आभार धन्यवाद होगा


1-अष्टाध्यायी               पाणिनी

2-रामायण                    वाल्मीकि

3-महाभारत                  वेदव्यास

4-अर्थशास्त्र                  चाणक्य

5-महाभाष्य                  पतंजलि

6-सत्सहसारिका सूत्र      नागार्जुन

7-बुद्धचरित                  अश्वघोष

8-सौंदरानन्द                 अश्वघोष

9-महाविभाषाशास्त्र        वसुमित्र

10- स्वप्नवासवदत्ता        भास

11-कामसूत्र                  वात्स्यायन

12-कुमारसंभवम्           कालिदास

13-अभिज्ञानशकुंतलम्    कालिदास  

14-विक्रमोउर्वशियां        कालिदास

15-मेघदूत                    कालिदास

16-रघुवंशम्                  कालिदास

17-मालविकाग्निमित्रम्   कालिदास

18-नाट्यशास्त्र              भरतमुनि

19-देवीचंद्रगुप्तम          विशाखदत्त

20-मृच्छकटिकम्          शूद्रक

21-सूर्य सिद्धान्त           आर्यभट्ट

22-वृहतसिंता               बरामिहिर

23-पंचतंत्र।                  विष्णु शर्मा

24-कथासरित्सागर        सोमदेव

25-अभिधम्मकोश         वसुबन्धु

26-मुद्राराक्षस               विशाखदत्त

27-रावणवध।              भटिट

28-किरातार्जुनीयम्       भारवि

29-दशकुमारचरितम्     दंडी

30-हर्षचरित                वाणभट्ट

31-कादंबरी                वाणभट्ट

32-वासवदत्ता             सुबंधु

33-नागानंद                हर्षवधन

34-रत्नावली               हर्षवर्धन

35-प्रियदर्शिका            हर्षवर्धन

36-मालतीमाधव         भवभूति

37-पृथ्वीराज विजय     जयानक

38-कर्पूरमंजरी            राजशेखर

39-काव्यमीमांसा         राजशेखर

40-नवसहसांक चरित   पदम् गुप्त

41-शब्दानुशासन         राजभोज

42-वृहतकथामंजरी      क्षेमेन्द्र

43-नैषधचरितम           श्रीहर्ष

44-विक्रमांकदेवचरित   बिल्हण

45-कुमारपालचरित      हेमचन्द्र

46-गीतगोविन्द            जयदेव

47-पृथ्वीराजरासो         चंदरवरदाई

48-राजतरंगिणी           कल्हण

49-रासमाला               सोमेश्वर

50-शिशुपाल वध          माघ

51-गौडवाहो                वाकपति

52-रामचरित                सन्धयाकरनंदी

53-द्वयाश्रय काव्य         हेमचन्द्र


वेद-ज्ञान:-


प्र.1-  वेद किसे कहते है ?

उत्तर-  ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।


प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ?

उत्तर-  ईश्वर ने दिया।


प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?

उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।


प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?

उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण         के लिए।


प्र.5-  वेद कितने है ?

उत्तर- चार ।                                                  

1-ऋग्वेद 

2-यजुर्वेद  

3-सामवेद

4-अथर्ववेद


प्र.6-  वेदों के ब्राह्मण ।

        वेद              ब्राह्मण

1 - ऋग्वेद      -     ऐतरेय

2 - यजुर्वेद      -     शतपथ

3 - सामवेद     -    तांड्य

4 - अथर्ववेद   -   गोपथ


प्र.7-  वेदों के उपवेद कितने है।

उत्तर -  चार।

      वेद                     उपवेद

    1- ऋग्वेद       -     आयुर्वेद

    2- यजुर्वेद       -    धनुर्वेद

    3 -सामवेद      -     गंधर्ववेद

    4- अथर्ववेद    -     अर्थवेद


प्र 8-  वेदों के अंग हैं ।

उत्तर -  छः ।

1 - शिक्षा

2 - कल्प

3 - निरूक्त

4 - व्याकरण

5 - छंद

6 - ज्योतिष


प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?

उत्तर- चार ऋषियों को।

         वेद                ऋषि

1- ऋग्वेद         -      अग्नि

2 - यजुर्वेद       -       वायु

3 - सामवेद      -      आदित्य

4 - अथर्ववेद    -     अंगिरा


प्र.10-  वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?

उत्तर- समाधि की अवस्था में।


प्र.11-  वेदों में कैसे ज्ञान है ?

उत्तर-  सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान।


प्र.12-  वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?

उत्तर-   चार ।

        ऋषि        विषय

1-  ऋग्वेद    -    ज्ञान

2-  यजुर्वेद    -    कर्म

3-  सामवे     -    उपासना

4-  अथर्ववेद -    विज्ञान


प्र.13-  वेदों में।


ऋग्वेद में।

1-  मंडल      -  10

2 - अष्टक     -   08

3 - सूक्त        -  1028

4 - अनुवाक  -   85 

5 - ऋचाएं     -  10589


यजुर्वेद में।

1- अध्याय    -  40

2- मंत्र           - 1975


सामवेद में।

1-  आरचिक   -  06

2 - अध्याय     -   06

3-  ऋचाएं       -  1875


अथर्ववेद में।

1- कांड      -    20

2- सूक्त      -   731

3 - मंत्र       -   5977

          

प्र.14-  वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?                                                                                                                                                              उत्तर-  मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।


प्र.15-  क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?

उत्तर-  बिलकुल भी नहीं।


प्र.16-  क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?

उत्तर-  नहीं।


प्र.17-  सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?

उत्तर-  ऋग्वेद।


प्र.18-  वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?

उत्तर-  वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व । 


प्र.19-  वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?

उत्तर- 

1-  न्याय दर्शन  - गौतम मुनि।

2- वैशेषिक दर्शन  - कणाद मुनि।

3- योगदर्शन  - पतंजलि मुनि।

4- मीमांसा दर्शन  - जैमिनी मुनि।

5- सांख्य दर्शन  - कपिल मुनि।

6- वेदांत दर्शन  - व्यास मुनि।


प्र.20-  शास्त्रों के विषय क्या है ?

उत्तर-  आत्मा,  परमात्मा, प्रकृति,  जगत की उत्पत्ति,  मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक  ज्ञान-विज्ञान आदि।


प्र.21-  प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?

उत्तर-  केवल ग्यारह।


प्र.22-  उपनिषदों के नाम बतावे ?

उत्तर-  

01-ईश ( ईशावास्य )  

02-केन  

03-कठ  

04-प्रश्न  

05-मुंडक  

06-मांडू  

07-ऐतरेय  

08-तैत्तिरीय 

09-छांदोग्य 

10-वृहदारण्यक 

11-श्वेताश्वतर ।


प्र.23-  उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?

उत्तर- वेदों से।

प्र.24- चार वर्ण।

उत्तर- 

1- ब्राह्मण

2- क्षत्रिय

3- वैश्य

4- शूद्र


प्र.25- चार युग।

1- सतयुग - 17,28000  वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।

2- त्रेतायुग- 12,96000  वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।

3- द्वापरयुग- 8,64000  वर्षों का नाम है।

4- कलयुग- 4,32000  वर्षों का नाम है।

कलयुग के 5122  वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक।

4,27024 वर्षों का भोग होना है। 


पंच महायज्ञ

       1- ब्रह्मयज्ञ   

       2- देवयज्ञ

       3- पितृयज्ञ

       4- बलिवैश्वदेवयज्ञ

       5- अतिथियज्ञ

   

स्वर्ग  -  जहाँ सुख है।

नरक  -  जहाँ दुःख है।.


*#भगवान_शिव के  "35" रहस्य!!!!!!!!


भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है।


*🔱1. आदिनाथ शिव : -* सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है।


*🔱2. शिव के अस्त्र-शस्त्र : -* शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था।


*🔱3. भगवान शिव का नाग : -* शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।


*🔱4. शिव की अर्द्धांगिनी : -* शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं।


*🔱5. शिव के पुत्र : -* शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है।


*🔱6. शिव के शिष्य : -* शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे।


*🔱7. शिव के गण : -* शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख हैं। इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। 


*🔱8. शिव पंचायत : -* भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु ये शिव पंचायत कहलाते हैं।


*🔱9. शिव के द्वारपाल : -* नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल।


*🔱10. शिव पार्षद : -* जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि शिव के पार्षद हैं।


*🔱11. सभी धर्मों का केंद्र शिव : -* शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। मुशरिक, यजीदी, साबिईन, सुबी, इब्राहीमी धर्मों में शिव के होने की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शिव के शिष्यों से एक ऐसी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर शैव, सिद्ध, नाथ, दिगंबर और सूफी संप्रदाय में वि‍भक्त हो गई।


*🔱12. बौद्ध साहित्य के मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय : -*  ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर।


*🔱13. देवता और असुर दोनों के प्रिय शिव : -* भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष आदि सभी पूजते हैं। वे रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी। उन्होंने भस्मासुर, शुक्राचार्य आदि कई असुरों को वरदान दिया था। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं।


*🔱14. शिव चिह्न : -* वनवासी से लेकर सभी साधारण व्‍यक्ति जिस चिह्न की पूजा कर सकें, उस पत्‍थर के ढेले, बटिया को शिव का चिह्न माना जाता है। इसके अलावा रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं, हालांकि ज्यादातर लोग शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का पूजन करते हैं।


*🔱15. शिव की गुफा : -* शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशूल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर है। दूसरी ओर भगवान शिव ने जहां पार्वती को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा 'अमरनाथ गुफा' के नाम से प्रसिद्ध है।


*🔱16. शिव के पैरों के निशान : -* श्रीपद- श्रीलंका में रतन द्वीप पहाड़ की चोटी पर स्थित श्रीपद नामक मंदिर में शिव के पैरों के निशान हैं। ये पदचिह्न 5 फुट 7 इंच लंबे और 2 फुट 6 इंच चौड़े हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम कहते हैं। कुछ लोग इसे आदम पीक कहते हैं।


रुद्र पद- तमिलनाडु के नागपट्टीनम जिले के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्‍वर का मंदिर में शिव के पदचिह्न हैं जिसे 'रुद्र पदम' कहा जाता है। इसके अलावा थिरुवन्नामलाई में भी एक स्थान पर शिव के पदचिह्न हैं।


तेजपुर- असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में शिव के दाएं पैर का निशान है।


जागेश्वर- उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी से लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में भीम के पास शिव के पदचिह्न हैं। पांडवों को दर्शन देने से बचने के लिए उन्होंने अपना एक पैर यहां और दूसरा कैलाश में रखा था।


रांची- झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर 'रांची हिल' पर शिवजी के पैरों के निशान हैं। इस स्थान को 'पहाड़ी बाबा मंदिर' कहा जाता है।


*🔱17. शिव के अवतार : -* वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि हुए हैं। वेदों में रुद्रों का जिक्र है। रुद्र 11 बताए जाते हैं- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शंभू, चण्ड तथा भव।


*🔱18. शिव का विरोधाभासिक परिवार : -* शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जबकि शिव के गले में वासुकि नाग है। स्वभाव से मयूर और नाग आपस में दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। इस विरोधाभास या वैचारिक भिन्नता के बावजूद परिवार में एकता है।


*🔱19.*  ति‍ब्बत स्थित कैलाश पर्वत पर उनका निवास है। जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है।


*🔱20.शिव भक्त : -* ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं सहित भगवान राम और कृष्ण भी शिव भक्त है। हरिवंश पुराण के अनुसार, कैलास पर्वत पर कृष्ण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी।


*🔱21.शिव ध्यान : -* शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग को बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है।


*🔱22.शिव मंत्र : -* दो ही शिव के मंत्र हैं पहला- ॐ नम: शिवाय। दूसरा महामृत्युंजय मंत्र- ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥ है।


*🔱23.शिव व्रत और त्योहार : -* सोमवार, प्रदोष और श्रावण मास में शिव व्रत रखे जाते हैं। शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शिव का प्रमुख पर्व त्योहार है।


*🔱24.शिव प्रचारक : -* भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।


*🔱25.शिव महिमा : -* शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर जैसे कई असुरों को वरदान दिया था। शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। शिव ने गणेश और राजा दक्ष के सिर को जोड़ दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया था।


*🔱26.शैव परम्परा : -* दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव परंपरा से हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की परंपरा से ही माने जाते हैं। भारत की असुर, रक्ष और आदिवासी जाति के आराध्य देव शिव ही हैं। शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है।


*🔱27.शिव के प्रमुख नाम : -*  शिव के वैसे तो अनेक नाम हैं जिनमें 108 नामों का उल्लेख पुराणों में मिलता है लेकिन यहां प्रचलित नाम जानें- महेश, नीलकंठ, महादेव, महाकाल, शंकर, पशुपतिनाथ, गंगाधर, नटराज, त्रिनेत्र, भोलेनाथ, आदिदेव, आदिनाथ, त्रियंबक, त्रिलोकेश, जटाशंकर, जगदीश, प्रलयंकर, विश्वनाथ, विश्वेश्वर, हर, शिवशंभु, भूतनाथ और रुद्र।


*🔱28.अमरनाथ के अमृत वचन : -* शिव ने अपनी अर्धांगिनी पार्वती को मोक्ष हेतु अमरनाथ की गुफा में जो ज्ञान दिया उस ज्ञान की आज अनेकानेक शाखाएं हो चली हैं। वह ज्ञानयोग और तंत्र के मूल सूत्रों में शामिल है। 'विज्ञान भैरव तंत्र' एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव द्वारा पार्वती को बताए गए 112 ध्यान सूत्रों का संकलन है।


*🔱29.शिव ग्रंथ : -* वेद और उपनिषद सहित विज्ञान भैरव तंत्र, शिव पुराण और शिव संहिता में शिव की संपूर्ण शिक्षा और दीक्षा समाई हुई है। तंत्र के अनेक ग्रंथों में उनकी शिक्षा का विस्तार हुआ है।


*🔱30.शिवलिंग : -* वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है, उसे लिंग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही लिंग की प्रतीक है। वस्तुत: यह संपूर्ण सृष्टि बिंदु-नाद स्वरूप है। बिंदु शक्ति है और नाद शिव। बिंदु अर्थात ऊर्जा और नाद अर्थात ध्वनि। यही दो संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। इसी कारण प्रतीक स्वरूप शिवलिंग की पूजा-अर्चना है।


*🔱31.बारह ज्योतिर्लिंग : -* सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वनाथजी, त्र्यम्बकेश्वर, केदारनाथ, घृष्णेश्वर। ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति के संबंध में अनेकों मान्यताएं प्रचलित है। ज्योतिर्लिंग यानी 'व्यापक ब्रह्मात्मलिंग' जिसका अर्थ है 'व्यापक प्रकाश'। जो शिवलिंग के बारह खंड हैं। शिवपुराण के अनुसार ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग या ज्योति पिंड कहा गया है।


 दूसरी मान्यता अनुसार शिव पुराण के अनुसार प्राचीनकाल में आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इस तरह के अनेकों उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे। भारत में गिरे अनेकों पिंडों में से प्रमुख बारह पिंड को ही ज्‍योतिर्लिंग में शामिल किया गया।


*🔱32.शिव का दर्शन : -* शिव के जीवन और दर्शन को जो लोग यथार्थ दृष्टि से देखते हैं वे सही बुद्धि वाले और यथार्थ को पकड़ने वाले शिवभक्त हैं, क्योंकि शिव का दर्शन कहता है कि यथार्थ में जियो, वर्तमान में जियो, अपनी चित्तवृत्तियों से लड़ो मत, उन्हें अजनबी बनकर देखो और कल्पना का भी यथार्थ के लिए उपयोग करो। आइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।


*🔱33.शिव और शंकर : -* शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं- शिव, शंकर, भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। अत: शिव और शंकर दो अलग अलग सत्ताएं है। हालांकि शंकर को भी शिवरूप माना गया है। माना जाता है कि महेष (नंदी) और महाकाल भगवान शंकर के द्वारपाल हैं। रुद्र देवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं।


*🔱34. देवों के देव महादेव :* देवताओं की दैत्यों से प्रतिस्पर्धा चलती रहती थी। ऐसे में जब भी देवताओं पर घोर संकट आता था तो वे सभी देवाधिदेव महादेव के पास जाते थे। दैत्यों, राक्षसों सहित देवताओं ने भी शिव को कई बार चुनौती दी, लेकिन वे सभी परास्त होकर शिव के समक्ष झुक गए इसीलिए शिव हैं देवों के देव महादेव। वे दैत्यों, दानवों और भूतों के भी प्रिय भगवान हैं। वे राम को भी वरदान देते हैं और रावण को भी।


*🔱35. शिव हर काल में : -* भगवान शिव ने हर काल में लोगों को दर्शन दिए हैं। राम के समय भी शिव थे। महाभारत काल में भी शिव थे और विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण अनुसार राजा हर्षवर्धन को भी भगवान शिव ने दर्शन दिए थे,


     🌸🙏जय जय श्री राम🌸🙏

शिवराज की अदा पर फिदा पब्लिक / मनोज कुमार

 शिवराज की  अदा पर फिदा पब्लिक


 


‘अपुन तो मूड में हैं’, ‘माफियाओं को जमीन में गाड़ दूंगा’ जैसे वाक्यों से मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान इन दिनों चर्चा में है. अलग-अलग ढंग से उनके बयानों की मीमांसा की जा रही है. इस मीमांसा में आलोचना का पक्ष ज्यादा है और आलोचकों को लगता है कि यह बयान मुख्यमंत्री के स्तर का नहीं है. लेकिन सच तो यह है कि शिवराजसिंह चौहान की इसी अदा पर, प्रदेश की पब्लिक फिदा हैं. ऐसे बयान मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पहली बार नहीं दिया है बल्कि वे बीच-बीच में इस तरह के बयान देकर चर्चा में आ जाते हैं. आम आदमी को लगता है कि इस बार प्रदेश की जमीन पर गड़बड़ करने वालों की खैर नहीं और अचानक से शिवराजसिंह चौहान की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ जाता है. हालांकि शिक्षित वर्ग शिवराजसिंह चौहान के इन बयानों से असहमत दिखता है तो मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय लोगों में शिवराजसिंह एक बार फिर नायक बन कर खड़े हो जाते हैं.


सीहोर जिले के रेहटी से आए शिवभानुसिंह को इस बात की तसल्ली है कि मुख्यमंत्री के लिए यह तेवर जरूरी है. उन्हें लगता है कि शिवराजसिंह चौहान कहते ही नहीं, करते भी हैं. कुछ ऐसी ही राय मंडीदीप से भोपाल आ रहे विवेक की भी है. विवेक अभी स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं. वे कहते हैं कि मुख्यमंत्रीजी के बयानों से यह लग सकता है कि वे हल्की बातें कर रहे हैं लेकिन माफियाओं में डर पैदा हो जाता है. राज्य की बेहतरी के लिए यह जरूरी है. रामकिशन और उनके साथी भी कहते हैं कि मुख्यमंत्री के इन बातों से हम लोगों में उम्मीद बंधती है कि अब कुछ ठीक होगा. उनकी उम्मीद यह भी है कि बिना सूचना बस किराया या अन्य चीजों में जो मूल्य बढ़ाये जा रहे हैं, उस पर भी नकेल कसी जानी चाहिए. ऐसे और भी कई लोग हैं जो मुख्यमंत्री के तेवर से इत्तेफाक रखते हैं. मंत्रालय के आसपास मिले राजीव कुमार मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के तेवर से इत्तेफाक रखते हैं लेकिन कहते हैं कि यह उनकी तासीर नहीं है. महबूब मियां को लगता है कि जब तक डर पैदा नहीं किया जाएगा, भोपाल और प्रदेश को लूटने का सिलसिला जारी रहेगा. संजीवसिंह और अयूब खान कहते हैं कि शिवराजसिंह तो नायक हैं लेकिन भाषा में थोड़ा संयम बरत लें तो उनके व्यक्तित्व में चार चांद लग जाए. हालांकि उनके काम से ये सारे लोग खुशी जाहिर करते हैं.


मुख्यमंत्री आम जनता के नायक हैं, यह बात सब जानते हैं. वे आम आदमी के मुख्यमंत्री हैं. साल 18 के विधानसभा चुनाव में फकत सूत भर के अंतर से पराजित हो जाने के बाद शिवराजसिंह सत्ता से भले ही दूर हो गए थे लेकिन उनके तेवर वैसे ही रहे. ‘टाइगर अभी जिंदा’ है, जैसे बयान देकर वे चर्चा में बने रहे. भूतपूर्व से लेकर अभूतपूर्व (चौथी दफा) मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अपने पहले के सारे मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता का रिेकार्ड ध्वस्त कर दिया है. शहर से लेकर देहात तक का हर आदमी उन्हें अपने निकट का पाता है. चाय की गुमटी में चुस्की लगाना, किसानों के साथ जमीन पर बैठ कर उनके दुख-सुख में शामिल होना. भरी सभा में आम आदमी के सम्मान में घुटने पर खड़े होकर अभिवादन कर शिवराजसिंह चौहान ने अपनी अलहदा इमेज क्रिएट की है. कभी किसी की पीठ पर हाथ रखकर हौसला बढ़ाना तो कभी किसी को दिलासा देेने वाले शिवराजसिंह चौहान की  ‘शिवराज मामा’ की छवि ऐसी बन गई है कि विरोधी तो क्या उनके अपनों के पास इस इमेज की कोई तोड़ नहीं है. 


कोरोना के कपकपा देने वाले समय में शिवराजसिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि अभिभावक के रूप में लोगों के बीच जाते रहे. इंतजाम का जायजा लेते रहे और बहन बेटियों से कहा था कि फ्रिक ना करें, अपने घर पर बोल दें, मामा उनकी देख-रेख कर रहे हैं. भोपाल की गलियों की खाक छानते रहे तो प्रदेश के दूसरे हिस्सों की समीक्षा बैठकर करते रहे. इस जज्बे वाले शिवराजसिंह पर कोरोना ने हमला बोल दिया लेकिन आत्मबल के धनी शिवराजसिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में अस्पताल से सरकार का काम करते रहे. कोरोना को मात देकर मुस्कराते हुए एक बार फिर प्रदेश की सेवा में लौट आए. 


मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अपने आत्मबल पर ही विरोधियों को मात देेते हैं. संभवत: प्रदेश में पहली बार हुए सबसे बड़े उप-चुनाव में उन्हें पराजित करने की सारी कोशिशें नाकाम हो गई. सारे पैंतरे धरे रह गए. सच तो यह है कि शिवराजसिंह चौहान जनता को समझते हैं. उन्हें जानते हैं और उन्हें पता है कि उनकी बेहतरी के लिए क्या किया जाना चाहिए. पब्लिक भी इस बात से राजी है कि उनका ‘नायक’ उनके हक के बारे में बेहतर काम कर रहा है. यकिन ना हो तो एक नजर उनके पिछले और अब के कार्यकाल पर डाल लें तो मुख्यमंत्री को लेकर जिस तरह की नाराजगी पब्लिक में होती है, वह मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को छू भी नहीं पायी है. 


पब्लिक के ‘हीरो’ या नायक बनने की शिवराजसिंह चौहान की कामयाबी की कहानी उनके पांव-पांव वाले भइया से शुरू होती है. लगातार 13 वर्ष मुख्यमंत्री रहने के बाद चौथी दफा जब प्रदेश में सत्तासीन होते हैं तो वही सादगी, वही सज्जनता और वही अपनापन प्रदेश के लोगों को मिलता है. उनकी तासीर और तेवर हमेशा से संयमित रहा है. वे समन्वयक की राजनीति करते हैं और विरोधियों को भी पूरा सम्मान देते हैं. ऐसे शालीन व्यक्तित्व के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान जब कहते हैं कि अपुन तो मूड में हैं या माफियाओं को जमीन में गाड़ दूंगा तो लोगों को यह असहज लग सकता  है. हालांकि सच तो यह है कि उनके इस तल्ख बयानों का विरोध एक खासवर्ग में देखा जा रहा है. मध्यप्रदेश की जिस पब्लिक के वे नायक हैं, उन्हें शिवराजसिंह का यही तेवर भाता है. शिवराजसिंह की इसी अदा पर फिदा है पब्लिक.

मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

नया साल नया बदलाव

 *💢1 जनवरी से बदल जाएंगी ये 10 अहम चीजें, हर एक बदलाव आपकी जिंदगी से जुड़ा*


अंग्रेजी नया साल 2021 अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर आने वाला है. आपके घर का कैलेंडर ही नहीं, बल्कि आपकी और हमारी जिंदगी से जुड़ी बहुत सारी चीजें 1 जनवरी 2021 से बदलने वाली हैं. हम यहां पर आपको बताने जा रहे हैं ऐसे ही वो 10 बड़े बदलाव जिन्हें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.


 1. महंगी हो जाएंगी कारें


*2. गाड़ियों पर एक जनवरी से फास्ट टैग लगवाना अनिवार्य*


गाड़ियों पर 1 जनवरी 2021 से टोल पार करने के लिए फास्टैग जरूरी होगा. बिना फास्टैग के नेशनल हाईवे टोल पार करने वाले चालकों को दोगुना चार्ज देना होगा. फिलहाल सभी टोल प्लाजा पर 80 परसेंट लाइनों को फास्टैग और 20 परसेंट लाइनों को कैश में इस्तेमाल किया जा रहा है. 1 जनवरी से सभी लाइनें फास्टैग हो जाएंगी. अपने फास्टैग अकाउंट में कम से कम 150 रुपये की राशि रखनी जरूरी होगी, नहीं तो फास्टैग को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा.


*3. म्यूचुअल फंड निवेश के बदले नियम*


निवेशकों के हितों को देखते हुए मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं, जिससे इनमें रिस्क को कम किया जा सके. SEBI ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के लिए असेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फंड्स का 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश करना जरूरी होगा, जो कि अभी न्यूनतम 65 फीसदी है. SEBI के नए नियमों के मुताबिक मल्टी कैप फंड्स के स्ट्रक्चर में बदलाव होगा. फंडों को मिडकैप और स्मॉलकैप में 25-25 फीसदी निवेश करना जरूरी होगा. वहीं, 25 फीसदी लार्ज कैप में लगाना होगा. पहले फंड मैनेजर्स अपनी मनमर्जी के हिसाब से आवंटन करते थे. अभी मल्टीकैप में लार्जकैप का वेटेज ज्यादा रहता है. 1 जनवरी 2021 से ये नया नियम लागू होगा.


*4. 1 जनवरी से UPI पेमेंट के लिए देना होगा अतिरिक्त चार्ज*


1 जनवरी से अमेजन पे, गूगल पे और फोन पे से से लेन देन करने पर अतिरिक्त चार्ज देना पड़ सकता है. दरअसल NPCI ने 1 जनवरी से थर्ड पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स की ओर से चलाई जाने वाली यूपीआई पेमेंट सर्विस (UPI Payment) पर अतिरिक्त चार्ज लगाने का निर्णय लिया है. NPCI ने नये साल पर थर्ड पार्टी ऐप के ऊपर 30 फीसदी का कैप लगा दिया है.हालांकि यह चार्ज पेटीएम को नहीं देना पडे़गा.


*5. लैंडलाइन से मोबाइल पर कॉल करने से पहले 0 लगाना होगा*


देशभर में लैंडलाइन से मोबाइल फोन पर कॉल करने के लिए अब एक जनवरी से नंबर से पहले शून्य लगाना जरूरी होगा. TRAI ने इस तरह के कॉल के लिए 29 मई 2020 को नंबर से पहले ‘शून्य’(0) लगाने की सिफारिश की थी. टेलीकॉम कंपनियों को और ज्यादा नंबर बनाने में मदद मिलेगी. डायल करने के तरीके में इस बदलाव से दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं के लिए 254.4 करोड़ अतिरिक्त नंबर तैयार करने की सुविधा मिलेगी. यह भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी.


*6. 1 जनवरी से जीएसटी रिटर्न के नियम बदल जाएंगे*


छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकार सेल्स रिटर्न (Sales returns) मामले में कुछ और कदम उठाने की तैयारी में है. जिसके तहत GST प्रक्रिया को और सरल किया जाएगा. खबर के मुताबिक इस नई प्रकिया में सालाना पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे कारोबारियों को अगले साल जनवरी से वर्ष के दौरान सिर्फ 4 सेल्स रिटर्न फाइल करने होंगे. इस समय कारोबारियों को मासिक आधार पर 12 रिटर्न (GSTR 3B) दाखिल करने होते हैं. इसके अलावा 4 GSTR 1 भरना होता है. नया नियम लागू होने के बाद टैक्सपेयर्स को केवल 8 रिटर्न भरने होंगे. इनमें 4 जीएसटीआर 3बी और 4 GSTR 1 रिटर्न भरना होगा.


*7. कम प्रीमियम में 1 जनवरी से खरीद सकेंगे टर्म प्लान*


1 जनवरी से आप कम प्रीमियम में सरल जीवन बीमा (स्टैंडर्ड टर्म प्लान) पॉलिसी खरीद सकेंगे. IRDAI ने बीमा कंपनियों को आरोग्य संजीवनी नामक स्टैंडर्ड रेगुलर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पेश करने के बाद एक स्टैंडर्ड टर्म लाइफ इंश्योरेंस पेश करने का निर्देश दिया है. उसी निर्देश को पालन करते हुए बीमा कंपनियां 1 जनवरी से सरल जीवन बीमा पॉलिसी लॉन्च करने जा रही हैं. नए बीमा प्लान में कम प्रीमियम में टर्म प्लान खरीदने का विकल्प मिलेगा. साथ ही सभी बीमा कंपनियों की पॉलिसी में शर्तों और कवर की राशि एक समान होगी.


*8. 1 जनवरी से बदल जाएंगे चेक से भुगतान करने के नियम*


1 जनवरी, 2021 से चेक पेमेंट से जुड़े नियम बदल जाएंगे. इसके तहत 50,000 रुपये से अधिक भुगतान वाले चेक के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम (सकारात्मक भुगतान व्यवस्था) लागू होगी. पॉजिटिव पे सिस्टम एक ऑटोमैटिक टूल है जो चेक के जरिये धोखाधड़ी करने पर लगाम लगाएगा. इसके तहत, जो व्यक्ति चेक जारी करेगा, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से चेक की तारीख, लाभार्थी का नाम, प्राप्तकर्ता और पेमेंट की रकम के बारे में दोबारा जानकारी देनी होगी. चेक जारी करने वाला व्यक्ति यह जानकरी SMS, मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग या एटीएम जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दे सकता है. इसके बाद चेक पेमेंट से पहले इन जानकारियों को क्रॉस-चेक किया जाएगा. अगर इसमें कोई गड़बड़ी पाई जाएगी चेक से भुगतान नहीं किया जाएगा


   *9. 1 जनवरी से फटाफट मिलेगा बिजली कनेक्शन*


सरकार बिजली उपभोक्ताओं को नए साल का तोहफा दे सकती है. बिजली मंत्रालय एक जनवरी से उपभोक्ता के अधिकार के नियमों को लागू करने की तैयारी कर रहा है. इसके बाद बिजली वितरण कंपनियों को तय अवधि के अंदर उपभोक्ताओं को सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी, ऐसा करने में अगर वो नाकाम रहती हैं तो उनसे उपभोक्ता जुर्माना वसूल सकता है. नियमों के मसौदे को कानून मंत्रालय को भेजा गया है. मंजूरी मिलने के बाद नया कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ताओं को ज्यादा कागजी कार्यवाही की जरूरत नहीं होगी. कंपनियों को शहरी क्षेत्र में सात दिन, नगर पालिका क्षेत्र में 15 और ग्रामीण क्षेत्रों में एक महीने के अंदर बिजली कनेक्शन देना होगा

https://www.facebook.com/groups/349666778832574/?ref=share


*10. एक जनवरी से स्मार्ट फोन में काम नहीं करेगा व्हाट्सएप*


WhatsApp 1 जनवरी 2021 से कुछ स्मार्टफोन में काम करना बंद कर देगा. इसमें एंड्रॉयड और आईफोन दोनों शामिल हैं. WhatsApp पुराने वर्जन के सॉफ्टवेयर को सपोर्ट नहीं करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक iOS 9 और Android 4.0.3 ऑपरेटिंग सिस्टम से भी पुराने वर्जन पर चलने वाले स्मार्टफोन्स पर WhatsApp काम नहीं करेगा. iPhone 4 या इससे पुराने आईफोन से भी WhatsApp का सपोर्ट खत्म किया जा सकता है. हालांकि इससे आगले वर्जन के आईफोन यानी iPhone 4s, iPhone 5s, iPhone 5C, iPhone 6, iPhone 6s में अगर पुराना सॉफ्टवेयर है तो इन्हें अपडेट किया जा सकता है. Android 4.0.3 से भी पुराने वर्जन पर चलने वाले स्मार्टफोन्स पर WhatsApp का सपोर्ट नहीं मिलेगा। 



https://chat.whatsapp.com/CyKsC2uu1Xh1QxthEsMQ4r 



🛕 *बालाजी हेल्पलाइन*🛕

   📲 *9107691000*

अधकपारी आधा सिरदर्द का देशी उपाय

 * l सिरदर्द का उपाय आओ जानें*


अक्सर ऐसा होता है कि हम घर के इंटीरियर पर तो बहुत ध्यान देते हैं लेकिन घर में बने पूजा वाले मंदिर की ओर ध्यान नहीं देते। वास्तुशास्त्र के अनुसार पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए कुछ उपाय करने बेहद जरुरी है, जैसे मंदिर में भगवान की मूर्ति किस तरह से रखी है, इस बात का भी खास ख्याल रखा जाना चाहिए। आइए, जानते हैं-


-मंदिर में भगवान की मूर्तियों को सामने की तरफ रखना चाहिए। मंदिर या घर की किसी और जगह पर भी भगवान की मूर्ति कभी भी इस तरह नहीं रखनी चाहिए कि उसके पीछे का भाग, यानी पीठ दिखाई दे। मूर्ति बिल्कुल सामने से दिखनी चाहिए।


-पूजा घर में कभी भी गणेश जी की दो से अधिक मूर्तियां या तस्वीर नहीं रखनी चाहिए। अन्यथा यह शुभ फलदायी नहीं होता।




-घर की दो अलग-अलग जगहों पर एक भगवान की दो तस्वीर हो सकती हैं, लेकिन एक ही जगह पर एक भगवान की दो तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए।


-भगवान की ऐसी मूर्ति या तस्वीर भी मंदिर में नहीं रखनी चाहिए, जो युद्ध की मुद्रा में हो या जिसमंं भगवान का रौद्र रूप हो।


-खंडित मूर्तियों को भी घर में नहीं रखना चाहिए। उन्हें तुरंत विसर्जित कर देना चाहिए। घर में हमेशा सौम्य, सुंदर और आशीर्वाद की मुद्रा वाली भगवान की मूर्तियां ही लगानी चाहिए। इससे घर या मन्दिर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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 *माइग्रेन (आधेसर दर्द के घरेलू उपाय) आओ जानें*


परिचय :👉 

जब मनुष्य के सिर के आधे भाग में दर्द हो और आधे भाग में दर्द न हो तो उसे आधासीसी या माईग्रेन कहते हैं।


विभिन्न भाषाओं में नाम :👉

हिन्दी आधा कपाल, आधासीसी 

अंग्रेज़ी हेमिक्रेनिया 

अरबी आधा कपालि नूरार विश 

बंगाली आधा कपाली 

गुजराती आधा शीशी 

कन्नड अरेतले नोवु 

मलयालम ओरचेनी कुटटु 

मराठी अरधशीशी 

उड़ीया अधा कपाली 

तमिल ओत्रयथथलइवली 

तेलगु अरतला नोप्पि 


कारण :👉 मानसिक व शारीरिक थकावट, अधिक गुस्सा करना, चिन्ता करना, आंखों का अधिक थक जाना, अत्यधिक रूप से भावनाओं में बहकर भावुक होना, भोजन का न पचना, किसी तरल पदार्थ को पीने से एलर्जी होना आदि माइग्रेन रोग के कारण हैं। प्रमेह (वीर्य विकार) और मधुमेह (शुगर) के रोगियों को भी यह रोग होता है।


लक्षण :👉 माइग्रेन रोग से पीड़ित रोगी को सुबह उठते ही चक्कर आने लगते हैं, आंखों के सामने अंधरा-सा छा जाता है। सर्दी का लगना, अरुचि पैदा होना, जी मिचलना, उल्टी होना आदि अनेक लक्षण आधासीसी रोग के हैं। इस रोग से पीड़ित रोगी का चेहरा फीका पड़ जाता है और वह उदास रहता है।


भोजन तथा परहेज :👉


लगभग 70 प्रतिशत फल, सब्जियां, अंकुरित दाल और 30 प्रतिशत अन्न उचित मात्रा में लेना आधासीसी के रोगी के लिए लाभकारी होता है। 

बासी भोजन, डिब्बा बन्द, तले हुए मांसाहारी व्यंजन, मिठाइयां और मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। 

रात को देर से भोजन नहीं करना चाहिए। 

स्टार्च, प्रोटीन और अधिक चिकनाई वाला भोजन नहीं करना चाहिए। 

भोजन करते समय बीच-बीच में शराब आदि पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए। 

चाय, कॉफी, चॉकलेट, कोकोआ और ऐल्कोहल का प्रयोग नहीं करना चाहिए और धूम्रपान नहीं करना चाहिए। 



नोट:

*विभिन्न औषधियों से उपचार- परंतु बिना सलाह के कोई भी उपचार नहीं करें*


1. लहसुन :👉 30 ग्राम लहसुन को पीसकर रस निकाल लें और इसमें लगभग आधा ग्राम हींग मिलाकर 1-1 बूंद नाक में डालें। इससे आधासीसी का दर्द खत्म होता है और रोगी को चक्कर आना आदि में आराम मिलता है। 

ल हसुन का रस नाक में टपकाने से आधासीसी का दर्द दूर होता है। 


2. रीठा :👉 रात को रीठे की छाल को पानी में डालकर रख दें और सुबह इसे मसलकर छानकर एक-एक बूंद नाक में डालें। इससे आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है। 

रीठा का चूर्ण सूंघने से आधासीसी का दर्द खत्म हो जाता है। 


3. दूध :👉 सूर्योदय से पहले गर्म दूध के साथ जलेबी या रबड़ी खाने से आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) ठीक होता है।  मेवा में चीनी मिलाकर सेवन करने से आधासीसी (आधे सिर का दर्द) दूर होता है। लगभग 50 मिलीलीटर बकरी के दूध में लगभग 50 मिलीलीटर भांगरे का रस मिलाकर धूप में गर्म होने के लिए रख दें और फिर इस दूध में लगभग 5 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सिर पर मलें। इससे आधे सिर का दर्द दूर होता है। 


4. दही :👉 ऐसा सिर दर्द जो सूर्य के साथ बढ़ता और घटता है। आधासीसी (आधे सिर का दर्द) के दर्द से पीड़ित रोगी को दही के साथ पका हुआ चावल खाना चाहिए। सुबह सूरज उगने के समय सिर दर्द शुरू होने से पहले चावल में दही मिलाकर खाना चाहिए।


5. आकड़ा :👉 यदि दर्द सूर्योदय के साथ बढ़ता-घटता हो तो सुबह सूर्य निकलने से पहले एक बताशे पर 2 बूंद आकड़े का दूध टपकाकर खाना चाहिए।


6. मैनफल :👉 मैनफल और मिश्री बराबर-बराबर लेकर थोड़े से गाय के दूध के साथ पीसकर सूर्योदय से पहले नस्य लेने से सूर्य उदय के साथ आरम्भ होने वाला सिर दर्द ठीक होता है।


7. गाजर :👉 गाजर के पत्तों पर घी लगाकर हल्का सा गर्म करके पीसकर रस निकाल लें और इसमें से 2-2 बूंद-बूंद रस नाक में टपकाएं। यह आधाशीशी (माइग्रेन) के रोग को दूर करने में बेहद लाभकारी औषधि है।


8. अंगूर :👉 आधा कप अंगूर का रस प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने से पहले पीने से आधे सिर का दर्द ठीक हो जाता है।


9. काली निर्गुण्डी :👉 काली निर्गुण्डी के ताजे पत्तों के रस को हल्का गर्म करके 2-2 बूंद कान में डालने से आधे सिर का दर्द खत्म हो जाता है।


10. तिल :👉 लगभग 2 ग्राम तिल और लगभग 5 ग्राम वायबिडंग को पानी के साथ पीसकर सिर पर लेप करने से आधासीसी का दर्द खत्म हो जाता है। काले तिल, बादाम, कच्ची हल्दी और आंवला 10-10 ग्राम लेकर इन सबको पानी के साथ पीसकर सिर पर लेप की तरह लगाने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है। 


11. लौंग :👉 लगभग 5 ग्राम लौंग को पानी के साथ पीसकर हल्का गर्म करके कनपटियों पर लेप करने से आधे सिर का दर्द मिटता है। 

लगभग 10 ग्राम लौंग और लगभग 10 ग्राम तंबाकू के पत्तों को पानी के साथ पीसकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आधासीसी का रोग दूर हो जाता है। 


12. सूरजमुखी 👉 सूरजमुखी के पत्तों के रस में सूरजमुखी के बीजों को खरल करके मस्तक पर 2-3 दिन तक लेप करने से आधाशीशी का दर्द समाप्त होता है। 

लगभग 5 ग्राम सूरजमुखी के बीजों को लगभग 10 ग्राम सूरजमुखी के फलों के रस में पीसकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आधे सिर का दर्द खत्म हो जाता है। 


13. चावल :👉 लगभग 25 ग्राम चावल की खील में शहद मिलाकर सुबह सूर्य निकलने से पहले      पीने से आधे सिर दर्द में आराम मिलता है।


14. सौंफ :👉 लगभग 5 ग्राम सौंफ और लगभग 5 ग्राम धनिये को पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर इसमें 5 ग्राम मिश्री मिलाकर दिन में 3 बार 3-3 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लेने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।


15. चित्रक :👉 चित्रक, पुष्कर की जड़ और शुंठी 10-10 ग्राम लेकर चूर्ण बनाकर लगभग 1 ग्राम चूर्ण पेड़े (मिठाई) के साथ खाएं। इससे सिर का दर्द खत्म हो जाता है।


16. बादाम :👉 लगभग 10 दाने कागजी बादाम, लगभग 10 ग्राम पोस्त (खस-खस) और लगभग 5 दाने छुहारे को पानी में डालकर रख दें। सुबह इस मिश्रण को घी में डालकर हलवे की तरह पकाएं और इसमें मिश्री 100 ग्राम, 10 लौंग और 5 इलायची का चूर्ण बनाकर मिलाकर सुबह-शाम देने से आधासीसी का दर्द खत्म हो जाता है।


17. कालीमिर्च :👉 आधे सिर दर्द से पीड़ित रोगी को 10 ग्राम कालीमिर्च चबाकर खाना चाहिए और ऊपर से 25 ग्राम देशी घी का सेवन करना चाहिए। 

लगभग 10 कालीमिर्च और लगभग 10 ग्राम मिश्री के चूर्ण को पानी के साथ सुबह-शाम आधासीसी के रोगी को लेना चाहिए। 


18. नौसादर :👉 10 ग्राम नौसादर और 1 ग्राम कपूर को पीसकर चुटकी में लेकर सूंघने से आधासीसी (आधे सिर का दर्द) का दर्द ठीक हो जाता है। 

नौसादर और कुटकी को पीसकर पानी में मिलाकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आधासीसी का दर्द दूर होता है। नौसादर और बड़ी इलायची के छिलके को महीन पीसकर जिस ओर सिर दर्द हो उस ओर के नाक के छेद से सूंघें।  लगभग 10-10 ग्राम नौसादर और हल्दी को पीसकर सूंघने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है। 


19. वायविडंग :👉 वायविडंग से निकाले हुए तेल को सूंघने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है। इसको नियमित 3-4 बार सूंघना चाहिए।


20. राई :👉 राई और कबूतर की बीट को पीसकर सिर पर जहां दर्द हो वहां लेप करना चाहिए। इससे दर्द में तुरन्त आराम मिलता है। राई को पीसकर कनपटी पर लेप की तरह लगाने से आधे सिर का दर्द खत्म हो जाता है। 


21. सोंठ :👉 लगभग 10 ग्राम सोंठ के चूर्ण को लगभग 60 ग्राम गुड़ में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर सुबह-शाम खाने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है। 

सोंठ को पानी में पीसकर गर्म करके सिर पर लेप करने या सूंघने से आधे सिर का दर्द या पूरे सिर का दर्द समाप्त हो जाता है। 


22. घी :👉 माईग्रेन से पीड़ित रोगी को सुबह-शाम घी सूंघना चाहिए। सिर दर्द गर्मी से हो तो ठंड़ा और बादी का हो तो गर्म घी से सिर की मालिश करनी चाहिए। 2 चम्मच गाय के घी में आधा ग्राम कलमीशोरा पीसकर मिलाकर सूंघने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है। 

गाय के घी में कालीमिर्च को पीसकर मिला लें और दाईं ओर दर्द होने पर बाईं ओर से सूंघना और बाईं ओर दर्द होने पर दाईं ओर से सूंघना चाहिए। 


23. चकवड़ (पंवार) :👉 चकबड़ के बीजों को कांजी में पीसकर लेप की तरह सिर पर लगाने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।


24. पोस्ता :👉 आधासीसी के दर्द से पीड़ित रोगी को पोस्ता के काढ़े का सेवन करना चाहिए।


25. कस्तूरी :👉 आधासीसी के रोगी को जबादकस्तूरी सूंघाना चाहिए।


26. केसर :👉 केसर और चीनी को घी में भूनकर सूंघने से आधे सिर के दर्द में बहुत लाभ मिलता है।


27. अपराजिता :👉 अपराजिता के बीजों का रस निकालकर 4-4 बूंद नाक में टपकाने से आधासीसी का दर्द मिटता है।  अपराजिता के बीज और जड़ समान मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर नस्य लेने से आधासीसी दूर होता है।  श्वेत अपराजिता की जड़ का रस निकालकर सूंघने से आधे सिर का दर्द दूर होता है। 


28. नकछिकनी :👉 नकछिकनी का रस या चूर्ण बनाकर सूंघने पर छींक आकर आधे सिर का दर्द समाप्त हो जाता है।


29. सेब :👉 नियमित सुबह खाली पेट आधा सेब खाने से आधासीसी का दर्द हमेशा के लिए चला जाता है।


30. हींग :👉 हींग को पानी में घोलकर सूंघने से सिर दर्द खत्म हो जाता है।


31. शहद :👉 सूर्य निकलने के साथ दर्द का बढ़ना और सूर्य डूबने के साथ सिर दर्द का कम होना। ऐसे सिर दर्द में जिस ओर के सिर में दर्द हो उसके दूसरे ओर की नाक के नथुने में एक बूंद शहद डालना चाहिए। इससे सिर के दर्द में जल्दी आराम मिलता है।  प्रतिदिन भोजन करते समय 2 चम्मच शहद लेने से आधे सिर का दर्द दूर होता है। 


32. गुड़ :👉 लगभग 12 ग्राम गुड़ को लगभग 6 ग्राम देशी घी के साथ मिलाकर खाने से आधासीसी ठीक हो जाता है।


33. आक :👉 जंगली कण्डों की राख को आक के दूध में भिगोकर छाया में सुखा लें और एक चौथाई ग्राम की मात्रा में सूंघें। इससे छींके आकर सिर का दर्द दूर होता है और जुकाम व बेहोशी दूर होती है। आक की जड़ को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और इस 10 ग्राम चूर्ण में 7 इलायची और कपूर व पिपरमिंट आधा-आधा ग्राम मिलाकर खूब खरलकर शीशी में भर करके रख लें। यह चूर्ण सूंघने से छींके आकर व कफस्राव होकर आधे सिर का दर्द समाप्त हो जाता है। 

अनार की छाल को बारीक पीसकर 40 ग्राम की मात्रा में आक के दूध में गूंथकर रोटी की तरह हल्की आंच पर पका लें और फिर इसे सुखाकर बहुत महीन पीसकर रख लें। इसमें जटामांसी व छरीला 3-3 ग्राम, इलायची और कायफल 1.5 ग्राम पीसकर मिलाकर नस्य लें। इसके नस्य लेने से कुछ देर बाद छींके आकर दिमाग का नजला निकलकर आधे सिर का दर्द समाप्त होता है। 


34. अपामार्ग :👉 अपामार्ग के बीजों के चूर्ण को सूंघने से आधासीसी और दिमाग की कमजोरी दूर होती है। इस चूर्ण को सूंघने से मस्तक के अन्दर जमा हुआ कफ पतला होकर नाक के द्वारा निकल जाता है और कीड़े मरकर निकल जाते हैं।


35. अरहर :👉 अरहर के पत्तों का रस तथा दूब (दूर्वा घास) का रस एक साथ मिलाकर नस्य लेने से आधासीसी का दर्द ठीक होता है।


36. तुलसी :👉 चौथाई चम्मच तुलसी के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम दिन में 2 बार चाटने से आधासीसी का दर्द नष्ट हो जाता है। 

यदि आधे सिर में दर्द हो जो सूरज के साथ घटता-बढ़ता हो तो चौथाई चम्मच तुलसी के बीज पीसकर शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें। 


37. चीनी :👉 यदि सिर दर्द सूर्य निकलने के साथ शुरू हो और सूर्य डूबने के साथ कम हो जाए तो ऐसे सिर दर्द में सूर्य निकलते समय सूर्य के सामने खड़े होकर लगभग 150 मिलीलीटर पानी में 60 ग्राम चीनी मिलाकर धीरे-धीरे पीएं। इससे आधे सिर का दर्द समाप्त होता है।


38. नारियल :👉 लगभग 2-3 बूंद नारियल का पानी नाक में टपकाने से आधासीसी का दर्द ठीक हो जाता है। 


39. अदरक :👉 अदरक और गुड़ की पोटली बनाकर रस को नाक में डालने से आधासीसी का दर्द समाप्त होता है। आधे सिर में दर्द होने पर नाक में अदरक का रस टपकाने से बहुत लाभ मिलता है। आधासीसी का कष्ट यदि अपच के कारण उत्पन्न हुआ हो तो सोंठ को पानी के साथ पीसकर लुगदी बनाकर हल्का-सा गर्म करके पीड़ित स्थान पर लेप करें। इस प्रयोग के आरम्भ में हल्की-सी जलन प्रतीत होती है जो बाद में शीघ्र ही ठीक हो जाती है। यदि जुकाम से सिरदर्द हो तो सोंठ को गर्म पानी में पीसकर सर पर लेप करें और पिसी हुई सोंठ का चूर्ण सूंघें। 


40. अगस्ता :👉 सिर के जिस ओर दर्द हो उसके दूसरे ओर के नथुने में अगस्त के पत्तों या फूलों का रस 2-3 बूंदे टपकाएं। इससे आधे सिर का दर्द व नाक की पीड़ा भी शान्त होती है।


41. सरसों का तेल :👉 सिर के जिस हिस्से में दर्द हो उस नथुने में आठ बूंद सरसों का तेल डालकर सूंघने से आधे सिर का दर्द जल्दी बन्द हो जाता है इसका इस्तेमाल 4-5 दिन करना चाहिए।


42. करंज :👉 लता करंज के बीजों की गिरी, तेजपात, बच और चीनी बराबर मात्रा में लेकर एक साथ खरल करके बारीक पॉउडर बना लें। इस पॉउडर को नाक से नस्य लेने से छींके आकर आधे सिर का दर्द तुरन्त ठीक हो जाता है। 

लता करंज के बीजों को पानी में पीसकर थोड़ा गुड़ मिलाकर गर्म करके जिस ओर सिर में दर्द हो रहा हो उसके विपरीत नाक के नथुने में 1 से 2 बूंद टपकाएं और फिर आधे घंटे के बाद दूसरे नाक के नथुने में टपकाएं। ऐसा कुछ दिन करने से आधे सिर का दर्द पूर्ण रूप से खत्म हो जाता है। 


43. गुलाब  :👉 सिर दर्द या आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) के दर्द में 2 दाने इलायची, 1 चम्मच मिश्री और 10 ग्राम गुलाब की पत्तियों को पीसकर सुबह खाली पेट पीने से लाभ मिलता है। 1 ग्राम नौसादर को 12 ग्राम गुलाबजल में मिला लें और आधे सिर के दर्द से पीड़ित रोगी की नाक में 4-5 बूंदें डाल लें। इससे आधे सिर का दर्द तुरन्त बन्द हो जाता है। 


44. अमरूद :👉 आधे सिर के दर्द में कच्चे अमरूद को सुबह पीसकर लेप बनाकर सिर पर लगाने से लाभ मिलता है। हरे कच्चे अमरूद को थोड़े-से पानी के साथ पत्थर पर पीसकर सुबह के समय माथे पर जहां दर्द हो वहां लेप करें। इससे 2-3 घंटों में ही आधासीसी का दर्द मिटता है। 


45. भांगरा :👉 भांगरा के रस और बकरी का दूध समान भाग लेकर गर्म करके नाक में टपकाने से और भांगरा के रस में कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर लेप करने से आधासीसी का दर्द मिटता है।


46. पवांड़ (चक्रमर्द) :👉 लगभग 20 से 25 ग्राम चक्रमर्द के बीजों को कांजी में पीसकर माथे पर लेप करने से आधे सिर का दर्द ठीक हो जाता है।


47. नमक :👉 नमक और शहद आधा-आधा चम्मच मिलाकर चाटने से आधे सिर का दर्द (आधी शीशी का दर्द) में लाभ मिलता है।

✌️✌️✌️😀😀😀🙂😝🤣🤭

सोमवार, 28 दिसंबर 2020

नया साल

नया साल 


*⛳🔥हम क्यो नही मानते 1 जनबरी को नया साल?🔥⛳*


*🔥न ऋतु बदली.. न मौसम*

*🔥न कक्षा बदली... न  सत्र*

*🔥न फसल बदली...न खेती*

*🔥न पेड़ पौधों की रंगत*

*🔥न सूर्य चाँद सितारों की दिशा*

*🔥ना ही नक्षत्र।।*


*1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं। मानो कितना बड़ा पर्व है।*


*⛳नया केवल एक दिन ही नही होता..*

*⛳कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए। आखिर हमारा देश त्योहारों का देश है।*


*🔥ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर:🔥*


1. प्रकृति- 

1 जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी.. चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो I


2. वस्त्र- 

दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर.. 

चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है I


3. विद्यालयो का नया सत्र- दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नहीं.. 

जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल I


4. नया वित्तीय वर्ष- 

दिसम्बर-जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती.. जबकि 31 मार्च को बैंको की (audit) कलोसिंग होती है नए वही खाते खोले जाते है I सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है I


5. कलैण्डर- 

जनवरी में नया कलैण्डर आता है.. 

चैत्र में नया पंचांग आता है I उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं I इसके बिना हिन्दू समाज जीबन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग I


6. किसानो का नया साल- दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती है.. 

जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो का नया वर्ष और उतसाह I


7. पर्व मनाने की विधि- 

31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते है, हंगामा करते है, रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश.. 

जबकि *भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है* घर घर मे माता रानी की पूजा होती है I शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है I


8. ऐतिहासिक महत्त्व- 1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नही है.. 

जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध इस दिन से है I


अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला.. 

अपना नव संवत् ही नया साल है I


जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तिया, किसान की नई फसल, विद्यार्थी की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है I


अपनी मानसिकता को बदले I विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने। स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष..?


*"केबल कैलेंडर बदलें.. अपनी संस्कृति नहीं"*


*⛳आओ जागेँ जगायेँ, भारतीय संस्कृति अपनायेँ और आगे बढ़े I⛳*

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*जनजागृति हेतु लेख प्रसारण अवश्य करें*⛳🙏🏻

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

*भगवान सूर्यदेव की जय🙏🏻🚩*

_*⛳⚜️सनातन धर्मरक्षक समिति*_⚜⛳

अमरूद खाए रोग भगाए*

 *अमरूद खाए रोग भगाए* /


प्रस्तुति  - कृष्ण मेहता 


 *अमरूद में विटामिन सी और शर्करा काफी मात्रा में होती है। अमरूद में पेक्टिन की मात्रा भी बहुत अधिक होती है।*

*अमरूद का पेड़ आमतौर पर भारत के सभी राज्यों में उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश का इलाहाबादी अमरूद विश्वविख्यात है। यह विशेष रूप से स्वादिष्ट होता है। इसके पेड़ की ऊंचाई 10 से 20 फीट होती है। टहनियां पतली-पतली और कमजोर होती हैं। इसके तने का भाग चिकना, भूरे रंग का, पतली सफेद छाल से आच्छादित रहता है। छाल के नीचे की लकड़ी चिकनी होती है। इसके पत्ते हल्के हरे रंग के, खुरदरे, 3 से 4 इंच लंबे, आयताकार, सुगंधयुक्त और डंठल छोटे होते हैं।*


          *अमरूद लाल और पीलापन लिए हुए हरे रंग के होते हैं। बीज वाले  और बिना बीज वाले तथा अत्यंत मीठे और खट्टे-मीठे प्रकार के अमरूद आमतौर पर देखने को मिलते हैं। सफेद की अपेक्षा लाल रंग के अमरूद गुणकारी होते हैं। सफेद गुदे वाले अमरूद अधिक मीठे होते हैं। फल का भार आमतौर पर 30 से 450 ग्राम तक होता है।*


           *आमतौर पर देखा जाता है कि जब लोग फल खरीदने जाते हैं तो उनकी नज़र में केला, सेब, अंगूर तथा आम आदि फल ही पोशक तत्वों से भरपूर नज़र आते हैं। अमरूद जैसा सस्ता तथा सर्वसुलभ फल उन्हें बेकार और गरीबों के खाने योग्य ही लगता है, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। अमरूद में सेब से भी अधिक पोशक तत्व होते हैं। इसीलिए इसे `गरीबों का सेब´ भी कहा गया है। अमरूद मधुर और रेचक (दस्त लाकर पेट साफ करने वाला) फल है तथा इसके नियमित प्रयोग से मल अवरोध तो दूर होता ही है, साथ ही वात-पित्त, उन्माद (पागलपन), मूर्छा (बेहोशी), मिर्गी, पेट के कीडे़, टायफाइड और जलन आदि का नाश होता है। आयुर्वेद में इसे शीतल, तीक्ष्ण, कसैला, अम्लीय तथा शुक्रजनक (वीर्यवर्द्धक) बताया गया है। यहां सेब और अमरूद में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की तुलना की जा रही है जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अमरूद कितना अधिक पौष्टिक है।*


रासायनिक संगठन :


अमरूद


सेब


तत्त्व


मात्रा


तत्त्व


मात्रा


पानी


76.1 प्रतिशत


जल


85.9


प्रोटीन


1.5 प्रतिशत


प्रोटीन


0.3


वसा


0.2 प्रतिशत


वसा


0.1


खनिज पदार्थ


7.8 प्रतिशत


खनिज पदार्थ


0.3


विटामिन-सी


लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग/100 ग्राम


विटामिन-सी


2 प्रतिशत


कार्बोहाइड्रेट


14.6 प्रतिशत


कार्बोहाइड्रेट


13.4 प्रतिशत


कैल्शियम


0.01 प्रतिशत


कैल्शियम


0.01


फास्फोरस


0.44 प्रतिशत


फास्फोरस


0.02


रेशा


6.9 प्रतिशत


रेशा


नहीं होता


          *अमरूद में विटामिन सी और शर्करा काफी मात्रा में होती है। अमरूद में पेक्टिन की मात्रा भी बहुत अधिक होती है। अमरूद को इसके बीजों के साथ खाना अत्यंत उपयोगी होता है, जिसके कारण पेट साफ रहता है। अमरूद का उपयोग चटनियां, जेली, मुरब्बा और फल से पनीर बनाने में किया जाता है।*


हानिकारक प्रभाव:


          *शीत प्रकृति वालों को और जिनका आमाशय कमजोर हो, उनके लिए अमरूद हानिकारक होता है। वर्षा के सीजन में अमरूद के अंदर सूक्ष्म धागे जैसे सफेद कीडे़ पैदा हो जाते हैं जिसे खाने वाले व्यक्ति को पेट दर्द, अफारा, हैजा जैसे विकार हो सकते हैं। इसके बीज सख्म होने के कारण आसानी से नहीं पचते और यदि ये एपेन्डिक्स में चले जाए, तो एपेन्डिसाइटिस रोग पैदा कर सकते हैं। अत: इनके बीजों के सेवन से बचना चाहिए। इसकी दो किस्में होती हैं:- पहला सफेद गर्भवाली और दूसरा लाल-गुलाबी गर्भवाली। सफेद किस्म अधिक मीठी होती है। कलमी अमरूद में अच्छी किस्म के अमरूद भी होते हैं। वे बहुत बड़े होते हैं और उसमें मुश्किल से 4-5 बीज निकलते हैं। बनारस (उत्तर प्रदेश) में इस प्रकार के अमरूद होते हैं।*


विभिन्न रोगों में सहायक :


1. शक्ति (ताकत) और वीर्य की वृद्धि के लिए : अच्छी तरह पके नरम, मीठे अमरूदों को मसलकर दूध में फेंट लें और फिर छानकर इनके बीज निकाल लें। आवश्यकतानुसार शक्कर मिलाकर सुबह नियमित रूप से 21 दिन सेवन करना धातुवर्द्धक होता है।


2. पेट दर्द :


नमक के साथ पके अमरूद खाने से आराम मिलता है।

अमरूद के पेड़ के कोमल 50 ग्राम पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर छानकर पीने से लाभ होगा।

अमरूद के पेड़ की पत्तियों को बारीक पीसकर काले नमक के साथ चाटने से लाभ होता है।

अमरूद के फल की फुगनी (अमरूद के फल के नीचे वाले छोटे पत्ते) में थोड़ा-सी मात्रा में सेंधानमक को मिलाकर गुनगुने पानी के साथ पीने से पेट में दर्द समाप्त होता है।

यदि पेट दर्द की शिकायत हो तो अमरूद की कोमल पित्तयों को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से आराम होता है। अपच, अग्निमान्द्य और अफारा के लिए अमरूद बहुत ही उत्तम औषधि है। इन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को 250 ग्राम अमरूद भोजन करने के बाद खाना चाहिए। जिन लोगों को कब्ज न हो तो उन्हें खाना खाने से पहले खाना चाहिए।

3. बवासीर (पाइल्स) :


सुबह खाली पेट 200-300 ग्राम अमरूद नियमित रूप से सेवन करने से बवासीर में लाभ मिलता है।

पके अमरुद खाने से पेट का कब्ज खत्म होता है, जिससे बवासीर रोग दूर हो जाता है। 

कुछ दिनों तक रोजाना सुबह खाली पेट 250 ग्राम अमरूद खाने से बवासीर ठीक हो जाती है। बवासीर को दूर करने के लिए सुबह खाली पेट अमरूद खाना उत्तम है। मल-त्याग करते समय बांयें पैर पर जोर देकर बैठें। इस प्रयोग से बवासीर नहीं होती है और मल साफ आता है।

4. सूखी खांसी :


गर्म रेत में अमरूद को भूनकर खाने से सूखी, कफयुक्त और काली खांसी में आराम मिलता है। यह प्रयोग दिन में तीन बार करें।

एक बड़ा अमरूद लेकर उसके गूदे को निकालकर अमरूद के अंदर थोड़ी-सी जगह बनाकर अमरूद में पिसी हुई अजवायन तथा पिसा हुआ कालानमक 6-6 ग्राम की मात्रा में भर देते हैं। इसके बाद अमरूद में कपड़ा भरकर ऊपर से मिट्टी चढ़ाकर तेज गर्म उपले की राख में भूने, अमरूद के भुन जाने पर मिट्टी और कपड़ा हटाकर अमरूद पीसकर छान लेते हैं। इसे आधा-आधा ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम मिलाकर चाटने से सूखी खांसी में लाभ होता है।

5. दांतों का दर्द :


अमरूद की कोमल पत्तियों को चबाने से दांतों की पीड़ा (दर्द) नष्ट हो जाती है।

अमरूद के पत्तों को दांतों से चबाने से आराम मिलेगा।

अमरूद के पत्तों को जल में उबाल लें। इसे जल में फिटकरी घोलकर कुल्ले करने से दांतों की पीड़ा (दर्द) नष्ट हो जाती है।

अमरूद के पत्तों को चबाने से दांतों की पीड़ा दूर होती है। मसूढ़ों में दर्द, सूजन और आंतों में दर्द होने पर अमरूद के पत्तों को उबालकर गुनगुने पानी से कुल्ले करें।

6. आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) :


आधे सिर के दर्द में कच्चे अमरूद को सुबह पीसकर लेप बनाएं और उसे मस्तक पर लगाएं।

सूर्योदय के पूर्व ही सवेरे हरे कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर जहां दर्द होता है, वहां खूब अच्छी तरह लेप कर देने से सिर दर्द नहीं उठने पाता, अगर दर्द शुरू हो गया हो तो शांत हो जाता है। यह प्रयोग दिन में 3-4 बार करना चाहिए।

7. जुकाम :


रुके हुए जुकाम को दूर करने के लिए बीज निकला हुआ अमरूद खाएं और ऊपर से नाक बंदकर 1 गिलास पानी पी लें। जब 2-3 दिन के प्रयोग से स्राव (बहाव) बढ़ जाए, तो उसे रोकने के लिए 50-100 ग्राम गुड़ खा लें। ध्यान रहे- कि बाद में पानी न पिएं।

सिर्फ 3 दिन तक लगातार अमरूद खाने से पुरानी सर्दी और जुकाम दूर हो जाती है।

लंबे समय से रुके हुए जुकाम में रोगी को एक अच्छा बड़ा अमरूद के अंदर से बीजों को निकालकर रोगी को खिला दें और ऊपर से ताजा पानी नाक बंद करके पीने को दें। 2-3 दिन में ही रुका हुआ जुकाम बहार साफ हो जायेगा। 2-3 दिन बाद अगर नाक का बहना रोकना हो तो 50 ग्राम गुड़ रात में बिना पानी पीयें खा लें।

8. मलेरिया :


मलेरिया बुखार में अमरूद का सेवन लाभकारी है। नियमित सेवन से तिजारा और चौथिया ज्वर में भी आराम मिलता है।

अमरूद और सेब का रस पीने से बुखार उतर जाता है।

अमरूद को खाने से मलेरिया में लाभ होता है।

9. भांग का नशा : 2-4 अमरूद खाने से अथवा अमरूद के पत्तों का 25 ग्राम रस पीने से भांग का नशा उतर जाता है।


11. मानसिक उन्माद (पागलपन) : :


सुबह खाली पेट पके अमरूद चबा-चबाकर खाने से मानसिक चिंताओं का भार कम होकर धीरे-धीरे पागलपन के लक्षण दूर हो जाते हैं और शरीर की गर्मी निकल जाती है।

250 ग्राम इलाहाबादी मीठे अमरूद को रोजाना सुबह और शाम को 5 बजे नींबू, कालीमिर्च और नमक स्वाद के अनुसार अमरूद पर डालकर खा सकते हैं। इस तरह खाने से दिमाग की मांस-पेशियों को शक्ति मिलती है, गर्मी निकल जाती है, और पागलपन दूर हो जाता है। दिमागी चिंताएं अमरूद खाने से खत्म हो जाती हैं।

12. पेट में गड़-बड़ी होने पर : अमरूद की कोंपलों को पीसकर पिलाना चाहिए।


13. ठंडक के लिए : अमरूद के बीजों को पीसें और लड्डू बनाकर गुलाब जल में शक्कर के साथ पियें।


14. अमरूद का मुरब्बा : अच्छी किस्म के तरोताजा बड़े-बड़े अमरूद लेकर उसके छिलकों को निकालकर टुकड़े कर लें और धीमी आग पर पानी में उबालें। जब अमरूद आधे पककर नरम हो जाएं, तब नीचे उतारकर कपड़े में डालकर पानी निकाल लें। उसके बाद उससे 3 गुना शक्कर लेकर उसकी चासनी बनायें और अमरूद के टुकड़े उसमें डाल दें। फिर उसमें इलायची के दानों का चूर्ण और केसर इच्छानुसार डालकर मुरब्बा बनायें। ठंडा होने पर इस मुरब्बे को चीनी-मिट्टी के बर्तन में भरकर, उसका मुंह बंद करके थोड़े दिन तक रख छोड़े। यह मुरब्बा 20-25 ग्राम की मात्रा में रोजाना खाने से कोष्ठबद्धता (कब्जियत) दूर होती है।


15. आंखों के लिए :


अमरूद के पत्तों की पोटली बनाकर रात को सोते समय आंख पर बांधने से आंखों का दर्द ठीक हो जाता है। आंखों की लालिमा, आंख की सूजन और वेदना तुरंत मिट जाती है।

16. कब्ज :


250 ग्राम अमरूद खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से कब्ज दूर होती है।

अमरूद के कोमल पत्तों के 10 मिलीलीटर रस में थोड़ी शक्कर मिलाकर प्रतिदिन केवल एक बार सुबह सेवन करने से 7 दिन में अजीर्ण (पुरानी कब्ज) में लाभ होता है।

अमरूद को नाश्ते के समय कालीमिर्च, कालानमक, अदरक के साथ खाने से अजीर्ण, गैस, अफारा (पेट फूलना) की तकलीफ दूर होकर भूख बढ़ जाएगी। नाश्ते में अमरूद का सेवन करें। सख्त कब्ज में सुबह-शाम अमरूद खाएं।

अमरूद को कुछ दिनों तक नियमित सेवन करने से 3-4 दिन में ही मलशुद्धि होने लग जाती है। कोष्ठबद्धता मिटती है एवं कब्जियत के कारण होने वाला आंखों की जलन और सिर दर्द भी दूर होता है।

अमरूद खाने से आंतों में तरावट आती है और कब्ज दूर हो जाता है। इसे खाना खाने से पहले ही खाना चाहिए, क्योंकि खाना खाने के बाद खाने से कब्ज करता है। कब्ज वालों को सुबह के समय नाश्ते में अमरूद लेना चाहिए। पुरानी कब्ज के रोगियों को सुबह और शाम अमरूद खाना चाहिए। इससे पेट साफ हो जाता है।

अमरूद खाने से या अमरूद के साथ किशमिश के खाने से कब्ज़ की शिकायत नहीं रहती है।

17. कुकर खांसी, काली खांसी (हूपिंग कफ) :


एक अमरूद को भूभल (गर्म रेत या राख) में सेंककर खाने से कुकर खांसी में लाभ होता है। छोटे बच्चों को अमरूद पीसकर अथवा पानी में घोलकर पिलाना चाहिए। अमरूद पर नमक और कालीमिर्च लगाकर खाने से कफ निकल जाती है। 100 ग्राम अमरूद में विटामिन-सी लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम तक होता है। यह हृदय को बल देता है। अमरूद खाने से आंतों में तरावट आती है। कब्ज से ग्रस्त रोगियों को नाश्ते में अमरूद लेना चाहिए। पुरानी कब्ज के रोगियों को सुबह-शाम अमरूद खाना चाहिए। इससे दस्त साफ आएगा, अजीर्ण और गैस दूर होगी। अमरूद को सेंधानमक के साथ खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।

एक कच्चे अमरूद को लेकर चाकू से कुरेदकर उसका थोड़ा-सा गूदा निकाल लेते हैं। फिर इस अमरूद में पिसी हुई अजवायन तथा पिसा हुआ कालानमक 6-6 ग्राम की मात्रा में लेकर भर देते हैं। इसके बाद अमरूद पर कपड़ा लपेटकर उसमें गीली मिट्टी का लेप चढ़ाकर आग में भून लेते हैं पकने के बाद इसके ऊपर से मिट्टी और कपड़ा हटाकर अमरूद को पीस लेते हैं। इसे आधा-आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम रोगी को चटाने से काली खांसी में लाभ होता है।

एक अमरूद को गर्म बालू या राख में सेंककर सुबह-शाम 2 बार खाने से काली खांसी ठीक हो जाती है।

18. रक्तविकार के कारण फोड़े-फुन्सियों का होना : 4 सप्ताह तक नित्य प्रति दोपहर में 250 ग्राम अमरूद खाएं। इससे पेट साफ होगा, बढ़ी हुई गर्मी दूर होगी, रक्त साफ होगा और फोड़े-फुन्सी, खाज-खुजली ठीक हो जाएगी।


19. पुरानी सर्दी : 3 दिनों तक केवल अमरूद खाकर रहने से बहुत पुरानी सर्दी की शिकायत दूर हो जाती है।


20. पुराने दस्त : अमरूद की कोमल पत्तियां उबालकर पीने से पुराने दस्तों का रोग ठीक हो जाता है। दस्तों में आंव आती रहे, आंतों में सूजन आ जाए, घाव हो जाए तो 2-3 महीने लगातार 250 ग्राम अमरूद रोजाना खाते रहने से दस्तों में लाभ होता है। अमरूद में-टैनिक एसिड होता है, जिसका प्रधान काम घाव भरना है। इससे आंतों के घाव भरकर आंते स्वस्थ हो जाती हैं।


21. कफयुक्त खांसी : एक अमरूद को आग में भूनकर खाने से कफयुक्त खांसी में लाभ होता है।


22. मस्तिष्क विकार : अमरूद के पत्तों का फांट मस्तिष्क विकार, वृक्क प्रवाह और शारीरिक एवं मानसिक विकारों में प्रयोग किया जाता है।


23. आक्षेपरोग : अमरूद के पत्तों के रस या टिंचर को बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर मालिश करने से उनका आक्षेप का रोग दूर हो जाता है।


24. हृदय : अमरूद के फलों के बीज निकालकर बारीक-बारीक काटकर शक्कर के साथ धीमी आंच पर बनाई हुई चटनी हृदय के लिए अत्यंत हितकारी होती है तथा कब्ज को भी दूर करती है।


25. हृदय की दुर्बलता :


अमरूद को कुचलकर उसका आधा कप रस निकाल लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर पी जाए।

अमरूद में विटामिन-सी होता है। यह हृदय में नई शक्ति देकर शरीर में स्फूर्ति पैदा करता है। इसे दमा व खांसी वाले न खायें।

26. खांसी और कफ विकार :


यदि सूखी खांसी हो और कफ न निकलता हो तो, सुबह ही सुबह ताजे एक अमरूद को तोड़कर, चाकू की सहायता के बिना चबा-चबाकर खाने से खांसी 2-3 दिन में ही दम तोड़ देती है।

अमरूद का रस भवक यन्त्र द्वारा निकालकर उसमें शहद मिलाकर पीने से भी सूखी खांसी में लाभ होता है।

यदि बलगम खूब पड़ता हो और खांसी अधिक हो, दस्त साफ न हो हल्का बुखार भी हो तो अच्छे ताजे मीठे अमरूदों को अपनी इच्छानुसार खायें।

यदि जुकाम की साधारण खांसी हो तो अधपके अमरूद को आग में भूनकर उसमें नमक लगाकर खाने से लाभ होता है।

27. वमन (उल्टी) : अमरूद के पत्तों के 10 मिलीलीटर काढ़े को पिलाने से वमन या उल्टी बंद हो जाती है।


28. तृष्ण (अधिक प्यास लगना) : अमरूद के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर पानी में डाल दें। कुछ देर बाद इस पानी को पीने से मधुमेह (शूगर) या बहुमूत्र रोग के कारण तृष्ण में उत्तम लाभ होता है।


29. अतिसार (दस्त) :


बच्चे का पुराना अतिसार मिटाने के लिए इसकी 15 ग्राम जड़ को 150 मिलीलीटर पानी में ओटाकर, जब आधा पानी शेष रह जाये तो 6-6 ग्राम तक दिन में 2-3 बार पिलाना चाहिए।

कच्चे अमरूद के फल उबालकर खिलाने से भी अतिसार मिटता है।

अमरूद की छाल व इसके कोमल पत्तों का 20 मिलीलीटर क्वाथ पिलाने से हैजे की प्रारिम्भक अवस्था में लाभ होता है।

30. प्रवाहिका : अमरूद का मुरब्बा प्रवाहिका एवं अतिसार में लाभदायक है।


31. गुदाभ्रंश (गुदा से कांच का निकलना) :


बच्चों के गुदभ्रंश रोग पर इसकी जड़ की छाल का काढ़ा गाढ़ा-गाढ़ा लेप करने से लाभ होता है।

तीव्र अतिसार में गुदाभ्रंश होने पर अमरूद के पत्तों की पोटली बनाकर बांधने से सूजन कम हो जाती है और गुदा अंदर बैठ जाता है।

आंतरिक प्रयोग के लिए अमरूद और नागकेशर दोनों को महीन पीसकर उड़द के समान गोलियां बनाकर देनी चाहिए।

अमरूद के पेड़ की छाल, जड़ और पत्ते, बराबर-बराबर 250 ग्राम लेकर पीसकर रख लें तथा 1 किलो पानी में उबालें, जब आधा पानी शेष रह जायें, तब इस काढ़े से गुदा को बार-बार धोना चाहिए और उसे अंदर धकेलें। इससे गुदा अंदर चली जायेगी।

अमरूद के पेड़ की छाल 50 ग्राम, अमरूद की जड़ 50 ग्राम और अमरूद के पत्ते 50 ग्राम को मिलाकर कूटकर 400 मिलीलीटर  पानी में मिलाकर उबाल लें। आधा पानी शेष रहने पर छानकर गुदा को धोऐं। इससे गुदाभ्रंश (कांच निकलना) ठीक होता है।

अमरूद के पत्तों को पीसकर इसके लुगदी (पेस्ट) गुदा को अंदर कर मलद्वार पर बांधने से गुदा बाहर नहीं निकलता है।

32. घुटनों के दर्द में : अमरूद के कोमल पत्तों को पीसकर गठिया के वेदना युक्त स्थानों पर लेप करने से लाभ होता है।


33. विषम ज्वर या मलेरिया बुखार : अमरूद को खाने से इकतारा तथा चातुर्थिक ज्वर में लाभ होता है।


34. बुखार : अमरूद के कोमल पत्तों को पीस-छानकर पिलाने से ज्वर के उपद्रव्य दूर होते है।


35. विदाह (पित्त की जलन) में : अमरूद के बीज निकालकर पीसकर गुलाब जल और मिसरी मिला कर पीने से अत्यंत बढ़े हुए पित्त और विदाह की शांति होती है।


36. भांग या धतूरे का नशा : अमरूद के पत्तों के स्वरस को भरपेट पिलाने से या अमरूद खाने से भांग, धतूरा आदि का नशा दूर हो जाता है।


37. पेट की गैस बनना : अदरक का रस एक चम्मच, नींबू का रस का आधा चम्मच और शहद को डालकर खाने से पेट की गैस में धीरे-धीरे लाभ होता हैं।


38. मुंह के छाले :


रोजाना भोजन करने के बाद अमरूद का सेवन करने से छाले में आराम मिलता है।

अमरूद के पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

39. दस्त :


अमरूद के पेड़ की कोमल नई पत्तियों को पानी में उबालकर, छानकर थोड़ी-थोड़ी-सी मात्रा में पकाकर पीने से अतिसार का आना रुक जाता है।

अमरूद में मिश्री डालकर या अमरूद और मिश्री का सेवन करने से दस्त का आना बंद हो जाता हैं।

अमरूद के पेड़ की 10 पत्तियां, नींबू की 2 पत्तियां, तुलसी की 3 पत्तियों को लेकर एक कप पानी में डालकर काढ़ा बनाकर पीने से राहत मिलती है।

40. मुंह का रोग : मुंह के रोग में जौ, अमरूद के पत्ते एवं बबूल के पत्ते। इस सबको जलाकर इसके धुंए को मुंह में भरने से गला ठीक होता है तथा मुंह के दाने नष्ट होते हैं।


41. अग्निमान्द्यता (अपच) के लिए : अमरूद के पेड़ की 2 पत्तियों को चबाकर पानी के साथ सेवन करने से आराम होता हैं।


42. प्यास अधिक लगना : अमरूद, लीची, शहतूत व खीरा खाने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।


43. मधुमेह के रोग : पके अमरूद को आग में डालकर उसे निकाल लें, और उसका भरता बना लें, उसमें अवश्कतानुसार नमक, कालीमिर्च, जीरा, मिलाकर सेवन करें। इससे मधुमेह रोग से लाभ होता है।


44. योनि की जलन और खुजली : अमरूद के पेड़ की जड़ को पीसकर 25 ग्राम की मात्रा में लेकर 300 मिलीलीटर  पानी में डालकर पका लें, फिर इसी पानी को साफ कपड़े की मदद से योनि को साफ करने से योनि में होने वाली खुजली समाप्त हो जाती है।


45. गठिया रोग : गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 5-6 नई पत्तियों को पीसकर उसमें जरा-सा काला नमक डालकर प्रतिदिन सेवन करने से रोगी को लाभ मिलता है।


46. फोड़े-फुंसियों के लिए : अमरूद की थोड़ी सी पत्तियों को लेकर पानी में उबालकर पीस लें। इस लेप को फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।


47. विसर्प-फुंसियों का दल बनना : 4 हफ्तों तक रोजाना दोपहर में 250 ग्राम अमरूद खाने से पेट साफ होता है, पेट की गर्मी दूर होती है, खून साफ होता है जिससे फुंसिया और खुजली भी दूर हो जाती है

आश्वासनों की पोखरी तलैया से / -सेवाराम त्रिपाठी

 आश्वासनों की पोखरी तलैया से / सेवाराम त्रिपाठी

  कुछ लोग देश का भला करने में जुटे हैं। चलिए अच्छा ही हुआ। अभी तक देश का बुरा हो रहा था। लगता है ऐसा लगता है कि स्वाधीनता आंदोलन जो अंग्रेजों एवं गुलामी के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई थी, शायद उसे नहीं होना चाहिए था। स्वतंत्रता कोई ठीक-ठाक चीज़ नहीं है। अब तो जो हो गया, सो हो गया। कुछ हैं जो लेफ्ट से इतने भुनभूनाएं हुए या जो नाराज़ हैं कि कहीं वे बेचारे अपने ऊपर ही न मुक्के मारने लगें। वे किसी भी तरह बीच का रास्ता तलाश रहे हैं जबकि पंजाबी कवि अवतार सिंह पाश ने कहा था कि बीच का रास्ताय नहीं होता और कुछ लोगों को राइट में बड़ा आनंद मिलता है। जब से देश में राइट सजा है, वे बार-बार उछल रहे हैं। कनखियों से मुस्कुरा रहे हैं। कभी उनकी भक्ति ज़ोर मारती है और कभी उनके मन में लड्डू फूटने लगते हैं। पूरा देश मन में हिलगा हुआ है क्यों कि मन की गति बहुत तेज़ रफ़्तार में यात्रा करती है। मन से वेगवान कोई है ही नहीं इसलिए जहाँ देखो वहाँ रेडियों में, टीवी में, समाचार माध्यागमों में, इंटरनेट माध्या।मों में बार-बार मन की बात दहाड़तें हुए मिल जाती है।

कभी वे बहुसंख्यकता के बाड़े में पलंग बिछाकर और ऊपर से चादर तानकर देह में लपेट लेते हैं। लपेटा लपेटी इस दौर में बड़े पैमाने पर है। मन तो उनका बच्चा है जी। कहते हैं वह सच्चाे भी होता है। लोगों ने तो ऐसा मान ही लिया है। वह बहुसंख्यकता में ही रमता है। इसलिए वे संविधान से बाहर निकल कर बड़े आराम से टहल रहे हैं । वे कहते हैं बहुत हो गया इस संविधान में अपना गुजारा नहीं। इससे ससुरा ज़मीर बचाना मुश्किल हो जाता है और ऊपर से कुढ़न बढ़ जाती है ।हमारे एक परिचित हैं जिनका नाम हितुआ है। वे सबकी ख़बर रखता है। सबसे हितुआइश बनाए रखते हैं। अचानक वे बोले- वे कह रहे थे कि  बहुत दिन हो गए बीच में रहते हुए, कभी-कभी उसमें लेफ्ट भी घुस आता था। राइट को कभी कोई स्थान था ही नहीं। बड़े अरसे बाद बड़ी मुश्किल से राइट का समय और मामला उभरकर सामने आया है। राइट आया तो उसने आव देखा न ताव अच्छे दिनों की घोषणा और बरसात कर दी। उनकी नज़र में अभी तक बुरे से बुरे दिन चल रहे थे। लेकिन ज़ल्दी ही अच्छे दिन फिचूकर छोड़ने लगे। और हम सबसे ख़राब दिनों में पिट-पिटाकर नत्थी हो गए। जय हो महाकाल। अब और क्या-क्या देखना बदा है? इस समय राइट आश्वासन देने में सक्षम है इसलिए वह उसी में भिड़ा है। सयाने बताते हैं कि आश्वासन देना भी एक भयंकर बीमारी है। वह पोखरी तलैया से सर्वोच्च स्थान में बैठ गया है, बल्कि वहीं उसकी पसरा-पसरी चल रही है। कभी वह साष्टांीग हो जाता  है। कभी कालीन में उचकने लगता है। इसलिए एक से बढ़कर एक आश्वासन झर रहे हैं। जैसा पहले देवता समूचे काम-धाम छोड़कर स्वर्ग से फूल बरसाया करते थे, लगभग उसी तरह। अब तो मालाएं गर्दनों में टँग रही हैं और गर्व की गनगनाहट जगमगाने लगी है। देश में कई चीज़ें एकसाथ घट रही हैं। न घटेंगी तो घटा दी जाएंगी। यह तो घटने-घटाने की क्रिया है। कभी स्वच्छता अभियान का हाँका पड़ता है और उसमें गांधी जी का चश्माट फिट कर दिया जाता है। कभ- कभी हम स्मार्ट सिटी के अंदर गिर जाते हैं। कभी बुलेटप्रूफ ट्रेनों में फँस जाते हैं। कहीं बचपन में एक गानासुना था। ‘’धर दे पैसा चल कलकत्ता’। कलकत्ताभ बेचारा अब कोलकत्ता  हो गया है। अब अधिकांश शहरों के नाम बदले जा रहे हैं और राइट शक्तिाँ उसे अपनी शक्लोंस में ढालने लगी हैं। अभी तक जो देश में हुआ वह परम रद्दी था यानी बेहद गंदा। अब उसे ठीक करने की तेज़ी से मुहिम चल रही है।

विकास की गंगा बह रही है। विकास विकास से पूरा देश पटा है। विकास हमारे जीवन में पीछे पड़ा है । वह कभी नोटबंदी में दहाड़ता है कभी जी०एस०टी० में औंधा हो जाता है। कालाधन को विकास मजा चखाना चाहता है, तो सभ्यता और संस्कृति का ऐसा झापड़ पड़ गया, कि विकास कई रूपों में भर- भराकर गिर रहा है। कभी फ्लाई ओवर की शक्ल में, कभी पुल के ढह जाने के रूप में। कभी सड़कों के गढ्ढ़ा-गढ्ढ़ी में। कभी परम प्रतापी भ्रष्टाचार के साथ। सबको पता है कि भ्रष्टाचार की अनंत लीलाएं होती हैं। विकास जब तक सब कुछ को विनाश में न बदल दे, तब तक वह काहे का विकास। इसलिए वह सब धकापेल स्टाइल में विनाश के मूड में है। युवा पीढ़ी स्वाहा, रोज़गार गारंटी योजना स्वाहा, नागरिक स्वाहा और अन्नदाता किसान स्वाहा। जब से कोरोना के चरण भारत में पड़े, लोग पटापट हो रहे हैं। हाँ, आत्मनिर्भरता से देश लद गया। राष्ट्र के नाम संदेश रोज़-रोज़ झर रहे हैं। लोगों के मरने जीने से देश की आवोहवा में कोई फ़र्क नहीं पड़ता। मरना जीना तो परम प्रतापी प्रभु की लीला है। मंदिर बनने से सब कुछ ठीक-ठाक हो जाएगा। युवाओं को रोज़गार मिलेगा, किसानों को उनके जिंस की सही-सही की़मत मिलेगी। बच्चों की ढंग से पढ़ाई-लिखाई होगी। सब कुछ ठीक हो कर ही रहेगा। बलात्कार नहीं होंगे। हमारी ज़िन्दगी खुशहाल हो जाएगी और अर्थ व्यवस्था को चार चांद लग जाएंगे। मॉबलिंचिंग की फैक्ट्री खुल जाएगी। यानी पूरी तरह से राम राज्य आ जाएगा। आश्वासनों में बड़ा दम होता है। क्योंकि आश्वासन पोखरी तलैया स्टाइल में हमारे देश में झर रहे हैं।

रविवार, 27 दिसंबर 2020

एक नाम रामायण के रुप अनेक

 रामायण के विविध रूप 

1. अध्यात्म रामायण

2. वाल्मीकि की 'रामायण' (संस्कृत)

3. आनंद रामायण

4. ' अद्भुत रामायण'

5. रंगनाथ रामायण (तेलुगु)

6. कवयित्री मोल्डा रचित मोल्डा रामायण (तेलुगु)

7. रूइपादकातेणपदी रामायण (उड़िया)

8. रामकेर (कंबोडिया)

9. तुलसीदास की 'रामचरित मानस' (अव‍धी)

10. कम्बन की 'इरामावतारम' (तमिल)

11. कुमार दास की 'जानकी हरण' (संस्कृत)

12. मलेराज कथाव (सिंहली)

13. किंरस-पुंस-पा की 'काव्यदर्श' (तिब्बती)

14. रामायण काकावीन (इंडोनेशियाई कावी)

15. हिकायत सेरीराम (मलेशियाई भाषा)

16. रामवत्थु (बर्मा)

17. रामकेर्ति-रिआमकेर (कंपूचिया खमेर)

18. तैरानो यसुयोरी की 'होबुत्सुशू' (जापानी)

19. फ्रलक-फ्रलाम-रामजातक (लाओस)

20. भानुभक्त कृत रामायण (नेपाल)

21. अद्भुत रामायण

22. रामकियेन (थाईलैंड)

23. खोतानी रामायण (तुर्किस्तान)

24. जीवक जातक (मंगोलियाई भाषा)

25. मसीही रामायण (फारसी)

26. शेख साद (या सादी???) मसीह की 'दास्ताने राम व सीता'।

27. महालादिया लाबन (मारनव भाषा, फिलीपींस)

28. दशरथ कथानम (चीन)

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शनिवार, 26 दिसंबर 2020

व्यंग्य शाला के कहकहे

 टीका टिप्पणी


 तीनों छोटे-छोटे व्यंग्य बेशक हैं, लेकिन कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह गए हैं। आपका चुनाव सचमुच बहुत बढिय़ा है। 

अच्छे लोगों को भगवान जल्दी बुला लेता है,... फिर भी लोग बड़ी उम्र की दुआ मांगते हैं।

जो लोग रिश्ता पक्का होने पर नहीं तोड़ पा रहे..।सगाई होने पर कैसे तोड़ेगें। हमारे देश की विडंबना ही है , लोग क्या कहेंगे... झूठी शान की खातिर औलाद की बलि दे देते हैं।

तीसरी रचना तो है ही जोरदार, रेशमी फंदे में झूलते मूर्ख लोग।लालच ने हमेंशा राज किया है।

एक अंतिम रचना भी सच्चाई है बहुत बड़ी। कभी-कभी सच पर झूठ इस कदर हावी हो जाता है कि स्वाभिमान को खो देता है, फिर झूठ ही सच मान लिया जाता है।

बहुत बधाई जैनेन्द्र जी। आशा है और पढने को सीखने को मिलता रहेगा।


किसान बनाम राजा


बात बहुत पुरानी है जितनी पुरानी है अब उतनी नई हो चुकी है.

एक राजा हुआ, राजा था तो शिकार पर अमले के साथ जाना ठहरा, वहां रास्ता भूलना ठहरा, वहां एक किसान की झोपड़ी होनी हुई.

राजा पहुंचा झोपड़ी तक आवाज़ दी, किसान निकला, पहचान लिया राजा हुज़ूर हैं. आदर सत्कार से बैठाया, हाथ पाँव धुलाये, बिस्तर लगाया, खाने का पुछा.

राजा ठहरा राजा, गरीब के घर नाक भौन्ह सिकोड़ी, मोटा अनाज कैसे गले उतरेगा, बोला दूध पिला दो खाने की इच्छा नहीं है. किसान ने बेटी को बुलाया गाय दोह कर दूध लाने को कहा. लड़की पतीला ले गई दूध लाकर राजा को पेश किया. शुद्ध ताज़ा गाढ़ा गाय का दूध पीकर राजा तृप्त हुआ. ऐसा दूध राजा ने कभी नहीं पिया था. सोया तो सोचने लगा मेरा देश, मेरी ज़मीन, मेरी प्रजा ये अच्छा दूध पिएं, जाते ही दूध पर टैक्स लगाऊंगा, सोच कर राजा सो गया.सुबह उठा तो किसान ने सेवा की पुछा क्या पेश करूँ. राजा बोला दूध. किसान की बेटी दूध दोहने गई, गाय ने दूध दिया ही नहीं.

बेटी ने पिता को बुलाया, पिता जी राजा की नियत में खोट है, गाय दूध नहीं दे रही. उधर राजा ने छुप कर बातें सुन लीं थी. राजा बहुत शर्मिंदा हुआ किसान की बेटी से बोला मैं रात को दूध पर टैक्स लगाने की सोच रहा था पर तुम्हारी बात सुनकर वायदा करता हूं दूध पर कभी टैक्स नहीं लगाया जायेगा. जाओ दूध निकाल लाओ.

किसान की बेटी गयी गाय ने दूध दे दिया, राजा ने दूध पिया, तब तक राजा का अमला भी आ गया. राजा अपनी राजधानी चला गया, अपने वायदे के अनुसार कभी दूध पर टैक्स नहीं लगाया.

ताजी कहानी में रहा वोट पाने के चक्कर में किसान की झोपड़ी में गया, किसान ने उसे खाना खिलाया, खाना खाकर राजा अफर गया. किसान को तो अनाज, दालें, सब्ज़ी, दूध तो खरीदने ही नहीं पड़ते. इसकी ज़मीन पर मेरा और दोस्तों हक़ है. राजधानी में लौट कर उसने किसान कानून बनाया और लागू कर दिया. किसान को पता चला तो उसने विरोध किया.


 सुप्रभात

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आज की सुबह

 बेहद सुकून लेकर आई है

तुम्हारे सुप्रभात के

उत्तर के साथ

उम्मीदों की कोपलें 

 अभी भी हैं वैसी ही नरम

प्रेम की नमी 

सूखने से बच गई 

कल रात हुये उल्कापात से

हमारे भीतर बहते हुए 

रिश्तों के झरने 

बेआवाज बहकर भी

मचाते रहते हैं

एक शोर

जिसे महसूस करती है धरती 

अपने सीने में 

तुमने बीती और बीती से भी बीती रात को

रोपा था जो 

बांध के रिसते पानी को 

अपने हाथों से भरकर 

जो मुठ्ठी मुट्ठी रेत से 

और चाँद के गाल पर

लगाया था 

जो काला टीका

नदी में फेंके थे जो कंकड़

और फटते हुए आसमान की 

नीली चादर में

डाली थी जो सीवन

चटक रंगों को घोलकर

बनाया था जो 

अलग रंग 

सब कुछ दिख रहा 

सुबह के इस उजाले में 

साफ साफ 

ये भी 

कि दिनों की शुरुआतें 

इसी तरह बनती हैं

खुशगवार


व्यंग्य. आज अमर उजाला में👇


आंदोलनः मेरा आत्मज्ञान



’’सरकार ने वादा किया था पांचवें दिन का, किसी से सुन लिया होगा कि दुनिया चार दिनों की है।‘‘ कदाचित इसी फलसफे की वजह से, बीते दिनों आंदोलनों का आलम पुरजोर रहा। कोविड की तरह इसके भी आगे के आसार अच्छे नज़र नहीं आ रहे हैं। आवाम बेज़ार है, उसके पास इसके प्रतिकार की कोई राह नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने कभी निर्णय दिया था कि विरोध प्रदर्शन के तरीके प्रजातांत्रिक और अहिंसक हों। उनसे जनता को कष्ट न पहुंचे। लेकिन उस फैसले की तामील कौन कराये? सवाल बिल्ली के गले में घंटी बांधने जैसा हो गया है।

बहरहाल, इस खाकसार ने इस मुद्धे पर भारी चिंतन-मनन किया है और जो आत्मज्ञान इस नाचीज़ को प्राप्त हुआ है, उसका सारभूत यह है कि मुझे विरोध प्रदर्शनों, हड़तालों, धरनों, बंद आदि से हो रही हानि के प्रति आंख मूंद लेनी चाहिए और पाठकों  को इसके लाभ बता देने चाहिए। फ़िलवक्त, मैंने कुछ लाभ खोज लिए हैं और उन्हें निम्नवत् पेश कर रहा हूं, गर आप चिंतन करेंगे तो कुछ मोती आपको भी हाथ लग सकते हैंः-

- जनता को यह जानकारी हो जाती है कि देश में सरकार से इतर भी ताकतवर शख्सियतों का कोई वजूद है।

-प्रदर्शनों के दौरान लगाये जा रहे नारों से यह विदित होता है कि संबोधित सरकार कतई नाकारा है और वह उनकी आशाओं के अनुरूप सिद्ध नहीं हुई। मुझे आंदोलनों के इतिहास के अध्ययन से यह जानकारी मिली है कि पूर्ववर्ती सरकारों के विरूद्व भी ऐसे ही नारे लगते रहे और अगामी के लिए भी लगते रहेंगे। 

-भय, भूख, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और मंहगाई से त्रस्त आमजन को उथल-पुथल के समाचार प्राप्त होते हैं और उसका मन बहल जाता है।

-दंगाग्रस्त इलाकों में कफर््यू लग जाने से छोटा से छोटा कस्बा या गांव भी मीडिया के प्रचार प्रसार के जरिए नाम कमा जाता है। लोगों को सुकून की प्रतीति होती है कि घर तो फुंका पर चर्चा तो हुआ। - हाशिए पर हो गये पुराने नेताओं को छा जाने का अवसर मिलता है। उन्हें वक्तव्य झाड़ने तथा प्रेस-कांफ्रेंस करने के मौके मिलते हैं। जिनकी प्रतिष्ठाएं गुड़गोबर हो चुकी हैं गुड़ के साथ गुलगुले खाने का अवसर भी मिल जाता है। आमजन में से कुछ लोगों को युवा हिरदे सम्राट के रूप में उभरने का मौका मिलता है।

-पत्रकारों और छायाकारों को बेवज़ह भटकना नहीं पड़ता। एक स्थान से ही लीड-न्यूज उपलब्ध हो जाती है।

-भाषणबाजों को भाषण झाड़ने तथा पुलिसियों को लाठी भांजने के असीमित अवसर मिलते हैं। गलाफाड़ नारेबाजी से कंठादि में जमा बलगम तो बाहर आता ही है, संग में फेफड़ों की कसरत भी मुफ्त में हो जाती है। धरनाधारियों को खुली हवा की ऑक्सीजन का लाभ प्राप्त होता है। अनशन और नृत्यादि से बदन में बर्षों से जमी फालतू चर्बी छंट जाती है। प्रिंट तथा इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर दिखाई देने का अवसर मिलता है।

-लाउड स्पीकर वालों, पुतला निर्माताओं, टेंट वालों, पेंटरों तथा जाम या धरना स्थल के निकटवर्ती फुटकर विक्रेताओं की चंादी हो जाती है। यदा कदा बैंड-बाजे वालों की बन आती है।

अब, बताइये कि क्या आप मेरे आत्मज्ञान से सहमत हैं? 


-प्रभाशंकर उपाध्याय

193,महाराणा प्रताप कॉलोनी,

सवाईमाधोपुर (राज.)

पिन-322001


मोदी जी के कालीन पर बैठकर कूड़ा बीने जाने को लेकर एक व्यंग्य


दैनिक भास्कर पत्र में प्रकाशित व्यंग्य "कालीन का राज"


--- कालीन का जलवा हमेशा से कायम रहा है। कालीन पर चलना, उठना, बैठना हमेशा से ही एक स्टेटेट्स सिम्बल रहा है। कालीन पर चलने की हमेशा से ही लोगों की हसरत रही है। पर सबका नसीब एक जैसा कहाँ होता है। जिसके लिए रेड कार्पेट बिछी होती है, वह सबके आकर्षण का केंद्र होता है। यह कालीन ही है जो व्यक्ति को अतिविशिष्ट बनाती है अन्यथा बग़ैर कालीन के क्या राजा और क्या प्रजा सब बराबर। भई, राजा के कोई चार मुँह और चार हाथ तो होते नहीं है जो उसकी अलग से पहचान कराए। वह तो कालीन पर शाही अंदाज़ में चलने से ही पता चलेगा कि कौन राजा है?? कालीन पर चलने का अपना तरीका होता है, एक शऊर होता है। यह नहीं कि जब चाहा, जैसे चाहा, कालीन पर चल लिए। उसके लिए आपके पांव कालीन पर चलने लायक होने चाहिए। दुष्यंत कुमार इस चीज़ को समझते थे तभी तो उन्होंने खुलेआम घोषणा की कि "आपके कालीन देखेंगे किसी दिन, इस समय तो पाँव कीचड़ में सने हैं।" कोई भी भला आदमी कीचड़ में सने पावों को लेकर किसी की साफ-सुथरी कालीन को देखने कैसे जा सकता है ?? 


 हालांकि यह सामन्तवादी प्रवृत्ति थी कि कालीन पर एलीट क्लास ही चल सकता है। उस समय तक आम आदमी कालीन को सिर्फ़ बिछते हुए देखभर सकता था। कालीन पर चलने की उस बेचारे की हिम्मत कहाँ?  ज़्यादा से ज़्यादा वह कालीन पर बैठ सकता है, बशर्ते उसका जिस्म कालीन की रूह को गंदा न करे। पर समय बदला और बहुत कुछ बदल गया। लोकतंत्र की हवा लगी तो बहुतेरे, कालीन को चटाई की तरह इस्तेमाल करके सामन्ती ठसक को जूते की नोक पर रखने का हौसला रखने लगे। कालीन का कालीनपना झाड़ दिया गया।

लोकतंत्र में वोट की राजनीति ने विशिष्टता के मायने बदल दिए। कल तक दलित-कुचलित जनता अब जनता से 'जनता-जनार्दन' हो गयी .... कहने का मतलब अब कालीन पर सिर्फ़ विशिष्ट वर्ग का ही एकाधिकार न रहा; अब विशेष अवसरों पर जनसाधारण वर्ग को भी कालीन पर बैठने की अनुमति दी जाने लगी। यह समय की माँग है। यह एक तरह से जनता रूपी पितरों के श्राद्धपक्ष के विशिष्ट अवसर हैं। श्रद्धा के अभाव में क्या हम श्राद्धपक्ष मनाना छोड़ देते हैं नहीं न !!!! वह तो इसलिए भी मनाते हैं ताकि कोई पितृ-आत्मा बेवज़ह प्रेस्टीज-इश्यू न बना ले।

 लेकिन इन सबके बीच कालीन से उसका कालीनत्व छीन लिया गया।

कालीन को कालीन न रहने दिया गया। 

अब दुष्यंत जी की बात बीते दिनों की हो गई!! अब आत्मविश्वास सर चढ़कर बोल रहा है। अब अंदाज-ए-बयां कुछ इस जबर अंदाज में होगा..... "आपके कालीन देखेंगे उसी दिन, जिस दिन पाँव कीचड़-युक्त होंगे"

  यह राही मासूम रज़ा के 'नीम का पेड़' के बुधई से सुखीराम तक की यात्रा का बदलाव है। कहना न होगा कि 'सबका साथ सबका विकास' की अवधारणा ने समाजवाद को किताबों से निकालकर कालीन पर उतार दिया। कालीन बुर्जुआ वर्ग का प्रतीक है, सो अब उससे चुन-चुनकर बदला लिया जा रहा है।

अब कालीन को उसकी औकात दिखाने के लिए कालीन की छाती पर कचरा रखा जाता है और न केवल रखा जाता है बल्कि अब उसे साधारण जनों के साथ माननीयों द्वारा बीना भी जाता है। किसी का दुर्भाग्य हो तो हो, पर कचरे का तो सौभाग्य ही है। और फ़िर जिस कचरे को अतिविशिष्ट व्यक्ति के करकमलों का स्पर्श मिल जाए, उसका क्या कहना!!!!  रेड कार्पेट पर बैठकर कूड़े-कचरे को बीनना अपने आप में एक अद्भुत कला है !!! इस कलाबाजी पर कौन न मर मिटे!!!

फिर भी यह सन्तोषजनक बात है कि कालीन अब जनसाधारण के लिए सुलभ हो गयी। भले ही विशिष्ट वर्ग कालीन से अपने पुराने आत्मीय संबंधों को लेकर वर्तमान परिस्थितियों पर अंदर ही अंदर कुढ़ रहा हो।   भाई यह सामान्य स्वीकृत सिद्धांत है कि एक का उठान दूसरे के गिरान की वजह बनता है। जैसे अंग्रेजों का जब उठान हुआ हम लोग गर्त में गिरे। जब भाजपा ऊपर उठी तब कांग्रेस गड्ढे में गिरी। भई, यह शाश्वत है कि, जब एक की हार होगी तभी तो दूसरे की जीत होगी। अतः इसे खेल भावना के तौर पर लेना चाहिए। अतः हम सभी को जनसाधारण के साथ-साथ कूड़े-कचरे के सम्मान में हुई अतिशय वृद्धि को सद्भाव के रूप में लेना चाहिए। 'जैसे उसके दिन बहुरे ऐसे सभी के दिन बहुरे' की लोकमंगल भावना के साथ अपने दिन बहुरने की प्रार्थना करनी चाहिए ताकि हम भी किसी दिन कालीन पर बैठकर कूड़ा-कचरा बीन सके।

                               - संजीव शुक्ल


: बुड्ढी भटीयारिन व काग मंजरी की


एक था गाँव गाँव के बाहर थी एक धर्मशाला याने कि सराय रोहिल्ला जो सराय काले खां के बग़ल में थीं जहां आते जाते बटोही रात को ठहरते ओर सुबह उठ कर चले जाते धंधा चौखा चल रहा था

ऐसे ही एक दिन भटका हुआ यात्री आयाभटियरिन ने उसे ठहराया खा पीकर ज़तरू सोने से पहले हुक्का पीने भटियरिन के पास

आया हुक्के का कश खिंचा ओर बोला

हे शहर की मल्लिका कोई ताज़ा क़िस्सा बयान कर ताकि रात कटे कुछ थकान मिटे

भटियारिन खूब खेली खाई थी बोली

हे राजा आज में तुम्हें काग मंजरी की कथा सुनाती हूँ

समय पर हुंकारा भरना तुमने हुंकारा बंद किया तो क़िस्सा कथा कहानी सब बंद

सो प्रेम से सुन

फिरशुरू हुईं कथा काग मंजरी

की जो बड़ों बच्चों सब को बहुत पसंद आइ

ज़ारी...

फेसबुक के कारण कुछ बहुत ही लाजवाब हजरात को जानने, पढ़ने का मौका मिला है. इस सूची में जैनेन्द्र कुमार झाम्ब का नाम सबसे ऊपर है.

आदरणीय बुलाकी शर्मा ने सही लिखा है कि शब्दों के प्रयोग में झाम्ब जी मितव्ययी हैं. उनकी रचनाएँ मुझ जैसे साधारण पाठक तक तुरंत नहीं पहुँचती, पुनः पुनः पढ़ना पड़ता है. लेकिन जब इनकी रचना के मर्म तक पहुँचे, तब अजीब सी तृप्ति मिलती है. 

इनकी  टिप्पणियाँ अद्धभुत होती हैं. कई बार तो इनकी टिप्प्णी सिर्फ एक शब्द की होती है.  शिष्टतापूर्ण अशिष्टता से लैस होती है  इनकी टिप्पणियाँ. 

बहरहाल तीन बेहतरीन रचना  उपलब्ध करवाने के लिए आदरणीय बुलाकी शर्मा जी का आभार. 💐💐


सादर, 🙏🙏

अभिजित दूबे

यशपाल का यश / भोलाशंकर तिवारी

सुप्रसिद्ध लेखक यशपाल की आज अवसान तिथि है । / भोलाशंकर तिवारी 


वे झूठा सच,मेरी तेरी उसकी बात, दादा कामरेड जैसी अपनी कृतियों के लिए जाने जाते हैं । 


3 दिसम्बर 1903 को जन्में यशपाल हिंदी में प्रेमचंद के बाद सबसे महत्वपूर्ण कथाकार हैं । खासकर मध्यवर्गीय जीवन की विसंगतियों और कमजोरियों के चित्रण में वे सिद्धहस्त थे । 


एक साधारण परिवार में जन्में यशपाल जब गुरुकुल कांगड़ी में पढ़ रहे थे तभी उनके मन में अंग्रेजों के ख़िलाफ़ गुस्सा और विद्रोह की भावनाएं पनपने लगी थीं । इस भावना को और धार मिली 1921 में नेशनल कॉलेज लाहौर में पढ़ने के दौरान जब वे भगतसिंह और सुखदेव के संपर्क में आए । इनसे परिचय के बाद उनका क्रांतिकारी विचारधारा की ओर रुझान बढ़ने लगा । बाद में वे इस आंदोलन में सक्रिय हुए और दिल्ली तथा लाहौर षडयंत्र केस के मुख्य आरोपितों में शामिल रहे । बाद में उनकी गिरफ्तारी हुई और चौदह वर्ष की क़ैद सुनाई गई लेकिन 1938 में सरकार ने राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का फैसला किया और यशपाल की रिहाई हुई । 


उन्होंने विप्लव मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जिसने अल्प समय में लोकप्रियता हासिल की लेकिन 1941 में उनके जेल जाने के कारण यह बन्द हो गया । इस उत्कृष्ट लेखक की प्रमुख कृतियों में दिव्या, ज्ञानदान,फूलो का कुर्ता, पिंजरे की उड़ान आदि हैं । साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मविभूषण से सम्मानित यशपाल का निधन 26 दिसम्बर 1976 को हुआ ।

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

दिल्ली के सबसे खास 10 क्रिश्चन कौन / विवेक शुक्ला

दिल्ली के सबसे खास 10 क्रिश्चन कौन


राजधानी की दस सबसे खास क्रिश्चन शखिसयतों की आज बात करेंगे। बेशक, इस सूची में पहला नाम प्रखर मानवाधिकारवादी जॉन दयाल का आएगा। जहां पर गरीब-गुरुबा के हकों के लिए संघर्ष होगा वहां पर जॉन दयाल जरूर होंगे। वे दलित ईसाइयों के हकों के लिए दशकों से लड़ रहे हैं। सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्र रहे दयाल साहब कहते हैं कि दलित हिन्दू को अपशब्द कहने पर जेल हो सकती है तो दलित ईसाई के साथ ज्यादती करने वालों को क्यों रियायत मिले। आमतौर पर हिन्दी बोलने वाले दयाल साहब की अंग्रेजी के तमाम लोग कद्रदान हैं।


हरीश साल्वे ( वकालत)


 हरीश साल्वे को इस समय देश का सर्वश्रेष्ठ और सबसे महंगा वकील माना जाता है।  गुजरे करीब चालीस सालों से दिल्ली में रह रहे साल्वे भारत सरकार से लेकर रिलायंस और टाटा ग्रुप के लिए पैरवी कर चुके हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री एन.के.पी.साल्वे के पुत्र हरीश का भगवान दास रोड के व्हाइट हाउस में दफ्तर है। उनकी खासियत ये है कि वे हर केस को जीतने के लिए इतनी मेहनत करते हैं मानो कि वे केस हार गए तो दुनिया इधर से उधर हो जाएगी।उन्हेंआप कभी-खभी खान मार्केट में भी देख सकते हैं। हरीश साल्वे ने सोली सोराबजी की देखरेख में 1976 में लॉ की प्रेक्टिस शुरू की थी।


ब्रायन सिलास (संगीत)


 ब्रायन सिलास की जब पियानों के की-बोर्ड पर उंगलियां थिरकती हैं, तो सुनने वाले वाह कह उठते हैं। एक जमाने में अप्पू घर में नौकरी करने वाले ब्रायन ने कोविड से पहले साउथ दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जब पियानों पर सुपरहिट गीतों जैसे कुछ न कहो, कुछ भी न कहो… लग जा गले से… याद न जाए…वगैरह की धुन बजाई तो दर्शक झूमने लगे।ब्रायन की उंगलियां लता मंगेश्कर के गीत- मन डोले मेरा तन डोले…गीत के साथ थमीं। उन्होंने फिल्मी गीतों को पियानो पर इस तरह से साधा है कि लगता ही नहीं कि पियानो एक वेस्टर्न वाद्ययंत्र है। ब्रायन की ख्वाहिश है कि वे दिल्ली में एक संगीत का स्कूल खोलें। ब्रायन का संगीत से साक्षात्कार उनके माता-पिता ने कानपुर में करवाया था। वे चर्च में होने वाले संगीत कार्यक्रमों में भाग लेते थे।


ए.जे.फिलिप ( समाज सेवा)


ए.जे.फिलिप लेखक और शिक्षाविद् हैं।  उन्होंने अपने साथियों के साथ दीपालय स्कूल, कालका जी एक्सटेंशन में एक असाधारण स्कूल खोला है। दीपालय की बिल्डिंग और सुविधाएं किसी भी मशहूर स्कूल से उन्नीस नहीं है। दीपालय में आसपास की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को दाखिला प्राथमिकता के आधार पर मिलता है। ये संभव होता है फिलिप जी, उनकी टीम और दानवीरों के कारण। आपको निर्धन परिवारों के बच्चों के लिए इतना शानदार स्कूल शायद ही कहीं मिले।  अगर बात दीपालय से हटकर करें तो फिलिप जी रक्षा और विदेश मामलों के गहन जानकार हैं।


दिलीप चेरियन( पब्लिक रिलेशंस)


दिलीप चेरियन की क्रिमसम पार्टी के क्या कहने। उसमें दिल्ली के असरदार और मशहूर चेहरे शामिल होते हैं। वहां पर लजीज डिशेज तो परोसी जाती हीहै। दिलीप चेरियन मीडिया और पीआर कंसलटेंट हैं। वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के स्टुडेंट रहे हैं। बेशक, वे भारत में मीडिया पीआर एजेंसी की दुनिया के पुराण पुरुष हैं। उन्होंने ही परफेक्ट रिलेशंस नाम की पीआर एजेंसी शुरू की थी। वे अब बंद हो गए आर्ब्जवर फार बिजनेस एंड पालिटिक्स पेपर में सीनियर एडिटर भी रहे।


डा.स्वपना लिड्डल ( इतिहास)


डा.स्वपना लिड्डल दिल्ली के इतिहास पर लगातार श्रेष्ठ काम कर रही हैं।उन्होंने चांदनी चौक: दि मुगल सिटी आफ ओल्ड दिल्ली और कनॉट प्लेस जैसी शानदार किताबें लिखी है। वह सेंट स्टीफंस कॉलेज, जेएनयू और जामिया में पढ़ी हैं। डा. स्वपना 1980 के दशक में दिल्ली आई तो इसे दिल से चाहने लगीं। वह इंटेक की संयोजक भी हैं। इस बहाने वह दिल्ली के महत्वपूर्ण स्मारकों को बचाने की लगातार कोशिशें करती हैं।


डा.सखी जॉन ( समाज सेवा)


डा.सखी जॉन किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। वे एक अनजान शख्स को अपनी एक किडनी दान दे चुके हैं। उन्हें याद है जब वे 26 अप्रैल,1992 को केरल से दिल्ली आए थे। जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से जुड़े हुएसखी दिल्ली आते ही तीस हजारी, कमला नगर, प्रताप नगर, मजनूं का टीला में गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाने लगे। बच्चों में तो उनकी जान बसती है। वे अपनी घर के आसपास के बच्चों को पढ़ाते और उनका स्कलों में दाखिला करवाते हैं। उनके घर के दरवाजे जरूरतमंदों के लिए हर वक्त खुले रहते हैं।


रेबेका जॉन ( कानून)


दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैक्ल्टी आफ लॉ की स्टुडेंट रहीं रेबेका जॉन को देश ने तब कायदे से जाना जब उन्होंने आरुषि केस में तलवार दंपती और 1984 में मारे गए सिखों के परिजनों के पक्ष में पैरवी की। उन्होंने मेरठ के हाशिमपुरा कांड के पीड़ितों के लिए भी पैरवी की थी। रेबेका जॉन पहली महिला वकील थीं जिन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर काउंसिल नामित किया था।


प्रो.सिडनी रिबेरो(शिक्षा)


कौन नहीं जानता प्रो.सिडनी रिबेरो को! वे दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में लंबे समय तक अंग्रेजी पढ़ाते रहे है। रिबेरो साहब ने  डी यू की कई  पीढ़ियों को पढ़ाया । उनकी इमेज एक आदर्श टीचर की रही। इसलिये उन्हें अपने स्टूडेंट्स का सम्मान भी मिला। उनका परिवार दिल्ली के सबसे पुराने एंग्लो इंडियन परिवारों में से है। ये 1909 से दिल्ली में हैं। प्रो.रिबेरो की मां श्रीमती मेरी रिबेरो कश्मीरी गेट के जीपीओ डाकघर की चीफ पोस्टर मास्टर थीं।


नग्योनी आर.जेम्स ( समाज सेवा)


 राजधानी में अच्छी-खासी आबादी नार्थ ईस्ट राज्यों के ईसाइयों की भी है। नग्योनी आर.जेम्स इनके घऱ से लेकर पेशेवर मसलों को हल करने को लेकर लगातार सक्रिय रहते हैं। वे 1999 में मणिपुर से दिल्ली में आकर बस गए थे। पेशे से इंजीनियर जेम्स कहते हैं कि अब वे दिल्ली वाला हो चुके हैं। उनके प्रयासों से ही नार्थ ईस्ट राज्यों के ईसाई हरेक महीने के पहले रविवार को गोल डाक खाना के सेक्रेड हार्ट कैथडरल चर्च में प्रार्थना के लिए एकत्र होते हैं। इस बहाने बाद में बैठकी भी हो जाती है। जेम्स ने हाल ही मेंनार्थ-ईस्ट कैथोलिक कम्युनिटी, दिल्ली  की स्थापना के 30 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम भी आयोजित किया।

Harish Salve and Brian Silas

25 December 2020

फ़िल्मी पोस्टर / राजा बुंदेला

 वक्त बड़ा बेरहम होता है। कभी किसी को नहीं बख्शता यह नामुराद! जिस साम्राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता था, इसने उसे भी डुबो दिया।  इस दौर में टॉ...