शनिवार, 30 मार्च 2024

स्टेशन मास्टर की वजह से बची हज़ारों यात्रियों की जान

 Samar Anarya 

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ग़ुलाम दस्तगीर नाम था उनका। 


भोपाल रेलवे स्टेशन के असिस्टेंट स्टेशन मास्टर थे। 2 दिसंबर 1984 की रात ड्यूटी पर थे। बहुत देर काग़ज़ों से उलझे रहे। 


बाहर निकले तो दम घुटने लगा। उन्हें बात समझ नहीं आई, पर साँसें बोझिल होती गईं। अब उन्हें समझ आ गया था- कुछ बहुत बुरा हो रहा है। क्या- ये उन्हें तब भी नहीं पता था। अपने बॉस, स्टेशन मास्टर हरीश धुर्वे को ढूँढने की कोशिश की। 


उनकी लाश मिली। हरीश धुर्वे ने भी कोशिश की थी लोगों को बचाने की, ये बात हमको सिर्फ़ ग़ुलाम दस्तगीर के बयान से पता है। उन्हें अकेले हीरो बननाहोता तो छिपा लेते। 


ख़ैर- तब तक ग़ुलाम दस्तगीर को समझ आ गया था, ज़हर बरस रहा है। उन्होंने इटारसी, विदिशा, सब जगह फ़ोन करके ट्रेनें रोकी। सबने पूछा- ऊपर से आदेश हो जाये- उन्होंने कहा, में ग़ुलाम दस्तगीर पूरी ज़िम्मेदारी ले रहा हूँ। 


उसी बीच गोरखपुर बॉम्बे एक्सप्रेस प्लेटफार्म पर आ खड़ी हुई थी। ग़ुलाम दस्तगीर दौड़े- बोले भगाओ। तब तक ज़हर उन पर भी चढ़ चुका था। ड्राइवर ने फिर वही- ऊपर का आदेश पूछा- बाद में ड्राइवर ने ही बताया- ग़ुलाम दस्तगीर चीखे थे- मेरा आदेश है। में स्टेशन का मालिक हूँ। ले जाओ। और ये कहते कहते गिर पड़े थे।


ख़ैर- शुक्र ये था कि गिरने के पहले ग़ुलाम दस्तगीर भोपाल स्टेशन पूरी तरह से बंद कर चुके थे। 


सारी ट्रेनें जहाँ खड़ी थीं, वहीं खड़ी थीं। 


100 किलोमीटर दूर, 200 किलोमीटर दूर। 


ग़ुलाम दस्तगीर ना होते, तो भोपाल गैस कांड में मरने वालों का आँकड़ा कई गुना बढ़ता। 


और एक बात बताऊँ- तब मोबाइल फ़ोन नहीं होते थे। ग़ुलाम दस्तगीर अपने परिवार को बचा सकते थे, अगर स्टेशन छोड़ भाग जाते। 


उन्होंने नहीं भागना चुना, उनका बेटा उसी गैस का शिकार होकर उसी रात मर गया। 


मेरे लिये ग़ुलाम दस्तगीर उतने ही पुरखे हैं जितने मेरे पिता। आपके?


#भोपालगैसत्रासदी #vss

मंगलवार, 26 मार्च 2024

देश का नंबर वन यूनिवर्सिटी DU का हाल बेहाल / न्यू इंडिया के वन की गारंटी

 (प्रेस विज्ञप्ति  )   - 26 / 3 / 2024 


* डीयू कुलपति से एडहॉक टीचर्स की कम से कम दस साल की सर्विस काउंट करने की मांग फोरम ने की ।


*  स्थायी हुए 4600 टीचर्स में से 15 फीसदी के पास 10 साल से  ज्यादा का है टीचिंग एक्सपीरियंस 


* 10 साल की एडहॉक सर्विस काउंट uनहीं हुई तो नहीं बन पायेंगे अधिकांश एसोसिएट प्रोफेसर व  प्रोफेसर । 


* दिल्ली विश्वविद्यालय से बाहर अन्य विश्वविद्यालयों में  होती है पूरी एडहॉक सर्विस काउंट । 


                 फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने  दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को पत्र लिखकर मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विभागों व कॉलेजों में हो चुकी  शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति में एडहॉक टीचर्स की कम से कम दस साल की सर्विस काउंट करने की मांग की है । उन्होंने बताया है कि  दिल्ली विश्वविद्यालय में एक दशक बाद सहायक प्रोफेसर के पदों पर यह नियुक्तियां हुई है ।  विश्वविद्यालय के विभागों व उससे संबद्ध विभिन्न कॉलेजों में हुई स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया में  9 मार्च 2024 तक  लगभग 4600  टीचर्स परमानेंट हुए हैं । इन परमानेंट टीचर्स में लगभग 15 फीसदी ऐसे टीचर्स है जिनके पास 10 वर्ष से लेकर 20 -22 साल तक का टीचिंग एक्सपीरियंस ( शिक्षण अनुभव ) है ।  एडहॉक टीचर्स की पास्ट सर्विस काउंट न किए जाने को लेकर 35 से 55 साल से अधिक उम्र के शिक्षकों में गहरा रोष व्याप्त है । उनका कहना है कि हमारी एडहॉक सर्विस काउंट नहीं होगी तो हम एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पद से वंचित रह जायेंगे । जबकि 2014 से पूर्व पूरी एडहॉक टीचर्स की पास्ट सर्विस काउंट होती थीं ।


                 फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को लिखे पत्र में बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण एडहॉक शिक्षकों का शिक्षण अनुभव ( टीचिंग एक्सपीरियंस ) 5 ,10 वर्ष से 20--22 और उससे अधिक अनुभव रखने वाले शिक्षक है । उन्होंने बताया है कि हाल ही में एडहॉक टीचर्स से स्थायी हुए इन शिक्षकों में 500  से अधिक वे टीचर्स है जो 15 या 20 साल सर्विस करेंगे । विश्वविद्यालय प्रशासन यदि इन शिक्षकों की नियुक्ति समय से करता तो इनमें एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर होते लेकिन स्थायी नियुक्ति 2022 -2023 में होने से तथा उम्र ज्यादा होने के कारण इनमें बहुत से शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर भी नहीं बन पायेंगे क्योंकि एडहॉक टीचर्स की पास्ट सर्विस काउंट केवल 4 साल तक की जा रही है । डॉ. सुमन ने बताया है कि 2014 से पहले एडहॉक टीचर्स की पूरी पास्ट सर्विस काउंट होती थीं लेकिन अगस्त 2014 के बाद से एडहॉक टीचर्स के परमानेंट होने पर 4 साल की ही सर्विस काउंट होगी उससे ज्यादा नहीं ।  उन्होंने यह भी बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से अन्य विश्वविद्यालयों में जाने वाले एडहॉक टीचर्स की पूरी पास्ट सर्विस काउंट हो रही है और वे एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर भी बन रहे है । दिल्ली विश्वविद्यालय से अन्य विश्वविद्यालयों में गए बहुत से एडहॉक वहां जाकर एसोसिएट प्रोफेसर बने है । उनका कहना है कि जब अन्य विश्वविद्यालय उनकी पास्ट सर्विस काउंट कर रहे है तो दिल्ली विश्वविद्यालय अपने यहाँ के एडहॉक से स्थायी हुए शिक्षकों की पास्ट सर्विस काउंट क्यों नहीं कर रहा है ? 


                डॉ . सुमन ने कुलपति को लिखें पत्र में उन्हें यह  बताया है कि वर्ष 2014 से पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थायी नियुक्ति के बाद एडहॉक टीचर्स की पूरी पास्ट सर्विस काउंट होती रही है लेकिन 2014 के बाद से एडहॉक टीचर्स की 4 साल की पास्ट सर्विस काउंट की जा रही है । उन्होंने बताया है कि हाल ही में नियुक्त हुए टीचर्स में  40 ,45 से 50 या उससे अधिक उम्र पार कर गए हैं उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद न तो पेंशन में लाभ मिलेगा और न ही वे एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर बन पायेंगे ?  उनका कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इन एडहॉक टीचर्स की समय पर स्थायी नियुक्ति कर देता तो उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के साथ - साथ सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन का भी अधिक लाभ मिलता । 


               डॉ. सुमन ने कुलपति प्रो.सिंह को यह भी बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय  में पढ़ाने वाले एडहॉक टीचर्स डीयू के विभागों में एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर जब आवेदन करते हैं तो उनकी पूरी पास्ट सर्विस काउंट होती है और उन्हें विभागीय साक्षात्कार में बुलाया जाता है और उनकी नियुक्ति भी हुई है । उनका कहना है कि जब विभागों में एडहॉक टीचर्स की पास्ट सर्विस काउंट करके उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर का लाभ दिया जा सकता है तो कॉलेजों में क्यों नहीं ? कॉलेज शिक्षकों पर भी इसी नियम  को लागू करते हुए पास्ट सर्विस काउंट की जाये ताकि एडहॉक टीचर्स को उसकी पास्ट सर्विस का पूरा लाभ मिल सकें । यदि विश्वविद्यालय ऐसा करता है तो हाल ही में एडहॉक टीचर्स से स्थायी हुए ये टीचर्स एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर बन सकते है ।


डॉ. हंसराज सुमन 

चेयरमैन ---फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस 

फोन -- 9717 114595

प्रोफ़ेसरो के कारनामें -1

 'ब्रोकर टाइप प्रोफेसर' सुनील शर्मा की बपौती बना DU यानी

 दिल्ली विश्वविद्यालय 


दिल्ली विश्वविद्यालय में फरवरी 2022 से असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्तियों का खुला खेल चल रहा है. इस खेल में कुछ ‘ब्रोकर टाइप प्रोफेसर’ इस रूप में उभरकर सामने आये, जिन्होंने खूब पैसा कमा लिया, अपने सगे-सम्बन्धी एवं रिश्तेदारों को मिलाकर पंद्रह से पच्चीस लोगों को असिस्टेंट प्रोफेसर भी बनवा दिया है, उनके घर बीस से चालीस लाख की बीस-पच्चीस पेटियां एडवांस में पड़ी रहती हैं, कब किस पेटी के तहत किस कॉलेज में किसका नाम छप जाए, इसे बस वही परिणाम सामने आने से पहले ही बता देते हैं. ऐसा ही एक कुख्यात नाम सुनील शर्मा का है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष के साथ-साथ कॉलेजों के डीन, विभाग के प्रोफेसर्स एवं विभागाध्यक्ष का भी खासमखास है. अब ये डंके की चोट पर खुल्लम-खुल्ला अपनी पत्नी मंजू शर्मा का चयन ‘श्री अरविन्दो कॉलेज’ के हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर करवा रहा है. इसकी धूर्तता देखिए परिणाम जारी होने से पहले ही दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के कार्यालय में इसका जश्न भी मना रहा है. 


श्री अरविन्दो कॉलेज में हिंदी विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर पर साक्षात्कार 04 मार्च 2024 शुरू होकर 09 मार्च 2024 तक चलेगा और 04 मार्च को ही सभी अभ्यर्थियों को पता चल चुका है कि सुनील शर्मा की पत्नी मंजू शर्मा का चयन हो रहा है। ऐसे में इस साक्षात्कर की क्या पारदर्शिता है और बिना गॉडफादर-गॉडमदर वाले अभ्यर्थी किस उम्मीद के साथ 09 मार्च 2024 तक साक्षात्कार देने जाएं?


कुख्यात ब्रोकर टाइप प्रोफेसर ‘सुनील शर्मा’ की पत्नी मंजू शर्मा में ऐसी कौन-सी योग्यता है, जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर अपने ही शोधार्थियों में विकसित नहीं कर पाते हैं. जाहिर है कि सुनील शर्मा नौकरी बांटों गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं. इसलिए एक्सपर्ट प्रोफेसरों की क्या बिसात, जो उनकी पत्नी मंजू शर्मा का चयन न करने का दुस्साहस कर सकें. सुनील शर्मा की पत्नी मंजू शर्मा के बारे में प्रचलित है कि वे इंटरव्यू में बोल नहीं पाती हैं, उनकी पीएचडी डिग्री सुनील शर्मा ने एक निजी विश्वविद्यालय से मोटी-रकम देकर खरीदी है. अरे भाई! उनकी कौन-सी उमर भागी जा रही है, हिंदी साहित्य की शब्दावली में उनके लिए यह कहा जा सकता है कि अभी तो वह नवोढ़ा युवती ही लगती हैं, कम से कम उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय से एक मोदी टाइप डिग्री ही दिला दिए होते, क्योंकि कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह इसी डिग्री का जिक्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सम्बन्ध में खुलेआम करते हैं और इससे भी हास्यास्पद यह है कि मोदी को पढ़ाने वाले पांच प्रोफेसर नहीं मिलेंगे और न ही मोदी को अपने पांच प्रोफेसरों के नाम याद होंगे.


सुनील शर्मा की ब्रोकरी का ही कमाल है कि जो लिस्ट श्री अरविन्दो कॉलेज से चलकर डूटा कार्यालय तक आयी है, उसमें उनकी पत्नी मंजू शर्मा का नाम शामिल है. दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने 100वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर ठीक ही कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों में साहस का संचार करता है. हमें इसी साहस के साथ ‘ब्रोकर टाइप प्रोफेसरों’ द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय में फैलाये जा रहे ब्राह्मणवादी भ्रष्टाचार को उजागर करते रहना है. 


इसके साथ ही साथ हम दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह से माँग करते हैं कि वे दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों एवं कॉलेजों से जुड़े सभी विज्ञापनों में यह स्पष्ट मेंशन कर दें कि इनमें केवल वही आवेदन करें, जो किसी प्रोफेसर के बेटा-बेटी, दामाद-बहू, साला-साली, भाई-भतीजा एवं ‘आज शाम घर पर/फ्लैट पर/पहाड़ी टूर पर मेरे साथ चलना, परमानेंट हो जाओगी’ वाक्य पर मजबूरन आँसू बहाते हुए ‘वन नाइट स्टैंड’ अपनाने वाली शोध-छात्राएं एवं युवतियाँ जब वैचारिक, चारित्रिक एवं नैतिक पतन करते हुए ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ का सफ़र तय करेंगी तभी उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर बनाया जाएगा.


ज्ञान प्रकाश यादव 'ज्ञानार्थी'

       06/03/2024

शनिवार, 16 मार्च 2024

बिन छत का मकबरा हैं दिल्ली के सुल्तान इलतुमिश का

 दिल्ली के सुल्तान इल्तुमिश का मकबरा आज भी बिना छत के


आम तौर पर सुल्तानों के मकबरे बहुत खास होते हैं, लेकिन दिल्ली में एक सुल्तान का मकबरा ऐसा है जिसमें कोई छत नहीं है। गुलाम वंश के संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्तुमिश का मकबरा बिना छत का है।


दिल्ली के एक सुल्तान का मकबरा बिना छत का है। ऐसा नहीं है कि छत बनाई नहीं गई थी। छत बनाई गई थी, लेकिन यह टिक नहीं पाई। कुछ सालों बाद फिर से इस मकबरे की छत बनाई गई, लेकिन वह भी गिर गई। ऐसे सुल्तान, जिन्होंने दिल्ली को अपनी राजधानी के लिए चुना, कुतुबमीनार का काम पूरा करवाया और अपनी बेटी को दिल्ली का शासक घोषित किया, उनका मकबरा आज भी बिना छत का है। इस सुल्तान का नाम था-शम्सुद्दीन इल्तुतमिश।


कुतुबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी था इल्तुमिश


गुलाम वंश की नींव रखने वाले कुतबुद्दीन ऐबक के उत्तराधिकारी और दामाद इल्तुतमिश, दिल्ली को खूबसूरत बनाने के लिए भी जाने जाते हैं। इल्तुतमिश का मकबरा, कुतुब मीनार कॉम्प्लेक्स में है। यह कॉम्प्लेक्स के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में है। सन् 1235 में इल्तुतमिश ने इसे खुद बनवाया था। यह मकबरा एक गुंबद से ढका था। ऐसा माना जाता है कि यह गुंबद गिर गया। इसके बाद फिरोजशाह तुगलक (1351-88) ने दूसरा गुंबद बनवाया था। मगर, सुल्तान की किस्मत देखिए कि यह गुंबद भी नहीं टिक पाया।


मकबरे के गेट पर शानदारा नक्काशी की गई


आज भी इस मकबरे की छत नहीं है। दिल्ली पर राज करने वाले इस सुल्तान का मकबरा बिना छत का है। बाहर से तो यह मकबरा बिल्कुल सादा है, लेकिन अंदर और गेट पर शानदार तरीके से नक्काशी की गई है। इन नक्काशियों में चक्र, घंटी, जंजीर, कमल और हीरा शामिल हैं। इन्हें देखकर फर्ग्युसन ने कहा था कि यह इस्लामी उद्देश्यों के लिए हिंदू कला के इस्तेमाल किए जाने का शानदार उदाहरण है।


इल्तुमिश ने लाहौर के स्थान पर दिल्ली को बनाई अपनी राजधानी

12वीं सदी के आखिरी वर्षों में कुतबुद्दीन ऐबक ने कुतुबमीनार की आधारशिला रखी थी। इसका काम को उनके दामाद इल्तुतमिश (1211-36) ने पूरा करवाया था। 1231 में इल्तुतमिश ने एक मकबरा अपने सबसे बड़े बेटे शहजादा नासिरूद्दीन के लिए बनवाया था, जो सुल्तान गारी के मकबरे के नाम से जाना जाता है। इसे सबसे पुराना या पहला मुस्लिम मकबरा माना जाता है। इल्तुतमिश ने लाहौर की जगह दिल्ली को अपनी राजधानी के लिए चुना। इसके साथ ही दिल्ली में कई कवियों, कलाकारों और सूफी संतों को बुलाकर सांस्कृतिक परंपरा की शुरुआत की। उन्होंने दिल्ली की खूबसूरती पर भी काफी ध्यान दिया था। उन्होंने कई तालाब खुदवाए, जिनमें गंधक की बावली और हौज-ए-शम्सी शामिल हैं।


बेटी रजिया को बनाया था अपना उत्तराधिकारी


सन् 1235 में सुल्तान एक युद्ध के दौरान बुरी तरह बीमार पड़ गए। उन्हें दिल्ली वापस दिल्ली लाया गया। एक साल तक वह बीमारी से जूझते रहे, लेकिन उनकी बीमारी ठीक नहीं हुई। अपने अंतिम समय में उन्होंने अपनी बेटी रजिया को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। सन् 1236 में इल्तुतमिश की मौत हो गई। उन्होंने 25 साल तक राज किया। उनका मकबरा कुतुबमीनार के पास ही है। काफी विरोध के बाद रजिया दिल्ली की पहली महिला सुल्तान बनी थीं।

शुक्रवार, 15 मार्च 2024

इंडिगो से पहले ज़ेट & किंगफ़िशर का राज

 इंडिगो एयरलाइन्स जब अंडे से निकली नहीं थी, उस वक़्त किंगफ़िशर एयरलाइन्स, एयर इंडिया, जेट एयरवेज, स्पाइस जेट इत्यादि भारत के आसमान पर राज करते थे।

इस उद्योग में काफी कम्पटीशन हुआ करता था जिसके चलते विमान यात्रा की टिकट सस्ते में बेचनी पड़ती थी। इंडिगो एयरलाइन्स ने कैसे कम्पटीशन को मात दी और भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी बन गयी, आइये जानते हैं।

इसने हमेशा खुद को 'लौ कॉस्ट एयरलाइन' के रूप में मार्केटिंग किया है और यह कभी भी अपनी 'लौ कॉस्ट एयरलाइन' स्थिति से अलग नहीं हुआ है। इस प्रकार, इंडिगो ने कभी भी फ्लाइट में मुफ्त भोजन, लॉयल्टी प्रोग्राम, लाउंज सुविधाएं और उड़ान मनोरंजन सेवा पेश नहीं किया और अपने प्रॉफिट मार्जिन को बरकरार रखा।

किंगफिशर एयरलाइंस और एयर इंडिया नॉन प्रॉफिटेबल रुट्स पर काम करते थे। इस से इनके विमान कभी भी पूरी तरह नहीं भरते थे और ऊपर से यह विमान यात्रियों को मुफ्त भोजन, इन फ्लाइट एंटरटेनमेंट सेवा और बिज़नेस क्लास सेवा देते थे। इसका परिणाम यह हुआ की एयर इंडिया और किंगफ़िशर कभी मुनाफा नहीं कमा पाते थे। इंडिगो के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ। इसने हमेशा लौ कॉस्ट एयरलाइन स्थिति को बनाए रखा और शुरुवात में यह सिर्फ हाई ट्रैफिक रुट्स पर काम करते थे जहाँ इनके विमान की ओवर बुकिंग हो जाती थी।

सभी एयरलाइंस ने होटलों के साथ टाई अप किया है क्योंकि हर रोज, इसे अपने कर्मचारियों के लिए रात भर रहने की व्यवस्था करनी होती है। जाहिर है कि एक पुरुष स्टाफ और एक महिला स्टाफ को अलग-अलग कमरे देने होते हैं। हालांकि, इंडिगो में केवल महिला एयर होस्टेस हैं। इस प्रकार यह रात भर रहने के लिए 3 महिला कर्मचारियों को एकल होटल का कमरा प्रदान करने का प्रबंधन कर सकता है। पैसा बच गया।

इंडिगो ने 50 एटीआर -72 एयरक्रॉफ्ट (और 250 एयरबस ए 320) का ऑर्डर दिया है। ATR72 एक छोटा विमान है जो केवल 60 - 80 यात्रियों को ले जा सकता है। यह ईंधन कुशल है, संभालने में आसान है और कम गेराज स्थान की आवश्यकता होती है।

 इंडिगो की योजना इन एटीआर विमानों को उन कम यातायात मार्गों पर संचालित करना है, जिन्हें एयरलाइन उद्योग के लिए गैर-लाभकारी मार्ग कहा जाता है। उदाहरण - हैदराबाद राजामुंदरी मार्ग, बैंगलोर तिरुपति मार्ग, भुवनेश्वर रांची मार्ग आदि। यह सबसे कम किराए की पेशकश करके भी बहुत लाभ कमाएगा और इस प्रकार यह अपनी घरेलू पकड़ को मजबूत करेगा और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाएगा।

जब अन्य एयरलाइंस अपने वित्तीय तनाव से निपटने में व्यस्त हैं, इंडिगो चालाकी से पूरे देश में अपने पंख फैलाने की योजना पर काम कर रहा है।

सौ बात की एक बात, इंडिगो एयरलाइन्स जानती थी की भारत में विमान यात्रा आज भी विलासिता के रूप में देखा जाता है, यह लोगों की जरुरत नहीं है। इसीलिए इंडिगो ने शुरू से ही सोच लिया था की हम लौ कॉस्ट एयरलाइन के बिज़नेस मॉडल पर ऑपरेट करेंगे। इनकी मार्केटिंग रणनीति यही थी, एक ऐसे उद्योग में जहाँ विमान यात्रा एक विलासिता है, वहां लोगों को सिर्फ उड़ने का मौका दो कम खर्चे में।

यही मार्केटिंग राण नीति की बदौलत आज भारत में अकेली इंडिगो ऑयलीनेस एक ऐसी एयरलाइन कंपनी है जो फायदे में है और 50% के आसपास की मार्किट शेयर इसके पास है।


रविवार, 10 मार्च 2024

लद्दाख को लेकर सोनम वंगचूक का धधरना जारी

 *सोनम वांगचुक का आमरण अनशन, बोले- 'केंद्र सरकार लद्दाख को लेकर अपने वादे पूरे करे'*


केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर सियासत गरमा गई है. केंद्र सरकार के साथ एक बार फिर से बातचीत विफल होने के बाद लद्दाख के पर्यावरणविद सोनम वांगचुक लेह में आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि बीजेपी सिर्फ दिखावे के लिए राम भक्त होने का दावा करती है. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र की बीजेपी सरकार सही मायने में राम की भक्ति करती है तो वो लद्दाख के साथ किए गए सभी वादे को पूरा करे।



जाने-माने पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने लद्दाख के लोगों की मांग के समर्थन में 21 दिनों के अनशन की शुरूआत कर दी है. केंद्र सरकार के साथ चौथी वार्ता के विफल होने के बाद सोनम वांगचुक ने लेह में आमरण अनशन की शुरूआत की. इस दौरान करीब तीस हज़ार से ज्यादा लोग शामिल हुए. वांगचुक ने कहा है कि अगर सरकार लद्दाख के लोगों के साथ किए गए वादे को पूरा नहीं करती है तो उनका ये अनशन 21 दिन तक लगातार जारी रहेगा।



बुधवार, 6 मार्च 2024

जालियाँवाला बाग नर संहार

 जलियाँवाला बाग का हत्याकांड, भारतीय इतिहास के ज़ख्मों में से एक है, जो 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। हज़ारों की तादाद में लोग, जो बैसाखी मनाने और शांतिपूर्ण बैठक के लिए जमा हुए थे, उन पर बेरहमी से गोलियां चलाई गईं। 


अंग्रेज़ों के जुल्म की दास्तान बयां करते हुए, इतिहासकार किम वाग्नेर अपनी किताब "अमृतसर: द पार्टिशन एंड इट्स आफ्टरमाथ" में बताते हैं कि कैसे उस वक्त पंजाब में गुस्सा भड़का हुआ था। अंग्रेज़ों ने एक ऐसा कानून बनाया था, जिससे उन्हें बिना किसी मुकदमे के लोगों को गिरफ्तार करने का हक मिल गया था। ये ज़बरदस्ती और ऊपर से चल रहे लड़ाई-झगड़ों की वजह से लोगों का जीना दूभर हो गया था।


उस वक्त अमृतसर के फौजी अफसर, ब्रिगेडियर-जनरल रेजिनाल्ड डायर, अपने सख्त मिज़ाज़ के लिए जाने जाते थे। इतिहासकार निगेल कोलेट ने अपनी किताब "द बुचर ऑफ अमृतसर: जनरल डायर एंड द मैसाक्र ऑफ 1919" में लिखते हैं कि डायर को भारतीयों पर भरोसा नहीं था और वो हर तरह के विरोध को दबाना चाहते थे।


जिस दिन ये हादसा हुआ, डायर को लोगों के जमा होने की खबर मिली, वो अपने सिपाहियों के साथ जलियांवाला बाग पहुंच गया। उसने वहां से निकलने का एक ही रास्ता बंद कर दिया और बिना किसी चेतावनी के, अपने आदमियों को निहत्थे लोगों पर गोलियां चलने का हुक्म दे दिया। ये गोलीबारी दस से पंद्रह मिनट तक चली, जिसमें सैकड़ों लोग शहीद हो गए और हजारों घायल हो गए।


चार्ल्स जेफरी अपनी किताब "फियर, मेमोरी, एंड द मेकिंग ऑफ द मार्टर्स ऑफ जलियांवाला बाग" में इस हत्याकांड के बाद के हालात के बारे में बताते हैं। पूरे देश में, और यहां तक कि दुनियाभर में, इस अंग्रेजी ज्यादती की कड़ी निंदा की गई। ये हादसा भारत की आज़ादी की लड़ाई में एक अहम मोड़ साबित हुआ, जिसने लोगों में गुलामी के खिलाफ आग जगा दी और उन्हें आज़ादी की लड़ाई को और मजबूती से लड़ने का हौसला दिया।


जलियाँवाला बाग का हत्याकांड, ब्रिटिश राज के जुल्म और भारत की आज़ादी की लड़ाई की एक याद दिलाता है। ये वारदात आज भी भारतीयों के दिलों में गुस्से और जज़्बे की एक निशानी के तौर पर जिंदा है।


इतिहास_की_एक_झलक


शनिवार, 2 मार्च 2024

बीबीसी / 💐BJP की पहली लिस्ट जारी

 

लाइव रिपोर्टिंग

  1. लोकसभा चुनाव 2024ः बीजेपी की पहली सूची जारी, देखें कौन कहां से चुनावी मैदान में होंगे?

    लोकसभा चुनाव 2024: बीजेपी की पहली सूची जारी

    बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 195 उम्मीदावारों की पहली सूची जारी कर दी है. देखें कौन कहां से चुनाव मैदान में है-

    वाराणसीः नरेंद्र मोदी

    गांधी नगरः अमित शाह

    विदिशाः शिवराज सिंह चौहान

    डिब्रूगढ़ः सर्वानंद सोनोवाल

    बीकानेरः अर्जुन राम मेघवाल

    जोधपुरः गजेंद्र सिंह शेखावत

    अरुणाचल वेस्टः किरेन रिजिजू

    गौतम बुद्ध नगरः महेश शर्मा

    मथुराः हेमा मालिनी

    आगराः सत्यपाल सिंह बघेल

    फतेहपुर सिकरीः राजकुमार चाहर

    एटाः राजवीर सिंह

    शाहजहांपुरः अरुण कुमार सागर

    खिरीः अजय मिश्रा टेनी

    धौड़हड़ाः श्रीमती रेखा वर्मा

    हरदोईः जयप्रकाश रावत

    उन्नावः साश्री महाराज

    अमेठीः स्मृति इरानी

    लखनऊः राजनाथ सिंह

    इटावाः रामशंकर कटेरिया

    जालौनः भानू प्रसाद वर्मा

    झांसीः अनुराग शर्मा

    हमीरपुरः कुंवर पुष्पेंद्र चंदेल

    फतेहपुरः साध्वी निरंजन ज्योति

    बारामतीः उपेंद्र सिंह रावत

    फैजाबादः लल्लू सिंह

    गोंडाः राजा भैया

    गौरखपुरः रवि किशन

    कुशीनगरः विजय कुमार दुबे

    लालगंजः नीलम सोनकर

    आजमगढ़ः दिनेश लाल यादव निरहुआ

    सलेमपुरः रवींद्र कुशवाहा

    जौनपुरः कृपा शंकर सिंह

    चंदौलीः महेंद्र नाथ पांडे

    कांतिः शुभेंदु अधिकारी

    चांदनी चौकः प्रवीन खंडेलवाल

    उत्तर पूर्वी दिल्लीः मनोज तिवारी

    नई दिल्लीः बांसुरी स्वराज

    पश्चिम दिल्लीः कमलजीत सहरावत

    दक्षिण दिल्लीः रामवीर सिंह बिधुड़ी

    रांचीः जमशेद सेठ

    सिंहभूमः गीता कोड़ा

  2. ब्रेकिंग न्यूज़लोकसभा चुनाव 2024: मोदी वाराणसी से, अमित शाह गांधी नगर से चुनाव लड़ेंगे, बीजेपी के 195 प्रत्याशियों की पहली सूची

    भारतीय जनता पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े
    Image caption: भारतीय जनता पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े

    बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से, अमित शाह गांधी नगर से तो असम के डिब्रूगढ़ से सर्वानंद सोनोवाल अपनी किस्मत दोबारा आजमाएंगे.

    16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रेदशों में से 195 सीटों पर निर्णय हुआ. 34 केंद्रीय और राज्य मंत्री इस सूची में है. लोकसभा अध्यक्ष का भी नाम है. दो पूर्व मुख्यमंत्री का भी नाम शामिल है.

    इस सूची में 28 महिलाएं हैं, 50 से कम उम्र वाले 47 युवा उम्मीदवार हैं. अनुसूचित जाति 27 और अनुसूचित जनजाति 18, पिछड़ा वर्ग 57 के उम्मीदवार हैं.

    उत्तर प्रदेश से 51 सीटों की घोषणा की गई तो पश्चिम बंगाल की 20 सीटों, मध्यप्रदेश की 24 सीटों, गुजरात की 15 सीटों, राजस्थान 15 सीटों, केरल की 12 सीटों, तेलंगाना से 9, छत्तीसगढ़ से 11 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई.

    वहीं दिल्ली में पांच, जम्मू-कश्मीर से दो, उत्तराखंड से तीन, अरुणाचल प्रदेश से दो, गोवा एक, त्रिपुरा एक अंडमान निकोबार और दमन दीव में एक एक सीटों की घोषणा होगी.

  3. दिल्लीः बीजेपी में शामिल हुए मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई लोग

    बीजेपी में शामिल हुए मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई लोग

    दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव, संयोजक रामवीर सिंह बिधूड़ी की मौजूदगी और दिल्ली की पूर्व मेयर और बीजेपी नेता आरती मेहरा की मौजूदगी में अल्पसंख्यकों का एक समूह बीजेपी में शामिल हुआ.

    इस दौरान आरती मेहरा ने बताया कि इन लोगों ने स्वनिधि योजना और मुद्रा योजना से प्रभावित हो कर बीजेपी में शामिल होने का फ़ैसला किया है. ये सभी मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग हैं.

    उन्होंने बताया कि शिया सुन्नी फ्रंट के राष्ट्रीय सचिव नज़मी नक़वी के साथ कई लोग बीजेपी में शामिल हुए हैं.

    दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव
    Image caption: दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव

    इस दौरान दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव ने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री जी जो योजनाएं लेकर आए उसका लाभ मीना बाज़ार के लोगों को मिला. योजनाओं का लाभ किसी का मजहब देख कर नहीं मिला. 10 करोड़ लोगों को उज्जवला योजना का लाभ मिला उनमें से 33 फ़ीसद से अधिक मुस्लिम परिवार हैं."

    रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा, "मोदी सरकार की किसी भी योजना का एक बड़ा लाभ मुसलमान परिवारों को मिल रहा है."

    नज़मी नक़वी
    Image caption: नज़मी नक़वी

    बीजेपी में शामिल होने के बाद नज़मी नक़वी ने कहा, "जब हमने धीरे धीरे और पार्टियों को देखा लेकिन वो लोग किसी काम नहीं आए. जब मैंने एक फ़्लैट लिया तो उसमें मुझे एक लाख साठ हज़ार रुपये की सब्सिडी मिली. तो मुझे लगा कि एक बार जो मोदी सरकार ने कहा वो वादा सच्चा है. मेरे साथ हज़ारों की तादाद में लोग जुड़े हैं. यह पार्टी योजनाओं का लाभ देने के लिए किसी के जात-धर्म को नहीं पूछ रही है."

    शमा परवीन
    Image caption: शमा परवीन

    वहीं शमा परवीन बोलीं, "मोदी सरकार ने तीन तलाक़, सिलेंडर जैसे काम बहुत अच्छे किए हैं. हम सारी बहनें उनके साथ हैं."

    मोहम्मद हैदर अली
    Image caption: मोहम्मद हैदर अली

    इस दौरान मीना बाज़ार के मोहम्मद हैदर अली भी बीजेपी में शामिल हुए. उन्होंने कहा, रेहड़ी पटरी लगाकर हममें से कई लोग अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं. आज हम सही जगह आए हैं. आज जो मैं यहां आया हूं वो कारण हैं मोदी जी. उन्होंने हमारे रेहड़ी पटरी वालों के लिए बहुत काम किए. पहले हम अपनी दुकानें लेकर भागते थे, याद है न? अब हम 10 हज़ार से लाख रुपये तक लोन ले सकते हैं."

  4. नितिन गडकरी के क़ानूनी नोटिस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने क्या कहा

    गडकरी और जयराम रमेश

    कांग्रेस के एक वीडियो पोस्ट में बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किए जाने पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से क़ानूनी नोटिस भेजे जाने पर कांग्रेस ने कहा कि उसने कुछ ग़लत नहीं किया.

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, “उस क़ानूनी नोटिस को मैंने भी पढ़ा है, उसका हम सही जवाब देंगे. हमने कोई ग़लती नहीं की है. उन्हीं के बयान, उन्हीं का वक्तव्य, उन्हीं के शब्दों का इस्तेमाल किया है. क्यों परेशान हैं मैं समझ नहीं सकता.”

    नीतिन गडकरी के बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किये जाने के आरोपों पर जयराम रमेश ने कहा, “हमने किसी के शब्दों का गलत इस्तेमाल नहीं किया. जो उन्होंने कहा है, उन्हीं बयानों का हमने इस्तेमाल किया है. अब वो परेशान हैं और लीगल नोटिस भेज दिया है हमें.”

    कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, "मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी का कहना है- आज किसान को फसल का दाम नहीं मिल रहा है."

    हालांकि इसके जवाब में नितिन गडकरी के दफ़्तर के एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया गया जिसमें कांग्रेस के वीडियो को फर्जी बताते हुए एक वीडियो शेयर करते हुए उसे वास्तविक वीडियो बताया गया है.

    साथ ही पोस्ट में लिखा गया है, "श्री नितिन गडकरी जी के नाम पर कांग्रेस का झूठ."

  5. बेंगलुरु

    बेंगलुरु के वाइटफ़ील्ड इलाक़े में स्थित रामेश्वरम कैफ़े में शुक्रवार दोपहर कम तीव्रता वाले आईईडी विस्फोट में नौ लोग घायल हो गए.

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  6. पाकिस्तान, बांग्लादेश से दोगुनी बेरोज़गारी है भारत मेंः राहुल गांधी

    राहुल गांधी

    राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा है कि भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश से दोगुनी बेरोज़गारी है.

    उन्होंने कहा कि अगर इंडिया गठबंधन की सरकार केंद्र में आती है तो एमएसपी की क़ानूनी गारंटी दी जाएगी.

    शनिवार को राजस्थान के धौलपुर से जारी हुई भारत जोड़ो न्याय यात्रा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा.

    उन्होंने कहा, "हिंदुस्तान में पाकिस्तान और बांग्लादेश से दुगनी बोरोज़गारी है. ऐसा क्यों हुआ क्योंकि नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की, जीएसटी लागू की और जो छोटे व्यापार और कारोबार बंद हो गए जो सबसे अधिक रोज़गार देते थे."

    उन्होंने कहा, "आज भारत में हर सेक्टर में पांच लोगों की मोनोपोली है. अदानी को देश के सारे एयरपोर्ट, पोर्ट, पॉवर सेक्टर, पूरी की पूरी मार्केट उनके हाथ में दे दिया गया. हिंदुस्तान का पूरा का पूरा धन तीन चार पूंजीपतियों को पकड़ा दिया गया. इसका नतीजा क्या हुआ कि जो सबसे अधिक रोज़गार देने वाले छोटे कारोबार थे, वे बंद हो गए."

    उन्होंने कहा, "देश में कहीं भी चले जाइए देश के युवा बोरोज़गार सड़कों पर भटकते मिलेंगे. नरेंद्र मोदी जी ने 16 लाख करोड़ रुपये हिंदुस्तान के 10-15 पूंजीपतियों का माफ़ कर दिया लेकिन किसानों का एक रुपया माफ़ नहीं किया."

    उन्होंने किसानों की एमएसपी की मांग पर कहा, "किसानों की एक ही मांग है कि एमएसपी लागू की जाए. हमारा नाम अदानी अंबानी नहीं है, लेकिन हम सिर्फ़ सही दाम मांग रहे हैं. जैसे किसानों का अनाज तैयार होता है, एक्साइज ड्यूटी कम करके उनका दाम गिरा देते हैं और फिर दाम बढ़ा देते हैं. वो सिर्फ़ एमएसपी की मांग कर रहे हैं. बीजेपी के लोग कहते हैं एमएसपी नहीं मिलेगी. हमने घोषणापत्र में लिख दिया है कि अगर दिल्ली में हमारी सरकार आती है तो हम एमएसपी क़ानूनी गारंटी देंगे."

    राहुल गांधी ने देश की 73 प्रतिशत आबादी को हाशिए पर रखने और उनके साथ आर्थिक सामाजिक भेदभाव करने का मोदी सरकार पर आरोप लगाया.

  7. गंभीर के बाद अब जयंत सिन्हा का आया बयान, बोले- पार्टी चुनावी ज़िम्मेदारियों से मुक्त करे

    जयंत सिन्हा

    झारखंड के हजारीबाग से भाजपा सांसद जयंत सिन्हा एक बयान के बाद अटकलें शुरू हो गई हैं कि वो अगला आम चुनाव नहीं लड़ेंगे.

    शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैंने माननीय पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से निवेदन किया है कि वो मेरी प्रत्यक्ष चुनावी ज़िम्मेदारियों से मुक्त करें ताकि मैं भारत और दुनिया में वैश्विक जलवायु परिवर्तन लड़ने की अपनी कोशिशों पर ध्यान केंद्रित कर सकूं.”

    “स्वाभाविक रूप में मैं आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों पर पार्टी के साथ काम करना जारी रखूंगा. मुझे पिछले दस सालों तक भारत और हज़ारीबाग़ के लोगों की सेवा करने का सौभाग्य मिला.”

    जयंत सिन्हा मोदी सरकार में राज्य मंत्री रहे. उनके पिता पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा मोदी के धुर विरोधी रहे हैं और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने बीजेपी छोड़ दी. बाद में वो टीएमसी में शामिल हो गए.

    आगामी लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों की की पहली लिस्ट जारी होने वाली है और इससे पहले दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर ने भी राजनीति की बजाय खेल पर ध्यान देने की बात कही है.

    गौतम गंभीर के बाद राजनीति से अलग होने की बात करने वाले जयंत सिन्हा दूसरे बीजेपी नेता हैं.

  8. बिहार पहुंचे मोदी के सामने नीतीश कुमार ने ऐसा क्या कहा कि पीएम खिलखिला कर हंस पड़े

    नरेंद्र मोदी

    औरंगाबाद में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक रैली के दौरान मंच साझा करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें (पीएम मोदी को) आश्वस्त किया कि अब वो बीजेपी के साथ ही रहेंगे.

    नीतीश कुमार ने अपने संबोधन के दौरान जो बातें कही उसे सुनकर प्रधानमंत्री खिलखिला कर हंसने लगे.

    नीतीश कुमार

    नीतीश कुमार ने कहा, "आप पधारे हैं यहां तो हम लोगों को बड़ी खुशी हो रही है. आप पहले आए थे और इधर हम गायब हो गए थे. अब हम फिर आपके साथ हैं."

    यह बोलते हुए ख़ुद नीतीश कुमार के चेहरे पर मुस्कुराहट थी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खिलखिला कर हंसने लगे.

    इसके बाद नीतीश कुमार ने कहा, "हम आपको आश्वस्त करते हैं अब इधर उधर होने वाले नहीं हैं. हम रहेंगे आप ही के साथ. हम लोग तो 2005 से लगातार एक साथ ही हैं, मिलकर बहुत काम किए हैं."

    वो बोले, "आपके द्वारा जो काम हो रहा है और राज्य का जो काम हो रहा है... हम चाहते हैं कि सबकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो और सब लोग बहुत आगे बढ़ें."

    उन्होंने कहा, "इस बार का चुनाव होने वाला है, इस बार 400 सीट आप जीतिएगा. ये हमको पूरा भरोसा है. खूब आगे बढ़िएगा. बिहार सबसे पुराना जगह है, आप जब काम कर दीजिएगा तो जो सबसे पुराना जगह है वो उतना ही आगे बढ़ जाएगा. जो भी विकास होगा हम उसका श्रेय आपको देते रहेंगे."

  9. झारखंड : स्पैनिश युवती से कथित बलात्कार का मामला, बीजेपी क्या बोली?

    बाबूलाल मरांडी
    Image caption: बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)

    झारखंड में स्पैनिश युवती के साथ कथित बलात्कार के मामले में बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

    राज्य में बीजेपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा, ''अगर विदेशी पर्यटकों के साथ इस तरह की घटनाएं होंगीं तो झारखंड में कौन आएगा. ऐसी घटनाओं को रोकना समाज और सरकार का दायित्व है. सरकार का दायित्व तो बहुत ज्यादा है. इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वालों को ऐसी सज़ा मिले कि आगे किसी को ऐसा करने की हिम्मत न हो.''

    राज्य के दुमका ज़िले में स्पेन की एक युवती से कथित गैंगरेप के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है.

    युवती के साथ एक मार्च की देर रात कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म, लूटपाट और मारपीट की घटना हुई थी. वो अपने पति के साथ सड़क किनारे एक टेंट में रुकी थीं, तभी यह वारदात हुई.

    दुमका के एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने बीबीसी से कहा कि स्पैनिश युवती और उनके पति को पुलिस सुरक्षा में दुमका लाया गया है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके.

    एसपी खेरवार ने बीबीसी से कहा, “शुक्रवार की रात हंसडीहा थाने की गश्ती टीम कुरमाहाट से गुजर रही थी, तभी स्पैनिश दंपति ने पुलिस टीम को रोककर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी.

    वहाँ की पुलिस को उनकी भाषा समझने में दिक़्क़तें हो रही थी. इसके बावजूद गश्ती टीम उन्हें पास के अस्पताल में ले गई, क्योंकि उन्हें चोट लगी थी और कुछ जगहों से खून भी निकल रहा था.

    सरैयाहाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उनकी प्राथमिक चिकित्सा की गई.

  10. पीपल्स पार्टी के मीर सरफ़राज़ अहमद बुगती बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री चुने गए

    मीर सरफ़राज़ अहमद बुगती

    पीपल्स पार्टी के मीर सरफ़राज़ अहमद बुगती को बलूचिस्तान का मुख्यमंत्री चुना गया है.

    बलूचिस्तान विधानसभा में साधारण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री चुनने के लिए 33 वोटों की आवश्यकता होती है. हालांकि मीर सरफ़राज़ बुगती को 41 सदस्यों के वोट मिले.

    मुख्यमंत्री पद के लिए कोई और प्रत्याशी नहीं था.

    मुख्यमंत्री के नियमित चुनाव के लिए विधानसभा की बैठक स्पीकर कैप्टन (रिटायर्ड) अब्दुल ख़ालिक की अध्यक्षता में हुई.

    जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के सदस्यों ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार किया और बैठक में भाग नहीं लिया जबकि नेशनल पार्टी के सदस्यों ने चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं लिया.

    पीपल्स पार्टी, मुस्लिम लीग-एन, बलूचिस्तान अवामी पार्टी सहित गठबंधन दलों के सदस्यों ने बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए मतदान किया.

    वोटिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पीकर ने घोषणा की कि सरफ़राज़ अहमद बुगती को 41 वोटों के साथ बलूचिस्तान का मुख्यमंत्री चुना गया है.

  11. नाराज़गी केवल 20 प्रतिशत में है, मैंने उनसे बात की हैः सुखविंदर सिंह सुक्खू

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    Video caption: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को अपनी ही पार्टी में हुई बग़ावत का अंदेशा था?

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि कांग्रेस में जो नाराज़गी है वो छोटी छोटी बातों को लेकर है और वो इसे लेकर बात कर रहे हैं.

    दरअसल एक दिन पहले ही कांग्रेस के छह विधायकों की सदस्यता रद्द किए जाने पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख और सांसद प्रतिभा सिंह ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी थी.

    उन्होंने शुक्रवार को कहा था, "जब आपको (सुखविंदर सिंह सुक्खू) एक साल से ऊपर समय हो गया है फिर भी आप उनके मसलों का संज्ञान नहीं ले रहे. उनकी बात नहीं सुन रहे तो उनका नाराज़ होना जायज है. गर सीएम बैठ कर बात करते तो आज यह स्थिति नहीं होती."

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, "80 प्रतिशत कांग्रेस इकट्ठी है, जहां नाराज़गी 20 प्रतिशत में है वो छोटी छोटी बातों को लेकर है. स्वाभाविक तौर पर इन बातों को दूर करने का दायित्व मेरा है तो मैंने उनसे बात की है. इस बात पर हम आगे बढ़ेंगे."

    उन्होंने बीजेपी पर कहा, "बीजेपी के 15 विधायकों को फाइनेंस बिल के दौरान स्पीकर ने निकाला था और निश्चित तौर पर कांग्रेस के छह और तीन निर्दलीय वोट डालने नहीं आए. ये ठीक है कि क्रॉस वोटिंग करवा कर उनके हौसले बुलंद हैं लेकिन सरकार गिराने जैसी स्थिति अब पैदा नहीं होने वाली है."

    इसके बाद उन्होंने यह भी कहा, "लोकसभा में हम पूरी ताक़त से उभरेंगे. इस घटना के बाद बीजेपी को नुकसान हुआ है. हिमाचल प्रदेश खरीद-फ़रोख़्त की भूमि नहीं है."

  12. ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूज़ीलैंडः ग्लेन,रचिन का दमदार प्रदर्शन, दिलचस्प हुआ मुक़ाबला

    रचिन रवींद्र
    Image caption: रचिन रवींद्र

    ऑस्ट्रेलिया और मेजबान न्यूज़ीलैंड के बीच दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ का पहला मुक़ाबला वेलिंगटन में खेला जा रहा है.

    दूसरे दिन तक मैच पर ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पकड़ बना ली थी लेकिन तीसरे दिन ऑलराउंडर ग्लेन फिलिप की शानदार गेंदबाज़ी की बदौलत न्यूज़ीलैंड ने कंगारू टीम की दूसरी पारी को 164 रन पर समेट दिया.

    ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 383 रन बनाए, उसने न्यूज़ीलैंड की पहली पारी 179 रन पर समेट दिया. दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक ऑस्ट्रेलिया के दो बल्लेबाज़ महज 12 रन पर आउट हो गए थे.

    इसके बाद तीसरे दिन टी ब्रेक से पहले ही ऑस्ट्रेलियाई पारी 164 रनों पर सिमट गई.

    ग्लेन फिलिप
    Image caption: ग्लेन फिलिप

    इस दौरान न्यूज़ीलैंड के ग्लेन फिलिप ने पांच ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को पवेलियन लौटाया.

    हालांकि न्यूज़ीलैंड की दूसरी पारी की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही और टी ब्रेक से पहले ही उसने अपना एक विकेट गंवा दिया.

    टी ब्रेक के बाद न्यूज़ीलैंड ने 24 रन के अंतराल पर दो और विकेट गंवा दिए.

    इसके बाद रचिन रवींद्र एक छोर से डट गए और नाबाद अर्द्धशतकीय पारी खेली.

    तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक न्यूज़ीलैंड ने तीन विकेट पर 111 रन बना लिए हैं और अभी उसे जीत के लिए 258 और बनाने हैं.

    ऑस्ट्रेलियाई टीम तीन मैचों की टी20 सिरीज़ पहले ही 3-0 से जीत चुकी है.

  13. बिहार से LIVE: औरंगाबाद में पीएम नरेंद्र मोदी की सभा. ज़्यादा जानकारी दे रहे हैं बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े

  14. बेंगलुरु विस्फोट : सीएम सिद्धारमैया ने घायलों से मुलाकात की, कहा-दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे

    सिद्धारमैया
    Image caption: सिद्धारमैया (फाइल फोटो)

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलुरु के रामेश्वर कैफे में शुक्रवार को हुए विस्फोट में घायलों से अस्पताल में जाकर मुलाकात की.

    सिद्धरमैया ने बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड अस्पताल में उनसे मुलाकात की. घायलों को इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. शुक्रवार को हुए विस्फोट में नौ लोग घायल हो गए थे.

    सिद्धारमैया ने कहा है कि विस्फोट के दोषियों पर पक्की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि घटना की विस्तृत जांच हो रही है और जो भी दोषी होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा.

    उन्होंने कहा कि बीजेपी इस मामले को राजनीतिक रंग न दे. बेंगलुरु के व्हाइटफ़ील्ड इलाक़े में स्थित रामेश्वरम कैफ़े में शुक्रवार दोपहर कम तीव्रता वाले आईईडी विस्फोट में 9 लोग घायल हुए हैं. जिसमें एक महिला भी शामिल हैं.

    यह महिला 40 प्रतिशत तक जल गई है, जिन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है. आईटी क्षेत्र में काम करने वाले युवा इस जगह पर खाने-पीने के लिए आते हैं. ये धमाके एक ऐसे इलाक़े में हुए हैं जिसे बेंगलुरु के आईटी हब के रूप में जाना जाता है.

  15. स्पेन की युवती से झारखंड में कथित गैंगरेप का मामला, पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया

    रवि प्रकाश

    बीबीसी हिंदी के लिए, रांची से

    दुमका के एसपी पीतांबर सिंह खेरवार
    Image caption: दुमका के एसपी पीतांबर सिंह खेरवार

    झारखंड के दुमका ज़िले में स्पेन की एक युवती से कथित गैंगरेप के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है. उस युवती के साथ 1 मार्च की देर रात सामूहिक दुष्कर्म, लूटपाट और मारपीट की घटना हुई थी. वे अपने पति के साथ सड़क किनारे एक टेंट में रुकी थीं, तभी यह वारदात हुई.

    दुमका के एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने बीबीसी से बातचीत में इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि स्पैनिश युवती और उनके पति को पुलिस सुरक्षा में दुमका लाया गया है. ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके.

    एसपी खेरवार ने बीबीसी से कहा, “शुक्रवार की रात हंसडीहा थाने की गश्ती टीम कुरमाहाट से गुजर रही थी, तभी स्पैनिश दंपति ने पुलिस टीम को रोककर अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी. वहाँ की पुलिस को उनकी भाषा समझने में दिक़्क़तें हो रही थीं. इसके बावजूद गश्ती टीम उन्हें पास के अस्पताल में ले गई, क्योंकि उन्हें चोट लगी थी और कुछ जगहों से खून भी निकल रहा था. सरैयाहाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उनकी प्राथमिक चिकित्सा की गई.”

    उन्होंने यह भी कहा, “हमलोग तत्काल मौके पर पहुँचे और उनसे बातचीत की. पीड़िता ने बताया कि उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और घड़ी आदि लूट ली गई. इस दौरान उनके साथ मारपीट भी की गई थी.”

    “इसके बाद हमलोगों ने उनसे मिली जानकारी और अभियुक्तों के हुलिया आदि के आधार पर रात में ही तीन लोगों को हिरासत में ले लिया. उनसे पूछताछ की जा रही है. जल्दी ही हम बाकी अभियुक्तों को भी पकड़ लेंगे. स्पेन दूतावास के अधिकारियों को हमने अपने स्तर से सूचना नहीं दी है लेकिन स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों को सारी बात बतायी गई है.”

    दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपरिटेंडेंट अनुकुरण पूर्ति ने बताया, "महिला की ज़िंदगी को किसी भी प्रकार का ख़तरा नहीं है. मेडिकल बोर्ड गठित की गई है. बाहरी चोट दिख रहे हैं. अभी मेडिकल जांच चल रही है."

    झारखंड के मंत्री बाना गुप्ता ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए न्यूज़ एजेंसी एएनआई को बताया, "सरकार पूरी कड़ाई के साथ न्यायसंगत सज़ा दिलाने के लिए अपनी बहनों के साथ खड़ी है."

    वहीं झारखंड के मंत्री मिथलेश कुमार ठाकुर ने भी न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को अपनी प्रतिक्रिया दी है.

    कैसे हुई घटना

    एक स्थानीय पत्रकार ने बीबीसी को बताया कि वह युवती और उनके पति दो अलग-अलग बाइक से हंसडीहा होते हुए बिहार के भागलपुर जा रहे थे. रात होने की वजह से कुरमाहाट के पास सड़क किनारे एक टेंट लगाकर रुक गए. तभी आसपास के कुछ युवक वहां पहुंचे और इस वारदात को अंजाम दिया.

    उन्होंने बताया कि इसकी सूचना मिलने के बाद दुमका के एसपी रात में ही वहां पहुंचे

    पीड़ित युवती और उनके पति को सरैयाहाट के अस्पताल में एडमिट कराया गया. सुबह होने पर दोनों लोग पुलिस सुरक्षा में अपनी-अपनी बाइक से दुमका लाए गए. यहां उनकी मेडिकल जांच करायी जा रही है.

    गोड्डा के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी अपने सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में लिखकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है.

    कांग्रेस ने क्या कहा?

    कांग्रेस की विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी इस घटना की निंदा कर आरोपियों को शीघ्र गिरफ़्तार करने की मांग की है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, “हमारे प्रदेश घूमने आई विदेशी महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना बेहद जघन्य और शर्मनाक है. ऐसी घटना हमारे प्रदेश और समाज दोनों के लिए एक धब्बा है. मेरी सरकार से मांग है आरोपियों की जल्द हो गिरफ़्तारी, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए.”

  16. विश्वास है कि नितिन गडकरी किसानों की वास्तविक स्थिति पर आत्मचिंतन करेंगेः संजय राउत

    संजय राउत
    Image caption: संजय राउत

    कांग्रेस के एक वीडियो पोस्ट और नितिन गडकरी की तरफ से उसपर जवाब आने के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने कहा है कि नितिन गडकरी किसानों की वास्तविक स्थिति पर आत्मचिंतन करेंगे.

    संजय राउत ने कहा, "इस देश के किसानों की हालत खस्ता है. किसानों को खुलेआम देशद्रोही ठहराया जा रहा है. उनकी एमएसपी और मुआवजे की मांग में ग़लत क्या है. मुझे विश्वास है कि नितिन गडगरी किसानों की वास्तविक स्थिति पर आत्मचिंतन करेंगे."

    न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश को इस वीडियो को लेकर एक क़ानूनी नोटिस भेजा है.

    साथ ही यह भी कहा गया है कि गडकरी के ख़िलाफ़ भ्रम फ़ैलाने के इरादे से एक वीडियो शेयर किया गया है. यह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की एकजुटता में दरार पैदा करने की नाकाम कोशिश है.

    कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, "मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी का कहना है- आज किसान को फसल का दाम नहीं मिल रहा है."

    हालांकि इसके जवाब में नितिन गडकरी के दफ़्तर के एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया गया जिसमें कांग्रेस के वीडियो को फर्जी बताते हुए एक वीडियो शेयर करते हुए उसे वास्तविक वीडियो बताया गया है.

    साथ ही पोस्ट में लिखा गया है, "श्री नितिन गडकरी जी के नाम पर कांग्रेस का झूठ."

  17. लालू प्रसाद यादव

    राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि लोग समझ रहे थे कि 'इंडिया' अलायंस बिखर गया है, लेकिन ये अलायंस अब फिर अपने स्वरूप में आ रहा है. उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन ही जीतेगा. बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा कि अपने पूरे राजनीतिक करियर में वे सांप्रदायिक शक्तियों के आगे झुके नहीं हैं और उनके बेटे तेजस्वी यादव भी ऐसी शक्तियों से कभी समझौता नहीं करेंगे.

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  18. गौतम गंभीर ने राजनीति छोड़ने के दिए संकेत, कहा- क्रिकेट से जुड़े काम पर फ़ोकस करना है

    गौतम गंभीर
    Image caption: गौतम गंभीर (फाइल फोटो)

    पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से बीजेपी के सांसद गौतम गंभीर ने राजनीति छोड़ने के संकेत दिए हैं.

    गंभीर ने एक्स पर लिखा है, ''मैंने माननीय पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से अनुरोध किया है कि वो मुझे मेरे राजनीतिक कर्तव्यों से मुक्त करें ताकि मैं क्रिकेट की अपनी प्रतिबद्धताओं पर ध्यान दे सकूं. मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं.''

    इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अम‍ित शाह को टैग करते हुए ल‍िखा,'' मुझे लोगों की सेवा करने का अवसर देने के लिए, धन्यवाद.जय हिंद.''

    गंभीर फिलहाल पूर्वी दिल्ली से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सांसद हैं. गौतम गंभीर टी20 वर्ल्ड कप 2007 और वनडे वर्ल्ड कप 2011 में भारतीय टीम के सदस्य रह चुके हैं.

    पिछले कुछ सालों के दौरान गंभीर कई बार अपनी राजनीतिक टिप्पणियों और खेल के मैदान और उससे बाहर भी विवादों में घिर चुके हैं.

  19. बेंगलुरु में विस्फोट: पुलिस जांच में अब तक क्या पता चला है?

    बेेंगलुरु
    Image caption: रामेश्वरम कैफ़े के अंदर की तस्वीर

    पुलिस ने बेंगलुरू के रामेश्वरम कैफे में आईईडी विस्फोट की जांच पर बयान जारी किया है. बेंगलुरु पुलिस आयुक्त ने कहा है कि घटना की जांच हो रही है. कई टीमें जांच में लगी हैं और कई सुराग भी मिले हैं.

    पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और सुरक्षा के पहलू को ध्यान में रखते हुए मीडिया से अटकबाजियां न करने की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि वो जांच में सहयोग बनाए रखें.

    बेंगलुरु के व्हाइटफ़ील्ड क़े में स्थित रामेश्वरम कैफ़े में शुक्रवार दोपहर कम तीव्रता वाले दो आईईडी विस्फोट में 9 लोग घायल हो गए हैं, जिसमें एक महिला भी शामिल हैं. यह महिला 40 प्रतिशत तक जल गई है, जिन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है.

    ये दो धमाके पांच सेकंड के अंतराल पर हुए हैं. पहला धमाका दोपहर 12:55:32 पर और दूसरा धमाका 12:55:37 मिनट पर हुआ है. ये धमाके एक ऐसे इलाक़े में हुए हैं जिसे बेंगलुरु के आईटी हब के रूप में जाना जाता है.

    आईटी क्षेत्र में काम करने वाले युवा इस जगह पर खाने-पीने के लिए आते हैं.

    पुलिस

    धमाके के बाद से आईटी सिटी कहा जाने वाले बेंगलुरु शहर खबरों में बना हुआ है. इस विस्फोट से बड़ी पैमाने पर आग तो नहीं लगी, लेकिन वॉश बेसिन वाले एरिया में काफी धुंआ पैदा हुआ. इसके बाद वहां पर काफी कीलें और नट बोल्ट बिखरे हुए पाए गए.

    पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि इस धमाके को अंजाम देने वाले शख़्स ने पहले रामेश्वरम कैफ़े में रवा इडली खाई और इसके बाद वॉश बेसिन के पास पेड़ के नीचे बैग रखकर चला गया.

    यह धमाका आईईडी ब्लास्ट है, इसकी पहली आधिकारिक पुष्टि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने की है.

  20. हमास का दावा- इसराइल की बमबारी में मारे गए सात इसराइली बंधक

    इसराइल

    हमास ने दावा किया है कि ग़ज़ा पट्टी में बंधक बनाए गए सात लोगों की मौत हो गई है.

    हमास ने कहा है कि इन बंधकों की मौत इसराइली बमबारी की वजह से हुई है. इसमें उसके भी कुछ लड़ाके मारे गए हैं. हमास ने कहा है कि मारे गए बंधकों की संख्या 70 पार कर सकती है.

    हालांकि बीबीसी हमास के इस दावे की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं कर सका है. ये साफ नहीं है कि जिन सात बंधकों की मौत का दावा किया जा रहा है वो पहले ही मारे जा चुके 31 बंधकों में शामिल हैं या नहीं.

    इसराइल की ओर से इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं आई है और न ही हमास ने कोई पुख्ता सुबूत पेश किया है.

    हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इसराइल पर हमला किया था और बंदूक़ की नोंक पर 253 लोगों को बंधक बना लिया था. इसराइल के मुताबिक़ हमास के इस हमले में उसके 1200 लोग मारे गए हैं.

    इसराइल ने इसके ख़िलाफ़ ज़ोरदार कार्रवाई की थी. उसने बड़े पैमाने पर हमास के ठिकानों पर बमबारी की थी. हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि इसराइली हमले में ग़ज़ा में अब तक 30 हजार फ़लस्तीनी नागरिक मारे गए हैं.

    नवंबर में हमास ने अस्थायी युद्ध विराम समझौते के तहत 105 इसराइली बंधकों को छोड़ा था. इसके बदले में 240 फ़लस्तीनी क़ैदी छोड़े गए थे.

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