सोमवार, 13 अप्रैल 2026

पुरानी दिल्ली की बातें यादें मुलाकातें

 

पुरानी दिल्ली*❤ 


*मेरी प्यारी जन्म स्थली पुरानी दिल्ली*😊



- *"दिल्ली छह 6" --* 

1. *दिल्ली छह के हम रहने वाले हैं !  हर बात साफ साफ कहने वाले हैं !* 

2. *सुबह सुबह उठकर 'बाड़े' में जाना !पटरी पर बैठे परिंदों को दाना खिलाना !* 

3.  *वो कूचा पातीराम की रबड़ी की दुकानें !                                    दूर दूर से आते जहां कुल्हड़ की कुल्फी खाने !* 

4. *सीता राम बाजार की वो चाट पकोड़ी की दुकानें !                हलवा नागोरी जिसे सिर्फ दिल्ली छह वाले ही जानें !* 

5. *'अंदरसे' का नाम तो दिल्ली छह से बाहर कोई जानता ही नहीं है! दिल्ली छह का आदमी कहीं और की मिठाई को मिठाई मानता ही नहीं है !* 

6. *रात को खाने के बाद पैर पान की दुकान की तरफ निकल पड़ते थे !                    राजनीति पर बहस तो करते थे लोग पर कभी नहीं लड़ते थे !* 

7. *चांदनी चौक की शानदार हवेलियों की कहानी !*                          *आज भी सुन जाती हैं बुजुर्गों की जुबानी !* 

8. *छुन्ना मल की हवेली का एक खास किस्सा सुनाया जाता था !                          हर घर के बाहर गाय की रोटी रखने के लिये थड़ा बनाया जाता था !* 

9. *नई सड़क पर व्यापारियों का समूह शुरू से ही आता रहा है !                        दरिया गंज का भव्य नजारा सभी का मन लुभाता रहा है !* 

10. *चितली कबर और जीनत महल का रात को भी दिन जैसा दिखना ! मालीवाड़े के कटरों में हजार वाट के बल्बों का लटकना !* 

11. *मछली वाले और घास वाले हस्पताल सब इलाज मुहैया कराते थे !ज्यादा बात होती थी तो 'इर्विन' तक पहुंच जाते थे !* 

12. *रामलीला मैदान की रामलीला जाने की शाम से ही तैयारी !*                              *वो ढोल ताशे बैंड बाजे के साथ निकलती रामलीला की सवारी !* 

13. *वो उत्साह जो दिल्ली छह में दिख जाता है ! क्या कहीं और वो नजर आता है ?                                                14. सुबह उठकर जल चढ़ाने जाते हुए लोग !*                          *छोटे छोटे घरों में भी पक्षियों के लिये पानी का कुंड लगाते हुए लोग !* 

15. *अभावों में भी लोग यहां  जीवन को* *जिंदादिली से चलाते थे !                      लेकिन चेहरे पर कभी भी मायूसी नहीं लाते थे !* 

16. *पुरानी दिल्ली के लोगों का जीवन भी कमाल है !*                    *उनकी दुख सुख में साथ रहने की खूबी बेमिसाल है !* 

17. *याद है घर छोटा होने पर एक भाई का घर छोड़ जाना !*                               *सारे मोहल्ले का इस पर आंसू बहाना !* 

18. *हर आते जाते को दुआ सलाम करना !                                किसी से बात करने पर अपने आप को छोटा ना समझना !* 

19. *इन सभी यादों के साथ अगर कोई मित्र मिल जाता है !*                                     *तो समझ लेना इसका दिल्ली छह से जरूर कोई नाता है !* 

20. *बंदे हैं हम दिल्ली ६ के, हम पे किसका जोर ,                   चाँदनी चौक में कर्फ़्यू पुलिस खङी तो हम निकल जाते हैं "बाग़दीवार" की ओर !* 

21. *वो गर्मीयो की शाम, और  "छत्तों पर पानी के छिड़काव" के बाद रात को छत्तों पर सोने का आराम !* 

22. *वो "ज्ञानी" का "मैंगो शेक" और "गांधी ग्राउंड" की ताज़ी हवा ,                       वो "डॉक्टर गामी" की दवा !* 

23. *वो "ओमजी कैफ़े" का डोसा ,                                         वो "काके" का नाँन,                       वो "गोल हट्टी" के चावल छोले !* 

24. *वो २६ जनवरी की " परेड का नजारा" , वो होली पर "ग़ुब्बारों में पानी भरना" ,                                वो 15 अगस्त पे "पतंगे लूटना" !* 

25. *और वो चांदनी चौक में "फव्वारा",   जैसे चौपाटी की हो "शान" !                                          और वो  "चोसरिया"  का "पान" ,                                      वो "मोरी गेट" जहां नही थी मोरियां!* 

26. *और वो "चाइना राम" की "कचोरी‍यां" , वो " माली वाड़ा" में "वैद वाड़ा", वो "जोगी वाड़ा" वो पतली गली" !* 

27. *क्या आलीशान थी वो "छुन्ना मल" की हवेली, और वो "हैदर कुली" !* 

28. *वो "दरिया गंज मंडी" की "कड़क चाय", वो "हल्दीराम" की नमकीन !* 

29. *वो "नई सड़क" के "नजारे" , और वो "जीनत महल" की दीवारें !* 

30. *वो"चितली कबर" की सडकें , जहा ना जाने कितने दिल धडके !* 

31. *वो मस्ती से भरी   "यादें ", ऐसी है कुछ हमारे "दिल्ली ६" की बातें !* 

32. *कभी दिल करे तो "दिल्ली 6" का नजारा देखने आना ,*                                  *"दिल्ली 6" वालो से नाता हो तो आगे*  *FORWARD करते जाना* 

     *अपना "दिल्ली 6"* 

       *तो "दिल्ली "ही*

बुधवार, 24 सितंबर 2025

भारत में पावर ऊर्जा

 अप्रैल 2025 तक, भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता 472.46 गीगावाट थी, जिसमें 240 गीगावाट थर्मल पावर और 235.7 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोत (नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा) शामिल हैं। 

भारत में विद्युत क्षेत्र ... चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत वैश्विक स्तर पर बिजली का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और

रविवार, 3 अगस्त 2025

पत्रकारिता का अघोषित ‘‘राजेंद्र माथुर फार्मूला’’/ सुरेंद्र किशोर

 


गोदी मीडिया बनाम विरोधी मीडिया ??

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अपनाइए, फिर तो आपको न कोई ‘‘गोदी मीडिया’’ 

कहेगा और न ही विरोधी मीडिया !

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सुरेंद्र किशोर

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नवभारत टाइम्स के प्रधान संपादक राजंेद्र माथुर के साथ मेरी सन 1983 में हुई एक बातचीत का विवरण से अपनी बात शुरू कर रहा हूं।(मैं इसे पहले भी लिख चुका हूं ,पर माफ कीजिएगा, यहां एक बार फिर लिखना जरूरी हैं) 

सन् 1983 के जून की बात है।

  मैं नई दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ के प्रधान संपादक राजेंद्र माथुर के आॅफिस में बैठा हुआ था।

मैं ‘जनसत्ता’ ज्वाइन करने के अपने निर्णय के बाद माथुर साहब से मिलने गया था।

जबकि, माथुर साहब चाहते थे कि मैं ‘नवभारत टाइम्स’ ज्वाइन करूं।

उससे पहले मैं भी द्विविधा में था।

पर,प्रभाष जोशी से मुलाकात के बाद मेरी द्विविधा समाप्त हो गई थी।

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 मिलते ही माथुर साहब ने, जिन्हें हम आदर से रज्जू बाबू कहते थे, सवाल किया कि आपने हमारा अखबार ज्वाइन क्यों नहीं किया ?

 मैंने उनसे कहा कि ‘‘आपका अखबार दब्बू है।

 वह इंदिरा गांधी के खिलाफ नहीं लिख सकता।’’

मेरी इस बात पर उन्होंने कहा कि

 ‘‘ नहीं सुरेंद्र जी , यू आर मिस्टेकन।

मेरा अखबार दब्बू नहीं है।

 आप इंदिरा जी के खिलाफ जितनी भी कड़ी खबरें  लाकर मुझे दीजिए, मैं उसे जरूर छापूंगा।

पर, इंदिरा जी में बहुत से गुण भी हैं।

मैं उन्हें भी छापूंगा।’’

 उन्होंने यह भी कहा कि ‘एक बात समझ लीजिए।

मेरा अखबार अभियानी भी नहीं है।’’

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साथ में यह भी

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एक अन्य अवसर पर राजेंद्र माथुर ने कहा था कि 

किसी प्रेस, उसके संपादक और पत्रकारों की स्वतंत्रता उतनी ही है जितनी स्वतंत्रता उस अखबार का मालिक अपने पत्रकारों को देता है।

हालांकि जितना देता है, उतनी भी स्वतंत्रता कम नहीं है बशत्र्तें 

संपादक-पत्रकार उसका सदुपयोग करंे।

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अखबार की आर्थिकी पर

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मीडिया के अंध आलोचक अखबार की आर्थिकी को भूल जाते हैं या उसके प्रति अनजान हैं।

 यदि अखबार की एक प्रति 5 रुपए में बिकती है तो उसे तैयार करने में 15 से 20 रुपए लगते हैं।

दुनिया का यही एकमात्र उत्पाद है जो लागत खर्च से कम पर बिकता है।

अब सवाल है कि उसका घाटा पूरा करके उसके मालिक को उससे मुनाफा कैसे होता है ?(कोई अखबार मालिक देश में कोई क्रांति करने के लिए तो अखबार नहीं निकालता।उसे भी मुनाफा चाहिए।)

सरकारी-गैर सरकारी विज्ञापनों से उसका घाटा पूरा होता है।

जिस अखबार को सरकार विज्ञापन नहीं देती है या कम देती है,उसकी ओर से निजी विज्ञापनदाता भी उदासीन हो जाते हैं।

अब आप ही बताइए कि क्या कोई अखबार किसी सरकार के खिलाफ ऐसा अभियान चलाने का खतरा उठा सकता है ताकि प्रतिपक्षी दल उसे ‘‘गोदी मीडिया’’ न कहे ?

हां,अखबार राजेंद्र माथुर फार्मूला अपना सकता है।क्या उतने से आज के विरोधी नेता उस अखबार व उसके पत्रकारों को गोदी मीडिया कहना छोड़ देंगे ?

अब आप समझिए किसी अखबार को बाहर-भीतर कितनी समस्याओं को सामना करना पड़ता है।

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आप पूछिएगा कि तो क्या आज गोदी मीडिया  अस्तित्व में नहीं है ?

मैं प्रति सवाल करूंगा--आजादी के तत्काल बाद से ही क्या हर समय गोदी मीडिया की मौजूदगी नहीं थी ?

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दैनिक सर्चलाइट(पटना) को बिहार सरकार कुछ अन्य मीडिया की तरह ही गोदी मीडिया बनाने में विफल रह तो क्या नतीजा हुआ ?

सर्चलाइट के संपादक टी.जे.एस.जार्ज को 1966 की बिहार सरकार ने  भ्रष्टाचार विरोधी लेखन के कारण जेल भिजवा दिया था।

उन पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाकर हजारीबाग जेल भेजा गया था। 

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प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने एक बड़े अखबार के संपादक बी.जी.वर्गीज को नौकरी से निकलवा दिया था।

प्रधान मंत्री नेहरू ने मशहूर पत्रकार दुर्गादास का

संबंध एक अखबार से विच्छेद करवा दिया था।

नेहरू के तीन मूर्ति भवन में टाइम्स आॅफ इडिया और इलेस्टेटेड वीकली आॅफ इंडिया का प्रवेश बंद था।नेहरू का प्रिय अखबार 

द हिन्दू था जो दिल्ली मे एक दिन बाद आता था।

इस तरह के बिहार के कई उदाहरण हैं।इन पंक्तियों को लेखक भी भुक्तभोगी हुआ है।

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और अंत में

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लोकतंत्र के चार स्तम्भ हैं,यह सब जानते हैं।

यदि मीडिया में हाल के वर्षों में कुछ  गिरावट आई भी है तो क्या 

राजनीतिक कार्यपालिक, प्रशासनिक कार्यपालिका और न्यायपालिका की अपेक्षा कम गिरावट आई है या अधिक ,इस सवाल पर कभी कोई सर्वे हुआ है ?

मीडिया में दशकों तक काम करने का मेरा अनुभव यह कहता है अन्य तीन स्तम्भों की अपेक्षा मीडिया में कम गिरावट आई है।

अपवादों को छोड़कर पत्रकारों के बारे में अधिकतर नेताओं की राय यही रही है कि जो पत्रकार मेरे साथ नहीं है वह मेरे प्रतिद्वंद्वी के साथ है। 

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मंगलवार, 11 मार्च 2025

_प्रकाशकों के लिए नया नियम_

 

प्रस्तुति - मुस्कान


*48 घंटे मे अखबार की डिजिटल कॉपी अपलोड,और 5 तारीख तक भोपाल कार्यालय को हार्ड कॉपी देना अनिवार्य हुआ*



 विषय: प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण अधिनियम के नियम 10 के अनुसार पत्रिकाओं की प्रतियों का वितरण तथा प्रेस सेवा पोर्टल पर समाचार पत्र/पत्रिकाओं के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण को अपलोड करने के संबंध में।आपका ध्यान प्रेस एवं पत्रिकाओं के पंजीकरण नियम 2024 के नियम 10 (1) की ओर आकृष्ट किया जाता है, जिसमें यह प्रावधान है कि प्रकाशक समाचार पत्र के प्रकाशन के 48 घंटे के भीतर समाचार पत्र का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण प्रेस सेवा पोर्टल पर अपलोड करेगा और नियम 10 (2) के अनुसार किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में प्रकाशक समाचार पत्र की भौतिक प्रति उस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में स्थित प्रेस सूचना ब्यूरो के कार्यालय में प्रत्येक माह की 5 तारीख तक उन सभी दिनों के लिए वितरित करेगा, जिनके लिए समाचार पत्र पिछले महीने के दौरान प्रकाशित हुआ था।उपरोक्त नियम 10 के मद्देनजर, पत्रिकाओं के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण को अपलोड करने के लिए प्रेस सेवा पोर्टल पर एक नई कार्यक्षमता विकसित की गई है। तदनुसार, प्रकाशकों को सलाह दी जाती है कि वे नियमितता टैब पर क्लिक करके पोर्टल पर समाचार पत्र/पत्रिका के पहले पृष्ठ को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले मास्टहेड (पीडीएफ/जेपीईजी प्रारूप में) के साथ अपलोड करें। इसके अलावा, प्रकाशकों को सलाह दी जाती है कि वे समाचार पत्र की भौतिक प्रति उस राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में स्थित प्रेस सूचना ब्यूरो के कार्यालय में हर महीने की 5 तारीख तक पहुंचा दें, जिसमें पिछले महीने के दौरान समाचार पत्र प्रकाशित हुआ था।इसके अलावा, पीआरपी अधिनियम 2023 की धारा 7(6) के अनुसार, किसी पत्रिका का प्रकाशक पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर पत्रिका का प्रकाशन शुरू कर देगा। यदि प्रकाशक ऐसा करने में विफल रहता हैएनएस-मिस्कोथर/26/2024-एनपीसीएस(आरएनआई)यदि प्रेस महापंजीयक, पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए गए माह के अंत से 12 महीने के भीतर पत्रिका प्रकाशित नहीं करता है, तो प्रेस महापंजीयक, पंजीकरण प्रमाणपत्र को रद्द कर सकता है तथा शीर्षक को वापस ले सकता है।इसलिए, जिन लोगों ने प्रेस एवं पत्रिकाओं का पंजीकरण अधिनियम, 2023 के तहत अपनी पत्रिकाओं को पंजीकृत किया है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए गए महीने के अंत से 12 महीने के भीतर अपनी पत्रिकाओं का प्रकाशन शुरू कर दें और उनसे अनुरोध है कि वे अपनी पत्रिकाओं की पहली प्रति (खंड 1, अंक 1 - मुखपृष्ठ, शीर्षक सहित) प्रेस सेवा पोर्टल पर अपलोड करें।इसे प्रेस रजिस्ट्रार जनरल के अनुमोदन से जारी किया जाता है।


शुक्रवार, 7 मार्च 2025

भारत में ऑनलाइन पत्रकारिता

  


प्रस्तुति - मुस्कान  😀


भारत में ऑनलाइन पत्रकारिता एक   उभरता हुआ क्षेत्र है जो पारंपरिक मीडिया और बढ़ते ब्लॉगिंग समुदाय के बीच साझा है। बड़ी मीडिया कंपनियाँ, जो पारंपरिक रूप से प्रिंट और टेलीविज़न पर केंद्रित हैं, अब ऑनलाइन पत्रकारिता के माहौल पर हावी हैं, लेकिन समर्पित ब्लॉगर्स का बढ़ता समूह एक स्वतंत्र आवाज़ प्रदान कर रहा है।

विकास

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हालाँकि भारतीय समाचार पत्र 1987 की शुरुआत में ही लेखन और पेज लेआउट के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर रहे थे, लेकिन वे अपने पत्रों के ऑनलाइन संस्करणों की ओर बढ़ने में धीमे थे। 1998 तक केवल अड़तालीस पत्रों के ऑनलाइन संस्करण थे। 2006 तक, गिनती बढ़कर 116 हो गई। यह इस तथ्य के बावजूद है कि 2007 में भारत में 42 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता थे और ऑनलाइन आबादी में इसका स्थान पाँचवाँ था। भारत में बोली जाने वाली भाषाओं की बहुलता के कारण ऑनलाइन समाचार संस्करणों की संख्या विशेष रूप से कम देखी जाती है। आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं में से, ऑनलाइन संस्करणों के सर्वेक्षण में केवल 12 गैर-अंग्रेजी भाषाओं को ही शामिल किया गया था। [ 1 ]

वर्तमान परिवेश

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भारत में इंटरनेट की पहुंच कम है - केवल 3.7%। इसके अलावा, अधिकांश वेबसाइट केवल अंग्रेजी में उपलब्ध हैं, जो दर्शकों की संख्या को शहरी केंद्रों में केंद्रित आबादी के केवल 10% तक सीमित कर देती है। इसके विपरीत, भारत ट्विटर उपयोगकर्ताओं की संख्या में तीसरे स्थान पर है। [ 2 ] लिंक्डइन एक ऐसा समूह प्रदान करता है जो भारत में ऑनलाइन पत्रकारों के सदस्यों को उस सेगमेंट के लिए अद्वितीय सामग्री, कनेक्शन और नौकरी के अवसरों के साथ लक्षित करता है। लोकप्रिय चर्चाएँ सदस्यों को अवसर साझा करने, उद्योग को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर चर्चा करने और इंटरनेट पर प्रकाशन से पहले लेखों के लिए सहकर्मी समीक्षा प्रदान करने का अवसर प्रदान करती हैं। [ 3 ] हाई स्पीड डेटा और 4 जी और एलटीई जैसी तेज़ मोबाइल डेटा सेवाओं के उद्भव के साथ, भारत के कुछ सर्वश्रेष्ठ टीवी पत्रकारों के वीडियो ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं। भारत में दो टीवी समाचार रिपोर्टिंग पावर हाउस एनडीटीवी और सीएनबीसी दोनों की भी मजबूत ऑनलाइन उपस्थिति है सभी क्षेत्रों के पत्रकार - व्यवसाय, राजनीति, खेल और धर्म - एक साथ मिलकर एक सूची तैयार कर रहे हैं, ताकि किसी व्यक्ति या विषय को फॉलो करना आसान हो सके जो किसी को दिलचस्प लग सकता है। [ 5 ]

पारंपरिक मीडिया कम्पनियाँ

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भारत में इंटरनेट 1995 तक निजी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं था। 1998 तक केवल 48 दैनिक समाचार पत्र थे जो इंटरनेट पर संचालित होते थे। 2006 तक यह संख्या लगातार बढ़कर 116 समाचार पत्रों तक पहुँच गई और भारत में अधिक लोगों के वेब तक पहुँच पाने के साथ इसके बढ़ने का अनुमान है। ऑनलाइन प्रारूप अपनाने वाले पहले समाचार पत्र आम तौर पर अंग्रेजी भाषी थे क्योंकि उनके पास वैश्विक पाठक अधिक थे। हालाँकि, जैसे-जैसे अधिक उपयोगकर्ताओं ने पहुँच प्राप्त की, अधिक भारतीय भाषा के समाचार पत्र सामने आने लगे। इनमें से बहुत सी नई वेबसाइटें दैनिक समाचार पत्रों के सामान्य संस्करण थीं और प्रकाशित होने के बाद उन्हें संपादित नहीं किया जाता था। उन्हें न्यूनतम कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाता था। कुछ मामलों में एक एकल संपादक तीसरे पक्ष के पूर्व-स्वरूपित इंटरफ़ेस पर डेटा अपलोड करता था जो स्थानीय समाचार, अंतर्राष्ट्रीय, खेल आदि जैसे सामान्य शीर्षकों के तहत कहानियों को प्रकाशित करने की अनुमति देता था। भारत में अधिकांश ऑनलाइन समाचार पत्रों को अपने वेब संस्करणों के लिए विज्ञापन राजस्व प्राप्त नहीं होता है और प्रमुख समाचार पत्रों को छोड़कर, अधिकांश वेबसाइटें घाटे में चल रही हैं। अधिकांश प्रकाशन वीडियो क्लिप या एम्बेडेड ऑडियो जैसी आधुनिक वेब सुविधाओं को शामिल करने में धीमे रहे हैं। सबसे बड़ी चिंताओं में से एक विज्ञापन राजस्व की कमी के कारण आर्थिक व्यवहार्यता है। भारतीय पत्रकारिता साइटें ऑनलाइन खरीदारी की आधुनिक प्रथा को अपनाने में भी धीमी रही हैं। इसका मतलब यह है कि जब कोई वेबसाइट पर जाता है तो वह सीधे पेपर ऑर्डर करने या विज्ञापनों के माध्यम से उत्पाद खरीदने में असमर्थ होता है। [ 1 ]

आलोचना

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भारत में कई ऑनलाइन समाचार पत्रों की आलोचना इस बात के लिए की जाती है कि उन्हें प्रकाशकों द्वारा सामग्री के बारे में बहुत कम ध्यान दिए जाने के कारण जल्दबाजी में बनाया जाता है। अधिकांश वेबसाइटों में “हमारे बारे में” या फीडबैक जैसी सरल सुविधाओं का अभाव है। जबकि टाइम्स ग्रुप जैसे प्रमुख प्रकाशक अपने लेखकों और संपादकों के ईमेल पते सूचीबद्ध करते हैं, कई छोटे दैनिक समाचार पत्रों में फीडबैक के लिए केवल अपनी वेबसाइट पर एक सरल अंतर्निहित बॉक्स होता है। इससे पाठकों के लिए समाचार पत्र कर्मचारियों के साथ संवाद करना मुश्किल हो जाता है। [ 1 ]

प्रिंट उत्पादों के साथ ऑनलाइन मीडिया, जैसे कि ओपन पत्रिका, मीडिया के अन्य रूपों पर जाँच और संतुलन प्रदान करने में सहायक रही है। ओपन ने खुलासा किया कि बरखा दत्त, जिन्हें व्यापक रूप से भारत की शीर्ष पत्रकार माना जाता है, राडिया टेप विवाद में शामिल थीं, जिस पर प्रिंट मीडिया ने बहुत कम चर्चा की। राडिया, एक लॉबिस्ट, 2 जी वायरलेस स्पेक्ट्रम के उपयोग और बिक्री के संबंध में भ्रष्टाचार में शामिल थी। अपनी प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने का उनका प्रयास उस जुझारू शैली के कारण बाधित हुआ, जिसका उन्होंने उपयोग करने का प्रयास किया। [ 6 ]

टाइम्स ऑफ इंडिया समूह

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टाइम्स ऑफ इंडिया समूह भारत में सबसे बड़ा मीडिया समूह है। इसका प्रमुख समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया है जो 7.65 मिलियन से अधिक दैनिक पाठकों के साथ पाठक संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा अंग्रेजी प्रकाशन है। [ 7 ] यह भारत के सबसे बड़े बिजनेस समाचार पत्र, द इकोनॉमिक टाइम्स का प्रकाशक भी है । टाइम्स ऑफ इंडिया ने 1999 में अपना वेब पोर्टल खोला और 2003 में उन्होंने अपने समाचार पत्र का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण प्रकाशित किया। 8 ] कुछ भारतीय पत्रकारों, जैसे कि प्रख्यात एमजे अकबर ने ऑनलाइन पत्रकारिता में छलांग लगाई है। अकबर 1971 में टाइम्स ऑफ इंडिया में शामिल होने के बाद से पत्रकारिता में काम कर रहे हैं और वर्तमान में इंडिया टुडे समूह और हेडलाइंस टुडे के संपादकीय निदेशक के रूप में संडे गार्जियन का नेतृत्व करते हैं  संडे गार्जियन केवल प्रिंट पेपर से एक ऐसे पेपर में सफलतापूर्वक बदलाव करने के लिए उल्लेखनीय है जिसमें उनके मीडिया पोर्टफोलियो में ऑनलाइन सामग्री शामिल है

दैनिक जागरण

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दैनिक जागरण लगातार 23 वर्षों से भारत का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला समाचार पत्र है, जिसकी दैनिक पाठक संख्या 16 मिलियन से अधिक है। यह भारत में एक बड़े मीडिया समूह जागरण प्रकाशन लिमिटेड (जेपीएल) का प्रमुख प्रकाशन है। जेपीएल ने अपनी सभी डिजिटल पेशकशों को संभालने के लिए 2008 में एमएमआई ऑनलाइन लॉन्च किया। सबसे उल्लेखनीय है jagran.com, जिसने हाल ही में अपने आगंतुकों के लिए पेशकशों की एक विस्तृत श्रृंखला लाने के लिए yahoo.com के साथ गठबंधन किया है। [ 10 ] वेबसाइट एक दिन में 50 अपडेट तक देख सकती है। 2011 में, INEXT को inextlive.com वेबसाइट के साथ फिर से लॉन्च किया गया। इस वेबसाइट को दिनेश श्रीनेत ने लॉन्च किया था। [ 11 ] INEXT भारत में प्रकाशित होने वाला पहला द्विभाषी दैनिक समाचार है। यह वर्तमान में कम से कम 9 विभिन्न प्रमुख शहरों से सामग्री प्रकाशित करता है। सामग्री के प्रबंधन के अलावा एमएमआई ऑनलाइन भी सक्रिय रूप से वेब पेशकशों में अंतराल की तलाश कर रहा है ताकि यह देश में नई सामग्री ला सके। एमएमआई ऑनलाइन भारत को वेब 3.0 में परिवर्तित करने के लिए भी काम कर रहा है। [ 12 ]

एक भारत

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Oneindia.in (ग्रेनियम इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में) एक भारतीय इंटरनेट पोर्टल है - जो भारतीय उपभोक्ताओं, व्यवसायों और वैश्विक भारतीय समुदाय को सामग्री, समुदाय और वाणिज्य प्रदान करता है। 2008 तक, Oneindia.in पिछले 8 वर्षों से इंटरनेट दर्शकों की सेवा कर रहा है (भाषा पोर्टल अप्रैल 2000 से लाइव हैं)। यह सभी दक्षिण भारत की भाषाओं और अंग्रेजी में एक बहुभाषी वेबसाइट है। इस ऑनलाइन मीडिया हाउस की स्थापना बीजी महेश ने की थी। [ 13 ] वन इंडिया ने 2007 में अपना हिंदी पोर्टल लॉन्च किया। [ 14 ] दिनेश श्रीनेत इस वेबसाइट के संपादक थे। ग्रेनियम इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ बीजी महेश ने कहा, “हिंदी इंटरनेट पर दूसरी सबसे लोकप्रिय भारतीय भाषा है और तेजी से नए इंटरनेट उपयोगकर्ता गैर-महानगरों और छोटे शहरों से हैं,” इसलिए यह जरूरी है

भारत में ब्लॉगिंग

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सबसे बड़ी समाचार और मीडिया कंपनियां अब अपने ऑनलाइन ऑफरिंग में ब्लॉग शामिल करती हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी साइटों में एक ब्लॉग सेक्शन है [ 15 ] जैसा कि द इकोनॉमिक टाइम्स में है । [ 16 ] अमेरिकी ऑनलाइन प्रकाशन भी भारतीय बाजार में ब्लॉग पेश कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ब्लॉग इंडिया रियलटाइम में विशेष रूप से नई दिल्ली और मुंबई के पत्रकार कार्यरत हैं और यह भारत में होने वाले मुद्दों के विश्लेषण पर केंद्रित है। [ 17 ] सितंबर 2010 में, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अंग्रेजी भाषा के अलावा हिंदी में इंडिया रियलटाइम ब्लॉग को शामिल करने के लिए अपनी पेशकश का विस्तार किया। [ 18 ] भारत का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला समाचार पत्र दैनिक जागरण भी ब्लॉगों के लिए समर्पित एक साइट चलाता है। [ 19 ]

यह भी देखें

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संदर्भ

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  1. ^यहाँ जाएं:ए बी सी "भारत में ऑनलाइन पत्रकारिता: नेट पर भारतीय समाचार पत्रों का एक खोजपूर्ण अध्ययन"। 13 नवंबर 2009.

  1. ^ वांग, ज़ो (22 अगस्त 2012)। "ऑनलाइन पत्रकारिता और चुनाव रिपोर्टिंग" । 20 मई 2013 को लिया गया ।

  1. "ऑनलाइन जर्नलिस्ट्स ऑफ़ इंडिया" . लिंक्डइन.
  2. "भारत के शीर्ष 5 पत्रकार" । चिलीब्रीज़। मूल से 15 अक्टूबर 2012 को पुरालेखित । 20 मई 2013 को पुनःप्राप्त .
  3. "भारतीय पत्रकार" . ट्विटचिम्प 20 मई 2013 को लिया गया .
  4. ^ शर्मा, बेतवा (दिसंबर 2010)। "भारत की शीर्ष पत्रकार ने टीवी पर अपना बचाव किया - क्या यह कारगर रहा?" हफ़िंगटन पोस्ट । 20 मई 2013 को लिया गया ।
  5. ↑ "भारतीय पाठक सर्वेक्षण" (पीडीएफ) . मूल (पीडीएफ) से 2013-11-26 को पुरालेखित .
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  12. "Oneindia.in ने हिंदी पोर्टल लॉन्च किया" . www.afaqs.com . मूल से 2016-03-01 को पुरालेखित .
  13. "टाइम्स ऑफ इंडिया" .
  14. "इकोनॉमिक टाइम्स" .
  15. "वॉल स्ट्रीट जर्नल" .
  16. "वॉल स्ट्रीट जर्नल" .
  17. "जागरण जंक्शन" .

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