सोमवार, 9 अक्टूबर 2023

आलोक तोमर को जितना जाना / नवीन कुमार

 एक पत्रकार को सिर्फ़ उसकी कही हुई कहानियों के लहजे, उसकी पहुँच और उसके असर की वजह से जाना जाना चाहिए। उसके लिखने की शैली, उसके विषय, उसकी आवाज़, उसकी व्यापकता। कुछ अपवादों को छोड़कर पत्रकार अपने आप में कोई ख़बर नहीं हो सकता। और अपवादों में भी निरंतर तो हरगिज़ नहीं। अगर कोई पत्रकार कहानियाँ नहीं कह रहा है, प्रभावी तरीक़े से लिख, पढ़, बोल नहीं रहा है और उसे चर्चा में बने रहने का चस्का लग चुका है तो उसमें और जॉनी वाकर में कोई फ़र्क़ नहीं। 


कई बार आपको पता नहीं चलता लेकिन आप दरअसल एक विदूषक के तौर पर दर्ज होने लगते हैं। लिखना-पढ़ना सोचना-बोलना कोई एक दिन की बात नहीं है। इसे रोज़ बरतना पड़ता है। रोज़ साधना पड़ता है। रोज़ सुधार करना पड़ता है। लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपने काम की इज़्ज़त करें और उसी में पहचान ढूँढे। आप दो हज़ार चार हज़ार शब्द तरतीब से एक सिटिंग में लिख सकते हैं या नहीं?


पत्रकारिता में मेरे शिक्षक दिवंगत Alok Tomar रोज कहते थे कि तुम्हारी कहानी ही तुम हो। इसी पर बात होगी। अगर इसके अलावा किसी और वजह से तुमपर बात होने लगे तो इतराने की बजाय संभल जाना। यहीं से एक पत्रकार फिसलना शुरु होता है। एक दफा उन्होंने मुझे एक कहानी लिखने के लिए दी। मैंने लिखकर दी तो कहा एक और कॉपी लिखो। कुल पांच दफा लिखवाया। लेकिन जब छठी बार उन्होंने लिखने के लिए कहा तो मैं बिफर गया। मैंने कहा आप मेरी बेइज्जती कर रहे हैं। आपको इसका हक नहीं। मेरी नाराजगी पर वो सिर्फ हंसते रहे कि अभी आप वहां नहीं पहुंचे हैं जहां से इज्जत और बेइज्जती की सोचें भी। हैरानी तब हुई जब उन्होंने अगले दिन उन्होंने नई दुनिया में छपी मेरी कॉपी दिखाई। वो पहली कॉपी थी जो उन्होने लिखवाई थी। मैंने कहा जब आप इसको भेज चुके थे तो पांच बार क्यों लिखवाया। उनका जवाब था अब सारी कॉपी पढ़ो। मैंने कहा सब एकदम अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा यही देखना था। एक ही कहानी को अलग-अलग तरह से विस्तार देने का हुनर और धैर्य तुम्हारे भीतर है या नहीं। इंट्रो लिखने में कितनी मेहनत करते हो। मैं शर्मिंदा था। उस रोज उन्होंने इनाम के तौर पर पहली बार मार्लबोरो सिगरेट पीने के लिए दी थी। ये कहते हुए कि पढ़े-लिखे लोग थोड़े बिगड़े हुए अच्छे लगते हैं। 


आलोक जी बार-बार एक चेतावनी देते थे। जिस दिन स्टार की तरह महसूस करने लगोगे तुम्हारे भीतर का पत्रकार, लेखक, कवि, चिंतक, अध्यापक मरने लगेगा। तुम सड़ने लगोगे। और सबसे ख़तरनाक ये है कि तुम्हें अपने सड़ने की बू महसूस तक नहीं होगी। जबकि वो ख़ुद पत्रकारिता के जगमगाते हुए सितारे थे। 1984 के सिख नरसंहार पर उनकी लिखी रिपोर्टों पर कई पीएचडी हो चुकी। उनका जब एक्सीडेंट हुआ तो प्रधानमंत्री तक ने उनका हाल-चाल लिया था। फिर भी बंगाली मार्केट के फुटपाथ पर बैठकर गप करते हुए कभी एक लकीर तक नहीं आने दी कि उनका काम और नाम कितना बड़ा है। 


12 साल पहले लोधी रोड के मशान में आलोक तोमर को फूंककर वापस लौटते हुए उनके सबक़ याद आते रहे थे। वो  ऐसे विराट शख़्स थे जो बच्चों की तरह झगड़ा करके इंतज़ार करता था कि पहले सॉरी कौन बोलेगा। Supriya जी ऐसी कई लड़ाइयों की मध्यस्थ और निर्णायक रही हैं। पिछले कुछ दिनों से आलोक जी बार-बार जहन में आ रहे थे। मालूम नहीं क्यों।


रविवार, 8 अक्टूबर 2023

बिहार जातीय जनसंख्या का आंकड़ा जारी:



बिहार जातीय जनसंख्या का आंकड़ा जारी:

 पिछड़ों की संख्या 63% से ज्यादा* 


*आजादी के बाद पहली बार बिहार प्रदेश में हुई जाति आधारित गणना: 1931 में पहली बार अंग्रेजों ने कराई थी जातीय जनगणना*

 

*एस.एम.वासिल* 

समाचार दर्शन) :*


बिहार सरकार ने सोमवार को जातीय गणना के आंकड़े जारी कर दिए। इसी के साथ बिहार आजादी के बाद जातिगत आंकड़े जारी करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। वर्ष 1931 में पहली बार देश में अंग्रेजों द्वारा जातीय जनगणना कराई गई थी। बिहार सरकार द्वारा सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग की आबादी 63 फीसदी है, जबकि अनारक्षित वर्ग (हिंदू एवं मुस्लिमों की कुछ जातियां) कुल आबादी का 15.52 फीसदी है।


*दलित-मुस्लिमों की आबादी बढ़ी*


बिहार के विकास आयुक्त विवेक कुमार सिंह ने जातीय गणना के आंकड़े जारी किए हैं। जाति आधारित गणना के 2022 के आंकड़ों की वर्ष 1931 में हुई गणना से तुलना करने पर यह पता चलता है कि पिछड़ों के अलावा अति पिछड़ा, यादव, दलित एवं मुस्लिमों की आबादी में इजाफा हुआ है। वहीं, सवर्णो की आबादी में कमी आई है।


*सवर्णों की आबादी घटी* आंकड़ों के अनुसार, अति पिछड़ा समाज की आबादी 33 फीसदी से बढ़कर 36.01, यादव 10 से बढ़कर 14.26 फीसदी, अनुसूचित जाति (दलित) की आबादी 14.1 से बढ़कर 19.65 प्रतिशत और मुस्लिमों की आबादी 12.5 से बढ़कर 17.70 फीसदी हो गई है। वहीं, सवर्णों (ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ) की आबादी 13 से घटकर 10.56 प्रतिशत रह गई है। ब्राह्मण 4.7 की जगह 3.65 प्रतिशत, भूमिहार 2.9 प्रतिशत की जगह 2.86 प्रतिशत, राजपूत 4.2 प्रतिशत की जगह 3.45 प्रतिशत एवं कायस्थ 1.2 प्रतिशत से कम हो कर 0.60 प्रतिशत रह गए हैं।


*दो चरणों में प्रक्रिया हुई पूरी*


● पहला चरण सात जनवरी से प्रक्रिया, मकानों की गिनती कराई गई।

● दूसरा चरण 15 अप्रैल से शुरू हुआ। परिवारों की संख्या, रहन-सहन, आय के आंकड़े जुटाए गए। 


*यादव सबसे ज्यादा*

सर्वाधिक आबादी यादव (1.86 करोड़) की है। सबसे कम भास्कर जाति की आबादी सिर्फ 37 है।


*देखें क्या बोले नेता: नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार*


आर्थिक स्थिति को विकास का पैमाना बनाएंगे। इस गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है, बल्कि आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है।


*तेजस्वी यादव, उप मुख्यमंत्री, बिहार*

आज ऐतिहासिक दिन है। जाति आधारित गणना की रिपोर्ट से अब गरीबों के लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार को यह काम देशभर में कराना चाहिए।


*गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री*

यह जनता में भ्रम फैलाने के अलावा कुछ नहीं। नीतीश और लालू के कार्यकाल में सरकार ने गरीबों का क्या उद्धार किया, कितनी नौकरी दी, उन्हें इसका रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए।


वहीं अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है जिसकी सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।


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गुरुवार, 5 अक्टूबर 2023

पत्रकारों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव निंदनीय: जेजेए* / हिमांशु सिंह

 


◾दिल्ली में पत्रकारों की गिरफ्तारी के तरीके एवं 15 पत्रकारों को बहिष्कृत करने के निर्णय का भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ ने किया विरोध।




रांची।आज रांची मोहराबादी स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ(ट्रेड यूनियन) की झारखंड राज्य इकाई झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा दिल्ली में पत्रकारों की गिरफ़्तारी के तरीके को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोध प्रदर्शन में शामिल पत्रकारों ने दिल्ली के पत्रकारों के आवास पर अपराधियों की भांति रेड किए जाने को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की। बड़ी संख्या में राजधानी रांची से जुटे पत्रकारों ने पत्रकारों के विरुद्ध दमनकारी नीति का जमकर विरोध किया।

जेजेए प्रदेश अध्यक्ष अमरकांत ने अपने संबोधन में कहा कि हम सभी पत्रकारों के घर पर जिस प्रकार अपराधियों की भांति छापेमारी की गई उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं। उन्हों ने कहा कि वे पत्रकार हैं अग्रवादी अथवा आतंकवादी नहीं, यदि उनसे कोई गलती हुई हो तो कानून समत कार्यवाई होनी चाहिए।

भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के पत्रकार स्वामी दिव्यज्ञान ने अपने संबोधन में कहा कि हम दिल्ली में पत्रकारों की गिरफतरी के साथ साथ 15 पत्रकारों को बहिष्कृत करने का निर्णय भी दुर्भाग्यपूर्ण है जिसकी हम सभी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। झारखंड जर्नालिस्ट एसोसिएशन के संस्थापक सह भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ(ट्रेड यूनियन) के राष्ट्रीय महासचिव शहनवाज़ हसन ने उच्चतम न्यायालय के निर्देष के आलोक में पत्रकारों के साथ अपराधियो की भांति व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। श्री हसन ने कहा कि पिछले एक दशक से पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग लगातार संगठन कर रहा है। श्री हसन ने कहा कि आज हमें पत्रकार और पक्षकार के बीच एक लकीर खींचने की अव्यशक्ता है।

शाहनवाज हसन ने दिल्ली के 15 न्यूज चैनल से जुड़े एंकरों को बहिष्कृत करने को भी दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि यह पत्रकारों को बांटने का प्रयास है जिसकी संघ कड़े शब्दों में निंदा करता है। उन्हों ने कहा कि पत्रकार संगठित होकर ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

आज के धरना प्रदर्शन में बीएसपीएस के स्वामी दिव्यज्ञान, प्रदेश उपाध्यक्ष नवल किशोर सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष संजीत कुमार, उर्दू देनिक कौमी तंजीम के प्रबंधक मो एहसान, फारूकी तंजीम के संपादक गुलाम शाहिद, आशीष पांडेय, रंगनाथ मिश्रा, गुलाम शहीद, सैयद रामीज़, अजय पांडेय, असफर नवाज़,मो अमीर, रुचि शर्मा, अदिति सिंह, कृति सिंह, आसिफ़ नईम, संजय राय, रेहान, धीरज सिंह, कृष्णा, मोहन, आदिल हसन, अजय त्रिपाठी, मो शम्स सहित बड़ी संख्या में रांची के पत्रकार शामिल हुए।


 *हिमांशु सिंह* 

राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी

 *भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ(ट्रेंड यूनियन)*

रविवार, 1 अक्टूबर 2023

कमल शर्मा की नजर में iimc पहले बैच के दोस्त

आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..पहली पोस्‍ट*


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह यादगार बनाने की कोशिश रही। बीते दिनों जब दिल्‍ली प्रेस कल्‍ब में मिलना हुआ और कुछ मित्रों ने जयपुर में यह कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। कच्‍ची सी रुपरेखा थी लेकिन इरादे पक्‍के थे।


भाई अशोक का यह विचार बहुत अच्‍छा था। दिल्‍ली प्रेस कल्‍ब में आए सभी साथियों ने इस पर मुहर लगाई। हालांकि, सुनीता स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से इसमें शामिल नहीं हो पाई। अंत तक उम्‍मीद यही थी कि वह शामिल होगी, लेकिन अब हम सभी को उम्‍मीद है कि अगले कार्यक्रम में वह शामिल होगी पूरी तरह स्‍वस्‍थ होकर।...यद्यपि एक समय यह लगने लगा था कि संभवत: कार्यक्रम रद्द हो या स्‍थगित। फिर रुपपेखा को बदलकर काम पर लगे तो कार्यक्रम सफलता की ओर बढ़ा एवं अंत‍त: 28 सितंबर से साथियों का आना जयपुर शुरु हुआ। 


इस कार्यक्रम में ताराराम की दृढता ने हमारे हौसले को सबसे ज्‍यादा बुलंद किया। मुजफ्फर भाई के पास उनका घर का पता था, जहां स्‍पीड पोस्‍ट भेजी गई। उनके बेटे के पास सूचना पहुंची की कोई स्‍पीड पोस्‍ट से लैटर आया है। उन्‍होंने अपने पापा को फोन पर बताया कि रामपुर से मुजफ्फर जी का पत्र आया है। ताराराम के बेटे गुलशन ने बताया कि पापा जानकार बेहद भावुक हो गए और आंसू उनकी आंखों से टपकने लगे। उन्‍होंने मुजफ्फर भाई को भी फोन किया तत्‍काल और हालचाल लिया, दोनों दोस्‍त अश्रूधारा में नहा लिए। इसके बाद मुझे ताराराम का फोन आया, बस मेरा भी वहीं हाल था जो मुजफ्फर भाई का था। 


ताराराम से व्‍यक्ति को दृढता की प्रेरणा लेनी चाहिए। 28 को उनकी ट्रेन कैंसिल होने के बावजूद अलग अलग ट्रेन पकड़ते हुए 29 की रात 11 बजे जयपुर अपने बेटे के साथ आ पहुंचें। ताराराम से साक्षात मिलकर सभी मित्र गदगद हो उठे। सभी होटल की लॉबी में उनके आने का इंतजार कर रहे थे। सबसे बेहद सुखद क्षण यह मिलन था।

जयपुर कार्यक्रम पर चर्चा जारी रहेगी। 


आज सबसे पहले जयपुर से विदा होने वालों मे जगदीश जिसे मैने स्‍कूटर पर जयपुर रेलवे स्‍टेशन छोड़ा। सवा दो बजे उनकी ट्रेन थी साबरमती एक्‍सप्रेस। जगदीश से जल्‍दी से कहा मिलते हैं और आगे बढ़ गया। रुक नहीं सकता था, अन्‍यथा मुझे पता था मैं तो अभी रो ही पडूंगा कि क्‍या कुछ देर में सभी दोस्‍त अपने अपने शहरों की ओर लौटेंगे। भाई अशोक को होटल के बाहर बातचीत करते हुए हाथ हिलाया। जयपुर से बाहर जाने का मेरा भी शाम का कार्यक्रम था और सभी दोस्‍तों से यह कैसे कह पाऊं कि अच्‍छा भाई जल्‍दी मिलेंगे। सब अपने अपने नीड की ओर चले और मैं स्‍टेशन पर अकेला रह जाता, वह सह नहीं सकता था। अत: मुझे क्षमा करें, वह क्षण रोमांचित भी होता जब हम कहते हैं ट्रेन अभी तक नहीं आई, एक नंबर प्‍लेटफार्म पर आ रही है..अब आ गई। लेकिन ज्‍योंकि गाडी चल देती, अपने को रोक नहीं सकता था। 


गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है

चलना ही ज़िंदगी है, चलती ही जा रही है

गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है

देखो वो रेल, बच्चों का खेल, सीखो सबक जवानों

सर पे है बोझ, सीने में आग, लब पर धुआँ है जानो

फिर भी ये गा रही है, नगमें सुना रही है

गाड़ी बुला सीटी बजा रही हैं


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आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..दूसरी पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह को जयपुर में आयोजित करने की जब तारीख तय हुई तब हमारी सहपाठी रमा ने तत्‍काल अपनी सहयोग राशि ट्रांसफर की। लेकिन, फिर बीच में लगा कि यह प्रोग्राम शायद ही हो या स्‍थगित हो। रमा ने मुझे फोन कर कहा मैं कमल हर हाल में जयपुर आ रही हूं, कोई आए या नहीं। कोई भी नहीं आया तो तुम और मैं ही बैठकर गपशप करेंगे तो भी यह आयोजन ही माना जाएगा। और यदि चार-पांच साथी आए तो भी यह आयोजन ही होगा। लेकिन, ऐसी दृढता से कार्यक्रम सफल हुआ। सख्‍त और दृढ निर्णय रमा का।


हालांकि, रमा के कॉलेज की 30 तारीख की एक अति जरुरी मीटिंग तय हो गई, ऐसे में वह 28 को सुबह आई अपनी कार से। साथ में भाई अशोक भी आए। रमा ने 29 की दोपहर सभी साथियों के सिटी पैलेस सहित जयपुर भ्रमण पर निकलने पर विदा लेते हुए दिल्‍ली रवाना हुई और घर पहुंचकर सूचना भी दी। 


रमा ने कार्यक्रम बना तब भी और जब आई तब भी एक ही बात कही, घूमना फिरना तो होता रहेगा। मैं तो मेरे सहपाठियों से बातचीत करने, गपशप करने आई हूं। 35 साल पुराने अपने दोस्‍तों से मिलने आई हूं। कुछ साथी बीच बीच में कभी कभार मिलते रहे, लेकिन एक साथ इतने साथियों से मिलने का मोह मुझे जयपुर आने से रोक नहीं सकता था।


रमा से 29 की दोपहर बाद आए साथी मिल नहीं सके, रमा का कहना था कि 30 को. काश मीटिंग न होती तो बाकी सभी दोस्‍तों से मिल पाती। खैर, हम सब दिल्‍ली में मिलेंगे क्‍योंकि दिल्‍ली दूर नहीं।

[01/10, 6:43 pm] Iimc Kamal Sharma: *आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..तीसरी पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर में आने की इच्‍छा होने के बावजूद यूनिवर्सिटी का एक जरुरी कार्यक्रम होने से फैसला लेने में दुविधा हो रही थी। हरीश ने मुझे कहा कि मैं बात करता हूं और पूरी कोशिश होगी जयपुर आने की। मैंने भाई हरीश को कहा यदि पूरी कोशिश की बात कह दी तो समझो आप जयपुर में होंगे। 


एक सप्‍ताह के इंतजार के बाद हरीश ने ओके किया और यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की जिम्‍मेदारी दूसरों को सौंप जयपुर पहुंचे। हरीश के आते ही तो बस मजा आ गया। आईआईएमसी की बातें, होस्‍टल की बातें, जीवन की बातें, करियर की बातें..सारे दोस्‍त पांडेय जी रुम में जमे और नाशता-चाय के दौर के साथ खूब बातें। 35 साल पुराने इतिहास में जाने से लेकर वर्तमान तक। 


जब जयपुर पर्यटन पर निकले तो सबसे ज्‍यादा फिटनैस के साथ हरीश को देखकर यही लगा सभी को यह 1987 वाला हरीश ही है। हरीश की यूनिवर्सिटी में चलने वाली पत्रकारिता की पढ़ाई पर भी चर्चा हुई और जान पाए कि अब नया क्‍या है। 1987 और आज की पत्रकारिता एवं पत्रकारिता की पढ़ाने करने आने वाले छात्रों में क्‍या अंतर है। घूमने के साथ, साथ खाना खाने, गपशप करने और देर रात तक बातें करने में ऐसा आनंद आया कि बरबस मुंह से निकल जाता है


मेहफिल रंगीन जमे

दौर चले धूम मचे

मस्त मस्त नज़र देखे नए चमत्कार

जहां चार यार

जहां चार यार मिल जाए

वही रात हो गुलज़ार

जहां चार यार


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आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..चौथी पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम की सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी उठाई भाई अनामी शरण बबल ने। सहयोग राशि जुटाने से लेकर फाइनल बैलेंसशीट तक। 1987 में जिस हंसमुख चेहरे के साथ बबल को देखा था, वही 35 साल बाद भी। बबल के मुस्‍कुराते रहने और चिंता मुक्‍त रहने का ही यह बेहतर असर है कि... कह उठेंगे मेरी त्‍वचा से मेरी आयु का पता नहीं चलता। सबसे बड़ा योग है बबल का यही हंस तु हरदम...।


इस आयोजन को बबल के भरपूर सहयोग, चाहे सभी साथियों को फोन करना हो, बार बार फोन करना हो पूरे धैर्य के साथ, अपनो की मनुहार करने में कि कार्यक्रम में जयपुर आओ..बबल से ज्‍यादा योग्‍य शायद ही कोई साथी हो। कई साथी ने उसे जयपुर पहुंचने में असमर्थता भी जताई, बावजूद उसके वह 22 तारीख तक प्रयास से पीछे नहीं हटा। अति मिलनसार स्‍वभाव की वजह से यह पता था कि बबल सफल होगा...और उसके प्रयासों की वजह से सफल रहा भी।


यहां 29 तारीख को बबल की किताब का विमोचन उसने अपने साथियों से कराया और कहा कि तुम सब से बेहतर कोई विमोचन करने वाला हो नहीं सकता। अलग अलग चुनी हुई बेहतर रिपोर्टस को अपनी किताबों में संवारा है बबल ने। अब पूरी किताब पढ़ी जाएगी और बबल से चर्चा भी होगी। इस बीच, बबल ने अगला कार्यक्रम गया/अयोध्‍या में करने की बात कही और आज गोवा में भी। यह होती है असली दोस्‍ती और दोस्‍तों से मिलने के लिए मचल उठने वाला प्‍यार। 


बबल ने समाचार पत्रों का ग्रुप बना रखा है और मैं देखता हूं कि वह हर रोज खूब समाचार पत्र वहां पोस्‍ट करता है ताकि जल्‍दी और बगैर खर्च के कोई भी आसानी से अग्रेजी-हिंदी के अखबार पढ सकता है। बीबीसी सहित अनेक बेहतर मीडिया हाउस की न्‍यूज के लिंक समय पर पोस्‍ट करना उसकी आदत में शुमार है। हंसते-मुस्‍कुराते हुए जीवन को आगे बढ़ाने का नाम है बबल। 


हँस तू हरदम 

खुशियां या ग़म 

किसी से डरना नहीं, 

डर डर के जीना नहीं 

हँस तू हरदम 

खुशियां या ग़म


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आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..पांचवीं पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम में जगदीश भी किसान रेल रोको आंदोलन की वजह से 29 को तब दोपहर में पहुंचा जब हम सिटी पैलेस लगभग पूरा देख चुके थे। मैंने होटल ऑनर का फोन आने पर कहा चाय नाशता, खाना जो भी कहें इनके रुम में पहुंचा देना और इसके बाद हवामहल पहुंचने का रास्‍ता समझा देना। मेट्रो 10 मिनट में आ जाएंगे। लेकिन जगदीश ने आराम करना ज्‍यादा सुखदायी समझा थकान की वजह से। 


पत्रकारिता की पढ़ाई से एलएलबी और रेलवे की जॉब से अब सुप्रीम कोर्ट के वकील तक का काम। कभी फ्री नहीं बैठे देखा जगदीश को। रेलवे से वीआरएस लेकर पत्रकारिता में पढ़ाने का काम किया, कुछ न कुछ काम करते करते लॉ की पढ़ाई, हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट। यदि कोई आईकार्ड देख ले पुलिस या प्रशासन तो दमखम रहता है कि सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। 35 साल पहले जहां दुबला था वहीं अब भारी भरकम शरीर...शायद सुप्रीम कोर्ट के अनुरुप साइज..सुप्रीम ही होना चाहिए।


जगदीश ने कभी किसी विषय पर चिंता नहीं जताई। हमेशा वह दोस्‍तों को फोन करता रहता है चाहे हालचाल लेने या बस वैसे ही। फकीर, मस्‍त मौला वाली जिंदगी जी है जगदीश ने। गपशप, चर्चा में बढ़चढकर हिस्‍सा लेना। 

जगदीश के लिए 


मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया

हर फ़िक्र को धुँएं में उड़ाता चला गया

बरबादियों का सोग़ मनाना फ़िज़ूल था 

बरबादियों का जश्न मनाता चला गया

मैं ज़िंदगी...

जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया 

जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया

मैं ज़िंदगी...

ग़म और खुशी में फ़र्क न महसूस हो जहाँ 

मैं दिल को उस मुक़ाम पे लाता चला गया

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया



आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..छठी पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम में आने की बात होने पर भाई मुकेश कौशिक ने कहा आना तो है ही जयपुर, य‍ह तो दिल्‍ली प्रेस कल्‍ब में मीटिग के दौरान ही तय हो गया था। विधानसभा चुनावों को लेकर मेरे आफिस की एक मीटिंग भोपाल में है। मीटिंग पूरी होते ही फाइनल बताता हूं कि आ पाऊंगा या नहीं। एक दिन बाद ही बताया आ रहा हूं जयपुर। 29 की सुबह शताब्‍दी से आगमन हुआ। आईआईएमसी में पढ़ाई के दिनों की बात से लेकर अब तक के जीवन पर बातचीत। 


हर पर्यटक स्‍थल की बेहतर जानकारी लेना और देना। एक वीडियो भी तब बना जब जयगढ़ किले में 250 टन की तोप और अब की सेनाओं के तोपखाने में आई परिवर्तन और हथियारों की जानकारी। आईआईएमसी के दिनों की तरह ही मजबूत याददाशत पूरे रिसर्च के साथ। भाई मुकेश का कहना रहा कि इस तरह के आयोजन होते रहना चाहिए और आज 35 साल कई साथियों से मुलाकात या लंबे समय बाद हुई मुलाकात रोमांचक रही। हम एक जगह जुटे, यह बात बताती है कि हम सभी के संबंध गहरे पानी पैठ जैसे हैं।


जोगी चलाए कोई जंतर

खिलेगा तेरा अंतर

तू आजा गुरु मंतर

ये ले ले रे

अपना पराया जो मिले झप्पी ले ले रे

मस्ती की टंकी में तनिक डुबकी ले ले रे

चल बेटा सेल्फ़ी ले ले रे


7


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..सातवीं पोस्‍ट*



आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम की बात हुई दिल्‍ली प्रेस कल्‍ब में साथ बैठे बैठे और मुजफ्फर भाई ने कहा करो यह आयोजन। मैं पक्‍का आ रहा हूं और हमारे सभी साथी आएंगे। सभी से मैं भी बातचीत करूंगा। मुजफ्फर का मतलब होता है विजेता...बस यही तो हमारे मुजफ्फर भाई जिन्‍होंने सभी के दिलों को जीता है। 


आईआईएमसी में पढ़ने के दौरान जो सरल स्‍वभाव जो था, वह आज भी कायम है। आईआईएमसी में हम सभी ने देखा कि मुजफ्फर भाई हाथ से लिखकर मैगजीन तैयार करने, अखबार लिखना, हालचाल लेते रहना समय समय पर और जरुरत पड़ने पर हर संभव सहयोग करना इनसे सीखा जा सकता है। सभी के पते जुटाना शुरु से आदत रही जिसका नतीजा यह हुआ कि हम सभी को खोया हुआ ताराराम मिला। 


असीम को भी उनके घर भागलपुर पत्र लिखा, लेकिन बाद में वे दिल्‍ली में मिले। यदि पते न होते तो पत्र कैसे पहुंचते और हम अपने ही सहपाठियों का पता नहीं लगा पाते। जयपुर मे भी मुजफ्फर भाई एक लिखित प्रश्‍नावली लेकर प्रकट हुए जिसके जवाब उन्‍होंने हाथों हाथ भरकर देने को कहा ताकि वे डेटा अपडेट कर सके।


गंभीरता, संजीदगी, सरलता और सब के साथ दूध में मिश्री की तरह मिल जाना मुजफ्फर भाई से सीखना चाहिए। बस इन खासियत से ही तो ये विजेता बने हैं।


तेरे जैसा यार कहाँ

कहां ऐसा याराना


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*आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..आठवीं पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम आयोजन के समय भरत मीणा से चर्चा हुई। भरत ने तत्‍काल कहा मैं आ रहा हूं, बल्कि सभी साथी सवाई माधोपुर रणथंभौर आते हैं तो मेरे गांव जरुर ठहरे और दाल, बाटी, चूरमा यही खाया जाएगा और आराम भी। जयपुर से जब हम सवाईमाधोपुर जाते हैं तो बीच में भरत का गांव आता है। 


भरत सरकारी सेवा से रिटायर होकर मस्‍त आनंद जी रहे हैं और उस पीढ़ी के साथ भरपूर आनंद ले रहे हैं जहां कहा जाता है पोते-पोती का पहला दोस्‍त दादा होता है। आज भी भरत एकदम स्‍मार्ट और चुस्‍त दुरुस्‍त...। पारिवारिक कार्य होने से भरत हमारे साथ होटल में तो न रुके लेकिन पर्यटन और चर्चा के समय साथ रहे। 30 तारीख के मुख्‍य कार्यक्रम में वे अपने जीवन साथी के साथ पधारें। भाभीजी से मिलकर सभी को प्रसन्‍नता हुई। बेहद सरल और सादगी। साथ ही हमारे साथ दो भाभीजी (मिसेज पांडेय और मिसेज बबल) को भी बढिया कंपनी मिली। 


भरत ने सभी से फिर से राजस्‍थान के किसी दूसरे स्‍थान का कार्यक्रम बनाने का भी आग्रह किया और आगे भी इसी तरह हम साथ साथ हैं..की बात कही। 


हंस ले गा ले यह दिन ना मिलेंगे कल

थोड़ी खुशिया हैं थोड़े से यह पल

एक बार चली गयी जो यह बहारे

लौट के ना आयेंगी गुजरी बहारे

मेला बहारो का आता हैं

इक बार आके चला जाता हैं


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*आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..नौवीं पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम में हमारे सबसे वरिष्‍ठ साथी उपेन्‍द्र पांडेय जीवनसाथी के साथ पधारें। कार्यक्रम बनने के समय वे थोडी दुविधा में थे क्‍योकि हम सब के भतीजे भरत का एक्‍सीडेंट हुआ था और उसे मानसिक रुप से उस भयंकर दुर्घटना से आघात लगा, उपचार चल रहा था। अंतत: जब कुछ राहत दिखी तो पांडेय जी कहा हम आ रहे हैं, हालांकि, 10 अक्‍टूबर को भरत का एक एग्‍जाम होने से उसका आना नहीं हुआ।

बरसों बाद भी पांडेय जी उस तरह दिल दिमाग से यंग..कारण हमेशा अपने को अलग अलग गतिविधियो में एक समय बिजी रखते हैं। 


मेरी मोहब्बत जवाँ रहेगी

सदा रही है, सदा रहेगी


इस कार्यक्रम का सबसे ज्‍यादा आनंद ही पांडेय जी ने उठाया, खूब फोटोग्राफी, खूब वीडियोग्राफी। भाभीजी से पहली बार मिलना हुआl, ग्रेट लेडी। फाइनेंस की दुनिया से जुडी हुई हैं, खासकर शेयर बाजार। स्‍वभाव खूब मिलनसार।


पांडेय जी ने सभी साथियों को उनके बेटे की शादी में आने का निमंत्रण दिया। शादी के समय से पहले वे आमंत्रण पत्रिका भी ग्रुप में भेजेंगे। उन्‍होंने और भाभीजी ने  अयोध्‍या भी आने का न्‍यौता दिया कि आप सभी जनवरी में आए जब रामलला नए मंदिर में विराजेंगे। 


पांडेय जी के बारे में बस इतना कहना होगा


हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गायेगा

दीवाना सैंकड़ों में पहचाना जायेगा




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आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..दसवीं पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम की नींव रखी गई दिल्‍ली प्रेस कल्‍ब में हुई मीटिंग के समय और मुख्‍य विचार दिया भाई अशोक ने। अशोक भाई ने पूरे आयोजन कार्यक्रम की रुपरेखा बहुत बारीकी से बनाने में अहम योगदान दिया। संभवत दिल्‍ली में वे इस आयोजन की चर्चा नहीं छेड़ते तो यह कार्यक्रम शायद ही हो पाता। जयपुर कार्यक्रम की चर्चा चलती रही और सभी साथी चर्चा को आगे बढ़ाते गए, जुडते गए और अंतत: परिवार का यह कार्यक्रम हुआ। 


अशोक भाई भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान की जिस पत्रिका को जन जन तक पहुंचाते हैं उसमें उनकी वह झलक दिखती है जो साथ पढ़ते समय थी। अनुशासनबद्ध और करीने से काम करना एवं नपी तुली बात रखना। आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच का व्‍हाटसएग्रुप बनाना और सभी को जोड़ना एवं ग्रुप पर एक दूजे को साथ रखने और सम्‍पर्क में बने रहने का मंच उपलब्‍ध करवाना अच्‍छा, सार्थक प्रयास है।


भाई अशोक से यह उम्‍मीद है कि वे आगे भी इसी तरह के आयोजनों की रुपरेखा रखें एवं तीन महीने में एक बार सार्वजनिक अवकाश के दिन जूम मीटिंग भी रखवाएं ताकि सभी ऑनलाइन चर्चा कर हाल चाल ले सकें। 


चले थे साथ मिल के चलेंगे साथ मिलकर

तुम्हें रुकना पड़ेगा मेरी आवाज़ सुनकर

चले थे साथ मिल के चलेंगे साथ मिलकर



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आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह..ग्‍यारहवीं पोस्‍ट* 


आईआईएमसी फर्स्‍ट बैच मिलन समारोह जयपुर कार्यक्रम की नींव रखते समय सुनीता में सबसे ज्‍यादा उत्‍साह था, लेकिन आंखों की सर्जरी होने से वह चाहकर नहीं आ सकी। सभी साथियों को उम्‍मीद थी कि वह संभवत: आ जाए यदि डॉक्‍टर ने अलाऊ किया तो। आईआईएमसी में पढ़ते समय सुनीता के सरल स्‍वभाव ने उसे सबसे मिलनसार बना दिया। उम्‍मीद है अगले कार्यक्रम में सुनीता हम सभी के साथ होंगी।

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