रविवार, 29 सितंबर 2024

फल फूल सब्ज़ी से सेहत सुधारे

 

*भोजन द्वारा स्वास्थ्य*


प्रस्तुति - स्वामी शरण 


〰️🍊〰️〰️🍌〰️〰️🍒

 

*केला ::-* 

        ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,

        हड्डियों को मजबूत बनाता है,

        हृदय की सुरक्षा करता है,

        अतिसार  में लाभदायक है, 

        खांसी में हितकारी है।


 *जामुन ::-* 


        केन्सर की रोक थाम , 

        हृदय की सुरक्षा,

        कब्ज मिटाता है,

        स्मरण शक्ति बढाता है,

        रक्त शर्करा नियंत्रित करता है,

        डायबीटीज में अति लाभदायक।


 *सेवफ़ल ::-*


        हृदय की सुरक्षा करता है,

        दस्त रोकता है,

        कब्ज में फ़ायदेमंद है,

        फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है।


*चुकंदर ::-*


        वजन घटाता है,

        ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,

        अस्थिक्छरण रोकता है,

        केंसर के विरुद्ध लडता है,

        हृदय की सुरक्षा करता है।


 *पत्ता गोभी ::- *


       बवासीर में हितकारी है,

       हृदय रोगों में लाभदायक है,

       कब्ज मिटाता है, 

       वजन घटाने  में सहायक है, 

       केंसर में फ़ायदेमंद है।


*गाजर ::-*


       नेत्र ज्योति वर्धक है, 

       केंसर प्रतिरोधक है, 

       वजन घटाने में सहायक है, 

       कब्ज मिटाता है, 

       हृदय की सुरक्षा करता है।


*फूल गोभी ::-*


        हड्डियों को मजबूत बनाता है,

        स्तन केंसर से बचाव करता है,

        प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी, 

        चोंट, खरोंच ठीक करता है।


 *लहसुन:*


        कोलेस्टरोल घटाती है, 

        रक्त चाप घटाती है, 

        कीटाणुनाशक है,

        केंसर से लडती है।


 *शहद ::-*


       घाव भरने में उपयोगे है, 

       पाचन क्रिया सुधारती है, 

       एलर्जी रोगों में उपकारी है, 

       अल्सर से मुक्तिकारक है, 

       तत्काल स्फ़ूर्ती देती है।


 *नींबू ::-*


       त्वचा को मुलायम बनाता है,

       केंसर अवरोधक है, 

       हृदय की सुरक्षा करता है,

       ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है,

       स्कर्वी रोग नाशक है।


*अंगूर ::-*


        रक्त प्रवाह वर्धक है, 

        हृदय की सुरक्षा करता है, 

        केंसर से लडता है, 

        गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, 

        नेत्र ज्योति वर्धक है।


*आम ::-*

        केंसर से बचाव करता है,

        थायराईड रोग में हितकारी है,

        पाचन शक्ति बढाता है, 

        याददाश्त की कमजोरी में हितकर।


 प्याज ::-


        फ़ंगस रोधी गुण हैं, 

        हार्ट अटेक की रिस्क को कम करे,

        जीवाणु नाशक है,

        केंसर विरोधी है, 

        खराब कोलेस्टरोल को घटाना।


 *अलसी के बीज ::-*


        मानसिक शक्ति वर्धक है, 

        रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत दे,

        डायबीटीज में उपकारी है, 

        हृदय की सुरक्षा करता है,

        डायजेशन को ठीक करता है।


 *संतरा ::-*


       हृदय की सुरक्षा करता है, 

       रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत होना,

       श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी,

       केंसर में हितकारी है।


 टमाटर ::-


       कोलेस्टरोल कम करता है, 

       प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी,

       केंसर से बचाव करता है, 

       हृदय की सुरक्षा करता है।


 *पानी ::-*


       गुर्दे की पथरी नाशक है, 

       वजन घटाने में सहायक है, 

       केंसर के विरुद्ध लडता है, 

       त्वचा के चमक बढाता है।


 *अखरोट ::-*


        मूड उन्नत करन में सहायक है,

        मेमोरी  पावर बढाता है,

        केंसर से लड सकता है,

        हृदय रोगों से बचाव करता है,

        कोलेस्टरोल घटाने मेँ मददगार है।


 *तरबूज ::-*


       स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, 

       प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिये हितकारी है, 

       रक्तचाप घटाता है, 

       वजन कम करने में सहायक है


*अंकुरित गेहूं ::-*


       बडी आंत की केंसर से लडता है,

       कब्ज प्रतिकारक है, 

       स्ट्रोक से रक्षा करता है,

       कोलेस्टरोल कम करता है, 

       पाचन सुधारता है।


*चावल ::-*


       किडनी स्टोन में हितकारी है,

       डायबीटीज में लाभदायक है,

       स्ट्रोक से बचाव करता है,

       केंसर से लडता है, 

       हृदय की सुरक्षा करता है।


*आलू बुखारा ::-*


        हृदय रोगों से बचाव करता है,

        बुढापा जल्द आने से रोकता है,

        याददाश्त बढाता है, 

        कोलेस्टरोल घटाता है, 

        कब्ज प्रतिकारक है।


*पाइनेपल ::-*

       अतिसार (दस्त) रोकता है,

       वार्ट्स (मस्से) ठीक करता है,

       सर्दी, ठंड से बचाव करता है,

       अस्थि क्छरण रोकता है ,

       पाचन सुधारता है।


*जौ , जई  ::-*

        कोलेस्टरोल घटाता है,

        केंसर से लडता है, 

        डायबीटीज में उपकारी है,

        कब्ज प्रतिकारक् है ,

        त्वचा पर शाईनिंग लाता है।


*अंजीर  ::-*p

        रक्त चाप नियंत्रित करता है,

        स्ट्रोक्स से बचाता है, 

        कोलेस्टरोल कम करता है, 

        केंसर से लडता है,

        वजन घटाने में सहायक है।


 *शकरकंद ::-*

       आंखों की रोशनी बढाता है,

       मूड उन्नत करता है, 

       हड्डिया बलवान बनाता है, 

       केंसर से लडता है ।

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*सेहत के लिए शुद्ध हींग के क्या फायदे है??*

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* हींग के लाभ*


 भारतीय मसालों में "हींग" एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अपनी सुगंध और औषधीय गुणों के कारण हींग का भारतीय डिशेज में खूब इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा हींग आयुर्वेदिक इलाज  में भी काम आता है। चाहे भारतीय डिशेज में तड़का लगाना हो या फिर अचार और चटनी में महक जोड़नी हो, हींग का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है। वहीं खाने के अलावा हींग के कुछ स्वास्थ्य लाभ भी हैं, जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए।


**** *डाइजेशन सुधारे*****

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हींग अपने पाचन संबंधी गुणों के लिए हमेशा से जाना जाता रहा है। हींग एक नेचुरल कार्मिनेटिव के रूप में काम करता है, जो पेट फूलने, अत्यधिक गैस बनना,सूजन और अन्य पाचन संबंधी परेशानियों को कम करने में मदद करने के लिए जाना जाता है। कढी , दाल,सब्जी सूप, या फिर दूसरी डिशेज में एक चुटकी हींग मिलाने से खाना पचाने में मदद मिल सकती है।

वे सभी लोग जो पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं, उनके लिए हींग एक अच्छे उपचारों में से एक है। इसका उपयोग पेट से संबंधित सामान्य समस्याओं जैसे कि सूजन, गैस, चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम के इलाज के लिए किया जाता है। आमतौर पर हींग का प्रयोग पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए जाना जाता है, लेकिन यह अन्य समस्याओं से भी राहत दिलाने में मददगार है।


** *कई बीमारिओ कम करता है***

 

हींग में ऐसे कंपाउंड पाए जाते हैं, जो ब्लड थिनर्स के रूप में काम करते हैं। इसके अलावा ये ब्लड प्रेशर को कम करने और दिल को हेल्दी बनाने में भी मदद करता है।


*​खांसी, अस्थमा से राहत दिला सकती है हींग*

खाने में हींग को शामिल करना दिल के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का एक स्मार्ट उपाय है।

हींग अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरस और एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण अस्थमा और अन्य सांस संबंधी परेशानियों जैसे ब्रोंकाइटिस और सूखी खांसी से राहत दिलाता है। 

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप अपने डेली रूटीन में हींग का सेवन कर सकते हैं। हींग का पानी रोजाना पीना हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा। इसके लिए आप एक गिलास गर्म पानी में बाजरे के दाने बराबर हींग डालकर मिलाएं। इसे खाली पेट पीने से पाचन संबंधी समस्याओं (पाचन संबंधी समस्याओं के उपचार के उपाय) से राहत मिलती है। सिरदर्द होने पर भी हींग को ड्रिंक का सेवन किया जा सकता है। इस ड्रिंक से आपकी त्वचा को भी फायदा होगा।

हींग पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से भी राहत दिलाने में मदद कर सकता है क्योंकि इसमें नेचुरल ब्लड थिनिंग कंपाउंड पाए जाते हैं। दरअसल, हींग शरीर के किसी भी हिस्से में बाधा डाले बिना ब्लड सर्कुलेशन को सही ढंग से फ्लो करने में मदद करताहै। नतीजतन, ये पीरियड्स के दौरान होने वाले पीठ और पेट के निचले हिस्से के दर्द को कम करता है।


** *​बटरमिल्क के साथ हींग***

बटरमिल्क यानी छाछ आपके पाचन स्वास्थ्य और वजन घटाने के लिए बेहद फायदेमंद है। एक गिलास छाछ में एक चुटकी हींग मिलाकर पीने से आपकी सेहत को और अधिक लाभ मिल सकते हैं। गैस्ट्रिक समस्याओं के लिए, आप दिन में एक या दो बार खाना खाने के ठीक बाद हींग वाला एक गिलास छाछ पी सकते हैं।


हींग एक प्राकृतिक ब्लड थिनर के रूप में भी जानी जाती है, जो रक्तचाप के स्तर (blood pressure level) को कम करने में मदद करती है। साथ ही, हींग में एक यौगिक होता है जो रक्त के थक्कों यानी ब्लड क्लॉटिंग को बनने से रोकता है।

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*** *शुद्ध हींग का वास्तविक मूल्य क्या है*

👉🏽 प्राकर्तिक हींग भारत मे तो पैदा नही होती,,, हमें इसे बाहर के देशों से आयात करना पड़ता है,,, ईरान, अफगानिस्तान, ताज़ाकिस्तान, मे हींग की फसल होती है,,, और लगभग 38 से 40 हज़ार रूपए इसकी कीमत होती है,,,,

लेकिन ये खरीदने मे तो महंगा लगता है,, परन्तु ज़ब इसका उपयोग करते है तो बहुत सस्ता लगता है।

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**** *कैसे इस्तेमाल करे?*****

सबसे पहले आप 1 बोतल ले 100ml या 200ml की उसमे थोड़ा सा टुकड़ा अफगानी हींग 2 gm लगभग डाले,, उसके बाद बोतल को पानी से भऱ ले, और shake कर ले 

पानी का रंग सफ़ेद होजाएगा...

अब उस हींग के पानी को चम्मच से दाल, सब्जी, एवं अन्य खाद्य पदार्थ मे अपने स्वाद अनुसार प्रयोग करे,,


ध्यान रहे ,,, *पहला सुख निरोगी काया*

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 *कुछ अन्य लाभ भी बता रहे है?*

*स्वास्थ्य संजीवनी*

*हींग के चमत्कारिक लाभ:*

1. दांतों में कीडे लग जाने पर रात्रि को दांत में हींग दबाकर सोएँ। कीड़े खुद-ब-खुद निकल जाएंगे। 


2. यदि शरीर के किसी हिस्से में कांटा चुभ गया हो तो उस स्थान पर हींग का घोल भर दें। कुछ समय में कांटा स्वतः निकल आएगा। 


3. हींग में रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है। दाद, खाज, खुजली व अन्य चर्म रोगों में इसको पानी में घिसकर उन स्थानों पर लगाने से लाभ होता है। 


4. हींग का लेप बवासीर, तिल्ली में लाभप्रद है। 


5. कब्जियत की शिकायत होने पर हींग के चूर्ण में थोड़ा सा मीठा सोड़ा मिलाकर रात्रि को फांक लें, सबेरे शौच साफ होगा। 


6. पेट के दर्द, अफारे, ऐंठन आदि में अजवाइन और नमक के साथ हींग का सेवन करें तो लाभ होगा। 


7. पेट में कीड़े हो जाने पर हींग को पानी में घोलकर एनिमा लेने से पेट के कीड़े शीघ्र निकल आते हैं। 


8. जख्म यदि कुछ समय तक खुला रहे तो उसमें छोटे-छोटे रोगाणु पनप जाते हैं। जख्म पर हींग का चूर्ण डालने से रोगाणु नष्ट हो जाते हैं। 


9. प्रतिदिन के भोजन में दाल, कढ़ी व कुछ सब्जियों में हींग का उपयोग करने से भोजन को पचाने में सहायक होती है। 


10. मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानियां जैसे पेट में दर्द और मरोड़ या अनियमित मासिक धर्म में हींग का सेवन करने से फायदे होते हैं। यह औषधि कैंडिडा संक्रमण और ल्यूकोरहोइया से भी छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होता है। 


11. सूखी खांसी, अस्थमा, काली खांसी के लिए हींग और अदरक में शहद मिलाकर लेने से काफी आराम मिलता है। 


12. हींग की मदद से शरीर में ज्यादा इन्सुलिन बनता है और ब्लड शुगर का स्तर नीचे गिरता है। ब्लड शुगर के स्तर को घटाने के लिए हींग में पका कड़वा कद्दू खाना चाहिए। 


13. हींग में कोउमारिन होता है जो खून को पतला करने में मदद करता है और इसे जमने से रोकता है। हींग बढ़े हुए ट्राइग्लीसेराइड और कोलेस्ट्रोल को कम करता है और उच्च रक्तचाप को भी घटाता है। 


14. यह औषधि विचार शक्ति को बढ़ाती है और इसलिए उन्माद, ऐंठन और दिमाग में खून की कमी से बेहोशी जैसे लक्षण से बचने के लिए भी हींग खाने की सलाह दी जाती है। 


15. अफीम के असर को कम करने में हींग मदद करता है। इसलिए इसे विषहरण औषधि भी कहा जाता है। 


16. शोध के अनुसार हींग में वह शक्ति होती है जो कर्क (कैंसर) रोग को बढ़ावा देने वाले सेल को पनपने से रोकता है।

नोट :- *ये सभी लाभ आपको तभी मिलेगे ज़ब आपका हींग 100%शुद्ध हो*

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शुक्रवार, 27 सितंबर 2024

श्राद्ध और पितृपक्ष का वैज्ञानिक महत्व*

 *

*लेखक - डॉ. ओमप्रकाश पांडे*


*(लेखक अंतरिक्ष विज्ञानी हैं तथा भारत तीन पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर, स्व. नरसिम्हा राव जी तथा स्व. अटल बिहारी बाजपेयी जी के विज्ञान एवं तकनीकी सलाहकार रहे हैं )*



श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत में प्रैति कहते हैं, से जुड़ा हुआ है। प्रैति ही बाद में बोलचाल में प्रेत बन गया। यह कोई भूत-प्रेत वाली बात नहीं है। शरीर में आत्मा के अतिरिक्त मन और प्राण हैं। आत्मा तो कहीं नहीं जाती, वह तो सर्वव्यापक है, उसे छोड़ दें तो शरीर से जब मन को निकलना होता है, तो मन प्राण के साथ निकलता है। प्राण मन को लेकर निकलता है। प्राण जब निकल जाता है तो शरीर को जीवात्मा को मोह रहता है। इसके कारण वह शरीर के इर्द-गिर्द ही घूमता है, कहीं जाता नहीं। शरीर को जब नष्ट किया जाता है, उस समय प्राण मन को लेकर चलता है। मन कहाँ से आता है? कहा गया है चंद्रमा मनस: लीयते यानी मन चंद्रमा से आता है। यह भी कहा है कि चंद्रमा मनसो जात: यानी मन ही चंद्रमा का कारक है। इसलिए जब मन खराब होता है या फिर पागलपन चढ़ता है तो उसे अंग्रेजी में ल्यूनैटिक कहते हैं। ल्यूनार का अर्थ चंद्रमा होता है और इससे ही ल्यूनैटिक शब्द बना है। मन का जुड़ाव चंद्रमा से है। इसलिए हृदयाघात जैसी समस्याएं पूर्णिमा के दिन अधिक होती हैं।

चंद्रमा वनस्पति का भी कारक है। रात को चंद्रमा के कारण वनस्पतियों की वृद्धि अधिक होती है। इसलिए रात को ही पौधे अधिक बढ़ते हैं। दिन में वे सूर्य से प्रकाश संश्लेषण के द्वारा भोजन लेते हैं और रात चंद्रमा की किरणों से बढ़ते हैं। वह अन्न जब हम खाते हैं, उससे रस बनता है। रस से अशिक्त यानी रक्त बनता है। रक्त से मांस, मांस से मेद, मेद से मज्जा और मज्जा के बाद अस्थि बनती है। अस्थि के बाद वीर्य बनता है। वीर्य से ओज बनता है। ओज से मन बनता है। इस प्रकार चंद्रमा से मन बनता है। इसलिए कहा गया कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा बनेगा मन। मन जब जाएगा तो उसकी यात्रा चंद्रमा तक की होगी। दाह संस्कार के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होगा, मन उसी ओर अग्रसर होगा। प्राण मन को उस ओर ले जाएगा। चूंकि 27 दिनों के अपने चक्र में चंद्रमा 27 नक्षत्र में घूमता है, इसलिए चंद्रमा घूम कर अठाइसवें दिन फिर से उसी नक्षत्र में आ जाता है। मन की यह 28 दिन की यात्रा होती है। इन 28 दिनों तक मन की ऊर्जा को बनाए रखने के लिए श्राद्धों की व्यवस्था की गई है।

चंद्रमा सोम का कारक है। इसलिए उसे सोम भी कहते हैं। सोम सबसे अधिक चावल में होता है। धान हमेशा पानी में डूबा रहता है। सोम तरल होता है। इसलिए चावल के आटे का पिंड बनाते हैं। तिल और जौ भी इसमें मिलाते हैं। इसमें पानी मिलाते हैं, घी भी मिलाते हैं। इसलिए इसमें और भी अधिक सोमत्व आ जाता है। हथेली में अंगूठे और तर्जनी के मध्य में नीचे का उभरा हुआ स्थान है, वह शुक्र का होता है। शुक्र से ही हम जन्म लेते हैं और हम शुक्र ही हैं, इसलिए वहाँ कुश रखा जाता है। कुश ऊर्जा का कुचालक होता है। श्राद्ध करने वाला इस कुश रखे हाथों से इस पिंड को लेकर सूंघता है। चूंकि उसका और उसके पितर का शुक्र जुड़ा होता है, इसलिए वह उसे श्रद्धाभाव से उसे आकाश की ओर देख कर पितरों के गमन की दिशा में उन्हें मानसिक रूप से उन्हें समर्पित करता है और पिंड को जमीन पर गिरा देता है। इससे पितर फिर से ऊर्जावान हो जाते हैं और वे 28 दिन की यात्रा करते हैं। इस प्रकार चंद्रमा के तेरह महीनों में श्येन पक्षी की गति से वह चंद्रमा तक पहुँचता है। यह पूरा एक वर्ष हो जाता है। इसके प्रतीक के रूप में हम तेरहवीं करते हैं। गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था करते हैं। इसलिए हर 28वें दिन पिंडदान किया जाता है। उसके बाद हमारा कोई अधिकार नहीं। चंद्रमा में जाते ही मन का विखंडन हो जाएगा।

पिंडदान कराते समय पंडित लोग केवल तीन ही पितरों को याद करवाते हैं। वास्तव में सात पितरों को स्मरण करना चाहिए। हर चीज सात हैं। सात ही रस हैं, सात ही धातुएं हैं, सूर्य की किरणें भी सात हैं। इसीलिए सात जन्मों की बात कही गई है। पितर भी सात हैं। सहो मात्रा 84 होती हैं। कैसे? इसे समझें। व्यक्ति, उसका पिता, पितामह, प्रपितामह, वृद्ध पितामह, अतिवृद्ध पितामह और सबसे बड़े वृद्धातिवृद्ध पितामह, ये सात पीढियां होती हैं। इनमें से वृद्धातिवृद्ध पितामह का एक अंश, अतिवृद्ध पितामह का तीन अंश, वृद्ध पितामह का छह अंश, प्रपितामह का दस अंश, पितामह का पंद्रह अंश और पिता का इक्कीस अंश व्यक्ति को मिलता है। इसमें उसका स्वयं का अर्जित 28 अंश मिला दिया जाए तो 84 सहो मात्रा हो जाती है। जैसे ही हमें पुत्र होता है, वृद्धातिवृद्ध पितामह का एक अंश उसे चला जाता है और उनकी मुक्ति हो जाती है। इससे अतिवृद्ध पितामह अब वृद्धातिवृद्ध पितामह हो जाएगा। पुत्र के पैदा होते ही सातवें पीढ़ी का एक व्यक्ति मुक्त हो गया। इसीलिए सात पीढिय़ों के संबंधों की बात होती है।

अब यह समझें कि 15 दिनों का पितृपक्ष हम क्यों मनाते हैं। यह तो हमने जान लिया है कि पितरों का संबंध चंद्रमा से है। चंद्रमा की पृथिवी से दूरी 3,84,400 कि.मी. की दूरी पर है। हम जिस समय पितृपक्ष मनाते हैं, यानी कि आश्विन महीने के पितृपक्ष में, उस समय पंद्रह दिनों तक चंद्रमा पृथिवी के सर्वाधिक निकट यानी कि लगभग 84,300 कि.मी. नजदीक  आ जाता है। उसका परिक्रमापथ ही ऐसा है कि वह इस समय पृथिवी के सर्वाधिक निकट होता है। इसलिए कहा जाता है कि पितर हमारे निकट आ जाते हैं। शतपथ ब्राह्मण में कहा है "विभु: उध्र्वभागे पितरो वसन्ति" यानी विभु अर्थात् चंद्रमा के दूसरे हिस्से में पितरों का निवास है। चंद्रमा का एक पक्ष हमारे सामने होता है जिसे हम देखते हैं। परंतु चंद्रमा का दूसरा पक्ष हम कभी देख नहीं पाते। इस समय चंद्रमा दक्षिण दिशा में होता है। दक्षिण दिशा को यम का घर माना गया है। आज हम यदि आकाश को देखें तो दक्षिण दिशा में दो बड़े सूर्य हैं जिनसे विकिरण निकलता रहता है। हमारे ऋषियों ने उसे श्वान प्राण से चिह्नित किया है। शास्त्रों में इनका उल्लेख लघु श्वान और वृहद श्वान के नाम से हैं। इसे आज केनिस माइनर और केनिस मेजर के नाम से पहचाना जाता है। इसका उल्लेख अथर्ववेद में भी आता है। वहाँ कहा है श्यामश्च त्वा न सबलश्च प्रेषितौ यमश्च यौ पथिरक्षु श्वान। अथर्ववेद 8/1/19 के इस मंत्र में इन्हीं दोनों सूर्यों की चर्चा की गई है। श्राद्ध में हम एक प्रकार से उसे ही हवि देते हैं कि पितरों को उनके विकिरणों से कष्ट न हो।

इस प्रकार से देखा जाए तो पितृपक्ष और श्राद्ध में हम न केवल अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रहे हैं, बल्कि पूरा खगोलशास्त्र भी समझ ले रहे हैं। श्रद्धा और विज्ञान का यह एक अद्भुत मेल है, जो हमारे ऋषियों द्वारा बनाया गया है। आज समाज के कई वर्ग श्राद्ध के इस वैज्ञानिक पक्ष को न जानने के कारण इसे ठीक से नहीं करते। कुछ लोग तीन दिन में और कुछ लोग चार दिन में ही सारी प्रक्रियाएं पूरी कर डालते हैं। यह न केवल अशास्त्रीय है, बल्कि हमारे पितरों के लिए अपमानजनक भी है। जिन पितरों के कारण हमारा अस्तित्व है, उनके निर्विघ्न परलोक यात्रा की हम व्यवस्था न करें, यह हमारी कृतघ्नता ही कहलाएगी।

पितर का अर्थ होता है पालन या रक्षण करने वाला। पितर शब्द पा रक्षणे धातु से बना है। इसका अर्थ होता है पालन और रक्षण करने वाला। एकवचन में इसका प्रयोग करने से इसका अर्थ जन्म देने वाला पिता होता है और बहुवचन में प्रयोग करने से पितर यानी सभी पूर्वज होता है। इसलिए पितर पक्ष का अर्थ यही है कि हम सभी सातों पितरों का स्मरण करें। इसलिए इसमें सात पिंडों की व्यवस्था की जाती है, जिन्हें सप्तपिंडीं या सपिंडीं कहा जाता है। इन पिंडों को बाद में मिला दिया जाता है। ये पिंड भी पितरों की वृद्धावस्था के अनुसार क्रमश: घटते आकार में बनाए जाते थे। लेकिन आज इस पर ध्यान नहीं दिया जाता।

(वार्ताधारित)

✍🏻साभार - भारतीय धरोहर

शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

करेले के गुण सुन सुन सुन

 

करैला 



करेले के गुण

भूमिका

करेला बेल पर लगने वाली सब्जी है। यह आम तौर पर मार्च के अंत में और अप्रैल के शुरू में उत्तर भारत के सब्जी मंडियों में दिखने लगता है। वैसे आजकल किसी भी फल या सब्जी के लिए तय कुदरती महीनों का कोई औचित्य नहीं रह गया क्योंकि अब यह पूरे साल मिलते हैं। फिर भी प्राकृतिक रूप से करेला जायद की फसल का हिस्सा है। इसका रंग हरा होता है। इसकी सतहकरेला पर उभरे हुए दाने होते हैं। इसके अंदर बीज होते हैं। करेला पक जाये तो बीज लाल हो जाते हैं। जब तक पकता नहीं तब तक बीज सफेद रहते हैं। सब्जी और औषधि के रूप में इस्तेमाल करने के लिए कच्चा करेला ही ज्यादा मुफीद होता है।

करेला अपने गुणों के लिए पहले प्रसिद्धि कम पाता रहा है बल्कि अपने कड़ुवे स्वाद के कारण काफी जाना जाता रहा है लेकिन जब तमाम लाइफस्टाइल बीमारियों ने खासकर मधुमेह और रक्तचाप ने बड़ी तादाद में लोगों को दबोचा है तब से करेले को उसके कड़ुवे स्वाद की बजाय मीठे गुणों की बदौलत उपयोग के अलावा सब्जी के रूप में इसका अच्छा खासा उपयोग होता है वहां 15-16 तरीके से करेले बनाने की विधियां मौजूद है। कहने का मतलब यह है कि ज्यादा लोकप्रिय न होने के बावजूद भी करेले में तमाम संभावनाएं लोगों ने सदियों पहले ढूंढ़ ली थीं। गर्मियों में खासकर अरहर उत्पादक क्षेत्रों में भरवां करेले और अरहर की दाल बहुत शौक से खाई जाती है। भिंडी करेले, प्याज करेले, आलू करेले, करेला अचार, आम करेला जैसी तमाम करेले के व्यंजन काफी मशहूर हैं। कानपुर, लखनऊ, बनारस, पटना के इलाकों में गर्मियों में करेले की भुजिया बहुत शौक से खाई जाती है। मगर सबसे ज्यादा करेले का जो व्यंजन मशहूर है वह भरवां करेला ही है।

लेकिन अब करेले को खान-पान से ज्यादा उसके औषधीय गुणों के चलते सम्मान मिल रहा है। यहां तक कि जो लोग करेले की सब्जी को शौक से नहीं खाते वह भी इसके अचूक औषधीय गुणों के चलते मुरीद हैं। कुछ लोग करेले में कई तरह के स्वाद विकसित करना जानते हैं। करेले के कड़ुवेपन को दूर करने के लिए इसे चीरकर इसमें नमक भरकर कुछ घंटों तक रखने का चलन है, बाद में धोकर इसकी सब्जी बनायी जाती है। तब तक करेला का कड़ुवापन या कहे कसैलापन काफी दूर हो जाता है। बुंदेलखंड इलाके में करेले को चूने के पानी से भी धोकर इसके कड़ुवेपन को दूर कर लिया जाता है।

करेला एक लोकप्रिय सब्ज़ी है। करेले का जन्म स्थान पुरानी दुनिया के उष्ण क्षेत्र अफ्रीका तथा चीन माने जाते हैं। करेले का वानस्पतिक नाम मिमोर्डिका करन्शिया है। यहाँ से इनका वितरण संसार के अन्य भागों में हुआ। भारत में इसकी जंगली जातियाँ आज भी उगती हुई देखी गयी हैं। करेले की खेती सम्पूर्ण भारत में की जाती है। इसका फल तथा फलों के रस को दवाओं के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

कड़वे स्वाद वाला करेला ऐसी सब्जी है, जिसे अक्सर नापसंद किया जाता है। लेकिन, अपने पौष्टिक और औषधीय गुणों के कारण यह दवा के रूप में भी काफी लोकप्रिय है। इस मौसम में इसका नियमित सेवन ठंडक भी प्रदान करता है।करेला विभिन्न आकार-प्रकार में पाया जाता है| इसकी चाइनीज वेरायटी 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी होती है| वहां पैदा होने वाला करेला हरे के ऊपर हल्का पीला रंग लिए होता है जो किनारों की ओर मुड़ा हुआ नुकीला और खुरदुरा होता है| इसका रंग हरे के साथ सफेद लिए भी देखा गया है|

करेला एक लता है जिसके फलों की सब्जी बनती है। इसका स्वाद कड़वा होता है। व्यापक रूप से यह  खाद्य फल है, जो सबसे सभी फलों का कड़वा बीच में है के लिए एशिया, अफ्रीका और कैरिबियन में बढ़ा है| वहाँ कई किस्में है कि और फलों की आकृति कड़वाहट में काफी अलग हैं| इस कटिबंधों के एक संयंत्र है, लेकिन इसकी मूल देशी सीमा अज्ञात है|

करेले केे पोषक तत्व

करेला का नाम सुनते ही कड़वेपन का ख्याल आ जाता है। हरे या गहरे हरे रंग की इस सब्जी का स्वाद भले ही मन को न भाए पर इसमें ढेरों एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी विटामिन पाए जाते हैं। करेले का सेवन हम कई रूपों में कर सकते हैं। हम चाहें तो इसका जूस पी सकते हैं, अचार बना सकते हैं या फिर इसका इस्तेमाल सब्जी के रूप में कर सकते हैं। करेले का नूट्रिशनल वैल्यू: करेले में प्रचूर मात्रा में विटामिन A, B और C पाए जाते हैं। इसके अलावा कैरोटीन, बीटाकैरोटीन, लूटीन, आइरन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैगनीज जैसे फ्लावोन्वाइड भी पाए जाते हैं।

कई लोग कड़वा होने के कारण करेले को खाना पसंद नहीं करते लेकिन यह शरीर के लिये काफी लाभदायक होता है। स्वस्थ रहने के लिये खट्टे, मीठे, कसैले, तीखे रस की जरूरत होती है उसी तरह कड़वे रस की जरूरत भी शरीर को होती है। स्वस्थ शरीर के लिये रस की उचित मात्रा की जरूरत होती है। इसमें से किसी भी रस के अभाव होने पर शरीर में विकार उत्पन्न हो जाते हैं। करेला वात विकार, पाण्डु, प्रमेह एवं कृमिनाशक होता है। बड़े करेले के सेवन से प्रमेह, पीलिया और आफरा में लाभ मिलता है। छोटा करेला बड़े करेले की तुलना में ज्यादा गुणकारी होता है। करेला शीतल, भेदक, हलका, कड़वा व वातकारक होता है और ज्वर, पित्त, कफ रूधिर विकार, पाण्डुरोग, प्रमेह और कृमि रोग का नाश भी करता है। करेली के गुण भी करेले के समान है। करेले का साग उत्तम पथ्य है। यह आमवात, वातरक्त, यकृत, प्लाहा, वृध्दि एवं जीर्ण त्वचा रोग में लाभदायक होता है। इसमें विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में होता है। इसमें लोहा, फास्फोरस तथा कम मात्रा में विटामिन सी भी पाया जाता है।

आइए हम आपको बताते हैं करेले से स्वास्थ को होने वाले कुछ फायदों के बारे में |

करेले के गुण

मनुष्य के लिए करेला परम हितकारी और औषधीय गुणों का भंडार है। भूख को बढ़ाकर करेला हमारी पाचन शक्ति को सुधारता है। पचने में करेला हल्का होता है। गर्मी से उत्पन्न विकारों पर शीतल होने के कारण यह शीघ्र लाभ करता है| करेला बेशक खाने में कड़वा हो, लेकिन इसके गुण बेहद मीठे हैं| करेला एक ऐसी सब्जी है, जो काफी सारी बीमारियों को दूर रखने में कारगर साबित होती है| आज हम आपको करेले के फायदों के बारे में बताने वाले हैं|

मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी

करेला मधुमेह में रामबाण औषधि का काम करता है। करेले के टुकड़ों को छाया में सुखाकर पीसकर महीन पाउडर बना लें। रोजाना सुबह खाली पेट एक चम्मच पाउडर का पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। एक-चौथाई कप करेले के रस में समान मात्रा में गाजर का रस मिलाकर पीना फायदेमंद होता है। 10 ग्राम करेले के रस में शहद मिलाकर रोजाना पीने से मधुमेह नियंत्रण में रहता है। 10 ग्राम करेले के रस में 6 ग्राम तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर रोज सुबह खाली पेट पीना लाभकारी है। एक करेले को एक कप पानी में अच्छी तरह उबालकर पिएं। आप इसमें हरे सेब का रस, आंवले का रस या 2-3 चुटकी हींग मिलाकर पी सकते हैं।रोजाना 5 ग्राम करेले का रस पीते रहने वाले लोगों को डायबिटीज में फायदा दिखने लगता है| करेला अन्य औषधियों के समान शरीर के केवल एक अंग या टिशू को ही टाग्रेट नहीं बनाता बल्कि पूरे शरीर के ग्लूकोज मैटाबॉलिज्म पर असर करता है| मधुमेह ठीक करे मधुमेह के लिए भी करेले का जूस काफी फायदेमंद होता है। करेले में इंसुलिन की तरह कई रसायन पाए जाते हैं, जो ब्लड सूगर लेवल को कम करता है। एक असाध्य बीमारी है मधुमेह ‘डायबिटीज’ । करेला मधुमेह के रोगियों के लिए ‘अमृत’ तुल्य है। 100 मिली. के रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है और प्रात: चार किलोमीटर टहलना चाहिए तथा मिठाई खाने से परहेज रखना चाहिए।

त्वचा रोग में भी लाभकारी

इसमें मौजूद बिटर्स और एल्केलाइड तत्व रक्त शोधक का काम करते हैं। करेले की सब्जी खाने और मिक्सी में पीस कर बना लेप रात में सोते समय लगाने से फोड़े-फुंसी और त्वचा रोग नहीं होते। दाद, खाज, खुजली, सियोरोसिस जैसे त्वचा रोगों में करेले के रस में नींबू का रस मिलाकर पीना फायदेमंद है।

करेला रक्तशोधक होता है। चर्म रोगी को भी यह लाभकारी है। फोड़े फुंसी तथा अन्य चर्म रोगों पर करेले का रस लगाने से बहुत लाभ होता है। प्रतिदिन सुबह-शाम आधा चम्मच रस बराबर मात्रा में शहद के साथ लेने से खून की खराबियों को दूर करता है तथा खून साफ हो जाता है। करेला खून की शुध्दि करने में पूरी तरह सक्षम है। यदि त्वचा-रोग हो तो भी रक्त-शुध्दि हेतु करेले का रस कुछ दिनों तक आधा-आधा कप पीना लाभदायक है। इस प्रकार कड़ुवा करेला अनेकों रोगों में औषधि रूप में काम आ सकता है बशर्ते उसे उसी रूप में लिया जाये- रस या सब्जी बनाकर।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए

करेले में मौजूद खनिज और विटामिन शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं जिससे कैंसर जैसी बीमारी का मुकाबला भी किया जा सकता है।

पाचन शक्ति को बढ़ाता है

करेला हमारी पाचन शक्ति को बढाता है जिसके कारण भूख बढती है। करेले ठंडा होता है, इसलिए यह गर्मी से पैदा हुई बीमारियों के उपचार के‍ लिए फायदेमंद है। यदि पाचन शक्ति कमजोर हो तो किसी भी प्रकार करेले का नित्य सेवन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। करेला स्वयं भी शीघ्र पचता है। करेले की तासीर ठंडी होती है। यह पचने में हल्का होता है। यह शरीर में वायु को बढ़ाकर पाचन क्रिया को तेज करता है। इससे पेट साफ होता है। प्रति 100 ग्राम करेले में लगभग 92 ग्राम नमी होती है। साथ ही इसमें लगभग 4 ग्राम कार्बोहाइडेट, 15 ग्राम प्रोटीन, 20 मिलीग्राम कैल्शियम, 70 मिलीग्राम फास्फोरस, 18 मिलीग्राम, आयरन तथा बहुत थोड़ी मात्रा में वसा भी होती है। इसमें विटामिन ए तथा सी भी होती है जिनकी मात्रा प्रति 100 ग्राम में क्रमश: 126 मिलीग्राम तथा 88 मिलीग्राम होती है।

जोड़ों के दर्द से राहत दे

गठिया या जोड़ों के दर्द में करेले की सब्जी खाने और दर्द वाली जगह पर करेले की पत्तों के रस से मालिश करने से आराम मिलता है। करेले तथा तिल के तेल को बराबर मात्रा में लेकर प्रयोग करने से वात रोगी को आराम मिलता है। इस तेल की मालिश करने से गठिया तथा वात के रोग से लाभ होता है

उल्टी-दस्त में फायदेमंद

करेले के तीन बीज और तीन काली मिर्च को घिसकर पानी मिलाकर पिलाने से उल्टी-दस्त बंद हो जाते हैं। अम्लपित्त के रोगी जिन्हें भोजन से पहले उल्टियां होने की शिकायत रहती है, करेले के पत्तों को सेंककर सेंधा नमक मिलाकर खाने से फायदा होता है। अथवा करेले के रस में थोड़ा पानी और काला नमक मिलाकर सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है।

मोटापा से राहत दिलाए

करेले का रस और एक नींबू का रस मिलाकर सुबह सेवन करने से शरीर में उत्पन्न टॉकसिंस और अनावश्यक वसा कम होती है और मोटापा दूर होता है। करेले के रस को नींबू के रस के साथ पानी में मिलाकर पीने से वजन कम किया जा सकता है। वजन कम करना करेले में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह शरीर के मेटाबोलिज्म और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।

पथरी रोगियों के लिए अमृत

पथरी रोगियों को दो करेले का रस पीने और करेले की सब्जी खाने से आराम मिलता है। इससे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है। 20 ग्राम करेले के रस में शहद मिलाकर पीने से पथरी गल कर पेशाब के रास्ते निकल जाती है। इसके पत्तों के 50 मिलीलीटर रस में थोड़ी-सी हींग मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है। पथरी होने पर करेले का रस नियमित सेवन करना चाहिए। इससे पथरी गलकर निकल जाती है। पथरी गुर्दे की हो या मूत्राशय की, इसे तोड़कर बाहर निकालने की क्षमता करेला रखता है। करेले का रस दिन में दो बार और दोनों समय भोजन में करेले की सब्जी खानी चाहिए।

हैजे में राहत

हैजे के रोगी को करेले के रस में प्याज का रस और कुछ बूंदे नींबू का रस मिलाकर देना लाभदायक है। ताजा करेला कुचलकर, इसमें हल्का, नमक डालकर हैजे के रोगी को दें, 2-3 बार लेने से उल्टी-दस्त बंद हो जाते हैं। खूनी बवासीर में एक बड़ा चम्मच करेले का रस शक्कर मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन तक लें

खूनी बवासीर में आराम मिलता है

खूनी बवासीर में एक बड़ा चम्मच करेले का रस शक्कर मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन तक लें| करेले और पत्तों का रस एक चम्मच शक्कर मिलाकर पीने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है। बवासीर होने पर एक चम्मच करेले के रस में आधा चम्मखच शक्कर मिलाकर एक महीने तक प्रयोग करने से बवासीर की शिकायत समाप्त हो जाती है।

त्वचा रोग में राहत दे

करेले के पत्तों को पत्थर पर घिसकर चटनी जैसा बनाकर लेप लगाने से त्वचा के रोग ठीक हो जाते हैं। इससे आग से जलने से होने वाले घावों में भी आराम मिलता है। नमी अधिक तथा वसा कम मात्रा में होने के कारण यह गर्मियों के लिए बहुत अच्छा है। इसके प्रयोग से त्वचा साफ होती है। इसके इस्तेमाल से किसी प्रकार के फोड़े-फुंसी नहीं होते। यह भूख बढ़ाता है। मल को शरीर से बाहर निकालता है। मूत्र मार्ग को भी यह साफ रखता है।

सिरदर्द में करेले के रस का लेप लगाएं

सिरदर्द होने पर करेले के रस का लेप लगाने से आराम मिलता है।

मुंह में छाले हैं, करेले के रस से कुल्ला करें

मुंह में छाले होने पर करेले के रस का कुल्ला करना फायदेमंद है। मुंह में छाले होने पर करेले के रस को गर्म करके उसमें पिसी हुई फिटकरी डालकर कुल्ला करने से छाले खत्म हो जाते हैं।

रतौंधी में राहत दे

करेले के रस में पिसी काली मिर्च अच्छी तरह मिलाएं। यह लेप आंखों के बाहरी हिस्से पर लगाने से रतौंधी की बीमारी दूर होती है। इसमें विटामिन ए अधिक होने के कारण यह आंखों की रोशनी के लिए बहुत अच्छा होता है। जिन लोगों को रतौंधी की बीमारी होती है उन्हें इसका इस्तेमाल करना चाहिए। इसके पत्तों के रस का लेप थोड़ी सी काली मिर्च मिलाकर लगाना चाहिए। रतौंधियों में शाम होते ही अचानक दिखना बंद हो जाता है और जैसे ही सुबह सूरज निकलता है आंखें बिल्कुल सामान्य हो जाती है। रतौंधी में करेले का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है। करेले में विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पायी जाती है। जिस कारण इसका इस्तेमाल शरीर में मॉस्चर बनाये रखता है।

जिगर को ठीक करे

जिन बच्चों का जिगर खराब होता है,पेट साफ नहीं होता और पानी पीने से पेट फूल जाता है। उन्हें आयु के हिसाब से एक या आधा चम्मच करेले का रस में पानी मिलाकर पिलाने से बढ़ा हुआ जिगर ठीक हो जाता है और पेट में भरा पानी साफ हो जाता है।

पेट के कीड़े साफ हो जाएंगे

एक बड़ा चम्मच करेले के पत्तियों के रस को एक गिलास छाछ में मिलाकर लेने से पेट के कीड़ों से छुटकारा मिल सकता है। यह लीवर को ताकत देता है तथा आँतों में कीड़ों से होने वाले विकारों से भी सुरक्षा देता है। पेट में कीड़े होने पर इसका रस रामबाण औषधि है। कीड़े होने पर करेले का रस ग्रहण करना चाहिए।

कब्ज में लाभकारी

करेले में फाइबर के गुण पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता हैं। साथ ही यह अपच और कब्ज की शिकायत को दूर करता है। कब्ज के रोगियों को चाहिए कि इसकी सब्जी नियमित खायें और इसका रस सेवन करें, कब्ज से छुटकारा होगा। करेले की सब्जी खाने से कभी कब्ज नहीं होती यदि किसी व्यक्ति को पहले से कब्ज हो तो वह भी दूर हो जाती है। इससे एसिडिटी, छाती में जलन और खट्टी डकारों की शिकायत भी दूर हो जाती है।

पीलिया में अचूक

पीलिया और मलेरिया जैसे बुखार में करेले को पीसकर निकाले गए रस को दिन में दो बार पिलाना चाहिए। पीलिया में कच्चा करेला पीसकर खाना फायदेमंद है। लीवर से संबंधित बीमारियों के लिए तो करेला रामबाण औषधि है। जलोदर रोग होने पर आधा कप पानी में 2 चम्मच करेले का रस मिलाकर ठीक होने तक रोजाना तीन-चार बार सेवन करने से फायदा होता है। लीवर को रखे निरोग अगर आपको लीवर की समस्या है तो फिर आप हर दिन एक ग्लास करेले का जूस पीएं। अगर आप एक हफ्ते तक ऐसा करेंगे तो परिणाम खुद नजर आने लगेंगे।

खसरा है, इसे अजमाएं

खसरा होने पर दो चम्मच करेले के रस में एक चम्मच शहद और दो चुटकी हल्दी मिलाकर दिन में दो बार लेना फायदेमंद है।

अस्थमा में आराम दे

एक कप पानी में दो चम्मच करेले का रस, तुलसी के पत्तों का रस और शहद मिलाकर रात में सोते समय पीने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों में आराम मिलता है। दमा होने पर बिना मसाले की छौंकी हुई करेले की सब्जी खाने से फायदा होता है।

कफ में आराम दे

कफ की शिकायत होने पर करेले का सेवन करना चाहिए। करेले में फास्फोरस होता है जिसके कारण कफ की शिकायत दूर होती है।

मुहांसे मिटाए

करेले के सेवन से चेहरे के दाग-धब्बों, मुहांसों और स्किन इंफेक्शन से भी छुटकारा मिलता है। हर दिन खाली पेट में करेले के जूस को नींबू के साथ मिलाकर छह महीने तक पीएं। या फिर आप इसे तब तक जारी रखें जब तक कि आपको फायदा न पहुंचने लगे।

हृदय रोग में फायदा

करेला दिल के लिए कई मायनों में काफी फायदेमंद होता है। यह अर्टरी वॉल पर इकठ्ठा होने वाले खराब कोलेस्ट्रोल को कम करता है, जिससे हॉर्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही यह ब्लड सूगर लेवल को भी कम करता है, जिससे दिल तंदुरुस्त बना रहता है

करेले की खेती


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