गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ सत्या फाउंडेशन की पहल

 

डी.जे. और पटाखों के पूर्ण बहिष्कार का लिया संकल्प, साइलेंस जोन में पूर्ण शांति के लिए उठी जबरदस्त आवाज 

 

वाराणसी, 24 अक्टूबर 2024


सामाजिक संस्था 'सत्या फाउण्डेशन' द्वारा ध्वनि प्रदूषण को लेकर जागरूकता अभियान के तहत आज सेठ एम.आर. जैपुरिया स्कूल, बनारस पड़ाव परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने आतिशबाजी और डी.जे. के पूर्ण बहिष्कार की शपथ ली। वैसे  कहने को तो यह कार्यक्रम दीपावली के ठीक पहले पटाखे को ध्यान में रखकर किया गया था लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसी-ऐसी बातें बताई गईं जो विद्यार्थियों को जीवन भर काम आयेंगी।   


सत्या फाउण्डेशन के सचिव चेतन उपाध्याय ने शुरू में ही विद्यार्थियों से कहा कि हम जोर लगा कर या दबाव बना कर आपसे बात मनवाने के लिए नहीं आये हैं। हम तर्क और विज्ञान के आधार पर बात करेंगे और मानना या न मानना आपके ऊपर निर्भर करता है।  


सत्या फाउण्डेशन के सचिव चेतन उपाध्याय ने उदाहरण के साथ संगीत और शोर के बीच का अंतर बताया।  फिर कहा कि आज से 500 साल पहले जब लाउडस्पीकर नहीं हुआ करता था, उस  समय कबीर दास जी ने अल्लाह का नाम जोर से लेने की आदत पर तंज कसा था कि क्या अल्लाह बहरा है जो उसे खुश करने के लिए इतनी जोर से लोग चिल्लाते हैं।  कबीर दास जी की आत्मा जरूर रोती होगी कि 21वीं सदी  में ऐसे नेता और जनता हो गई जो लाउडस्पीकर और  डीजे में भगवान खोजने लगी. 

 

आगे कहा कि चिकित्सा शास्त्र के मुताबिक़ डीजे या पटाखे से हृदयाघात के साथ ही गर्भपात भी हो सकता है। ऐसा उल्लेख हमारे शास्त्रों में भी मिलता है कि किस प्रकार से जब हनुमान जी संजीवनी बूटी (पहाड़) लेकर उड़ रहे थे और तेज गर्जना से नीचे जमीन पर बस्ती में भीलनी का गर्भपात हो गया था। 


चेतन उपाध्याय ने शांत क्षेत्र यानी "साइलेंस जोन" का कानूनी अर्थ बताया और कहा कि जनता के व्यापक हित में इसका व्यापक प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि साल के 365 दिन, लोग इसका फायदा उठा सकें।  पर्यावरण संरक्षण अधिनियम- 1986 के मुताबिक, दिन हो या रात: स्कूल-कॉलेज-विश्वविद्यालय, अस्पताल-नर्सिंग होम, मंदिर- मस्जिद-गुरुद्वारा-गिरिजाघर और कोर्ट-कचहरी के 100 मीटर के दायरे में बैंड-बाजा, लाउडस्पीकर, डीजे, आतिशबाजी और यहां तक कि स्कूटी का हॉर्न बजाना भी कानूनन जुर्म है और दोषी को ₹100000 तक जुर्माना या 5 साल तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है।  मगर दु:ख की बात यह है कि इस देश में कुछ लोग साइलेंस जोन में से ही धार्मिक जुलूस और बारात लेकर जाते हैं और जब इसके रिएक्शन में कुछ होता है तो रिएक्शन करने वालों पर ही कार्रवाई हो जाती है मगर साइलेंस जोन में शोर करने वाले उपद्रवी तत्वों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। 

कायदे से सरकार और प्रशासन का यह दायित्व है कि पूरे देश में साइलेंस जोन के चेतावनी बोर्ड सभी अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, कोर्ट और पूजा-उपासना स्थलों के आसपास लगाए जाएं और नियम तोड़ने वालों पर सख्त विधिक कार्रवाई की जाए।  इतनी जानकारी मिलने के बाद सभी विद्यार्थियों ने कहा कि हिन्दुस्तान में ऐसी कोई सड़क ही नहीं है जिसके किनारे पूजा स्थल, अस्पताल, शिक्षण संस्थान और कोर्ट न हो, इसलिए बिना किसी झिझक और देरी के सरकारों को रोड डी.जे. पर तो पूर्ण प्रतिबंध लगाने में कोई देरी नहीं करनी चाहिए। इस सभा में इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया गया कि 1986 में बने कानून के मुताबिक 5 साल तक की जेल या ₹1,00,000 तक का जुर्माना या एक साथ दोनों सजा का प्रावधान था और और आज 38 साल बाद भी जुर्माने की राशि वही है जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके बाद जब तालियां बजने लगीं तो चेतन उपाध्याय ने कहा कि यह तालियां इतनी जोर से बजाइये कि यह आवाज लखनऊ के 5, कालिदास मार्ग और नई दिल्ली के 7, लोक कल्याण मार्ग तक भी पहुंच जाए और साइलेंस जोन के नियम का पूरे देश में सख्ती से अनुपालन हो। 


 इसके बाद चेतन उपाध्याय ने कहा कि शुद्ध हवा, शुद्ध जल और संतुलित भोजन के अभाव में हिंदुस्तान की एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है जो बीमार तो है लेकिन दवाइयां के भरोसे घरों में रहती है। क्या हर घर में रहने वाली ऐसी बीमार आबादी को उत्सव के नाम पर तेज लाउडस्पीकर, पटाखा और डीजे अच्छा लगेगा? क्या आबादी के इलाके में रहने वाले ऐसे लोगों को हॉर्न का शोर अच्छा लगेगा? लिहाजा घर से जब भी निकलें, 10 मिनट जल्दी निकल निकलें ताकि रास्ते भर, हॉर्न नहीं बजाना पड़े।  


फिर बच्चों को हँसते-हँसाते एक सलाह भी दे डाली कि जिनको डी.जे. और पटाखे की आवाज और रोशनी का बहुत ज्यादा ही शौक है तो इंटरनेट से डाउनलोड कर लीजिये और हेडफोन लगाकर देखते-सुनते रहिये लेकिन हम अपने मनोरंजन के लिए दूसरों को पागल क्यों करते हैं। 


बच्चों ने छुड़ा दिया मेरा पटाखा :-


विशिष्ट वक्ता के रूप में बनारस प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल के कर्ता धर्ता और प्रसिद्द बर्न, प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जन,  डा. प्रशांत बरनवाल ने कहा कि दीपावली पर पटाखे नहीं, दिए जलाएं। कहा कि कितनी भी सावधानी से पटाखे को जलाया जाए, अच्छे-अच्छे लोगों से चूक हो ही जाती है और अपने मेडिकल करियर में उन्होंने ऐसे केस भी देखे हैं कि जब पटाखे के कारण हाथ बुरी तरह से जलने से नसें फट गईं और फिर जिंदगी भर के लिए हाथों से काम करना असंभव हो जाता है।  डॉ. प्रशांत बरनवाल ने कहा कि आज उनका बेटा इंजीनियर है और बेटी बेंगलूरु में काम करती है और किसी जमाने में बच्चों की खुशी के लिए, रिस्क लेकर भी थोड़े बहुत पटाखे जला लेते थे मगर हमारा पूरा परिवार कई वर्षों से पटाखे नहीं जलाता।  इसका कारण यह है कि 'सत्या फाउंडेशन' के चेतन उपाध्याय ने वर्षों पहले बच्चों के स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में अपने उद्बोधन से मेरे बच्चों के मन मस्तिष्क पर ऐसा प्रभाव डाला कि बच्चों ने घर आकर कहा कि पापा हमें पटाखे एकदम ही नहीं जलाने हैं। उसके बाद से हमारे परिवार ने पटाखे की तरफ देखा भी नहीं।  जब बच्चे पटाखे नहीं जलाएंगे तो हम कैसे जला सकते हैं? लिहाजा उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे अपने माता-पिता और अभिभावकों को समझाएं कि पटाखे नहीं खरीदें क्योंकि बच्चों की खुशी के लिए ही कई बार अभिभावक लोग पटाखे खरीदने लगते हैं।  अगर आप घर में जाकर अपने माता-पिता को समझाएंगे और जब आप बोलेंगे तो माता पिता आपकी बात जरूर सुनेंगे।  फिर से कहा कि दीपावली में दिया जलाएं, पूजा करें और पटाखों का बिल्कुल इस्तेमाल न करें।


(चेतन उपाध्याय)

सत्या फाउण्डेशन 

9212735622

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2024

मीडिया के विविध प्रसंग / अनामी शरण बबल


ब्लॉग यूट्यूब व्हाट्सप्प पॉडकास्ट फेसबुक के अलावा सोशल मीडिया के और कौन कौन से नये प्लेटफॉर्म चल रहे है या लोकप्रिय हो  रहे है या आने के लिए बेताब है?



Meta AI: 


सोशल मीडिया के क्षेत्र में नए और लोकप्रिय प्लेटफ़ॉर्म निम्नलिखित हैं:


1. टिक्टोक: छोटे वीडियोज़ के लिए प्रसिद्ध प्लेटफ़ॉर्म।

2. इंस्टाग्राम रील्स: इंस्टाग्राम पर छोटे वीडियोज़ की सुविधा।

3. ट्विच: लाइव स्ट्रीमिंग और गेमिंग के लिए प्रसिद्ध प्लेटफ़ॉर्म।

4. डिस्कॉर्ड: समुदाय निर्माण और संचार के लिए प्लेटफ़ॉर्म।

5. टेलीग्राम: सुरक्षित और व्यक्तिगत संदेश सेवा।

6. स्नैपचैट:临时 संदेश और कहानियों के लिए प्रसिद्ध प्लेटफ़ॉर्म।

7. रेडिट: समुदाय-आधारित मंच चर्चा और साझाकरण के लिए।

8. पिंटरेस्ट: छवियों और वीडियोज़ के संग्रहण और साझाकरण के लिए।

9. मEDIUM: लंबे और गुणवत्तापूर्ण लेखों के लिए प्लेटफ़ॉर्म।

10. क्लबहाउस: ऑडियो-आधारित सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म।


आने वाले प्लेटफ़ॉर्म:


1. मेटावर्स: वर्चुअल रियलिटी आधारित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म।

2. पॉलिगन: वेब3 आधारित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म।

3. ब्लॉकचेन आधारित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म: सुरक्षित और विकेंद्रीकृत सोशल मीडिया के लिए।

4. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आधारित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म: व्यक्तिगत अनुभव के लिए एआई का उपयोग।


धीरे धीरे newspaper की जगह मोबाइल कंप्यूटर ने ले लिया है? इतने साधन और पल पल की खबर देने वाले माध्यमो के सामने तो मीडिया का चरित्र ही बदल गया है?


Meta AI: 


न्यूज़पेपर की जगह मोबाइल और कंप्यूटर ने ले ली है, और इसके साथ ही मीडिया का चरित्र भी बदल गया है। अब लोगों को खबरें पल-पल अपडेट मिलती हैं और वे अपने मोबाइल और कंप्यूटर पर ही समाचार देख सकते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे कि फ़ेसबुक, ट्विटर, और व्हाट्सएप पर भी लोग समाचार साझा करते हैं और पढ़ते हैं ¹।


इस बदलाव के साथ ही, मीडिया के व्यवसायिक मॉडल में भी बदलाव आया है। अब ऑनलाइन विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप मीडिया कंपनियों के लिए आय के महत्वपूर्ण स्रोत बन गए हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लोग अपने विचार और राय साझा कर सकते हैं, जिससे मीडिया में लोगों की भागीदारी बढ़ी है ²।


*मीडिया में बदलाव के कुछ मुख्य बिंदु:*


- _ऑनलाइन समाचार_: अब लोग ऑनलाइन समाचार पढ़ते हैं और पल-पल अपडेट रहते हैं।

- _सोशल मीडिया_: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लोग समाचार साझा करते हैं और पढ़ते हैं।

- _ऑनलाइन विज्ञापन_: ऑनलाइन विज्ञापन मीडिया कंपनियों के लिए आय के महत्वपूर्ण स्रोत बन गए हैं।

- _लोगों की भागीदारी_: ऑनलाइन मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लोग अपने विचार और राय साझा कर सकते हैं।



भविष्य में यानी 2045-50 तक तो पत्रकारिता का भविष्य ही बदल जायगा? मीडिया होगी न्यूज़ होंगे पत्रकार होंगे मगर न्यूज़ का सार बदल सकता है? आप आने वाले समय में इसको कैसे आंकलन करते है?


Meta AI: 


2045-50 तक पत्रकारिता का भविष्य निश्चित रूप से बदल जाएगा। यहाँ कुछ बदलाव हैं जो हमें देखने को मिल सकते हैं:


1. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित पत्रकारिता: एआई अल्गोरिदम समाचार लिखने में मदद करेंगे और पत्रकारों को डेटा विश्लेषण में सहायता प्रदान करेंगे।


2. वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी (वीआर/एआर) समाचार: वीआर/एआर तकनीक समाचार को अधिक इमर्सिव और इंटरैक्टिव बनाएगी।


3. पॉडकास्ट और ऑडियो समाचार: पॉडकास्ट और ऑडियो समाचार अधिक लोकप्रिय होंगे और लोगों को समाचार सुनने का एक नया तरीका प्रदान करेंगे।


4. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म: सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म समाचार के प्रमुख स्रोत बने रहेंगे और लोगों को समाचार तक पहुंचने का एक आसान तरीका प्रदान करेंगे।


5. डेटा-ड्रिवन पत्रकारिता: डेटा-ड्रिवन पत्रकारिता अधिक प्रचलित होगी और पत्रकारों को समाचार के पीछे के डेटा और तथ्यों को उजागर करने में मदद करेगी।


6. नागरिक पत्रकारिता: नागरिक पत्रकारिता बढ़ेगी और लोगों को समाचार बनाने और साझा करने का एक मंच प्रदान करेगी।


7. व्यक्तिगतीकरण: समाचार व्यक्तिगतीकरण अधिक होगा और लोगों को उनकी रुचि के अनुसार समाचार प्रदान किए जाएंगे।


8. सुरक्षा और सत्यता की चुनौतियाँ: समाचार में सुरक्षा और सत्यता की चुनौतियाँ बढ़ेंगी और पत्रकारों को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।


इन बदलावों के साथ, पत्रकारिता का भविष्य अधिक तकनीकी और इंटरैक्टिव होगा, लेकिन इसका मूल उद्देश्य - लोगों को सूचना और ज्ञान प्रदान करना - वही रहेगा।



Meta AI:


 प्रिंट मीडिया का भविष्य अनिश्चित है, लेकिन यह तय है कि यह बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अमरीका की संस्था "प्यू रिसर्च सेंटर" ने 2012 में एक रिपोर्ट में कहा था कि 2043 तक प्रिंट मीडिया का अस्तित्व लगभग समाप्त हो सकता है।


इस बदलाव के कारण हैं:


1. डिजिटल मीडिया की वृद्धि

2. ऑनलाइन समाचार की बढ़ती लोकप्रियता

3. विज्ञापन राजस्व में कमी

4. प्रिंटिंग और डिलीवरी की लागत में वृद्धि


लेकिन, यह नहीं कहा जा सकता कि प्रिंट मीडिया पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। कुछ कारण हैं जो प्रिंट मीडिया के अस्तित्व को बनाए रखने में मदद करेंगे:


1. प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता

2. प्रिंट मीडिया की भौतिक उपस्थिति

3. प्रिंट मीडिया की विशेषज्ञता

4. प्रिंट मीडिया की सांस्कृतिक महत्ता


प्रिंट मीडिया के भविष्य के लिए कुछ संभावनाएं हैं:


1. हाइब्रिड मॉडल: प्रिंट और डिजिटल दोनों का संयोजन

2. निश्चित दर्शकवर्ग: प्रिंट मीडिया को विशिष्ट दर्शकवर्ग के लिए डिज़ाइन किया जा सकता है

3. विशेषज्ञता: प्रिंट मीडिया को विशेष विषयों पर केंद्रित किया जा सकता है

4. संग्रहणीयता: प्रिंट मीडिया को संग्रहणीय बनाया जा सकता है


इसलिए, यह कहना मुश्किल है कि 2043 में दुनिया का आखिरी अखबार बंद हो जाएगा, लेकिन यह तय है कि प्रिंट मीडिया बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इसका भविष्य अनिश्चित है।




 धीरे धीरे हिंदी अंग्रेजी समेह तमाम भारतीय भाषाओ में छपने वाली पत्रिकाए भी अपना दम खोने लगी है ढेरों बंद हो गये तो ज्यादातर का सर्कुलेशन कम हो रहा है? आपकी चिंता कैसी है?




Meta AI: 


यह सच है कि हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में छपने वाली पत्रिकाए अपना दम खोने लगी हैं। इसके कई कारण हैं


1. डिजिटल मीडिया की वृद्धि: ऑनलाइन सामग्री की उपलब्धता ने पत्रिकाओं की मांग कम कर दी है।

2. विज्ञापन राजस्व में कमी: विज्ञापनदाता अब ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर विज्ञापन देना पसंद करते हैं।

3. पाठकों की बदली आदतें: लोग अब ऑनलाइन सामग्री पढ़ना पसंद करते हैं।

4. उत्पादन और वितरण की लागत में वृद्धि: पत्रिकाओं के उत्पादन और वितरण की लागत बढ़ गई है।


इसके परिणामस्वरूप, कई पत्रिकाए बंद हो गई हैं और जो बची हैं, उनका सर्कुलेशन कम हो रहा है। यह चिंता का विषय है क्योंकि:


1. सांस्कृतिक महत्ता: पत्रिकाए हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।

2. विचारों का आदान-प्रदान: पत्रिकाए विचारों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

3. साहित्य और कला का प्रोत्साहन: पत्रिकाए साहित्य और कला के प्रोत्साहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

4. ज्ञान और शिक्षा का स्रोत: पत्रिकाए ज्ञान और शिक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।


इस स्थिति को सुधारने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं:


1. डिजिटल संस्करण: पत्रिकाओं के डिजिटल संस्करण प्रकाशित करना।

2. ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर उपस्थिति: पत्रिकाओं की ऑनलाइन उपस्थिति बढ़ाना।

3. विशेषज्ञता: पत्रिकाओं को विशेष विषयों पर केंद्रित करना।

4. संग्रहणीयता: पत्रिकाओं को संग्रहणीय बनाना।

5. सरकारी समर्थन: सरकार की ओर से पत्रिकाओं को समर्थन देना।


पॉडकास्ट क्या है?


प्रस्तुति : अनामी शरण बबल 



पॉडकास्ट क्या है? इसका संचालन क़िस तरह होता है? इसका लाभ?


 Meta AI: पॉडकास्ट एक ऑडियो या वीडियो श्रृंखला होती है, जिसमें विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाती है। यह एक ऐसा माध्यम है जिसमें आप अपने विचारों, ज्ञान और अनुभवों को साझा कर सकते हैं और श्रोताओं के साथ जुड़ सकते हैं।


पॉडकास्ट का संचालन निम्नलिखित तरीके से होता है:


1. विषय चयन: पॉडकास्ट के लिए विषय चुना जाता है, जो आपके ज्ञान और रुचि के अनुसार होता है।

2. स्क्रिप्ट तैयारी: विषय के अनुसार स्क्रिप्ट तैयार की जाती है, जिसमें आपके विचार और जानकारी शामिल होती है।

3. रिकॉर्डिंग: स्क्रिप्ट के अनुसार ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है।

4. संपादन: रिकॉर्डिंग को संपादित किया जाता है, जिसमें आवश्यक कट, एडिट और म्यूजिक जोड़ा जाता है।

5. प्रकाशन: पॉडकास्ट को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित किया जाता है, जैसे कि ऐपल पॉडकास्ट, स्पॉटिफ़, गूगल पॉडकास्ट आदि।


पॉडकास्ट के लाभ:


1. व्यक्तिगत कनेक्शन: पॉडकास्ट आपको अपने श्रोताओं के साथ व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

2. ज्ञान साझा करना: पॉडकास्ट आपको अपने ज्ञान और अनुभवों को साझा करने का एक अच्छा माध्यम प्रदान करता है।

3. ब्रांडिंग: पॉडकास्ट आपके ब्रांड को बढ़ावा देने में मदद करता है।

4. मनोरंजन: पॉडकास्ट श्रोताओं को मनोरंजन और ज्ञान प्रदान करता है।

5. व्यवसायिक अवसर: पॉडकास्ट आपको व्यवसायिक अवसर प्रदान कर सकता है, जैसे कि विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप।


पॉडकास्ट शुरू करने के लिए आपको निम्नलिखित चीज़ों की आवश्यकता होगी:


1. माइक्रोफ़ोन

2. रिकॉर्डिंग सॉफ़्टवेयर

3. कंप्यूटर या स्मार्टफ़ोन

4. ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर अकाउंट

5. स्क्रिप्ट और सामग्री


आप अपने पॉडकास्ट को अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर प्रमोट कर सकते हैं।


 कितने लोग मिलकर इसका संचालन कर सकते है और इसको स्टार्ट करने का क्या बजट होना जरुरी है?


Meta AI: 


पॉडकास्ट का संचालन एक से अधिक लोग मिलकर कर सकते हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार का पॉडकास्ट बनाना चाहते हैं और आपके पास कितने संसाधन हैं। यहाँ कुछ सामान्य विकल्प हैं:


- *एक व्यक्ति*: आप अकेले ही पॉडकास्ट का संचालन कर सकते हैं, जिसमें आप ही स्क्रिप्ट लिखते हैं, रिकॉर्डिंग करते हैं और संपादन करते हैं।

- *दो से तीन व्यक्ति*: आप दो या तीन लोग मिलकर पॉडकास्ट का संचालन कर सकते हैं, जिसमें एक व्यक्ति होस्ट की भूमिका निभाता है, दूसरा व्यक्ति स्क्रिप्ट लिखता है और तीसरा व्यक्ति संपादन करता है।

- *एक टीम*: आप एक बड़ी टीम के साथ पॉडकास्ट का संचालन कर सकते हैं, जिसमें विभिन्न लोग विभिन्न कार्यों में शामिल होते हैं, जैसे कि स्क्रिप्ट लेखन, रिकॉर्डिंग, संपादन, और प्रमोशन।


पॉडकास्ट शुरू करने के लिए आवश्यक बजट निम्नलिखित हो सकता है:


- *न्यूनतम बजट*: ₹5,000 से ₹10,000 (माइक्रोफ़ोन, हेडफ़ोन, और बेसिक सॉफ़्टवेयर के लिए)

- *मध्यम बजट*: ₹20,000 से ₹50,000 (बेहतर माइक्रोफ़ोन, सॉफ़्टवेयर, और वेबसाइट के लिए)

- *उच्च बजट*: ₹1 लाख से ₹5 लाख (प्रोफ़ेशनल स्टूडियो, वीडियो रिकॉर्डिंग, और विज्ञापन के लिए)


यह बजट आपकी आवश्यकताओं और लक्ष्यों पर निर्भर करेगा। आप अपने बजट के अनुसार संसाधनों का चयन कर सकते हैं और पॉडकास्ट का संचालन शुरू कर सकते है 


इससे आमदनी क़िस तरह संभव है?


Meta AI: 

पॉडकास्ट से आमदनी कई तरीकों से संभव है:


1. विज्ञापन: पॉडकास्ट में विज्ञापन देने के लिए कंपनियाँ भुगतान करती हैं।

2. स्पॉन्सरशिप: पॉडकास्ट के लिए कंपनियाँ स्पॉन्सरशिप प्रदान करती हैं।

3. प्रायोजकता: पॉडकास्ट के लिए प्रायोजकता प्रदान करने वाली कंपनियाँ भुगतान करती हैं।

4. सदस्यता: श्रोता पॉडकास्ट के लिए सदस्यता लेकर भुगतान करते हैं।

5. डोनेशन: श्रोता पॉडकास्ट के लिए डोनेशन देते हैं।

6. मेर्चेंडाइज: पॉडकास्ट के लिए मेर्चेंडाइज बेचने से आय होती है।

7. कोर्स या ई-बुक्स: पॉडकास्ट के माध्यम से कोर्स या ई-बुक्स बेचने से आय होती है।

8. एफिलिएट मार्केटिंग: पॉडकास्ट में एफिलिएट लिंक्स के माध्यम से आय होती है।

9. पॉडकास्ट नेटवर्क: पॉडकास्ट नेटवर्क में शामिल होकर आय होती है।

10. पॉडकास्ट टूर: पॉडकास्ट के लिए लाइव टूर आयोजित करने से आय होती है।


इन तरीकों से पॉडकास्ट से आमदनी संभव है, लेकिन इसके लिए आपको एक अच्छी दर्शकवर्ग और विज्ञापनदाताओं के साथ संबंध बनाने होंगे।


इसके अलावा, पॉडकास्ट से आमदनी बढ़ाने के लिए कुछ और तरीके हैं:


- पॉडकास्ट को विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित करना।

- सोशल मीडिया पर पॉडकास्ट को प्रमोट करना।

- पॉडकास्ट के लिए वेबसाइट बनाना।

- पॉडकास्ट के लिए ईमेल लिस्ट बनाना।

- पॉडकास्ट के लिए डोनेशन बटन जोड़ना।


इस समय क़िस विषय को केंद्रित कर पॉडकास्ट अपना काम कर रहे है?


Meta AI: 


वर्तमान में, पॉडकास्ट विभिन्न विषयों पर केंद्रित हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख विषय हैं:


1. शिक्षा और सीखना

2. स्वास्थ्य और फिटनेस

3. व्यक्तिगत विकास और आत्म-सुधार

4. व्यवसाय और उद्यमिता

5. तकनीक और डिजिटल मार्केटिंग

6. मनोरंजन और संस्कृति

7. समाचार और समसामयिक विषय

8. यात्रा और पर्यटन

9. खेल और फिटनेस

10. आध्यात्मिकता और धर्म


इन विषयों के अलावा, पॉडकास्ट निम्नलिखित विशेषज्ञता वाले विषयों पर भी केंद्रित हैं:


1. वित्तीय साक्षरता

2. मानसिक स्वास्थ्य

3. पर्यावरण और स्थायित्व

4. सामाजिक न्याय और अधिकार

5. विज्ञान और प्रौद्योगिकी

6. इतिहास और संस्कृति

7. साहित्य और कला

8. संगीत और नृत्य

9. खाना और पाककला

10. योग और ध्यान


इन विषयों पर पॉडकास्ट श्रोताओं को ज्ञान, मनोरंजन और प्रेरणा प्रदान करते हैं।


पॉडकास्ट का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल और आकर्षक है। यहाँ कुछ कारण हैं जो पॉडकास्ट के भविष्य को दर्शाते हैं:


1. बढ़ती लोकप्रियता: पॉडकास्ट की लोकप्रियता में लगातार वृद्धि हो रही है, और यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा।

2. व्यक्तिगतकरण: पॉडकास्ट व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करते हैं, जो श्रोताओं को आकर्षित करता है।

3. सुविधा: पॉडकास्ट कहीं भी, कभी भी सुने जा सकते हैं, जो उन्हें बहुत सुविधाजनक बनाता है।

4. विविधता: पॉडकास्ट विभिन्न विषयों और शैलियों में उपलब्ध हैं, जो श्रोताओं को विभिन्न विकल्प प्रदान करते हैं।

5. तकनीकी उन्नति: पॉडकास्ट की तकनीक में लगातार उन्नति हो रही है, जो उन्हें और भी बेहतर बना रही है।

6. विज्ञापन और राजस्व: पॉडकास्ट विज्ञापन और राजस्व के लिए आकर्षक विकल्प बन रहे हैं।

7. सामुदायिक जुड़ाव: पॉडकास्ट सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देते हैं, जो श्रोताओं को एक दूसरे से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

8. शिक्षा और सीखना: पॉडकास्ट शिक्षा और सीखने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन रहे हैं।

9. मनोरंजन: पॉडकास्ट मनोरंजन के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बन रहे हैं।

10. वैश्विक पहुंच: पॉडकास्ट वैश्विक पहुंच के साथ श्रोताओं तक पहुंच सकते हैं।


इन कारणों से, पॉडकास्ट का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल और आकर्षक है। यह माध्यम आगे भी लोगों को आकर्षित करता रहेगा और उनकी जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।





पत्रकार रामजी लाल जांगिड के कुछ सहकर्मी

 

015   (15/10/2024)


*मेरे कुछ उल्लेखनीय सहकर्मी-1*


मैंने 'हिन्दुस्तान' में 12 फरवरी 1968 से 11 दिसम्बर 1979 तक (ग्यारह साल दस महीना) काम किया। इस अवधि में कुछ ऐसे पत्रकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जिन्होंने पत्रकारिता, साहित्य और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। दो तीन पत्रकारों ने अन्य पत्रकार तथा ग़ैर पत्रकार कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित भाव से काम किया। अब मैं उनकी चर्चा करूंगा।

दैनिक 'हिन्दुस्तान' के सहायक सम्पादक पंडित गोपाल प्रसाद व्यास हास्य व विनोद का कालम "नारद जो खबर लाए हैं' लिखते थे। उनका जन्म मथुरा (उत्तरप्रदेश) के पास महमदपुर गांव में 13 फरवरी 1915 को हुआ था। उनका निधन 90 वर्ष से ऊपर की आयु में 28 मई 2005 को नई दिल्ली में हुआ था। उन्हें वर्ष 1965 में साहित्यिक योगदान के लिए प‌द्मश्री से अलंकृत किया गया। उनके कई कविता संग्रह- 'मैं क्या करूं?' 'रस रसामृत' 'माफ़ कीजिए' और 'बात बात में बात' आदि प्रकाशित हुए थे। उनकी जीवनी 'बहुआयामी जीवन के धनी पंडित गोपाल प्रसाद व्यास'  वर्ष 2015 में प्रकाशित हुई थी। उन्होंने नई दिल्ली में 'हिन्दी भवन बनवाया। 

"हिन्दुस्तान" में व्यापार डेस्क के प्रभारी स्वर्गीय आनंद राजवंशी कई वर्षों तक दिल्ली पत्रकार संघ

(Delhi Union of Journalists) (कांग्रेसी और वामपंथियों का संगठन) के अध्यक्ष रहे। पत्रकारों की दक्षिण दिल्ली में कालोनी

'गुलमोहर पार्क' बनाने में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी। वह मस्तमौला थे। मगर पत्रकारों ने जब जब अपने वेतन बढ़ाने के लिए आंदोलन किऐ तब तब वह आगे की पंक्ति में डटे रहे। वह अजातशत्रु थे। उन्होंने अपने से अलग राय रखने वालों को भी गले लगाया। उनके साथ व्यापार डेस्क पर काम करते थे श्री देवकृष्ण व्यास। वह मध्य प्रदेश के थे। हमेशा खादी के वस्त्रों में रहते थे। उनका विश्वास स्वर्गीय मोरारजी भाई देसाई की तरह  मूत्र चिकित्सा में था। वह कम बोलते थे। चुपचाप काम करते रहते थे।

विशेष संवाद‌दाता के रूप में काम करने वाले

श्री आनंद प्रकाश काद‌म्बिनी के संपादक श्री रामानंद 'दोषी' के छोटे भाई थे। उन्होंने 'राष्ट्रीय पत्रकार निलयम' नामक संस्था बनाई। वह भी अपने ढंग से पत्रकारों को संगठित कर रहे थे।

खेल डेस्क के प्रभारी श्री आनंद दीक्षित की खेलजगत की गतिविधियों पर अच्छी पकड़ थी । वह अकेले ही डेस्क संभाल लेते थे।

प्रूफ रीडरों में श्री ब्रह्मदत्त शुक्ल और श्री नित्यानंद कौशिक की जोड़ी समर्पित भाव से सेवा कर रही थी।दोनों ने बाद में यमुनापार की बस्तियों, में अपने मकान बना लिये।



2


016 (16/10/2024)



मेरे उल्लेखनीय सहकर्मी -2


'हिन्दुस्तान के सम्पाद‌कीय विभाग में श्री ओम प्रकाश वैश्य बहुपठित थे। वह गंभीर स्वभाव के थे और हर मुद्दे पर स्पष्ट राय रखते थे । झगड़ा वही शांत करते थे।

पूर्व समाचार सम्पाद‌क स्वर्गीय जगन्नाथ गुप्त ने श्री केदार नाथ शर्मा के साथ मिलकर त्रिनगर नाम की अवैध कालोनी बसा दी थी। आज भी उसमें जगन्नाथ गुप्ता मार्ग है। एक चर्चा थी कि उनके बेटे राजनाथ गुप्त की कई रातें दिल्ली के बदनाम इलाके जी.बी. रोड में किसी वेश्या के कोठे पर ही कटती थीं। वह मुख्य उप सम्पादक था। हर दम मुंह में पान दबाए रखता था मगर ड्यूटी पर आता तो दत्तचित्त होकर काम करता था। किसी से कभी कोई झगड़ा नहीं करता था। कभी देर से नहीं आता था। 

एक और मुख्य उपसम्पादक

श्री शिव कुमार कौशिक

का हर वाक्य 'यानि कि' से शुरू होता था। वह इंदिरा गांधी जी के खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकते थे। एक रात फोन आया। फोन करने वाले ने कहा- "किसी सीनियर से बात कराइए।" कौशिक जी आग बबूला हो गए और उत्तर दिया--"नालायक! मैं यहां बीस साल से चप्पल घिस रहा हूं। अभी सीनियर नहीं हुआ क्या? "फोन करने वाले को क्या पता था कि कौशिक जी कब से चप्पल घिस रहे हैं। उसने घबराकर फोन बंद‌ कर दिया। उन्हें गुस्सा जल्दी आता था। खादी का कुर्ता पाजामा पहने हुए कोशिक जी की बी. जे. पी. समर्थक दोनों उप संपादकों से लगभग रोज झड़प होती थी। कौशिक जी का मानना था कि बी. जे. पी. हिन्दू समाज को बांट रही है और आदिवासियों, दलितों तथा पिछड़ी जातियों को सत्ता में उचित भागीदारी देने के विरुद्ध है। 

एक और वरिष्ठ पत्रकार श्री विश्वमित्र उपाध्याय का मत था कि भारत का कल्याण वामपंथ के रास्ते पर चलने से ही हो सकता है। कौशिक जी ने इंदिरा गाँधी जी की जीवनी लिखी थी और विश्वमित्र जी ने सोवियत संघ की यात्रा का वर्णन करते हुए अपने संस्मरण प्रकाशित किए थे। तीन नियुक्तियों का विरोध भी किया गया। एक कोई डा. रतन प्रकाश को किसी राजनेता की सिफारिश पर विशेष संवाददाता बनाने पर रोष था। दूसरा 'कादम्बिनी' के सम्पादक की बेटी को  संवाददाता बनाने पर ऐतराज था। तीसरा विवाद लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर) के पुजारी के बेटे रमाकांत गोस्वामी को उप सम्पादक बनाने पर था

सोमवार, 21 अक्टूबर 2024

हिंदुस्तान में पहला दिन / डॉ. रामजी लाल जांगिड

 


*कौन थे 'हिन्दुस्तान' में मेरे सहकर्मी ?*


जब मुझे प्रबंधक श्री राम नंदन प्रसाद सिन्हा ने नियुक्ति पत्र दे दिया, तब मैं मुख्य द्वार पर आया। वहां हिन्दुस्तान टाइम्स लि. के ग़ैर पत्रकार कर्मचारियों की कुछ मांगों को लेकर सभा हो रही थी। कुछ भाषण मैंने सुने। फिर मैंने बोलने की अनुमति मांगी। मैंने कहा-"बिड़ला जी मेरे कस्बे के पास के गांव के हैं। हर कम्पनी में लाभ कर्मचारियों की मेहनत से होता है। इसलिए जितना उन्हें संतुष्ट रखा जाएगा, वे अपनी कोशिशें उतनी ही बढ़ा देंगे। सम्पादक दिन भर लोगों को नसीहत देते हैं। उन्हें आपकी मांगों का समर्थन करना चाहिए। पत्रकार स्वयं को श्रमजीवी कहते हैं। उन्हें आपके साथ खड़ा होना चाहिए।" सम्पादकीय विभाग पहली मंजिल पर था, उसकी खिड़‌कियां खुल गई। श्रोताओं ने पूछा कि "आप किस विभाग में हैं ?" मैंने कहा कि "मैं सम्पादकीय विभाग में आज से ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए ऊपर जा रहा हूं।" इस भाषण के बाद सारे प्रेस कर्मचारियों में मेरे प्रति सम्मान पैदा हो गया। मैं जब भी पेज बनवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस में जाता तो कोई पंखा लेकर हवा करता, कोई पानी लाता, कोई चाय लाता और कोई कुर्सी लाता। मेरा काम फटाफट हो जाता जबकि बाकी को वे काफी देर तक खड़ा रखते थे।

वर्ष 1968 में 'हिन्दुस्तान' के सम्पादक श्री रतन‌लाल

जोशी थे। वे शायद चूरू (राजस्थान) में पैदा हुए थे। वह स्वतंत्रता सेनानी थे और कई समाचार पत्रों से जुड़े हुए थे। सर्व श्री हरिकृष्ण त्रिवेदी, क्षितीश विद्यालंकार और गोपाल प्रसाद व्यास सहायक सम्पादक थे। श्री चंदू लाल चंद्राकर समाचार ब्यूरो चीफ थे। बाद में वह सम्पादक बन गए। उन्हें गांधी जी की प्रार्थना सभाओं की रिपोर्टिंग करने की विशेष जिम्मेदारी दी गई थी। वह 1 जनवरी 1920 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के निपानी गांव में अन्य पिछड़ा वर्ग में पैदा हुए थे। वह 25 वर्ष की आयु में 'हिन्दुस्तान' में पत्रकार बने। उन्होंने नौ ओलम्पिक खेलों और तीन एशियायी खेलों की रिपोर्टिंग की थी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री द्वारिका प्रसाद शुक्ल ने उन्हें 1970 में लोकसभा के चुनाव के लिए कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया। वह पांच बार सांसद रहे। उन्हें कृषि, ग्राम विकास, पर्यटन और विमानन मंत्री बनाया गया। उनका 2 फरवरी 1995 को निधन हो गया। श्री यशपाल गुप्त समाचार सम्पादक और श्री विद्यासागर वाशिष्ठ सहायक समाचार सम्पादक थे। सम्पादकीय विभाग में एक वामपंथी (गोरखपुर के श्री विश्वमित्र उपाध्याय) तीन

भाजपा समर्थक और शेष सभी कांग्रेस समर्थक थे। कांग्रेस समर्थकों में श्री शिव कुमार कौशिक मुखर थे। उन्होंने श्रीमती इंदिरा गांधी की जीवनी लिखी। उसे इंदिरा जी को भेंट करने गए तब मुझे भी साथ ले गए थे।श्री केदार नाथ शर्मा दिल्ली नगर निगम सदस्य थे।


शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024

कोरल (CORAL ) क्या होता है?


 कोरल, समुद्र में पाए जाने वाले एक जीव हैं जो कैल्शियम कार्बोनेट से बनी चट्टानें बनाते हैंये चट्टानें, जिन्हें प्रवाल भित्तियां या प्रवाल शैल-श्रेणियां कहते हैं, दुनिया के कई हिस्सों में पाई जाती हैं. कोरल, निडेरिया नामक पशु संघ के सदस्य हैं. इनके बारे में कुछ और बातें: 

 

  • कोरल, कई छोटे-छोटे पॉलीप्स नामक निकायों से मिलकर बने होते हैं. 

  •  

  • कोरल, शाखा, टेबल, और चट्टान जैसे आकार में बढ़ते हैं. 

  •  

  • कोरल की रंगीन उपस्थिति, उनके अंदर रहने वाले सूक्ष्म शैवालों की वजह से होती है. 

  •  

  • कोरल, दो तरह के होते हैं - कठोर कोरल और नरम कोरल. 

  •  

  • कोरल, गर्म और उथले समुद्रों में पाए जाते हैं. 

  •  

  • कोरल रीफ़, लहरों, तूफ़ानों, और बाढ़ से तटरेखाओं की रक्षा करते हैं. 

  •  

  • कोरल रीफ़, तटीय समुदायों के लिए भोजन, सुरक्षा, और नौकरियां का स्रोत हैं. 

  •  

  • कोरल रीफ़, तटीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत, विश्वासों, परंपराओं, और रीति-रिवाजों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. 

  •  

कोरल ट्यूटोरियल: कोरल क्या हैं? - National Ocean Service
Translated — कोरल दुनिया के सबसे विविध पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है। हज़ारों प्रजातियाँ जीवित रहने के लिए कोरल और उनके द्वारा बनाई गई चट्टानों पर निर्भर हैं। दुनिया भर में लाखों लोग भोजन, सुरक्षा और नौकरियों के लिए कोरल रीफ़ पर निर्भर हैं। अधि...
oceanservice.noaa.gov

भारत

  लेख संवाद पढ़ें अपुनरीक्षित बदलाव सम्पादित करें इतिहास देखें देखा गया भारत गणराज्य Republic of India ( अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में देखें) ध...