सोमवार, 31 अक्टूबर 2022

BF यानी प्यार की एक (अधूरी) कहानी

 

 प्रस्तुति--  शैलेंद्र किशोर जारुहार 

 - 

Pyar ki ek #ADBHUT_KAHANI


एक नन्हें लड़के ने, नन्ही लड़की से कहा!

- I'm your BF! मैं तुम्हारा BF हूँ


-लड़की ने पूछा

- - What is BF  ?


लड़का हंसा और बोला...

- यानी Best Friend. बेहद अच्छा दोस्त।


कुछ समय बीता, एक प्यारे नौजवान ने सुंदर लड़की से कहा:

- I am your BF  !!


-लड़की शर्माती सी उसके कंधे पर झुकी और आहिस्ता से पूछा:

- - What is BF   ?


लड़का बोला:

- यानी पुरुष मित्र Boy Friend 


कुछ वर्ष बीते उन्होंने शादी कर ली, उनको प्यारे प्यारे बच्चे हुए, पति मुस्कराया और अपनी पत्नी से बोला:

- I am your BF!


- पत्नी मुस्कराकर पति से बोली:

- - What is BF ? 

अब  BF यानी क्या


पति पुनः मुस्कराया और बच्चों की ओर निहारकर बोल पड़ा:

- आपके बच्चों का पिता Baby's father !


समय गुज़रे दोनों बुड्ढे हो गए, वो साथ बैठे, डूबते सूरज की ओर देख रहे थे, आंगन में , बुज़र्ग ने फिर दोहराया:

- मेरे प्रिय I am your BF!


- बुज़र्ग महिला हंस पड़ी, अपने झुर्रियों वाले चहरे के साथ:

- - What is BF? अब BF यानी क्या?


बुड्ढा ख़ुशी से हँसा और रहस्यमयी आवाज़ में बोल पड़ा:

- Be Forever! सदा एक दूजे के लिये।


जब बुजुर्ग जिंदगी की अंतिम सांसे ले रहा था , तब भी बोला:

- I am your BF.


- बुढ़िया गम से भरी बोली:

- - What is BF ??


आंखें बंद करते हुए बुजुर्ग बोला :

- यानी Bye Forever! अलविदा सदा के लिए


कुछ दिनों में बुजुर्ग महिला भी पंचतत्वों में विलीन हो गई, दीवार पर दोनों की एक साथ फोटो लगाई गई और एक पहचानी एहसास सुनाई दी:


Besides Forever !

तुम्हारे पास हूँ सदा के लिये !!

रवि अरोड़ा की नजर से

 करतारपुर साहेब से लौट कर-2/ रवि अरोड़ा



हालांकि करतारपुर कॉरीडोर को खुले हुए पूरे तीन साल हो चुके हैं मगर मैं अब कहीं जाकर पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहेब गुरुद्वारे के दर्शन कर पाया । बहुत गहरी इच्छा थी इस यात्रा पर जाने की मगर क्या करता कोरोना के चलते लगभग बीस महीने तो यह कॉरीडोर यूं भी बंद ही रहा और बाकी समय अपनी निजी समस्याओं से जूझने में व्यतीत हो गया। 

खास बात यह भी है कि मेरे बच्चे भी इस यात्रा के लिए लालायित थे। जब से उन्हें पता चला कि पाकिस्तान की इस यात्रा में पासपोर्ट पर इस पड़ौसी मुल्क की मुहर नहीं लगती तब से उनकी यह इच्छा और अधिक प्रबल हो गई। अब कौन नहीं जानता कि एक बार पाकिस्तान की मुहर पासपोर्ट पर लग जाए तो अमेरीका, आस्ट्रेलिया और यूरोप तो क्या छोटे मोटे देश भी अपने यहां आसानी से घूसने नहीं देते । हालांकि मैं और मेरे दोनो बच्चे धर्म कर्म में बहुत कमजोर हैं मगर पर्यटन को ही सही मगर हम धार्मिक स्थलों पर अकसर हो आते हैं। हां पत्नी यदि आज इस दुनिया में होती तो वह जरूर पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा से करतारपुर के दर्शन करती । उसी का साथ निभाने को मैंने देश के अधिकांश धार्मिक स्थल देखे हैं। खैर, बात करतारपुर साहेब गुरूद्वारे की हो रही है तो अपने शब्द वहीं तक महदूद रखता हूं। 


करतारपुर कॉरीडोर के मार्फत पाकिस्तान जाने को लेकर बड़ी आशंका थी कि पता नहीं अनुमति मिलेगी भी अथवा नहीं ? इस गुरूद्वारे में तो यूं भी पूरी दुनिया से सिक्ख आते होंगे और चूंकि हमने सबसे बडे़ त्यौहार दीपावली पर वहां जाना तय किया है तो पता नहीं कितनी भीड़ वहां मिलेगी ? भारतीय होने के नाते पाकिस्तानियों के व्यवहार को लेकर चिंता थी सो अलग। हालांकि उनके बाबत बहुत सारी जानकारी मैं पहले से जुटा कर गया था मगर फिर भी अपनी आंखों से जब तक देख न लो, किसी बात पर आसानी से विश्वास भी तो नहीं होता। बीस दिन पहले ऑन लाईन रजिस्ट्रेशन के बाद गृह मंत्रालय और स्थानीय खुफिया विभाग से प्रपत्रों की जांच तो करा ली थी मगर यात्रा से चार दिन पहले अनुमति पत्र जब तक नहीं मिला यह तय ही नहीं हो पाया कि इस बार हम दीपावली गुरुनानक की निर्वाण स्थली पर मना पाएंगे अथवा नहीं। वैसे तो भारत की सीमा से मात्र चार किलोमीटर दूर है करतारपुर का गुरुद्वारा दरबार साहेब मगर लगभग आधी सदी तक जैसे हमसे हजारों किलोमीटर दूर ही था ।

 आजादी के बाद अधिकांश सिक्खों द्वारा हिन्दुस्तान के इस भू भाग में आकर बसने के निर्णय के बाद पश्चिमी पंजाब ( अब पाकिस्तान )  में रह गई मुठ्ठी भर सिख आबादी अपने गुरुद्वारों की ढंग से देखभाल भी तो नहीं कर पाई। सन 1947 से सन 2000 तक तो यह पवित्र स्थान बंद ही रहा और  स्थानीय लोग अपने मवेशी यहां बांधते थे तथा गुरू घर की जमीन पर भी स्थानीय काश्तकारों का अवैध कब्जा था । 

साल 2004 से इसे भारतीय श्रद्धालुओं के लिए खोला गया और 2019 को कहीं जाकर इस कॉरिडोर से वीजा मुक्त आवाजाही का मार्ग खुला । कॉरीडोर हेतु भाIरतीय पक्ष में विकास कार्य का शिलान्यास करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महती कार्य को जर्मनी को दो भागों में बांटने वाली बर्लिन की दीवार ढहाए जाने जितना महत्वपूर्ण बताया था । मगर यह सवाल मौजू है कि क्या वाकई भारत पाकिस्तान के बीच की कोई दीवार इस कॉरीडोर के बनने से ढही है ? क्या सचमुच इस कॉरीडोर से करतारपुर साहेब की यात्रा सुगम हुई है ? क्या वाकई भारत और पाकिस्तान की सरकारें चाहती हैं कि दोनो देशों के आम नागरिक एक दूसरे से निर्बाध तरीके से मिलें और यह कॉरीडोर दोनो देशों के बीच सौहार्द पैदा करने में सहायक हो ? ऐसे तमाम सवाल हैं जो बेलाग लम्बी चर्चा की मांग करते हैं । 

क्रमश:

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022

टीएमयू में ट्रेंड्स इन इंग्लिश लैंग्वेज पर वैश्विक कॉन्फ्रेंस


टीएमयू के एफओईसीएस की ओर से ब्लेंडेड मोड में हुई इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में साठ रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत 



 ख़ास बातें


इंडोनेशिया के श्री अक्सेंड्रो मैक्सिमिलियन की रही ऑनलाइन मौजूदगी


छात्रों को अँग्रेजी सिखाने में शिक्षकों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए: डॉ. अरोड़ा


मैक्सिमिलियन ने कहा, संचार में सुधार के लिए आज अनेक ऐप्स मौजूद


अनुभवी फ़ैकल्टी और अनुशासित स्टुडेंट्स यूनिवर्सिटी की पहचान : रजिस्ट्रार


अंग्रेजी मन तो हिंदी हृदय की भाषा : प्रो. द्विवेदी


गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रों की पुस्तक का कॉन्फ्रेंस सोवेनियर के संग - संग विमोचन 


यूपी के अलावा आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान के 150 प्रतिभागियों ने की शिरकत




तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फ़ैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड कम्प्यूटिंग साइंसेज़-एफओईसीएस में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी एंड ट्रेंड्स इन इंग्लिश लैंग्वेज-ईटीटीईएल पर एक दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस हुई,जिसमें शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाषा और सांस्कृतिक पहचान, अंग्रेजी भाषा और साहित्य में कार्यात्मक कौशल, महत्वपूर्ण डिसकोर्स विश्लेषण, भाषा और जेंडर, अंग्रेजी भाषा शिक्षण में हालिया रुझान और प्रौद्योगिकी, अंग्रेजी की भाषा के रूप में अंग्रेजी डायस्पोरा, अंग्रेजी संचार और सॉफ्ट स्किल्स, बोली जाने वाली अंग्रेजी के आयाम, अंग्रेजी व्याकरण में समस्या क्षेत्र, अंग्रेजी भाषा के सौंदर्यवादी मूल्य, एनईपी 2020 के संदर्भ में ईएलटी की द्विभाषी विधि, साहित्य के माध्यम से अंग्रेजी भाषा शिक्षण, पारस्परिक संबंध निर्माण में भाषा रजिस्टर का महत्व, संचारी भाषा शिक्षण, कार्य आधारित शिक्षण, भाषाई और अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, दुनिया भर में अंग्रेजी, वर्तमान परिदृश्य में अंग्रेजी भाषा और संचार की भूमिका, राष्ट्र को बांधने वाले मुख्य लिंगुआ फ्रैंका के रूप में अंग्रेजी और कॉर्पोरेट दुनिया में अंग्रेजी भाषा का महत्व इत्यादि विषयों पर लगभग 60 शोध पत्र प्रस्तुत किए। 



यूनिवर्सिटी के एफओईसीएस के डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमैनिटीज़ और इंग्लिश लैंग्वेज टीचर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया- ईएलटीएआई, नोएडा चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस इंटरनेशनल कांफ्रेंस का कीनोट स्पीकर्स एसटीकेआईपी पीजीआरआई बांदर लैम्पुंग, इंडोनेशिया के श्री अक्सेंड्रो मैक्सिमिलियन और लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. आरपी सिंह की ऑनलाइन मौजूदगी के बीच शुभारंभ मुख्य अतिथि महाराजा हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज, मुरादाबाद के प्राचार्य डॉ. सुधीर अरोड़ा और विशिष्ट अतिथि इग्नू, नई दिल्ली के प्रोफेसर प्रो. प्रमोद कुमार मेहरा ने किया। इस मौके पर टीएमयू के रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, कांफ्रेंस जनरल चेयर और एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी, ज्वाइंट रजिस्ट्रार रिसर्च एंड डवलपमेंट डॉ. ज्योति पुरी ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन के संग कांफ्रेंस का शंखनाद किया। स्वीकृत गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई,जिसका अतिथियों ने कॉन्फ्रेंस सोवेनियर के संग - संग विमोचन भी किया । विभिन्न राज्यों- आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुल 150 पंजीकृत प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन ब्लेंडेड मोड में कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। अंत में कॉन्फ्रेंस में सफलतापूर्वक प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। इससे पूर्व सभी अतिथियों को बुके देकर उनका स्वागत किया गया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी प्रदान किए गए। संचालन बीटेक-आईबीएम सेकंड ईयर के स्टुडेंट्स देवांश मिश्रा और शांभवी कोठीवाल ने किया। 



महाराजा हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज, मुरादाबाद के प्राचार्य डॉ. सुधीर अरोड़ा ने बतौर मुख्य अतिथि कोविड-19 महामारी के दौरान उपयोग में लायी गईं नई तकनीकों और उनके लाभों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा, अँग्रेजी भाषा का उपयोग आज काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा, छात्रों को अँग्रेजी भाषा सिखाने में शिक्षकों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। बतौर विशिष्ट अतिथि इग्नू, नई दिल्ली के प्रोफेसर प्रो. प्रमोद कुमार मेहरा ने प्रौद्योगिकी की सहायता के लिए वैश्विक भाषा के रूप में अंग्रेजी में उभरती प्रवृत्तियों और अनुप्रयोगों के बारे में चर्चा की। उन्होंने एनईपी-2020 में अंग्रेजी भाषा के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया। लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. आरपी सिंह ने बतौर कीनोट स्पीकर  टीचिंग लर्निंग प्रॉसेस में प्रौद्योगिकी और अंग्रेजी के उपयोग के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा, कॉन्फ्रेंस समाज के बीच प्रेरणा का एक अच्छा स्रोत है। कीनोट स्पीकर एसटीकेआईपी पीजीआरआई बांदर लैम्पुंग, इंडोनेशिया के श्री अक्सेंड्रो मैक्सिमिलियन ने कहा, संचार में सुधार के लिए आज अनेक ऐप्स मौजूद हैं। इंटरएक्टिव क्लासरूम के लिए बहुत सारी एडवांस टेक्नोलॉज़ी मदद कर रही हैं। टीचर्स भी और स्किल्ड हो रहे हैं। उच्चारण में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का आज बेहतर उपयोग हो रहा है। 



टीएमयू के रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने टीचिंग लर्निंग प्रॉसेस में एडवांस टेक्नोलॉज़ी के महत्व और अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा, कोई भी संस्थान केवल ईंट और सीमेंट से नहीं निर्मित नहीं होता है, इसका निर्माण अच्छी फ़ैकल्टी और अच्छे स्टुडेंट्स से होता है। उन्होंने  एफओईसीएस के निदेशक प्रो. द्विवेदी और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा, एफओईसीएस लगातार उत्तरोत्तर विकास कर रहा है। इससे पूर्व कांफ्रेंस जनरल चेयर और एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने अपने उद्घाटन भाषण में सभी का स्वागत करते हुए कहा, अंग्रेजी मन की भाषा है,जबकि हिंदी हृदय की भाषा है। उन्होंने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एवं एडवांस टेक्नोलॉज़ी के महत्व और टीचिंग लर्निंग प्रॉसेस पर इसके प्रभाव पर प्रकाश डाला।  उन्होंने कहा, इस कांफ्रेंस का उद्देश्य अंग्रेजी सीखने की गतिविधियों और इंटरनेट संचार उपकरणों में प्रौद्योगिकी की समीक्षा करना है,जबकि डॉ. सोनिया जयंत ने कॉन्फ्रेंस की थीम प्रस्तुत की ।

 इंटरनेशनल कांफ्रेंस में एचओडी प्रो. ए.सक्सेना,डॉ. जरीन फारूक, डॉ. संदीप वर्मा, मिस नेहा आनंद, श्रीमती इंदरजीत झीते, प्रो. आरके जैन, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. अरुण कुमार पिपरसेनिया, डॉ. शंभू भारद्वाज, श्री राहुल विश्नोई, श्री प्रशांत कुमार डॉ. असीम अहमद, एआर श्री मनीष तिवारी, श्री मनोज गुप्ता, सहित सभी फ़ैकल्टी मेंबर्स मौजूद रहे। अंत में कांफ्रेंस कंवीनर्स डॉ. सोनिया जयंत और सुश्री इंदु त्रिपाठी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

बुधवार, 26 अक्टूबर 2022

बीबीसी के 100 साल:

 

 BBC यानी British Broadcasting Corporation का नाम सुनकर सबसे पहले आपके दिमाग में क्या आता है? निश्चित तौर पर आप इसे पत्रकारिता जगत का स्तंभ कहेंगे, सबसे बड़ी मीडिया कंपनी कहेंगे और इसे लेकर कई तरह की बाते करेंगे लेकिन आप कभी भी उसके स्याह पक्ष को जानने की कोशिश नहीं करेंगे. इसमें आपकी कोई गलती नहीं है क्योंकि इस मीडिया हाउस ने आपकी आंखों पर लंबे समय से पट्टी बांध रखी है. बीबीसी और एजेंडा एकदूसरे के पूरक हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है. कभी लोगों का पसंदीदा होने वाले BBC की हालत आज के समय में कैसी है यह भी किसी से छिपा नहीं है. हाल ही में भारत में इसके बोरिया बिस्तर समेटने की खबरें भी सामने आई थी. लेकिन क्या आप BBC की ऐसी हालत के पीछे का महत्वपूर्ण कारण जानते हैं? BBC के हाशिये पर जाने की क्या वजह है, आप जानते हैं? क्या आप जानते हैं कि आज ही के दिन 1922 (बीबीसी के 100 साल) में बनी यह कंपनी अपनी अंतिम सांसे क्यों ले रही है? हम यह आपको बताएंगे लेकिन चलिए उससे पूर्व इसके इतिहास से अवगत होते हैं!

 और पढ़ें: बीबीसी का खर्चा भी नहीं झेल पा रहा ‘दिवालिया’ ब्रिटेन

बीबीसी के 100 साल: बीबीसी की शुरूआत

दरअसल, ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) यूनाइटेड किंगडम का राष्ट्रीय प्रसारक है. वेस्टमिंस्टर, लंदन में ब्रॉडकास्टिंग हाउस में इसका मुख्यालय है; यह दुनिया का सबसे पुराना राष्ट्रीय प्रसारक है और कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा प्रसारक है. ज्ञात हो कि इसमें कुल मिलाकर 22,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 19,000 से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र के प्रसारण में हैं. जॉन रीथ ने 1922 (बीबीसी के 100 साल) में आज ही के दिन यानी 18 अक्टूबर को इंग्लैंड में इसकी शुरूआत की थी, जिनकी मृत्यु 1971 में हो गई.

ध्यान देने वाली बात है कि कुछ शौकिया स्टेशनों के बंद होने के बाद बीबीसी ने 14 नवंबर 1922 को अपना पहला डेली रेडियो सर्विस शुरू किया था. धीरे धीरे इसका विस्तार होना शुरू हुआ. 1932 में बीसीसी के जरिए ही किंग जॉर्ज पंचम ने ब्रिटेन और दुनिया के दूसरे हिस्सों के लिए पहला रॉयल क्रिसमस मैसेज दिया था. आज यह अपनी सेवाओं का दुनिया की 40 से अधिक भाषाओं में प्रसारण करता है. इनका प्रसारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, टीवी और रेडियो पर भी होता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि इस क्षेत्र में इसकी इंट्री लाजवाब थी लेकिन धीरे-धीरे इसकी कुकृत्य लोगों के समक्ष सामने आने लगे और इसकी क्लास लगनी शुरू हो गई.

अगर हम बीबीसी हिंदी की बात करें तो इसकी शुरूआत 1940 में हुई थी. प्रारंभ में यह रेडियो के माध्यम से संचालित होती थी लेकिन वर्ष 2020 में इसे बंद कर दिया गया. वर्तमान में यह वेबसाइट, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म आदि पर संचालित हो रही है. हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि बीबीसी अपनी सेवाओं को समाप्त करने जा रहा है जिसमें भारत में संचालित सेवायें प्रमुख हैं. ब्रिटेन सरकार के लगातार लाइसेंस शुल्क फ्रीज के कारण बीबीसी को अपनी विश्व सेवाओं में गहरी कटौती की घोषणा करने के लिए विवश होना पड़ा. बीबीसी ने चीनी, हिंदी और अरबी सहित कम से कम दस भाषाओं में रेडियो आउटपुट का उत्पादन न करने की घोषणा की. हालांकि, बीबीसी ने कवरअप करने की कोशिश की और कहा कि उसने अपना खर्च करने के अभियान के तहत यह निर्णय लिया, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है.

बीबीसी के विवाद और पतन की कहानी

बीबीसी ने अपने शुरूआती दिनों में जो पकड़ बनाई, धीरे-धीरे वह सब इसके एजेंडे की बलि चढ़ गई. व्यूज और लाइक्स कमाने के लिए ‘फेक’ और ‘एजेंडाधारी कंटेंट’ परोसकर यह वर्षों तक लोगों को दिग्भ्रमिक करती रही! कई बार इस कंपनी को अपना एजेंडा चलाते हुए भी देखा गया और इस पर सवाल भी उठे. भारत में भी इस कंपनी ने जमकर अपना एजेंडा चलाया और कई बार तो मामला काफी आगे बढ़ गया. आइए हाल के वर्षों भारत में किए गए इसके कुछ कुकृत्यों से आपको अवगत कराते हैं-

निर्भया डॉक्यूमेंट्री विवाद- बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री को लेकर जमकर बवाल मचा था. ज्ञात हो कि भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद बीबीसी ने इसका प्रसारण कर दिया था, जिसके बाद उन्हें सरकार की ओर से नोटिस भी जारी किया गया था. सरकार की ओर से कड़ा रुख अपनाने के बावजूद बीबीसी ने निर्भया कांड पर बनी डॉक्यूमेंट्री को चार चैनलों पर दिखाया. बता दें कि 16 दिसंबर 2012 को घटी गैंगरेप की घटना पर बीबीसी ने डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसमें गैंगरेप मामले के दोषी मुकेश कुमार का इंटरव्यू शामिल था. जिसका भारत में प्रसारण प्रतिबंधित था लेकिन तय समय से दो दिन पहले ही बीबीसी ने इसका प्रसारण कर दिया. हालांकि भारत में इसका प्रसारण नहीं किया गया लेकिन यह युट्यूब पर आसानी से उपलब्ध था. बाद में गृहमंत्रालय के कहने पर डाक्युमेंट्री को युट्यूब से भी हटा लिया गया.

मादा पांडा कांड– बीबीसी महिला विरोधी है, इसका प्रमाण वर्ष 2011 में देखने को मिला था. दरअसल, बीबीसी ने वर्ष 2011 की 12 सर्वश्रेष्ठ महिलाओं की सूची बनाई थी और उसे सार्वजनिक किया था, जिसमें इस मीडिया कंपनी ने चीनी मादा पांडा तियान तियान स्वीटी को महिलाओं की सूची में स्थान दिया था. जिसे लेकर पूरी दुनिया में बीबीसी की थू थू हुई थी.

प्रसार भारती को प्रचार भारती’- बीबीसी और प्रसार भारती के बीच कड़वाहट की शुरुआत दंगों के दौरान रिपोर्टिंग से ही शुरू हो चुकी थी. भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इन दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर कई सवाल उठाए थे और पक्षपात करते हुएएक दंगाई समूह का साथ देने का आरोप लगाया था. इससे जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. प्रसार भारती और बीबीसी के बीच यह विवाद चल ही रहा था, इस बीच इसमें प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार कूद पड़े और उन्होंने प्रसार भारती को प्रचार भारती की संज्ञा दे डाली. उसके बाद तो बवाल मचना तय था.

दरअसल, 8 मार्च 2020 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बीबीसी ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें प्रसार भारती के तत्कालीन सीईओ शशिशेखर वेम्पित को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन उन्होंने बीबीसी पर एकपक्षीय, तथ्यहीन और भारत विरोधी रिपोर्टिंग का आरोप लगाते हुए आमंत्रण को ठुकरा दिया. उसके बाद जवाहर सरकार का बयान सामने आया था और फिर प्रसार भारती की ओर से शशिशेखर के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चला था. साथ ही बीबीसी की भी जमक धुलाई हुई थी.

यह तो कुछ ही उदाहरण हैं. ऐसे अनेक उदाहरण अभी भी सार्वजनकि डोमेन में पड़े हैं जिनपर चर्चा की जाए तो उपन्यास लिखा जा सकता है! किसी ने सही ही कहा है कि सफलता जल्द ही सर चढ़ कर बोलने लगती है और बीबीसी के साथ भी यही हुआ, जो अब उसके विनाश का कारण बन रहा है. इसके अलावा वैक्सीन को लेकर भ्रामक खबरें फैलान, एजेंडा चलाना, अनुच्छेद 370 पर बकलोली करना और चागोस पर चुप हो जाना, कश्मीर को ‘इंडियन ऑक्यूपाइड कश्मीर’ कहना और उत्तरी आयरलैंड को ‘ब्रिटिश ऑक्यूपाइड आयरलैंड’ कहने पर सांप सूंघ जाना, भारत को मुस्लिम विरोधी देश कहना, जय श्री राम के नारे को हिंसक बताने समेत कई ऐसे मामले हैं, जो प्रदर्शित करते हैं कि बीबीसी पत्रकारिता करने के अलावा सबकुछ करता है! बीबीसी हिंदी की वेबसाइट पर चलने वाली तमाम खबरों का झुकाव भी एकपक्षीय ही प्रतीत होता है. इसके अलावा हर खबर में एजेंडा ही इसकी पहचान है! ऐसे में कहा जा सकता है कि बीबीसी की जैसी शुरूआत हुई थी और जैसे इस कंपनी ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना ली थी, अब धीरे धीरे इसके कृत्य ही इसके विनाश की पटकथा लिख रहे हैं. लेकिन कंपनी सीख लेने के बजाए आज भी अपने कुत्सित एजेंडे को सर्वोपरि रखते हुए उस पर काम कर रही है. ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब पूर्णरूप से BBC रसातल में पहुंच जाएगी.

और पढ़ें: कश्मीर पर छाती पीटो, चागोस द्वीप पर मौन रहो, ब्रिटेन के मुखपत्र बीबीसी का यही हाल है

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें।

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

बीबीसी

 

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन ( बीबीसी ) यूनाइटेड किंगडम का राष्ट्रीय प्रसारक है । लंदन में ब्रॉडकास्टिंग हाउस में मुख्यालय , यह दुनिया का सबसे पुराना राष्ट्रीय प्रसारक है, और कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा प्रसारक है, जिसमें कुल 22,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 19,000 सार्वजनिक क्षेत्र के प्रसारण में हैं। [1] [3] [4] [5] [6]

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन
टाइपशाही चार्टर के साथ वैधानिक निगम
उद्योगसंचार मीडिया
पूर्वजब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कंपनी
स्थापित18 अक्टूबर 1922 100 साल पहले (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के रूप में) 1 जनवरी 1927 95 साल पहले (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन के रूप में)
संस्थापकएचएम सरकार
मुख्यालयब्रॉडकास्टिंग हाउस , लंदन, यूनाइटेड किंगडम
सेवाकृत क्षेत्र
दुनिया भर
मुख्य लोग
उत्पादों
सेवाएं
आयबढ़ोतरी £ 5.064 बिलियन (2021) [1]
बढ़ोतरी£290 मिलियन (2021) [1]
बढ़ोतरी£227 मिलियन (2021) [1]
कुल संपत्तिबढ़ोतरी£2.11 बिलियन (2021) [1]
स्वामीसार्वजनिक स्वामित्व [2]
कर्मचारियों की संख्या
कमी22,219 (2021) [1]
प्रभागोंबीबीसी टेलीविज़न
बीबीसी स्टूडियो
बीबीसी स्पोर्ट
बीबीसी रेडियो
बीबीसी न्यूज़
बीबीसी ऑनलाइन
बीबीसी साउंड
बीबीसी मौसम
बीबीसी संगीत
बीबीसी अंग्रेज़ी क्षेत्र
बीबीसी स्कॉटलैंड
बीबीसी साइमरू वेल्स
बीबीसी उत्तरी आयरलैंड
बीबीसी नॉर्थ
वेबसाइटwww .bbc .com इसे विकिडेटा पर संपादित करें

बीबीसी एक शाही चार्टर [7] के तहत स्थापित किया गया है और डिजिटल, संस्कृति, मीडिया और खेल के लिए राज्य सचिव के साथ अपने समझौते के तहत संचालित होता है । [8] इसके काम को मुख्य रूप से एक वार्षिक टेलीविज़न लाइसेंस शुल्क [9] द्वारा वित्त पोषित किया जाता है, जो सभी ब्रिटिश परिवारों, कंपनियों और संगठनों से लाइव टेलीविज़न प्रसारण और आईप्लेयर कैच-अप प्राप्त करने या रिकॉर्ड करने के लिए किसी भी प्रकार के उपकरण का उपयोग करने के लिए लिया जाता है। [10] शुल्क ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है , संसद द्वारा सहमति व्यक्त की जाती है [11]और इसका उपयोग बीबीसी के रेडियो, टीवी और यूके के देशों और क्षेत्रों को कवर करने वाली ऑनलाइन सेवाओं को निधि देने के लिए किया जाता है। 1 अप्रैल 2014 से, इसने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस (1932 में बीबीसी एम्पायर सर्विस के रूप में लॉन्च) को भी वित्त पोषित किया है, जो 28 भाषाओं में प्रसारित होता है और अरबी और फ़ारसी में व्यापक टीवी, रेडियो और ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करता है 

बीबीसी के राजस्व का लगभग एक चौथाई हिस्सा इसकी वाणिज्यिक सहायक बीबीसी स्टूडियो (पूर्व में बीबीसी वर्ल्डवाइड ) से आता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीबीसी कार्यक्रमों और सेवाओं को बेचता है और बीबीसी की 24 घंटे की अंग्रेजी भाषा की समाचार सेवाओं बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़ और बीबीसी डॉट कॉम से भी वितरित करता है। , बीबीसी ग्लोबल न्यूज़ लिमिटेड द्वारा प्रदान किया गया। 2009 में, कंपनी को अपनी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की मान्यता में एंटरप्राइज के लिए क्वीन्स अवार्ड से सम्मानित किया गया था। [12]

अपनी स्थापना से, द्वितीय विश्व युद्ध के माध्यम से (जहां इसके प्रसारण ने राष्ट्र को एकजुट करने में मदद की), WW2 के बाद के युग में टेलीविजन के लोकप्रिय होने और 20 वीं सदी के अंत और 21 वीं सदी की शुरुआत में इंटरनेट ने एक प्रमुख भूमिका निभाई है। ब्रिटिश जीवन और संस्कृति में। [13] इसे बोलचाल की भाषा में बीब , आंटी या दोनों ( आंटी बीब ) के संयोजन के रूप में जाना जाता है। [14] [15]

भारत

  लेख संवाद पढ़ें अपुनरीक्षित बदलाव सम्पादित करें इतिहास देखें देखा गया भारत गणराज्य Republic of India ( अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में देखें) ध...