बुधवार, 31 जनवरी 2024

साढ़े तीन मिनट

 *


इस भीषण ठंड में जिनकी आयु 30 वर्ष से अधिक है, उन्हें रात में 10 बजे सोने के बाद से जब भी बिस्तर से उठे, तब आप  एकदम से ना उठे। क्योँकि ठंड के कारण शरीर का ब्लड गाढ़ा हो जाता है तो वह धीरे धीरे कार्य करने के कारण पूरी तरह हार्ट में नहीं पहुँच पाता और शरीर छूट जाता है। इसी कारण से शर्दी के महीनों में 30 वर्ष से ऊपर के लोगों की ह्रदयगति रुकने से दुर्घटनाए अत्यधिक होती पाई गई हैं, इसलिए हमें सावधानी अत्यधिक बरतने की आवश्यकता है। यही सुझाव में भी देता हु।*


*साढ़े तीन मिनिट:  मेरी  सलाह!*


       डॉ. एस के अग्रवाल 

          जनरल फिजीशियन 

      

   *जिन्हें सुबह या रात में सोते समय  पेशाब करने जाना पड़ता हैं उनके लिए विशेष सूचना!!*


        हर एक व्यक्ति को इसी साढ़े तीन मिनिट में सावधानी बरतनी चाहिए।


*यह इतना महत्व पूर्ण क्यों है?*

        यही साढ़े तीन मिनिट अकस्माक होने वाली मौतों की संख्या कम कर सकते हैं।


        जब जब ऐसी घटना हुई हैं, परिणाम स्वरूप तंदुरुस्त व्यक्ति भी रात में ही मृत पाया गया हैं।


        ऐसे लोगों के बारे में हम कहते हैं, कि कल ही हमने इनसे बात की थी। ऐसा अचानक क्या हुआ? यह कैसे मर गया?


       इसका मुख्य कारण यह है कि रात मे जब भी हम मूत्र विसर्जन के लिए जाते हैं, तब अचनाक या ताबड़तोब उठते हैं, परिणाम स्वरूप मस्तिष्क तक रक्त नही पहुंचता है।


       यह साढ़े तीन मिनिट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।


      मध्य रात्रि जब हम पेशाब करने उठते है तो हमारा ईसीजी का पैटर्न बदल सकता है। इसका कारण यह है, कि अचानक खड़े होने पर मस्तिष्क को रक्त नहीं पहुच पाता और हमारे ह्रदय की क्रिया बंद हो जाती है।


   साढ़े तीन मिनिट का प्रयास एक उत्तम उपाय है।


1. *नींद से उठते समय आधा मिनिट गद्दे पर लेटे हुए रहिए।*


2. *अगले आधा मिनिट गद्दे पर बैठिये।*


3. *अगले अढाई मिनिट पैर को गद्दे के नीचे झूलते छोड़िये।*


   साढ़े तीन मिनिट के बाद आपका मस्तिष्क बिना खून का नहीं रहेगा और ह्रदय की क्रिया भी बंद नहीं होगी! इससे अचानक होने वाली मौतें भी कम होंगी।


     आपके प्रियजनों को लाभ हो अतएव सजग करने हेतु अवश्य प्रसारित करे।

                 

            *धन्यवाद!!*


  

       

🙏निवेदन एवं आग्रह 🙏




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मंगलवार, 30 जनवरी 2024

गाँधी जी / खड़े रहो तुम / राजकमल pr

 #RajkamalBooks

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“थोड़ा एक झुके, थोड़ा दूसरा― यह गाँधीजी के लिए सिर्फ व्यावहारिक बुद्धि की माँग नहीं थी। उनकी तथाकथित समझौता परस्ती में यह गहरी नैतिक और दार्शनिक मान्यता निहित थी कि सारा सत्य सिर्फ मेरी बपौती नहीं है। मेरे प्रतिपक्षी के पास भी सत्य का एक पहलू है जिस के साथ समायोजन किया जाना चाहिए। गाँधीजी की एक-एक बात उचित ठहराने की न जरूरत है न इच्छा। आधी सदी तक फैले इतने सक्रिय सार्वजनिक जीवन में गाँधीजी ने कई विवादास्पद काम किए, लेकिन जब कोई समाज अपनी ऐतिहासिक विभूतियों का आकलन करता है तो समग्रता में। साथ ही इस बात का अनुमान करते हुए कि विभूति-विशेष के विचार और व्यवहार की दिशा क्या थी, उसके सरोकार क्या थे?”


महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि पर राजकमल ब्लॉग में पढ़ें, पुरुषोत्तम अग्रवाल की किताब ‘संस्कृति वर्चस्व और प्रतिरोध’ में संकलित लेख ‘खड़े रहो गाँधी’ का एक अंश। 


लिंक - https://rb.gy/h7if7q

सोमवार, 29 जनवरी 2024

श्री राम जन्मभूमि मंदिर का विश्व को संदेश - साध्वी प्रज्ञा भारती


🙏🙏

22 जनवरी 2024 आधुनिक भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण तिथि बन गई है| उस दिन अयोध्या धाम में राम जन्म भूमि मंदिर में रामलला विराजमान होने से विश्वभर का ध्यान भारत के गौरवशाली अतीत की ओर चला गया था| पूरा देश राम माय हो गया था| क्योंकि राम भारतीय संस्कृति के केंद्र में समाए हुए हैं| श्री राम का जियाव्न विश्वभर को यह प्रेरणा देता रहा है कि हम अपने जियाव्न को श्रेष्ठ, मर्यादापूर्ण, अनुशासित और कल्याणकारी कैसे बना सकते हैं| श्री राम का जीवन यह भी सिखाता है कि अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों में किस प्रकार से धैर्य रखा जा सकता है| सत्य, मर्यादा, करुणा और समाज के हर व्यक्ति के प्रति सम्मान उन्हें सबका बना देता है| वह राजा सुग्रीव, राजकुमार विभीषण, महाबली हनुमान, ऋषि मुनियों, अहिल्या शबरी, केवट, जटायु, भालुओं, वानरों के तो हैं ही तथा अवध कि जनता के भी अपने हैं| उनका व्यवहार यह भी सिखाता है कि क्रोध को विनम्रता से कैसे जीता जा सकता है| विवेक, विनय और वीरता ने अयोध्या के राजा राम को लोकनायक राम बना दिया है| 

राम ने अयोध्या से श्रीलंका तक यात्रा करके समूचे भारत को एक सूत्र में बांध दिया| आस्थावान लोगों का मानना है कि उन्हें दैवीय शक्तियाँ प्राप्त थीं लेकिन उन्होने हर काम को आम आदमी की भांति पूरा किया| अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर हर व्यक्ति को उनकी अद्भुत संगठन क्षमता की याद दिलाएगा| अयोध्या से जाते समय श्री राम केवल अपनी पत्नी और छोटे भाई के साथ वन गए थे लेकिन चौदह वर्ष बाद वह, मनुष्यों, वानरों और भालुओं की विशाल सेना लेकर लौटे थे| श्री राम जन्मभूमि मंदिर पूरे विश्व को अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देगा| भव्य मंदिर हर व्यक्ति को यह प्रेरणा देगा कि हमें कैसा व्यवहार करना है और कैसा नहीं! यह वास्तुकला का अनूठा नमूना हमें मित्र कैसा होना चाहिए, इसकी सीख भी देगा| श्री राम द्वारा निषादराज, सुग्रीव और विभीषण के प्रति दिखाए गए सम्मान की याद यह मंदिर सदा दिलाएगा कि जिससे भी मैत्री की, उसे पूरे दिल से निभाई| यह मंदिर यह भी प्रेरणा देगा कि श्री राम अपने वचन के कितने पक्के थे| यह मंदिर त्याग, प्रेम, समर्पण और निष्ठाजैसी भावनाओं का महत्व सदियों तक बताता रहेगा| श्री राम का शासन धर्म और सत्य पर आधारित था, इसलिए आज भी आदर्श माना जाता है| यह मंदिर विश्व के शासकों को रामराज की याद दिलाता रहेगा| जयश्री राम !!


शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

क्षेत्रीय पत्रकारिता के मजबूत हस्ताक्षर डॉ शैलेश शर्मा का ना होना

 श्रद्धांजलि


क्षेत्रीय (हजारीबाग) पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर डॉ शैलेश शर्मा का जाना / विजय केसरी 

 

   हजारीबाग के जाने-माने पत्रकार डॉ शैलेश शर्मा का जाना  पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे हजारीबाग पत्रकारिता के एक सशक्त हस्ताक्षर थे । वे चार दशकों तक हजारीबाग के पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे थे।। जैसे ही यह खबर मुझ तक पहुंची, मन मस्तिष्क को विश्वास ही नहीं हो पा रहा है कि शैलेश शर्मा का निधन हो चुका है । अभी कुछ  दिन पहले ही उनसे मुलाकात हुई थी। वे  बिल्कुल स्वस्थ दिख रहे थे। ‌उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ी की कोई बात भी नहीं बताई थी। बल्कि जिस तरह वे मुस्कुराकर से मिलते थे, उसी  तरह मुस्कुराकर मिले थे। वे पान खाने के बड़े शौकीन थे । उस दिन भी वे  खाए हुए थे।‌ जो भी उनके जान पहचान के लोग  शैलेश शर्मा के  निधन समाचार सुन रहे हैं।  किसी को भी विश्वास ही नहीं हो रहा है।  बिनोमा भावे विश्वविद्यालय से सेवा निवृत्ति के बाद शैलेश शर्मा  घर में नहीं बैठ गए थे । बल्कि पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी सक्रियता बरकरार थी। वे बराबर अपने मित्रों से मिला करते थे । उनके मित्रों की एक लंबी सूची है। मृत्यु से कुछ दिन पूर्व ही उन्हें अपने शरीर में दर्द का अनुभव हुआ था । वे इलाज के लिए अपने बेटे के पास दिल्ली चले गए थे। जहां उन्हें मेदांता हॉस्पिटल में जांच के उपरांत कैंसर बताया गया था । वे कुछ दिनों तक मेदांता में ही इलाज रत रहे थे।  अचानक 18 तारीख की अहले सुबह 3:30 बजे उनका मात्र 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया ।  वे अपने पीछे पत्नी एक बेटा और एक बेटी सहित एक पोता छोड़ गए।  बेटा दिल्ली में ही एक निजी कंपनी में कार्यरत है।‌ उन्होंने अपने दोनों बच्चों की शादी बहुत ही धूमधाम से किया था । उन्होंने अपनी बेटी की शादी हजारीबाग के लोकप्रिय आई सर्जन डॉक्टर ललित जैन के बेटे से किया था। उनका अंतिम दाह संस्कार दिल्ली में ही संपन्न हुआ।

 सेवानिवृत्ति के बाद वे रोजाना कुम्हारतोली स्थित अपने आवाज से निकलकर मित्रों से मिलना नहीं भूले थे। वे  एक विनोदी स्वभाव के व्यक्ति थे। मित्रों से मिलकर हंसी मजाक करना उनके दैनिक दिनचर्या में शामिल था। उनके इस तरह अकस्मात निधन पर किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि शर्मा जी अब हम लोग के बीच नहीं रहे।  उन्होंने अपने करियर की शुरुआत महाविद्यालय के एक प्राध्यापक से किया था, लेकिन पत्रकारिता के प्रति उनकी अभिरुचि ने उन्हें एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में निर्मित कर दिया था।

 शैलेश शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर नगर में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा मुज़फ़्फ़रनगर से ही प्राप्त किया था।  आगे  उन्होंने  उत्तर प्रदेश के मेरठ विश्वविद्यालय से वाणिज्य विषय में  स्नातकोत्तर करने के बाद पीएचडी  भी किया था। उनका बचपन से ही शिक्षक बनने का मन था । इसी निमित्त उन्होंने इतनी उच्च शिक्षा हासिल की थी । शैलेश शर्मा छात्र जीवन से ही एक मेधावी छात्र रहे थे। शैलेश शर्मा की जन्मभूमि मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश जरूर रही है थी,  लेकिन उनकी कर्मभूमि  हजारीबाग ही रही थी । उन्होंने एक अध्यापक के रूप में हजारीबाग के मार्खम कॉलेज आफ काॉमर्स से अपनी शुरुआत की थी। वे  वाणिज्य विषय के अच्छे जानकार थे। उनकी पढ़ाई की दक्षता बहुत जल्द ही प्रचारित हो गई थी । कॉलेज में छात्र-छात्राएं उनकी पढ़ाई से काफी प्रभावित हुए थे। आगे चलकर कई महाविद्यालयों से होते हुए विनोबा भावे विश्वविद्यालय, वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर बन गए थे । उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से सेवा निवृत्ति भी पाई थी।  वे यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच  एक लोकप्रिय शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाने  में सफल हुए थे ।‌

वे  प्रारंभ से ही कम बोलने वाले व्यक्ति थे।  सहज, सरल उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गई थी । उन्होंने कभी भी एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर का घमंड नहीं किया । वे यूनिवर्सिटी के छात्रों से बहुत ही खुलकर मिला करते थे। जो भी छात्र-छात्राएं उनसे कोर्स संबंधी जानकारी चाहते थे।  वे बहुत ही सहजता के साथ बता दिया करते थे। अपने इसी व्यवहार के चलते वे विनोबा भावे विश्वविद्यालय के सीनेट के सदस्य बन पाए थे।  बाद में  वे अकादमी परिषद के सदस्य भी बने थे।  आगे चलकर प्रशिक्षण एवं नियोजन अधिकारी भी बने थे। वे  एनसीसी  कमीशंड ऑफिसर के रूप में भी काफी सफल रहे थे। वे महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के जिन पदों पर भी रहे थे ,उन  पदों की गरिमा को पूरी निष्ठा के साथ निभाया था।

  महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की सेवा करते हुए उन्होंने पत्रकारिता को भी अपने कर्म का हिस्सा बनाया था।  वे एक ओर महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में सफल रहे थे।  वहीं दूसरी ओर एक पत्रकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाने में भी काफी सफल रहे थे । लोगों का और मेरा भी मानना है कि वे एक पत्रकार के रूप में ज्यादा लोकप्रिय हो पाए थे। उन्होंने एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में लिखना प्रारंभ किया था।  वे आगे चलकर  1987 के आसपास प्रभात खबर जैसे लोकप्रिय अखबार से जुड़े थे। हजारीबाग में प्रभात खबर को स्थापित करने में उनके अवदान को कभी विश्वजीत नहीं किया जा सकता है। वे  1995 में डाल्टेनगंज से प्रकाशित  राष्ट्रीय नवीन मेल के चीफ ब्यूरो के रूप में शानदार पत्रकारिता की पारी खेली थे । वे 2000 से 2010 तक दैनिक हिंदुस्तान के चीफ ब्यूरो रहे थे । आगे चलकर 2010 से 2015 तक दैनिक जागरण  के चीफ ब्यूरो की हैसियत से काम किया था। वे जिन भी अखबारों से जुड़े अखबारों का सरकुलेशन बढ़ाने में बहुत हद तक कामयाब रहे थे। आज भी इन अखबारों के संपादक शैलेश शर्मा के गुणों का बखान करते नहीं थकते हैं।

सेवा निवृत्ति से पूर्व ही वे हिंदुस्तान टाइम्स एवं पायनियर अंग्रेजी अखबार में एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे। वे इन दोनों अखबारों में लगातार लिखते रहे थे। वे जिन भी अखबारों से जुड़े रहे थे, हजारीबाग की विभिन्न बुनियादी समस्याओं पर लगातार लिखते रहे थे।

उनके लंबे पत्रकारिता के जीवन में कई चुनौतियां आई थीं। उन्होंने बड़े धैर्य और हिम्मत के साथ उन चुनौतियों का मुकाबला  किया था। वे अखबार में जिन सरकारी विभागों की अक्रमन्यता के  खिलाफ पर सवाल उठाया करते थे । उन विभागों के अधिकारी इनकी पत्रकारिता की कार्य शैली से सुधारने को दिवस हो जाया करते थे। कुछ मामले में एक दो अधिकारियों ने उन्हें डराने व धमकाने का भी कोशिश किया था । लेकिन ये कभी डरे नहीं बल्कि एक निर्भीक और  निष्पक्ष पत्रकार के रूप में लगातार अक्रमन्यता के खिलाफ लिखते रहे थे। पिछले दिनों 27 नवंबर को  ही उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें 'त्रिवेणी कांत ठाकुर पत्रकारिता सम्मान' से अलंकृत किया गया था।

शैलेश शर्मा को महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में बेहतर शिक्षा देने के लिए कई संस्थाओं ने सम्मानित किया था। विश्वविद्यालय की सेवा के दौरान उन्होंने वाणिज्य विषय पर तीन पुस्तक भी लिखीं  थीं। 'रूरल इकोनॉमिक्स, 'सीसीएमआर' और 'प्रिंसिपल आफ इकोनॉमिक्स' के नाम से ये तीन पुस्तक प्रकाशित हुईं। वहीं दूसरी ओर एक स्वतंत्र लेखक के रूप में विभिन्न समाचार पत्रों में साहित्यिक, आर्थिक एवं सामाजिक विषयों पर शोधपूर्ण आलेख लिखा करते थे।  उन्होंने जो आलेख एक लेखक के रूप में विभिन्न समाचार पत्रों में लिखे थे।‌ वे इन आलेखों की भी पुस्तक प्रकाशित करना चाहते थे।  लेकिन  विश्वविद्यालय की सेवा और पत्रकारिता के  लगातार भाग दौड़ के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे थे । वे महाविद्यालय की सेवानिवृत्ति पश्चात इन आलेखों को पुस्तक  रूप देना चाह रहे थे । वे इस दिशा में अग्रसर हुए ही थे कि मात्र 66 वर्ष की उम्र में ही उनका निधन हो गया था।

डॉ शैलेश शर्मा की लोकप्रियता का यह आलम है कि उनके अकस्मात निधन पर सोशल मीडिया पर दर्जनों पोस्ट श्रद्धांजलि स्वरुप चल रहे हैं।  समाज के हर वर्ग,पथ, विचार और धर्म के लोग अपनी अपनी श्रद्धांजलि प्रकट कर रहे हैं । उनका आसमय जान हजारीबाग पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है।


विजय केसरी,

 कथाकार/ स्तंभकार)

 पंच मंदिर चौक, हजारीबाग - 825301 ,

मोबाइल नंबर : 92347 99550.

सोमवार, 1 जनवरी 2024

देशभर में ट्रक ड्राइवर क्यों कर रहे है हड़ताल

 




  1. देशभर में ट्रक ड्राइवर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा असर

    ट्रक चालकों का प्रदर्शन

    देशभर में ट्रक चालकों की हड़ताल का सबसे अधिक असर महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है.

    नागपुर सहित कई इलाकों के पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें दिख रही हैं.

    महाराष्ट्र में प्रदर्शन की वजह से कुछ स्थानों पर ईंधन की कमी की आशंका पैदा हो गई है.

    ट्रक चालक हाल ही में संसद से पास किए गए भारतीय न्याय संहिता में हिट एंड रन को लेकर किए गए प्रावधान से नाराज़ हैं. भारतीय न्याय संहिता अब भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की जगह लेगा.

    नए कानून के तहत अगर हिट एंड रन के मामलों में अभियुक्त मौके से भागता है तो उस स्थिति में सात लाख रुपये का जुर्माना और 10 साल की सज़ा का प्रावधान किया गया है.

    ट्रक चालकों का कहना है कि इन प्रावधानों से उन्हें अनुचित उत्पीड़न झेलना पड़ सकता है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने राजस्थान की राजधानी जयपुर से भी ट्रक चालकों के सड़कों पर प्रदर्शन के विज़ुअल साझा किए हैं.

    वहीं पंजाब के मोगा में भी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी बताई जा रही है.

    इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस से कहा है कि वह पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बिना बाधा के जारी रखने की कोशिश करे.

  2. भूकंप से प्रभावित जापान से लौटे जूनियर एनटीआर, क्या कहा?

    जूनियर एनटीआर
    Image caption: जूनियर एनटीआर

    जापान में आए भूकंप में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है.

    इस भूकंप के दौरान भारतीय फ़िल्म अभिनेता जूनियर एनटीआर भी जापान में थे. जूनियर एनटीआर अब भारत लौट चुके हैं.

    इस बारे में जूनियर एनटीआर ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी.

    जूनियर एनटीआर ने कहा, ''आज जापान से घर लौट आया हूं. भूकंप से स्तब्ध हूं. बीते पूरे हफ्ते जापान में ही था. मेरी संवेदनाएं भूकंप से प्रभावित लोगों के साथ हैं. उम्मीद करता हूं कि लोग जल्दी ठीक हों. मज़बूत बने रहना, जापान.''

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, जूनियर एनटीआर की फ़िल्म आरआरआर ने जापान में साल 2022 में अच्छी ख़ासी कमाई की थी.

    फ़िल्म ने जापान के बॉक्स ऑफिस पर 24 करोड़ से ज़्यादा कमाए थे.

    इस फ़िल्म में जूनियर एनटीआर के अलावा राम चरण भी थे.

  3. जयशंकर विदेश मंत्री रहते हुए अब तक पाकिस्तान क्यों नहीं गए?

    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर
    Image caption: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर

    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान से संबंधों पर बात की है.

    इस इंटरव्यू में जयशंकर से पूछा जाता है कि विदेश मंत्री रहते हुए वो कभी पाकिस्तान नहीं गए.

    इसके जवाब में जयशंकर कहते हैं, ''2019 में पाकिस्तान ने जैसी प्रतिक्रिया दी, मुझे लगता है कि इस वजह से भी मेरा पाकिस्तान जाना नहीं पो पाया. बीते कुछ दशकों से पाकिस्तान जो कर रहा है वो ये कि वो सरहद पार आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है ताकि भारत के साथ बातचीत की जा सके.''

    जयशंकर बोले, ''हमने उस खेल में शामिल ना होकर पाकिस्तान के इस पैंतरे को अप्रासंगिक बना दिया है. ये ऐसा नहीं है कि हम अपने पड़ोसी से बात नहीं करना चाहते हैं. अंत में आपका पड़ोसी आपका पड़ोसी ही होता है.''

    जयशंकर कहते हैं- जिस तरह से वो आतंकवाद को वैध बताकर बातचीत करने की कोशिश करते हैं, हम उस तरह से बात नहीं करेंगे.

    जयशंकर साल 2019 में भारत के विदेश मंत्री बने थे.

    इसी साल भारत में चुनाव से पहले पुलवामा में हमला हुआ था और जवाब में भारत ने सरहद पार कार्रवाई करने का दावा किया था.

    इस दौरान भारत के विंग कमांडर अभिनंदन का प्लेन भी क्रैश होकर पाकिस्तान में गिर गया था. हालांकि कुछ दिन बाद विंग कमांडर की भारत वापसी हो गई थी.

  4. ब्रेकिंग न्यूज़जापान में भूकंप: अब तक 30 लोगों की मौत, तस्वीरों में देखिए तबाही का मंज़र

    जापान में भूकंप
    Image caption: जापान में भूकंप

    जापान में सोमवार को आए भूकंप के कारण अब तक 30 लोगों की मौत की जानकारी सामने आ चुकी है.

    स्थानीय प्रशासन ने इन मौतों की पुष्टि की है.

    सोमवार को जापान में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया था, इसके बाद प्रशासन ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी और लोगों से तटीय इलाक़ों को खाली करने के लिए कहा था.

    हालांकि मंगलवार सुबह इस चेतावनी को एडवाइज़री में बदल दिया गया है.

    वाजिमा में अब तक 16 और सुज़ू में अब तक छह लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है.

    भूकंप के बाद से लोगों को बचाए जाने की कोशिशें हो रही हैं और इस काम में 1000 से ज़्यादा बचावकर्मी जुटे हुए हैं.

    जापान के पीएम फुमियो किशिदा ने कहा है कि भूकंप में प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि उन तक जल्द मदद पहुंचेगी.

    वो कहते हैं, ''भूकंप प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में आत्मरक्षा बलों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सड़कें टूट गई हैं. जो लोग इमारतों में फँसे हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द बचाना चाहिए ताकि इमारत गिरने से पहले उन्हें निकाला जा सके.''

    आगे देखिए तस्वीरों में तबाही का मंज़र

    जापान में भूकंप
    जापान में भूकंप
    जापान में भूकंप
    जापान में भूकंप
    जापान में भूकंप
  5. भारत के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ क्यों बोले- ये सही नहीं होगा कि मैं ऐसी आलोचनाओं पर जवाब दूं

    भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़
    Image caption: भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़

    भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को न्यायाधीशों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम व्यवस्था का बचाव किया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ''ये कहना सही नहीं है कि कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है. अधिक पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए हमने ज़रूरी कदम उठाए हैं. फ़ैसला लेने की प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहनी चाहिए. मैं एक बात और साझा करना चाहता हूं. जब हम सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नामों पर विचार करते हैं, तो हम हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीशों के करियर पर भी विचार करते हैं.''

    वो कहते हैं, ''ज़ाहिर है कि कई कारणों से कॉलेजियम के भीतर होने वाली चर्चा को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. हमारी कई चर्चाएं उन न्यायाधीशों की निजता पर होती हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए विचाराधीन हैं. वैसी चर्चाएं अगर आज़ाद और खुले माहौल में होनी हैं तो वे वीडियो रिकॉर्डिंग या दस्तावेजीकरण का विषय नहीं हो सकतीं. यह वह प्रणाली नहीं है, जिसे भारतीय संविधान ने स्वीकार किया है.''

    डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह भी महत्वपूर्ण है कि हम निर्णय लेने की अपनी प्रक्रिया पर भरोसा करना सीखें.

    धारा 370 हटाए जाने से जुड़े केस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच के फ़ैसले की आलोचना वाले सवाल पर वो बोले- न्यायाधीश किसी केस का फ़ैसला संविधान और क़ानून के आधार पर सुनाते हैं. मुझे नहीं लगता कि ये सही होगा कि मैं ऐसी आलोचनाओं पर जवाब दूं या अपने फ़ैसले का बचाव करूं.

    सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटने के फ़ैसले को बरकरार रखा था.

  6. योगी आदित्यनाथ बोले- जो अयोध्या का नाम लेने में भी हिचकिचाते थे, अब वो लोग...

    योगी आदित्यनाथ

    उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जो लोग कभी अयोध्या का नाम लेने में भी हिचकिचाते थे, अब उनके सुर बदल गए हैं.

    योगी आदित्यनाथ ने ये बातें वृंदावन में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कही हैं.

    22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है. इस कार्यक्रम में पक्ष और विपक्ष के नेताओं को आमंत्रित किया गया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़- योगी आदित्यनाथ ने कहा, ''पहले जो लोग अयोध्या का नाम लेने से बचते थे, अब वो कह रहे हैं कि अगर निमंत्रण मिला तो हम ज़रूर जाएंगे.''

    योगी ने हाल के दिनों में अयोध्या में आए यातायात से संबंधित बदलावों की प्रशंसा की.

    पीएम मोदी ने कुछ दिन पहले अयोध्या का दौरा किया था और कई समारोहों में शिरकत की थी.

    इससे पहले आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा था, ''अगर 22 जनवरी को हुई प्राण प्रतिष्ठा के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम खुद धरती पर आ गए तो वो पीएम मोदी से सवाल पूछेंगे. वो पूछेंगे कि युवाओं का रोज़गार कहां है, देश में इतनी महंगाई क्यों है?''

  7. कोहरे के कारण दिल्ली आने वाली ये 26 ट्रेनें देर से चल रही हैं

    ट्रेन

    उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड हो रही है.

    इस ठंड के कारण रेल यात्राओं में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है. मंगलवार सुबह भी दिल्ली पहुंचने वाली काफी ट्रेनें देरी से चल रही हैं.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, रेलवे ने जानकारी दी है कि दिल्ली आने वाली 26 ट्रेनें देर से चल रही हैं और इस कारण यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

    आगे पढ़िए उन 26 ट्रेनों के नाम जो देर से चल रही हैं. साथ ही ये भी कि ये ट्रेन कितने घंटों की देरी से चल रही हैं.

    ट्रेन
  8. ओडिशा: जगन्नाथ मंदिर में लागू हुआ ड्रेस कोड, ऐसे कपड़े पहनकर जाएंगे तो नहीं मिलेगी एंट्री

    जगन्नाथ मंदिर

    ओडिशा के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड आवश्यक कर दिया है.

    मंदिर परिसर में गुटखा और पान खाने पर भी रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही प्लास्टिक और पॉलिथिन के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है.

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में दाखिल होने से पहले ढंग के कपड़े पहनने होंगे. ऐसे श्रद्धालु जिन्होंने हाफ पेंट, शॉर्ट्स, फटी जींस, स्लीवलेस ड्रेस पहनी हुई होगी, उन्हें मंदिर में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इस नियम के आने के बाद से एक जनवरी को जो लोग मंदिर आए, वो धोती-गमछे और महिलाएं साड़ी या सलवार कमीज़ पहनकर आए.

    मंदिर प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जो लोग नियमों को नहीं मानेंगे, उन्हें जुर्माना देना होगा.

    सोमवार से भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर परिसर में भी तंबाकू से संबंधित उत्पादों के खाने पर रोक लगा दी गई है.

  9. ब्रेकिंग न्यूज़दक्षिण कोरिया में न्यूज़ कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्ष के नेता पर चाकू से हमला

    दक्षिण कोरिया में विपक्ष के नेता पर एक न्यूज़ कॉन्फ्रेंस के दौरान चाकू से हमला हुआ है.
    Image caption: हमले के बाद दक्षिण कोरियाई नेता ली

    दक्षिण कोरिया में विपक्ष के नेता पर एक न्यूज़ कॉन्फ्रेंस के दौरान चाकू से हमला हुआ है.

    यॉन्हेप न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, ये घटना बुसान की है.

    विपक्ष के नेता ली-जे-म्युंग 2022 में राष्ट्रपति का चुनाव हार गए थे. ली की गर्दन के बाईं तरफ़ मंगलवार को हमलावर ने चाकू से हमला किया है.

    हमला करने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

    ली को हमले के 20 मिनट बाद अस्पताल पहुंचा दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक़, जब वो अस्पताल पहुंचाए गए तब वो होश में थे.

    ली दक्षिण कोरिया की संसद का फिलहाल हिस्सा नहीं हैं. माना जा रहा है कि वो 2024 को होने वाले आम चुनावों में हिस्सा लेंगे.

    59 साल के ली डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया के प्रमुख हैं.

    2022 के राष्ट्रपति चुनावों में वो महज 0.73 फ़ीसदी वोटों के फ़ासले से हार गए थे. दक्षिण कोरिया के इतिहास में ये पहली बार था जब चुनावी मुकाबला इतना दिलचस्प हो गया था.

  10. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ओवैसी क्या बोले?

    ओवैसी

    22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम किया जाना है. इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

    इस बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को हैदराबाद के एक कार्यक्रम में शिरकत की.

    इस कार्यक्रम में ओवैसी ने कहा, ''ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपनी मस्जिदों को आबाद रखें. मदरसे के मौलानाओं के पास जाएं, इंटरनेट के मौलानाओं से दूर रहें.''

    ओवैसी बोलते हैं, ''नौजवानों मैं तुमसे कह रहा हूं. हमारी मस्जिद हमने खो दी और वहां क्या किया जा रहा है, आप देख रहे हैं. क्या तुम्हारे और हमारे दिलों में तकलीफ नहीं होती है. जिस जगह पर हमने 500 साल हैया-अलस-सलाह (आओ नमाज़ की तरफ़) की सदाएं दीं. जहां बैठकर हमने क़ुरान-ए-करीम का ज़िक्र किया. आज वो जगह हमारे हाथ में नहीं है.''

    ओवैसी कहते हैं, ''नौजवानों क्या तुमको नहीं दिख रहा है कि तीन चार मस्जिदों में ऐसा ही हो रहा है. इनमें दिल्ली की सुनहरी मस्जिद भी है. नौजवानों इस पर ध्यान दो कि ये सब क्यों हो रहा है. सालों की मेहनत के बाद जो हमने मुकाम हासिल किया है, आपको अपनी इस ताकत को बचाने की ज़रूरत है. मस्जिदों को आबाद रखो. कहीं ऐसा ना हो कि मस्जिदें हमसे छीन ली जाएं.''

    कुछ दिन पहले ये ख़बर आई थी कि नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल यानी एनडीएमसी ने हाल में "यातायात की आवाजाही की सुविधा" को देखते हुए दिल्ली की सुनहरी बाग़ मस्जिद को हटाने का प्रस्ताव दिया था.

    ओवैसी कहते हैं, ''मुझे उम्मीद है कि आज का नौजवान अपनी नज़रों को आगे रखकर सोचेगा कि वो कैसे अपने परिवार, ख़ानदान, शहर को बचाना है.''

  11. जब जापान में हिल रही थी धरती, तब ऐसा था मंज़र

    जापान में आए भूकंप के बाद की तस्वीरें शायद आपने देखी होंगी.

    भूकंप के कारण अब तक आठ लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है. वहीं सुनामी की चेतावनी भी एडवाइज़री में बदल दी गई है.

    7.6 तीव्रता वाले इस भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतों को नुकसान पहुंचा है और हज़ारों लोग प्रभावित हुए हैं.

    आगे देखिए उन पलों की तस्वीरें, जब भूकंप के कारण जापान में धरती हिल रही थी तब वहां नया साल मना रहे लोग कैसे ख़ुद को बचा रहे थे.

    जापान
    Image caption: जापान के यूनिवर्सल पार्क में नया साल मनाने गए लोग जान बचाने के लिए कुछ यूं साथ बैठे नज़र आए.
    जापान
    जापान
    जापान
    जापान
  12. जापान में भूकंप के कारण अब तक छह लोगों की मौत

    जापान में भूकंप

    जापान में सोमवार को आए भूकंप के कारण अब तक छह लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है.

    ये सारी मौतें इशिवाका में हुई हैं. भूकंप का केंद्र भी इसी जगह को बताया जा रहा है.

    भूकंप के बाद से जापान में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और फँसे हुए लोगों को निकालने की कोशिशें की जा रही हैं.

    जापान के पीएम फुमियो किशिदा ने कहा है कि भूकंप में प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि उन तक जल्द मदद पहुंचेगी.

    वो कहते हैं, ''भूकंप प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में आत्मरक्षा बलों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सड़कें टूट गई हैं. जो लोग इमारतों में फँसे हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द बचाना चाहिए ताकि इमारत गिरने से पहले उन्हें निकाला जा सके.''

    भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि इस भीषण भूकंप के बाद भी आने वाले वक़्त में और झटके महसूस किए जा सकते हैं.

    सोमवार को आए भूकंप के बाद जापान में सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी और लोगों से तटीय इलाकों को खाली करने के लिए कहा गया था.

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