गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

भारतीय प्रथम क्रांतिकारी महिला नंगेली

 भारत की पहली क्रांतिकारी महिला नंगेली का महान इतिहास 

वीर साहसी नंगेली ने स्तन ढकने के अधिकार की किस तहह लड़ी यह लड़ाई

भारतीय प्रथम क्रांतिकारी महिला नंगेली


भारतीय इतिहास साक्षी है कि विभेदीय वर्ण व्यवस्था ने स्त्री समाज को केवल यातनाएं ही नहीं दी, अपितु उसे त्रासदी की पराकाष्ठा पर पहुंचा दिया। भारत का इतिहास तथ्यों के रूप में चीख चीख कर इस बात की गवाही देता है कि बहुजन स्त्रियों ने धर्मशास्त्रों की आड़ में अंतहीन शोषणकारी, आत्मघाती, आत्मग्लानि के हालातों को झेला है। वर्तमान में वस्त्रों पर बहस करने वाले लोग,सभ्यता,संस्कृति की दुहाई देने वाले व्यक्तियों की जमात भूल रही है कि कभी धर्मांधता एवम  लिंग भेद के चलते स्त्रियों से इन्होंने आवश्यक वस्त्र तक छीन लिए थे, और स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए बहुजन स्त्रियों के लिए निवस्त्रों होने के नियम लागू कर डाले थे। तिहरे शोषण का शिकार उन महिलाओं ने कैसे समाज के कुबुद्धि, कुदृष्टि पुरुषों की नश्तरीय,अश्लीलतापूर्ण दृष्टियों को सहा होगा? सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

इतिहास के पृष्ठों से न जानें कितनी बहुजन महापुरुषों की वैचारिकी, साहस, संघर्षों की अनगिनत शौर्य कथाओं को मिटाकर उन्हें अपने शौर्य की कथाओं के रुप में प्रस्तुत किया गया। या कहें कि जानबूझकर अलिखित छोड़ दिया गया। परिणाम स्वरूप बहुत सी पीढ़ियां इन सत्यों से अनभिज्ञ रह गई। दूसरी ओर इतिहास में स्वयं को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए  इतिहास को जातीय जामा पहनाकर लिखा गया।ऐसी ही एक महान क्रांतिकारी थी महाननायिका नंगेली। स्त्रियों में सर्वश्रेष्ठ महानायिका को नंगेली को हम कैसे विस्मृति न करें,जिसने सदियों से खुले अंग प्रदर्शन की दुर्गंधित रिवायत को समाप्त किया। बलिदान की साक्षात रूप महानायिका नंगेली ने परंपरा के नाम पर स्त्रियों पर थोप दी गई मिथ्यावादी प्रथा को विखंडित किया।

स्वतंत्रतापूर्व सन 1719 से 1949 के प्रारंभिक दौर का समय स्त्रीकाल का तिमिरकाल ही था। दक्षिण भारत के त्रावणकोर (केरल से तमिलनाडु का कुछ भू भाग) में स्त्रियों के लिए बेहद घिनौनी, अश्लीलता की परिचायक परम्परा थी। जिसे स्त्रियों पर ऊंची जातियों के सम्मान का सूचक बना थोप दिया गया था। किंतु असलियत यह थी कि पुरुषप्रधान स्थापत्य में स्त्रियों को लिंग भेदीयदृष्टि के कारणवश हीनभावना से ग्रसित किया गया। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि ये परंपरा पुरुषों को शारीरिक रूप से उत्तेजित कर स्त्रियों से जिस्मानी ताल्लुक़ात का खुलमखुल्ला आमंत्रण थी। ऐसा इसलिए कह रही हूं क्योंकि सवर्ण स्त्रियां भी राजपरिवार, मंदिर के पुजारी के समक्ष अर्धंनग्नावस्था में जाती थी, लेकिन उन्हें बाज़ार जैसे सार्वजनिक स्थलों पर ऊपरी शरीर ढकने की अनुमति थी। उन पर कोई दंडनीय प्रावधान नहीं था। इसके दूसरे पहलू का यथार्थ और भी भयानक,कुरूप,क्रूर था।

वर्णव्यवस्था में अंतिम श्रेणी की स्त्रियों के साथ हैवानियत का व्यवहार किया जाता था। इन्हें स्त्रियों के लैंगिक ही नहीं बल्कि दलित स्त्री होने के दुष्परिणामों को भी भोगना पड़ा। जातीय जड़ों में भरे ज़हर ने दलित स्त्रियों के लिए विषाक्त वातावरण तैयार कर दिया। दलित महिलाओं को सार्वजनिक स्थलों पर भी स्तनभाग ढकने की इजाज़त नहीं थीl यदि किसी ने साहस जुटा कर मंदिरों के पुजारियों के सामने  कोई झीना वस्त्र भी इस केंचुकी भाग पर लिपटा लिया तो पुजारी उसे अपने पास रखे लाठी पर बंधे चाकू से फाड़ दिया करता था। अब ऐसा तो मुमकिन है नहीं कि नुकीले चाकू छाती के उस हिस्से को रक्त रंजित न करते हो,लहूलुहान होकर वह दर्द से चीखी न हो। इतने भर से भी इनके कलेजे में ठंड नहीं पड़ती थी। तत्पश्चात भी दंडनीय रुप में नग्न अवस्था में स्त्री को भीड़ इकट्ठी कर सरेआम पेड़ पर लटका दिया जाता था। इतना ही स्तन अनुपतानुसार टैक्स वसूली भी महिलाओं से की जाती थी ताकि ऋण कभी चुका ही नहीं पाएं और गुलामगिरी कायम रहे। ये वो समय था जब निर्ममतापूर्ण यातनाएं चरम सीमा पर थी। इन कठोर दंडों, टैक्स के दो सबब थे, एक दलित जाति के लोगों को भयभीत करना ताकि वे दमनकारी शक्तियों के खिलाफ़ आवाज़ न उठाएं। दूसरा उद्देश्य गुलामी की ओर धकेल जातीय हीनताबोध कराना।

स्त्रीकाल के इस तमसयुग की नादर समुदाय की  महान क्रांतिकारी नायिका ने इस सड़ांध मारती प्रथा को समाप्त करने का संकल्प लिया। वीरांगना नंगेली ने अपने स्तन ढकने के अधिकार के स्वर को बुलंद किया। सोच कर ही दिमाग़ की नसें तन जाती हैं कि ये स्त्रियां कैसा महसूस करती होंगी पुरुषों की कुदृष्टि जब इनके शरीर को चीर कर जाती होगी?आत्मा झलनी होकर शर्म से धरती में गड़ जाती हाेगीं। उस समय के मर्दाना वर्चस्ववादी समाज में बैगैरती की इंतिहा थी।समाज की शक्तिशाली, दंभी, दमनकारी शक्तियों के गठित नियमों को विखंडित करना बहुत दुर्लभ कार्य था, किंतु उस संघर्षशील, क्रान्ति ज्वाला ने अपने स्तन बलिदान कर अपने दृढ़ संकल्प को पूरा किया। अपनी देह के ऊपरी भाग पर वस्त्र धारण कर समाज के मठाधीशों को चुनौती दी। उन्होंने जलते सुर्ख़ अंगारों में हाशिए को दबाकर गर्म किया तथा उससे अपने दोनों स्तनों को छाती से पृथक कर केले के पत्ते पर रख दिया। जब टैक्स वसूली हेतु टैक्स अधिकारी आए तो टैक्स रुप में उन्हें अपने दोनों लहुलुहान स्तन प्रस्तुत कर दिए। अत्यधिक रक्त प्रवाह से उनकी मृत्यु हो गई। इतिहास में ऐसे भी साक्ष्य हैं कि उनके पति ने उनकी जलती चिता में कूदकर अपनी जान दे दी थी। उनकी मृत्यु उपरांत नादर स्त्रियों ने इस अधिकार आंदोलन को तीव्रता प्रदान की।

26जुलाई 1859 में भारतीय स्त्रियों को वस्त्रधारण करने का अधिकार मिला। टैक्स से भी मुक्ति मिली। इस अधिकार की जंग में टीपू सुल्तान का महत्पूर्ण योगदान भी इतिहास में लिखित रुप में मिलता है। महान क्रांतिकारी,स्त्री गर्व,महान नायिका नंगेली जी को उनके साहसिक कार्य, बलिदान हेतु जितने अलंकरणों से सुशोभित किया जाए अपर्याप्त ही है।उनके शौर्य को इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया जाएगा। भारतवर्ष की स्त्रियां विभिन्न पोशाकों को आज धारण किए हुए जो सौंदर्यवान दिखती हैं वह उन्हीं के महान बलिदान की बदौलत हासिल हुआ है।

बुधवार, 29 दिसंबर 2021

चायवाली इन गोवा

 गोवा में "Chaaywali" का लॉन्च

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"Yogic Tattva'' के तत्त्वावधान में "Chaaywali' के नाम से होली स्पेल्स,चापोरा, नार्थ गोवा में हमारी कलाकार बेटी सर्जना सनाढ्य ने विगत 19 दिसम्बर से अपने बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट को लांच कर दिया है।  गोवा में रहने वाले लोग उसके द्वारा तरह-तरह की जड़ी बूटियों से निर्मित अलग-अलग सुगंध वाली उसकी इम्युनिटी-वर्धक चाय का लुत्फ़ उठा रहे हैं और उसकी प्रशंसा कर रहे हैं।


देशके किसी भी कोने से चाय के शौक़ीन लोग--और विदेशी भी-- इस चाय के पैकेट्स उसके वॉट्सएप्प नंबर 9210100016 पर ऑर्डर कर् मँगा सकते हैं।


    कुछ दिनों पहले जब हमारी बड़ी बेटी प्रोफ़ेसर तूलिका,दामाद नितिन और नाती के साथ गोवा घूमने गई तब उसने काम करते हुए सर्जना की कुछ तस्वीरें खींचीं। हम उन्हें यहाँ शेयर कर रहे हैं।

    मित्रगणों से अनुरोध है कि बेटी के इस शानदार उपक्रम के लिए उसे अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएं दें तथा रुचि हो तो उसके सहभागी बनें। नीचे इस प्रोजेक्ट का विवरण सर्जना द्वारा दिया गया है।


l am excited to announce that my long-awaited project "Chaaywali" has been launched.

My passion for flower infusions and green tea has led me to this location.


I tasted the best teas and infusions before hand-picking organic ingredients to create the best blends you can enjoy with every sip.


Start or end your day with one of the many organic blends available.


Organic green tea and flower infusions from Chaaywali, courtesy of Yogic Tattva.


To place an order, send a DM or WhatsApp on +91-9210100016 

Shipping pan India, 

Shipping charges: 99/- for upto 5 packs. 


Or collect your cup of health from Holy Spells , Chapora, North Goa. 


**Available variations**


Rose & Jasmine;

Rose, Marigold & Jasmine;

Hibiscus & Green;

Rose and hibiscus;

Chamomile green;

Jasmine, Butterfly & Marigold;

Rose & Marigold


MRP per pack: 250/-


P. S. To create the perfect cup of tea/infusion, simply follow the instructions on the packet. Please Do Not boil it

जगन्नाथ पुरी का महारहस्य

 भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ा तो उनका अंतिम संस्कार किया गया , उनका सारा शरीर तो पांच तत्त्व में मिल गया लेकिन उनका हृदय बिलकुल सामान्य एक जिन्दा आदमी की तरह धड़क रहा था और वो बिलकुल सुरक्षित था , उनका हृदय आज तक सुरक्षित है जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है और उसी तरह धड़कता है , ये बात बहुत कम लोगो को पता है


महाप्रभु का महा रहस्य

सोने की झाड़ू से होती है सफाई......


महाप्रभु जगन्नाथ(श्री कृष्ण) को कलियुग का भगवान भी कहते है.... पुरी(उड़ीसा) में जग्गनाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निवास करते है... मगर रहस्य ऐसे है कि आजतक कोई न जान पाया


हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ती को बदला जाता है,उस समय पूरे पुरी शहर में ब्लैकआउट किया जाता है यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है। लाइट बंद होने के बाद मंदिर परिसर को crpf की सेना चारो तरफ से घेर लेती है...उस समय कोई भी मंदिर में नही जा सकता...


मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है...पुजारी की आँखों मे पट्टी बंधी होती है...पुजारी के हाथ मे दस्ताने होते है..वो पुरानी मूर्ती से "ब्रह्म पदार्थ" निकालता है और नई मूर्ती में डाल देता है...ये ब्रह्म पदार्थ क्या है आजतक किसी को नही पता...इसे आजतक किसी ने नही देखा. ..हज़ारो सालो से ये एक मूर्ती से दूसरी मूर्ती में ट्रांसफर किया जा रहा है...


ये एक अलौकिक पदार्थ है जिसको छूने मात्र से किसी इंसान के जिस्म के चिथड़े उड़ जाए... इस ब्रह्म पदार्थ का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है...मगर ये क्या है ,कोई नही जानता... ये पूरी प्रक्रिया हर 12 साल में एक बार होती है...उस समय सुरक्षा बहुत ज्यादा होती है... 


मगर आजतक कोई भी पुजारी ये नही बता पाया की महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ती में आखिर ऐसा क्या है ??? 


कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथमे लिया तो खरगोश जैसा उछल रहा था...आंखों में पट्टी थी...हाथ मे दस्ताने थे तो हम सिर्फ महसूस कर पाए...


आज भी हर साल जगन्नाथ यात्रा के उपलक्ष्य में सोने की झाड़ू से पुरी के राजा खुद झाड़ू लगाने आते है...


भगवान जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर सुनाई नहीं देती, जबकि आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देंगी


आपने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे-उड़ते देखे होंगे, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता। 


झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशामे लहराता है


दिन में किसी भी समय भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती।


भगवान जगन्नाथ मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदला जाता है, ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा


इसी तरह भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है, जो हर दिशा से देखने पर आपके मुंह आपकी तरफ दीखता है।


भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, जिसे लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है, इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है।





       

  🚩  श्री जगन्नाथ जी की जय 🚩    


Ramakant Dubey Ramakant Dubey

मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

ज्योतिष की नजर में साल 222

 अपने साथ कई अच्छे बदलाव लेकर आएगा नया साल बदलेगी ग्रहों की चाल - भारत की प्रसिद्धि और सफलता बढ़ेगी -


 


साल 2022 का आगमन होने ही वाला है ये नया वर्ष अपने साथ क्या क्या परिवर्तन लेकर आ रहा है और ज्योतिषीय दृष्टि से इस साल समान्य जन जीवन पर ग्रहों की चाल का क्या प्रभाव पड़ेगा और कैसे ये साल गत वर्ष से भिन्न होगा आईये जानते हैं जानते हैं।


 


ज्योतिष की दृष्टि से नये वर्ष का आगमन "कन्या लग्न" में होगा,  2022 में अगर ग्रहस्थिति की बात करें तो अप्रैल 2022 में शनि, बृहस्पति और राहु केतु सभी बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा जिससे बहुत से  बदलाव आएंगे, इस वर्ष अप्रैल से देव-गुरु बृहस्पति पूरे वर्ष स्वराशि मीन में रहेंगे, शनि कुम्भ राशि मे प्रवेश करेंगे, राहु - केतु मेष और तुला राशि में संचार करेंगे।  इस साल बृहस्पति का स्वराशि में संचार करना सभी के लिए एक वरदान साबित होगा जिससे सामान्य जन-जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे सभी लोगों का आत्मविश्वास बढेगा और जिन लोगों के कुछ बड़े काम या प्लानिंग्स लम्बे समय से रुकी हुई थी वो सब रुके कार्य इस वर्ष पूरे होंगे, साथ ही इस वर्ष शनि का कुम्भ राशि में आना व्यावसायिक दृष्टि से बहुत शुभ होगा जिससे रोजगारों में वृद्धि होगी व्यापार कर रहे लोगों का धन लाभ बढ़ेगा और पिछले दो वर्षों में महामारी के कारण जिन लोगों का करियर और जॉब डिस्टर्ब चल रहे थे उन्हें भी इस वर्ष करियर में उन्नति और नए सुअवसर प्राप्त होंगे,  इस वर्ष बृहस्पति स्वराशि में होने से ये साल समान्य जन के लिए भी ओवरऑल बीते दो वर्षों की तुलना में काफी बेहतर और अच्छा रहेगा। 2022 में मार्च तक की स्थिति समान्य रहेगी लेकिन अप्रैल माह से ये साल अपना पूरा शुभ प्रभाव देने लगेगा, इसलिए अप्रैल से व्यावसायिक और आर्थिक स्तर पर विशेष उन्नति आरम्भ होगी और सभी लोगों के रुके हुए विशेष कार्य भी अप्रैल माह से आगे बढ़ना शुरू होंगे। 


ये होंगी ख़ास बातें - अप्रैल 2022 में बृहस्पति के मीन राशि में आने पर "भारत" की कुंडली में कर्क-राशि में बना हुआ "राजयोग" एक्टिवेट हो जयेगा इसलिए साल 2022 भारत को विश्व पटल पर और अधिक ऊँचाई सफलता और प्रसिद्धि देने वाला रहेगा।……..ग्रहस्थिति के अनुसार ये साल राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगारों और व्यवसायों में उन्नति कराएगा "भारत" में भी रोजगार और आर्थिक उन्नति होगी, नए वर्ष का आरम्भ कन्या लग्न में होने और वर्ष प्रवेश कुंडली में शनि-बुध का योग होने से ये साल टैक्निकल और इंटरनैट बेस्ड कार्य करने वाले लोगों के लिए विशेष शुभ रहेगा और साथ ही अपना बिजनेस करने वाले लोगों को भी ये साल अच्छा लाभ देने वाला होगा। 


इस साल की ग्रहस्थिति "मेरठ" के लिए भी विशेष शुभ रहेगी मेरठ में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे सभी कार्य क्षेत्रों में उन्नति होगी और विकास के साथ ही रोजगारों में भी वृद्धि होगी।


 


कोरोना की स्थिति -  हालाँकि कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रॉन एक्टिवेट हो चुका है लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इस साल कोरोना वायरस का ये नया बड़ा रूप नहीं ले पायेगा और जन-धन हानि नहीं होगी, ग्रहस्थिति के अनुसार साल के शुरुआती एक दो महीनो में ओमीक्रॉन का प्रभाव अधिक रहेगा पर मार्च अप्रैल तक ये समान्य हो जायेगा,  और इस वर्ष बृहस्पति और शनि की शुभ स्थिति के कारण भारत की इकनॉमी पर कोरोना के कारण कोई विशेष प्रभाव नहीं होगा इस पूरे साल भारत की इकनॉमी अच्छी बनी रहेगी, इसलिए सावधानी अवश्य रखें लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस ज्यादा घातक साबित नहीं होगा।


 


 


बारह राशियों के लिए साल 2022 -


 


मेष राशि -  आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लम्बी यात्रा होगी, मानिसक तनाव से बचें, वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ेगा।


 


वृष राशि - करियर में तरक्की होगी, जॉब में इंक्रीमेंट मिलेगा, अनावश्यक खर्च से बचें।


 


मिथुन राशि - चल रही धन हानि कम होगी, करियर में विशेष उन्नति होगी, सभी रुके काम पूरे होंगे।


 


कर्क राशि - सभी प्रयास सफल होंगे, रुके काम बनेंगे, पारिवारिक विवाद बढ़ेंगे आर्ग्युमेंट्स को अवॉयड करें।


 


सिंह राशि - मानिसक तनाव और स्वास्थ में उतर चढाव बढ़ेगा, अड़चनों के बाद काम पूरे होंगे।


 


कन्या राशि - स्वास्थ समस्याएं बढ़ेंगी, धन लाभ अच्छा होगा, सभी रुके काम पूरे होंगे।


 


तुला राशि - जीवन में उन्नति होगी, की गयी प्लानिंग्स पूरी होंगी, वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ेगा।


 


वृश्चिक राशि - धन लाभ बढ़ेगा, बिजनेस में सफलता मिलेगी, पारिवारिक विवाद बढ़ेंगे।


 


धनु राशि - बढ़ रहा धन खर्च कम होगा, काम-काज  में बढ़ोत्तरी होगी, की गयी मेहनत सफलता देगी।


 

मकर राशि - इस साल आपका भाग्य मजबूत है, सभी काम पूरे होंगे,  पारिवारिक विवाद से बचें।


 


कुम्भ राशि - धन लाभ अच्छा रहेगा, मानिसक तनाव बढ़ेगी, सभी काम अड़चनों के बाद पूरे होंगे।


 


मीन राशि - धन खर्च बढ़ेगा, स्वास्थ में उतर चढाव बना रहेगा, किये गए सभी प्रयास सफल रहेंगे।

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

_सर्दी का मौसम में ठंड जनित 10 बीमारियां औऱ उनके घरेलू उपचार_*

 ☘️  ठंड का मौसम जहां सेहत और सुंदरता के लिए वरदान माना जाता है, वहीं सावधानी न रखने पर कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं। कुछ घरेलू उपायों को आजमाकर इन समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। जानिए ठंड में होने वाले यह 10 रोग और उनके लिए आसान उपचार -


1.  ठंड के मौसम में कब्ज की समस्या होती है। खास तौर से पाचन संबंधी कारणों से यह समस्या और बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए इस मौसम में पानी खूब पीना चाहिए। भोजन के पश्चात जीरा पावडर खाने से पाचन क्रिया भी ठीक रहेगी।


2.  कई लोगों को ठंडी हवा एवं ठंड के कारण सिरदर्द होता है, जो आसानी से कम नहीं होता। ऐसा होने पर दूध में जायफल घिसकर माथे पर इसका लेप करें। इससे काफी जल्दी सिरदर्द में आराम मिलेगा।


3. सर्दी में त्वचा के साथ-साथ होंठों का फटना आम बात है। फटे होंठों पर कोकम का तेल लगाने से काफी फायदा होता है। इससे होंठों की त्वचा नर्म और मुलायम ही हो जाती है।


4.  सर्द मौसम में एड़ियां फटने की समस्या भी बहुत होती है जिसे बिवाइयां फटना कहते हैं। ऐसा होने पर एड़ियों पर प्याज का पेस्ट या फिर ग्रीस लगाने से आराम मिलेगा।


5.  सर्दियों में प्रायः छाती में बलगम जमा हो जाता है और ऐसा होने पर काफी परेशानी होती है। इसके लिए अंजीर का सेवन करें। इससे बलगम निकलेगा तथा खांसी में राहत मिलेगी।


6. सर्दी अधिक लग जाने पर बुखार आना भी आम है। इससे बचने के लिए दिन में तीन बार अजवाइन के चूर्ण का प्रयोग करना फायदेमंद होता है। इससे ठंड का बुखार जल्दी उतर जाएगा।


7.  खांसी, जुकाम, बुखार साथ में होने पर पुदीने के पत्तों की चाय बनाकर शकर या नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है।


8. कफ अधिक जमा हो जाने और दमा की परेशानी बढ़ने पर आजवायन के साथ छोटी पीपर और पोस्तदाना का काढ़ा बनाकर पीने से शीघ्र आराम मिलता है।


9. ठंड के मौसम में अक्सर जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है। इससे निजात पाने के लिए धतूरे के पत्तों पर तेल लगाकर गर्म करें और दर्द वाले स्थान पर बांध दें। इससे दर्द में आराम मिलता हैँ।


10. सर्दियों में सरसों के तेल में 3-4 लहसुन की कली डालकर पका लें और ठंडा होने पर इसमें मालिश करें। इस तेल की मालिश से बदन दर्द में आराम मिलता है और गर्माहट बनी रहती है।


*जॉइन रोग निदान विथ जय 9470446862**

सूने होते मकान और मोहल्ले और बुजुर्ग मां-बाप की दशा*!!

शायद आपने कभी ध्यान से देखा नहीं या फिर आपका गली मुहल्ले से इतना वास्ता नहीं पड़ता। आप बस तेजी से अपनी बाइक या कार से सीधे अपने काम पर निकल जाते हैं और वापस अपने घर आ जाते हैं ।

 इसलिए शायद आपकी सूने होते मकानों और मोहल्लों पर नज़र जा नहीं पाती होगी  या फिर आप खुद अपना जन्म स्थान छोड़कर किसी बड़े शहर में आकर बस गये हैं, तो आपको आभास ही नहीं कि कब आपके मोहल्ले के मकान सूने हो गये ।

 उनमें सिर्फ बूढ़े माँ बाप पड़े हैं और फिर कब धीरे धीरे ऐसे मकानों से मोहल्ले सूने होते चले गये। 


खैर कल सुबह उठकर एक बार इसकाi जायज़ा लीजियेगा कि कितने घरों में अगली पीढ़ी के बच्चे रह रहे हैं और कितने बाहर निकलकर नोएडा, गुड़गांव, पूना, बेंगलुरु, चंडीगढ़,बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद, बड़ौदा जैसे बड़े शहरों में जाकर बस गये हैं।

 कल आप एक बार उन गली मोहल्लों से पैदल निकलिएगा जहां से आप बचपन में स्कूल जाते समय या दोस्तों के संग मस्ती करते हुए निकलते थे।

 तिरछी नज़रों से झांकिए.. हर घर की ओर आपको एक चुपचाप सी सुनसानियत मिलेगी, न कोई आवाज़, न बच्चों का शोर, बस किसी किसी घर के बाहर या खिड़की में आते जाते लोगों को ताकते बूढ़े जरूर मिल जायेंगे।


आखिर इन सूने होते घरों और खाली होते मुहल्लों के कारण क्या  हैं ? 


भौतिकवादी युग में हर व्यक्ति चाहता है कि उसके बच्चे बेहतर से बेहतर पढ़ें। 


उनको लगता है या फिर दूसरे लोग उसको ऐसा महसूस कराने लगते हैं कि छोटे शहर या कस्बे में पढ़ने से उनके बच्चे का कैरियर खराब हो जायेगा या फिर बच्चा बिगड़ जायेगा। 


बस यहीं से बच्चे निकल जाते हैं बड़े शहरों के होस्टलों में। 


अब भले ही दिल्ली और उस छोटे शहर में उसी क्लास का सिलेबस और किताबें वही हों मगर मानसिक दबाव सा आ जाता है   बड़े शहर में पढ़ने भेजने का।


 हालांकि इतना बाहर भेजने पर भी मुश्किल से 1% बच्चे IIT, PMT या CLAT वगैरह में निकाल पाते हैं...।

 फिर वही मां बाप बाकी बच्चों का पेमेंट सीट पर इंजीनियरिंग, मेडिकल या फिर बिज़नेस मैनेजमेंट में दाखिला कराते हैं। 


4 साल बाहर पढ़ते पढ़ते बच्चे बड़े शहरों के माहौल में रच बस जाते हैं और फिर वहीं नौकरी ढूंढ लेते हैं और सहपाठियों से शादी भी।आपको तो शादी के लिए हां करना ही है ,अपनी इज्जत बचानी है तो, अन्यथा शादी वह करेंगे ही अपने इच्छित साथी से।


अब त्यौहारों पर घर आते हैं माँ बाप के पास सिर्फ रस्म अदायगी हेतु।


माँ बाप भी सभी को अपने बच्चों के बारे में गर्व से बताते हैं ।  दो तीन साल तक उनके पैकेज के बारे में बताते हैं। एक साल, दो साल, कुछ साल बीत गये । मां बाप बूढ़े हो रहे हैं और बच्चों ने लोन लेकर बड़े शहरों में फ्लैट ले लिये हैं। 


अब अपना फ्लैट है तो त्योहारों पर भी जाना बंद।


अब तो कोई जरूरी शादी ब्याह में ही आते जाते हैं। अब शादी ब्याह तो बेंकट हाल में होते हैं तो मुहल्ले में और घर जाने की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है।होटल में ही रहलेते हैं।


 हाँ शादी ब्याह में कोई मुहल्ले वाला पूछ भी ले कि भाई अब कम आते जाते हो तो छोटे शहर,  छोटे माहौल और बच्चों की पढ़ाई का उलाहना देकर बोल देते हैं कि अब यहां रखा ही क्या है?


 खैर, बेटे बहुओं के साथ फ्लैट में शहर में रहने लगे हैं । अब फ्लैट में तो इतनी जगह होती नहीं कि बूढ़े खांसते बीमार माँ बाप को साथ में रखा जाये। बेचारे पड़े रहते हैं अपने बनाये या पैतृक मकानों में। 


कोई बच्चा बागवान पिक्चर की तरह मां बाप को आधा - आधा रखने को भी तैयार नहीं।


अब साहब, घर खाली खाली, मकान खाली खाली और धीरे धीरे मुहल्ला खाली हो रहा है। अब ऐसे में छोटे शहरों में कुकुरमुत्तों की तरह उग आये "प्रॉपर्टी डीलरों" की गिद्ध जैसी निगाह इन खाली होते मकानों पर पड़ती है और वो इन बच्चों को घुमा फिरा कर उनके मकान के रेट समझाने शुरू करते हैं । उनको गणित समझाते हैं कि कैसे घर बेचकर फ्लैट का लोन खत्म किया जा सकता है और एक प्लाट भी लिया जा सकता है। 


ये प्रॉपर्टी डीलर सबसे ज्यादा ज्ञान बांटते हैं कि छोटे शहर में रखा ही क्या है। 


साथ ही ये  मुस्लिम लोगो को या किसी बड़े लाला को इन खाली होते मकानों में मार्केट और गोदामों का सुनहरा भविष्य दिखाने लगते हैं। 


बाबू जी और अम्मा जी को भी बेटे बहू के साथ बड़े शहर में रहकर आराम से मज़ा लेने के सपने दिखाकर मकान बेचने को तैयार कर लेते हैं। 


आप स्वयं खुद अपने ऐसे पड़ोसी के मकान पर नज़र रखते हैं और खरीद कर डाल देते हैं कि कब मार्केट बनाएंगे या गोदाम, जबकि आपका खुद का बेटा छोड़कर पूना की IT कंपनी में काम कर रहा है इसलिए आप खुद भी इसमें नहीं बस पायेंगे।


हर दूसरा घर, हर तीसरा परिवार सभी के बच्चे बाहर निकल गये हैं।


 वही बड़े शहर में मकान ले लिया है, बच्चे पढ़ रहे हैं,अब वो वापस नहीं आयेंगे। छोटे शहर में रखा ही क्या है । इंग्लिश मीडियम स्कूल नहीं है, हॉबी क्लासेज नहीं है, IIT/PMT की कोचिंग नहीं है, मॉल नहीं है, माहौल नहीं है, कुछ नहीं है साहब, आखिर इनके बिना जीवन कैसे चलेगा?


पर कभी UPSC ,CIVIL SERVICES का रिजल्ट उठा कर देखियेगा, सबसे ज्यादा लोग ऐसे छोटे शहरों से ही मिलेंगे। बस मन का वहम है।


मेरे जैसे लोगों के मन के किसी कोने में होता है कि भले ही बेटा कहीं फ्लैट खरीद ले, मगर रहे अपने उसी छोटे शहर या गांव में अपने लोगों के बीच में । पर जैसे ही मन की बात रखते हैं, बुद्धिजीवी अभिजात्य पड़ोसी समझाने आ जाते है कि "अरे पागल हो गये हो, यहाँ बसोगे, यहां क्या रखा है?” 

वो भी गिद्ध की तरह मकान बिकने का इंतज़ार करते हैं, बस सीधे कह नहीं सकते।


अब ये मॉल, ये बड़े स्कूल, ये बड़े टॉवर वाले मकान सिर्फ इनसे तो ज़िन्दगी नहीं चलती। एक वक्त, यानी बुढ़ापा ऐसा आता है जब आपको अपनों की ज़रूरत होती है।


 ये अपने आपको छोटे शहरों या गांवों में मिल सकते हैं, फ्लैटों की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन में नहीं।


 कोलकाता, दिल्ली, मुंबई,पुणे,चंडीगढ़,नौएडा, गुड़गांव, बेंगलुरु में देखा है कि वहां शव यात्रा चार कंधों पर नहीं बल्कि एक खुली गाड़ी में पीछे शीशे की केबिन में जाती है, सीधे शमशान, एक दो रिश्तेदार बस और सब खत्म।


भाईसाब ये खाली होते मकान, ये सूने होते मुहल्ले, इन्हें सिर्फ प्रोपेर्टी की नज़र से मत देखिए, बल्कि जीवन की खोती जीवंतता की नज़र से देखिए। आप पड़ोसी विहीन हो रहे हैं। आप वीरान हो रहे हैं।


आज गांव सूने हो चुके हैं 

शहर कराह रहे हैं |



सूने घर आज भी राह देखते हैं.. बंद दरवाजे बुलाते हैं पर कोई नहीं आता |


भूपेन हजारिका का यह गीत याद आता है--


गली के मोड़ पे.. सूना सा कोई दरवाजा

तरसती आंखों से रस्ता किसी का देखेगा

निगाह दूर तलक..  जा के लौट आयेगी

करोगे याद तो हर बात याद आयेगी ||


समझाइए, बसाइए लोगों को छोटे शहरों और जन्मस्थानों के प्रति मोह जगाइए, प्रेम जगाइए। पढ़ने वाले तो सब जगह पढ़ लेते हैं।

🙋‍♂️❤️🙋‍♂️❤️🙋‍♂️

जय हो भारत माता हमें कुछ नहीं आता 

सादर।🙏🙏🚩🚩🚩

मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

मीडिया एंथम लांच

 https://youtu.be/rb_7Qi7X6LU 🔵🛑🟣


 *वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया(WJI) ,



राष्ट्रवादी मीडियाकर्मियों  की वह राष्ट्रीय यूनियन, जिसने भारत की पहली * मीडिया एंथम *को लांच किया । वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया(WJI) , राष्ट्रवादी मीडियाकर्मियों  की वह राष्ट्रीय यूनियन, जिसने डिजिटल मीडिया को मान्यता दिलवाई । वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया(WJI) , राष्ट्रवादी मीडियाकर्मियों  की वह राष्ट्रीय यूनियन, जिसने पत्रकारों को निशुल्क इन्शुरन्स कवर उपलब्ध करवाया। वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया(WJI) , राष्ट्रवादी मीडियाकर्मियों  की वह राष्ट्रीय यूनियन, जो पत्रकारों की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रही व सड़को पर उतरी।

 वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया(WJI) , राष्ट्रवादी मीडियाकर्मियों  की वह राष्ट्रीय यूनियन, जिसने मीडिया में विदेशी विनिमेश का विरोध किया। वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया(WJI) , राष्ट्रवादी मीडियाकर्मियों  की वह राष्ट्रीय यूनियन, जिसने कोरोना काल मे जरूरतमंद पत्रकारों तक हरसंभव मदद पहुँचाई*,

 ।🌐📞🖥️ #बोलने-से.सबहोगा

वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया,

की डिजिटल मीडिया डायरेक्टरी ,

से किसी भी पत्रकार की जानकारी मांगे ।

टीएमयू में बड़ी आंत की स्टेप्लर विधि से दुर्लभ सर्जरी

 डॉक्टर विपिन की टीम ने संभल  के शिक्षक के चेहरे पर लौटाई  मोहक मुस्कान 



ख़ास बातें


सड़क हादसे में डेमेज हो गई थी बड़ी आंत


दो ऑपरेशन के बाद गणित टीचर हुए डिस्चार्ज

गेंग्रीन होने के बाद स्टेप्लर विधि से आंत को काटा

डॉ. विपिन की अगुवाई में छह डॉक्टरों  की टीम थी ऑपरेशन में 

पांच माह के बाद  जुनैद ने टीएमयू के डॉक्टरों के   प्रति  आभार  जताया 



प्रो.श्याम सुंदर भाटिया

मुरादाबाद


तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के सर्जरी विभाग ने बड़ी आंत को जोड़ने के दुर्लभ ऑपरेशन में सफलता हासिल की है। संभल क्षेत्र के गणित और फिजिक्स के टीचर जुनैद का पांच माह पूर्व सड़क हादसा हो गया था, जिसमें टीचर की बड़ी आंत डेमेज हो गई थी। तीन-चार दिन भूख और बेइंतहा दर्द  आदि सहन करने के बाद अंततः 24 जुलाई को टीएमयू चिकित्यालय में भर्ती करा दिया गया। सर्जरी विभाग के सीनियर सर्जन डॉ. विपिन कुमार और उनकी टीम ने प्रारंभिक जांचों के बाद बड़ी आंत का तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लिया। ढाई घंटे चले इस ऑपरेशन में शौच से निवृत होने को बाहरी रास्ते का प्रावधान कर दिया गया। मेडिकल भाषा में गेंग्रीन का हिस्सा काट दिया गया और आंत का बाईपास करके कोलोस्टोमी बना दी गई। इस दुर्लभ ऑपरेशन की सफलता पर सीनियर सर्जन प्रो. विपिन कुमार और उनकी टीम को कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने हार्दिक बधाई दी।


टीएमयू के सीनियर सर्जन डॉ. विपिन कुमार बताते हैं, चार माह के बाद यानी 30 नवंबर को स्टेप्लर विधि के जरिए इस टीचर की अंततः आंत जोड़ दी गई। यह ऑपरेशन करीब चार घंटे चला। इस ऑपरेशन में प्रो. विपिन कुमार के संग-संग डॉ. सौरव सुमन, डॉ. विभोर अग्रवाल, डॉ. पार्थ अग्रवाल, डॉ. अंशुल जसूजा, डॉ. चिराग रल्हन के अलावा एनिसथिसिया की डॉ. पायल जैन शामिल रहीं। 27 साल के यह टीचर अब न केवल खाना खा रहे हैं बल्कि दर्द भी नहीं है। शौच प्रक्रिया भी सामान्य हो गई है।

 उल्लेखनीय है, टीएमयू चिकित्सालय में सर्कुलर स्टेप्लर, लीनियर स्टेप्लर, हीमोरॉइड स्टेप्लर आदि विधियों से सर्जरी की जा रही हैं। सर्जरी की ये विधियां आधुनिक हैं। टीएमयू में नौ साल से कार्यरत डॉ. विपिन कुमार अपने जीवन में बीस हजार ऑपरेशन कर चुके हैं, इनमें से करीब एक दर्जन सर्जरी स्टेप्लर विधि से कर चुके हैं।


✌🏼👌🏼👍🏼

सोमवार, 20 दिसंबर 2021

News 100 / B4M

 

LATEST 100 भड़ास

बक्सर युद्ध 1764

 बक्सर का युद्ध वह निर्णायक युद्ध था जिसने अंग्रेजों को अगले दो सौ वर्षों के लिए भारत के शासक के रूप में स्थापित कर दिया। 


बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला व मुग़ल शासक शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना और अंग्रेजों के मध्य लड़ा गया यह युद्ध अंग्रेजों द्वारा फरमान और दस्तक के दुरुपयोग और उनकी विस्तारवादी व्यापारिक आकांक्षाओं का परिणाम था। कंपनी की सेना का नेतृत्व मेजर हेक्टर मुनरो कर रहा था।


22 अक्टूबर,1764 ई. को लड़े गए इस युद्ध में मुगल शासक और उसके सूबेदारों की पराजय हुई। बंगाल और अवध इस समय तक मुग़ल शासन के अधीन ही थे, परन्तु दोनों सूबों के नवाब स्वतंत्र शासकों की तरह व्यवहार करते थे।


1765 ई. में शुजाउद्दौला और शाह आलम ने इलाहाबाद में कंपनी गवर्नर राबर्ट क्लाइव के साथ संधि पर हस्ताक्षर किये। इस संधि के तहत कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के दीवानी अधिकार प्रदान कर दिए गए, जिसने कंपनी को इन क्षेत्रों से राजस्व वसूली के लिए अधिकृत कर दिया। कंपनी ने अवध के नवाब से कड़ा और इलाहाबाद के क्षेत्र लेकर मुग़ल शासक को सौंप दिए,जोकि अब इलाहाबाद में अंग्रेजी सेना के संरक्षण में रहने लगा था। कंपनी ने मुगल शासक को प्रतिवर्ष 26 लाख रुपये के भुगतान का वादा किया लेकिन थोड़े समय बाद ही कंपनी द्वारा इसे बंद कर दिया गया। कंपनी ने अवध के नवाब को किसी भी आक्रमण के विरुद्ध सैन्य सहायता प्रदान करने का वादा किया लेकिन इसके लिए नवाब को भुगतान करना होगा। अतः अवध का नवाब कंपनी पर निर्भर हो गया। मीर जाफर को दोबारा बंगाल का नवाब बना दिया गया और उसकी मृत्यु के बाद उसके पुत्र को नवाब की गद्दी पर बैठाया गया। 


बक्सर का युद्ध भारतीय इतिहास की युगांतरकारी घटना साबित हुई। ब्रिटिशों की रूचि तीन तटीय क्षेत्रों कलकत्ता, बम्बई और मद्रास में अधिक थी। किंतु अंग्रेजों व फ्रांसीसियों के बीच वर्चस्व के लिए लड़े गए युद्ध ,प्लासी के युद्ध और बक्सर के युद्ध ने भारत के मैदानी भागों में ब्रिटिश सफलता के दौर को प्रारंभ कर दिया। 1765 ई. तक ब्रिटिश बंगाल, बिहार और उड़ीसा के वास्तविक शासक बन गए। 


बक्सर में कंपनी की विजय के परिणामस्वरूप भारतीय उपमहाद्वीप का एक बड़ा क्षेत्र कंपनी के नियंत्रण में आ गया।


प्रतीकात्मक चित्र

मोहि दरस देव गुरु प्यारे ।

 **राधास्वामी!                                                 

20-12-2021-

आज सुबह सतसंग में पढ़ा जाने वाला दूसरा पाठ:-                                                                                 

मोहि दरस देव गुरु प्यारे ।

क्यों एती देर लगइयाँ ।।१।।                                                        

 मैं माँगत माँगत थकियाँ ।

कोई जतन पेश नहिं जड़याँ ॥ २ ॥                                            

बिन दया तुम्हारी दाता ।

यह जीव कहा कर सकियाँ ॥ ३ ॥                                           

अब परदा देव उठाई |

 तुम दरशन छिन छिन तकियाँ ॥ ४ ॥                                              

मन इंद्री ज़ोर चलावत ।

जब तब मोहि नाच नचइयाँ ॥ ५ ॥                                                  

दूतन से बस नहिं चालत ।

मैं रहूँ नित्त मुरझइयाँ ॥ ६ ॥                                                      

निज मन से खँट छुड़ाओ ।

 मेरी सूरत गगन चढ़इयाँ।।७।।                                              

सुन में लख चंद्र उजारा।

हंसन सँग केल करइयाँ ॥ ८॥                                                      

मुरली धुन गुफा सम्हालूँ ।

सतपुर जाय बीन बजइयाँ।।९।।                                          

 लख अलख अगम दरबारा। राधास्वामी चरन समइयाँ ॥१० ॥

 (प्रेमबानी-3-शब्द-7-

पृ.सं.251,252)


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शहादत पर नमन

 आज अमर बलिदानी क्रांतिकारी रामप्रसाद तोमर (बिस्मिल),अशफाक उल्ला खां,और ठाकुर रोशन सिंह का शहीदी दिवस है।


आज ही के दिन दिनांक 19 दिसम्बर 1929 को इन्हें गोरखपुर की जिला जेल में फांसी दी गयी थी।

स्वर्गीय राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को इनसे 2 दिन पहले ही फांसी दे दी गयी थी।


राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके लिखे ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसे अमर गीत ने हर भारतीय के दिल में जगह बनाई और अंग्रेज़ों से भारत की आज़ादी के लिए चिंगारी छेड़ी। ब्रिटिश साम्राज्य को दहला देने वाले “काकोरी काण्ड” को रामप्रसाद बिस्मिल ने ही अंजाम दिया था। इस महान स्वतंत्रता सेनानी की आज पुण्यतिथि है। इनकी पुण्यतिथि पर  भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करें!!   


अमर बलिदानो को शत शत नमन।

शनिवार, 18 दिसंबर 2021

पुर्तगाल चीन औऱ पाक क़ो माता देने वाले अद्भुत वीर सगत सिंह

 आज हम आपको ऐसे फौजी के बारे में बता रहे हैं जिन्हें भारत का सबसे निर्भीक जनरल माना जाता है। जनरल सगत एकमात्र सैन्य अधिकारी है जिन्होंने तीन युद्ध में जीत हासिल की। उनके नेतृत्व में गोवा को पुतर्गाल से मुक्त कराया गया। वहीं वर्ष 1967 में चीनी सेना की भी घेराबंदी की। इसके बाद वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों को दरकिनार कर जनरल सगत ढाका पर जा चढ़े। इसकी बदौलत पाकिस्तानी सेना को हथियार डालने को मजबूर होना पड़ा।


आजादी के बाद सन 1961 में गोवा मुक्ति अभियान में सगत सिंह के नेतृत्व में ऑपरेशन विजय के अंतर्गत सैनिक कार्रवाई हुई और पुर्तगाली शासन के अंत के बाद गोवा भारतीय गणतंत्र का अंग बना।


गोवा मुक्ति के लिए दिसम्बर 1961 में भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय में 50 पैरा को सहयोगी की भूमिका में चुना गया। लेकिन उन्होंने इससे कहीं आगे बढ़ इतनी तेजी से गोवा को मुक्त कराया कि सभी दंग रह गए।18 दिसम्बर को 50 पैरा को गोवा में उतारा गया।


19 दिसम्बर को उनकी बटालियन गोवा के निकट पहुंच गई। पणजी के बाहर पूरी रात डेरा जमा रखने के बाद उनके जवानों ने तैरकर नदी को पार कर शहर में प्रवेश किया। उन्होंने ही पुर्तगालियों को आत्मसमर्पण करने को मजबूर किया। पुर्तगाल के सैनिकों सहित 3306 लोगों ने आत्मसमर्पण किया। इसके साथ ही गोवा पर 451 साल से चला आ रहा पुर्तगाल का शासन समाप्त हुआ और गोवा भारत का हिस्सा बन गया।


वर्ष 1965 में सगत सिंह को मेजर जनरल के रूप में नियुक्ति देकर 17 माउंटेन डिविजन की कमांड देकर चीन की चुनौती का सामना करने के लिए सिक्किम में तैनात किया गया था।


पाकिस्तान से युद्ध में उलझे भारत को देख चीन ने फायदा उठाने की सोच कर नाथू ला और जेलेप ला में लाउड स्पीकर लगाकर भारतीय सेना को चेतावनी दी की ये चीन का क्षेत्र है इसे खाली करो।


भारतीय सेना हेड क्वार्टर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेलेप ला और नाथू ला से भारतीय सेना को पीछे हटने का आदेश दिया।


जेलेप ला से सेना पीछे हट गई लेकिन नाथुला दर्रे पर तैनात भारतीय सेना के सेना नायक सगत सिंह ने अविचलित होकर अपना काम जारी रखा, और मुख्यालय के आदेश को नहीं मानते हुए चीनी सैनिको को उन्ही की भाषा में जवाब दिया और सीमा निर्धारण कर तार-बाड़ का काम जारी रखा जिसे रोकने की चीन ने पूरी कोशिश की।


बात अगर सिक्किम के पास नाथू ला में हुए भारत-चीन युद्ध 1967 की करें तो उसमें भारत ने चीन को धूल चटा दी थी। उस जंग में चीन के 300 से अधिक सैनिक मारे गए थे जबकि भारत को सिर्फ़ 65 सैनिकों का नुक़सान उठाना पड़ा था।


भारत-चीन युद्ध 1962 के पांच साल बाद 1967 में हुई जंग में भारत जीता था और जीत के हीरो रहे थे लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़। भारतीय सेना का वो बहादुर अफसर जिसने प्रधानमंत्री की बिना अनुमति के तोपों का मुंह खोल दिया और गोले बरसाकर चीन के तीन सौ से ज्यादा सैनिक ढेर कर दिए।


इन्हीं सगत सिंह द्वारा नाथू ला को ख़ाली न करने का निर्णय आज भी देश के काम आ रहा है और नाथू ला आज भी भारत के कब्जे में है जबकि जेलेप ला चीन के कब्जे में चला गया।


वर्ष 1967 में सगत सिंह को जनरल सैम मानेकशा ने मिजोरम में अलगाववादियों से निपटने की जिम्मेदारी दी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया और बांग्लादेश मुक्ति में ढाका पर कब्जा करने वाले सेनानायक यही सगत सिंह राठौर ही थे। सैन्य इतिहासकार मेजर चंद्रकांत सिंह बांग्लादेश की आजादी का पूरा श्रेय सगत सिंह को देते हैं।


जनरल सगत वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अगरतला सेक्टर की तरफ से हमला बोला और अपनी सेना को लेकर आगे बढ़ते रहे। जनरल अरोड़ा ने उन्हें मेघना नदी पार नहीं करने का आदेश दिया। लेकिन हेलिकॉप्टरों की मदद से चार किलोमीटर चौड़ी मेघना नदी के पार उन्होंने पूरी ब्रिगेड उतार दी और आगे बढ़ गए।


जनरल सगत के नेतृत्व में भारतीय सेना ने ढाका को घेर लिया और जनरल नियाजी को आत्मसमर्पण का संदेश भेजा। इसके बाद 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों का आत्मसमर्पण और बांग्लादेश का उदय अपने आप में इतिहास बन गया।


तो यह है पुर्तगाल, चीन और पाकिस्तान को परास्त करनेवाले एकमात्र योद्धा की कहानी जिनके बारे में कोई नहीं जानता। सगत सिंह ने सेना के मन से चीनियों का भय निकाला। सगत सिंह को तो हार के भय से नाथुला में लड़ने की आज्ञा भी नहीं दी गयी, लेकिन भारत माता की आन और मान-सम्मान के लिए इस शेर नें न सिर्फ युद्ध लड़ा बल्कि विजय भी प्राप्त की।

लेफ्टिनेंट_जनरल_हणूत_सिंह:

 1971 युद्ध के महानायक .


#लेफ्टिनेंट_जनरल_हणूत_सिंह: 1971 की जंग के महानायक.. जिसने पाकिस्तान के 48 टैंक उड़ाये थे...


शूरवीर सैनिक से एक संत तक का सफर:


1971 भारत पाक युद्ध में एतिहासिक बसंतर की लड़ाई के हीरो महावीर चक्र से सम्मानित लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह अध्यात्म ध्यान से जुड़े लेकिन कभी सिपाही के धर्म पर आस्थाओं को हावी नहीं होने दिया। उन्होंने 1953 में पुणा हार्स आर्मर्ड (टैंक) रेजिमेंट ज्वाइन किया। 1971 युद्ध में जनरल हनूत ने बतौर लेफ्टिनेंट कर्नल 17 पुणा हार्स कोशकरगढ़ सेक्टर में कमान किया।


13 दिन चले इस युद्ध में 16 दिसंबर को कर्नल हनूत के टैंकों के पीछे पैदल सेना ने बसंतर नदी को पार किया। सेना के इतिहास में बसंतर टैंकों की आमने सामने की लड़ाई का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है। कर्नल हनूत के पास एक रेजिमेंट थी तो दुश्मन की पूरी टैंक ब्रिगेड तैनात थी। दुश्मन के पहले हमले में पुणा हार्स के सात टैंक जल गए। इसके बाद कर्नल हनूत की जोरदार रणनीति के बूते दुश्मन के 48 टैंक बर्बाद हो गए।


इन कठिन परिस्थितियों में भी कर्नल हनूत देर रात ध्यान किया करते थे। जनरल की अद्म्य साहस और नेतृत्व क्षमता के लिए उन्हें दूसरे सर्वोच्च सैन्य सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया जबकि उनके नेतृत्व में लड़े युवा अफसर लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। 


राजस्थान के लड़ाकू संत रावल मलिकनाथ जी के वंशज जनरल हणूत के पिता ठाकुर अर्जुन सिंह भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे। आजीवन ब्रह्मचारी रहकर सेना की सेवा के साथ ही अध्यात्म की महान ऊंचाइयों को छूने वाले विख्यात सेना कमांडर ने 1991 में रिटायरमेंट के बाद पूर्ण सन्यास ग्रहण कर लिया था तथा  देहरादून में अपने गुरु शिवाबालायोगी महाराज के आश्रम में संत का जीवन जिया।आश्रम में वह साधनारत रहे। 22 जुलाई 1933 में जन्मे संत सैनिक ने ध्यान योग की विराट साधना की। कई दिनों तक भोजन पानी त्याग समाधिस्थ रह 11 अप्रैल 2015 को उन्होंने शरीर त्याग दिया था। 


आज #विजय_दिवस पर हनुत सिंह जी तथा उनके जैसे अन्य असंख्य युद्ध नायकों को शत शत नमन........जय जवान-वंदे मातरम्..!!!!

सर्जरी में अब लेप्रोस्केापी का जमाना

 (तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी )


 डिपार्टमेन्ट ऑफ सर्जरी  द्वारा रिसेन्ट ट्रेंड्स इन सर्जरी पर नेशनल वर्कशाप आयोजित 



खास बातें

टीएमयू के कुलाधिपति ने किया  वर्कशॉप का शुभारम्भ 

14 नामचीन शीर्ष मेडिकल संस्थानों के विशेषज्ञों ने की शिरकत

सर्जरी, बैरिएट्रिक और मेटाबॉलिक पर एक्सपर्ट्स ने साझा किए अनुभव

तीन सौ से अधिक सर्जनों ने वर्चुअली वर्कशॉप में की सहभागिता  






मुरादाबाद.

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेन्टर में सर्जरी विभाग की ओर से ऑडिटोरियम में आयोजित ऑनलाइन और ऑफलाइन दो दिनी नेशनल वर्कशॉप में देश भर से प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के सर्जरी विशेषज्ञ शामिल रहे। आधुनिक परिवेश में सर्जरी पर आधारित वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने सर्जरी के सभी आधुनिक तरीकों पर विस्तार से मंथन किया। आधुनिक परिवेश में सर्जरी के अनुसंधान से होने वाले नित नए बदलावों के बारे में अपने अनुभव साझा किए। एक्सपर्ट्स ने कहा, सर्जरी में अब लेप्रोस्कोपी का जमाना है। एक्सपर्ट्स ने सर्जरी, बैरिएट्रिक, मेटाबॉलिक आदि  पर व्याख्यान दिए। इससे पूर्व वर्कशॉप का शुभारम्भ करते हुए टीएमयू  के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने इस तरह की वर्कशॉप को मेडिकल क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने वाला बताया।

इससे पूर्व वर्कशॉप का शंखनाद कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने ऑनलाइन आशीर्वाद के संग किया । इस मौके पर निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर, रजिस्ट्रार डॉ. श्री आदित्य शर्मा, निदेशक पीएन्डडी श्री विपिन जैन, अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अजय पन्त, सीनियर फिजिशियन डॉ. वीके सिहं, सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. एनके सिंह, वर्कशॉप के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ. विपिन कुमार आदि ने दीप प्रज्जवलित करके वर्कशॉप का शुभारम्भ किया ।



रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने कहा, प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के विख्यात सर्जनो का मार्गदर्शन निश्चित तौर पर मेडिकल के विद्यार्थियों के लिए नई सोच का सृजन करेगा। अनुभव से बढ़कर दूसरा कोई शिक्षक नहीं होता है। सर्जरी से जुड़े विख्यात चिकित्सकों की मौजूदगी और उनका अनुभव ही वर्कशॉप की सफलता का सूचक है। मेडिकल कॉलेज के निदेशक प्रो. विपिन जैन ने मेडिकल प्रोफेशन को नोबेल प्रोफेशन बताते हुए कहा, एक चिकित्सक का काम एक इंसान के जीवन में संजीवनी प्रदान करने के मानिन्द है।

 मेडिकल अधीक्षक डॉ.अजय पंत ने मेडिकल क्षेत्र में नित नए अनुसंधान और होने वाले आधुनिक बदलावों पर अपने विचार रखे। सीनियर फिजिशियन डॉ.वीके सिंह ने कहा, सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित यह वर्कशॉप निश्चित तौर पर यह वर्कशॉप जानकारी के नए मार्ग प्रशस्त करने वाली साबित होगी।

अंत में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. एनके सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, वर्कशॉप में शामिल विख्यात सर्जंनों के अनुभव निश्चित तौर पर भावी चिकित्सकों के साथ ही फॅकल्टी के लिए लाभप्रद साबित होंगे। वर्कशॉप में मेडिकल फैकल्टी कें संग-संग पीजी विद्यार्थी भी मौजूद रहे।

तलवे में तेल लगाने के ढेरों फायदे


 पैरों के तलवों में तेल लगाएं*

_विभिन्न लोगों के अपने अपने अनुभव_


1. एक महिला ने लिखा कि मेरे दादा का 87 साल की उम्र में निधन हो गया, पीठ में दर्द नहीं, जोड़ों का दर्द नहीं, सिर दर्द नहीं, दांतों का नुकसान नहीं। उन्होंने बताया कि उन्हें कलकत्ता में एक बूढ़े व्यक्ति ने, जो कि रेलवे लाइन पर पत्थर बिछाने का काम करता था, सलाह दी कि सोते समय अपने पैरों के तलवों पर तेल लगाये। यह मेरे उपचार और फिटनेस का एकमात्र स्रोत है।


2.  एक छात्रा ने कहा कि मेरी मां ने उसी तरह तेल लगाने पर जोर दिया। एक बच्चे के रूप में, उसकी दृष्टि कमजोर हो गई थी। जब उसने इस प्रक्रिया को जारी रखा, तो आंखों की रोशनी धीरे-धीरे पूरी तरह से स्वस्थ हो गई।


3.  एक व्यापारी अवकाश के लिए चित्राल गया था। वहाँ एक होटल में सो नही पा रहा था तो बाहर घूमने लगा। बाहर बैठे पुराने चौकीदार ने पूछा कि, "क्या बात है?"  उसने कहा नींद नहीं आ रही है!  वह मुस्कुराया और कहा, "क्या आपके पास कोई तेल है?" उसने कहा, नहीं, वह गया और तेल लाया और कहा, "कि कुछ मिनट के लिए अपने पैरों के तलवों की मालिश करें।" उसने वैसा ही किया फिर वह खर्राटे लेना शुरू कर दिया।


4.  मैंने रात में सोने से पहले अपने पैरों के तलवों पर तेल की मालिश की कोशिश की। इससे मुझे बेहतर नींद आती है और थकान दूर होती है।


5. मुझे पेट की समस्या थी। अपने तलवों पर तेल से मालिश करने के बाद, 2 दिनों में मेरे पेट की समस्या ठीक हो गई।


6. वास्तव में!  इस प्रक्रिया का एक जादुई प्रभाव है। रात को पैरों के तलवों की तेल से मालिश ने मुझे बहुत सुकून की नींद दी।


7. मैं इस ट्रिक को पिछले 15 सालों से कर रहा हूं। इससे मुझे बहुत ही चैन की नींद आती है। मैं अपने छोटे बच्चों के पैरों के तलवों की भी तेल से मालिश करता हूं, जिससे वे बहुत खुश और स्वस्थ रहते हैं।


 8. मेरे पैरों में दर्द हुआ करता था। मैंने रात को अपने पैरों के तलवों को 2 मिनट तक रोजाना जैतून के तेल से मालिश करना शुरू किया। इस प्रक्रिया से मेरे पैरों में दर्द से राहत मिली।


9.  मेरे पैरों में हमेशा सूजन रहती थी और जब मैं चलता था, मैं थक जाता था। अपने पैरों के तलवों पर तेल मालिश की इस प्रक्रिया को शुरू किया। सिर्फ 2 दिनों में, मेरे पैरों की सूजन गायब हो गई।


10.  रात में, बिस्तर पर जाने से पहले, मैंने अपने पैरों के तलवों पर तेल की मालिश का एक टिप देखा और उसे करना शुरू कर दिया। इससे मुझे बहुत ही चैन की नींद मिली।


11. बड़ी अदभुत बात है।  यह टिप आरामदायक नींद के लिए नींद की गोलियों से बेहतर है। मैं अब हर रात अपने पैरों के तलवों की तेल से मालिश करके सोता हूं।


12.  मुझे थायरॉइड की बीमारी थी। मेरे पैर में हर समय दर्द हो रहा था। पिछले साल किसी ने मुझे रात में पैरों के तलवों पर तेल की मालिश का यह सुझाव दिया था। मैं इसे स्थायी रूप से कर रहा हूं। अब मैं आम तौर पर शांत हूं।


13.  मेरे पैर सुन्न हो रहे थे। मैं रात को बिस्तर पर जाने से पहले चार दिनों तक अपने पैरों के तलवों की तेल से मालिश कर रहा हूं। अब एक बड़ा अंतर है।


14. बारह या तेरह साल पहले मुझे बवासीर हुआ था। मेरा दोस्त मुझे एक ऋषि के पास ले गया जो 90 साल का था।  उन्होंने हाथ की हथेलियों पर, उँगलियों के बीच, नाखूनों के बीच और नाखूनों पर तेल रगड़ने का सुझाव दिया और कहा: नाभि में चार-पाँच बूँद तेल डालें और सो जाएँ। मैं हकीम साहब की सलाह मानने लगा।  मुझे बहुत राहत मिली। इस टिप ने मेरी कब्ज की समस्या को भी हल कर दिया। मेरे शरीर की थकान भी दूर हो जाती है और मुझे चैन की नींद आती है।  खर्राटों को रोकता है।


15.  पैरों के तलवों पर तेल की मालिश एक आजमाई हुई और परखी हुई टिप है।


 16.  तेल से मेरे पैरों के तलवों की मालिश करने से मुझे चैन की नींद मिली।


17. मेरे पैरों और घुटनों में दर्द था।  जब से मैंने अपने पैरों के तलवों पर तेल की मालिश की टिप पढ़ी है, अब मैं इसे रोजाना करता हूं, इससे मुझे चैन की नींद आती है।


18. जब से मैंने रात को बिस्तर पर जाने से पहले अपने पैरों के तलवों पर तेल की मालिश के इस नुस्खे का उपयोग करना शुरू किया है, तब से मुझे कमर दर्द ठीक हो गया है। मेरी पीठ का दर्द कम हो गया है और भगवान का शुक्र है कि मुझे बहुत अच्छी नींद आई है।


*रहस्य इस प्रकार है:*


 रहस्य बहुत ही सरल, बहुत छोटा, हर जगह और हर किसी के लिए बहुत आसान है।


*किसी भी तेल, सरसों या जैतून, आदि को पैरों के तलवों और पूरे पैर पर लगायें, विशेषकर तलवों पर तीन मिनट के लिए और दाहिने पैर के तलवे पर तीन मिनट के लिए।* रात को सोते समय पैरों के तलवों की मालिश करना कभी न भूलें, और बच्चों की मालिश भी इसी तरह करें। इसे अपने जीवन के बाकी हिस्सों के लिए एक दिनचर्या बना लें। फिर प्रकृति की पूर्णता को देखें। आप अपने पूरे जीवन में कंघी करते हैं।  क्यों न पैरों के तलवों पर तेल लगाया जाए।


 *प्राचीन चिकित्सा के अनुसार, पैरों के नीचे लगभग 100 एक्यूप्रेशर बिंदु हैं।  उन्हें दबाने और मालिश करने से मानव अंगों को भी ठीक किया जाता है। उसे फुट रिफ्लेक्सोलॉजी कहा जाता है। दुनिया भर में पैरों की मालिश चिकित्सा का उपयोग किया जाता है।*


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  OM AROGYAM

AYURVADIC SEWA CENTRE

पत्रकारिता प्रशिक्षण संस्थानों का काला सच /:सुमित्त श्रीवास्तव

 जर्नलिज्म में करियर… कड़वा है पर सत्य है……आपका बच्चा जब इंटर पास कर लेता है तब आपके चेहरे पर उसके भविष्य की चिंता झलकने लगती है कि उसको भविष्य में क्या कराया जाये जिससे उसका करियर बन सके… उसके साथ साथ अपने बच्चे की आगे की पढाई के लिये लाखों रुपये की व्यवस्था भी करनी है… बड़े चैनलों पर पत्रकारों और एंकरो को बोलता देख कुछ छात्र मीडिया में करियर बनाने की सोचते हैं और अपना भविष्य टीवी पर बोलते एक बड़े जर्नलिस्ट की तरह देखने लगते हैं।

इसी के साथ वो अपने करियर की शुरुआत के लिए मास कम्यूनिकेशन का कोर्स करने के लिये निकल जाते है.. कोर्स करने के दौरान संस्थानों द्वारा उनको बड़े बड़े सपने दिखाये जाते हैं… जब चैनलों में ऑडियंस के तौर पर उन बच्चों को बिठाया जाता है तो छात्रों को लगता है कि उनके सपने साकार होने के करीब हैं……..लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद एक रद्दी का टुकड़ा (सर्टिफिकेट जिसकी कोई वैल्यू नहीं) देकर भगा दिया जाता है। जाओ हमारा काम पढ़ाने का था, अब ढूंढों नौकरी अपने आप।

पत्रकाारिता का सर्टिफिकेट तो मिल गया लेकिन उसके बाद उसको क्या करना है, नहीं पता… कहां जाना है, नहीं पता… जिन जिन चैनलों में गये, आपका सीवी ले लिया गया और निराशा हाथ लगी। सालों तक कोई नौकरी नहीं….. जिसके बाद 80 फीसदी छात्र छात्राएं वापिस अपने घर लौट जाते हैं.. सालों की मेहनत और अभिभावकों का लाखो रुपये खर्च करने के बाद जहां से वो भविष्य के सपने देखकर अपने घर से निकले थे वहीं अपने घर आकर खत्म हो जाते हैं।

बाकी 20 फीसदी छात्र-छात्राएं संघर्षरत रहते हैं… छोटे संस्थानों में नौकरी तो मिल जाती है लेकिन नौकरी के साथ शोषण होने लगता है या सैलरी इतनी दी जाती है कि वो 2 टाइम की जगह 1 ही टाइम खा पायें। रही काम की बात तो काम का लोड इतना कि एक मजदूर की जिंदगी अपनी जिंदगी से अच्छी लगने लगती है। एक समय ऐसा आता है कि आप संस्थान के चाटुकार कर्मचारियों की पॉलिटिक्स में फंसकर नौकरी छोड़ने को मजबूर हो जाते है़ं। केवल एक फीसदी ही स्टूडेंट जिनके रिश्तेदार किसी चैनल में कार्यरत हो अथवा आपका सोर्स अच्छा हो, वो ही लोग मीडिया में रुक पाते हैं। अन्यथा ज्यादातर छात्र अपनी लाइन चेंज कर देते हैं।

अब आप मंथन कीजिये इतने सालो में अपने क्या कमाया और क्या गवाया ……

मैं पुरजोर खुलकर विरोध करता हूं उन पत्रकारिता संस्थानों का जो 100 फीसदी प्लेंसमेंट का झांसा देकर छात्र छात्राओं के करियर से खिलबाड़ करते हैं और लाखो रुपये लेने के बाद बच्चों को केवल निराशा ही देते हैं। फिर नये छात्र-छात्राओं को प्लेसमेंट का झांसा देकर रुपये ऐठने का काम करते हैं…. अतः पत्रकारिता के नाम पर पैसा ऐठनें वाले संस्थानो पर ताले लग जाने चाहिये क्योंकि ज्यादातर लोग बिना पत्रकारिता की पढ़ाई के ऊंचे पदों पर बैठे हैं और चौड़े होकर फील्ड में घूम रहे हैं। साथ ही साथ सरकारी दफ्तरों में जाकर दलाली का भी काम कर रहे हैं।

सुमित कुमार श्रीवास्तव

मो0….8400008322

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कंप्यूटर की कार्य प्रणाली

  (Computer functions)

कंप्‍यूटर को ठीक प्रकार से कार्य करने के लिये सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों की आवश्‍यकता होती है। अगर सीधी भाषा में कहा जाये तो यह दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। बिना हार्डवेयर सॉफ्टवेयर बेकार है और बिना सॉफ्टवेयर हार्डवेयर बेकार है। मतलब कंप्‍यूटर सॉफ्टवेयर से हार्डवेयर कमांड दी जाती है किसी हार्डवेयर को कैसे कार्य करना है उसकी जानकारी सॉफ्टवेयर के अन्दर पहले से ही डाली गयी होती है। कंप्यूटर के सीपीयू से कई प्रकार के हार्डवेयर जुडे रहते हैं, इन सब के बीच तालमेल बनाकर कंप्यूटर को ठीक प्रकार से चलाने का काम करता है सिस्टम सॉफ्टवेयर यानि ऑपरेटिंग सिस्टम।

कंप्यूटर की कार्य प्रणाली

कंप्‍यूटर के कार्यप्रणाली की प्रक्रिया एक चरणबद्ध तरीके से होती है

इनपुट (Input) —– प्रोसेसिंग (Processing) —– आउटपुट (Output)

– इनपुट के लिये आप की-बोर्ड, माउस इत्‍यादि इनपुट डिवाइस का प्रयोग करते हैं साथ ही कंप्‍यूटर को सॉफ्टवेयर के माध्‍यम से कंमाड या निर्देश देते हैं या डाटा एंटर करते हैं।

– यह इस प्रक्रिया का दूसरा भाग है इसमें आपके द्वारा दी गयी कंमाड या डाटा को प्रोसेसर द्वारा सॉफ्टवेयर में उपलब्‍ध जानकारी और निर्देशों के अनुसार प्रोसेस कराया जाता है।

– तीसरा अौर अंतिम भाग आउटपुट इसमें आपके द्वारा दी गयी कंमाड के आधार पर प्रोसेस की गयी जानकारी का आउटपुट कंप्‍यूटर द्वारा आपको दिया जाता है जो आपको आउटपुट डिवाइस द्वारा प्राप्‍त हो जाता है।

2. कंप्यूटर की हार्डवेयर संरचना (Computer hardware structure)

कम्प्यूटर के निम्‍न महत्वपूर्ण भाग होते है

  • – मोनीटर या एल.सी.डी.
  • – की-बोर्ड
  • – माऊस
  • – सी.पी.यू.
  • – यू.पी.एस

मोनीटर या एल सी डी :- इसका प्रोयोग कम्प्यूटर के सभी प्रेाग्राम्स का डिस्‍प्ले दिखाता है। यह एक आउटपुट डिवाइस है।

की-बोर्ड :- इसका प्रयोग कम्प्यूटर मे टाइपिंग लिए किया जाता है, यह एक इनपुट डिवाइस है हम केवल की-बोर्ड के माध्यम से भी कम्‍प्‍यूटर को आपरेट कर सकते है।

माऊस :- माऊस कम्प्यूटर के प्रयोग को सरल बनाता है यह एक तरीके से रिमोट डिवाइस होती है और साथ ही इनपुट डिवाइस होती है।

सी. पी. यू.(सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट):- यह कम्प्यूटर का महत्वपूर्ण भाग होता है हमारा सारा डाटा सेव रहता है कम्प्यूटर के सभी भाग सी. पी. यू. से जुडे रहते है। सीपीयू के अन्‍दरूनी भागों के बारे में जानें क्लिक करें।

यू.पी.एस.(अनिट्रप पावर सप्लार्इ):- यह हार्डवेअर या मशीन कम्प्यूटर बिजली जाने पर सीधे बन्द होने से रोकती है जिससे हमारा सारा डाटा सुरक्षित रहता है।

3. सीपीयू के अन्‍दरूनी भाग

सीपीयू कम्‍प्‍यूटर का मुख्‍य भाग होता है, इसी प्रकार सी0पी0यू0 भी कई भागों में बॅटा होता है या वह भी कई हार्डवेयरों को जोडकर बनाया जाता है, इन्‍ही हार्डवेयर भागों की गुणवत्‍ता और क्षमता पर सी0पी0यू0 की कार्यक्षमता निर्भर करती है

हार्ड डिस्क

यह वह भाग है जिसमें कम्प्यूटर के सभी प्रोग्राम और डाटा सुरक्षित रहते है। हार्ड डिस्क की मेमोरी स्थायी होती है, इसीलिए कम्प्यूटर को बंद करने पर भी इसमें सुरक्षित प्रोग्राम और डाटा समाप्‍त नहीं होता है। आज से 10 वर्ष पहले हार्डडिस्‍क की स्‍टोरेज क्षमता गीगाबाइट/जी0बी0 मेगाबाइट या एम0बी0 तक सीमित रहती थी किन्‍तु आजकल हार्ड डिस्क की स्‍टोरेज क्षमता को टेराबाइट या टीबी में मापा जाता है किन्तु आजकल 500 जी0बी0 तथा 1 TB या 1000 GB के क्षमतायुक्त पीसी लोकप्रिय हो गए है। हार्ड डिस्क की क्षमता जितनी अधिक होगी उतना ही ज्‍यादा डाटा स्‍टोर किया जा सकता है।

मदर बोर्ड

मदर बोर्ड फाइबर ग्लास का बना एक समतल प्लैटफार्म होता है, जो कम्‍प्‍यूटर के सभी हार्डवेयरों को जैसे की बोर्ड, माउस, एल0सी0डी0, प्रिन्‍टर आदि को एक साथ जोडें रखता है। मदरबोर्ड से ही प्रोसेसर, हार्डडिस्‍क, रैम भी जुडी रहती है तथा यू0एस0बी0, या पेनडाइव लगाने के लिये के भी यू0एस0बी0 पाइन्‍ट मदरबोर्ड बोर्ड में दिये गये होते हैं। साथ ही मदरबोर्ड से ही हमें ग्राफिक, तथा साउण्‍ड का आनन्‍द भी मिलता है।

सेन्ट्रल प्रासेसिग यूनिट (प्रोसेसर)

यह कम्प्यूटर का सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग है। इसमें एक माक्रोप्रोसर चिप रहता है जो कम्प्यूटर के लिए सोचने के सभी काम करता है और यूजर के आदेशेा तथा निर्देशों के अनुसार प्रोग्राम का संचालन करता है। एक तरह से यह कम्‍प्‍यूटर का दिमाग ही होता है। इसी वजह से यह काफी गरम भी होता है और इसको ठंडा रखने के लिेये इसके साथ एक बडा सा फैन भी लगाया जाता है जिसे सी0पी0यू0 फैन कहते हैं। आजकल प्रोसेसर पिन लैस आते हैं लेकिन आज से 5 साल पहले पिन वाले प्रोसेसर आते थे। इसनें सबसे प्रचलित पैन्‍टीयम 4 प्रोसेसर रहें हैं। आज के समय में इन्‍टेल कम्‍पनी के डयूलकोर और आई03 या आई07 प्रोसेसर काफी प्रचलित हैं। इन प्रोसेसरों से कम्‍प्‍यूटर की क्षमता काफी बढ जाती है।

डी0वी0डी0 राइटर

यह वह भाग है जो डी0वी0डी0-राइटर डिस्क में संचित डाटा को पढता है तथा डी0वी0डी0 को राइट भी करता है जब तक डी0वी0डी राइटर नहीं आया था तक डी0वी0डी रोम चलते थे और उससे पहले सी0डी0 राइटर या सी0डी0 रोम होते थे और उससे भी पहले फ्लोपी डिस्क ड्राइव होती थी जिसमें केवल 3;4 एम0बी0 डाटा ही स्‍टोर किया जा सकता था। आजकल ब्‍लूरे डिस्‍क क भी अविष्‍कार हो चुका है जिसमें लगभग 40 जी0बी0 तक डाटा स्‍टोर किया जा सकता है। इसके लिये कम्‍प्‍यूटर में ब्‍लूरे राइटर को लगाना आवश्‍यक होगा।

रैम

रैम की फुलफार्म रैन्‍डम एक्सिस मैमरी होती है, रैम कम्‍प्‍यूटर को वर्किग स्‍पेस प्रदान करती यह एक प्रकार की अस्‍थाई मैमोरी होती है, इसमें कोई भी डाटा स्‍टोर नहीं होता है। जब हम कोई एप्‍लीकेशन कम्‍प्‍यूटर में चलाते हैं, तो वह चलते समय रैम का प्रयोग करती है। कम्‍प्‍यूटर में कम रैम होने की वजह से कभी कभी हैंग होने की समस्‍या आती है तथा कुछ ऐप्‍लीकेशन को पर्याप्‍त रैम नहीं मिलती है तो वह कम्‍प्‍यूटर में नहीं चलते है। रैम कई प्रकार की आती है, जैसे DDR, DDR1, DDR2 तथा DDR3 आजकल के प्रचलन में डी0डी0आर03 रैम है। रैम के बीच के कट को देखकर रैमों को पहचाना जा सकता है।

पावर सप्लार्इ

कम्प्यूटर के सभी भागों को उनकी क्षमता के अनुसार पावर प्रदान करने का कार्य पावर सप्‍लाई करती है। इसको भी ठंडा रखने के लिये इसमें फैन लगा होता है। इसमें से मदरबोर्ड, हार्डडिस्‍क, डी0वी0डी0राइटर को उचित सप्‍लाई देने हेतु अलग अलग प्रकार के वायर दे रखे होते है। इसका मेन स्‍वीच सी0पी0यू0 के पीछे दिया होता है जहॉ पावर केबिल के माध्‍यम से कम्‍प्‍यूटर को पावर दी जाती है।

कम्‍प्‍यूटर की-बोर्ड

की-बोर्ड टाइपराटर जैसा उपकरण होता है जिसमें कम्प्यूटर में सूचनाए दर्ज करने के लिए बटन दिये गये होते हैं जिन्‍हें हम की (key) कहते है ।

5. यह टैराबाइट क्‍या है

समय मापने के लिये सैकेण्‍ड, आवाज को नापने के लिये डेसीबल, दूरी को नापने के लिये मि0मि और वजन को नापने के लिये ग्राम जैसे मात्रक हैं, इसी प्रकार कम्‍प्‍यूटर की दुनिया में स्‍टोरेज क्षमता का नापने के लिये भी मात्रकों का निर्धारण किया गया है, आइये पहले कम्‍प्‍यूटर की दुनिया में स्‍टोरेज क्षमता के मात्रक सबसे लघु इकाइयों से शुरू करते है। कम्‍प्‍यूटर की मैमोरी की सबसे छोटी ईकाई होती है बिट (bit) जब चार बिट को मिला दिया जाता है तो निर्माण होता है तो उसे निब्‍बल (Nibble) कहते हैं यानी 1 निब्‍बल = 4 बिट बाइट (Byte) 8‍ बिट के एक समूह को बाइट कहते हैं।

सामान्‍यत एक जब आप एक अंक या अक्षर अपने कम्‍प्‍यूटर में टाइप करते हैं तो उसको एक बाइट से व्‍यक्‍त किया जाता है या सीधे शब्‍दों में कहें तो वह एक बाइट के बराबर जगह घेरता है। यानी 1 बाइट = 8 बिट = 2 निब्‍बल इस प्रकार लगभग 11099511627776 बाटइ के समूह को टैराबाइट कहा जाता है और एक टैराबाईट में लगभग 20 लाख एम0पी03 को स्‍टोर किया जा सकता है।

  • – A kilobyte is 103 or 1,000 bytes.
  • – A megabyte is 106 or 1,000,000 bytes. = 1024 kilobyte
  • – A gigabyte is 109 or 1,000,000,000 bytes.= 1024 megabyte
  • – A terabyte is 1012 or 1,000,000,000,000 bytes.= 1024 gigabyte
  • – A petabyte is 1015 or 1,000,000,000,000,000 bytes.= 1024 terabyte
  • – An exabyte is 1018 or 1,000,000,000,000,000,000 bytes.= 1024 petabyte
  • – A zettabyte is 1021 or 1,000,000,000,000,000,000,000 bytes.= 1024 exabyte
  • – A yottabyte is 1024 or 1,000,000,000,000,000,000,000,000 bytes. = 1024 zettabyte

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