गुरुवार, 15 अप्रैल 2021

कोरोना ka विस्फोट दो लाख की मौत

 भयभीत है भारत, हो गया कोरोना का भारत meविस्फोट, एक दिन में दो लाख से ज्यादा नए केस, इतनी मौतें

कोरोना का दूसरा दौर डरावनी तस्वीर कर रहा पेश …
लगातार सामने आ रहे कोरोना के नए-नए रिकॉर्ड
ध्वस्त हो गए कोरोना के सभी रिकॉर्ड

Corona Blast in India : भारत को अब कोरोना वायरस भयभीत कर रहा है| देश में इसका फैलाव इस कदर शुरू हो गया है कि एक-एक दिन में आने वाले केसों की संख्या देखते ही देखते दो लाख के आंकड़े को छू गई है| पिछले 24 घटों में देश में कोरोना वायरस के दो लाख से ज्यादा नए मामले दर्ज किये गए हैं और हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं| मतलब अब भारत में पिछले 24 घंटे में COVID19 के 2,00,739 नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,40,74,564 पहुंच गई है और 1,038 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 1,73,123 हो गई है।

हालाँकि, कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,40,74,564 में इतनी संख्या में लोग 1,24,29,564 लोग कोरोना को मात दे चुके हैं| इसलिए देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 14,71,877 है| आपको बतादें कि भारत में कल तक कोरोना वायरस के लिए कुल 26,20,03,415 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं| जिनमें से 13,84,549 सैंपल बीते बुधवार को टेस्ट किए गए|

इससे पहले भी टूटा था रिकॉर्ड केस आये थे सामने ….

इससे पहले भी देश में कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में सर्वाधिक 1,84,372 नये मामले सामने आए थे और 1,027 लोगों की मौत हुई थी|

इस तरह के दलाल जूता चाटने वाले (?) संपादकों की बाहर करो

 ज़ी न्यूज़ के संवाददाता विनोद मित्तल द्वारा असाइनमेंट हेड को भेजा गया इस्तीफा पढ़ें-

सेवा में,
आदरणीय श्रीमान प्रमोद शर्मा जी,
असाइनमेंट हेड, ज़ी मीडिया
फिल्म सिटी नोएडा

विषय- ज़ी न्यूज़ चैनल से इस्तीफा देने बारे।

महोदय,
श्रीमान जी मैंने ज़ी मीडिया समूह को 1 अप्रैल 2014 को ज्वाइन किया था। इस अंतराल में मेरा यह प्रयास रहा कि संस्थान को अच्छा काम करके दिखाऊं और मेरी वजह से संस्थान का नाम कहीं भी खराब ना हो। हमेशा आप जैसे उच्च अधिकारियों का जो भी आदेश मुझे मिला मैंने उसे पूरा करने का हर संभव प्रयास किया। कल मैं जब आपके पास आया तो मेरे ऊपर वह सभी आरोप लगाए गए जो मुझसे कोसों दूर है। मैंने अपनी पत्रकारिता में किसी से कोई लिफाफा या पैसे नहीं लिए शायद यही कारण है कि आज भी मैं दो पहिया वाहन पर ही घूम कर अपना काम करता हूं।

आदरणीय संपादक श्री दिलीप तिवारी जी ने जो कहा उनमें से कोई भी बात जरा भी सच नहीं है। हां यह सच है कि मेरे जूतों पर पॉलिश नहीं थी, लेकिन मैंने कभी भी किसी को धमकाया नहीं और चैनल के नाम पर कभी कोई दुकानदारी नहीं की। यहां तक की इन 7 सालों में जो भी लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय के चुनाव हुए मैं वहां पर किसी भी प्रत्याशी के पास विज्ञापन और पैसे मांगने के लिए भी नहीं गया। न ही मैंने किसी को यह कह कर धमकाया कि मैं वैश्य समाज से हूं और ऊपर बड़े लोगों को जानता हूं। लेकिन फिर भी मुझ पर इस तरह के कई लांछन आपके सामने लगाए गए।

महोदय, संस्थान मेरे काम से खुश नहीं है तो मुझे कोई अधिकार नहीं है कि मैं ज़ी मीडिया में आगे काम कर सकूं। इसलिए महोदय मैं आपके पास अपना इस्तीफा और चैनल की आईडी प्रेषित कर रहा हूं। अगर इस दौरान मुझसे कोई गलती हुई है तो उसके लिए मैं आपसे बारंबार क्षमा प्रार्थी हूं। आपको मैंने अपने पिता का दर्जा दिया है इसलिए आपसे स्पेशल माफी मांग रहा हूं। आपका आशीर्वाद मेरे ऊपर बना रहे और मैं किसी दूसरे संस्थान में काम करूं इसी कामना के साथ आपको प्रणाम करता हूं।

चैनल की आईडी में आपको कोरियर कर रहा हूं। फिर कभी यदि मुझे दोबारा मौका मिला तो मैं आपके सानिध्य में और अच्छा काम करके दिखाऊंगा।

आपका
विनोद मित्तल
9871496644

मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

अविश्वास तेरा ही सहारा / रवि अरोड़ा

 अविश्वास तेरा ही सहारा / रवि अरोड़ा



दस साल के आसपास रही होगी मेरी उम्र जब मोहल्ले में पहली बार जनगणना वाले आये । ये मुई जनगणना क्या होती है मेरी माँ को नहीं पता था । मोहल्ले में तरह तरह की अफ़वाहें थीं । कोई कह रहा था कि जिसके बच्चे दो से ज़्यादा होंगे उन्हें जुर्माना देना पड़ेगा तो कोई कह रहा था कि सरकार लड़कों को ज़बरन फ़ौज में भर्ती करेगी । सो आशंकित माँ ने ज़बरन मुझे घर से बाहर पार्क में भेज दिया । पार्क में देखा कि वहाँ मैं अकेला नहीं था वरन मोहल्ले के तमाम बच्चे थे और उनकी माँओं ने भी किसी अनजाने भय से उन्हें घर निकाला दे रखा था । स्वयं के द्वारा चुनी हुई सरकार पर अविश्वास का यह पहला उदाहरण बचपन में ही देखने को मिल गया था । उसके बाद आपातकाल और 1984 के सिख विरोधी दंगे के दौरान तो साफ़ नज़र आया कि मेरी माँ और मोहल्ले की अन्य औरतें ठीक थीं, सरकारों पर आँख बंद करके विश्वास नहीं किया जा सकता । बाद के दिनो में देश भर में हुए तमाम दंगों और अन्य भयावह घटनाओं और उनमे स्थानीय सरकारों की भूमिका से मेरी यह राय और पुख़्ता होती चली गई । छः दशक बीत गए यह सब देखते-देखते । सरकारें आईं सरकारें गईं मगर अविश्वास के बादल कभी छँटे नहीं । कोरोना संकट के इस दौर में भी सरकारों की तमाम मूर्खताएँ पुनः साबित करने में लगी है कि अविश्वास कोई शाश्वत चीज है और विश्वास जैसे कोई वहम । कोई गिनती तो नहीं हो सकती मगर यक़ीनन मुल्क की अधिकांश आबादी मेरे जैसों की ही होगी । हैरानकुन बात यह है कि पब्लिक को तो सरकारों पर विश्वास नहीं है मगर सरकारों को पब्लिक के अविश्वास पर पूरा विश्वास है ।


हिंडन श्मशान घाट के प्रभारी पंडित मनीष बता रहे हैं कि आजकल पाँच से छः शव रोज़ाना कोरोना मरीज़ों के आ रहे हैं । वैसे अचानक कुल शवों की आमद भी दोगुनी हो गई है और अनुमान लगाया जा रहा है कि सामान्य तरीक़े से मरने वालों में भी अधिकांशत कोरोना के वे मरीज़ होंगे जिन्होंने अपनी जाँच नहीं करवाई अथवा घर पर ही अपना इलाज करवा रहे थे । कोई बड़ी बात नहीं कि देश भर में यही सूरते हाल होगा मगर बड़ी बड़ी चुनावी रैलियों से इस हक़ीक़त को झुठलाया जा रहा है । मरने वालों का सरकारी आँकड़ा भी चुनावी अथवा ग़ैरचुनावी राज्य के हिसाब से बताया जा रहा है । अपनी ताक़त दिखाने को सरकारें नाइट कर्फ़्यू तो लगा रही हैं मगर सरकारी अस्पतालों में वैक्सींन क्यों नहीं लग रही यह बताने की ज़रूरत उन्हें महसूस नहीं होती । उधर, पब्लिक फिर भी मस्त है । उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि उसे पता है कि ऐसे तो होता ही है । कोरोना संकट के शुरुआती दौर में सरकारों पर अविश्वास ने करोड़ों लोगों को पैदल सड़कों पर उतार दिया और कमोवेश दोबारा वही हालत बनते नज़र आ रहे हैं । आर्थिक संकट से उबरने को सरकार ने बीस लाख करोड़ रुपयों की घोषणा की । साल होने को आया न सरकार बताती है कि रुपया कहाँ ख़र्च हुआ और न ही जनता को यह जानने में रुचि है । दोनो टेक इट ईज़ी के मोड में हैं । चुनाव के समय राजनीतिक दल बड़े बड़े वादे करते हैं और बाद में हारें या जीतें इनसे कोई नहीं पूछता कि उन घोषणाओं का क्या हुआ ? सबको पता होता है कि वे तो बस जुमले ही होते हैं । अविश्वास और उस अविश्वास पर राजनीतिक दलों के इस विश्वास ने एक ऐसा लोकतंत्र हमें बना दिया है कि जहाँ लाखों-करोड़ों लोगों के सामने कहे गए शब्द के भी कोई मायने नहीं । किसी मायने के भी कोई मायने नहीं । फिर किसके मायने हैं , यह बताने के भी कोई मायने नहीं ।

सोमवार, 12 अप्रैल 2021

के आसिफ उर्फ़ मुगले आज़म

 हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा डायरेक्टर था जो अपनी सिर्फ एक फिल्म के लिए जाना जाता है। इस निर्देशक ने फिल्म बनाने की कोई खास ट्रेनिंग नहीं ली थी। इनका नाम था के आसिफ और पूरा नाम करीमुद्दीन आसिफ। बॉलीवुड के सफल फिल्म निर्माता और निर्देशकों की श्रेणी में टॉप पर रहने वाले के आसिफ को लोग पागल फिल्म डायरेक्टर भी कहते थे।

 इसकी वजह बहुत बड़ी थी। उनके जानने वालों के मुताबिक वह बड़े सनकी और जिद्दी इंसान थे। 14 जून 1922 को इटावा में जन्मे आसिफ एक बार जो सोच लेते थे उसे पूरा करके ही दम लेते थे। यही वजह थी कि लाख रुकावटों के बावजूद उन्होंने अपनी फिल्म मुगल-ए-आजम को पूरा कर लिया। लगातार 14 सालों तक फिल्म का निर्माण चलता रहा।


इनका जन्म 14 जून 1922 को हुआ था और 9 मार्च 1971 को वह इस दुनिया से रुख्सत हो गए। उन्होंने अपनी जिन्दगी में केवल दो फिल्में बनाईं ‘फूल'(1945) और ‘मुग़ल-ए-आज़म’ (1960)। उनकी पहली फिल्म तो कुछ खास कमाल नहीं कर सकी लेकिन दूसरी फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ ने इतिहास बना दिया। इस फिल्म ने हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के कई लोगों को प्रभावित किया। इस फिल्म का स्टारडम इस कदर बढ़ा कि दिलीप कुमार सुपरस्टार बन गए। यह फिल्म दिलीप कुमार के करियर की एतिहासिक फिल्म साबित हुई। फिल्म में दिलीप कुमार, मधुबाला और पृथ्वीराज कपूर के किरदार आज भी क्लासिक माने जाते हैं।


चौदह सालों में 1.5 करोड़ की लागत से बनी फिल्म मुगल-ए-आजम के एक गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’ को फिल्माने में 10 लाख रुपये खर्च किये गए थे। ये उस दौर की वो रकम थी जिसमें एक पूरी फिल्म बन कर तैयार हो जाती थी। 105 गानों को रिजेक्ट करने के बाद नौशाद साहब ने ये गाना चुना था। 


के आसिफ की शादी दिलीप कुमार की बहन अख्तर बेगम से हुई थी। एक बार अख्तर बेगम और आसिफ में झगड़ा हुआ। दिलीप बीच-बचाव करने पहुंचे तो आसिफ ने उनसे कह दिया कि अपना स्टारडम मेरे घर से बाहर रखो। दिलीप कुमार उनकी इस बात से बेहद नाराज हुए। दिलीप का के आसिफ के प्रति नाराजगी का आलम ये था कि वो फिल्म के प्रीमियर तक में नहीं गए थे। 


1960 में बनी इस फिल्म का सेट उस दौर में अपनी भव्यता के लिए खूब चर्चा में रहा था। फिल्म 'मुगल-ए-आजम का गाना 'प्यार किया तो डरना क्या' लाहौर किले के शीशमहल की हूबहू कॉपी में शूट किया गया था और इस शीशमहल की इस कॉपी यानी सेट को बनाने में ही 2 साल का समय लग गया था। यह उस दौर में भारत का सबसे महंगा फिल्म सेट था, जिसे बनाने में करीब 15 लाख का खर्च आया था।


मुगल ए आज़म से जुड़ा एक और किस्सा बेहद मशहूर है। जब कई साल पहले मुगल ए आज़म की शूटिंग शुरू हुई थी तो दिलीप कुमार और मधुबाला की प्रेम कहानी जोर शोर से चल रही थी, लेकिन करीब 10 साल में पूरी हुई मुगल ए आज़म में जिस दौर में थप्पड़ वाला ये सीन शूट हुआ, उस वक्त तक इन दोनों की राहें अलग हो चुकी थी। इस सीन के दौरान दिलीप कुमार ने मधुबाला को गाल पर पूरी ताकत से झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया। शॉट तो ओके गया, लेकिन थप्पड़ की गूंज के बाद पूरे सेट पर कुछ देर के लिए शांति छा गई थी।


स्त्रोत ~ amarujala.com

कहाँ पर जाकर थमेगा यह कोरोना?

 कोरोना क्या करके मानेगा? एक दिन में 1.70 लाख के करीब केस, और रोजाना एक हजार मौतों को छूता आंकड़ा, अब तो इस राज्य ने कह दिया- यहां ऐसे ही मत आ जाना. 

India Coronavirus latest अपडेट

: देश में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या जिस रफ्तार से बढ़ रही है उसे देखकर आगे हालात और खराब होते नजर आ रहे हैं| कोरोना वायरस की यह लहर देश पर कहर बनकर टूटने पर उतारू हो रखी है| देश में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना के 1 लाख 70 हजार के करीब नए मामले सामने आए हैं जो अभी तक एक दिन में सबसे ज्यादा हैं। वहीं, इस दौरान 904 लोगों ने अपनी जान भी गंवाई है। इधर, लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों(India Coronavirus latest update) से एक्टिव केसों की संख्या भी बढ़ गई है। इस वक्त देश में कोरोना के एक्टिव केसों की संख्या 12 लाख को पार कर गई है। वहीँ, देश में अबतक 1 लाख 70 हजार से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमण के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। बतादें कि, महाराष्ट्र में कोरोना ने अभी तक के सारे रेकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। कोरोना के सबसे ज्यादा मामले इन जगहों पर दर्ज किये जा रहे हैं जिनमें मुख्यता महाराष्ट्र है और इसके बाद पंजाब, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और केरल शामिल है।

हिमाचल सरकार ने बड़ा कदम उठाया……

कोरोना के बढ़ते प्रसार को देखते हुए हिमाचल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है| हिमाचल सरकार ने राज्य में 7 जगहों से आने वाले लोगों के लिए राज्य में एंट्री करने पर उन्हें अब ऐसा करने के लिए कहा है| इसलिए यदि आप इन 7 जगहों से हैं और हिमाचल प्रदेश की वादियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो उससे पहले सरकार की ओर से जारी गाइडलाइंस जरूर पढ़ लें या फिर आप हिमाचल के ही हैं और इन 7 जगहों में से कहीं पर भी हैं और अपने राज्य जाना चाह रहे हैं तो भी आपके लिए गाइडलाइंस पढ़ना जरूरी है|

बतादें कि, हिमाचल सरकार ने अब देश की 7 जगहों से राज्य में दाखिल होने वाले लोगों के लिए कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट अपने साथ लाना अनिवार्य कर दिया है| हिमाचल प्रदेश सरकार ने उन सात राज्यों से यहां आने वाले लोगों के लिए कोविड-19 की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य कर दिया है, जहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिये 16 अप्रैल से हिमाचल प्रदेश आने पर आरटी-पीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह रिपोर्ट 72 घंटे से पहले की नहीं होनी चाहिए।

आपको बतादें कि हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर ने बीते रविवार को राज्य में कोविड-19 हालात का जायजा लेने के लिए एक बड़ी बैठक की, इसी दौरान यह घोषणा की गई| सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में एंट्री करनी है तो अब कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट को दिखाना होगा| 16 अप्रैल से सात अधिकतम कोरोना मामलों वाले राज्यों से आने वाले लोगों को प्रवेश के लिए 72 घंटों के भीतर कराए गए आरटी-पीसीआर नकारात्मक रिपोर्ट लाना अनिवार्य है|

सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य में माइक्रो कंटेनमेंट जोन की प्रभावी निगरानी के साथ टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट की रणनीति पर जोर दिया जाए| मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसों और सार्वजनिक परिवहन वाहनों में अधिक भीड़ नहीं होने दी जाए| इसके साथ ही मैरिज हॉल (इंडोर) में होने वाले शादी समारोहों में 50 से अधिक और खुली जगह पर होने वाले समारोह में 200 से अधिक लोगों के आने पर पाबंदी लगा दी है। अंतिम संस्कार में भी केवल 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे।

हालांकि सीएम जयराम ठाकुर ने लॉकडाउन जैसे किसी फैसले से इनकार किया है, लेकिन यह जरूर कहा कि आने वाले दिनों में पाबंदियों में और इजाफा किया जा सकता है। बता दें कि पड़ोसी राज्य पंजाब के कोरोना से बुरी तरह प्रभावित होने के चलते भी राज्य में चिंताएं बढ़ी हैं। इधर, फिलहाल राज्य में आने पर कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट लाने वाला फैसला यहां की टूरिज्म इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ा सकता है|

कोरोना मे जनबल का दायित्व?

 *क्या हमारी भी कोई जिम्मेदारी बनती है ?*

(अनिल सक्सेना / ललकार)



*महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़* में कोरोना अपना तांडव रूप दिखा रहा है । अकेले रायपुर में 46 नये श्मशान घाट बनाए गए । छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया ने मीडिया को बताया कि मौत के बाद शव जलाने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। राजस्थान में भी कोविड संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। प्रदेश में रविवार को एक दिन में 5105 कोरोना रोगी मिले है।


*कोविड पर नियंत्रण हो,* इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगभग हर दिन बैठकें ले रहें है, प्रतिदिन निर्णय ले रहें है। प्रदेश का प्रत्येक जिला प्रशासन चौकन्ना होकर कार्य कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम कोरोना के प्रति सजग होकर कार्य कर रहें है ? जिस तरह से राज्य सरकार और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि क्षेत्र में कोरोना नही फैले , क्या हमारी भी कोई जिम्मेदारी बनती है ?


*हम चुनावी सभाओं* पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगा रहे है कि नेता भीड़ क्यों एकत्रित कर रहें है ? सवाल यह भी है कि क्या हम और आप लोग इस भीड़ का हिस्सा नही है ? भीड़ तो हम ही है। फिर नेताओं को या राजनीतिक दलों पर दोषारोपण क्यों ? हम सभी तय कर लें कि अभी हम भीड़ का हिस्सा नही बनेंगे तो भीड़ एकत्रित होगी कैसे ? हमें कोरोना से बचाए रखने की जिम्मेदारी सरकार या जिला प्रशासन की ही नही अपितु हमारी स्वयं की भी है। क्या हम सरकार के द्वारा जारी कोविड गाइडलाइन की पालना पूरी तरह कर रहें है ?


*मास्क हमारे पास है* लेकिन नाक से नीचे या गले में पहना हुआ है । यहां तक कि जेब की शोभा भी यही मास्क बढ़ा रहा है और जैसे ही हम दूर से पुलिस को देखते है तुरंत ही मूंह पर मास्क लगा लेते है । ऐसा करके आप धोखा पुलिस को नही बल्कि अपने आप को दे रहे हो और कोरोना को आमंत्रित करने जैसा कार्य कर रहे हो ।


*जिंदा रहे या नही रहे लेकिन हमें* घूमने जाना जरूरी है वो भी बिना मास्क लगाए और साथ में पत्नी और बच्चों को भी ले जाना नही भूलते । वैक्सीन नही लगवाएंगे क्यों कि हम अफवाहों पर विश्वास करते है , झूठ पर विश्वास करते है , अनपढ़ों पर विश्वास करतें है । इस वायरस की मार के बारें में उनसे पूछिए जनाब, जिनके घर में कोरोना से मौत हुई हो, उनके दर्द को महसूस कीजिए ।


*राजस्थान* में कोरोना के बढ़ते आंकड़ों को देखकर अब तो सुधर जाइए। जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक या दूसरा कोई अधिकारी अपनी जान खतरे में डाल कर आपको समझाने और आपको बचाने के लिए ही माॅनिटरिंग कर रहें है। 


*केन्द्र में भाजपा सरकार है और राजस्थान में कांग्रेस सरकार ।* भाजपा नेता हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस नेता राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दोनो ही वैक्सीन लगवाने का आग्रह कर रहें है और कोविड गाइडलाइन की पालना करने पर जोर दे रहें है। अफवाहों पर ध्यान नही दीजिए, अपनी जान बचाइए और कोरोना वैक्सीन लगवा कर दूसरों को भी प्रोत्साहित कीजिए कि वे कोविड गाइडलाइन की पालना कर समाज को सुरक्षित बनाए।

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क्या हमारी भी कोई जिम्मेदारी बनती है ? , click the link *Since 1949 ललकार समाचार पत्र* - http://www.lalkarnews.com/newsi.php?idm=246

रविवार, 11 अप्रैल 2021

कहाँ खो गये रेडियो के नाटक

 नीरज शर्मा

वरिष्ठ रंगकर्मी, आकाशवाणी


मैं एक श्रोता था,श्रोता हूँ और श्रोता रहूँगा। बचपन में हमारे घर में एक छोटा सा रेडियो होता था जो ऊँचाई पर रखा रहता था और मैं एक स्टूल पर एक टाँग पर खड़ा होकर रेडियो नाटक सुना करता था। एक पैर थक जाता तो पैर बदल लेता था। समय ने करवट ली और मैं आकाशवाणी पहुँच गया और रेडियो नाटक की स्वर परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। ये था सन १९७३ ।

वहाँ मुझे मिले स्वर्गीय सत्येन्द्र शरत, मेरे मेंटोर जिन्होंने मुझे रेडियो नाटक की विधा सिखाई। आकाशवाणी केअनेक दिग्गजों के सानिध्य में मैंने रेडियो नाटक के फूलने का सहभागी बना। मैंने जब जब पिछले मुड़ कर देखा तोमुझे अनेक सोपान पीछे दिखे और अपने आप को रेडियो नाटक नए अध्यायों से गुजरता पाया । इस बीच मेरे अनेक नाटकों को आकाशवाणी वार्षिक पुरस्कार भी मिला। ये बात और है कि कलाकारों को कोई सम्मान नहीं मिला। हाँ! कभी चाय समोसा मिल जाता था। अब तो ये भी नसीब नहीं होता।

मृदुला गर्ग द्वारा लिखित नाटक “ एक और अजनबी “ नामक मेरे पहले नाटक को आकाशवाणी राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था शायद १९७५ में जिसके निर्देशक थे स्वर्गीय सत्येन्द्र शरत। मैं पिछले ५ दशक से रेडियो नाटक से जुड़ा हूँ और मैंने हज़ारों नाटकों में भाग ही नहीं लिया बल्कि नाटकों और धारावाहिकों का निर्देशन भी किया है।

पिछले समय में नाटकों की जमकर रिहर्सल की जाति थी, नाटक पर बातचीत होती थी तब कहीं रेकार्ड किया जाताथा। लेकिन आज आलेख हाथ में आया, स्टुडियो में गए, एक दो पेज पढ़े और कहा जाता है कि आइये माइक्रोफ़ोन पर। किसी के पास टाईम ही नहीं है। नाटक की गुणवत्ता जाए भाड़ में।

आकाशवाणी में प्रोग्राम स्टाफ़ और इंजीनियरिंग स्टाफ़ में सदा गतिरोध रहा है जिसका परिणाम है रेडियो नाटक का अनाथ हो जाना।

रेडियो नाटक को स्थापित करने वालों में प्रमुख हैं सर्वश्री एस एस एस ठाकुर, गंगा प्रसाद माथुर, एफ सी माथुर, अनवर खाँ, पद्मश्री चिरंजीत, सत्येन्द्र शरत, दीना नाथ, विश्वप्रकाश दीक्षित बटुक, कुमुद नागर, भारत रत्न भार्गव इत्यादि। इन दिग्गजों के योगदान को नकारना मूर्खता का परिचय देना होगा। इन सभी महान दिग्गजों के साथ कामकरने का सौभाग्य मुझे प्राप्त है। इन सभी के साथ काम करके रेडियो नाटक करने की मेरी बुनियाद मज़बूत हुई।

क्या आकाशवाणी ने इनके अतुलनीय योगदान को सराहा। नहीं!

आकाशवाणी दिल्ली के स्टुडियो कॉरिडोर में लगी तस्वीरों में से एक भी तस्वीर इनमें से किसी की नहीं है। सारी तस्वीरें संगीत के दिग्गजों की हैं। बहुत अच्छी बात है परन्तु आकाशवाणी में नाटक से सौतेला व्यवहार क्यों? ये सौतेला व्यवहार आकाशवाणी में हमेशा से होता आ रहा है । रेडियो नाटक में कलाकार की फ़ीस अधिकतम ३४००रुपये है जबकि संगीत कलाकारों की फ़ीस कई गुना अधिक।

क्यों?

आकाशवाणी में रेडियो नाटक को कुचला गया है। भारत सरकार ने दो महत्वपूर्ण विभाग बनाए हैं। संगीत नाटक अकेडमी और गीत एवम् नाटक प्रभाग यानि संगीत और नाटक दोनो आवश्यक हैं तो फिर आकाशवाणी में रेडियो नाटक का तिरस्कार क्यों?

बात यहीं समाप्त नहीं होती। अब तो आकाशवाणी में मुझ जैसे वरिष्ठ नाटक कलाकार को अपमानित और प्रताड़ित भी किया जाता है और आकाशवाणी के अधिकारी मूक दर्शक बने रहते हैं।

१२ मार्च २०२१ को आकाशवाणी दिल्ली के स्टूडियो नम्बर एक में मेरे साथ ऐसा ही किया गया और ऐसा करने वाले बहुत ही जूनियर कलाकार थे। वैभव श्रीवास्तव, निखिल दीवान।

दरसल मुझे विज्ञान प्रभाग के एक धारावाहिक की १३ कड़ियों के निर्देशन के लिए बुलाया गया था। श्रुति पुरी मेरी सहायक थीं। जब मैंने इन दोनो को संवाद सही प्रकार बोलने को कहा तो इन दोनों ने मुझे ना केवल अपमानित किया बल्कि प्रताड़ित करने की पराकाष्ठा पार कर गए।

मैं जानता हूँ कि ये दोनों वहाँ के सम्बद्ध अधिकारियों के ब्लू आइड बोयज़ हैं इसीलिए किसी ने कुछ नहीं कहा और मैं अपमान का कड़वा घूँट पीकर अपनी इज़्ज़त बचाकर वहाँ से चला आया। परिणामस्वरूप मुझे ही उस सायं धारावाहिक से निकाल दिया गया।

तदुपरांत मैंने सी ई ओ प्रसाद भारती को इस बाबत एक मेल भेजी मार्च १२, २०२१ को। कोई जवाब नहीं। दस दिन बाद रिमाइंडर भेजा। कोई जवाब नहीं। फिर रिमाइंडर भेजा। तब जाकर जवाब आया की हम इसको देख रहे हैं। आप बार बार मेल ना भेजें।

मैं इंतज़ार करने लगा। २ अप्रैल को सायंस सेल के पैक्स की मेलआयी।जिसमें लिखा था की हमने आपकी बात उनदोनो कलाकारों तक पहुँचा दी है ! बस आकाशवाणीकी ज़िम्मेदारी की यही लक्ष्मण रेखा है कि अपने जीवन केपचास वर्ष रेडियो नाटक के लिए आकाशवाणी को देने वाले वरिष्ठतम कलाकार का चाहे अपमान हो, उसे चाहेआकाशवाणी के स्टूडीओ में उसे प्रताड़ित किया जाए परन्तु उनके ब्लू आइड ब्वायस वैभव श्रीवास्तव और निखिलदीवान को कुछ नहीं होना चाहिए। अनेक वर्षों से रेडियो नाटक को दबाया कुचला और नष्ट किया जा रहा है।

इसका जीता जागता प्रमाण मेरे साथ घाटी घटना ही नहीं है बल्कि आकाशवाणी के स्टूडीओ कोरिडोर में लगे चित्रों में एक भी रेडियो नाटक की विभूतियों का ना होना है। संगीत के कलाकारों के मुक़ाबले रेडियो नाटक के कलाकारों की फ़ीस कई गुना कम होना।

आकाशवाणी का ये लिंक है :

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Call 15102 – All India Toll Free Number for all queries concerning Commercial Services

Log on to www.allindiaradio.org for information regarding All India Radio

Log on to www.airworldservice.org for latest information regarding External Services of All India Radio

Log on to www.prasarbharatiarchives.co.in for online purchase of AIR & DDK archives

इस लिंक में रेडियो नाटक कहीं नहीं है। कहाँ हैं पिछले ७० के नाटकों का इतिहास? कहाँ है उन नाटकों की रिकॉर्डिंग जो हम एक पांव पर खड़े होकर सुनते थे?

नाट्यवेला, लहरें, म्यूज़िक मास्टर भोला शंकर, लोहा सिंह, ढोल की पोल, मुंतियास पहलवान , शद्दू ख़लीफ़ा , बहरी बिरादरी, आवाज़ की दुल्हन, चण्डीदास और ऐसे हज़ारों नाटक तब के और अबके जो हमने किए। क्या इन्हें लायब्रेरी निगल गयी या किसी ने इन्हें नष्ट कर दिया?

२००५ में डिजिटल करने के लिए प्रयास में एक ऑडिट किया गया था। क्या उसमें पता नहीं चला कि डिब्बे तो नाटक के हैं, परन्तु टेप कहाँ हैं?

ये अंधेर नगरी ज़रूर है लेकिन राजा चौपट नहीं है। एक कमिटी बनाकर इसकी खोजबीन होनी चाहिए और कमिटी में आकाशवाणी से बाहर के सिद्धहस्त पेशेवर लोग होने चाहिये!

कहीं ऐसा ना हो कि रेडियो नाटक भी एक दिन मोहन जोदडों और हड़प्पा की खुदाई में सिंधु घाटी की सभ्यता की भाँति निकले और एक दिन ऐसा आए कि किसी प्रसिद्ध संग्रहालय के एक विशेष विभाग में बोतलों में कुछ सैम्पल मिलें जिन पर लिखा हो ‘रेडियो नाटक’।

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शनिवार, 10 अप्रैल 2021

कोरोना टीका के बाद सावधानी बरते सावधान रहे

 कोरोना वैक्सीन के दो ङोज लेने के बाद भी संक्रमित होने का कारण जानने लायक है।

▪️कोरोना वैक्सीन के पहले डोज के 28 दिन बाद दूसरा डोज लेना होता है।

▪️वैक्सीन शरीर में प्रवेश करने के तुरंत बाद ही एंटीबाॅडी बनाना शुरू कर देता है।

▪️जब हमारे शरीर में एंटीबाॅडी बन रहा होता है तो हमारी इम्युनिटी बहुत कम हो जाती है। 

▪️जब 28 दिन बाद वैक्सीन का दूसरा डोज लेते हैं तो उस समय हमारी इम्युनिटी और भी कम हो जाती है।

▪️दूसरे डोज के 14 दिन बाद हमारे शरीर में एंटीबाॅडी पूरी तरह बन जाते हैं तो हमारी इम्युनिटी तेजी से बढ़ने लगती है। 

▪️इस डेढ महिने के दौरान इम्युनिटी कम रहने के कारण कोरोना वायरस के हमारे शरीर में प्रवेश करने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है।

उससे कोरोना का संक्रमण हो जाता है।

▪️जिससे इस डेढ महिने के दौरान घर के   बाहर निकलना बहुत रिस्की रहता है। 

▪️वैक्सीन के दो डोज लेने के बाद भी आप कोरोना का शिकार बन सकते है। 

▪️डेढ महिने के बाद 100 से 200 गुना इम्युनिटी पावर हमारे शरीर में बन जाती है, उसके बाद आप सुरक्षित हो।

▪️पहले डोज से डेढ महिने तक ध्यान से एवं सुरक्षित रहने की जरूरत है।

इसलिए 

▪️मास्क जरूर पहनें

▪️जरूरी हो तो ही घर से बाहर निकलें

▪️आकर गरम पानी से स्नान करें।

▪️बच्चे और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

▪️इस समय का अफ्रीकन स्ट्रैन पूरे परिवार को एक साथ चपेट में लेता है। 

▪️परिवार की खातिर सचेत रहें और सुरक्षित रहें।

●◆●◆●◆

*यदि आपको Corona  को हराना चाहते हो तो कृपा करके ये सब ज्यादा से ज्यादा अपनाइए।*

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*आप सभी से निवेदन है कि कोरोना की दूसरी लहर का संक्रमण पहले से ज्यादा सतर्कता मांगता है*

*शहरों के हॉस्पिटल में जगह नहीं मिल रही है,सारी पहचान पैसा कुछ भी काम नहीं आ रहा है!*

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*सिर्फ और सिर्फ अपने आप को बचाना ही एक मात्र उपाय है।*                                 ---///----------

*सभी परिवार के सदस्य कृपया ध्यान दें:*

*01  कोई भी खाली पेट न रहे*

*02  उपवास न करें*

*03  रोज थोड़ी देर धूप में रहें।        04  यदि हो सके तो AC का प्रयोग न करें*

*05  गरम पानी पिएं, गले को गीला रखें*

*06  सरसों का तेल नाक में लगाएं*

*07  घर में कपूर व गूगल जलाएं*

*08  आधा चम्मच सोंठ हर सब्जी में डालें*

*09  दालचीनी का प्रयोग करें*

*10  रात को एक कप दुध में हल्दी डालकर पिये*

*11  हो सके तो एक चम्मच चवनप्राश खाएं*

*12  घर में कपूर और लौंग डाल कर धूनी दें*

*13  सुबह की चाय में एक लौंग डाल कर पिएं*

*14  फल में सिर्फ संतरा ज्यादा से ज्यादा खाएं*

*15. आंवला किसी भी रुप में चाहे अचार, मुरब्बा,चूर्ण इत्यादि खाएं।*

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*🙏हाथ जोड़ कर प्रार्थना है, अपने जानने वालों को भी यह जानकारी भेजें।🙏*

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शुभ प्रभात आपका दिन कृष्ण भक्तिमय प्रेममय मंगलमय हो जय श्री कृष्ण जय श्री राम। ॐ शान्ति।

खतरे मे है प्रिंट मीडिया

 प्रिंट मीडिया का भविष्य क्या है? तेजी से होते डिजिटलाइजेशन के बीच यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। कई बड़े अखबार बंद हो चुके हैं, कुछ ने अपना दायरा सीमित कर लिया है


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प्रिंट मीडिया का भविष्य क्या है? तेजी से होते डिजिटलाइजेशन के बीच यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। कई बड़े अखबार बंद हो चुके हैं, कुछ ने अपना दायरा सीमित कर लिया है और कुछ इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यदि हम बीते दिनों जारी किए इंडियन रीडरशिप सर्वे के परिणामों पर नजर डालें, तो चिंता और भी बढ़ जाती है। इस सर्वे के मुताबिक, ‘दैनिक जागरण’ की 2019 की तीसरी तिमाही में एवरेज इशू रीडरशिप 1.75 करोड़ थी, यानी दूसरी तिमाही से 3.6 प्रतिशत और पहली से 13.6 प्रतिशत कम। एवरेज इशू रीडरशिप पाठकों की वह संख्या है, जिसने पिछले दिन अखबार पढ़ा है, जबकि कुल रीडरशिप का मतलब है उन लोगों की संख्या, जिन्होंने पिछले 30 दिनों में कम से कम एक बार अखबार पढ़ा है। वैसे बात केवल जागरण की ही नहीं है, कई दूसरे अखबारों की स्थिति भी खराब है। हिन्दुस्तान की एवरेज इशू रीडरशिप पिछले वर्ष की पहली दो तिमाहियों में 21 प्रतिशत गिरकर 1.46 करोड़ हो गई, इसी अवधि में अमर उजाला की रीडरशिप में 4.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मलयमाला मनोरमा में आठ प्रतिशत, ‘राजस्थान पत्रिका’ में 10 प्रतिशत और ‘ईनाडु’ की रीडरशिप में 21 फीसदी गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि,  पाठकों की संख्या में गिरावट के बावजूद, ‘दैनिक जागरण’ भारत का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला समाचार पत्र बना हुआ है, जबकि ‘मलयाला मनोरमा’ 89.81 लाख की एवरेज इशू रीडरशिप के साथ सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला क्षेत्रीय दैनिक है। केवल चार समाचार पत्रों- ‘दैनिक भास्कर’, ‘दैनिक थांथी’, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘लोकमत’ ने जरूर तीसरी तिमाही में अपनी पाठक संख्या में वृद्धि देखी, लेकिन मामूली। रीडरशिप में 0.55% की वृद्धि के साथ ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने सबसे अधिक पढ़े जाने वाले अंग्रेजी के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है।

मुंबई, दिल्ली और कोलकाता, इन तीन बड़े बाजारों में,  लगभग हर प्रमुख अंग्रेजी अखबार ने अपनी पाठक संख्या में गिरावट देखी है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ 12.92 लाख की पाठक संख्या के साथ मुंबई के बाजार पर अभी भी राज कर रहा, लेकिन यह आंकड़ा दूसरी तिमाही के 13.17 लाख के मुकाबले कम है। TOI के निकटतम प्रतिद्वंदी ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को भी नुकसान उठाना पड़ा है। अखबार की एवरेज इशू रीडरशिप दूसरी तिमाही के 8.69 लाख से घटकर तीसरी तिमाही में 8.59 लाख पर पहुंच गई है। दिल्ली में, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ दोनों अपने पाठकों की संख्या में तीन फीसदी की कमी के साथ क्रमश: 10.76 लाख और 9.28 लाख पर हैं। 

अखबारों के पाठकों में आ रही कमी की तमाम वजह हैं। पहली तो यही कि आजकल सबकुछ ऑनलाइन हो गया है। लोग खबरें भी चलते-चलते पढ़ना पसंद करते हैं। इसके मद्देनजर कई मीडिया संस्थानों ने अपने प्रिंट संस्करण बंद करके पूरा ध्यान डिजिटल मीडिया पर केंद्रित कर लिया है। उदाहरण के तौर पर DNA ने पुणे के बाद मुंबई, अहमदाबाद में भी अपना प्रिंट कारोबार समेट लिया है, अब वह केवल ऑनलाइन मौजूद है। इसी तरह ‘डेक्कन क्रोनिकल’ और ‘लोकमत समाचार’ ने अपने कई संस्करण बंद कर दिए हैं। कुछ साल पहले भास्कर समूह के अंग्रेजी अखबार ‘डीबी पोस्ट’ को भी बंद कर दिया गया था। ‘लोकमत’ समूह ने एक ही झटके में अपने हिंदी अखबार ‘लोकमत’ समाचार के पुणे सहित कुछ संस्करणों पर ताला लगा दिया था। इसके अलावा, सख्त सरकारी नीतियों और कम होते राजस्व ने भी प्रिंट मीडिया का खेल बिगाड़ा है। पिछले साल के आम बजट में अखबारी कागज पर लगाए गए 10 प्रतिशत आयात शुल्क ने पहले से ही संघर्षरत समाचार पत्रों को बड़ा झटका दिया था। हालांकि, नेशनल न्यूजपेपर सोसाइटी के विरोध के बाद इस बार के बजट में इसे घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि सरकार ने फैसला लेने में बहुत देर लगा दी।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक,ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

हिम्बा प्रजाति me जनमोत्स्व परम्परा

 नामीबिया (अफ्रीका) की हिम्बा प्रजाति में बच्चे का जन्म उस दिन से माना जाता है, जिस दिन स्त्री गर्भधारण का निर्णय करती है। उस दिन वो स्त्री अकेले कहीं बैठती है और खुद ही एक गाना रचती है-गुनती है। फिर जाकर 'वो गीत' उस आदमी को सुनाती है, जिसे वो अपने होने वाले शिशु के पिता की तरह देखती है। फिर वे दोनों मिल के वो गीत गाते है...संसर्ग के बाद भी दोनों वही गीत गाते हैं। 

इसको आप इस तरह देख सकते हैं कि दोनों अपने होने वाले उस बच्चे को बुला रहे होते हैं, स्वागत कर रहे होते हैं, जिसकी उन्होंने कल्पना की है। जब स्त्री गर्भवती हो जाती है तो वही गीत वो अपने घर-पड़ोस-गांव की औरतों को सिखाती है, ताकि प्रसवपीड़ा के दौरान सब उसी गीत को गायें और शिशु के जन्म का स्वागत करें । 

'वो गाना' उस बच्चे के ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाता है, जिसे हर ज़रूरी अवसर पर गाया जाता है। जब उसे चोट लगती है, तब भी। 

यहाँ तक कि जब कोई हिम्बा स्त्री/पुरुष अपराध करता है तो सबसे पहले उन्हें बीच गाँव में ले जाया जाता हैं और सारे लोग हाथ पकड़ के एक गोल घेरा बनाते हैं और फिर वही गीत उसको सुनाते हैं, जो उसकी माँ ने उसके जन्म से पहले ही उसके लिए गुना था। 

आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह सब करने का औचित्य क्या है? दरअसल हिम्बा जनजाति सुधार के लिए दंड को महत्व नहीं देती, बल्कि व्यक्ति को फिर से उसकी पहचान से, अपनी जड़ों से जोड़ देने को ज़रूरी मानती है। ऐसा करके वे याद दिलाते हैं कि तुम्हारा असल गीत तो यह है कि तुम कितने निर्दोष थे-निष्पाप थे, यह क्या करने लगे हो तुम।

हिम्बा लोग गलती पर पश्चाताप कराने को प्रमुखता देते हैं, इंसान को उसकी इनोसेंस भूलने नहीं देते, पुनः स्मरण कराते हैं। 


और जब वो मनुष्य मरता है, तब भी-जो लोग उसका गीत जानते हैं, वो सब उसे दफनाते वक़्त भी वही गीत गाते हैं।

आखिरी बार।

वही गीत जो उसकी 'माँ' ने गुनगुनाया था, उसके आने से भी बहुत पहले।


साभार- अपूर्व प्रताप सिंह।

गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

बेला और कल्याणी" का बलिदान

 "बेला और कल्याणी"*/ भारत की दो वीरांगना बेटियाँ बेला और कल्याणी कौन थी ....?*

नई पीढ़ी को इनके नाम भी शायद 🤔 नहीं मालूम ? तो सुनो or जानो ✌️✌️🙏-


..


*बेला तो पृथ्वीराज चौहान की बेटी थी और कल्याणी जयचंद की पौत्री।*


*मुहम्मद गोरी* हमारे देश को लूटकर जब अपने वतन गया तो *गजनी के सर्वोच्च काजी व गोरी के गुरु निजामुल्क* ने मोहम्मद गौरी का अपने महल में स्वागत करते हुए कहा। "आओ गौरी आओ! हमें तुम पर नाज है कि तुमने हिन्दुस्तान पर फतह करके इस्लाम का नाम रोशन किया है। कहो सोने की चिड़िया हिन्दुस्तान के कितने पर कतर कर लाए हो।’’ 

‘‘काजी साहब ! 

मैं हिन्दुस्तान से सत्तर करोड़ दिरहम मूल्य के सोने के सिक्के, चार सौ मन सोना और चांदी, इसके अतिरिक्त मूल्यवान आभूषणों, मोतियों, हीरा, पन्ना, जरीदार वस्त्रों और ढाके की मल-मल की लूट-खसोट कर भारत से गजनी की सेवा में लाया हूं।’’

‘‘बहुत अच्छा ! लेकिन वहां के लोगों को कुछ दीन-ईमान का पाठ पढ़ाया कि नहीं"?

‘‘बहुत से लोग इस्लाम में दीक्षित हो गए हैं’’!

"और बंदियों का क्या किया"?

"बंदियों को गुलाम बनाकर गजनी लाया गया है। अब तो गजनी में बंदियों की सरेआम बिक्री की जा रही है। एक-एक गुलाम दो-दो या तीन-तीन दिरहम में बिक रहा है"।

‘‘हिन्दुस्तान के काफिरो के मंदिरों का क्या किया’’?

‘‘मंदिरों को लूटकर 17 हजार सोने और चांदी की मूर्तियां लायी गयी हैं, दो हजार से अधिक कीमती पत्थरों की मूर्तियां और शिवलिंग भी लाए गये हैं और बहुत से पूजा स्थलों को नष्ट भृष्ट कर आग से जलाकर जमीदोज कर दिया गया है"।


फिर थोड़ा रुककर काजी ने कहा, *‘‘लेकिन हमारे लिए भी कोई खास तोहफा लाए हो या नहीं"?’*

*‘‘लाया हूं ना काजी साहब जीती जागती गजल लाया हूं !’’*


*‘‘क्या"*....?


*‘‘जन्नत की हूरों से भी सुंदर जयचंद की पौत्री कल्याणी और पृथ्वीराज चौहान की पुत्री बेला’’*


*"तो फिर देर किस बात की है"*?

*"बस आपके इशारेभर की"*.!!


*काजी की इजाजत पाते ही शाहबुद्दीन गौरी ने "कल्याणी और बेला" को काजी के हरम में पहुंचा दिया।* कल्याणी और बेला की अद्भुत सुंदरता को देखकर काजी अचम्भे में आ गया। उसे लगा कि स्वर्ग से अप्सराएं आ गयी हैं। उसने दोनों राजकुमारियों से विवाह का प्रस्ताव रखा तो बेला बोली- *‘‘काजी साहब! आपकी बेगमें बनना तो हमारी खुशकिस्मती होगी, लेकिन हमारी दो शर्तें हैं’’*??


*‘‘कहो..कहो.. क्या शर्तें हैं तुम्हारी! तुम जैसी हूरों के लिए तो मैं कोई भी शर्त मानने के लिए तैयार हूं"*।


*‘‘पहली शर्त तो यह है कि शादी होने तक हमें अपवित्र न किया जाए? क्या आपको मंजूर है*?


*"हमें मंजूर है! दूसरी शर्त का बखान करो।’’*


*‘‘हमारे यहां प्रथा है कि विवाह के कपड़े लड़की के यहां से आते हैं। अतः दूल्हे का जोड़ा और अपने जोड़े की रकम हम भारत भूमि से मंगवाना चाहती हैं।’’*


*"मुझे तुम्हारी दोनों शर्तें मंजूर हैं"*।


और फिर? बेला और कल्याणी ने कवि चंद के नाम एक रहस्यमयी खत लिखकर भारत भूमि से शादी का जोड़ा मंगवा लिया। काजी के साथ उनके निकाह का दिन निश्चित हो गया। रहमत झील के किनारे बनाये गए नए महल में विवाह की तैयारी शुरू हुई। कवि चंद द्वारा भेजे गये कपड़े पहनकर काजी साहब विवाह मंडप में आए। कल्याणी और बेला ने भी काजी द्वारा दिये गये कपड़े पहन रखे थे। शादी को देखने के लिए बाहर जनता की भीड़ इकट्ठी हो गयी थी। 


तभी बेला ने काजी से कहा- *‘‘हम कलमा और निकाह पढ़ने से पहले जनता को झरोखे से दर्शन देना चाहती हैं। क्योंकि? विवाह से पहले जनता को दर्शन देने की हमारे यहां प्रथा है और फिर गजनी वालों को भी तो पता चले कि आप बुढ़ापे में जन्नत की सबसे सुंदर हूरों से शादी रचा रहे हैं। शादी के बाद तो हमें जीवन भर बुरका पहनना ही है। तब हमारी सुंदरता का होना न के बराबर ही होगा। नकाब में छिपी हुई सुंदरता भला तब किस काम की.?*


*‘‘हां..हां..क्यों नहीं।’’* 


काजी ने उत्तर दिया और कल्याणी और बेला के साथ राजमहल के कंगूरे पर गया, लेकिन वहां तक पहुंचते-पहुंचते ही काजी के दाहिने कंधे से आग की लपटें निकलने लगी, क्योंकि कविचंद ने बेला और कल्याणी का रहस्यमयी पत्र समझकर बड़े तीक्ष्ण विष में सने हुए कपड़े भेजे थे। काजी साहब विष की ज्वाला से पागलों की तरह इधर-उधर भागने लगा, तब बेला ने उससे कहा- *‘‘तुमने ही गौरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए उकसाया था ना? हमने तुझे मार कर अपने देश को लूटने का बदला ले लिया है। हम हिन्दू कुमारियां हैं समझे, किसमें इतना साहस है जो जीते जी हमारे शरीर को छू भी सकें"।*


इतना कहकर उन दोनों बालिकाओं ने महल की छत के बिल्कुल किनारे खड़ी होकर एक-दूसरी की छाती में विष बुझी कटार भोंक दी और उनकी प्राणहीन देह उस उंची छत से नीचे लुढ़क गई। 

पागलों की तरह इधर-उधर भागता हुआ काजी भी जल कर तड़प-तड़प कर भस्म हो गया।


भारत की इन दोनों बहादुर बेटियों ने विदेशी धरती पर, पराधीन रहते हुए भी बलिदान की जिस गाथा का निर्माण किया, वह गर्व करने योग्य है।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🙏🙏🙏🙏✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️🙏🙏🙏🙏


*पर शायद हम लोगों को यह पता ही नहीं है,* 


कसूर आपका या हमारा भी नहीं है। 

हमें वामपंथियों द्वारा लिख झूठा इतिहास पढ़ाया गया है, *किंतु, अब तो यह जानकारी सभी तक पहुंचा दीजिए।*

🇮🇳 वंदेमातरम🇮🇳

डॉन को चूहा बनाने की कार्रवाई चालू

 *सीएम योगी ने माफिया मुख्तार के अभेद्य किले को ढहाया, अब जड़ खोदने की तैयारी*



*यूपी पुलिस की कार्यवाही बनी मिसाल, मुख्तार और उसके गिरोह की 192 करोड़ छह लाख 22 हजार की संपत्ति जब्त, 41 करोड़ से ज्यादा की सालाना अवैध आय भी कराया बंद*


*गैंग के कुख्यात 96 आरोपियों की गिरफ्तारी, 75 अपराधियों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही, 72 शस्त्र लाइसेंस निलंबित और निरस्त किए गए*


*पीडब्ल्यूडी और कोयला के सात सहयोगी ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा, शस्त्र लाईसेंस निलम्बित, छह अन्य ठेकेदारों का चरित्र प्रमाण पत्र निरस्त*


*छह अप्रैल, लखनऊ।* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माफिया मुख्तार अंसारी के अभेद्य किले को ढहा दिया है और अब जड़ खोदने की तैयारी है। यही कारण है कि मुख्तार को यूपी आने में डर लग रहा था। माफिया मुख्तार अंसारी और उसके सहयोगियों के खिलाफ यूपी पुलिस ने ऐसी कड़ी कार्यवाही की है, जो अपने आप में मिसाल है। माफिया और उसके सहयोगियों के कब्जे से सरकारी जमीन खाली कराने, ध्वस्तीकरण, जब्त संपत्ति की कीमत करीब 192 करोड़ छह लाख 22 हजार रुपए है। 41 करोड़ की सालाना अवैध आय को बंद भी कराया है। पुलिस ने गिरोह के 96 सदस्यों की गिरफ्तार किया है और 75 अपराधियों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही भी की है। 72 शस्त्र लाइसेंस निरस्त और निलंबित किए गए हैं। इसके अलावा सात सहयोगी ठेकेदारों (पीडब्ल्यूडी और कोयला) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शस्त्र लाईसेंस निलम्बित किया है और छह अन्य ठेकेदारों का चरित्र प्रमाण पत्र निरस्त किया है। गुंडा एक्ट के तहत 12 अपराधियों को जिला बदर किया गया है।

गाजीपुर जिले के थाना युसूफपुर मोहम्मदाबाद निवासी माफिया मुख्तार अंसारी पंजाब की रोपड़ जेल में बंद है और कोर्ट के आदेश पर यूपी पुलिस एक मुकदमे में सुनवाई के सिलसिले में यूपी लाने के लिए पहुंची है, लेकिन राजनीतिक कारणों से उसकी आमदगी नहीं हो पा रही है। पुलिस ने माफिया की पत्नी अफसा अंसारी और दो साले सरजील रजा, अनवर शहजाद के खिलाफ गाजीपुर में कुर्क की गई जमीन पर अवैध कब्जा करने पर मुकदमा किया है। कब्जा मुक्त जमीन की कीमत करीब 18 लाख है और क्षतिपूर्ति के रूप में कुल 26,43,600 रुपए की वसूली की जा रही है। पुलिस ने माफिया की पत्नी और बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी सहित 12 लोगों के खिलाफ जालसाजी कर पट्टे की जमीन हड़प कर होटल बनाने पर मुकदमा किया है। साथ ही पत्नी और साले के खिलाफ गैंगेस्टर में भी मुकदमा किया है। इनके कब्जे से पुलिस ने करीब 2.75 करोड़ की जमीन खाली कराई है।


*गाजीपुर और आजमगढ़ से बने 94 शस्त्र लाइसेंस*

पुलिस ने माफिया मुख्तार के परिवारीजनों और सहयोगियों के गाजीपुर जिले से 84 और आजमगढ़ से 10 कुल 94 शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए हैं। अब तक 85 शस्त्र निलंबित और 53 शस्त्र निरस्त कराते हुए 71 शस्त्रों को जमा कराया है। साथ ही पुलिस ने गलत नाम, पते पर जारी चार लाइसेंस निरस्त कराते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गैंग के हार्डकोर मेम्बर मेराज, इरशाद और अब्दुल कलाम का शस्त्र लाइसेंस निलम्बित कर उसके खिलाफ मुकदमा किया है।


*दबिश में मिले वायरलेस सेट, छह बैट्री, एक बुलेट प्रूफ फार्च्यूनर कार*

लखनऊ पुलिस ने माफिया मुख्तार अंसारी के निकट सहयोगी हरविंदर सिंह उर्फ जुगनू की दो करोड़ 31 लाख 46 हजार की चल अचल संपत्ति को जब्त किया है। पुलिस ने डालीबाग में मुख्तार के 25-25 हजार के ईनामी दो बेटों अब्बास और उमर अंसारी के अवैध रूप से बने दो टावर को जमीदोज कर खाली कराया है, जिसकी कीमत पांच करोड़ है। पुलिस ने अब्बास अंसारी पर शूटिंग के सर्टिफिकेट पर गलत तरीके से शस्त्र और कारतूस लेकर लखनऊ से दिल्ली के पते पर स्थानांतरित कराने को लेकर महानगर में मुकदमा किया है। इसके अलावा गाजीपुर जिले में पिछले साल सहयोगी आजम कादरी के अवैध सम्मे हुसैनी हास्पिटल को ध्वस्त किया है, इसकी कीमत 61 करोड़ 18 लाख है। पुलिस ने माफिया के अन्य सहयोगियों के ठिकानों पर दबिश में मोबाइल, पांच वायरलेस सेट, छह बैट्री, एक बुलेट प्रूफ फार्च्यूनर कार, तीन अवैध असलहे और 24 टिफिन बरामद किए हैं। 


*दो करोड़ 40 लाख की कीमत का अवैध स्लाटर हाउस ध्वस्त*

पुलिस ने अवैध बूचड़खाना, स्लाटर हाउस चलाने के मामले में 26 आरोपियों को दो दर्जन पशु और आठ कुंतल मांस सहित गिरफ्तार कर जेल भेजा है। साथ ही आठ अभियुक्तों के खिलाफ गैगेंस्टर एक्ट में करीब 2.5 करोड़ की अवैध वार्षिक आय को बन्द कराया है। अवैध स्लाटर हाउस को ध्वस्त किया है, जिसकी कीमत करीब दो करोड़ 40 लाख है, जिससे माफिया की करीब 3 करोड़ 60 लाख रुपए की अवैध वार्षिक आय बंद हुई है। इसके अलावा पुलिस ने पार्किंग ठेके की आड़ में अवैध वसूली को लेकर चार मुकदमे दर्ज कर 13 आरोपियों को जेल भेजा है और गैंगेस्टर एक्ट की कार्यवाही करते हुए 4.5 करोड की वार्षिक आय बन्द कराई है।


*मछली के अवैध कारोबार में लिप्त 26 गुर्गे पहुंचे जेल*

पुलिस ने माफिया मुख्तार अंसारी के संरक्षण में मछली के अवैध कारोबार में लिप्त उसके 26 गुर्गों मऊ जिले में आठ, वाराणसी में सात, भदोही में आठ, जौनपुर में एक, चंदौली में दो को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। जिनके कब्जे से पुलिस ने करीब 90 लाख की प्रतिबन्धित मछली, चार ट्रक, एक इनोवा कार, तीन पिकप जीप और छह अन्य वाहन बरामद किए हैं। इसके अलावा पुलिस ने मगई नदी पर मछली पालन के लिए करीब 16 लाख से बने पुल को ध्वस्त कर कब्जे में ली गई 30 लाख कीमत की भूमि को मुक्त कराते हुए बुलेरो जीप जब्त की, जिससे आरोपी को 70 लाख वार्षिक आय का नुकसान हुआ। सहयोगी पारस सोनकर को पुलिस ने जेल भेजा और 8.17 करोड़ की संपत्ति जब्त की। जबकि पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ गैगेंस्टर एक्ट में 33 करोड़ की वार्षिक अवैध आय को बंद कराया।


*अवैध कोयला कारोबार से लेकर एयरपोर्ट के लिए आवंटित भूमि पर भी कब्जा*

पुलिस ने अवैध कोयला कारोबार में लिप्त माफिया मुख्तार गैंग के त्रिदेव ग्रुप के मालिक उमेश सिंह की 6.5 करोड की संपत्ति मऊ में जब्त की। इसके अलावा मालिक पंकज सिंह का शस्त्र जब्त करते हुए लाइसेंस निलम्बित कराया। शॉपिंग मॉल कुर्क होने से 12 लाख की वार्षिक आय बंद हुई है। पुलिस ने सहयोगी भीम सिंह आदि से एयरपोर्ट के लिए आवंटित 27.5 करोड़ की 50 बीघे जमीन से कब्जा हटवाते हुए तीन हाट मिक्स प्लांट ध्वस्त कर करीब नौ करोड़ रुपए की मशीनें सीज कीं, जिससे माफिया को करीब 72 लाख वार्षिक आय का नुकसान हुआ है। 


*मुठभेड़ में शूटर ढेर, तीन और सहयोगी गिरफ्तार*

पुलिस ने माफिया मुख्तार के सहयोगी एक लाख के ईनामी शूटर हरिकेश यादव को मुठभेड़ में मार गिराया और 25-25 हजार के तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया। इस गैंग के 24 अपराधियों को गिरफ्तार किया और 23 के खिलाफ गैंगेस्टर की कार्यवाही की। शूटर अनुज कनौजिया की सम्पत्ति कुर्क की गई और अंकुर राय के खिलाफ मुकदमा किया गया। किफायतुल्लाह की 60 लाख 70 हजार की सम्पत्ति जब्त की गई। सहयोगी उमेश सिंह का 35 लाख 23 हजार का भूखण्ड और रजनीश कुमार का 39 लाख 21 हजार की सम्पत्ति जब्त की गई।


*गुर्गों की तीन करोड़ 29 लाख रुपए की सम्पत्ति जब्त*

पुलिस ने शूटर बृजेश सोनकर को गिरफ्तार कर 60 लाख की संपत्ति जब्त की। सुरेश सिंह, अंकित राय, प्रभात राय, मनोज राय, हाजिम मुख्तार, संजय सागर को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इन पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही करते हुए शस्त्र निलम्बन की कार्यवाही की।  जब्त संपत्तियों पर से कब्जा हटवाया और मुकदमा दर्ज किया। सुरेश सिंह वसूली गैंग डी-32 का सदस्य है और जिले में वसूली माफिया के रूप में चिह्नित है। पुलिस ने उसकी अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति में 12 बसें, दो ट्रक, चार कार, छह बाइक जब्त की। पुलिस ने करीब तीन करोड़ 29 लाख रुपए की सम्पत्ति जब्त की, जिससे तीन करोड़ 20 लाख की वार्षिक आय बंद हुई।


*इन्हें किया गया जिला बदर*

पुलिस ने गिरोह के 12 अपराधियों अल्तमश, अनीस, मोहर सिंह, जुल्फेकार कुरैशी, तारिक, मो. सलमान, आमिर हमजा, मो. तलहा, जावेद आरजू, मो. हाशिम, राशिद और अनुज कनौजिया को छह माह के लिए जिला बदर किया है और 10 अपराधियों के खिलाफ गुण्डा एक्ट के तहत कार्यवाही की है।