सोमवार, 30 दिसंबर 2024

IIMC हिंदी पहले बैच 1987-88 के लिए

 अनामी शरण बबल 

🙏🏽🌹🌹

दोस्तों 🙏🏽

साल नया हैं 

मगर 

हम सब पुराने 

आधे अधूरे

 कच्चे - पक्के 

भले बुरे 

ऊपर से गोरे 

भीतर से काले 

कहने को एक 

मगर मन से अनेको अनेक 

दिखने में शांत भला सुशील सरल 

मगर मन से 

जटिल कुरूप 

फिर भी एक हैं 

परिवार हैं

 87-88 के लाल हैं 

मीडिया के 

काल अकाल  हैं 

खुद पे निसार निहाल हैं 

कित्ते खुश हैं 😀 

भाई नया साल हैं 

मन के कंगाल हैं

 फिर भी आ ही गया 

2025🌹साल 

अब बस करता हूँ 

अन्यथा 

खुल गयी जुबान 

तो 

नया साल जाय भाड़ में 

दंगल करके दम दिखा ✌🏽

भाई सबको सलाम 

लाख झगड़ ले 

फिर भी  

रहे एक ही 

भले न मिले कभी 

मग़र लगे एक ही  

सालों भाग कर जाओगे कहाँ 

अपना घर उजाड़ विरान ही सही 

मगर घर का पता 

87-87 ही हैं  & रहेगा 

यही पहचान ठिकाना हैं  

यही 25-26 भूले बिसरे भगोड़े 

भागते भटकते  लटकते भी 

सहोदार हैं 

और 

रहेंगे 

सबकी सुनेंगे सहेंगे 

भले ना मिले 

ना मिलने की चाह हों मगर 

आपस में मिल देख बतिया 

लगता हैं कि 

हम सब वही हैं 

 jnu की शांत झाड़ियों पहाड़ियों के 

शेर & मोर  हैं 

भले ही न मिले 

कभी या 

यदा -कदा 

फिर भी एक दूजे के चितचोर हैं 

लाख शिकायतों 

के बाद भी एक हैं परिवार हैं 

सब 

एक दूसरे के करीब हैं 

यही नसीब हैं 

ज़ो 

बदलेगा न बदलना  हैं 

हम बर्तन एक टोकरी के 

एक में ही एक दूजे को 

बजते बजाते रहना हैं 🌹❤️❤️❤️🌹

नये साल को आने दो 

साला 

तू तो देखते ही देखते 

36-37 बार बदल गया 

पर कभी देखा 

तूने 

87-88 के 25-26 

सितारों को बदलते? 

शदी बदली 

हम सब के चेहरे बदले

 काया माया साया बदला 

पर देखा कभी तूने हम सब को कभी 

अलग होते बता बदलन 

तू नया साल 

बदचलन हैं 

रोज बदलता हैं 

अपना रंग मिजाज चेहरा 

मगर 

87-88 के हम सब 

अंगद के पाँव हैं 

ट्स से मस नहीं हों सकते हैं रंग रूप भाषा काया  माँ बाप अलग हों 

1987-88 का ऐसा 

बंधन❤️गठबंधन 😀 हैं 

जिंदगी के साथ भी

🌹और ❤️

जिंदगी के बाद भी 

हम सहोदर 

एक थे एक हैं 

और सदा सदा 

एक ही रहेंगे 🙏🏽

🙏🏽🌹❤️💐✌🏽

❤️1987-88 ❤️ के

 25-26 सितारों को सलाम

 🙏🏽❤️🌹👍🏽😀✌🏽


शनिवार, 28 दिसंबर 2024

आलोक के बगैर आलोक का 64वाँ जन्मदिन / सुप्रिया रॉय तोमर

 ❤️ स्मृति:आलोक तोमर🌹


तुम्हारे बगैर तुम्हारा 64वां जन्मदिन / सुप्रिया रॉय 


             जन्म:27 दिसम्बर,1960

             मृत्यु:20 मार्च,2011


कल 27 दिसम्बर था और पूरे दिन सिर्फ और सिर्फ तुम याद आते रहे प्रिय आलोक।तुम्हें मेरी यादों में आना ही था।यह दिसम्बर है,साल का अंतिम महीना।उस महीने के भी आखिरी दिन।यह दिन इसलिए भी आते और रुलाते हैं कि जिंदगी के कठोरतम दिनों में जब 20 दिसम्बर ( मेरा जन्मदिन) आता तो तब तुम अकेले ही होते जो मेरी तन्हाई को मामूली से उत्सव में बदल देते।यह उत्सव मेरे सबलेटिंग वाले सरकारी घर में मनता या फिर जनसत्ता के दफ्तर के बगलवाले ढाबे में।उसमें एक और चेहरा जुड़ जाता वह था दिनेश तिवारी का।अब तुम दोनों ही नहीं हो।मेरे कातर क्षणों को सहलाने वाला कोई नहीं।

        20 के बाद हम बेसब्री से 27 का इंतजार करते।यह तुम्हारा दिन था।तुम्हारा जन्मदिन।जो धीरे धीरे बड़ा होता रहा तुम्हारी बढ़ती हुई लोकप्रियता के सँग-साथ।

       अब न 20 में रौनक बची है,न 27 में।तुम्हें गुजरे पूरे 13 साल हो गये।यह 13 साल मुझे तेरह सौ साल लग रहे हैं न जाने क्यों?खूब डराता है अकेलापन।ग्वालियर आज भी,अब भी तुम्हारी यादों से महकता है।मेरी नयी किताब 'मेरा आकाश,मेरे धूमकेतु'(प्रभात प्रकाशन) का लोकार्पण देव श्रीमाली के संयोजकत्व में ग्वालियर में था।यह संस्मरणों की किताब है।इसमें तुम पर भी 42 पेज हैं।किताब के इस उत्सव में तुम किताब से निकलकर सभागार में उतर आये।देर तक  छाये रहे।मेरा,तुम्हारा अतीत अब दंत कथा सा बन गया है ।जगदीश तोमर हो या शैवाल सत्यार्थी।घनश्याम भारती हो या देव श्रीमाली या प्रमोद भार्गव।सभी के भाषणों का तुम हिस्सा थे।होना ही था।

        तब मेरे पास आंसुओं के सिवा कुछ नहीं था।मैं मंच से उठकर कई बार कोने में जा कर आँसू पोछ आया था।अब मेरी नियति भी यही है।

        उम्र का 64वां जन्मदिन तुम जहाँ भी हो,उसे मनाना उत्सव की ही तरह।यही हमारी पहचान है।

        आलोक तोमर कभी अपनी पहचान नहीं खोते-हर वक्त इसे याद रखना।

        नहीं कह सकता अलविदा क्योंकि तुम मुझ से विदा हो ही नहीं सकते।

    यह मेरा अटूट विश्वास है।



गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

TMU में 29 दिसंबर को होगा मीत ब्रदर्स & कुमार विश्वास का जलवा

 

मीत ब्रदर्स के संग झूमेंगे टीएमयू के हजारों स्टुडेंट्स


TMU यानी तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में यूपी के उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक, वित्त एवम् संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र चौधरी बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर करेंगे शिरकत 


ख़ास बातें


दीक्षांत समारोह में जेपी नड्डा का दो बजे होगा मंगल आगमन

कन्वोकेशन के लिए कैंपस में सभी तैयारियां अंतिम चरण में  

शैक्षणिक शोभायात्रा का समारोह स्थल तक हुआ पूर्व रिहर्सल 

छठे कन्वोकेशन में सीएम श्री योगी आदित्यनाथ थे मुख्य अतिथि 




बेबीडॉल मैं सोने दी... सरीखे नामचीन गाने को अपने सुर और साज देने वाले मीत ब्रदर्स 29 दिसंबर को TMU तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद की रॉक स्टार नाइट में अपना जादू बिखेरेंगे।

 उल्लेखनीय है, बालीवुड में मनमीत सिंह और हरमीत सिंह ब्रादर्स की जोड़ी मीत ब्रदर्स के नाम से मशहूर है। ये जोड़ी तीन दर्जन से अधिक फिल्मों में अपना जलवा दिखा चुकी है।

कोई दीवाना कहता है... सरीखे गीत से अपनी शिनाख्त रखने वाले युगकवि डॉ. कुमार विश्वास के संग-संग देश के मशहूर कवि और शायर 30 दिसंबर को अपनी महफिल सजाएंगे। दूसरी ओर सातवें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा का भी कार्यक्रम मिल गया है। श्री नड्डा का 28 दिसंबर को करीब दो बजे टीएमयू के कैंपस में आगमन होगा। 

समारोह में यूपी के उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक, वित्त एवम् संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र चौधरी बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर शिरकत करेंगे। यह जानकारी टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने दी। जीवीसी श्री मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन ने बताया, 07वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। भव्य और नव्य मंच को अंतिम रूप दिया जा रहा है। स्पेशल अतिथियों के लिए दोनों हेलीपैड भी तैयार हैं।

 समारोह की तैयारियों पर वीसी प्रो. वीके जैन, निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, डीन प्रो. मंजुला जैन, निदेशक स्टुडेंट्स वेलफेयर प्रो.एमपी सिंह भी पैनी नज़र रखे हुए हैं।


शैक्षणिक शोभायात्रा का बीच पवेलियन से दीक्षांत समारोह स्थल तक पूर्व रिहर्सल हुआ, जिसमें डीन प्रो. मंजुला जैन, प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. प्रदीप अग्रवाल, प्रो. प्रदीप तांगडे, प्रो. एसपी सुभाषिनी, मेडिकल कॉलेज की प्रो. सीमा अवस्थी के अलावा सभी विभागों के विभागाध्यक्ष शामिल हुए। 

28 दिसंबर को दीक्षांत समारोह के दिन शोभायात्रा का नेतृत्व रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा करेंगे। इस शैक्षणिक शोभायात्रा में कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन, वीसी प्रो. वीके जैन की भी उल्लेखनीय मौजूदगी रहेगी। कुलपति यूनिवर्सिटी की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। दीक्षांत समारोह की प्रोसिडिंग रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा करेंगे। 

उल्लेखनीय है, 06वें दीक्षांत समारोह में यूपी के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की थी। रॉक ऑन नाइट में पंजाबी एंड इंडी-पॉप सिंगर गुरू रंधावा यूनिवर्सिटी के हजारों-हजार छात्रों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ गए थे। दीक्षांत समारोह के क्रम में अंतिम दिन प्रेम गीतों के राजकुमार कवि डॉ. विष्णु सक्सेना के प्रेम गीतों पर देर रात तक युवा झूमते नज़र आए। 

नैक से ए ग्रेड दर्जा प्राप्त तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के हजारों-हजार छात्रों को देश की जानी-मानी हस्तियां अब तक अपने प्रकाश पुंज से प्रकाशित कर चुकी हैं। श्री नड्डा दीक्षांत समारोह में 2,500 पासआउट स्टुडेंट्स को डिग्री से अलंकृत करेंगे। समारोह में टॉप थ्री स्टुडेंट्स में 51 को गोल्ड, 50 को सिल्वर और 51 को ब्रोंज यानी कुल 152 मेडल्स से देकर सम्मानित किया जाएगा।

गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

1971 के बाद भारतीय मीडिया और पत्रकारिता में आए बदलाव / डॉ. रामजीलाल जांगिड

 

  



भारतीय पत्रकारिता 



वर्ष 1971 से 1978 तक भारत की जनसंचार की दुनिया में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। इस अवधि में पत्रकारिता व जन संचार की शिक्षा, आकाशवाणी, दूरदर्शन और संवाद समितियाँ को लेकर काफी निर्णय लिये गए। वर्ष 1971 में भारतीय पत्रकारिता शिक्षा संघ की स्थापना हुई।

1974 में आकाशवाणी ने वार्षिक पुरस्कार शुरू किया। 1975 में चारों संवाद समितियों को मिला दिया गया। 'समाचार' संवाद समिति बनी। 1976 में आकाशवाणी से दूरदर्शन हट गया। दो इकाइयां बन गईं। 1977 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पहली बार पत्रकारिता और जनसंचार की शिक्षा को लेकर एक पैनल बनाया। 1977 में ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व की जन संचार प्रणाली पर विचार के लिए मैकब्राइड आयोग बनाया। इसी समय यह महसूस किया जाने लगा कि निर्गुट देशों को अपनी अलग संवाद समिति बनानी चाहिए क्योंकि पश्चिमी देशों की संवाद समितियां उनकी छवि सही पेश नहीं करती हैं।

2 जुलाई 1977 को पहली राष्ट्रीय जनसंचार शिक्षा संगोष्ठी हुई। 4 से 15 अक्टूबर 1977 तक विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता और जन संचार के शिक्षकों को और जागरूक बनाने के लिए कार्यशाला की गई। 23 नवम्बर 1977 को "प्रसारभारती" का गठन हुआ। 1978 में दूसरे प्रेस आयोग ने अपनी रपट दे दी।

इसी वर्ष हिन्दुस्तान टाइ‌म्स के सम्पादक श्री बी.जी. वर्गीस की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी सिफारिशें दे दीं। 1978 में 'समाचार' संवाद समिति चार इकाइयों में फिर बंट गई।

       वर्ष 1972 का भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' की कृति 'उर्वशी' को दिया गया। यह पुरस्कार एक लाख रु. का था। 15 मई 1973 को संस्थान के प्रोफेसर सी. आर. एकम्बरम का स्कूटर दुर्घटना में देहांत हो गया। वह रेडियो, टी. वी. और मौखिक संचार पढ़ाते थे। भारतीय जनसंचार संस्थान और प्रेस इंस्टिट्‌यूट ऑफ इंडिया ने मिलकर "भारत में सिनेमा के 75 वर्ष" पर एक प्रदर्शनी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 18 से 22 दिसम्बर 1973 तक की।

          संस्थान के सलाहकार श्री राल्फ ओटो नफज़िगर का 25 सितम्बर 1973 को देहांत हो गया। वह विस्कोन्सिन विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष थे। वह अगस्त 1967 से अप्रैल 1968 तक संस्थान से जुड़े रहे। विकासशील देशों के लिए 1974-75 सत्र के स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्‌यक्रम में 12 देशों के 18  प्रशिक्षु और 15 भारतीय थे।


डॉ. रामजीलाल जांगिड के दो लेख

 

   (10/12/2024)


*मोबाइल के पैर पसारने से खतरे बढ़े*


अमरीका की मोटोरोला कम्पनी के इंजीनियर Martin Cooper ने मोबाइल फोन बनाकर 3 अप्रैल 1973 को पहली बार उसके जरिए बात की। इसे बाजार में उतारने में 11 साल लग गए। 1984 में इस कम्पनी ने Motorola Dyna TAC 8000X बाजार में उतारा। भारत में महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)ने Mobile Radio Phone Service दिल्ली में 1 जनवरी 1987 से शुरू की थी। वर्ष 1994 में 22 अगस्त से भारत में मोबाइल सेवा शुरू कर दी गई। उस समय मोबाईल हैंडसेट 45000 रु में मिल रहा था और प्रति मिनट सेवा 17 रु. में उपलब्ध थी। 

31 जुलाई 1995 को पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री ज्योति बसु ने मोबाइल हैंडसेट से तत्कालीन संचार मंत्री श्री सुखराम से पहली बार बात की। अगले वर्ष (1996) नोकिया कम्पनी ने Nokia 8110 बाज़ार में उतारा। केरल से सबसे पहले मोबाइल पर 17 सितम्बर 1996 को भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले साहित्यकार थाकाजी शिव शंकर पिल्लई ने बात की थी।

इस समय भारत में मोबाइल हैंडसेट के 1 अरब 18 करोड़ खाते हैं। 60 करोड़ (600million) लोगों के पास स्मार्टफोन है। इंटरनेट का उपयोग 70 करोड़ (700million) उपभोक्ता कर रहे हैं। ज्यों ज्यों मोबाइल हैंडसेट लोगों के हाथों में आ रहे हैं, त्यों त्यों हिंसा, धोखाधड़ी, आतंकी घटनाएं और फिरौती की धमकियां बढ़ती जा रही हैं। इसे देखते हुए रिजर्व बैंक आफ इंडिया और कई मंत्रालयों ने नागरिकों को सावधान करने के लिए अभियान चलाए हैं। mobile के कुछ लाभ भी हुए हैं। प्रधानमंत्री जनधन आधार योजना में मोबाइल से ग्राहकों का बैंकों से जुड़ाव वर्ष 215 की तुलना में चार गुना बढ़ गया है। इनमें 55.6 प्रतिशत बैंक खाते महिलाओं के हैं। इससे लाभार्थियों के खातों में नकद राशि तुरंत जमा हो जाती है। मगर जो लोग मोबाइल चलाना नहीं जानते हैं, उनके बैंक खातों से जमा पूंजी तुरंत धोखाधड़ी से निकल भी जाती है। डिजिटल गिरफ्तारी डरा धमका कर पैसे ऐंठने का नया तरीका बन गया है। वर्ष 2021 की NielsenReport के अनुसार शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा बैंक खाते थे। पीड़ित उपभोक्ताओं को कानूनी सुरक्षा Information Technology Act 2000 और भारतीय न्याय संहिता 2024 में दी गई है। National Cyber Crime Reporting Portal भी बनाया गया है। मगर अभी भारत में Digital Safty Awarenes फैलाने की बहुत जरूरत है।


2

 

   (11/12/2024)



*अंग्रेजी प्रकाशनों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय भाषाओं के अखबार*


भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय भारतीय जन संचार संस्थान को अपने प्रशिशुओं को अलग अलग कामों के लिए प्रशिक्षण देने का दायित्व सौंपते रहे हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने कुछ प्रशिक्षुओं को छह मास के लिए जापानी भाषा सिखाने के लिए संस्थान में भेजा, जिसमे वे जापान में होने वाले समारोह में भारत की छवि प्रभावी ढंग से रख सकें। इसका उद्‌घाटन भारत में जापानी राजदूत श्री अतुसुशी उयामा ने 22 फरवरी 1971 को किया था।

विदेश मंत्रालय ने 12 प्रशिक्षु 17 मई से 5 जून 1971 तक के लिए भेजे। जिससे वे मांट्रीयाल में भारत द्वारा लगाई जाने वाली प्रदर्शनी में कलाकार और गाइड के रूप में काम कर सकें।

कोलम्बो योजना के अंतर्गत विदेशी पत्रकारों को संस्थान में भेजा जाता है। विकासशील देशों के पत्रकारों को प्रशिक्षण देने वाले तीसरे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (1971-72 ) में दस देशों के 16 प्रशिक्षु और छह भारतीय प्रशिक्षु थे। चौथे पाठ्यक्रम (1972-73) में 11 देशों के 24 प्रशिक्षु और पाँच भारतीय प्रशिक्षु थे। हर पाठ्यक्रम में देशों की संख्या बढ़ रही थी।

वर्ष 1971 में भारत के समाचारपत्रों की प्रसार संख्या पर नज़र डालने से पता चलता है कि बंगला दैनिक "आनंद बाजार पत्रिका" की लोकप्रियता 3, 08,376 की प्रसार संख्या पाने से देश भर में सबसे ज्यादा थी। 1970 में ही इसकी प्रसार संख्या सबसे ज्यादा (2,48, 517) हो गई थी। पत्रिकाओं की प्रसार संख्या की दृष्टि से तमिल पत्रिका 'कुमुदम' देश भर के दैनिकों से आगे (3,74, 373) थी। वह 1970 में ही देशभर के दैनिकों से आगे (3,48,628) निकल गई थी। कई जगहों से छपने वाले दैनिकों में अंग्रेजी दैनिक 'इंडियन एक्सप्रेस' सबसे आगे (4,62,009) था। इससे स्पष्ट है कि आज़ादी से पहले आगे रहने वाले अंग्रेजी दैनिकों और पत्रिकाओं से भारतीय भाषाओं के दैनिक तथा पत्रिकाएं आजादी के बाद प्रसार संख्या की दृष्टि से तेजी से आगे निकल गए थे।

जनवरी 1974 में प्रेस परिषद ने एक महत्वपूर्ण फैसला किया। उसने समाचार पत्रों को विज्ञापन और समाचार इस तरह से छापने को कहा कि वे अलग अलग दिखाए दें। प्रेस परिषद् ने विदेशी दूतावासों द्वारा छपवाए गए विज्ञापनों के नीचे उनके द्वारा किए गए भुगतान की राशि छापने का भी आदेश दिया ओर कहा कि दूतावासों से उसी दर से भुगतान लिया जाए, जिससे और लोग भुगतान करते थे।



शनिवार, 14 दिसंबर 2024

नहर सत्याग्रह आंदोलन

 अनिश्चितकालीन धरना 


अखिल भारतीय किसान सभा के द्वारा खेतड़ी चिड़ावा स्थित लाल चौक बस स्टैंड पर 2 जनवरी 2024 से 1994मे पांच राज्यों के बीच यमुना जल समझौता को लागू करवाने के लिए नहर सत्याग्रह आन्दोलन अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है इस धरने को एक जनवरी को साल पुर्ण हो रही है इस उपलक्ष में 1 जनवरी 2025 को 11बजे एक बड़ी सभा का आयोजन किया जा रहा है उक्त सभा में ग़ैर राजनैतिक तरिके से जन आन्दोलन का रूप देने के लिए झुंझुनूं जिले के प्रत्येक गांव व ढाणी से नहर के पानी के लिए जन जन का यह कर्तव्य बनता है कि लाल चौक पर पहुंच कर इस आन्दोलन को समर्थन दें।          इस पानी के संवेदनशील मुद्दे के लिए लाल चौक से पिछले दिनों एक महीने तक जिले के गावों में जन जाग्रति की अलख जगाई थी अब दुबारा लाल चौक से 15दिसम्बर को सुबह 11बजे से ज़िले के प्रत्येक गांव गांव ढाणी ढाणी में जाकर इसको जन आन्दोलन बनाने का काम करेंगे।


यह कोई ईके दुके लोगों का काम नहीं है सभी शेखावाटी के लोग मिलकर इस विरान होती धरा को ओर लोगों का जीवन बचा सकते हैं इसलिए हमारी आपसे हाथ जोड़ कर पुकार है कि कम से कम एक दिन के लिए ही केन्द्र सरकार व राज्य सरकार को बतादो कि हम हमारा हक लेना जानते हैं।

आपका अपना हितैषी

सामाजिक कार्यकर्ता व किसान सभा 

जिला उपाध्यक्ष

 बजरंग लाल बराला

 6376369832 

🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024

IIMC में क्या पढ़ाया जाता हैं? / डॉ. रामजीलाल जांगिड

 0812   (08/12/2024)


भारतीय जनसंचार संस्थान में क्या पढ़ाया जाता रहा है?


डॉ. रामजीलाल जांगिड 




भारतीय जन संचार संस्थान ने आज़ादी के बाद पत्रकारिता और जन संचार के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने भारत और 160 देशों के पत्रकारों तथा संचार कर्मियों को विकासशील देशों में विकास के लिए जन संचार की उपयोगिता के बारे में जागरूक किया है। इसके पहले विकासशील देशों के पत्रकार और पत्रकारिता की शिक्षा पाने के इच्छुक युवा तथा युवतियां इंग्लैंड एवं अमरीका के विश्वविद्यालयों में जाते थे किन्तु वहां के शिक्षक विकासशील देशों की समस्याओं से अनभिज्ञ थे। इसलिए उनकी शिक्षा का लाभ गरीबी और अशिक्षा से जूझ रहे देशों को नहीं मिल पाता था। इसलिए भारत ने विकासशील देशों के पत्रकारों के लिए भारतीय जनसंचार संस्थान की स्थापना करके एक विकल्प दिया। निर्गुट देशों के लिए संवाद समिति भारत में ही बनी।

भारतीय जन संचार संस्थान ने अप्रैल और मई 1969 में भारतीय उर्वरक निगम के अधिकारियों के लिए आयोजित

"Communication for Agricultural Inputs"

पाठ्यक्रम में जो विषय पढाए, उससे पता चल जाएगा कि इस संस्थान में क्या पढ़ाया गया ?  इस पाठ्यक्रम का उद्‌घाटन तत्कालीन खाद्य, कृषि, सामुदायिक विकास और सहकारिता मंत्री श्री जगजीवन राम ने किया था। इसके पाठ्यक्रम निदेशक थे प्रो. (डॉ.) ए.वी. षण्मुखम थे। पढ़ाये गए विषय थे :-

1. फिल्में और जन संचार

2. विदेशों में भारत की छवि कैसे बनाएं 

3. भारत में रंगमंच

आंदोलन 

4. विकासशील समाज में संचार के रास्ते में

आने वाली समस्याएं 

5. Cross Cultural

Communication 

6. विकासशील समाज में

पत्रकार की भूमिका 

7. इंग्लैड में सरकारी सूचना तंत्र

8. अमरीका में सरकारी सूचना तंत्र 

9. Agricuctural

Inputs 

10. कृषि के विकास की प्रक्रिया 

 11.  Functions

and Organisational Set up of the Agricultural

Information Units in the IADP districts

12. Green Revolution 

13. भारतीय उप महाद्वीप का ऐतिहासिक विकास- प्राचीन भारत 

14. भारतीय फिल्म

संस्थान। 

एक तरह से इसमें सभी आयामों से अवगत कराया गया। 27 प्रशिक्षुओं को तत्कालीन सूचना, प्रसारण और संचार मंत्री श्री सत्य नारायण सिन्हा ने समापन पर प्रमाणपत्र दिए। इन्हें 9 भारतीय और 5 विदेशी विशेषज्ञों ने सम्बोधित किया। इन प्रशिक्षुओं को न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण व शोध संस्थान के कार्यकारी निर्देशक श्री एस.ओ. एडेबो ने भी संबोधित किया। भारत के तत्कालीन सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री श्री इंद्र कुमार गुजराल ने भी इन प्रशिशुओं से बातचीत की। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि संस्थान ने प्रशिक्षण का स्तर ऊंचा रखने के लिए हर संभव प्रयास किया।

मंगलवार, 3 दिसंबर 2024

पत्रकारिता के शिक्षक की पारी का शुभारम्भ / रामजी लाल जांगिड़

 029   (29/11/2024)


*पत्रकारिता के शिक्षक के रूप में पारी की शुरुआत*


भाषण कला, स्वतंत्र पत्रकारिता, पत्रिका संपादन,

 लेखक के रूप में सम्मान,

 शोधकर्ता, दैनिक समाचारपत्र का सम्पादन, विज्ञापन कंपनी में अनुभव, आकाशवाणी और दूरदर्शन के प्रसारणों के अनुभव के बाद ईश्वर ने मेरे लिए पत्रकारिता तथा जन संचार में शिक्षक की भूमिका तय कर रखी थी। 26 जून 1979 को दैनिक 'हिन्दुस्तान' में ही भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली का विज्ञापन छपा। 'संस्थान को

हिन्दी पत्रकारिता के लिए रीडर की जरूरत है।'

अनिवार्य योग्यता स्नातकोत्तर उपाधि के साथ हिन्दी पत्रकारिता का दस वर्षों का अनुभव। वांछनीय योग्यता प्रकाशित कार्य। मेरे पास पी. एच. डी. की उपाधि और स्वतंत्र (फ्रीलांस) पत्रकार, पत्रिका सम्पादक, दैनिक समाचारपत्र के सम्पादन का बारह वर्षों का अनुभव मिलाकर हिन्दी पत्रकार के रूप में लगभग 22 वर्षों का अनुभव हो गया था। इसलिए मैंने ग्यारह सौ रूपये से सोलह सौ रू. के वेतनक्रम में चार वेतन वृद्धियां मांगते हुए 19 जुलाई 1979 को

अपना विवरण भेज दिया।

07 नवम्बर 1979 को तत्कालीन निदेशक स्वर्गीय

श्री एच. वाई. शारदा प्रसाद जी ने मुझे मिलने के लिए बुला लिया। इस संस्थान का निदेशक बनने के पहले वह प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के सूचना सलाहकार थे। वह विश्व भर में पत्रकारिता और जन

संचार के प्रभावशाली विशेषज्ञ के रूप में नाम कमा चुके थे। वह बहुत ही नम्र, अंग्रेजी भाषा पर गहरी पकड़ रखने वाले और अ‌द्भुत वक्ता थे। हर कक्षा में तैयारी के साथ जाते थे। सदा खादी का बुशशर्ट और पैंट पहनते थे। सादा जीवन उच्च विचार के जीते जागते उदाहरण थे। प्रोफेसर से ले कर जमादार तक को सम्मान देना उनकी आदत थी। उन्होंने एक सरकारी कार्यालय की लालफीता शाही खत्म करके संस्थान को संयुक्त राष्ट्र संघ से 'एशिया में पत्रकारिता और जन संचार की शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र‌' घोषित करा दिया। संस्थान ने 19 नवम्बर 1979 को मुझे नियुक्ति पत्र भेज दिया। मुझे 12 दिसम्बर 1979 तक पद ग्रहण करने की राय दी गई। अब मुझे हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड से 23 दिनों में पद मुक्त होना था।

अगली किस्त में इसकी ज‌द्दोजहद दूंगा।

सोमवार, 18 नवंबर 2024

भारत के सबसे स्वच्छ शहरों की सूची


भारत सरकार का शहरी विकास मंत्रालय और भारत का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) हर साल स्वच्छ भारत अभियान योजना के तहत राष्ट्रीय शहर रेटिंग प्रकाशित करते हैं । इस रेटिंग में लगभग 500 शहर शामिल हैं, जो भारत की 72 प्रतिशत शहरी आबादी को कवर करते हैं ।

2017 तक, इस सर्वेक्षण के उद्देश्य से भारत को पाँच क्षेत्रों में विभाजित किया गया था और प्रत्येक शहर को 19 संकेतकों पर स्कोर किया गया था। शहरों को चार रंगों में वर्गीकृत किया गया था: हरा, नीला, काला और लाल, हरा सबसे साफ शहर था, और लाल सबसे प्रदूषित था। किसी भी शहर को हरा नहीं माना गया - जो इस अभ्यास में सर्वश्रेष्ठ श्रेणी है। हालाँकि, 2017-18 के सेंसेस सर्वेक्षण के दौरान, मूल्यांकन के मापदंडों को संशोधित किया गया था, और शहरों को जनसंख्या के आधार पर महानगर, बड़े, मध्यम और छोटे शहरों में वर्गीकृत किया गया था, और इस वर्गीकरण के अनुसार मूल्यांकन किया गया था। [ 1 ]

स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 की नवीनतम रैंकिंग में इंदौर को भारत का सबसे स्वच्छ शहर बताया गया है । इंदौर ने लगातार सात वर्षों तक भारत के सबसे स्वच्छ शहर होने का खिताब अपने नाम किया है। [ 2 ]

सारांश

2023

2022

2021

2019-2020

2017-2018

2016–2017

2015–2016

2014–2015

2009–2010

यह भी देखें

संदर्भ

भारत

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