शनिवार, 31 जुलाई 2021

हिंदी में पहले पहल पहला कौन?

 हिन्दी से सम्बन्धित प्रथम

यहाँ पर हिन्दी से सम्बन्धित सबसे पहले साहित्यकारों, पुस्तकों, स्थानों आदि के नाम दिये गये हैं।

हिन्दी का प्रथम कविहिन्दी साहित्य का आरम्भ कुछ विद्वान् चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो) से मानते हैं; तो कुछ शालिभद्र सूरि (भरतेश्वर बाहुबली रास), सरहप्पा (दोहाकोष), गोरखनाथस्वयम्भू से।[1] राहुल सांकृत्यायन ने हिंदी का प्रथम कवि जैन साहित्य के रचयिता सरहपा को माना है जिनका जन्मकाल ८वीं सती माना जाता है | परन्तु हजारीप्रसाद द्विवेदी ने हिंदी का प्रथम कवि अब्दुर्हमान को माना है । ये मुलतान के निवासी और जाति के जुलाहे थे। इनका समय १०१० ई० है। इनकी कविताएँ अपभ्रंश में हैं। -(संस्कृति के चार अध्याय, रामधारी सिंह दिनकर, पृष्ठ ४३१)
हिन्दी का अध्यापन आरम्भ करने वाला प्रथम विश्वविद्यालयकोलकाता विश्वविद्यालय (फोर्ट विलियम् कॉलेज)
भारत में पहली बार हिन्दी में एम॰ए॰ की पढ़ाईकोलकाता विश्वविद्यालय में कुलपति सर आशुतोष मुखर्जी ने १९१९ में शुरू करवाई थी।
हिन्दी में प्रथम डी॰लिट्॰डा. पीतांम्बरदत्त बड़थ्वाल (१९३९ में बाबू शयामसुन्दर दास के निर्देशन में अंग्रेजी में लिखे उनके शोध प्रबन्ध 'द निर्गुण स्कूल ऑफ हिन्दी पोयट्री' पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने उन्हें डी॰लिट॰ की उपाधि प्रदान की।)[2]
हिन्दी माध्यम में प्रस्तुत हिन्दी की प्रथम शोध कृतिफादर कामिल बुल्के कृत 'रामकथा : उत्पत्ति और विकास' (१९४९ ई.)
हिन्दी के प्रथम एम॰ए॰नलिनी मोहन सान्याल (जो बांग्लाभाषी थे।)
विज्ञान में शोधप्रबंध हिन्दी में देने वाले प्रथम विद्यार्थीमुरली मनोहर जोशी
अन्तरराष्ट्रीय संबन्ध पर अपना शोधप्रबन्ध लिखने वाले प्रथम व्यक्तिवेद प्रताप वैदिक
हिन्दी में बी.टेक. का प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले प्रथम विद्यार्थीश्याम रुद्र पाठक (सन् १९८५)
डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) की शोधप्रबन्ध पहली बार हिन्दी में प्रस्तुत करने वालेडॉ० मुनीश्वर गुप्त (सन् १९८७)
हिन्दी माध्यम से एल-एल०एम० उत्तीर्ण करने वाला देश का प्रथम विद्यार्थीचन्द्रशेखर उपाध्याय
प्रबंधन क्षेत्र में हिन्दी माध्यम से प्रथम शोध-प्रबंध के लेखकभानु प्रताप सिंह (पत्रकार) । विषय था, उत्तर प्रदेश प्रशासन में मानव संसाधन की उन्नत प्रवत्तियों का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन- आगरा मंडल के संदर्भ में
हिन्दी का पहला इंजीनियर कविमदन वात्स्यायन
हिन्दी में निर्णय देने वाले पहले न्यायाधीशन्यायमूर्ति श्री प्रेम शंकर गुप्त
सेन्ट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में हिन्दी के प्रथम वक्तानारायण प्रसाद सिंह (सारण-दरभंगा ; १९२६)
लोकसभा में सबसे पहले हिन्दी में सम्बोधनसीकर से रामराज्य परिषद के सांसद एन एल शर्मा। उन्होने पहली लोकसभा की बैठक के प्रथम सत्र के दूसरे दिन 15 मई 1952 को हिन्दी में संबोधन किया था।
हिन्दी में संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण देने वाला प्रथम राजनयिकअटल बिहारी वाजपेयी
हिन्दी का प्रथम महाकविचन्दबरदाई
हिन्दी का प्रथम महाकाव्यपृथ्वीराजरासो
हिन्दी का प्रथम ग्रंथपउमचरिउ (स्वयंभू द्वारा रचित)
हिन्दी का पहला समाचार पत्रउदन्त मार्तण्ड (जुगलकिशोर शुक्ल)
हिन्दी की प्रथम पर्यावरण पत्रिकापर्यावरण डाइजेस्‍ट ( संपादक - डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित )
हिन्दी-आन्दोलनहिन्दीभाषी प्रदेशों में सबसे पहले बिहार प्रदेश में सन् 1835 में हिन्दी आंदोलन शुरू हुआ था। इस अनवरत प्रयास के फलस्वरूप सन् 1875 में बिहार में कचहरियों और स्कूलों में हिन्दी प्रतिष्ठित हुई।
समीक्षामूलक हिन्दी का प्रथम मासिकसाहित्य संदेश (आगरा, सन् 1936 से 1942 तक)
हिन्दी का प्रथम आत्मचरितअर्धकथानक (कृतिकार हैं, जैन कवि बनारसीदास (कवि) (वि॰सं॰ १६४३-१७००))
हिन्दी का प्रथम व्याकरण'उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण' (दामोदर पण्डित)
हिन्दी व्याकरण के पाणिनीकिशोरीदास वाजपेयी
हिन्दी का प्रथम मानक शब्दकोशहिन्दी शब्दसागर
हिन्दी का प्रथम विश्वकोशहिन्दी विश्वकोश
हिन्दी की प्रथम आधुनिक कविता'स्वप्न' (महेश नारायण द्वारा रचित)[3]
मुक्तछन्द का पहला हिन्दी कविमहेश नारायण[4]
हिन्दी की प्रथम कहानीहिन्दी की सर्वप्रथम कहानी कौन सी है, इस विषय में विद्वानों में जो मतभेद शुरू हुआ था वह आज भी जैसे का तैसा बना हुआ है। हिन्दी की सर्वप्रथम कहानी समझी जाने वाली कड़ी के अर्न्तगत सैयद इंशाअल्ला खाँ की 'रानी केतकी की कहानी' (सन् 1803 या सन् 1808), राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद की 'राजा भोज का सपना' (19 वीं सदी का उत्तरार्द्ध), किशोरी लाल गोस्वामी की 'इन्दुमती' (सन् 1900), माधवराव सप्रे की 'एक टोकरी भर मिट्टी' (सन् 1901), आचार्य रामचंद्र शुक्ल की 'ग्यारह वर्ष का समय' (सन् 1903) और बंग महिला की 'दुलाई वाली' (सन् 1907) नामक कहानियाँ आती हैं। परन्तु किशोरी लाल गोस्वामी द्वारा कृत 'इन्दुमती' को मुख्यतः हिन्दी की प्रथम कहानी का दर्जा प्रदान किया जाता है।
हिन्दी का प्रथम लघुकथाकार
हिन्दी का प्रथम उपन्यास'देवरानी जेठानी की कहानी' (लेखक - पंडित गौरीदत्त ; सन् १८७०)। श्रद्धाराम फिल्लौरी की भाग्यवती और लाला श्रीनिवास दास की परीक्षा गुरू को भी हिन्दी के प्रथम उपन्यस होने का श्रेय दिया जाता है।
हिन्दी का प्रथम विज्ञान गल्प‘आश्चर्यवृतान्त’ (अंबिकादत्त व्यास ; 1884-1888)
हिन्दी का प्रथम नाटकनहुष (गोपालचंद्र, १८४१)
हिन्दी का प्रथम काव्य-नाटक‘एक घूँट’ (जयशंकर प्रसाद ; 1915 ई.)
हिन्दी के प्रथम साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेतामाखनलाल चतुर्वेदी (१९५५ में हिमतरंगिनी के लिए)
हिन्दी का प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेतासुमित्रानंदन पंत (१९६८)(चिदम्बरा के लिये प्राप्त हुआ)
हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहासभक्तमाल / इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐन्दूई ऐन्दूस्तानी (अर्थात "हिन्दुई और हिन्दुस्तानी साहित्य का इतिहास", लेखक गार्सा-द-तासी)
हिन्दी में प्रथम जीवनीभक्तमाल (१५८५ ई० नाभादास)
हिन्दी कविता के प्रथम इतिहासग्रन्थ के रचयिताशिवसिंह सेंगर ; (रचना - शिवसिंह सरोज)
हिन्दी साहित्य का प्रथम व्यवस्थित इतिहासकारआचार्य रामचंद्र शुक्ल
हिन्दी का प्रथम चलचित्र (मूवी)सत्य हरिश्चन्द्र
हिन्दी की पहली बोलती फिल्म (टाकी)आलम आरा
देवनागरी के प्रथम प्रचारकगौरीदत्त
हिन्दी की प्रथम अन्तरजाल पत्रिकाभारत-दर्शन (न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित)
हिन्दी का प्रथम चिट्ठा (ब्लॉग)"हिन्दी" चिट्ठे 2002 अकटूबर में विनय और आलोक ने हिन्दी (इस में अंग्रेज़ी लेख भी लिखे जाते हैं) लेख लिखने शुरू करे, 21 अप्रैल 2003 में सिर्फ हिन्दी का प्रथम चिट्ठा बना "नौ दो ग्यारह", जो अब यहाँ है (संगणकों के हिन्दीकरण से सम्बन्धित बंगलोर निवासी आलोक का चिट्ठा)
हिन्दी का प्रथम चिट्ठा-संकलकचिट्ठाविश्व (सन् २००४ के आरम्भ में बनाया गया था)
अन्तरजाल पर हिन्दी का प्रथम समाचारपत्रहिन्दी मिलाप / वेबदुनिया
हिन्दी का पहला समान्तर कोश बनाने का श्रेयअरविन्द कुमार व उनकी पत्नी कुसुम
हिन्दी साहित्य का प्रथम राष्ट्रगीत के रचयितापं. गिरिधर शर्मा ’नवरत्न‘
हिन्दी का प्रथम अर्थशास्त्रीय ग्रंथ"संपत्तिशास्त्र" (महावीर प्रसाद द्विवेदी)
हिन्दी के प्रथम बालसाहित्यकारश्रीधर पाठक (1860 - 1928)
हिन्दी की प्रथम वैज्ञानिक पत्रिकासन् १९१३ से प्रकाशित विज्ञान (विज्ञान परिषद् प्रयाग द्वारा प्रकाशित)
छपाई के लिए नागरी टाइपों का निर्माण करने वाला प्रथम व्यक्तिचार्ल्स विल्किन्स (1750-1836 ई.)
सबसे पहली टाइप-आधारित देवनागरी प्रिंटिंग1796 में गिलक्रिस्त (John Borthwick Gilchrist) की 'Grammar of the Hindoostanee Language', Calcutta ; Dick Plukker
खड़ीबोली के गद्य की प्रथम पुस्तकलल्लू लाल जी की प्रेम सागर (हिन्दी में भागवत का दशम् स्कन्ध) ; हिन्दी गद्य साहित्य का सूत्रपात करनेवाले चार महानुभाव कहे जाते हैं- मुंशी सदासुख लाल, इंशा अल्ला खाँ, लल्लू लाल और सदल मिश्र। ये चारों सं. 1860 के आसपास वर्तमान थे।
हिन्दी की वैज्ञानिक शब्दावली१८१० ई. में लल्लू लाल जी द्वारा संग्रहीत ३५०० शब्दों की सूची जिसमें हिन्दी की वैज्ञानिक शब्दावली को फ़ारसी और अंग्रेज़ी प्रतिरूपों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
हिन्दी की प्रथम विज्ञान-विषयक पुस्तक१८४७ में स्कूल बुक्स सोसाइटी, आगरा ने 'रसायन प्रकाश प्रश्नोत्तर' का प्रकाशन किया।
'एशिया का जागरण' विषय पर हिन्दी कवितासन् 1901 में राधाकृष्ण मित्र ने हिन्दी में एशिया के जागरण पर एक कविता लिखी थी। शायद वह किसी भी भाषा में 'एशिया के जागरण' की कल्पना पर पहली कविता है।
हिन्दी का प्रथम संगीत-ग्रन्थमानकुतूहल (ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर द्वारा रचित, १५वीं शती)
हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा और प्रामाणिक व्याकरणकामताप्रसाद गुरु द्वारा रचित "हिन्दी व्याकरण" का प्रकाशन सर्वप्रथम नागरीप्रचारिणी सभा, काशी में अपनी लेखमाला में सं. १९७४ से सं. १९७६ विक्रमी के बीच किया और जो सं. १९७७ (१९२० ई.) में पहली बार सभा से पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित हुआ।
प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन१९७५ में नागपुर में
हिन्दी साहित्य का प्रथम महाकाव्यपृथ्वीराज रासो
खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्यप्रियप्रवास (अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित)
खड़ी बोली की प्रथम गद्य रचनाचंद छंद बरनन की महिमा (गंग कवि)
हिन्दी के सर्वप्रथम गीतकारविद्यापति
हिन्दी की आदि कवयित्रीमीराबाई
हिन्दी की प्रथम कहानी लेखिकाबंग महिला ( राजेन्द्र बाला घोष)
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रथम हिन्दी विभागाध्यक्षश्यामसुन्दर दास
हिन्दी के प्रथम कोशकार/शब्दकोशकारअमीर खुसरो ('खलिक-ए-बारी'- द्विभाषी फारसी-हिन्दवी कोश)
हिन्दी माध्यम से सम्पूर्ण शिक्षा देने वाली देश की पहली संस्थागुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालयहरिद्वार
हिन्दी का प्रथम अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयमहात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)
ब्रजभाषा गद्य की प्रथम रचनाशृंगाररसमण्डन (गोसाईं विट्ठलनाथ)

फ़िल्मी पोस्टर / राजा बुंदेला

 वक्त बड़ा बेरहम होता है। कभी किसी को नहीं बख्शता यह नामुराद! जिस साम्राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता था, इसने उसे भी डुबो दिया।  इस दौर में टॉ...