शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

रोजगार मिलने की उम्मीद में / जय प्रकाश पाण्डेय "

व्यंग्य _/  रोजगार मिलने की उम्मीद में" 

   "

.....................................


             पैजवारे और नंगरार नदियों को पार करो तो सर्पीली पगडंडी मिलती है फिर ढलान पर लगे आम जामुन, पीपल और बेर के पेड़ से घिरा है गंगू का गांव।

इधर कई दिनों से गांव में पता नहीं किसने अपवाह फैला दी है कि गंगू के गांव में प्रधानमंत्री आने वाले हैं। अपवाह जिले तक पहुंच गई तो पार्टी वाले आश्चर्यचकित रह गए। ऐसी तो कहीं से भी कोई खबर नहीं थी पर क्या पता बिना बताये उस गांव में साहब जी उतर जाएं फिर हम लोगों को डांट-फटकार लगाएं, इसीलिए एक नेता जी को उस गांव का सर्वे करने भेज दिया गया।   


            बियाबान जंगलों के बीच बसा गांव है कभी कोई आता जाता नहीं, क्योंकि कोई आने जाने के साधन नहीं हैं उड़न खटोले की बात अलग है वो कहीं भी उतर सकता है। इतने दूरदराज के गांव में क्या मालुम कोई प्रधानमंत्री का नाम जानता है कि नहीं।

               आदिवासी पिछड़ा गांव है सड़क से बहुत दूर.....

इतना दूर कि दो नदियाँ पार करो, चार ऊंचे-ऊंचे पहाड़ उतरो- चढ़ो फिर दस कोस पैदल चलो तब मिलता है गंगू का गांव।  बुद्धू सरपंच कहता है नेता जी  से कि इतने पिछड़े गांव में काहे को आयेंगे प्रधानमंत्री। नेता जी बोले - सरपंच जी कोई ठिकाना नहीं, क्या भरोसा चुपके से हेलीकॉप्टर से किसी दिन उतर गए तब  ..... ये प्रधानमंत्री का कोई भरोसा नहीं ,ऐसी जगह ही जाते हैं जहां कभी कोई गया न हो, मीडिया की फौज लेकर चलते हैं पूरे संसार को दिखाने का शौक है। कुछ दिन पहले केदारनाथ की गुफा में रहने गए थे तो मीडिया की पूरी फौज हर एंगल से कवर कर रही थी।

        सरपंच भोंपू से चिल्लाते हुए  नेता जी के साथ  गांव घूमने निकले। भोंपू से आवाज़ आई प्रधानमंत्री हमरे गांव आने वाले हैं। सब लोग बोलो - प्रधानमंत्री जिंदाबाद, प्रधानमंत्री जिंदाबाद।

एक आदिवासी बच्चा पूछ रहा है - ने दादू  जे प्रधानमंत्री क्या होता है? बच्चे की बात सुनकर उधर खड़े कुछ लोग एक दूसरे का मुंह देखने लगते हैं सब आपस में पूछने लगते हैं ये तो अभी तक सुना नहीं था। गांव अचरज में है कि ये प्रधानमंत्री क्या होता है। सरपंच बार बार चिल्ला रहा है कि सब लोग अभी से प्रधानमंत्री जिंदाबाद बोलो.......

     अचानक एक हवाई जहाज गांव के ऊपर चक्कर लगाता है सबका ध्यान आसमान की तरफ जाता है एक आदमी उत्साह में बोल पड़ता है जे ही है प्रधानमंत्री। सब समझ जाते हैं कि प्रधानमंत्री मतलब हवाई जहाज होता है। एक डुकर सरपंच से पूछता है कि क्या जो ये ऊपर उड़ रहा है वो ही प्रधानमंत्री है। आदिवासियों के बुद्धूपन पर नेता जी को हंसी आ जाती है नेता कहता है कि सारी दुनिया प्रधानमंत्री के साथ तरक्की कर रही है 'सबका साथ सबका विकास' और इस गाँव की जनता आदिवासी की आदिवासी ही रह गई। नेता के कहने पर सरपंच अपनी भाषा में जनता को समझाता है सरपंच की जितनी समझ है वैसे ही समझाने की कोशिश करता है सुनो गांव वालो एक बार अपने गांव में चुनाव के समय जीप से एक सफेद कुर्ता पेजामा वाला आदमी आया था न, सबको मजा आया था न, तब ऊंगली में स्याही लगाकर एक नेता ने ठप्पा लगवाया था न, तो इस बार प्रधानमंत्री का नंबर है।

जनता बोली - हाँ खूब मजा आया था पर क्या प्रधानमंत्री में ज्यादा मजा आयेगा ? एक आदिवासी बोला - प्रधानमंत्री ऊपर से आयेगा तो और मजा आयेगा। 

नेता कड़क कर बोला - चुप..

अभी भी तुम लोग प्रधानमंत्री को ऐरा गेरा नथ्थू खैरा समझ रहे हो।

               जनता को अपनी गलती का अहसास होता है जरुर उनके मुंह से कोई छोटी बात निकल गई है तभी तो पजामा वाला नेता डांट रहा है। प्रधानमंत्री जरूर पहले वाले से कोई ऊंची चीज होगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रधानमंत्री बड़ा देव से भी बड़ा होता हो।

         नेता की डांट सुनकर बाजू के घर से 19-20 साल की युवती चेहरे में उदासी लिए नेता जी से पूछती है

"कौन हो बाबू तुम लोग?

नेता युवती के सौंदर्य को देखकर कुछ पगला सा जाता है और वहीं युवती के घर की परछी पर बैठ जाता है फिर प्रधानमंत्री के आने की बात भूल जाता है नेता की नजरें बता रहीं हैं कि प्रधानमंत्री आयें चाहे न आयें हमें अब अपना टारगेट किसी भी हाल में पूरा करना है। नेता की निगाह अंदर की खटिया में पड़े आदमी पर जाती है जिसकी दोनों बाहें ऊपर हवा में टंगी हैं और बाहें फूलकर मोटी हो रहीं हैं। नेता युवती से पूछता है कि ये कौन है और इसको क्या हो गया है ? 

युवती बताती है ये गंगू है और उसका पति है। वह रोते हुए बताती है कि एक महीने पहले इसको पखाना से खून आ रहा था, मलेरिया बाबू ने गलत नजर से हमको देखा और इसको सुई लगा दी उसी दिन से इसके हाथ पांव लकड़ी जैसे लकड़याय गए। मलेरिया बाबू पांच सात सौ रुपैया भी ले लिया, उधार ले के उसको दिये। 

नेता की लार टपकी, बोला - ब्लाक के डाक्टर को क्यों नहीं दिखाया ?

युवती बोली - वो तो बोला कि वो ही असली डाक्टर है। 

नेता का नकली आक्रोश उभरा, सरपंच से बोला - प्रधानमंत्री को आकर लौट जाने दो फिर इन सबको देखता हूं। नेता बोला - एक काम करो आज शाम को ब्लाक के अस्पताल इसे लेकर आओ हम वहीं रुके हैं। 

-गयी थी कई बार वहां... मलेरिया बाबू सोता हुआ मिलता है कई बार हाथ पकड़ चुका है।वहां जाने में अब डर लगता है। 

        नेता जी की नशीली आंखें देखकर सरपंच सब समझ गया बोला - शाम को पहले तुम अकेली आना। वहां नेता जी तुम्हारी बढ़िया मदद कर देंगे और डाक्टर को तुम्हारे घर भेजकर पूरा इलाज करा देंगे, पैसे - धेले की चिंता न करना, नेता जी सब संभाल लेंगे फिर जब प्रधानमंत्री आयेंगे तो उनको  गंगू से मिलवाने तुम्हारे घर लेकर आयेंगे। 

      नेता जी की नशीली नजरें देखकर युवती विचलित हो गई ..... फिर नेता जी उठे और गंगू के सिर पर हाथ फेरने लगे बोले - तुम्हारा हालचाल जानने सरकार जरूर तुम्हारे द्वार आयेगी। तुम चिंता नहीं करना, तुम्हारा पूरा ईलाज होकर रहेगा,क्योंकि प्रधानमंत्री आने वाले हैं इसका मतलब तुम्हारे भी अच्छे दिन आने वाले हैं। 

खुश होकर गंगू बोला - प्रधानमंत्री हमारे साथ कब तक रहेंगे ? 

सरपंच हंसते हुए बोला - प्रधानमंत्री सबसे बड़े सरकार होते हैं रे बुद्धू..... 

यदि सचमुच में प्रधानमंत्री आयेंगे तो क्या हमारे गांव के दुख - दलिद्दर दूर हो जाएंगे, महाजन, दारू और जालिम ठेकेदार और पुलिस अब तंग नहीं करेगी। 

सरपंच बोला - देखो गंगू अभी अपने लिए असली प्रधानमंत्री ये नेता है जो तुम्हारा अच्छे से दवाई दारू करा देगा और कहीं सच में प्रधानमंत्री आये तो यही नेता उनको तुम्हारे घर लायेगा इसलिए इसको खुश करना जरूरी है। इसके लिए तुम्हारी औरत को शाम को अस्पताल भेजना जरूरी है वहां नेता जी मिलेंगे और तुम्हारे इलाज का इंतजाम किया जाएगा, और जब तक तुम्हारी औरत अस्पताल से नहीं लौटती तब तक तुम्हें जय जयकारा करना होगा। प्रधानमंत्री जिंदाबाद करना होगा। सरकार तुम्हें मरने नहीं देगी। तुम्हारा विकास करेगी। 

गंगू की समझ में आता है कि विकास कोई रस्सी है जो महाजन सूद लिए बांधकर मारेगा। डरकर गंगू बोला - ना सरपंच जी ना..... विकास हमें मिला तो सूदखोर महाजन, पुलिस और मलेरिया बाबू हम लोगों को और तंग करेगा इसलिए प्रधानमंत्री से कहो कि विकास को अपने पास रखें।इलाज भर करवा दें, विकास का क्या करेंगे, बची खुची हमारी जंगल जमीन भी छीन लेंगे। 

सरपंच बोला - गंगू...प्रधानमंत्री जब आयेंगे तब आयेंगे, अभी तो एक काम करो कि औरत को जल्दी ब्लाक के अस्पताल भेज दो, नहीं तो नेता जी मेरी सरपंची खा जाएंगे। और सुनो ज्यादा रात हो जाएगी तो चिंता नहीं करना वो वहीं अस्पताल में रुक जायेगी, नेता जी सब संभाल लेंगे। अस्पताल में शरीर की जांच भी होती है और इंजेक्शन भी लगता है और नेताजी तो अपने घरै जैसे हैं आदिवासियों की मदद करने का उनका स्वाभाव ही है और अपने ही वोट से तो वे जीतते हैं। 

        शाम हो गई है, औरत न नुकुर कर रही है। गंगू उसको समझा रहा है कि चली जा..... नेता जी खुश हो जाएंगे तो प्रधानमंत्री को अपने घर लाएंगे फिर हमारे अच्छे दिन आयेंगे और हो सकता है कि हम दोनों से खुश होकर कुछ रोजगार भी दे जाएंगे। 

~  ~ ~ ~ ~ ~ ~ 

जय प्रकाश पाण्डेय

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें