शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

धरती_का_ध्रुवतारा चला गया ..../ अनूप शुक्ला

 #धरती_का_ध्रुवतारा चला गया ....


तुम नीलगगन का चाँद

और मैं धरती का ध्रुवतारा ।

जाने क्यों छलता है मुझको ?

धूप छाँव-सा प्यार तुम्हारा !

               

                - जैसी अमर प्रेमपगी पंक्तियों  के रचयिता गीतकार #विजय_नारायण_शर्मा अपने रचे प्रेम-गीतों को छोड़कर आज इस असार संसार से विदा हो गए .... 

                विजय नारायण शर्मा राजस्थान के अजमेर जिले के #ब्यावर नगर के निवासी थे और प्रगतिवादी कवि केदारनाथ अग्रवाल की भाँति पेशे से प्रतिष्ठित वकील थे .... लगभग ढाई दशक पहले हम जब राजस्थान कॉलेज शिक्षा में प्राध्यापक के रूप में नियुक्त होकर गए , तब जिन-जिनका निकट सान्निध्य प्राप्त हुआ , उनमें विजय नारायण शर्मा प्रमुख थे .... उन दिनों वह कविता मंचों के अत्यन्त लोकप्रिय कवि थे और कवि सम्मेलनों के हिट होने की गारण्टी थे ...

अत्यन्त सुमधुर आवाज में जब वह अपने प्रेम-गीतों का गायन करते थे , तो श्रोता झूम झूम उठते थे .... वह बड़े कवि सम्मेलनों में तो जाते ही थे , बंद कमरों की छोटी छोटी काव्य गोष्ठियों के लिए भी अपरिहार्य थे .... विधिक मामलों में वह हमारे निःशुल्क परामर्शदाता ही नहीं थे , बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्होंने अदालत में हमें #मुफ्त_कानूनी_सहायता भी उपलब्ध करवाई .... हमारे लिए तो वह हमारे #फ्री_के_वकील थे .... 

                 लगभग दो दशक पहले जब हमने राजस्थान छोड़ा और उत्तर प्रदेश की उच्चतर शिक्षा सेवा में प्राध्यापक के रूप में अपनी नयी पारी की शुरुआत की , तो भी विजय नारायण शर्मा से बराबर दूरभाषीय संपर्क बना रहा .... और फिर एक दिन .... उनका फोन आया कि वह अपने छोटे बेटे #यज्ञेश (#सुशील) और बहू के साथ फतेहपुर आ रहे हैं .... उन्होंने खाने का मीनू भी बताया और निर्धारित तिथि और समय पर वह हमारे साथ थे .... उनके गीतों और उनके संस्मरणों के साथ दो दिनों का उनका वह साथ हम सबके लिए यादगार बन गया .... 

                 सन् 2013 में उन्होंने अपने #एकमात्र गीत संग्रह #बाँहों_में_ब्रह्माण्ड की प्रति डाक से हमें भेजी .... बिना किसी अपेक्षा के .... #आखूँट_स्नेह_के_साथ ....

                 और आज .... जयपुर से हमारे वरिष्ठ साथी और हिन्दी के आलोचक डॉ. #राजेश_चौधरी ने सूचना दी  कि गीतकार विजय नारायण शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे .... थोड़ी देर बाद विजय नारायण शर्मा के सेवाभावी कनिष्ठ पुत्र यज्ञेश (सुशील) ने भी दूरभाष पर इस समाचार की पुष्टि कर दी ....

                 क्या कहें , मन व्यथित है ....  इस धराधाम पर 75 वर्ष की आयु पूरी करके जाने वाले , सुदर्शन व्यक्तित्व के स्वामी तथा कविता और कानून में समान गति रखने वाले , हमारे अत्यन्त आत्मीय गीतकार विजय नारायण शर्मा की स्मृतियाँ सदैव हमारे और उनके चाहने वालों के साथ रहेंगी .... गीतकार विजय नारायण शर्मा को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि व सादर नमन ....

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