गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

जलेबी की जलन" / जय प्रकाश पाण्डेय

व्यंग्य_ /  जलेबी की जलन" / जय प्रकाश पाण्डेय 

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             सुबह-सुबह गरमा - गरम जलेबी और पोहा खाने के बाद जैसई पेट गुर्राया तो मास्टर जी सकते में आ गए, लगा महापाप हो गया। बीस साल से नियमपूर्वक चल रहा नवरात्रि का व्रत अनजाने में टूट गया। स्कूल पहुंचे तो हताशा और निराशा में मन पढ़ाने में नहीं लगा, अंदर उपवास टूटने का अपराध बोध पसर गया। दो बच्चों को गुड्डी तनवा दी, तीन को घुटने के बल खड़ा किया और दो बच्चों के पिछवाड़े में छड़ी चला दी। बीस साल से लगातार नवरात्रि के उपवास में मुफ्त की जलेबी ने कबाड़ा कर दिया। हेड मास्टर को आते देख अनमने मन से पढ़ाने लगे, छड़ी उठाई मेज पर पटकी, श्याम पट को डस्टर से पीटा और कहने लगे - नियमपूर्वक उपवास करने की आदत डाली जाय तो खाये हुए भोजन का विकार दूर हो जाता है। स्वास्थ्य को बहुत लाभ होता है मन में शान्ति रहती है। उपवास कई प्रकार के होते हैं कई लोग नवरात्रि में नौ दिन निर्जला व्रत करते हैं हांलाकि हम भी करते हैं पर हम सबको एकादशी का उपवास हमेशा करना चाहिए, एकादशी करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है कभी विष्णु जी प्रसन्न हो जाते हैं तो मुफ्त में जलेबी पोहा खिलाकर परीक्षा ले लेते हैं परीक्षा में जो फेल हो जाता है उसका मन विचलित हो जाता है। घर की औरतों को विष्णु जी माफ करते रहते हैं घर की औरतें एकादशी व्रत में रोटी नहीं खातीं, दूध मलाई, खीर, कलाकंद, पकौड़े आदि से पेट भरतीं हैं तब विष्णु जी को बुरा नहीं लगता। इसलिए उपवास बिना आहार के ही होना चाहिए और तभी उपवास का सही अर्थ होता है। अभी भी उपवास का मतलब किसी को समझ नहीं आया हो तो हाथ उठाओ ! 


      __उठो छकौड़ी उपवास पर कोई सवाल पूछो? 


छकौड़ी - - मास्साब.... हमारे पापा नवरात्रि में नौ दिन निर्जला उपवास करते हैं पर साल के बाकी दिन दिन रात दारू पीते हैं ये उपवास है कि अंधविश्वास ? 


मास्टर जी - - ये आस्था का मामला है जिसकी जिसमें आस्था। समझा देना उनको। याद है कुछ साल पहले  एक पार्टी वालों ने राजघाट पर कुछ घंटों के उपवास का आयोजन किया, कुछ लोग पेट भर छोले भटूरे खाकर राजघाट पहुंच गए, गांधी जी कुछ बोलते नहीं क्योंकि गांधी जी के उपवास का उपहास उड़ाने में नेता लोग सबसे आगे हैं। मीडिया उपवास का अब मजाक उड़ाता है लोग विश्वास नहीं करते कि गांधी जी आमरण अनशन वाला उपवास करते थे। हम सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश बनने का भले नाटक करें पर हम बेहतर नहीं है। संसद चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की है और सत्ता पक्ष संसद न चला पाने के दुख में उपवास और अनशन करने लगे, कुछ समझ नहीं आता। उपवास के पहले मुखिया ने फरमान जारी कर दिया कि उपवास के घंटों में सभी सांसद, मंत्री छोले भटूरे से दूरी बनाए रखें। जबरदस्ती सामूहिक उपवास कराने में बड़े खतरे हैं, उपवास का नाम बदनाम होता है। जीभ दगाबाज़ी करती है छुप-छुपाके हाथ साफ कर ही देती है। 


      अच्छा कमल तुम खड़े होकर बताओ कि गांधी जी सही में उपवास करते थे ? 


    कमल - - सर जी, गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से उपवास की प्रेक्टिस कर ली थी, वे अन्याय का विरोध करने अकेले उपवास रखते थे उन्होंने उपवास को हथियार बना लिया था, पर वो नवरात्रि और एकादशी का उपवास नहीं रखते थे। गांधी जी नकली दांत लगाते थे इसलिए उनको उपवास रखने में सुविधा होती थी वे अकेले उपवास में बैठते थे आजकल के नेता अकेले उपवास करने में डरते हैं। गांधी जी दिखाने के लिए उपवास नहीं करते थे पर आजकल के नेता दिखाने और फोटो खिंचवाने के लिए उपवास का नाटक करते हैं। 


मास्टर जी - - और कोई कुछ पूछना चाहता है ? 


     कमल - - सर जी... बहुत पहले सुनने में आया था कि अन्ना जी के साथ कई लोग उपवास में बैठे थे और कोई अरविंद पीछे से अन्ना जी की धोती का कांच खोल देता था। सब कई दिनों के भूखे थे तो सत्ताधारी पार्टी ने सहानुभूति पूर्वक डण्डे खिलाने का मूड बनाया था पर एक बाबा डण्डे खाने की जगह सलवार कुर्ती पहनकर मंच से कूद गये थे और रामलीला मैदान के सामने चाट के ठेले में पकौड़ा खाते पकड़े गए थे। क्या ये सही है ? 


  मास्टर जी - - जो सुना है वो सही होगा मीडिया ने भी दिखाया था। और किसी को उपवास के बारे में पूछना हो तो हाथ उठाएं ? 


      नरेंद्र - - सर जी... उपवास करने वाले को चाय पिलाने पर पुण्य मिलता है कि पाप ? 


मास्टर जी - - पुण्य ही मिलता होगा तभी तो चाय बेचने वाला कहां से कहां पहुंच जाता है पुण्य मिला तभी तो उसके अच्छे दिन आये...... 

           

             गंगू और मंगू मुर्गा बनके सब सुन रहे थे। अब गंगू की बारी थी, गंगू से कहा गया कि उपवास के बारे में कुछ बताये..... 


गंगू - - सर जी... हमारी मम्मी करवा चौथ का उपवास रहती है जब चांद निकलता है तो चलनी से पापा का चेहरा देखना चाहती है पर पापा चांद को देखकर भावुक हो जाते हैं पुरानी प्रेमिकाओं पर कविता पढ़ने लगते हैं, मम्मी नाराज हो जातीं हैं चलनी तोड़ देतीं हैं रात भर ऊधम होता है और बड़बड़ाती हुई कहतीं है कि इनका खानदान ही खराब है इनकी गुजराती बुआ रात भर चलनी लिए भूखी प्यासी छत पर खड़ी रहती है और फूफा हर करवा चौथ को विदेश का दौरा निकाल के भग जाते हैं, ऐसा लगता है जैसे फूफा ने दाढ़ी का उपवास रख लिया है कि जब बुआ मरेगी तब दाढ़ी कटेगी.. वाह रे फूफा तुमने मिट्टी के जलते कलश के सामने दांपत्य जीवन के निर्वाह के वचन दिये थे उसमें भी घोटाला कर दिया, तुम पर कैसे विश्वास करें भले तुम झटके मार मार कर खूब सपने दिखाते हो....... 

छुट्टी की घंटी बज गई, मास्टर जी की छड़ी उठ गई..........जाते-जाते मास्टर जी ने हिदायत दी कि जब भी उपवास रखो तो पोहा जलेबी से दूरी बना कर रखना क्योंकि उपवास में जलेबी की जलन से पछतावा हाथ आता है।  

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जय प्रकाश पाण्डेय

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