शनिवार, 20 नवंबर 2021

सतसंग पाठ

 🌹🌹 मिश्रित भजन-


मेरे तो राधास्वामी दयाल

 दूसरो न कोई।

सबके तो राधास्वामी दयाल

दूसरो न कोई।

 मेरे तो, तेरे तो, सबके तो

 राधास्वामी दयाल दूसरो न कोई।।     

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 राधास्वामी सुमिरन ध्यान भजन से। जनम सुफल कर लें।।                                                            राधास्वामी सुमिरन ध्यान भजन से। जनम सुफलतम कर ले।।          

                        🌹🌹

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राधास्वामी राधास्वामी गया करो, 


हर पल गुरु रूप ध्याय करो ।


गुरु तुम्हें अपनी शरण में लेवे, 


भक्ति मार्ग का भेद तुम्हें देवे ।


उनके ही गुन नित गाया करो,


राधास्वामी राधास्वामी गया करो ।


मेहर से तेरी सूरत जगवे,


तन और मन को सेवा में लगावे ।


उनका ही हुकम बजाया करो,


राधास्वामी राधास्वामी गया करो ।


सुरत को तेरी शब्द मे मिलवे,


जग की सारी सुखी बिसरावे ।


उनके ही संग रहायो करो,


राधास्वामी राधास्वामी गया करो ।


सुरत शब्द का है मार्ग झीना,


पहुंचे न धुर घर कोई गुरु के बिना ।


गुरु संग भक्ति फल पाया करो,


राधास्वामी राधास्वामी गया करो ।


[


: "राधास्वामी रक्षक जीव के" - (संस्कृत में)


             राधास्वामी रक्षकः जीवस्य।

             जीवेन    न    भेदं    ज्ञातः।।

             गुरुचरित्रं     न          ज्ञातं।

             कर्म      दुःख      संलग्ना:।।

             दुःखं दूरं  भवेत गुरुदर्शनेन।

             न      कोsपि       उपायाः।।

             तव    दर्शनं    शीघ्रं   भवेत।

             बहुशः     मया     कथितम्।।

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