सोमवार, 22 नवंबर 2021

रवि अरोड़ा की नजर से.....

 आमदनी दुगनी करवा लो / रवि अरोड़ा



हर बार की तरह इसबार भी मोदी जी मैं आपकी बात का समर्थन करता हूं । वाकई आपकी तपस्या में ही कोई कमी रह गई जो आप कृषि कानूनों का लाभ इन चंद किसानों को समझा नहीं पाए । हालांकि इस तपस्या के तहत जमकर लाठी चार्ज हुए । आंसू गैस के गोले छोड़े गए । सड़कों पर गड्ढे खोद कर और कीलें बिछाकर साल भर तक लोगों के रास्तों को रोके रखा गया । पानी की बौछारें की गईं ।  हजारों किसानों को सर्दी गर्मी और बरसात झेलने के लिए पूरे साल खुले में रखा गया । देश बंद करवाया, बाजार बंद करवाए, ट्रेनें रुकवाई ।  सात सौ से अधिक किसानों की आहूति ली गई । जीप चढ़ा कर उन्हे कुचला गया । हजारों को झूठे मुकदमों में जेल भेजा गया ।  उन्हें खलिस्तानी, टुकड़े टुकड़े गैंग, पाकिस्तान के एजेंट, गद्दार, आंदोलन जीवी और न जाने किस किस तमगे से नवाजा गया मगर फिर भी पता नहीं क्यों किसानों को समझाया नहीं जा सका । वाकई मोदी जी आपकी तपस्या में ही कोई कमी रह गई शायद । 


वैसे तपस्या तो मोदी जी आप बहुत ही करते हैं । केदारनाथ की गुफा हो या संसद हर जगह कैमरों की छांव में आपके द्वारा की गई तपस्या का मैं कायल हूं । मगर ये जो पब्लिक है न, ये पूरी एहसान फरामोश है । आपकी तपस्या को समझती ही नहीं । ये किसान तो कतई बावले हैं , इन्हे तो तपस्या वपस्या की बिलकुल तमीज नहीं । पिछली बार भूमि अधिग्रहण कानून के समय भी ये कहां समझे थे । जबकि आप इनके भले के लिए ही अध्यादेश लाए थे कि सरकार उनकी जमीन को बिना उनकी इजाज़त के ले सकती है । जब  ये बावले अटक गए तो मजबूरी में आपको अपनी तपस्या चूल्हे में और अध्यादेश को कूड़ेदान में फेंकना पड़ा । इसबार भी आप इनकी आमदनी दुगनी करने के लिए अपने चेले चपाटों को लगाने वाले थे मगर ये फिर अड़ गए । चेलों ने तो अनाज भरने को बड़े बड़े गोदाम भी बनवा लिए थे मगर ये तपस्या भी जाया हो गई । अजी मरने दीजिए इन्हे । आप अपने चेलों की ही आमदनी दुगनी कीजिए । वे कम से कम एहसान तो मानते हैं , इनकी तरह आंखें तो नहीं दिखाते । अब देखो न , कह रहे हैं कि पहले एमएसपी लाओ और मुकदमे वापिस लो फिर धरना हटाएंगे । ऐसे भी होता है क्या ? उंगली पकड़ाई तो ये पोंचा ही पकड़ रहे हैं । पोंचे के बाद भी पता नहीं क्या क्या मांगेगे ? 


वैसे समझ नही आता कि आपकी बात का भरोसा क्यों नही कर रहे ये किसान ? आपने जब एलान कर दिया है कि कानून वापिस तो वापिस ही माने जाने चाहिए ? फिर क्यों कह रहे हैं कि पहले संसद में पास कराओ ? अपनी बात से मुकरेंगे क्या आप ? पहले कभी मुकरे हैं क्या ? आपने आजतक जो कहा करके दिखाया तो है । काला धन , सबको पंद्रह लाख , महंगाई का खात्मा,  स्मार्ट सिटी , बुलेट ट्रेन, चीन को लाल आंखें और  हर साल दो करोड़ को रोजगार जैसी बातों को जाने दीजिए । ये सब तो चुनावी बातें थीं । इसके अलावा कोई वादा खिलाफी की हो तो कोई बताए । क्यों ये किसान कलराज मिश्र जैसों की बातों को गंभीरता से ले रहे हैं , जो कहते हैं कि कृषि कानून फिर से लाए जाएंगे । दुबारा लाने होते तो वापिस ही क्यों लेते ? पांच राज्यों का चुनाव शुनाव की बातें तो बकवास है । चुनाव जीतने होंगे तो आप हिंदू मुस्लिम करके भी जीत जायेंगे । मुफ्त में छीछालेदर भला क्यों कराते ? चलिए ये बावले नहीं मानते तो इनकी ही सही । जैसा कह रहे हैं आप कर दीजिए । घर से साग दो और फूहड़ कहलाओ । इन्हे तो आप इनके हाल पर ही छोड़ दीजिए । नहीं करवाते अपनी आमदनी दुगनी तो मरें परे । आप भी अब इनकी ओर मत झांकना और अब आमदनी दुगनी कराने के लिए कोई नया दरवाजा देखना ।




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