कैसे शुरू करें एक नया समाचार पत्र या पत्रिका
Posted on January 9, 2011 by Updesh Awasthee
मैने दोनों पक्षों को सुना और देखा है. नतीजतन मैं यह कह सकता हूं कि सामान्यत: लोगों के पास यह जानकारी ही नहीं है कि उन्हें करना क्या चाहिए. एक व्यक्ति हाथ में बजट लिए सामने आता है. मीडिया से जुड़े लोग अपनी खिल्ली उडऩे के डर से यह कहने का साहस ही नहीं कर पाते कि हमें इसकी जानकारी नहीं है और फिर अधकचरा जानकारी के आधार पर जो कुछ भी वो करते हैं, उसका परिणाम भुगतना पड़ता है उस व्यक्ति को जो एक समाचार पत्र या पत्रिका चलाने के सपने सजाए बैठा था.
इसी समस्या के निदान के लिए यह पोस्ट प्रस्तुत की जा रही है. जो समय-समय पर अपडेट होती रहेगी, अत: कृपया एक बार पढ़कर या इसे कापी करके न रखें बल्कि लगातार इसके अपडेट्स देखते रहें ताकि बदलते नियमों से सभी परिचित हो सकें.
1. पहला कदम :-
यह जान लेना बहुत जरूरी है कि भारत देश में कोई भी समाचार पत्र, पत्रिका, किताब या वो कॉमिक्स ही क्यों न हो, बिना रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूर्ण किए प्रकाशित नहीं की जा सकती. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के पूर्व यदि किसी भी प्रकार का प्रकाशन किया जाता है तो वह न केवल अवैध होगा बल्कि कलेक्टर या कलेक्टर द्वारा अधिकृत एडीशनल कलेक्टर या एसडीएम को यह अधिकार होगा कि वह उसके मुद्रक, प्रकाशक एवं संपादक के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई करे एवं संबंधित प्रकाशन तत्काल प्रभाव से बंद कराकर बाजार में उपलब्ध उसकी सभी प्रतियां जब्त कर ले.
कलेक्टर सार्वजनिक सूचना के जरिए आम जनता को यह सूचित करा सकेंगे कि संबंधित प्रकाशन अवैध है एवं इसे किसी भी प्रकार का प्रोत्साहन न देें. ऐसे अवैध प्रकाशन से जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है.
पुन: याद दिला दूं कि बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी प्रकार का प्रकाशन अवैध माना जाएगा, चाहे वह किसी समाज की सामाजिक पत्रिका हो या किसी स्कूल की वार्षिक स्मारिका. इस श्रेणी में वे पर्चे भी आ जाते हैं जो दुकानदार भाईयों या नेताओं द्वारा अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए छपवाए जाते हैं. मजिस्ट्रेट उनके खिलाफ कार्रवाई संपादित कर सकते हैं.
अत: बहुत जरूरी है कि सबसे पहले रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया प्रारंभ की जाए.
दूसरा कदम
भारत में छपने तथा प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र एवं आवधिक प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 तथा समाचारपत्रों के पंजीकरण(केन्द्रीय) नियम, 1956 द्वारा नियंत्रित होते हैं ।
अधिनियम के अनुसार, किसी भी समाचार पत्र अथवा आवधिक का शीर्षक उसी भाषा या उसी राज्य में पहले से प्रकाशित हो रहे किसी अन्य समाचारपत्र या आवधिक के समान या मिलता‑जुलता न हो, जब तक कि उस शीर्षक का स्वामित्व उसी व्यक्ति के पास न हो ।
इस शर्त के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए ,भारत सरकार ने समाचारपत्रों का पंजीयक नियुक्त किया है , जिन्हें प्रेस पंजीयक भी कहा जाता है, जो भारत में प्रकाशित होने वाले समाचारपत्रों एवं आवधिकों की पंजिका का रख‑ रखाव करते हैं ।
भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक का कार्यालय का मुख्यालय नई दिल्ली में है तथा देश के सभी क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कोलकाता,मुंबई तथा चेन्नई में तीन क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं ।? कार्यालयों के पते एवं कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र निम्नानुसार हैं ?
आर.एन.आई. के विभिन्न कार्यालयों के पता
भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक का कार्यालय,मुख्यालय
पश्चिमी खंड‑8,स्कंध‑2,
आर.के.पुरम,नई दिल्ली‑110066
2. भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक का क्षेत्रीय कार्यालय,एम.एस.ओ.भवन,बलॉक डी एफ
द्वितीय तल , पो0 सी.सी.ब्लॉक,
सॉल्ट लेक,कोलकाता‑700064
3. भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक का क्षेत्रीय कार्यालय, ए‑1,विगं,निचला तल,
नया सी.जी.ओ.कॉम्पलेक्स, सी.बी.डी,बेलापुर,
नवी मुंबई‑400614
4. भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक का क्षेत्रीय कार्यालय,
बी‑ ब्लाक,बी स्कंध,
(बी‑2‑बी) सी.जी.ओ.कॉम्पलेक्स राजाजी भवन,
बेसंत नगर,चेन्नई‑600090
प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के अनुसार , मुद्रक एवं प्रकाशक को जिला/महाप्रांत/उप‑प्रखण्ड दण्डाधिकारी के समक्ष घोषणा करनी होती है , जिसके स्थानीय अधिकारक्षेत्र के अधीन समाचारपत्र मुद्रित अथवा प्रकाशित किया जाएगा, कि वह उक्त समाचारपत्र का मुद्रक/प्रकाशक है ।
घोषणा पत्र में समाचारपत्र संबंधी सभी विवरण शामिल होने चाहिए , जैसे कि किस भाषा में प्रकाशित होगा ,प्रकाशन का स्थान इत्यादि । समाचारपत्र के प्रकाशन से पहले दण्डाधिकारी द्वारा घोषणा पत्र को अधिप्रमाणित किया जाना चाहिए ।
अधिप्रमाणन से पहले , दण्डाधिकारी समाचारपत्रों के पंजीयक से छानबीन करने के बाद यह पुष्टि करता है कि प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम की धारा 6 में उल्लिखित शर्तों का पालन हो रहा है ।
तीसरे कदम के लिए कृपया प्रतीक्षा करें. समय-समय पर यह पोस्ट अपडेट की जाती रहेगी अत: कृपया नियमित रूप से पढ़ते रहिए मीडिया मुगल.कॉम
उपदेश अवस्थी
+91-9425137664
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