चन्द पन्नों मे सिमटाविस्तृत संसार
दैनिक अखबार
दुनिया को
देखने समझने का रास्ता सा
सुबह का नाश्ता सा
कभी कड़्वा, कभी कसैला
कभी तीखा-कभी विषैला
हां साहमे हमने इस
अखबारी नाश्ते के
बहुत स्वाद चखे हैं
कुछ भूल गये
कुछ याद रखे हैं
आप कहेंगें
ना मिर्च ना मासाला
सफेद कागज़ पर प्रिंट काला
मात्र खबरों का हवाला
फिर स्वाद कैसा
पर साहब
हम आपको समझा देंगें
लीजिये, सुनिये
मुखपृष्ठ खून से सना होगा
अमन चैन नदारद
उग्रवाद घना होगा
पूरे अखबार का
ये आलम होगा
बेवक्त चटकी चूड़ियो का
काँलम होगा
हत्याओं की खूंडियों पर
शीर्षक तने होंगें
सभी शब्द खून से सने होंगें
अपने वैधव्य का
स्वागत करती
नारियों की तस्वीरें
अनाथ हुए बच्चों की
सिसकियां और तकदीरें
सुरक्षा व्यवस्था लड़्खड़ाती हुई
हर मौत उसके खिल्लियां उड़ाती हुई
न उठ सकने वाले
कड़े कदम का आश्वासन
अपनी
कार्य कदम का आश्वासन
अपनी
कार्य कुशलता पर हंसता कुशास
आप कहेंगें ये तो खबरें हैं
स्वाद कहां है
अरे भाई
इन खबरों में ही
स्वाद भरा है
वरना
अखबार में
क्या धरा है...?
स्वाद कहां है
अरे भाई
इन खबरों में ही
स्वाद भरा है
वरना
अखबार में
क्या धरा है...?
क्या बात कही है।
ये आलम होगा
बेवक्त चटकी चूड़ियो का
काँलम होगा
हत्याओं की खूंडियों पर
शीर्षक तने होंगें
सभी शब्द खून से सने होंगें
अपने वैधव्य का
स्वागत करती
नारियों की तस्वीरें
अनाथ हुए बच्चों की
सिसकियां और तकदीरें
सुरक्षा व्यवस्था लड़्खड़ाती हुई
हर मौत उसके खिल्लियां उड़ाती हुई
न उठ सकने वाले
कड़े कदम का आश्वासन
अपनी
कार्य कदम का आश्वासन
अपनी
कार्य कुशलता पर हंसता कुशासन
गंभीर अभिव्यक्ति।
स्वाद भरा है
वरना
अखबार में
क्या धरा है...?
अखबार कैसे निस्सार होते जा रहे हैं कविता प्रस्तुत कर रही है। बधाई पवन जी।
उपभोक्तावाद और बाज़ारवाद का असर पत्रकारिता पर भी हुआ ही है . हमारे दैनिक समाचार पत्र एक "strategic pornography" के शिकार हो गए हैं .. जो कि कभी सनसनी तो कभी सेक्स तो कभी सेंसेक्स बन कर मुख पृष्ठों पर फैल गयी है ... पत्रकारिता की जीर्ण आत्मा के चीत्कार को आप ने बखूबी काग़ज़ पर उतारा है ....
शुक्रिया
स्वाद कहां है
अरे भाई
इन खबरों में ही
स्वाद भरा है
वरना
अखबार में
क्या धरा है...?
पता नहीं , आजकल खबरें ऐसी होती हैं या खबर देनेवाले।
बतलाने वाले इस
चंदन को वंदन।
बहस में हिस्सा
ले रहे हैं
इस पर कम
टिप्पणियां आने
का यही कारण है।
कवि महोदय
रुकावट के लिए
खेद है।
इस कविता को
कल के अंक में
पुन: प्रकाशित
किया जाएगा
ताकि खूब सारी
टिप्पणियां आ सकें।
आदेशानुसार
साहित्यशिल्पी टीम प्रबंधन
bahut sundar rachana.
aapko bahut badhai ..
vijay
www.poemsofvijay.blogspot.com