गुरुवार, 23 अगस्त 2012

मीडिया में भी आयी है आश्चर्यजनक रफ्तार


आज संचार माध्यम की तेजी के साथ-साथ मीडियाँ में भी आश्चर्यजनक
रफ्तार आयी है, किसी भी अहम खबर को दुनियाँ भर में मिंनटों में
पहुँचने में देर नहीं लगती है। नतीजे में जनता बेहद जागरूक हो गई है।
लेकिन ख़बरों की इस भाग-दौड़ में देश और समाज की असल “समस्यायें
और उसके हल” की ओर जनता का ध्यान केंन्दित करने में अधिकतर मीडिया सफल
नहीं हो पायी है, और न ही देशवासियों में देशहित में कुछ करने का ज़ज्बा
पैदा करने में विशेष योगदान दे पायी है। क्योकि उनके सामने विज्ञापन लेने और
टीआरपी बढ़ाने की होड़ है, इसलिए यही वो लिखते और दिखाते है, जिससे लोग
वाह वाह करें। कोई हर्ज़ नहीं है, लेकिन कुछ ऐसा भी कीजियें जिससे आत्मिक संतोष भी मिले।
जबकि हक़ीकत है कि देश के सामने विकराल समस्याये जैसे भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता, बेरोजगारी,
महँगाई, छुआछूत, गरीबी, भेदभाव, अदालतों के फैसलों में देरी, जातवाद, क्षेत्रीयता,
भाषावाद व कश्मीर, पड़ोसी देशो से संबंध विदेशनीति आदि जैसे अनगिनत समस्याये है,
जिसपर भी मीड़ियाँ को खास ध्यान देना चाहियें और चटकारे या वक्त गुजारने
के लिए ख़बरो को ज़रिया बनने देने के बजाय, देश व समाज को दिशा निर्देश
की जिम्मेदारी आज के सबसे मजबूत स्तंभ मीडियाँ को भी समझनी चाहिये।
अगरचे ये भी सही है कि जो कुछ भी अच्छा देखने या सुनने को मिल रहा है उसमें
मीडिया का बहुत योगदान है वरना हमारे नेताओं ने तो जैसे देश को बर्बाद करने की
कसम खा रखी हो। अगर सही मानों में आप इन समस्यायों का विष्लेषण करने बैठेगें तो
ये बात आइने की तरह से साफ हो जायेगी कि देश को बनाने और बिगाड़ने में इन
नेताओं का कितना हाथ हैं। साथ ही इस बात से इंकार नहीं कि नेताओं की किस्मों
और योगदान में भी अपवाद स्वरूप महान हस्तियां भी मिल जायेगी। साथ ही मीडिया और राजनीति
जो लोग अच्छे है, उनका हमें हार्दिक स्वागत करना चाहियें।
आज देश हिन्दू-मुस्लिम और समझदार लोगों में बट गया है, मीडिया भी
किसी हद तक इस बटवारे की शिकार है। नतीजे में जहर फैल रहा है, जो देशहित
में किसी भी तरह नहीं है। हम नेताओं के चक्कर में पड़कर उनके हितो को साधने
के लिए देश को तरह-तरह के खानों में बाँट रहे है। क्या ही अच्छा होता कि हम
सब मिलकर देश को आगे बढ़ाने के उपायों के बारे में सोचते। ऐसी मिसाल कायम
करते की दुनियां हमारा अनुसरण करती, जैसे की आज दुनियां के जापान,चीन,
अमेरिका, यहां तक की इज़राइल जैसे जो हमसे हर मामले में बहुत छोटा देश है लेकिन अधिकतर मामलों
में देखते-देखते कितना आगे बढ़ गया है। आइयें हम सब देश और समाज को बेहतर बनाने
का फैसला ले ताकि आत्मिक संतोष मिल सके और देश व समाज के प्रति हमारी जो जिम्मेदारी
है उसमें कुछ योगदान कर सके।
एस.एम.मतलूब
मुख्य संपादक- आपकी आवाज़,कांम

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