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| समाचार पत्र | प्रकाशन स्थल | भाषा |
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हिक्की तथा बर्किघम का पत्रकारिता के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन दोनों ने तटस्थ पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन का उदाहरण प्रस्तुत कर पत्रकारों को पत्रकारिता की ओर आकर्षित किया। पहला भारतीय अंग्रेज़ी समाचार-पत्र 1816 ई. में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा बंगाल गजट नाम से निकाला गया। यह साप्ताहिक समाचार-पत्र था। 1818 ई. में मार्शमैन के नेतृत्व में बंगाली भाषा में दिग्दर्शन मासिक पत्र प्रकाशित हुआ। यह अल्पकालिक सिद्ध हुआ। इसी समय मार्शमैन के सम्पादन में एक साप्ताहिक समाचार-पत्र समाचार दर्पण प्रकाशित किया गया। 1821 ई. में बंगाली भाषा में साप्ताहिक समाचार पत्र संवाद कौमुदी का प्रकाशन हुआ। इस समाचार-पत्र का प्रबन्ध राजा राममोहन राय के हाथों में था। राजा राममोहन राय ने सामाजिक तथा धार्मिक विचारों के विरोधस्वरूप समाचार चन्द्रिका का मार्च, 1822 में प्रकाशन किया। इसके अतिरिक्त राय ने अप्रैल, 1822 में फ़ारसी भाषा में मिरातुल अख़बार एवं अंग्रेज़ी भाषा में ब्राह्मनिकल मैंगज़ीन का प्रकाशन किया।
समाचार-पत्र पर लगने वाले प्रतिबन्ध के अन्तर्गत 1799 ई. में वेलेजली द्वारा पत्रों का पत्रेक्षण अधिनियम (The Censorship of the Press Act) और जॉन एडम्स द्वारा 1823 ई. में अनुज्ञप्ति नियम लागू किये गये। एडम्स द्वारा समाचार पत्रों पर लगे प्रतिबन्ध के कारण राजा राममोहन राय का मिरातुल अख़बार बन्द हो गया। 1830 ई. में राजा राममोहन राय द्वारा, द्वारकनाथ टैगोर एवं प्रसन्न कुमार टैगोर के प्रयासों से बंगाली भाषा में बंगदूत का प्रकाशन आरम्भ हुआ। बम्बई से 1831 ई. में गुजराती भाषा में जामे जमशेद तथा 1851 ई. में रास्त गौफ़्तार एवं अख़बारे सौदागर का प्रकाशन हुआ।
लॉर्ड विलियम बैटिंक प्रथम गवर्नर जनरल था, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति उदारवादी दृष्टिकाण अपनाया। कार्यवाहक गवर्नर जनरल चार्ल्स मेटकाफ ने 1823 ई. के प्रतिबन्ध को हटाकर समाचार-पत्रों को मुक्ति दिलायी। इसे भारतीय समाचार-पत्रों का मुक्तिदाता भी कहा जाता है। मैकाले ने भी प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन किया। 1857-58 के विद्रोह के बाद भारत में समाचार पत्रों को भाषाई आधार के बजाय प्रजातीय आधार पर विभाजित किया गया। अंग्रेज़ी समाचार-पत्रों एवं भारतीय समाचार-पत्रों के दृष्टिकोण में अन्तर होता था। जहाँ अंग्रेज़ी समाचार-पत्रों को भारतीय समाचार-पत्रों की अपेक्षा ढेर सारी सुविधायें उपलब्ध थीं, वहीं भारतीय समाचार-पत्रों पर प्रतिबन्ध लगा था।

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