सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

सिर्फ एडिटिंग और रिपोर्टिंग नहीं है पत्रकारिता की पढ़ाई-कुठियाला



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image माखनलाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी के कुठियाला
पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए भोपाल में स्थापित माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय अक्सर विवादों में रहा है. छह महीने पहले जब प्रशासन ने नये कुलपित प्रो. बी के कुठियाला की नियुक्ति की तो एक बार फिर विश्वविद्यालय में तूफान खड़ा हो गया. प्रो. कुठियाला की नियुक्ति से लेकर अब तक विश्वविद्यालय पत्रकारिता की पढ़ाई का नहीं बल्कि राजनीति का अखाड़ा बन गया है. कुलपति पर आरोप है कि वे एक खास विचारधारा (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) से संपर्क रखते हैं इसलिए उनकी नियुक्तियों और कार्यपद्धति में उस विचारधारा का प्रभाव है जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे. जबकि कुलपति का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर विश्वविद्यालय का माहौल खराब कर रहे हैं ताकि विश्वविद्यालय में जो बदलाव होने चाहिए उसे वे प्रभावित कर सकें. भोपाल में उनके घर पर हुई बातचीत में हमने उन पर लगे आरोपों और विश्वविद्यालय को लेकर लंबी बातचीत की.
सवाल- आप पर आरोप है कि आप अकादमिक बैकग्राउण्ड वाले व्यक्ति नहीं है, जो कि किसी विश्वविद्यालय के कुलपति के लिए अनिवार्य अर्हता होती है. आप क्या कहेंगे?
जवाब- मैंने 21 साल इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन में अध्यापन और शोध किया है जो कि देश में पत्रकारिता का सबसे प्रतिष्ठित और सेकुलर संस्थान है. इसके अलावा पत्रकारिता के तीन इंस्टीट्यूट की स्थापना मेरे पहल और मेरी देखरेख में हुई है. क्या अकादमिक बैकग्राउण्ड गिनाने के लिए और कुछ करना जरूरी है. जिन लोगों ने सात महीने पहले इस पद पर मेरा चयन किया है वे इतने नासमझ नहीं है कि पत्रकारिता की पढ़ाई के िलए सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय का कुलपति चुनते समय इतनी छोटी सी बात का भी ध्यान न रखते.


सवाल- आप पर आरोप है कि आप एक खास विचारधारा के लोगों को बढ़ावा दे रहे हैं जिसके कारण अन्य लोग आपका विरोध कर रहे हैं?
जवाब- ऐसा उनको लगता होगा. मेरी एक ही विचारधारा है कि पत्रकारिता की पढ़ाई के जरिए सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रबोध कैसे जागृत हो. जो लोग मेरे खिलाफ विरोध की बिगुल बजा रहे हैं मेरी उनसे कोई शिकायत नहीं है. हम उनसे संवाद कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि संवाद से हमेशा अच्छे रास्ते निकल जाते हैं. विचारधारा की असहमति से बड़ा सवाल विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और उसका कामकाज है. मैं उसके साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं कर सकता.
सवाल- क्या आप उन लोगों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी करेंगे जो दोषी हैं?
जवाब- हम उनको समझाने की कोशिश कर रहे हैं. जरूरी हुआ तो प्रशासनिक कार्रवाई भी करेंगे लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई ही करेंगे ऐसा नहीं है. केवल प्रशासनिक कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा.


सवाल- विश्वविद्यालय में कुछ नियुक्तियों को लेकर विवाद है. आप क्या कहेंगे?
जवाब- मेरे कार्यकाल में जो भी नियुक्तियां हैं उससे संबंधित जानकारी जो भी चाहे सूचना के अधिकार के तहत निकाल सकता है. सच्चाई का पता खुद ब खुद हो जाएगा.


सवाल- आपको उम्मीद थी कि आपको आते ही विवादों से सामना करना होगा?
जवाब- जो भी लोग पहले से यहां काम कर रहे हैं और अपने विचार के अनुसार विश्वविद्यालय के प्रगति के लिए प्रयासरत हैं उनकी अपनी कार्य करने की एक शैली होगी. जब भी कोई नया व्यक्ति आता है तो थोड़ी बहुत मतभिन्नता होती ही है. हमारा काम है कि उनकी बात भी कैसे मान ली जाए और विश्वविद्यालय में नयेपन को कैसे समाविष्ट किया जाए. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता की पढ़ाई केवल रिपोर्टिंग और एडिटिंग नहीं है. समय बहुत आगे निकल चुका है और हम समय के साथ तालमेल नहीं करेंगे तो अपने यहां पढ़ने आये छात्रों का अहित करेंगे.


सवाल- पत्रकारिता की पढ़ाई अगर रिपोर्टिग एडिटिंग नहीं तो क्या है?
जवाब- समय बदलने के साथ पत्रकारिता में तकनीकि का रोल बहुत महत्वपूर्ण हो गया है. पहले प्रिंट मीडिया में ही चार पांच तरह के काम करने के लिए चार पांच तरह के लोग रखे जाते थे. मसलन, रिपोर्टिंग, सब-एडििटंग, कम्पोजिंग, प्रूफ रीडिंग और फिर पेज मेकिंग. आज यह सारा काम अकेले रिपोर्टर करता है सिर्फ पेज मेकिंग को छोड़कर. इसलिए आज पत्रकार को न केवल रिपोर्टिंग की कला सीखनी होगी बल्कि उसे तकनीकि रूप से भी दक्ष होना होगा.


इसी तरह से इंटरनेट का इस्तेमाल केवल ईमेल भेजने या सर्च तक सीमित नहीं रहना चाहिए. हमारी कोशिश होगी कि पत्रकार इंटरनेट का इस्तेमाल पत्रकारिता के लिए करे और उसके जरिए वह लोगों तक अपनी बात पहुंचाए. इसके लिए हम निजी तकनीकि संस्थानों से बातचीत कर रहे हैं. मसलन हम वर्चुअल स्टुडियो बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि पत्रकार तकनीकि रूप से दक्ष हो ताकि वह समय के साथ तालमेल कर सके.


सवाल- क्या ऐसा आप निजी संस्थानों के दबाव में कर रहे हैं?
जवाब- निजी संस्थानों का हमारे ऊपर कोई दबाव नहीं है. दक्ष और कुशल पत्रकारों की आज जितनी जरूरत है उसे अकेले कोई भी संस्थान पूरा नहीं कर सकता. हम निजी संस्थानों से अपनी कोई प्रतिद्वंदिता नहीं मानते बल्कि हम मानते हैं कि जहां जरूरी हो हम उनकी मदद ले सकते हैं.


सवाल- आपने खुद पत्रकारिता की पढ़ाई नहीं की है. आप पत्रकारिता की पढ़ाई का कितना औचित्य मानते हैं?
जवाब- किसी समय अखबार में काम करनेवाले संपादक ही पत्रकारिता के संस्थान हुआ करते थे. लेकिन अब समय बदल गया है और तकनीकि का हस्तक्षेप बहुत व्यापक हो गया है. हालांकि संपादक से काम के दौरान जो कुछ सीखने को मिलता है वह कोई पत्रकारिता संस्थान कुछ महीनों में नहीं सिखा सकता लेकिन हम ऐसा मानते हैं कि पत्रकारिता संस्थान ऐसे अखबार समूहों, चैनलों को तकनीकि दक्ष और प्राथमिक तौर पर पत्रकारिता के लिए तैयार छात्र उपलब्ध कराते हैं जिनसे पत्रकारिता करवाना सिखाना एकदम अनगढ़ लोगों को पत्रकारिता सिखाने से थोड़ा बेहतर होता है.

1 टिप्पणी:

  1. The MEAN tech stack is one of the most popular tech stacks. The letters m-e-a-n stand for MongoDB, Express, AngularJS, and Node.js.

    MongoDB (NoSQL database).
    Express.js is a backend web framework.
    Angular.js is a frontend framework.
    NodeJS is an open-source, cross-platform server. https://cxdojo.com/how-to-choose-the-right-technology-stack-for-your-business

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