शनिवार, 19 जनवरी 2013

ब्रिटेन में भी है बलात्कार एक बड़ी समस्या



 शुक्रवार, 18 जनवरी, 2013 को 02:35 IST तक के समाचार

इंग्लैंड और वेल्स में औसतन हर साल एक लाख बलात्कार के मामले होते हैं
पिछले दिनों दिल्ली की दिल दहला देनेवाली गैंगरेप की घटना पर केवल भारत ही नहीं दुनिया भर में चर्चा हुई, अख़बारों में ख़बरें छपीं, टीवी पर प्रदर्शनकारियों का ग़ुस्सा दिखा, विदेशी लोगों ने जान-पहचान वाले भारतीयों से पूछना शुरू कर दिया – क्या भारत की हालत इतनी ख़राब है?
इस हंगामे के कुछ ही समय बाद ब्रिटेन में एक सरकारी रिपोर्ट आई, बलात्कार और सेक्स अपराधों के बारे में, और इससे जो तस्वीर बनती है वो बताती है कि महिलाओं की स्थिति यहाँ भी कोई कम भयावह नहीं.
लगभग सभी बड़े अख़बारों ने इस रिपोर्ट को अपने पहले पन्ने पर प्रमुखता से छापा.
एक अख़बार की सुर्खी थी – "Rape: The figures that shame Britain" (बलात्कारः आँकड़े जो ब्रिटेन को शर्मिंदा करते हैं)
ब्रिटेन में पीड़ितों की मदद के लिए काम करनेवाली एक संस्था विक्टिम सपोर्ट के चीफ़ एक्ज़ेक्यूटिव जावेद ख़ान कहते हैं,”इस रिपोर्ट से पता चलता है कि सेक्स अपराध केवल एशिया या अफ़्रीका की समस्या नहीं है, ये सारी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या है.”
(ब्रिटेन में बलात्कार की स्थिति की पड़ताल पर रिपोर्ट देखिए इस बार बीबीसी हिन्दी के टीवी कार्यक्रम क्लिक करें बीबीसी ग्लोबल इंडिया में)

अपराध

इंग्लैंड और वेल्स में बलात्कार


  • सेक्स अपराध 4,53,000
  • बलात्कार 60,000-95,000
  • दर्ज मामले 54,000
  • सभी मामलों में सज़ा 5,620
  • बलात्कार मामले में सज़ा 1,070
  • बलात्कार के मुक़दमे 675 दिन
  • अन्य मुक़दमे 154 दिन
स्रोतः ब्रिटेन सरकार की रिपोर्ट, वार्षिक औसत

ब्रिटेन में बलात्कार और अन्य सेक्स अपराधों पर रिपोर्ट तो अक्सर आया करती है पर ये सरकारी रिपोर्ट ख़ास बताई जा रही है.
इसमें पहली बार ऐसे अपराधों के अध्ययन के लिए तीन सरकारी महकमों – न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और सांख्यिकी विभाग ने साझा अध्ययन किया.
इसमें ब्रिटेन के दो मुख्य प्रांतों इंग्लैंड और वेल्स में तीन साल के अपराधों का औसत निकाला गया.
रिपोर्ट बताती है कि इंग्लैंड और वेल्स में हर साल औसतन चार लाख 73 हज़ार सेक्स अपराध होते हैं. इनमें पुरूषों के साथ होनेवाले अपराध भी शामिल हैं मगर बहुतायत महिलाओं के साथ हुए अपराध की है.
इनमें हर साल बलात्कार की संख्या 60 हज़ार से 95 हज़ार तक होती है.
मगर जहाँ तक सेक्स अपराधों को दर्ज करने की बात है – तो मात्र 54 हज़ार मामले दर्ज हो पाते हैं.
जो मामले दर्ज नहीं हुए उनका अनुमान सर्वेक्षण और सांख्यिकीय गणना के आधार पर निकाला गया है.
वहीं इसकी तुलना भारत से की जाए तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2011 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में एक साल में 24,206 बलात्कार के मामले दर्ज़ हुए.
यानी आँकड़ों को मानें, तो इंग्लैंड-वेल्स में भारत से दोगुना से भी ज़्यादा बलात्कार होते हैं, मगर तब है कि भारत में व्यवस्था को लेकर अनेक सवाल उठाए जाते हैं.
जावेद ख़ान बताते हैं,”दुर्भाग्य से भारत और ब्रिटेन में काफ़ी समानताएँ हैं, ब्रिटेन विकसित देश है, मगर यहाँ भी पीड़ितों में व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर इतना भरोसा नहीं है कि वो हर मामले को रिपोर्ट करें“.

सज़ा

"दुर्भाग्य से भारत और ब्रिटेन में काफ़ी समानताएँ हैं, ब्रिटेन विकसित देश है, मगर यहाँ भी पीड़ितों में व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर इतना भरोसा नहीं है कि वो हर मामले को रिपोर्ट करें."
जावेद ख़ान, मुख्य कार्यकारी, विक्टिम सपोर्ट
जिसतरह से भारत में बलात्कार और दूसरे अपराधों पर अंकुश नहीं लगने के लिए क़ानूनी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया जाता है, ठीक उसी तरह का इशारा ब्रिटेन की रिपोर्ट भी करती है.
रिपोर्ट कहती है कि जहाँ हर साल सेक्स अपराध के 4,53,000 मामले होते हैं, वहीं सज़ा मिलती है, केवल पाँच हज़ार, 620 लोगों को.
वहीं बलात्कार के मामले होते हैं 95 हज़ार, और सज़ा होती है केवल एक हज़ार लोगों को, यानी लगभग एक प्रतिशत.
वहीं बलात्कार के मामलों की सुनवाई में यहाँ औसतन 675 दिन लग जाते हैं, यानी लगभग दो साल. जबकि अन्य अपराधों के मुकदमे 154 दिन में निपट जाते हैं.
जावेद ख़ान बताते हैं ब्रिटेन के समाज में भी न्याय प्रक्रिया को और चुस्त किया जाना ज़रूरी है.
मगर वो साथ ही ये भी बताते हैं कि ब्रिटेन का समाज कुछ मामलों में भारत से अलग भी है.
वो कहते हैं,"एक बहुत बड़ा अंतर है कि यहाँ कम-से-कम आँकड़े तो आ रहे हैं, चाहे लंदन हो या कोई गाँव सारे अपराधों के बारे में, उनकी जाँच के बारे में, फिर सज़ा होती है कि नहीं इस बारे में जानकारी हो रही है और इसका विश्लेषण होता है जिसके आधार पर सरकार के सामने कोई बात रखी जा सकती है."
जावेद ख़ान बताते हैं कि भारत जैसे देशों में अभी इस दिशा में बहुत काम होना बाक़ी है, ख़ासकर गाँवों में जहाँ बलात्कार के मामलों को दर्ज़ करने का कोई सिस्टम तैयार नहीं हो सका है.

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