टेलीविजन कल आज और कल
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मानव सभ्यता के विकास के साथ आज के वर्तमान युग की मानव ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। मनुष्य जहां पहले गुफाओं में रहता था वहीं आज ईंट, सीमेंट के बने पक्के मकानों में एक सभ्य मानव बनकर निवास कर रहा है।
मानव का ये सभ्य रूप मानव के द्वारा उपयोग किये जा रहें संचार माध्यमों की ही देन हैं।
पहले के समय में संचार माध्यमों का ये रूप इतना विशाल नहीं था। आदिकाल में भी मानव संचाररत था परंतु उस समय के संचार को हम सीमित संचार का रूप कह सकते हैं।
जैसे जैसे मानव ने प्रगति की वैसे वैसे मानव ने नवीन संचार माध्यमों को तलाशना शुरू कर दिया और फिर लीपी का विकास हुआ। और मानव ने अपना रहन सहन का ढंग बदला।
मानव समाज में रहने लगा और समाज में रहने से मनुष्य में सूचनाओं का आदान प्रदान होने लगा। व वे संचार करने लगें।
पहले सूचनाओं के आदान प्रदान में समाचार पत्रों ने अपनी निर्णायम भूमिका अदा की और फिर रेडियो जनमाध्यम बनकर उभरा। लेकिन संचार माध्यमों को नया रूप उस समय मिला जब टेलीविजन आस्तित्व में आया। टेलीविजन एक ऐसा माध्यम है जो सूचनाआंें को प्रत्यक्ष दर्शकों के साथ जोड़ता है।
टेलीविजन का अविष्कार एक अकल्पित घटना थी जिसे सन् 1923 में सच कर दिखाया इग्लैण्ड के निवासी जॉन लोगी बेयॅर्ड ने। धीरे धीरे टेलीविजन में सुधार होते गए और विदेशों से निकलकर टेलीविजन भारत सन् 1959 में पहुंचा।
भारत एक कृषि प्रधान देश है। जहां साक्षरता दर कमी है। वहां टेलीविजन का आना अकल्पित था। शुरू में टेलीविजन बहुत महंगे होते थें और जिस घर में टेलीविजन होते थे उस घर के मालिक को साहु माना जाता था। श्वेतश्याम रूपी ये टेलीविजन भारतीय दर्शकों डरानें वाले थे जब भी कभी टेलीविजन पर कोई जानवर आता तो भारतीय दर्शकों लगता था कि ये बाहर आकर उन्हें खा जायेगा। फिर टेलीविजन पर दूरदर्शन ने लोगो को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया। धीरे धीरे दर्शकों को समझ आ गया कि यह सिर्फ एक संचार माध्यम है जिसका प्रयोग सूचनाओं को ग्रहण करने के लिए किया जाता है।
टेलीविजन ने नई क्रांति का सूत्रपात सन् 1982 के भारत के एशियाई खेलों को दिखा कर किया। और श्वेतश्याम से रंगीन रूप धारण किया। अब दर्शक रंगीन चलचित्रों व कार्यक्रमों का आनंद उठाने लगें।
वर्तमान में टेलीविजन आपने पूरे चरम पर है और अन्य माध्यमों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली है।टेलीविजन आज दर्शको तक नवीन और ताजी घटनाओं को तुरंत दर्शकों से प्रत्यक्ष रूप में जोडता है। आज समाचारों की बात करे तो संवाददाता घटना स्थल पर रहकर दर्शकों को घटनास्थल पर हो रही हर गतिविधियो के बारे में दिखाता है। आज भी टेलीविजन में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। श्वेतश्याम से रंगीन और अब थ्री डी टेलीविजन अस्तित्व में आ गए है। थ्री डी टेलीविजन, टेलीविजन का नया उभरता रूप है जिसमें दर्शक हर घटनास्थल की हर गतिविधि को अपने आस पास महसूस करता है।
टेलीविजन के भविष्य की बात करें तो प्रकृति में निरंतर बदलाव होता रहता है, और मानव निर्मित ये माध्यम भी मानव की सोच के अनूरूप परिवर्तित होते रहते है। पहले जहां श्वेतश्याम टेलीविजन सक्रिय थे वहीं उनका स्थान रंगीन टेलीविजन ने ले लिया। और अब थ्री डी टेलीविजन अस्तित्व में आ रहे है। व भविष्य में भी दर्शकों की जिज्ञासा व वैज्ञानिक-सोच के आधार पर टेलीविजन नया रूप धारण करता रहेगा।
मानव का ये सभ्य रूप मानव के द्वारा उपयोग किये जा रहें संचार माध्यमों की ही देन हैं।
पहले के समय में संचार माध्यमों का ये रूप इतना विशाल नहीं था। आदिकाल में भी मानव संचाररत था परंतु उस समय के संचार को हम सीमित संचार का रूप कह सकते हैं।
जैसे जैसे मानव ने प्रगति की वैसे वैसे मानव ने नवीन संचार माध्यमों को तलाशना शुरू कर दिया और फिर लीपी का विकास हुआ। और मानव ने अपना रहन सहन का ढंग बदला।
मानव समाज में रहने लगा और समाज में रहने से मनुष्य में सूचनाओं का आदान प्रदान होने लगा। व वे संचार करने लगें।
पहले सूचनाओं के आदान प्रदान में समाचार पत्रों ने अपनी निर्णायम भूमिका अदा की और फिर रेडियो जनमाध्यम बनकर उभरा। लेकिन संचार माध्यमों को नया रूप उस समय मिला जब टेलीविजन आस्तित्व में आया। टेलीविजन एक ऐसा माध्यम है जो सूचनाआंें को प्रत्यक्ष दर्शकों के साथ जोड़ता है।
टेलीविजन का अविष्कार एक अकल्पित घटना थी जिसे सन् 1923 में सच कर दिखाया इग्लैण्ड के निवासी जॉन लोगी बेयॅर्ड ने। धीरे धीरे टेलीविजन में सुधार होते गए और विदेशों से निकलकर टेलीविजन भारत सन् 1959 में पहुंचा।
भारत एक कृषि प्रधान देश है। जहां साक्षरता दर कमी है। वहां टेलीविजन का आना अकल्पित था। शुरू में टेलीविजन बहुत महंगे होते थें और जिस घर में टेलीविजन होते थे उस घर के मालिक को साहु माना जाता था। श्वेतश्याम रूपी ये टेलीविजन भारतीय दर्शकों डरानें वाले थे जब भी कभी टेलीविजन पर कोई जानवर आता तो भारतीय दर्शकों लगता था कि ये बाहर आकर उन्हें खा जायेगा। फिर टेलीविजन पर दूरदर्शन ने लोगो को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया। धीरे धीरे दर्शकों को समझ आ गया कि यह सिर्फ एक संचार माध्यम है जिसका प्रयोग सूचनाओं को ग्रहण करने के लिए किया जाता है।
टेलीविजन ने नई क्रांति का सूत्रपात सन् 1982 के भारत के एशियाई खेलों को दिखा कर किया। और श्वेतश्याम से रंगीन रूप धारण किया। अब दर्शक रंगीन चलचित्रों व कार्यक्रमों का आनंद उठाने लगें।
वर्तमान में टेलीविजन आपने पूरे चरम पर है और अन्य माध्यमों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली है।टेलीविजन आज दर्शको तक नवीन और ताजी घटनाओं को तुरंत दर्शकों से प्रत्यक्ष रूप में जोडता है। आज समाचारों की बात करे तो संवाददाता घटना स्थल पर रहकर दर्शकों को घटनास्थल पर हो रही हर गतिविधियो के बारे में दिखाता है। आज भी टेलीविजन में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। श्वेतश्याम से रंगीन और अब थ्री डी टेलीविजन अस्तित्व में आ गए है। थ्री डी टेलीविजन, टेलीविजन का नया उभरता रूप है जिसमें दर्शक हर घटनास्थल की हर गतिविधि को अपने आस पास महसूस करता है।
टेलीविजन के भविष्य की बात करें तो प्रकृति में निरंतर बदलाव होता रहता है, और मानव निर्मित ये माध्यम भी मानव की सोच के अनूरूप परिवर्तित होते रहते है। पहले जहां श्वेतश्याम टेलीविजन सक्रिय थे वहीं उनका स्थान रंगीन टेलीविजन ने ले लिया। और अब थ्री डी टेलीविजन अस्तित्व में आ रहे है। व भविष्य में भी दर्शकों की जिज्ञासा व वैज्ञानिक-सोच के आधार पर टेलीविजन नया रूप धारण करता रहेगा।
Globalization in Hindi
जवाब देंहटाएंShare Market in Hindi
BPO in Hindi
SIP in Hindi
Kisan Credit Card in Hindi
ATM in Hindi
SENSEX in Hindi
जवाब देंहटाएंCredit Card in Hindi
UPI in Hindi
cryptocurrency in Hindi
GST in Hindi
Budget in Hindi
जवाब देंहटाएंIMPS in Hindi
Nifty in Hindi
IFSC in Hindi
PAN Card in Hindi
Mutual Fund in Hindi
जवाब देंहटाएंKYC in Hindi
Commercial Bank in Hindi
Central Bank in Hindi
MLM Network Marketing in Hindi
EMI in Hindi