गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

क्राइम रिपोर्टर दहशत में हैं मुंबई के क्राइम रिपोर्टर




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दहशत में हैं मुंबई के क्राइम रिपोर्टर
जिग्ना के सातवें मोबाइल फोन की जांच के बाद मुंबई पुलिस की गाज अब संदिग्ध पत्रकारों पर गिरनेवाली है। इस आशंका से मुंबई के क्राइम रिपोर्टर सहमे हुए हैं। समाचार है कि पत्रकारों की काल डीटेल पर भी पुलिस की बाज नजरें हैं। जिग्ना वोरा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इन रिपोर्टरों के अन्य तरह के चरित्र के बारे में भी कई विशेष जानकारियां प्राप्त हुई हैं, क्योंकि कई पत्रकारों के अलावा उनके साथ के पत्रकारों तथा अन्य लोगों के फोन भी टैप पर होने के समाचार हैं, ताकि पता चल सके कि ये पत्रकार किस मोडस ओपरेंड़ी से काम करते हैं। जिन पत्रकारों ने दूसरे मोबाइल फोन या दूसरों के मोबाइल का उपयोग किया है, उसकी जानकारी उनके नजदीकी लोगों के फोन पर आई काल से पुलिस ने पता कर रही है। पत्रकारों में यही सवाल पूठा जा रहा है कि जिग्ना के बाद अगला कौन होगा ?
सूत्रों के मुताबिक जे. डे. हत्याकांड में जिग्ना वोरा जब पुलिस के शक के दायरे में आई थी तभी से पुलिस की नजर इन रिपोर्टरों पर भी है। इन सूत्रों का यह भी कहना है कि जिग्ना से खबरों का आदान प्रदान करने वाले पत्रकारों पर विशेष रूप से पुलिस की नजर है। बिल्डरों से हफ्तावसूली में भी जिग्ना का हाथ होना अब सामने आया है, परंतु पुलिस को कई अन्य पत्रकारों के भी बिल्डरों से वसूली के इस प्रकार के मामलों में शामिल होने की पुख्ता जानकारी है। पुलिस के पास इस बात की भी पुख्ता जानकारी है कि कुछ समय पहले किन पत्रकारों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर ही मुंबई के कई बिल्डरों को अंडर वर्ल्ड ने धमकाकर करोड़ों रुपए की हफ्ता वसूली की थी। पुलिस ने इन संदिग्ध पत्रकारों के उस समय के फोन पर बातचीत के रेकार्ड भी जमा कर लिए हैं, तथा अब एक बार फिर पुलिस ने इन पत्रकारों के फोन तथा उनसे जुड़े लोगों के काल पर भी नजर रखनी शुरू की है, ऐसी जानकारी मिली है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से खबर है कि बिल्डरों से हफ्ता वसूली करने के मामले में अंडरवर्ल्ड के साथ जिग्ना का हाथ साबित होने के पहले से ही पुलिस ने कुछ अन्य क्राइम रिपोर्टरों को भी अपने निशाने पर रखा हुआ है। इस कारण होनेवाली बदनामी के डर से कतिपय समाचार पत्रों और समाचार चैनलों ने अपराध जगत से घोषित संबंध रखनेवाले ऐसे क्राइम रिपोर्टरों को साइड लाइन कर दिया है हालांकि अपने फोन टैप होने के अंदेशे के कारण संदिग्ध चरित्र के क्राइम रिपोर्टरों ने जिग्ना की गिरफ्तारी के बाद से ही अंडरवर्ल्ड को काल करने बंद कर दिए हैं। कुछ क्राइम रिपोर्टरों ने क्राइम कवर करना छोड़कर कोई अन्य काम करना शुरू कर दिया है, उनकी हर गतिविधि पर   पुलिस काफी सतर्कता से नजर रखे हुए है। यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि जिग्ना वोरा के अंडरवर्ल्ड के लिए काम करने की कड़ियां जैसे जैसे मिल रही है, मुंबई पुलिस को कई और पत्रकारों के भी अंडरवर्ल्ड के लिए काम करने की जानकारियां मिल रही है, तथा पहले किस क्राइम रिपोर्टर ने अंडरवर्ल्ड के लिए क्या काम किया है, इसकी भी जानकारी उनकी काल डीटेल से प्राप्त की जा रही है।


पुलिस सूत्रों से पता चला है कि पुलिस को यह बिल्कुल गहरी सतह तक जानकारी है कि मुंबई का कौनसा रिपोर्टर वास्तविक रिपोर्टर है तथा कौनसा रिपोर्टर अंडरवर्ल्ड के कुछ लोगों के इशारे पर काम करता रहा है। अंडरवर्ल्ड के साथ जिग्ना का हाथ साबित होने के बाद पुलिस ने कुछ अन्य क्राइम रिपोर्टरों को भी अपने सख्त निशाने पर रखा हुआ है। इन रिपोर्टरों पर अंडरवर्ल्ड को हफ्तावसूली के लिए बड़े बिल्डरों के सुराग उपलब्ध कराने के शक की सुंई है। मुंबई के मीडिया जगत में जबसे यह समाचार फैला है कि शहर के कई क्राइम रिपोर्टर पुलिस के टारगेट पर हैं तथा आनेवाले कुछ दिनों में पत्रकारों से भी पूछताछ की जा सकती है, तो पत्रकार सहमें हुए है ही, साथ साथ समाचार पत्र तथा समाचार चैनलों में भी सनसनी पैली हुई है। तथा संदिग्ध चरित्रवाले क्राइम रिपोर्टरों को काम से दरकिनार कर दिया गया है। जिग्ना वोरा की गिरफ्तारी से एशियन एज जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र को काफी बदनामी जेलनी पड़ी है, इसी तथ्य को ध्यान में रखकर प्रबंधनों ने अपने स्तर पर कदम उठाने शुरू किए हैं।

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