शनिवार, 3 दिसंबर 2011

सुब्रत राय सहारा की दुनिया ( दो खास युवतियां जानेंगी सहाराकर्मियों के दिल का हाल!)


सुब्रत राय उर्फ सहाराश्री लगातार कुछ न कुछ करते रहने के लिए जाने जाते हैं. कहने वाले कहते हैं कि लोग जहां सोचना बंद करते हैं, वे वहां से शुरू करते हैं. सुब्रत राय को लेकर कई तरह के मिथ हैं. कंपनी चलाने की उनकी प्रशासनिक शैली के भी कई लोग कायल हैं. कब किसको सरताज बना देंगे और कब किसको धूल चटा देंगे, इसका अंदाजा किसी को नहीं रहता. मजेदार यह कि जो धूल चाटता दिखता है वह भी सहाराश्री के गुण गाता है और जो सरताज रहता है वह तो हर वक्त उनकी जय जय करता ही है.
फिलहाल सुब्रत राय का जिक्र हम यहां उनके कामकाज के तरीके के लिए नहीं कर रहे हैं बल्कि इसलिए कर रहे हैं कि उन्होंने एक नई पहल की है. देश के कोने कोने में फैसे सहाराकर्मियों के दिल का हाल जानने के लिए वे खुद तो हर जगह नहीं जा सकते इसलिए उन्होंने दो विश्वस्त महिलाओं को यह कार्यभार सौंपा है. ये कौन हैं और वे क्या करेंगी, इसका उल्लेख उस आंतरिक आदेश में किया गया है जिस पर सहारश्री के हस्ताक्षर हैं और इसे हर आफिस के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया है. पढ़ें और बूझें... इस आदेश के निहितार्थ क्या हैं...


7 Comments


Naval Kishore said...
क्या ही अच्छा होता अगर ये सहारा छ्चोड़ने को मजबूर किए गये लोगों से भी मिलकर वास्तविकता से रूबरू हों .डबराल और सुमित राय के जमाने में जो नंगा नाच राजेश कुमार सिंह ने किया और इन दोनों बुढवा को सुरा और सुंदरी में डूबा कर जो राजेश के खिलाफ थे और जिन्होने इनका विरोध किया उन्हे सहारा छ्चोड़ने के लिए मजबूर किया गय.एक बार उन लोगों से ज़रूर मिलेनऽइसे लोगों की मध्य प्रदेश और छत्तिस्गद में बहुतायत है. नवल किशोर *strong text*
अज्ञानी said...
यह कदम वास्तव में सराहनीय है और इसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है ! अगर यही संस्कृति देश में मौजूद हर संस्था अपना ले तो बॉस पर बनने वाले चुटकलों का अकाल पड़ जाएगा :) मेरी एक शिकायत भी है यशवंत जी, मीडिया में जो सनसनी बनाने की आदत है भड़ास भी उससे अछूता नहीं है! "सुब्रत राय की दो खास युवतियां जानेंगी सहाराकर्मियों के दिल का हाल!" सुब्रत जी के पत्र में कहीं की ये उल्लेख नहीं है कि उन्होंने २ युवतियों को नियुक्त किया है जरा कल्पना कीजिये ये दोनों युवतियां ५० से ऊपर की होंगी तो क्या फिर भी आपकी हैडलाइन यही रहेगी? क्या इन चीजों से बचा नहीं जा सकता?
प्रशान्त said...
अगर कोई मालिक नहीं है तो सहारा के मुखिया और कार्यकर्ता की जिन्दगी जीने के तरीके में इतना फर्क क्यों है.
Bijay singh said...
strong text wowwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwww
bob said...
samreen ji ki nazar hum par bhi pad jaye to achcha ho ga.shayad sahara ki permanent nokri se nikale gae logon ka bhala ho jaye.
sahid said...
agyani tum subrat ke chamche lag rahe ho
Pandey Rajoo said...
Shahid tum bahut hi harami ki aulad ho

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