सोमवार, 19 दिसंबर 2011

बिहार में विकास दिख रहा है?

Monday, December 19th, 2011
 
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Published on July 16, 2010 by NEWS SOURCE   ·   No Comments  ·   Post Views  73 views
लगभग पांच वर्ष पूर्व जब बिहार में सत्ता नीतीश कुमार के हाथ में आयी तो शायद ही अवाम को एहसास हुआ होगा कि यह सरकार पूरे विश्व में अपनी जय-जयकार करा लेगी। हिन्दी मीडिया से लेकर विदेशी मीडिया ने नीतीश कुमार की खूब तारीफ की।
new bihar roads 400x300 बिहार में विकास दिख रहा है?बिहार की विकास दर को अमेरिका ने भी आश्चर्यजनक कहा हालांकि विपक्षी नेता इसे नीतीश मैनेजमेंट का हिस्सा बताते हुए विकास की बात को पूरी तरह से नकारते हैं।
विपक्ष का कहना है कि यदि विकास हुआ है तो नये-नये प्रोजेक्ट पर काम क्यों नहीं हुआ? नये-नये कल-कारखाने क्यों नहीं खुले? विपक्षी दलों के नेताओं के अनुसार नीतीश सिर्फ कागजी विकास दिखा कर लोगों के साथ छलावा कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो आरोप लगाने वालों को यह भी बताना चाहिए कि क्या नीतीश से पूर्ववर्ती सरकारों ने धरातल पर विकास किया था क्या? यदि किया था तो कहां दिखता था?
नीतीश कुमार ने भले ही चन्द कार्य ही किये हों परन्तु वे दिखते हैं। 5 साल पहले 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में 4 घंटे का समय लगता था, वह दूरी आज महज दो घंटे की रह गयी है। पूरे सूबे में पक्की सड़कों का जाल बिछ गया। कोई भी राष्ट्रीय उच्च पथ ऐसा नहीं बचा होगा जिसको चैड़ा या पक्का नहीं किया गया हो। राजधानी पटना में सड़कों के साथ-साथ पार्को का निर्माण कर शहर को सुन्दर करने का बेहतर प्रयास किया गया। वर्षो से लम्बित पटना शहर के भूगर्भ नाले का निर्माण स्वयं मुख्यमंत्राी की देख-रेख और नियंत्राण में हुआ ताकि पटना के निचले हिस्से में रहने वाले लोगों को बरसात के जल-जमाव मुक्ति मिल सके।
सरकार की खामियों को उजागर करना विपक्ष का काम है। इसके साथ ही विपक्ष का यह भी धर्म है कि राज्य के विकास में वह रचनात्मक सहयोग सरकार को दे और यदि सरकार जनहित के विपरीत जा रही हो तो उस पर अंकुश लगाये लेकिन बिहार में विपक्ष अपने विपक्ष धर्म से दूर प्रतीत होता है, यानी विपक्ष कमजोर है।
दूसरी बात मीडिया पर परोक्ष या अपरोक्ष मैनेज होने का आरोप लगाने वाले सत्य और तार्किकता से दूर हैं। उन्हें यह जानना चाहिए कि मीडिया वही कर रहा है जो उसका कत्र्तव्य है। मीडिया सरकार की उपलब्धियों और खामियों दोनों को सामने रखता है। नीतीश के कार्यकाल में मीडिया ने लीक से हटकर कुछ नहीं किया। सरकार के जो कार्य दिख रहे हैं उन्हें मीडिया में जगह मिली। सरकार की घोषणाओं, कार्यो, योजनाओं का कवरेज पक्षपात या मैनेज नहीं होता। वह कर्तव्य है। चाहे जिसकी सरकार हो, मीडिया अपना कर्तव्य निभायेगा।
नीतीश कुमार की सरकार भले सामान्य अपराध पर अंकुश लगाने में धीमी रफ्तार में कामयाब हो रही हो परन्तु बड़े अपराधों पर लगभग रोक सी लग लग गयी है। अपहरण या अपराध होते तो जरूर हैं पर इनका औसत इतना कम हो गया है कि यदि कोई घटना हो गई तो प्रशासन इतना चैकस है कि अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई हो जाती है।
चन्द महीने पूर्व राजधानी के कंकड़बाग थाना क्षेत्रा में एक अबोध बच्चे का अपहरण कर लिया गया। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 4 घंटे में बच्चे की बरामदी के साथ-साथ अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद उत्साहित पटना के सिटी एसपी मनु महाराज ने थाना में संवाददाताओं से बात करते हुए थानाध्यक्ष रामाकान्त प्रसाद को रिवार्ड देने की बात भी कही। यह तो केवल एक उदाहरण मात्रा है। ऐसी कई घटनाओं में पुलिस की भूमिका काफी प्रशंसनीय रही है।
जर्जर बिहार की टेªेन जो पटरी से उतर कर सड़क के बजाय खेतों में चली गयी, उसे फिर से पटरी पर वापस लाकर इसमें ईंधन भर कर चलाना इतना आसान भी नहीं था। नीतीश कुमार ने कोई जादू की छड़ी नहीं घुमायी, सिर्फ व्यवस्था को व्यवस्थित किया, जिसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता थी।
मधुप मणि ’पिक्कू‘
मधुप मणि ’पिक्कू‘

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