रविवार, 11 सितंबर 2011

किशमिश नही अखरोट है खोजी पत्रकारिता: पाण्डेय



कार्यशाला में प्रतिभागियों से रूबरू ऋषि पाण्डेय 
सिरसा। खोजी पत्रकारिता जोखिम भरा कार्य है मगर उसमें धन, मान और संतुष्टि तीनों मिलते हैं। खोजी पत्रकारिता के माहिर खबरनवीसों को मीडिया में खास पहचान ही नहीं मिलती बल्कि उन्हें तरक्की के अपेक्षाकृत अधिक अवसर भी प्राप्त होते हैं। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार और समरघोष के स्थानीय संपादक ऋषि पांडेय का। वे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में चल रही प्रिंट व साइबर मीडिया कार्यशाला में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता शिक्षा प्राप्त करने के बाद कई टेलीविजन चैनलों के लिए रिपोर्टिंग कर चुके पांडेय टोटल टीवी के आउटपुट हेड रह चुके हैं। कार्यशाला के इस सत्र की अध्यक्षता पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष व सामुदायिक रेडियो के निदेशक वीरेंद्र सिंह चौहान ने की।
पांडेय ने कार्यशाला में शिरकत कर रहे भावी मीडियाकर्मियों से दो टूक शब्दों में कहा कि निस्संदेह खोजी पत्रकारों को खूब शोहरत व पहचान मिलती है मगर इसे हासिल करने का कोई शार्ट-कट मार्ग नहीं है। परिश्रम व साधना के बल पर ही इस क्षेत्र में कामयाबी हासिल की जा सकती है।पांडेय ने कहा कि खोजी पत्रकारिता को यदि मेवा मान लिया जाए तो मेवों में वह किशमिश के बजाय अखरोट है, जिसका स्वाद लेने के लिए पहले कठोर छिलका निकालने का श्रम करना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकार अपराध के मामलों में पुलिस की दी हुई सूचना पर प्रथम दृष्टया कभी विश्वास नहीं करते। ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस आमतौर पर तथ्यों को छिपाने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि सफल अपराध संवाददाता को नवीनतम प्रोद्योगिकी और खासकर साइबर मीडिया की समझ होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल ही के दिनों में सोशल नेटवर्किंग साइट्स और मोबाइल के जरिए कई बडे़ व चर्चित आपराधिक मामलों के पेंच खोलने में पुलिस व खबरनवीसों को कामयाबी मिली है।
पांडेय ने कहा कि एक खोजी पत्रकार की सबसे बड़ी ताकत उसके सूत्र और स्रोत होते हैं। बकौल पांडेय सूत्र अक्सर साधारण लोग या कर्मचारी होते हैं चूंकि वरिष्ठ अधिकारियों से बड़ी खबरो के ंसकेत मिलने की संभावना काफी सीमित होती है। ऐसा आमतौर पर होता है कि किसी कार्यालय का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से आपको आपके पत्रकारिता जीवन की सबसे बड़ी खबर का संकेत मिल जाता है। उन्होंने कहा कि ईमानदार और विश्वसनीय रिपोर्टर के पास खबरें खुद चल कर आने लगती हैं।
अच्छा अपराध संवाददाता और खोजी पत्रकार बनने के लिए किसी भी व्यक्ति को लगातार पढ़ते रहने और अपनी जानकारी को अपडेट करते रहने का स्वभाव विकसित करना चाहिए। कानून के विभिन्न प्रावधानों पर पकड़ होना भी उन्होंने सफलता के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आपराधिक घटनाओं को कायदे से कवर करने के लिए जरूरी है कि रिपोर्टर को भारतीय दंड संहिता और आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता की अच्छी समझ हो।
एक प्रश्न के उत्तर में ऋषि पांडेय ने कहा कि खबर लिखते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपकी भाषा अत्यंत सरल हो। यह मानकर लिखा जाना चाहिए कि आपका पाठक महज आठवीं पास व्यक्ति है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता साहित्य नहीं बल्कि सूचना देने का कारोबार है।
उन्होंने स्वीकार किया कि मीडिया उद्योग में कुछ काली भेडें भी हैं जो छापने के बजाय छिपाने के नाम पर गोरखधंधा करती हैं। मगर ऐसे लोगों के चरित्र के बारे में सबको खबर रहती है चूंकि मीडिया उद्योग बहुत छोटा है और इसमें किसी का काला कारनामा बहुत अधिक समय पर छिपा नहीं रह सकता।
पांडेय ने कहा कि जिस स्तर की सुविधाएं व प्रशिक्षण चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों को हासिल है वह देश के गिने चुके शिखर संस्थानों को छोड़कर कहीं उपलब्ध नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों का आवाहन किया कि वे इन संसाधनों का भरपूर लाभ उठाते हुए मीडिया उद्योग में स्वयं को स्थापित करें ।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में विभागाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रिंट व साइबर मीडिया ही नहीं टेलीविजन में भी अच्छा लिखने वाले लोगों के लिए रोजागर के भरपूर अवसर मौजूद हैं और विद्यार्थियों को अन्य बातों के साथ साथ अपनी लेखन क्षमता में सुधार के लिए अनवरत अभ्यास करना चाहिए। इस अवसर पर प्रतिभागियों के अलावा शिक्षण सहयोगी कृष्ण कुमार, विकास सहारण, सुरेंद्र कुमार, सन्नी गुप्ता व पूनम कालेरा भी मौजूद थे।।

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