मंगलवार, 6 सितंबर 2011

शंकर दयाल सिंह : क्या सच क्या झूठ

मंगलवार, ६ सितम्बर २०११





आपातकाल के दौरान इमरजेसी: क्या सच और क्या झूठ किताब लिखकर इसका कच्चा चिठ्ठा खोलने वाले बिहार के हरदिल अजीज अजीज सांसद और लेखक दिवंगत शंकर दयाल सिंह की बेहद लोकप्रिय किताब है। त्तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाक के बाल रहे शंकर दयाल जी इस किताब के चलते ही कांग्रेस पार्टी और श्रीमती गांधी की गुड बुक से बाहर हो गए। हर आदमी को अपना बनाकर उसके हो जाने वाले शंकर दयाल जी का मुस्कुराता चेहरा और जोरदार ठहाके आज भी लोगों को बरबस चौंका देती है। किसी मिठाई से भी ज्यादा मिठास भरे शंकर दयाल जी के इस साल जन्मदिन (27 दिसंबर) का 75वां साल है। जिसे अम़ृत महोत्सव की तरह एक महा उत्सव सा पूरे वर्ष मनाया जाएगा। इसे एक अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक राजनीतिक और पत्रकारिय जलसे के रूप दिया जा रहा है। इस महाऊत्सव को सालाना अंतरराष्ट्रीय जलसे  के समान मनाने की योजनाओं पर काम चल रहाहै। कई किस्तों में सांसद और मंत्री रह चुके और कश्मीर नरेश के अलावा भारतीय साहित्यिक संबंध परिषद के अध्यक्ष के रूप में काम देख रहे डा. कर्ण सिंह इस आयोजन समिति के मुखिया है। देश के कई राज्यों के साथ ही विदेशों में भी कुछ कार्यक्रम कराने की योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें खासतौर पर शंकर दयाल जी के पुत्र रंजन और राजेश के अलावा बेटी रश्मि सिंह की त्तत्परता लगन मेहनत और काम करने के अनथक प्रयासों का ही नतीजा है कि राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल इस अम़ृत महोत्सव का शुभारंभ करेंगी। सूर्य मंदिर के लिए जग विख्यात गांव कस्बा (जो नाम दे दे) देव में सूर्य मंदिर के बाद देव, भवानीपुर गांव के शंकर दयाल सिंह और इनके पिता कामता प्रसाद सिंह काम को ही लोग जानते और मानते रहे है। एक छोटे से गांव से बाहर निकल कर दुनियां भर में विख्यात होने वाले इस ग्रामीण धरती के सपूत जिसने अपनी कलम से पूरी दुनियां को रौंद डाला और अपनी मुस्कान से सबों को अपना बना लेने वाले इस जादूगर को अपने गांव देहात की जनता की तरफ से नमन। गांव के हर उस आदमी की तरफ से सलाम जिसके पास इस पिता पुत्र को लेकर दर्जनों कथा कहानी और संस्मरण आज भी जिंदा है। देव की हर आदमी की तरफ से मैं इस महा उत्सव की सफलता की कामना करता हूं। इस परिवार की तीसरी पीढी के  साथ हर समय हरदम जुड़े रहने की आंकाक्षा रहेगी, क्योंकि इसी बहाने शायद देव के लिए हमलोग कुछ काम आ सके।


लेखक सासंद और यायावर शंकर दयाल समारोह


जीवन भर यात्रा और कंही सुबह कहीं शाम बीताने वाले यायावर शंकर दयाल सिंह की मौत भी एक यायावर की तरह ही चलती रेल में हुई थी। बतौर सासंद अपनी जीवन यात्रा समाप्त करने वाले लेखक और बिहार में साहित्य और मंच को लेकर हमेशा सक्रिय रहने वाले शंकर दयाल सिंह 27 दिसंबर 2011 को 75 साल पूरे करते। निधन होने के बाद भी इनके सुयोग्य पुत्रों ने अपने पिता की याद में एक साल तक चलने वाले एक अमृत महोत्सव समारोह का आयोजन किया है। जिसकी शुरूआत राष्ट्रपति भवन में देश की पहली महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल करेंगी।
शंकरदयाल सिंह के पुत्र रंजन कुमार सिंह ने बताया कि 27 दिसम्बर 2011 के बाद पूरे साल भर बिहार झारखंड़ यूपी और दिल्ली में दर्जनों कार्यक्रम होगें। जिसमें कवि सम्मेलन संगोष्ठी से लेकर सांस्कृतिक समारोह शामिल है। रंजन ने कहा कि इन कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जा रही है।
गौरतलब है कि लेखक और साहित्यकार कामता प्रसाद सिंह काम के पुत्र शंकर दयाल सिंह के साहित्य परिवार की यह तीसरी पीढ़ी है। रंजन ने बताया कि शंकर जी के गांव भवानीपुर, देव के कामता सेवा केंद्र से लेकर पिताजी की यादों से सराबोर उन तमाम स्थानों पर कोई ना कोई कार्यक्रम जरूर किया जाएगा। इस मौके पर स्मारिका और कई पुस्तकों के प्रकाशन की भी योजना है। रंजन के अनुसार सितम्बर 2011 तक साल दिसंबर 2012 तक चलने वाले सारे समारोहों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। यानी शंकर दयाल सिंह की यादों से नयी पीढ़ी को परिचित कराने की इस मुहिम को बच्चों समेत सभी उम्र के लोगों को साझेदार बनाया जाएगा कि वे भी इस मौके पर इस बहुमुखी तचनाकार पत्रकार लेखक और हरदिल अजीज राजनीतिक के बारे में अपने अनुभव को साझा कर सके।

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