शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

मौत से ज्यादा क्या है............




रामावतार त्यागी

रामावतार त्यागी पर जितना जानने का प्रयास किया जाए उतना कम ही है। उनका एक प्रसिद्ध गीत है -
एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले।
मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले।।
जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है?
तेरे दामन में बता मौत से ज्यादा क्या है?
जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है?
इस गीत को बचपन से सुनता आ रहा हूँ। कितनी ही बार इस गीत को सुनो मन ही नहीं भरता है। वेदना का यह गीत घोर निराशा से आशा की ओर ले जाता है। काल की बात करें तो यह वह समय था जब सिनेमा में निराशा भरे जीवन में साहस का संचार करने वाले कई गीत लिखे गए थे, जिन्होंने दर्शकों और श्रोताओं में नया उत्साह उत्पन्न किया। फिल्म ‘जिंदगी और तूफान’ (1975) के इस गीत में विशेष बात यह रही कि इसमें कवि रामावतार त्यागी ने जीवन की उस सच्चाई का प्रदर्शन किया है जिसे स्वीकारने से तत्कालीन समाज डरता रहा है। यह विशेष प्रकार का और निडर प्रयोग था। उन्होंने समाज के तथाकथित सभ्य समाज की आँखों में आँखें डाल कर बात की। अवैध संतान पैदा करने वालों और फिर उस संतान को सभ्य समाज द्वारा ठोकरे मारने वालों को कटघरे में खड़ा कर दिया। कौम के अय्याश अगर अवैध संबंध बनाते हैं और संतान जन्म ले लेती है तो उसमें ऐसी संतान का दोष क्या है? इसके बावजूद ऐसी संतान किससे शिकायत करे? इसलिए वह अपनी जिन्दगी को चुनौति मानकर स्वीकार करता है। ‘मेरे दामन में बता मौत से ज्यादा क्या है।’ वह मृत्यु से तनिक भी डरता नहीं है। कवि रामावतार त्यागी ने सिनेमा के लिए लिखे गीत ‘जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है’ से काफी प्रसिद्धि बटोरी परंतु हिंदी साहित्य के समीक्षकों ने उनके साथ न्याय नहीं किया।
कवि रामावतार त्यागी के समय के साहित्य की बात करें तो सन् 1936 ई. के आस-पास कविता में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक शोषण से मुक्ति का स्वर अभिव्यक्त होने लगा था। इसी नवीन धारा को प्रगतिवाद नाम दिया गया। जिसका प्रारंभ पंत व निराला ने किया। बाद में भगवती चरण वर्मा, गोपाल सिंह नेपाली, शिवमंगल सिंह सुमन ने प्रगतिवादी रचनाओं का भण्डार भरा। इसी यात्रा पर गोपालदास नीरज, रामावतार त्यागी, रामानंद दोषी, रमानाथ अवस्थी, वीरेन्द्र मिश्र, गजानन माधव मुक्तिबोध, केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन, त्रिलोचन जैसे कवि भी आगे बढ़े। इन कवियों की रचनाओं में बौद्धिक चिंतन की प्रधानता रही है। यह कविता व्यक्तिवाद, कलावाद के कारण चर्चा में रहीं। मध्यवर्गीय व्यक्तियों की मानसिक कुंठाओं और अपने अंतर्मुखी होने के कारण अधिकांश कवितायें साधारण पाठक की समझ में नहीं आती थीं। परंतु कवि राम अवतार त्यागी ने जिस शैली को अपनाया वह आम पाठक की समझ में खूब आती थी। वह शहर में रहते हुए और शहरी जिन्दगी से दुखी होकर कहते हैं-
मैं तो तोड़ मोड़ के बंधन
अपने गाँव चला जाऊँगा
तुम आकर्षक सम्बन्धों का,
आँचल बुनते रह जाओगे।
कवि राम अवतार त्यागी की लगभग पंद्रह पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनकी कुछ कविताएँ एनसीईआरटी के हिंदी पाठ्यक्रम में भी शामिल की गईं। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा के कक्षा आठ के पाठ्यक्रम में भी उनकी ‘समर्पण’ नामक कविता शामिल है। कवि सम्मेलनों में त्यागी जी स्वरचित कविताओं को लय-ताल के साथ गाते थे। ‘जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है’ गीत को तो मंचों पर उन्होंने सबसे ज्यादा बार गाया। त्यागी जी ने नवभारत टाइम्स में ‘क्राइम रिपोर्टर’ से लेकर साप्ताहिक स्तंभ लेखन तक का काम किया। यही नहीं बल्कि उनके जीवन की खास बात यह भी रही कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा ने उन्हें राजीव गांधी और संजय गांधी हिंदी वाचन के लिए निजी शिक्षक भी नियुक्त किया।
ऐसे यशस्वी साहित्यकार रामावतार त्यागी का जन्म 08 जुलाई सन 1925 को जनपद मुरादाबाद के अन्तर्गत संभल (वर्तमान में जिला है) तहसील के कुरकावली ग्राम में त्यागी (भूमिहार ब्राह्मण) परिवार में 17 मार्च, 1925 को हुआ। घर की रूढ़िवादिता से विद्रोह कर त्यागी ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की। अंत में दिल्ली आकर इन्होंने वियोगी हरि और महावीर अधिकारी के साथ सम्पादन कार्य किया। त्यागी पीड़ा के कवि हैं। इनकी शब्द-योजना सरल तथा अनुभूति गहरी है। इनका कविता संग्रह ‘आठवाँ स्वर’ पुरस्कृत है। रामावतार त्यागी हिन्दी गीत की दुनिया में एक उल्लेखनीय, प्रतिष्ठित, सम्मानित कवि के रूप में तो विख्यात रहे ही, अपने स्वभाव, खुरदुरे व्यक्तित्व एवं स्वाभिमानी मिजाज के कारण विवादास्पद भी रहे। जिस आयोजन में त्यागी जी मौजूद हों, उस पर विशिष्ट हो जाना निश्चित था। जीवन की उदास शामों, कठिन चुनौतियों को प्रखर अभिव्यक्ति देने वाले रामावतार त्यागी अपने गहरे अवसाद पूर्ण गीतों में भी अभिव्यक्ति के ऐस आयाम प्रस्तुत करते थे जो अन्यत्र दुर्लभ हैं। यह महान कवि 12 अप्रैल सन 1985 को इस नश्वर दुनिया को छोड़ सदा के लिए चला गया।
वह देशप्रेमी कविताएं भी खूब लिखते थे। उनकी ‘समर्पण’ कविता विभिन्न पाठ्यक्रम में शामिल की गई है।
मन समर्पित तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूँ
कविता का पाठ करते करते मन में जो देशभावना उमड़ती है वह देखने लायक होती है।
पत्र-पत्रिकाओं में भी रामावतार त्यागी की रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। लेखक शेरजंग गर्ग ने रामावतार त्यागी पर एक पुस्तक - ‘हमारे लोकप्रिय गीतकार: रामावतार त्यागी’ लिखी है जो वाणी प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित है। एक और पुस्तक क्षेमचन्द्र सुमन ने भी ‘रामावतार त्यागी’ (हिन्दी के कवि) प्रकाशित कराई थी। इसके अलावा साहित्यकार रामावतार त्यागी की पुस्तकें हैं-
1. गीत बोलते हैं (काव्य)
2. गाता हुआ दर्द (काव्य)
3. आठवाँ स्वर  (काव्य)
4. मैं दिल्ली हूँ (काव्य)
5. गुलाब और बबूल वन  (काव्य)
6. समाधान (उपन्यास)
7. चरित्रहीन केे पत्र (उपन्यास)
8. नया खून (काव्य)
9. सपने महक उठे (काव्य)
10. दिल्ली जो एक शहर था
11. राम झरोखा
12. राष्ट्रीय एकता की कहानी
13. महाकवि कालीदास रचित मेघदूत का काव्यानुवाद (काव्य)
14. गीत सप्तक-इक्कीस गीत (काव्य)
रामावतार त्यागी जिस गाँव में पले बढ़े उससे बहुत प्यार करते रहे। यहाँ तक कि दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में भी अपने गाँव की बात करना नहीं भूले। उन्होंने जितना प्रेम अपने गांव को किया उससे कहीं अधिक अपने देश को भी किया। प्रकृति प्रेम उनके साहित्य स्पष्ट झलकता है तो सामाजिक ताने-बाने को भी उन्होंने अपने साहित्य की विषयवस्तु बनाया है। किंतु दुख का विषय है कि रामावतार त्यागी जैसे महान साहित्यकार और उनके साहित्य पर अभी आवश्यक प्रकाश नहीं डाला गया है। ऐसे में रामावतार त्यागी के व्यक्तित्व एवं उनके कृतित्व पर विषद अध्ययन की आवश्यकता है।

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