सोमवार, 1 दिसंबर 2014

क्लोज़ अप में ली गयी फोटो का होता है प्रभाव अलग





प्रस्तुति-- प्रमोद अखौरी, धीरज पांडेय


"फोटो को अधिक अच्छी और प्रभावशाली बनाने के लिए लांग शाट के बजाये क्लोज़ अप में लें और हमेशा लक्ष्य को ध्यान में रखें" यह कहना है प्रख्यात लेखक एवं फोटो पत्रकार बाबी रमाकांत का. सन 1991 से लेखन क्षेत्र से जुड़े नागरिक पत्रकार बाबी रमाकांत फोटो पत्रकारिता की बारीकियों के बारे में बता रहे थे. उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक साधारण कैमरे या मोबाइल कैमरे से फोटो ली जाये जोकि अच्छी और उपयोगी हो, फोटो लेने से पहले प्रकाश का विशेष ध्यान रखें क्योंकि प्रकाश की अनुपस्थिति में ली गयी फोटो साफ़ नहीं आती है. 

बाबी रमाकांत ने आगे बताया कि यदि आप फ्लैश  कैमरे का प्रयोग कर रहे हैं तो लांग शाट या किसी प्रकाश वाली वस्तु की फोटो लेते समय फ्लैश बंद कर दें. वरना लांग शाट की फोटो में आगे वाली वस्तु की फोटो तो साफ़ आएगी लेकिन पीछे की साफ़ नहीं आएगी, क्योंकि फ्लैश की लाइट  दूर तक नहीं जा सकती है, और प्रकाश वाली वस्तु, जैसे दिये या फिर रंगीन प्रकाश से सजे घर की फोटो में फ्लैश के कारण प्रकाश के आसपास की चीज़ें तो दिखाई देंगी लेकिन प्रकाश वाली वस्तु नहीं आएगी.

एक अंग्रेजी कहावत  है "One photo is better than 100 words." इसी दिशा में अपनी बात को बढ़ाते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार 2008 द्वारा पुरुस्कृत बाबी रामकान्त ने बताया क़ि जब कोई फोटो लें तो हमेशा ध्यान रखें की आप चिन्हित किस बात को कर रहे हैं, और उसकी एक से अधिक फोटो लें. अलग -अलग कोण से फोटो लेना भी अच्छा रहता है. उन्होंने कैमरे में मौजूद नाईट मोड का प्रयोग करना भी बताया और कहा कि इसके प्रयोग से भी अच्छी फोटो ली जा सकती है. 

बाबी रमाकांत "नागरिकों का स्वस्थ लखनऊ " द्वारा आयोजित एक ग्रीष्म शिविर में "नागरिक पत्रकारिता" विषय पर बोल रहे थे.  

(प्रस्तुत लेखक सी.एन.एस. द्वारा आयोजित छः दिवशीय  "अधिकार व दायित्व "  शिविर में प्रशिक्षित एक प्रशिक्षार्थी नदीम सलमानी  द्वारा  लिखा  गया हैं)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें